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आज सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे येदियुरप्पा, BJP सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत से 8 सीट दूर

चुनाव के नतीजे आ गए हैं. लेकिन किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदुरप्पा ने आज सुबह साढे दस बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है. बैठक के बाद, येदुरप्पा विधायक दल के नेता चुने जाने की जानकारी राज्यपाल को देंगे और सरकार बनाने का आधिकारिक दावा पेश करेंगे.

राज्यपाल के पाले में है गेंद

वहीं, एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस की बैठक भी आज है. जेडीएस कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर रही है. बता दें कि कांग्रेस को 78 सीटें मिली है वो दूसरे नंबर की पार्टी बनी है. जबकि जेडीएस को सिर्फ 38 सीटें मिली हैं. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है और देखना होगा कि वह सरकार बनाने का न्योता किसे देते हैं.

हम सबसे बड़ी पार्टी, मौका मिले- येदियुरप्पा

बीएस येदियुरप्पा ने कहा है, ‘’हम सबसे बड़ी पार्टी हैं और ऐसे में सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. बीजेपी 100 प्रतिशत सरकार बनाएगी और विधानसभा में बहमत भी साबित करेगी.’’

पहली प्राथमिकता सरकार का गठन, शर्तों पर फैसला बाद में- सिद्धारमैया

उधर, राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मीडिया से मुखातिब सिद्धारमैया ने कहा, कांग्रेस ने बिना शर्त जेडीएस को समर्थन दिया है. सिद्धारमैया ने कहा कि गठबंधन की शर्तों पर बाद में फैसला होगा. पहली प्राथमिकता सरकार का गठन है. सिद्धारमैया ने दावा किया कि उनके पास मैजिक नंबर है.  उन्होंने कहा कि दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के साथ है

बता दें कि अगर कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन का दावा चल गया तो जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम भी बन सकते हैं.

कौन हैं कुमारस्वामी?

कुमारस्वामी साल 2006 से 2007 तक कर्नाटक के सीएम रह चुके हैं. कुमारस्वामी रामानगरम से तीन बार विधायक रह चुके हैं. रामानगरम सीट कुमारस्वामी का गढ़ मानी जाती है. साल 2013 में कुमारस्वामी रामानगरम से 40 हजार वोटों से जीते थे. कुमारस्वामी दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं.

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उन्नाव केस: BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने पीड़िता के साथ किया था रेप, CBI ने की पुष्टि

 उन्नाव केस की जांच कर रही सीबीआई ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे रेप के आरोपों की पुष्टि कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने आरोपों की पुष्टि कर दी है. वहीं दुष्कर्म में शशि सिंह की भूमिका पर सीबीआई ने कहना है कि शशि सिंह ही पीड़ित को नौकरी दिलाने का झांसा देकर कुलदीप सिंह के घर लाई थी. 4 जून 2017 को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह ने उसके साथ रेप किया था और 11 जून को पीड़िता को तीन युवकों ने अगवा किया और कार में गैंगरेप किया. सूत्रों का कहना है कि अब सीबीआई स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रही है.

बयानों से नहीं पलटी पीड़िता
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किए. कोर्ट के समझ भी उसने वहीं बयान दिए जो उसने पुलिस को अपनी शिकायत में दिए थे.

सीबीआई ने आमने-सामने बैठकर की थी जांच
आपको बता दें कि उन्नाव रेप केस की जांच कर रही सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का आमना-सामना कराया था. पीड़िता ने पिछले वर्ष चार जून को विधायक द्वारा रेप किए जाने का आरोप दोहराया लेकिन, विधायक इससे इनकार करते रहे. सीबीआई के अफसरों ने दोनों से अलग-अलग हुई पूछताछ के तथ्यों को भी सामने रखा और एक-दूसरे से पुष्टि की.

सेंगर को सीतापुर जेल में किया गया शिफ्ट
आपको बता दें, बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मंगलवार (8 मई) को सुबह उन्नाव जेल से सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर आरोपी विधायक को उन्नाव जेल से शिफ्ट करने की याचिका दायर की थी, जिसके बाद ये फैसला लिया गया.

अब तक मामले में क्या-क्या हुआ

  • रेप पीड़िता ने 11 जून 2017 को कोर्ट में शिकायत दर्ज की.
  • कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए और आरोपी अवधेश तिवारी, शुभम तिवारी व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, इस मुकदमे में विधायक और शशि सिंह का नाम नहीं था.
  • 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने केस वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया.
  • जब पिता द्वारा इनकार किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और फर्जी मुकदमा लिखवाकर उसे जेल भिजवा दिया.
  • 8 अप्रैल, 2018 को पीड़िता ने परिवार समेत सीएम आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की.
  • 9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई.
  • 10 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार किया गया.

केस में अब आगे क्या होगा

  • विधायक कुलदीप पर रेप के आरोपों की पुष्टि हुई.
  • अब आरोपी विधायक पर शिकंजा कस सकता है.
  • बीजेपी भी विधायक कुलदीप के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
  • ये भी संभव है कि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे.
  • सीबीआई अब मामले में पूरी जांच करने के बाद रिपोर्ट सौंपेगी.
  • सीबीआई की रिपोर्ट पर कोर्ट मामले में फैसला सुनाएगा.
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सोशल मीडिया पर छाए कांग्रेस नेताओं के ‘छोले-भटूरे’, लोगों ने ली जमकर चुटकी

देशभर में दलितों पर कथित अत्याचारों के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर अनशन कर रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेताओं के एक तस्वीर ने पार्टी के अनशन की पोल खोल कर रख दी। भाजपा नेता हरीश खुराना द्वारा जारी तस्वीर में अजय माकन, हारुन युसुफ, अरविंदर सिंह लवली अनशन से ठीक पहले छोले-भटूरे का आनंद लेते दिखाई दिए। देखते ही देखते यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई जिसके बाद कांग्रेस की खूब किरकिरी हुई। यूजर्स राहुल गांधी के जमकर मजे ले रहे हैं। ट्विटर पर भी #RahulOnAFarce काफी ट्रेंड कर रहा है। लोगों ने कुछ इस तरह ली कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी की चुटकी

Pradeep Mahaur@Pradeep_Mahaur

Rahul is not only hipocrite but a plaster saint febricated by
A new drama of fasting for few hours is exposed where he himself is reaching late for the event.

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Geeta@GeetaYahoo

RaGa~~ Mummy,Karti bhaiya wanted to order from Swiggy in jail
What should I order from them after I break my fast??
Sonia~~So much food after a 3 hour “Fast” ??.Baap re!!

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Modi Bharosa@ModiBharosa

After Proper Lunch

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Hanumaan Bhakt@pss1987

I would love to know which leader says he will embark on a fast and does not reach the venue till 12:45!
True to his style, @RahulGandhi Ji obviously woke up late.

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Know The Nation@knowthenation

When Batman found out about @RahulGandhi‘s ‘fast’..

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Know The Nation@knowthenation

And the cycle repeats !
Suggestion: Please eat gluten free bhature, even when you are fasting on Chole Bhature

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RUPESH Singh

??

@rupeshsingh10

Rahul Gandhi is seriously thinking about a Lunch Break during his Five Hour long Fast.

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kUndaN pAthaK

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@kundanpathakk

जी की इच्छा थी कि
1 दिन कोई देश का
प्रथम नागरिक(राष्ट्रपति)बने ने उनकी इच्छा पूरी की
बदले मे दलित गाली दे रहे है

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और को राष्ट्रपति बनाये जाने से नाराज़ आज की नौटंकी कर
उनका उड़ा रहे
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Pooja Goswami@PoojaGoswami_01

ये कौनसा तरह का उपवास है भाई…

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11 AM से 4PM
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पप्पू नाश्ता करके आया है और रात मे खाना भी खाएगा.. वाह रे जनेऊधारी हिंदू इनको उपवास का मतलब तक नहीं पता.. @RahulGandhi तुमको ऐसे idea’s देता कौन है..??
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Argumentative Indian@Public_RTI

Sounds more like Part Harmony among Opposition

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Vikash Singh@VikashKrSinghh

.@RahulGandhi before going to Rajghat

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Saurabh Jha@saurabhjha12

Sir ji carrying good packets for 4 pm “fast” breaking of

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IndiaFirst-OnlyNaMo@Ashok24886689

Pappu is a curse for India like their fore fathers

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Dhans Thapa@Kshatriya_Thapa

Bas neta hone ha bhjram faia sakta hai @RahulGandhi , lekin uska dharm kabhi nahi nibha sakta

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Vinit malviya@vinit_bjp

अनशन से पहले ज्यादा खाना ठीक नहीं @RahulGandhi

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CM केजरीवाल को मानहानि मामले में लगा जोर का झटका

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया। हालांकि दूसरी ओर कोर्ट ने दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 11 जुलाई की तारीख तय की है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने याचिका दायर निचली अदालत में चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। मानहानि की यह शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने 2012 में दायर की थी।

जस्टिस एके पाठक ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। उस फैसले के मुताबिक सांसद व विधायकों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिये।

याचिका पर जिरह करते हुये वरिष्ठ सुधीर नंदराजोग ने कहा कि मानहानि की यह शिकायत दायर करने का पवन खेड़ा को कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी मानहानि नहीं हुई है। इसलिये इस मामले को खारिज किया जाना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पूर्व राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने शिकायत दायर कर कहा था कि एक टीवी शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अक्तूबर 2012 में बिजली की बढ़ी दरों पर बोलते हुये ऐसी बातें कही जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री की बदनामी हुई थी।

पटियाला हाउस अदालत ने इस शिकायत पर अरविंद केजरीवाल को 31 जनवरी 2013 को बतौर आरोपी समन जारी किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने 28 अक्तूबर 2013 को आरोप तय किये थे।

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हाफिज सईद का राजनीतिक दल आतंकी संगठन घोषित; यूएस की कार्रवाई का स्वागत- भारत

अमेरिका ने मंगलवार को मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। यह मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राजनीतिक संगठन है। ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पाकिस्तान में एमएमएल को एक राजनैतिक दल के रूप में मान्यता देने की कवायद चल रही थी। वहीं, भारत ने अमेरिका की कार्रवाई का स्वागत किया है।

एमएमएल के 7 मेंबर भी आतंकी घोषित
– द यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही एमएमएल और तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर (टीएजेके) को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया गया।
– इनके अलावा एमएमएल के 7 सदस्यों को लश्कर के लिए काम करने की वजह से आतंकी घोषित किया गया है।

पाकिस्तान ने नहीं की प्रभावी कार्रवाई

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत यूएस की कार्रवाई का स्वागत करता है। मिल्ली मुस्लिम लीग लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। यह लीग आतंकी संगठन के लिए काम कर रही थी। अमेरिका की कार्रवाई भारत के दावे को पुख्ता करती है कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।”

हाफिज जारी कर चुका अपना घोषणापत्र
– हाफिज ने 23 मार्च को एमएमएल का घोषणा पत्र जारी कर दिया था। मिल्ली मुस्लिम लीग को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया था।

17 साल पहले लश्कर घोषित किया गया था आतंकी संगठन
– लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 के दशक में हुआ था। वह 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
– अमेरिका ने लश्कर को 26 दिसंबर 2001 में विदेशी और वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके मुखिया हाफिज सईद को भी वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था।

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भारत बंद की सफलता का श्रेय लेने उतरी कांग्रेस, बोले “सबसे पहले उठाई आवाज”

दलित उत्पीड़न कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई का श्रेय कांग्रेस खुद लेने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस ने भारत बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए दावा किया कि सबसे पहले उसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राजनीतिक मोर्चाबंदी करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर बंद के दौरान हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के पास अधिकार है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद कर दे। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर जो फैसला दिया था उसे संसद में रद किया जा सकता था। सरकार कदम बढ़ाती को सभी दल साथ होते, लेकिन चुप्पी छाई रही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देती तो सोमवार को बंद के दौरान हिंसा नहीं होती।

अब तक कांग्रेस पुनर्विचार याचिका की बात कहती रही थी। अब सरकार ने पुनर्विचार याचिका पेश कर दी है तो कांग्रेस ने संसद के जरिये इसे रद करने का दबाव बढ़ाया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, सिर्फ पुनर्विचार याचिका से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसकी सुनवाई समान बेंच में होती है। इसके लिए सरकार को क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी चाहिए या फिर संसद बजट सत्र के बचे हुए चार दिनों में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करना चाहिए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने देश में दलित उत्पीड़न कानून लागू करने और उसे और मजबूत करने का श्रेय भी लेने की कोशिश की। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलित उत्पीड़न कानून राजीव गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और 2014 में संप्रग सरकार ने संशोधन का अध्यादेश लाकर इसे और कड़ा कर दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून के दुरुपयोग के सवाल को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग तो किसी भी कानून हो सकता है, लेकिन इसका उपाय उस कानून को खत्म करना नहीं होता। उनके अनुसार दलित उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के मामले 2-3 फीसद से अधिक नहीं हैं।

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SC/ST एक्ट में बदलाव को लेकर विरोध में हिंसक प्रदर्शन, 8 की मौत; कई शहरों में कर्फ्यू

अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एसएसी/एसटी एक्ट) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने देशभर में विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुअा। कई जगह तोड़फोड़ व अगजनी की घटनाएं सामने अाई है। वहीं मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान 5 लोगों की मौत हो गई है।

कई जगह ट्रेनें रोकी गई हैं। इसके अलावा कुछ शहरों में झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एससी/एसटी एक्ट में कई बदलाव हुए थे। हालांकि, सरकार ने अब इस मामले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

पुनर्विचार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
केन्द्र सरकार ने एससी एसटी एक्ट में तत्काल एफआइआर और तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। सरकार ने कोर्ट से याचिका पर खुली अदालत में बहस और सुनवाई की मांग की है। याचिका में सरकार ने तर्क दिया कि फ़ैसले से कानून का उद्देश्य कमज़ोर होगा। पुनर्विचार याचिका मे सरकार ने अभियुक्त के लिए अग्रिम जमानत के रास्ते खोलने का विरोध किया और कहा कि इसका अभियुक्त दुरुपयोग करेगा और पीड़ित को धमका सकता है, साथ ही जांच भी प्रभावित कर सकता है। सरकार ने कहा कि इस कानून मे अभियुक्त को अग्रिम जमानत का हक न देने से अनुच्छेद 21 में उसे मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन नही होता। एससीएसटी कानून में ये 1973 मे नये अधिकार के तौर पर जोड़ा गया था।उधर एससी एसटी पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आल इंडिया फ़ेडरेशन आफ एससी एसटी आर्गनाइजेशन की ओर से आज सुप्रीम कोर्ट मे अलग से नई याचिका दाखिल की गई, जिसमें कोर्ट से फ़ैसले पर रोक लगाने और मामले पर विचार कर फ़ैसले मे बदलाव की मांग की गई है। याचिका पर वकील मनोज गोरकेला ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ से जल्द सुनवाई की मांग की। लेकिन कोर्ट ने जल्द सुनवाई की मांग ठुकराते हुए कहा कि मामले पर नियमित क्रम मे ही सुनवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक की मौत, लगाया गया कर्फ्यू

मुरैना में विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। हिंसा के उग्र होने के बाद यहां कर्फ्यू लगा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश के मुरैना शहर में जमकर हिंसा हुई। यहां विरोध प्रदर्शन के दौरान हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने की वजह से हालात बेकाबू हो गए। मुरैना में बंद समर्थकों ने बस स्टैंड, बैरियर चौराहे पर पथराव किया। इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा तो मुरैना रेलवे स्टेशन पर उपद्रव शुरू हो गया। बंद समर्थकों ने यहां पटरियों पर डेरा जमा लिया, जिसके बाद ट्रेनों की आवाजाही थम गई है। मीडिया खबरों के मुताबिक, ग्‍वालियर में भारत बंद के दौरान हुई हिंसक झड़पों में 19 लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से 2 की मौत हो गई है। आईजी कानून एवं व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने बताया कि मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अभी तक 5 लोगों की मौत हो गई है।

दिल्ली में पुलिस बल पर पथराव, ठप हुए राजमार्ग

एसटी-एसी एक्ट 1989 में संशोधन के खिलाफ दिल्‍ली एनसीआर में भारत बंद ने हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुई। इससे निपटने के लिए पुलिस ने हल्‍के बल का प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने एनएच 24 और दिल्ली-देहरादून हाइवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर जाम लगा दिया। इससे कई राजमार्ग पर यातायात व्‍यवस्‍था पूरी तरह से ठप हो गई। गाजियाबाद में रेलवे फटकी पर जाम के कारण ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है।

बिहार में दिन चढ़ने के साथ बढ़ता जा रहा भारत बंद का असर
बिहार में यह बंद असरदार दिख रहा है। बिहार में पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है। बंद के कारण जगह-जगह रेल व सड़क यातायात प्रभावित हैं। बंद समर्थकों ने पटना व हाजीपुर के बीच उत्तर व दक्षिण बिहार की लाइफलाइन ‘महात्मा गांधी सेतु’ को जाम कर दिया है। इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। बंद के दौरान वैशाली में एक कोचिंग संस्‍थान को बंद कराने के दौरान छात्रों से बंद समर्थकों की भिड़त हो गई। इसमें दर्जनों छात्र घायल बताए जा रहे हैं। बंद समर्थक पटना सहित राज्‍य के विभिन्‍न जगहों पर एंबुलेंस सहित आवश्‍यक सेवाओं की गाडि़यों को भी रोक रहे हैं।

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। राजस्‍थान के डीजीपी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अलवर में फायरिंग हुई, जिसमें एक शख्‍स की मौत हो गई है। कुछ क्षेत्रों में पत्‍थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। हिंसक प्रदर्शन कर रहे काफी लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई और धारा 144 लगा दी गई है, ताकि हालात ज्‍यादा न बिगड़ें। बाड़मेर में दलित और पुलिस में झड़प हो गई है। इस झड़प में 25 लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू के गोले दागे। दूसरी तरफ करणी सेना भी दलितों के प्रदर्शन के विरोध में सड़कों पर उतर आई है। जिसकी वजह से दोनों गुटों के बीच भिड़ंत हो गई। सड़क पर दोनों गुट भिड़ गए। बाड़मेर में वाहनों को आग लगा दी गई।

उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में हालात बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं। मुजफ्फरनगर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के मरने की सूचना है। मृतक का नाम अमरीश निवासी गादला, थाना भोपा है। इसकी बॉडी जिला अस्पताल लाई गई है। रेलवे के कर्मचारी प्रताप की कमर में भी गोली लगी है, उसकी हालत भी गंभीर बनी हुई है। उत्‍तर प्रदेश के डीआइजी ने बताया कि प्रदेश के सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्‍से में ही हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें 2 शख्‍स की मौत हो गई है और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश के 90 प्रतिशत हिस्‍से में शांति का माहौल है। प्रदर्शनकारियों से सख्‍ती से निपटा जा रहा है। पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया। हम विश्‍वास दिलाते हैं कि किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। आजमगढ़ में एक बस पर हमला कर दिया और उसमें आग लगा दी गई। मेरठ तथा आगरा व मैनपुरी में दलित संगठन से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए हैं। कई जगह पर प्रदर्शनकारी ट्रेन के सामने खड़े हो गए हैं। एससी-एसटी एक्ट पर फैसले का आगरा में भी कई संगठनों ने काफी विरोध किया है। बसपा के कार्यकर्ता यहां शहर के सभी बाजारों में भीड़ जबरन बाजार बंद करा रही है। यह लोग विरोध में लाठी-डंडे के साथ सड़क पर उतरे और दुकानों में काफी लूटपाट करने के साथ ही महिलाओं से भी छेड़छाड़ की। एंबुलेंस में फंसे मरीजों के साथ अभद्रता की गई। शाहगंज क्षेत्र के बारह खंभा के पास लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इसके साथ ही यहां एत्माद्दौला के टेढ़ी बगिया में चक्का जाम किया गया है। करीब एक घण्टे से जाम के चलते रामबाग तक बड़ी संख्या में वाहनों की कतार लग गई है। जगह-जगह पर इसको लेकर प्रदर्शन हो रहा है। इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है।

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद दलित संगठनों के दो अप्रैल को भारत बंद के मद्देनजर पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों की सरकारों ने चौकसी कड़ी कर दी है। पंजाब मे सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय व बैंक सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद करने के आदेश हैं।

पंजाब में दलितों के बंद का मिलाजुला असर
एससी-एसटी एक्‍ट संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनों द्वारा किए गए बंद के आह्वान का पंजाब के अधिकांश इलाकों में मिलाजुला असर दिख रहा है। जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, पटियाला सहित अन्य जिलों में दलित संगठनों के लोग सक्रिय हैं। संगठनों के कार्यकर्ता तड़के से ही सड़कों पर उतर आए। अमृतसर में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने सचखंड एक्सप्रेस रोक दी, जिससे यात्री परेशान रहे। किसी भी आशंका से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के क़ड़े इंतजाम किए हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने कल ही प्रदेश में सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालयों को सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही कल रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद कर दी गई थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के 12 हजार अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया है।

झारखंड में पुलिस ने किया लाठी चार्ज
रांची में बंद समर्थक सड़क पर उतर चुके हैं। दुकानों को बंद करवाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, रांची के आदिवासी हॉस्टल के बंद समर्थकों ने जमकर उपद्रव किया। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और उन पर लाठी चार्ज किया।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया था। कोर्ट ने कहा था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच हो। कोर्ट ने कहा था कि केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है।

राजद, सपा, कांग्रेस और शरद का समर्थन

सोमवार को बुलाए गए भारत बंद को बिहार में राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। दलित संगठनों ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में सोमवार को आहूत भारत बंद का समर्थन किया है।

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सांसद की बेटी ने विदेश में नौकरी को ठुकरा चुनी देश सेवा, आर्मी ज्‍वाइन की

पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. निशंक की बेटी डॉ. श्रेयशी पोखरियाल ने सेना में बतौर अफसर आर्मी मेडिकल कोर ज्वाइंन किया। वे रुड़की के मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देंगी। शनिवार को कमांडेंट और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में डॉ. श्रेयशी ने विधिवत रूप से सेना ज्वाइंन की।

बेटी के सेना ज्वाइन करने पर डॉ. निशंक ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि अभी तक हमारे परिवार में सेना में कोई नहीं था। अब बेटी ने सेना में जाकर मुझे गर्व महसूस करवाया है। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक क्षेत्र से हैं और शुरुआत से ही देशभक्ति के गीत और कविताएं लिखते रहे हैं। ऐसे में हमेशा से उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार से भी कोई सेना में जाए।

आज उनकी इस इच्छा को बेटी ने पूरा कर दिखाया है। उन्हें इस बात को लेकर अपनी बेटी पर और गर्व है कि उसे मॉरीशस में एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल यूनिवर्सिटी में उप निदेशक का ऑफर मिला था, लेकिन बेटी ने उसे अस्वीकार कर सेना को चुना। डॉ. निशंक बताते हैं कि उनकी बेटी श्रेयशी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन करीब दो साल पहले उसने सेना में जाने की ठानी।

वे बताते हैं कि लगभग दो साल पहले वे परिवार के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। उसी दौरान श्रेयशी ने काफी कम समय में पैदल यात्रा पूरी कर ली। ऐसे में उन्होंने श्रेयशी को कहा कि वे बेहद कर्मठ है और सेना को ऐसे ही कर्मठ और जोशीले लोगों की जरुरत है। डॉ. निशंक कहते हैं कि मुझे लगता है कि श्रेयशी के मन में यह बात घर कर गई। उसके बाद ही वह कमीशन में बैठी और सफल हो गई। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि अब श्रेयशी सेना में अपनी सेवाएं देकर देश सेवा करेगी।
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Congress poster spotted in Cambridge Analytica CEO Nix’s London office

Though the Congress has denied it has any links with Cambridge Analytica, the company accused of stealing Facebook data to influence elections, a documentary released last year by journalist and tech blogger Jamie Bartlett throws up an image the Congress may have hard time to explain.

The Persuasion Machine, the last of the two-part documentary series for the BBC, ‘Secrets of the SIlicon Valley’, shows Bartlett meeting Cambridge Analytica’s now-suspended CEO Alexander Nix in his London office. As Bartlett enters Nix’s room, he stands up and greets him. Right behind Nix, on the wall, is a poster showing the ‘hand’ symbol of the Congress party. Below the hand is written “Congress” in bold letters. The poster carries the slogan ‘Development for all’.

Bartlett’s documentary probes the role of technology in the election campaign of US President Donald Trump. Nix is one of the many people he interviews. Though Nix says nothing about the operations of Cambridge Analytica in India and talks about only the Trump campaign, the Congress poster on the wall behind him looks like proud showcasing of a big client.

In ‘The Persuasion Machine’, Bartlett narrates how Silicon Valley has opened a new frontier—controlling political expression and behaviour of the masses. “It was the biggest political earthquake of the century. But just how did Donald Trump defy the predictions of political pundits and pollsters?” begins Bartlett.

BJP Minister Smriti Irani shares this picture from her official Twitter handle and disclose this important news with mentioning economictimes article.

After Nix explains how the company created psychographic profiles of voters, Bartlett asks, “Where did all the information to predict voters’ personalities come from?” Nix says,”Very originally, we used a combination of telephone surveys and then we used a number of online platforms for gathering questions. As we started to gather more data, we started to look at other platforms such as Facebook, for instance.”

When Bartlett wonders if some people would find it a little bit creepy to predict a voter’s personality to persuade him, Nix says, “No, I can’t. Quite the opposite. I think that the move away from blanket advertising, the move towards ever more personalised communication is a very natural progression. I think it is only going to increase.”

Justifying the company using personal data people put in the public domain, Nix gives the example of a supermarket loyalty card where people get points and the company gathers the data on consumer behaviour. But Bartlett is puzzled. “I mean, we are talking about politics and we’re talking about shopping. Are they really the same thing?” he asks. Nix replies, “The technology is the same. In the next 10 years, the sheer volumes of data that are going to be available, that are going to be driving all sorts of things including marketing and communications, is going to be a paradigm shift from where we are now and it’s going to be a revolution, and that is the way the world is moving. And, you know, I think, whether you like it or not, it is an inevitable fact.”

For more than a week, the Congress and the Bharatiya Janata Party (BJP) have traded charges, accusing each other of having been clients of Cambridge Analytica. Christopher Wylie, the Cambridge Analytica whistleblowerat the heart of the Facebook privacy scandal, told British lawmakers yesterday that he “believes” Congress was the company’s client.

The Congress denies it has anything to do with Cambridge Analytica. However, Alexander Nix was not shy of displaying the Congress poster in his own office.

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यूपी: कैराना लोकसभा उप चुनाव में विपक्षी एकता की होगी परीक्षा

उप चुनाव से परहेज करने वाली बसपा ने पहली बार फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उप चुनाव में सपा का समर्थन किया था. बसपा पहली बार अब उप चुनाव लड़ने पर भी विचार कर रही है और वह सीट है यूपी की कैराना. हालांकि रालोद के चौधरी अजित सिंह भी इस सीट पर अपने बेटे जयंत सिंह के लिए  निगाह टिकाये हुए हैं. गौरतलब है कि बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद से यह लोकसभा सीट खाली है. हालांकि अभी तक इस सीट के उप चुनाव की घोषणा नही हुई है लेकिन विपक्ष इसकी तैयारी में जुट गया है. बहरहाल, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यूपी के कैराना लोकसभा उप चुनाव में भी दिखेगा विपक्ष का याराना. कैराना लोकसभा उप चुनाव में विपक्षी एकता की परीक्षा होगी.

क्यों है मायावती और अजित सिंह की नजर

बसपा सुप्रीमो मायावती की इस सीट पर नजर का जहां तक सवाल है, इसके पीछे दो मकसद है. पहला, 2019 लोकसभा चुनाव से पहले बसपा अपनी तैयारी को अच्छी तरह परख लेना चाहती है. दूसरा, बसपा यह भी परख लेना चाहती है कि सपा या रालोद अपना वोट बसपा के पक्ष में ट्रांसफर करा पाते हैं या नहीं. जहां तक बसपा का सवाल है तो अपना मास वोट ट्रांसफर कराने में इसका कोई जोड़ नही है जबकि सपा व रालोद अपने विधायकों तक का वोट ट्रांसफर नहीं करा पाते हैं. चौधरी अजित सिंह का जहां तक सवाल है तो पिता-पुत्र दोनों ही किसी भी सदन के सदस्य नही हैं. चौधरी अजित सिंह अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहते. इसके अलावा इस सीट के जरिये 2019 की स्थिति को भी मजबूत करना चाह रहे हैं.

अजित सिंह का उल्टा पड़ता दांव

राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया अजित सिंह ने बसपा प्रमुख मायावती को खुश करने के लिए ही राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक सहेन्द्र रमाला को बाहर का रास्ता दिखा दिया है लेकिन उनका यह दांव भी उलटा पड़ता दिख रहा है. पार्टी से निकाले गए विधायक ने अजीत सिंह पर ही सीधा जुबानी हमला करते हुए अपने बेटे जयंत सिंह के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया है. रमाला ने आरोप लगाया है कि राज्यसभा चुनाव में उन्होंने जो कुछ किया वह अजीत सिंह के कहने पर किया. विधायक का आरोप है कि अजित सिंह पहले उन्हें मोहरा बनाकर बीजेपी से सांठगांठ की कोशिश कर रहे थे और अब बसपा प्रमुख मायावती का समर्थन हासिल करने के लिए उन्हें एक बार फिर राजनीतिक मोहरा बनाया गया है.