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जानिए भारत में कैसे बढ़ती-घटती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमत

आइये जानते हैं वे कौन से फैक्टर हैं जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

बढ़ती मांग

भारत और अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास ने भी पेट्रोल और अन्य आवश्यक ईंधन की मांग में वृद्धि की है। हाल ही में निजी वाहनों के मालिकों की संख्या बढ़ी है, जिससे भारत में पेट्रोल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

आपूर्ति और मांग में असंतुलन
कच्चे तेल के इनपुट मूल्य की उच्च लागत के कारण भारत में तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाजार की मांगों को पूरा करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। जिससे देश में पेट्रोल की कम आपूर्ति और अधिक मांग होती है।

टैक्स रेट
पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर भी काफी हद तक निर्भर करती हैं। सरकार की ओर से टैक्स दरें बढ़ाने की स्थिति में कंपनियां अक्सर उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है।

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें
बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है। नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा। इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 105. 49 फीसदी और डीजल में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, फिलहाल पेट्रोल डीजल में कई सारे टैक्स शामिल हैं। मसलन, एक्साइज ड्यूटी और वैट (मूल्य संवर्धित कर)। इसके अलावा डीलर की ओर से लगाया गया रेट और कमीशन भी कीमतों में जुड़ते हैं। एक्साइज ड्यूटी तो केंद्र सरकार लेती है, जबकि वैट राज्यों की आमदनी (राजस्व) में जुड़ता है।

89.97 प्रति लीटर
महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल सोमवार को हो गया। यह पूरे देश में पेट्रोल की सर्वाधिक कीमत है।

रुपये की हालत
डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत भी उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करती हैं। भारतीय तेल कंपनियां अन्य देशों से आयातित तेल का भुगतान डॉलर में करती हैं। लेकिन उनके खर्च रुपये में दर्ज होते हैं। जब डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आती है, तो कंपनियों के लाभ पर असर पड़ता है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। इसी तरह रुपया मजबूत होने पर कीमतों में राहत मिलती है।

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दुनिया के कई देशों को आधी कीमत पर पेट्रोल डीजल बेच रहा है भारत, जानिए कारण!

पंजाब के रोहित सभ्रवाल की आरटीआई से पता चला है कि मैंग्लोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमि. से 1 जनवरी 2018 से 30 जून 2018 के बीच पांच देशों – हांगकांग, मलेशिया, मॉरिशस, सिंगापुर और यूएई को 32 से 34 रुपए प्रति लीटर में रिफाइंड पेट्रोल और 34 से 36 रुपए में रिफाइंड डीजल बेचा गया। इस दैरान भारत में पेट्रोल की कीमत 69.97 रुपए से 75.55 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 59.70 रुपए से 67.38 रुपए प्रति लीटर रही।

– इन पांच देशों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ईराक, इजराइल, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में भारत से रिफाइन्ड पेट्रोल-डीजल निर्यात किया जाता है।

देशवासियों पर 150 फीसद तक टैक्स

रोहित सभ्रवाल कहते हैं, बाकी देशों को भारत से भले ही बेहद सस्ता रिफाइंड पेट्रोल-डीजल मिल रहा हो, लेकिन यहां के लोगों पर 125 से 150 फीसद तक टैक्स लगाया जा रहा है। यही कारण है कि भारत के अधिकांश राज्यों में पेट्रोल 75 से 82 रुपए लीटर और डीजल 66 से 74 रुपए लीटर तक बेचा जा रहा है। ताजा खबर तो यह भी है कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लेने से इन्कार कर दिया है। यानी दाम कम होने की यह उम्मीद भी खत्म हो गई है।

यही 35.90 रुपए प्रति लीटर वाला कच्चा पेट्रोल रिफाइन करने के बाद भारत में 77 से 82 रुपए लीटर हो जाता है, क्योंकि इसमें करीब 19.48 रुपए की एक्साइज ड्यूटी, 16.47 रुपए प्रति लीटर का VAT, अन्य टैक्स और डीलर कमीशन शामिल हो जाता है। डीजल पर भी ये सभी टैक्स लगते हैं।

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SC/ST एक्ट में बदलाव को लेकर विरोध में हिंसक प्रदर्शन, 8 की मौत; कई शहरों में कर्फ्यू

अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एसएसी/एसटी एक्ट) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने देशभर में विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुअा। कई जगह तोड़फोड़ व अगजनी की घटनाएं सामने अाई है। वहीं मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान 5 लोगों की मौत हो गई है।

कई जगह ट्रेनें रोकी गई हैं। इसके अलावा कुछ शहरों में झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एससी/एसटी एक्ट में कई बदलाव हुए थे। हालांकि, सरकार ने अब इस मामले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

पुनर्विचार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
केन्द्र सरकार ने एससी एसटी एक्ट में तत्काल एफआइआर और तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। सरकार ने कोर्ट से याचिका पर खुली अदालत में बहस और सुनवाई की मांग की है। याचिका में सरकार ने तर्क दिया कि फ़ैसले से कानून का उद्देश्य कमज़ोर होगा। पुनर्विचार याचिका मे सरकार ने अभियुक्त के लिए अग्रिम जमानत के रास्ते खोलने का विरोध किया और कहा कि इसका अभियुक्त दुरुपयोग करेगा और पीड़ित को धमका सकता है, साथ ही जांच भी प्रभावित कर सकता है। सरकार ने कहा कि इस कानून मे अभियुक्त को अग्रिम जमानत का हक न देने से अनुच्छेद 21 में उसे मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन नही होता। एससीएसटी कानून में ये 1973 मे नये अधिकार के तौर पर जोड़ा गया था।उधर एससी एसटी पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आल इंडिया फ़ेडरेशन आफ एससी एसटी आर्गनाइजेशन की ओर से आज सुप्रीम कोर्ट मे अलग से नई याचिका दाखिल की गई, जिसमें कोर्ट से फ़ैसले पर रोक लगाने और मामले पर विचार कर फ़ैसले मे बदलाव की मांग की गई है। याचिका पर वकील मनोज गोरकेला ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ से जल्द सुनवाई की मांग की। लेकिन कोर्ट ने जल्द सुनवाई की मांग ठुकराते हुए कहा कि मामले पर नियमित क्रम मे ही सुनवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक की मौत, लगाया गया कर्फ्यू

मुरैना में विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। हिंसा के उग्र होने के बाद यहां कर्फ्यू लगा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश के मुरैना शहर में जमकर हिंसा हुई। यहां विरोध प्रदर्शन के दौरान हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने की वजह से हालात बेकाबू हो गए। मुरैना में बंद समर्थकों ने बस स्टैंड, बैरियर चौराहे पर पथराव किया। इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा तो मुरैना रेलवे स्टेशन पर उपद्रव शुरू हो गया। बंद समर्थकों ने यहां पटरियों पर डेरा जमा लिया, जिसके बाद ट्रेनों की आवाजाही थम गई है। मीडिया खबरों के मुताबिक, ग्‍वालियर में भारत बंद के दौरान हुई हिंसक झड़पों में 19 लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से 2 की मौत हो गई है। आईजी कानून एवं व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने बताया कि मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अभी तक 5 लोगों की मौत हो गई है।

दिल्ली में पुलिस बल पर पथराव, ठप हुए राजमार्ग

एसटी-एसी एक्ट 1989 में संशोधन के खिलाफ दिल्‍ली एनसीआर में भारत बंद ने हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुई। इससे निपटने के लिए पुलिस ने हल्‍के बल का प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने एनएच 24 और दिल्ली-देहरादून हाइवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर जाम लगा दिया। इससे कई राजमार्ग पर यातायात व्‍यवस्‍था पूरी तरह से ठप हो गई। गाजियाबाद में रेलवे फटकी पर जाम के कारण ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है।

बिहार में दिन चढ़ने के साथ बढ़ता जा रहा भारत बंद का असर
बिहार में यह बंद असरदार दिख रहा है। बिहार में पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है। बंद के कारण जगह-जगह रेल व सड़क यातायात प्रभावित हैं। बंद समर्थकों ने पटना व हाजीपुर के बीच उत्तर व दक्षिण बिहार की लाइफलाइन ‘महात्मा गांधी सेतु’ को जाम कर दिया है। इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। बंद के दौरान वैशाली में एक कोचिंग संस्‍थान को बंद कराने के दौरान छात्रों से बंद समर्थकों की भिड़त हो गई। इसमें दर्जनों छात्र घायल बताए जा रहे हैं। बंद समर्थक पटना सहित राज्‍य के विभिन्‍न जगहों पर एंबुलेंस सहित आवश्‍यक सेवाओं की गाडि़यों को भी रोक रहे हैं।

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। राजस्‍थान के डीजीपी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अलवर में फायरिंग हुई, जिसमें एक शख्‍स की मौत हो गई है। कुछ क्षेत्रों में पत्‍थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। हिंसक प्रदर्शन कर रहे काफी लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई और धारा 144 लगा दी गई है, ताकि हालात ज्‍यादा न बिगड़ें। बाड़मेर में दलित और पुलिस में झड़प हो गई है। इस झड़प में 25 लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू के गोले दागे। दूसरी तरफ करणी सेना भी दलितों के प्रदर्शन के विरोध में सड़कों पर उतर आई है। जिसकी वजह से दोनों गुटों के बीच भिड़ंत हो गई। सड़क पर दोनों गुट भिड़ गए। बाड़मेर में वाहनों को आग लगा दी गई।

उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में हालात बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं। मुजफ्फरनगर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के मरने की सूचना है। मृतक का नाम अमरीश निवासी गादला, थाना भोपा है। इसकी बॉडी जिला अस्पताल लाई गई है। रेलवे के कर्मचारी प्रताप की कमर में भी गोली लगी है, उसकी हालत भी गंभीर बनी हुई है। उत्‍तर प्रदेश के डीआइजी ने बताया कि प्रदेश के सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्‍से में ही हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें 2 शख्‍स की मौत हो गई है और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश के 90 प्रतिशत हिस्‍से में शांति का माहौल है। प्रदर्शनकारियों से सख्‍ती से निपटा जा रहा है। पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया। हम विश्‍वास दिलाते हैं कि किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। आजमगढ़ में एक बस पर हमला कर दिया और उसमें आग लगा दी गई। मेरठ तथा आगरा व मैनपुरी में दलित संगठन से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए हैं। कई जगह पर प्रदर्शनकारी ट्रेन के सामने खड़े हो गए हैं। एससी-एसटी एक्ट पर फैसले का आगरा में भी कई संगठनों ने काफी विरोध किया है। बसपा के कार्यकर्ता यहां शहर के सभी बाजारों में भीड़ जबरन बाजार बंद करा रही है। यह लोग विरोध में लाठी-डंडे के साथ सड़क पर उतरे और दुकानों में काफी लूटपाट करने के साथ ही महिलाओं से भी छेड़छाड़ की। एंबुलेंस में फंसे मरीजों के साथ अभद्रता की गई। शाहगंज क्षेत्र के बारह खंभा के पास लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इसके साथ ही यहां एत्माद्दौला के टेढ़ी बगिया में चक्का जाम किया गया है। करीब एक घण्टे से जाम के चलते रामबाग तक बड़ी संख्या में वाहनों की कतार लग गई है। जगह-जगह पर इसको लेकर प्रदर्शन हो रहा है। इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है।

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद दलित संगठनों के दो अप्रैल को भारत बंद के मद्देनजर पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों की सरकारों ने चौकसी कड़ी कर दी है। पंजाब मे सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय व बैंक सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद करने के आदेश हैं।

पंजाब में दलितों के बंद का मिलाजुला असर
एससी-एसटी एक्‍ट संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनों द्वारा किए गए बंद के आह्वान का पंजाब के अधिकांश इलाकों में मिलाजुला असर दिख रहा है। जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, पटियाला सहित अन्य जिलों में दलित संगठनों के लोग सक्रिय हैं। संगठनों के कार्यकर्ता तड़के से ही सड़कों पर उतर आए। अमृतसर में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने सचखंड एक्सप्रेस रोक दी, जिससे यात्री परेशान रहे। किसी भी आशंका से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के क़ड़े इंतजाम किए हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने कल ही प्रदेश में सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालयों को सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही कल रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद कर दी गई थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के 12 हजार अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया है।

झारखंड में पुलिस ने किया लाठी चार्ज
रांची में बंद समर्थक सड़क पर उतर चुके हैं। दुकानों को बंद करवाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, रांची के आदिवासी हॉस्टल के बंद समर्थकों ने जमकर उपद्रव किया। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और उन पर लाठी चार्ज किया।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया था। कोर्ट ने कहा था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच हो। कोर्ट ने कहा था कि केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है।

राजद, सपा, कांग्रेस और शरद का समर्थन

सोमवार को बुलाए गए भारत बंद को बिहार में राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। दलित संगठनों ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में सोमवार को आहूत भारत बंद का समर्थन किया है।

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अब से आपके वाहन में पड़ेगा नए किस्म का पेट्रोल-डीजल, जानें क्यों है खास

राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने की चुनौती से निपटने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने एक अप्रैल से राजधानी में यूरो-6 मानक के  डीजल एवं पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर देंगी। कंपनियां इसके लिये कोई अतिरिक्त कीमत नहीं वसूलेंगी।

दिल्ली देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां यूरो-4  मानक ईंधन का प्रयोग बंद कर सीधे यूरो-6  मानक ईंधन को इस्तेमाल में लाया जायेगा।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित अन्य शहरों नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के अलावा मुंबई, चेन्नई,  बेंगलुरू, हैदराबाद और पुणे समेत 13 प्रमुख शहरों में यूरो-6 मानक ईंधन की आपूर्ति अगले साल एक जनवरी से शुरू होगी। देश के बाकी हिस्सों में यह अप्रैल 2020 से शुरू होगा।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी)  के निदेशक (रिफाइनरी) बी. वी. रामगोपाल ने कहा कि सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियां आईओसी, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड  कल से दिल्ली के अपने सभी 391 पेट्रोल पंपों पर यूरो-छह उत्सर्जन मानक वाले ईंधन की आपूर्ति शुरू कर देंगी।

उन्होंने कहा कि भले ही कंपनियों ने स्वच्छ ईंधन उत्पादन के लिए भारी निवेश किया है, उपभोक्ताओं के ऊपर अभी कुछ समय तक इसका बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, आश्वस्त रहिये, खर्च का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की कोई योजना नहीं है।  अभी उपभोक्ताओं से तत्काल लागत वसूलने की कोई योजना नहीं है।

लागत के हिसाब से स्वच्छ ईंधन50  पैसे प्रति लीटर महंगाहोना चाहिये। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में यूरो-6  मानक के ईंधन की आपूर्ति शुरू हो जाएगी तब लागत वसूलने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

रामगोपाल ने कहा कि दिल्ली की 9.6 लाख टन पेट्रोल तथा 12.65 लाख टन डीजल की सालाना खपत देखते हुए उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा परिशोधन संयंत्र, हरियाणा की पानीपत रिफाइनरी, मध्य प्रदेश के बिना संयंत्र तथा पंजाब के बठिंडा  संयंत्र ने स्वच्छ ईंधन का उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अकेले पानीपत संयंत्र पर ही करीब 183  करोड़ रुपये खर्च किये गये।

उन्होंने कहा कि बाकी के संयंत्रों के उन्नयन का काम चल रहा है। वर्ष 2015 में निर्णय लिया गया था कि यूरो6  मानक के अनुकूल ईंधन की आपूर्ति पूरे देश में एक अप्रैल 2020 से शुरू की जायेगी  हालांकि, जहरीली धुंध की समस्या को देखते हुए दिल्ली में इसे पहले ही किया जा रहा है।

गोपाल ने कहा कि स्वच्छ यूरो6  मानक के ईंधन तथा पुराने इंजन के इस्तेमाल से पार्टिकुलेट उत्सर्जन में10 से 20  प्रतिशत की कमी आएगी। इसका पूरा लाभ उठाने के लिए यूरो6 मानक के इंजनों की भी जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, यूरो6 मानक के ईंधन की आपूर्ति कल से शुरू हो जाने से वाहन निर्माता कंपनियों को यह भरोसा मिलेगा कि स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता कोई समस्या नहीं है।

दिल्ली में सुचारू आपूर्ति के लिए आईओसी मथुरा और पानीपत संयंत्रों से स्वच्छ ईंधन मंगाएगी। एचपीसीएल की बठिंडा स्थित संयुक्त संयंत्र तथा बीपीसीएलबीना  संयंत्र से ईंधन मंगाएगी।

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बजट विशेष: जानिए कैसा रहा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट

अरुण जेटली ने गुरुवार को मौजूदा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। इस बजट में अगले 14 महीने में देश में होने वाले लोकसभा समेत 14 चुनावों का इफेक्ट नजर आया। मिडिल क्लास के लिए ऐसा कोई एलान नहीं हुआ, जिससे उसे टैक्स में फायदा मिले। लेकिन कांग्रेस के परंपरागत वोटरों को साधने के मकसद से गरीबों-किसानों के लिए कुछ एलान हुए। इनमें आयुष्मान भारत योजना शामिल है। इसके तहत 10 करोड़ परिवारों को हॉस्पिटलाइजेशन पर 5 लाख रुपए सालाना का हेल्थ कवर मिलेगा। इसका फायदा 40 से 50 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा। वहीं, किसानों को ध्यान में रखते हुए खरीफ की फसलों पर डेढ़ गुना मिनिमम सपोर्ट प्राइज देने की भी जेटली ने घोषणा की। सरकार इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन से 8,000 करोड़ रुपए तो गंवाएगी, लेकिन हेल्थ और एजुकेशन पर 1% सेस बढ़ाकर 11 हजार करोड़ रुपए वसूल लेगी।

बजट में हमारी चिंताओं पर क्या?

1) इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदला

– उम्मीद थी कि सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करेगी ताकि मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को फायदा हो, लेकिन स्लैब को बरकरार रखा गया। इससे देश के 4 करोड़ इंडीविजुअल टैक्स पेयर्स को निराशा हुई।
– 80C के तहत डेढ़ लाख रुपए इन्वेस्ट कर इनकम टैक्स में छूट हासिल करने की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई।

2) 1% सेस बढ़ाया, ताकि सरकार को 11000 करोड़ मिले
– पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स पर एजुकेशन पर 3% सेस लगता था। इसकी जगह अब हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर की फंडिंग के लिए 4% सेस लगेगा। इससे सरकार को 11 हजार करोड़ रुपए का एडिशनल रेवेन्यू मिलेगा।

3) पेट्रोल-डीजल पर जितनी एक्साइज ड्यूटी घटाई, उतना ही रोड सेस लगाया
– सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए की बेसिक एक्साइज ड्यूटी कम की और 6 रुपए एडिशनल एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। 8 रुपए की यह राहत आम आदमी को इसलिए नहीं मिलेगी, क्योंकि सरकार ने 8 रुपए का रोड सेस लगा दिया है।

4) स्टैंडर्ड डिडक्शन
– करीब 12 साल बाद सरकार सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन लाई है। ये डिडक्शन 40 हजार रुपए का होगा। लेकिन, इसे मेडिकल एक्सपेंस पर 15 हजार और ट्रैवलिंग अलाउंस पर 19200 रुपए की रिबेट के बदले लाया गया है यानी जो डिडक्शन पहले 34,200 रुपए का था, अब वह 40,000 रुपए का होगा। कुल फायदा साल में केवल 5,800 रुपए होगा।

14 महीने, 14 चुनाव. इसलिए गरीबों-किसानों-महिलाओं पर फोकस

# कब-कहां चुनाव
– 2018 में कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, नगालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में चुनाव होंगे। अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे। इसी के साथ आंध्र, तेलंगाना, ओडिशा, अरुणाचल, सिक्किम के चुनाव होंगे। अभी लोकसभा में बीजेपी है, बाकी 13 चुनावी राज्यों में से 7 में वह या एनडीए सत्ता में है।
– इन्हीं 14 चुनावों के मद्देनजर आम बजट में गरीबों-किसानों-महिलाओं से जुड़े एलान किए गए हैं। गरीब और किसान कांग्रेस के परंपरागत वोट माने जाते रहे हैं।

1) दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवर स्कीम का दावा
– जेटली ने आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम का एलान किया। इसका फायदा 10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा। उन्हें हॉस्पिटलाइजेशन पर सालाना 5 लाख रुपए का कवर मिलेगा।
– बजट के बाद मोदी ने भी दावा किया कि आयुष्मान भारत योजना से 40 से 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा और ये दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस योजना है।

3) किसान
– रबी की फसलों की तरह सरकार ने खरीफ की फसलों पर भी किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने का एलान किया।
– सरकार 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण एग्रीकल्चर मार्केट (Gram) में अपग्रेड करेगी। इन Grams को इलेक्ट्रॉनिकली e-NAM (नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) से जोड़ा जाएगा। इससे किसान अपनी उपज सीधे उपभोक्ता को बेच सकेंगे।

4) महिलाओं के लिए 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन

– सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने का एलान किया। सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन दिए जाएंगे। फॉर्मल सेक्टर जॉब्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए EPF में महिलाओं की हिस्सेदारी पहले तीन सालों के लिए घटाकर 8% कर दी गई।

– नेशनल रूरल लिवली हुड मिशन के लिए बजट में 5750 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। महिलाओं के स्व सहायता समूहों के लिए लोन भी 75 हजार करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया।

5) सीनियर सिटिजन

– बजट में सीनियर सिटिजन को डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर छूट 10,000 से बढ़ाकर 50,000 सालाना कर दी गई। वहीं, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट भी 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। गंभीर बीमारियों के केस में डिडक्शन लिमिट 1 लाख कर दी गई।
– प्रधानमंत्री वय वंदना योजना मार्च 2020 तक बढ़ाई जाएगी। इस योजना में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) सीनियर सिटीजन्स को 8% निश्चित रिटर्न देता है। स्कीम में सीनियर सिटीजन के इन्वेस्टमेंट की लिमिट 7.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख कर दी गई है।

– जेटली ने कहा, “सोशियो-इकोनॉमिक कॉस्ट सेंसस के मुताबिक, सरकार हर बुजुर्ग, विधवा, अनाथ बच्चे, वंचितों तक सरकार पहुंचने की कोशिश करेगी। इस साल नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत 9,975 करोड़ रुपए के बजट का एलान किया गया।”

6) महंगा-सस्ता

महंगा सस्ता
कार कच्चा काजू, निकल
मोटरसाइकिल सोलर टेम्पर्ड ग्लास
सोना-चांदी सोलर पैनल और मॉड्यूल वाले ग्लास
वेजिटेबल, फ्रूट जूस एलएनजी, मेक इन इंडिया वाटर प्यूरीफायर
चश्मे
परफ्यूम, टॉयलेट वाटर्स
सनस्क्रीन, सनटैन, मैनीक्योर, पैडीक्योर प्रिपरेशंस
ओरल डेंटल हाईजीन प्रिपरेशंस, पेस्ट, पाउडर, डेंटल फ्लॉस
प्री शेव, शेविंग, आफ्टर शेव प्रिपरेशंस, सेंटेड स्प्रे, टॉयलेट स्प्रे
ट्रक, बस टायर
सिल्क फैब्रिक, फुटवियर, रंगीन पत्थर, हीरा,
स्मार्ट वॉच, वियरेबल डिवाइस, एलसीडी, एलईडी, फर्नीचर
मैट्रेस, लैंप, रिस्ट वॉच, पॉकेट वॉच, क्लॉक्स
ट्राइ साइकिल, स्कूटर, पैडल कार्स, व्हील्ड टॉयज, डॉल्स कैरिएज, टॉयज
वीडियो गेम्स कंसोल, स्पोर्ट्स और आउटडोर स्पोर्ट्स इक्विपमेंट
सिगरेट और दूसरे लाइटर्स, कैंडल्स, काइट्स
खाने का तेल

7) सफर में सहूलियत

रेलवे:आम बजट में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए दिए गए। लगातार चौथे साल किराए में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। सामान की ढुलाई में तेजी लाने का वादा किया गया। सबसे ज्यादा फोकस सेफ्टी और ट्रैक मेंटेनेंस पर किया गया। इसके तहत देश की सभी नैरोगज लाइनों को ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। 4267 अनमैन्ड रेलवे क्रॉसिंग को बंद किया जाएगा। ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे फिट किए जाएंगे। प्लेटफॉर्म पर इनकी तादाद बढ़ाई जाएगी। रेलवे का ग्रॉस बजटरी सपोर्ट बढ़कर 3 लाख करोड़ किया गया है।

एयरपोर्ट:जेटली ने कहा, “56 अनसर्व्ड एयरपोर्ट्स और 31 अनसर्व्ड हेलिपैड्स को उड़ान योजना के तहत कनेक्ट किया जाएगा। 16 ऐसे एयरपोर्ट्स पर ऑपरेशंस पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। एयरपोर्ट्स की कैपेसिटी को पांच गुना ज्यादा बढ़ाया जाएगा ताकि आने वाले वक्त में एक अरब सालाना उड़ानों को हैंडल किया जा सके। तीन साल में डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक 18% कीदर से बढ़ा है। हमारी एयरलाइंस कंपनियों ने 900 नए एयरक्राफ्ट्स का ऑर्डर दिया है। रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान पिछले साल लॉन्च हुई। इसके लिए अनसर्व्ड, अंडरसर्व्ड एयरोपोर्ट्स को कनेक्ट करने की जरूरत है, साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए हवाई सफर मुहैया कराने की जरूरत है। उड़ान योजना से देश के हवाई चप्पल पहनने वाले लोग भी हवाई जहाज में यात्रा कर रहे हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया 124 एयरपोर्ट मैनेज करती है।”

8) राष्ट्रपति-सांसदों की सैलरी बढ़ाई

– अरुण जेटली ने बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गवर्नर्स की सैलरी बढ़ाए जाने का एलान किया। प्रेसिडेंट को अभी 1.5 लाख सैलरी मिलती है, उन्हें 5 लाख सैलरी दी जाएगी। वाइस प्रेसिडेंट की सैलरी 1.2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख की गई। गवर्नर्स को 1.1 लाख की बजाय अब 3.5 लाख सैलरी दी जाएगी।

– सासंदों की सैलरी को लेकर बहस होती रही हैं। अब सांसदों की सैलरी हर 5 साल में रिवाइज्ड की जाएगी। हालांकि, ये रिवीजन महंगाई को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

9) डिफेंस

– डिफेंस बजट में इस साल महज 7.81 फीसदी बढ़ोतरी की गई। डिफेंस के लिए 2018-19 में 2.95 लाख करोड़ रुपए अलॉट किए गए हैं। डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ाने के इंडस्ट्री के प्रमोशन के लिए सरकार 2 डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्री फ्रैंडली मिलिट्री प्रोडक्शन पॉलिसी लाई जाएगी। इसमें से 99,947 करोड़ रुपए से नए हथियार, एयरक्राफ्ट्स, वारशिप्स और दूसरे मिलिट्री हार्डवेयर खरीदे जाएंगे।

10) इन्फ्रास्ट्रक्चर

– जेटली ने कहा, “इकोनॉमी के विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर ड्राइवर की तरह है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर का बजट 1 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ाकर 5.97 लाख करोड़ रुपए कर रहे हैं। हमारे देश को जीडीपी ग्रोथ और रेल-रोड-एयर-इनलैंड वाटर के जरिए देश को कनेक्ट करने के लिए करीब 50 लाख करोड़ रुपए के बड़े इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में टारगेट और अचीवमेंट का रिव्यू किया। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम प्रगति के जरिए पता चला है कि 9.46 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट फास्ट ट्रैक मोड पर शुरू हो चुके हैं। 2018-19 तक 9000 किलोमीटर तक नेशनल हाईवे पूरे हो जाएंगे। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत भारत के दूरदराज और पिछड़े इलाकों को जोड़ा जाएगा। इसमें पहले चरण में 5.35 लाख करोड़ की लागत से 35,000 किलोमीटर हाईवे बनाए जाएंगे।”

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पेट्रोल में मिलाया जाएगा 15 फीसद मेथेनॉल, समझें इसके फायदे-नुकसान

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आज लोकसभा में कहा कि अब पेट्रोल में 15 फीसद मेथेनॉल मिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से साल 2030 तक भारत का ईंधन बिल कम हो जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मेथेनॉल को बढ़ावा देने से प्रदूषण पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। सरकार की इस योजना के बारे में नितिन गडकरी पहले भी जानकारी दे चुके हैं।

मेथेनॉल मिलाने से कितना सस्ता हो जाएगा पेट्रोल: मेथेनॉल कोयला से बनाया जा सकता है और इसकी लागत 22 रुपये प्रति लीटर होती है, जबकि पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर पड़ती है। चीन इसे 17 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार कर रहा है। गडकरी ने कहा यह पेट्रोल की लागत को कम करेगा और प्रदूषण को भी कम करेगा। गडकरी ने कहा कि मुंबई के आस-पास की फैक्ट्री जिसमें दीपक फर्टिलाइजर्स और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स भी शामिल हैं वो मेथेनॉल को तैयार कर सकती है।

समझें गणित कैसे सस्ता हो जाएगा पेट्रोल: (उदाहरण से समझें)

  • 1 लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 69 रुपए है
  • यानी 1000 एमएल पेट्रोल की कीमत: 69 रुपए
  • इसमें अगर 15 फीसद एथेनॉल मिलेगा।
  • 850 एमएल पेट्रोल की कीमत: 69/1000X850= 58.65 रुपए
  • वहीं 1000 एमएल मेथेनॉल की कीमत 22 रुपए
  • 15 फीसद यानी 150 एमएल मेथेनॉल की कीमत: 22/1000X150= 3.3 रुपए
  • इस हिसाब से 1 लीटर पेट्रोल की कीमत होगी: 58.65+3.3= 61.95 रुपए

यानी इस हिसाब से आपको करीब 7 रुपए का सीधा-सीधा फायदा होगा।

क्या है मेथेनॉल: मेथनॉल आंतरिक दहन और अन्य इंजनों के लिए वैकल्पिक ईंधन है। इसे या तो गैसोलीन के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाता है या फिर सीधे तौर पर। काफी सारे देशों में इसका इस्तेमाल रेसिंग कार के लिए किया जाता है। अमेरिका में, पेट्रोलियम आधारित ईंधन के विकल्प के रूप में इथेनॉल ईंधन को मेथनॉल ईंधन तुलना में ज्यादा पसंद किया जाता है। सामान्य तौर पर, इथेनॉल कम विषाक्त (टॉक्सिक) होता है और इसका ऊर्जा घनत्व ज्यादा होता है। हालांकि मेथनॉल ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से कम खर्चीला होता है। ओपेक देशों के वर्ष 1973 के तेल संकट के दौरान, रीड और लर्नर (1973) ने कोयला के इस्तेमाल से विनिर्माण प्रौद्योगिकी के साथ ईंधन के रूप में मेथनॉल को प्रस्तावित किया था और यह गैसोलीन को रिप्लेस करने के लिहाज से एक बेहतर (पर्याप्त) संसाधन भी है। ऐतिहासिक रूप से, मेथनॉल को पहली बार लकड़ी के विनाशकारी आसवन (pyrolysis) द्वारा उत्पादित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लकड़ी के शराब के आम अंग्रेजी नाम का परिणाम था।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट: केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि देश के भीतर पेट्रोल में एथेनॉल तो मिलाया ही जा रहा है, लेकिन मेथेनॉल एक नया कॉन्सेप्ट है। अब पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाने से बेशक प्रदूषण काफी कम होगा,जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार को लताड़ लगाते हुए यह भी कह चुकी है कि राजधानी में प्रदूषण नियंत्रित करने के उनके प्रयास नाकाफी हैं। अगर पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाया जाएगा तो जाहिर तौर पर पेट्रोल की कीमत में 8 से 10 रुपए की कमी आएगी। जो कि आम आदमी के लिए एक राहत की खबर है। हालांकि इस मसले पर चिंता की बात गाड़ियों के इंजन को लेकर है जो कि मेथनॉल मिलाए जाने के कारण खराब भी हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने इस संबंध में वोल्वो से स्पेशल इंजन के लिए बात भी की है। साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि इससे देश के इंपोर्ट (आयात) पर भी असर पड़ सकता है।

क्या होंगे नुकसान: ऑटो एक्सपर्ट रंजॉय मुखर्जी ने बताया कि इस फैसले से गाड़ियों पर जाहिर तौर पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाली गाड़ियां मौजूदा समय में मेथेनॉल के लिहाज से सक्षम नहीं हैं। इसलिए सरकार को अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले कंपनियों को गाड़ियों को अपग्रेड करने का समय देना होगा। नहीं तो यह गाड़ियों के इंजन और उसके प्रदर्शन पर बुरा असर डाल सकता है।