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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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सरकार ने चीनी पर खत्म की एक्सपोर्ट ड्यूटी, इंडस्ट्री को मिली राहत

सरकार ने डॉमेस्टिक मार्केट में चीनी की गिरती कीमतों को थामने के लिए उस पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। सरकार के इस फैसले से शुगर इंडस्ट्री को खासी राहत मिली है, जो इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है। इस संबंध में सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार ने कहा कि ड्यूटी खत्म होने से सरकार को मौजूदा एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर सालाना 75 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

 

इंडस्ट्री ने की थी डिमांड
इंडस्ट्री ने डॉमेस्टिक सप्लाई को थामने और इस सीजन रिकॉर्ड आउटपुट को देखते हुए कीमतों को सही लेवल पर बनाए रखने में मदद करने के लिए ड्यूटी हटाने की मांग की थी। चीनी पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को हटाने की मांग को लेकर खाद्य मंत्रालय ने दो बार अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी। चीनी मिलों के ऑर्गनाइजेशन ने भी  सरकार से एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिन पहले कहा था कि रिकॉर्ड प्रोडक्शन को देखते हुए उन्होंने फरवरी में चीनी का निर्यात शुल्क घटाने की अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी है।

 

इस साल चीनी के रिकॉर्ड प्रोडक्शन की उम्मीद
चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में इस साल चीनी का उत्पादन 2.95 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जो गत साल से 92 लाख टन ज्यादा है। चीनी के तीन प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में क्रमश: 93.8 लाख टन, 84.3 लाख टन और 35.1 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है। पिछले शुगर सीजन 2016-17 (अक्टूबर-सितंबर) में देश में 2.03 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

 

किसानों का बकाया हुआ 20 हजार करोड़ रु
इस्मा ने कहा कि चीनी का स्टॉक बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमत घटकर काफी कम हो गई है जिससे मिलों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। इस्मा के मुताबिक, जनवरी तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपए थी जो इस महीने के अंत तक बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।

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देशभर के लाखों छात्रों के लिए 10वीं में पास होना हुआ आसान, बदला गया है यह नियम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के पास होने का मानदंड बदल दिया है। अब आंतरिक व बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को मिलाकर 33 फीसद अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी पास हो जाएंगे।

पहले विद्यार्थियों को पास होने के लिए आंतरिक व बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में अलग-अलग 33 फीसद अंक प्राप्त करने होते थे। शैक्षणिक सत्र 2017- 18 की दसवीं की बोर्ड परीक्षा में विभिन्न मूल्यांकन पृष्ठभूमि से आए परीक्षार्थियों की परिस्थतियों को देखते हुए सीबीएसई की परीक्षा समिति ने 16 फरवरी को हुई बैठक में यह फैसला लिया है। हालांकि, पास होने का यह मानदंड सिर्फ इसी सत्र की बोर्ड परीक्षा के लिए लागू रहेगा।

सीबीएसई अध्यक्ष अनिता करवल द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार वर्ष 2018 में परीक्षा दे रहे दसवीं के विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव किया गया है। इसके तहत 20 अंक वाली आंतरिक परीक्षा व 80 अंक वाली विषय परीक्षा के अंकों को मिलाकर 33 फीसद अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी पास माने जाएंगे।

यह नियम पांचों मुख्य विषयों के लिए लागू होगा। अगर किसी विद्यार्थी ने अतिरिक्त विषय के तौर पर छठा या सातवां विषय भी लिया है, तो उन विषयों के पास होने का मानदंड भी अन्य पांचों विषयों की तरह ही रहेगा।

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कंस्ट्रक्शन सेक्टर में FDI से सस्ता होगा घर खरीदना? हो सकते हैं ये फायदे भी

मोदी सरकार ने बुधवार को सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई  को मंजूरी दे दी है. यह मंजूरी ऑटोमैटिक रूट से निवेश को दी गई है. इसका मतलब ये है कि अब विदेशी कंपनियों को इन दोनों क्षेत्रों में निवेश के लिए केंद्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक से निवेश से पहले अप्रूवल नहीं लेना पड़ेगा.

कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने का फायदा जहां सस्ते घरों के तौर पर मिल सकता है. वहीं, इसका एक खतरा प्रॉपर्टी के दामों के बढ़ने के तौर पर भी सामने आ सकता है.

रियल इस्टेट में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है. हालांकि इसके बाद भी भारत में इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों का निवेश बड़े स्तर पर नजर नहीं आया है. अब  जब  सरकार ने कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दे दी है, तो विदेशी कंपनियों के भारत की तरफ देखने की उम्मीद बढ़ गई है.

घर खरीदना हो सकता है सस्ता

कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी देने का फायदा आम आदमी को सस्ते घर के तौर पर मिल सकता है. सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ने से देश में स्पर्धा का माहौल तैयार हो सकता है. ऐसे में हर कंपनी अपने ग्राहकों को कम दाम में बेहतर उत्पाद देने की कोश‍िश करेगी. इसका फायदा ये होगा क‍ि आम लोगों को कम दाम में बेहतर सुविधाओं के साथ अच्छे घर मिल सकते हैं.

बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को मिलेगी सांस

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी मिलने से देश में निवेश बढ़ेगा. इससे बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को सहारा मिलेगा और इन्हें फिर से शुरू करने में मदद मिल सकती है. विदेशी कंपनियां घरेलू कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ मिलकर काम कर सकती हैं. इससे बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को रफ्तार मिल सकती है और घर मिलने में होने वाली देरी पर भी रोक लग सकती है.

बढ़ेगा रोजगार?

कंस्ट्रक्शन सेक्टर देश की जीडीपी में 8 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है. दूसरी तरफ, इस सेक्टर में सबसे ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि यह क्षेत्र रोजगार देने में भी आगे रहता है. नेशनल रियल इस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) का कहना है कि 2022 तक यह सेक्टर 7.5 करोड़ रोजगार पैदा करेगा. इस सेक्टर में विदेशी निवेश को 100 फीसदी मंजूरी मिलने से यह आंकड़ा हासिल करने में मदद मिल सकती है.

उल्टा भी हो सकता है असर

केंद्र सरकार ने 2005 में जब रियल इस्टेट में पहली बार विदेशी निवेश को मंजूरी दी थी, तो इससे प्रॉपर्टी के दाम में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. दरअसल विदेशी कंपनियों ने भारत में निवेश की शुरुआत तो की, लेकिन उनका फोकस लग्जरी और सुपर लग्जरी सेगमेंट पर रहा. उन्होंने किफायती घर देने पर कोई फोकस नहीं रखा और सिर्फ मुंबई-दिल्ली जैसे बड़े शहरों में लग्जरी प्रॉपर्टी तैयार करने पर अपना फोकस रखा.

कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी तब ही फायदेमंद साबित होगी, जब विदेशी निवेश को चरणबद्ध तरीके से देश में लागू किया जाएगा और इसका फोकस लग्जरी सेगमेंट के साथ ही उन कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर भी हो, जो मध्यमवर्गीय लोगों के लिए किफायती घर दिलाने के लिए अहम हैं.

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2 दिन में 65% फीसद उछल गया आरकॉम का शेयर, कर्ज घटाने की खबर का असर

मंगलवार को अनिल अंबानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिलायंस कम्युनिकेशन पर बढ़ते कर्ज को घटाने के लिए शेयरधारकों  के सामने अपनी स्ट्रैटजी रखी। अनिल अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी जियो के साथ 4G स्पेक्ट्रम शेयरिंग करार करेगी। वहीं कंपनी के ऊपर लदे भारी भरकम कर्ज के संबंध में उन्होंने कहा, “हमारे पास कंपनी का कर्ज करने की पूरी रणनीति तैयार है और हमने इसे 45,000 करोड़ से घटाकर 6,000 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।” इस खबर के बाद रिलायंस कम्युनिकेशन के शेयर में जबरदस्त  उछाल देखने को मिला। दो  दिन  में  कंपनी का शेयर करीब 65 फीसद उछल गया।

बीएसई पर 1.30 बजे आरकॉम का प्रदर्शन
दिन के करीब 1.30 बजे बीएसई पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स के शेयर्स 32.63 फीसद के उचाल के साथ 28.29 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। इसका दिन का उच्चतम 28.58 का स्तर और निम्नतम 23.46 का स्तर रहा है। वहीं इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 41 रुपये का स्तर और निम्नतम 9.60 रुपये रहा है।

छह सत्रों में 125 फीसद उछला आरकॉम-
कंपनी की ओर से 39000 करोड़ रुपये के डेट रेजोल्यूशन प्लान की घोषणा के बाद बीते छह सत्रों में कंपनी के शेयर्स में 125 फीसद तक का उछाल देखने को मिला है। बुधवार सुबह 11 बजे आरकॉम 20.39 फीसद की बढ़त के साथ 25.68 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान शेयर 22 फीसद के उछाल के साथ 25.92 रुपये जो कि पांच महीने का उच्चतम स्तर है, पर पहुंच गया था। यह लेवल आखिरी 28 जुलाई को देखा गया था। वहीं, 18 दिसंबर से अबतक शेयर्स में 125.36 फीसद की तेजी दर्ज की गई है।

मंगलवार को 34 फीसद तक उछला आरकॉम
मंगलवार को बीएसई पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स 34 फीसद के उछाल के साथ 21 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसका दिन का उच्चतम 22.49 और निम्नतम 16.50 का स्तर रहा था।

जियो के साथ करार करेगी छोटे अंबानी की कंपनी: अनिल अंबानी ने यहां पर जानकारी दी है कि वो जियो के साथ 4G स्पेक्ट्रम शेयरिंग करार करेंगे। उन्होंने कहा कि अंडर सी केबल कारोबार के लिए उनकी कंपनी जियो के साथ समझौता करेगी। उन्होंने कहा कि एसएसटीएल (SSTL) के जरिए कंपनी को 4जी और 5जी का लाइसेंस मिला है।

भारी भरकम कर्ज पर बोले अनिल अंबानी: अनिल अंबानी ने कहा कि साल 2018 तक कंपनी का कर्ज घटकर 25,000 करोड़ रुपए तक आ जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने कर्ज को 45,000 करोड़ से घटाकर 6,000 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। अंबानी ने यहां पर यह भी कहा कि बीते कुछ महीने कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के सामने एनसीएलटी से जुड़ी कई दिक्कतें सामने आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बैंको का कर्ज इक्विटी में भी नहीं बदला जाएगा, उन्हें पूरा पैसा वापस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैंकों को एडीएजी को दिए कर्जे राइट ऑफ नहीं करने होंगे। उन्होंने बताया कि कुछ हफ्तों में लेनदारों के मामले सुलझा लिए जाएंगे।

कंपनी के कारोबार बिक्री पर बोले अंबानी: उन्होंने कहा कि कंपनी स्पेक्ट्रम, फाइबर और पॉवर कारोबार बिक्री की तैयारी कर चुकी है। कंपनी की ऐसेट सेल की रणनीति का खुलासा करते हुए अनिल अंबानी ने कहा कि आरकॉम में हिस्सा बेचने के लिए 9 ऑफर्स मिले हैं। कर्ज कम करने के लिए ऐसेट बिक्री की योजना बनाई गई है। अंबानी ने कहा कि ऐसेट बिक्री की पिछली प्रक्रिया 49 दिनों में पूरी कर ली गई थी।

घोषणा के तुरंत बाद दोपहर तीन बजे अनिल अंबानी की कंपनियों का हाल:

रिलायंस पावर: रिलायंस पावर बीएसई पर 3.85 फीसद की बढ़त के साथ 43.15 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 43.20 और निम्नतम 41.55 का स्तर रहा है। वहीं, इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 50.80 और निम्नतम 34.65 का स्तर रहा।

रिलायंस कैपिटल लिमिटेड: बीएसई पर रिलायंस कैपिटल 6.69 फीसद की बढ़त के साथ 517.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम स्तर 519 का और निम्नतम 481.45 का स्तर रहा है। वहीं इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 877.80 का और निम्नतम 397 का स्तर रहा।

रिलायंस कम्युनिकेशन्स: बीएसई पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स 34.76 फीसद के उछाल के साथ 21.98 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 22.49 और निम्नतम 16.50 का स्तर रहा है। वहीं 52 हफ्तों का उच्चतम 41 का स्तर और निम्नतम 9.60 का स्तर रहा है।

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बिजनेस स्कूलों के महज 20 प्रतिशत विद्यार्थियों को मिल पा रही है जॉब

उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने कहा कि बी श्रेणी के बिजनेस स्कूलों को अपने विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन के अनुसार महज 20 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही रोजगार मिल पा रहे हैं।

एसोचैम ने कहा कि नोटबंदी, कमजोर कारोबारी धारणा और नयी परियोजनाओं में गिरावट के कारण इन बिजनेस स्कूलों के विद्यार्थियों  के लिए रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। पिछले साल 30 प्रतिशत विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मिल जा रहे थे।

एसोचैम के अनुसार, बिजनेस स्कूलों और इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों को मिलने वाले वेतन पेशकश में भी पिछले साल की तुलना में 40-45 प्रतिशत की कमी आई है। किसी कोर्स पर 3-4 साल लगाने और लाखों रुपए खर्च करने को लेकर अब अभिभावक और स्टूडेंट्स गंभीरता से सोचने लगे हैं।

एसोचैम ने सुझाव दिया है कि रिसर्च पर ध्यान देने के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया जाए, टीचर्स को प्रशिक्षण दिया जाए, इंडस्ट्री से बेहतर तालमेल हो और स्टूडेंट्स को रोजगार पाने के योग्य बनाने पर ध्यान दिया जाए।

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85 प्रतिशत भारतीय करते हैं अपनी सरकार पर भरोसा: सर्वे

भारत में 85 प्रतिशत लोग अपनी सरकार में विश्वास रखते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आधे से ज्यादा लोग सैन्य शासन और तानाशाही का भी समर्थन करते हैं। पीईडब्लू के ताजा सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है।

38 देशों में कराए गए इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जैसे देश में जिसका सात दशकों का मजूबत लोकतंत्र का इतिहास है, वहां के 55 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तानाशाही का भी समर्थन करते हैं। यही नहीं, 27 प्रतिशत लोग शक्तिशाली नेता की कामना करते हैं।

यही नहीं भारत एशिया के उन तीन देशों में शुमार है जहां के लोग टेक्नोक्रेसी का भी समर्थन करते हैं। भारत में इनका प्रतिशत 65, विएतनाम में 67 और फिलीपींस में 62 है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे दो बड़े लोकतांत्रिक देशों में क्रमशः 53 प्रतिशत और 52 प्रतिशत लोग सैन्य शासन को अपने देश के लिए अच्छा मानते हैं। खास बात यह है कि इन दोनों ही देशों में 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग सैन्य शासन के ज्यादा पक्षधर नहीं हैं।

  • 70 फीसदी लोग चाहते हैं मोदी एक बार फिर बनें प्रधानमंत्री

  • नोटबंदी पर 90 प्रतिशत जनता पीएम के साथ, ऐप पर दिया जवाब

  • नोटबंदी सर्वेः 85 फीसद जनता PM मोदी के साथ

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अब सीरिया का सिर्फ 8 प्रतिशत हिस्सा आईएस के नियंत्रण में: रूस

खास बातें

  1. अब सीरिया का सिर्फ 8 प्रतिशत हिस्सा आईएस के नियंत्रण में: रूस
  2. आईएस के कब्जे वाले 5,841 वर्ग किलोमीटर इलाकों में कमी आई है
  3. 142 इलाकों को मुक्त कराया गया है.

रूसी सेना का कहना है कि सीरियाई क्षेत्र के आठ प्रतिशत से भी कम हिस्से पर ही इस्लामिक स्टेट (आईएस) का नियंत्रण बचा है, क्योंकि सीरियाई सरकारी बलों ने रूसी विमानों की मदद से देश के ज्यादातर भाग को आईएस के कब्जे से मुक्त करा लिया है. एक समाचार एजेंसी के रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सशस्त्र बल जनरल स्टाफ के मुख्य संचालन निदेशालय के प्रमुख सर्गेई रुदस्कोई ने  मीडिया को बताया कि पिछले महीनों में आईएस के कब्जे वाले 5,841 वर्ग किलोमीटर इलाकों में कमी आई है और 142 इलाकों को मुक्त कराया गया है.

उन्होंने कहा कि सीरियाई सैनिक हजारों आईएस आतंकवादियों के हमलों को नाकाम करते हुए देश के पूर्वी भाग में आगे बढ़ रहे हैं. रुदस्कोई ने कहा कि सरकारी बलों ने मध्य सीरिया में अकेरबाट शहर में आईएस का पूरी तरह सफाया कर दिया है.

उन्होंने कहा कि सीरियाई सैनिक और रूसी वायु सेना आईएस आतंकवादियों और अन्य आतंकवादी संगठनों के पूरे सफाये तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे. सीरिया में जारी गृह युद्ध की शुरुआत 2011 में हुई थी.

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25 सिंतबर को सभी को बिजली योजना ‘सौभाग्य’ की शुरुआत करेंगे पीएम मोदी

पीएम मोदी सभी को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए 25 सितंबर को नई योजना ‘सौभाग्य’ की शुरुआत करेंगे। यह जानकारी बिजली मंत्री आरके सिंह ने शनिवार को दी। 25 सितंबर को आरएसएस के वरिष्ठ नेता और जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल उपाध्याय की जयंती भी है। योजना के बारे में आरके सिंह ने ज्यादा बताने से इनकार कर दिया, लेकिन माना जा रहा है कि इस योजना के तहत इस साल दिसंबर तक देश के सभी गांवों का बिजलीकरण कर दिया जाएगा।

आरके सिंह ने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकारों से बिजलीकरण के प्रॉजेक्ट्स तैयार करने को कहा है जिनके लिए केंद्र सहमति देने के बाद फंड जारी कर देगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, योजना का नाम ‘सौभाग्य’ होगा और इसके तहत ट्रांसफॉर्मर्स, मीटर्स और तारों के लिए सब्सिडी मिलेगी। इस हफ्ते हुई कैबिनेट मीटिंग के अजेंडा में यह योजना भी थी। कैबिनेट मीटिंग के बाद वित्त मंत्री ने इस योजना के बारे में बताते हुए कहा था कि इस योजना की पुष्टि हमारे निर्णय लेने के बाद कर दी जाएगी।

सरकार सभी गावों तक बिजली पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रही है और सभी को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए 2019 का टारगेट बना चुकी है। पावर सेक्टर में सुधारों की बात करते हुए आरके सिंह ने बताया कि सरकार बिजली खरीदने से जुड़े कानूनों को और कड़ा करने जा रही है। सिंह ने बताया कि उन्होंने इस साल के अंत तक 20 हजार मेगावॉट बिजली वायु ऊर्जा से और 20 हजार मेगावॉट बिजली सौर ऊर्जा से बनाने का टारगेट दिया है।

उन्होंने कहा कि अधिकतर उपभोक्ता प्रीपेड बिजली कनेक्शन पर शिफ्ट होंगे जिससे बिजली कंपनियों को हुए घाटे की भरपाई हो जाएगी। इसके अलावा बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सरकार एनटीपीसी की क्षमता को बढ़ाने पर जोर दे रही है। राज्य सरकारों की बिजली मांग को पूरा करने के लिए सरकार पावर पर्चेज अग्रीमेंट्स को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। सिंह ने कहा, ‘भारत विकास के रास्ते पर है और बिजली की मांग बढ़ेगी।’