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स्काई डाइविंग के लिए इंडिया की ये 5 जगहें हैं बेस्ट

स्काई डाइविंग, सिंपल पैराशूटिंग का मॉर्डन रूप है जिसमें एयरक्रॉफ्ट द्वारा एक तय ऊंचाई से खुली हवा में जंप करना होता है और उसके कुछ समय बाद अपना पैराशूट खोलकर लैंड करना होता है।

इस एडवेंचर में एन्जॉयमेंट के साथ सुरक्षा के लिए आपको कुछ रूल्स भी फॉलो करने पड़ते हैं। जिसके लिए ट्रैनर्स मौजूद होते हैं। जहां कई जगहों पर 1-2 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है वहीं कुछ जगहों पर महज कुछ घंटों की। जिसके बाद आप तैयार होते हैं खुली हवा में आजाद चीड़िया की तरह उड़ने के लिए। तो आज हम इंडिया की ऐसी ही जगहों के बारे में जानेंगे, जहां जाकर आप अपने स्काई डाइविंग के शौक को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

इंडिया की ये 5 जगहें हैं स्काई डाइविंग के बेस्ट

मैसूर, कर्नाटक- बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स की लिस्ट में मैसूर सबसे ज्यादा पॉप्युलर है। बैंगलुरू से कुछ ही घंटे की दूरी पर बसे मैसूर में बहुत सारे स्काई डाइविंग कैंप्स मिलेंगे। यहां आकर स्काई डाइविंग करना बिल्कुल अलग ही तरह का एक्सपीरियंस होता है। टैंडेम से लेकर स्टेटिक और एक्सीलेरेटेड हर तरह के जंप्स के लिए प्रोफेशनल ट्रेनर्स द्वारा आपको 2-3 दिन की ट्रैनिंग दी जाती है। इसके बाद ही आप स्काई डाइविंग का मजा ले सकते हैं। हवा में फ्री होकर उड़ते हुए आसपास के खूबसूरत नजारों को देखने का एहसास अलग ही होता है

धाना, मध्यप्रदेश- धाना में इंडिया का पहला स्काई डाइविंग कैंप शुरू हुआ था। यहां आपको स्टेटिक और टैंडेम जंप्स के ऑप्शन्स मिलते हैं। 4000 फीट से जंप करते हुए यहां की खूबसूरती देखना वाकई बहुत अद्भुत होता हैशायद इसलिए ही धाना को इंडिया के बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स में शामिल किया गया है

एंबी वैली, महाराष्ट्र- अगर आपको एंडवेंचर करना पसंद है तो महाराष्ट्र के एंबी वैली में स्काई डाइविंग जरूर ट्राय करें। 45 मिनट की ये डाइविंग आपको लाइफटाइम याद रहेगी। फिलहाल यहां 10,000 फीट से टैंडेम जंप की सुविधा अवेलेबल है जिसमें बेशक मज़ा तो आता है लेकिन उतना ही डर भी लगता है। तो अगर आप थ्रील के साथ इस एडवेंचर को वाकई एन्जॉय करना चाहते हैं तो फिर वीकेंड में महाराष्ट्र आने का प्लान करें

दीसा, गुजरात- एक्सपीरियंस्ड हो या फिर नौखिसिया, गुजरात का दीसा हर किसी को लाइफटाइम एक्सपीरियंस देने के लिए बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन है।हां गुजरात स्पोर्ट्स अथॉरिटी और इंडियन पैराशूटिंग फेडरेशन द्वारा भी स्काई डाइविंग के कैंप्स लगाए जाते हैं

पांडिचेरी- इंडिया के खूबसूरत शहरों में शामिल पांडिचेरी सिर्फ स्कूवा ही नहीं स्काई डाइविंग के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है. ट्रैवलिंग के साथ एंडवेंचर पसंद वालों की तो ये सबसे पसंदीदा जगह है। पांडिचेरी में आपको स्टेटिक, टैंडेम और एक्सीलिरेटेड हर तरह के जंप्स के ऑप्शन मिलेंगे। फ्री बर्ड की तरह हवा में उड़ते हुए नैचुरल ब्यूटी को एक्सप्लोर करना है तो पांडिचेरी का ट्रिप रहेगा बेस्ट

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14 जुलार्इ से शुरु हो रही है जगन्नाथ यात्रा। इस मंदिर से जुड़े हैं कमाल के रहस्य

भगवान जगन्नाथ को श्री विष्णु का 10वां अवतार माना जाता है। पुराणों में जगन्नाथ धाम को धरती का बैकुंठ यानि स्वर्ग कहा गया है। यह हिन्दू धर्म के चार पवित्र धामों बद्रीनाथ, द्वारिका, रामेश्वरम के साथ चौथा धाम माना जाता है।

मंदिर का इतिहास

इस प्राचीन मंदिर को राजा इंद्रद्युम्न ने बनवाया था, जिसे उनके प्रतिद्वंद्वी राजाओं द्वारा नष्ट कर दिया गया। पुरी के लेखागर में पाए गए एक लेख के अनुसार वर्तमान मंदिर का निर्माण गंग वंश के सप्तम राजा अनंग भीमदेव ने किया। मंदिर का निर्माण कार्य 1108 ई. में पूर्ण हुआ। इसकी ऊंचाई 58 मीटर है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी की मूर्तियां हैं। दरअसल ये श्रीकृष्ण और बलराम के ही रूप हैं और सुभद्रा उनकी बहन हैं। इस मंदिर की रसोई विश्व प्रसिद्ध है, जहां निरंतर भोजन बनता रहता है। इस पवित्र रसोई के संबंध में ऐसी मान्यता प्रचलित है कि चाहे कितनी ही भीड़ क्यों न हो, यहां भक्तों के लिए भोजन की कमी कभी नहीं होती।

मंदिर के अनोखे रहस्य

इस मंदिर से जुड़े कर्इ अनोखे तथ्य हैं जिनके बारे सुन कर श्रद्घा आैर आश्चर्य दोनों होते हैं। जैसे इस मंदिर के पास हवा उल्टी दशा में बहती है। जब अन्य समुद्री तटों पर हवा समंदर से जमीन की तरफ चलती है, लेकिन पुरी में ऐसा नहीं है यहां हवा जमीन से समंदर की तरफ चलती है, इस रहस्य कोर्इ समझ नहीं सका है। 4 लाख वर्गफुट में फैले इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 214 फुट है। मंदिर की इतनी ऊंचाई के कारण इसके करीब पहुंच कर भी आप इस गुंबद को नहीं देख सकते। यहां तक कि मंदिर के मुख्य गुंबद की छाया भी दिन के किसी भी वक्त में दिखाई नहीं देती। एक आैर अजीब बात है कि जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई वायुयान तो नहीं ही उड़ता पर उसके ऊपर कभी कोर्इ पक्षी भी आज तक उड़ता हुआ नहीं देखा गया है। मान्यता है कि इस मंदिर के रसोईघर में जिसे दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर माना जाता है में अन्न कभी भी खत्म नहीं होता। सबसे बड़ी बात ये है कि समुद्र तट पर बने होने के बावजूद मंदिर के सिंहद्वार में प्रवेश करने के बाद इस के अंदर समुंद्र की कोई भी आवाज सुनाई नहीं देती। अंत में जान ले कि इसके ऊपर लगा ध्वज हमेशा हवा की उल्टी दिशा में लहराता है।

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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सीरिया में रासायनिक हमला: रूस के ख़िलाफ़ अमरीका हुआ आक्रामक

अमरीका ने कहा है कि सीरिया के डूमा में हुए कथित रासायनिक हमले के कसूरवारों को कड़ा जवाब दिया जाएगा.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि इस घटना का कड़ा जवाब दिया जाएगा और अमरीका के पास कई सारे सैन्य विकल्प हैं. उन्होंने कहा कि इन पर ‘आज रात’ या ‘शीघ्र’ फ़ैसला लिया जा सकता है.

ट्रंप ने कहा कि शनिवार को डूमा में जो घटना हुई उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस पर अमरीका ‘स्पष्टता’ चाह रहा था.

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस घटना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां से सोमवार शाम बात की और दोनों ही नेताओं ने एक ‘मज़बूत प्रतिक्रिया’ को लेकर इच्छा व्यक्त की है.

निक्की हेली

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Image captionनिक्की हेली ने कहा है कि रूस के हाथ ‘सीरियाई बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का आक्रामक रुख़

वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका और रूस ने एक दूसरे पर जमकर हमले किए.

रूस के प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि सीरिया के डूमा में हुई घटना ‘गढ़ी गई है’ और इसके जवाब में अमरीकी सेना की कार्रवाई के ‘भयानक प्रभाव’ हो सकते हैं.

इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की दूत निक्की हेली ने कहा कि सीरिया को सैन्य मदद देने वाले रूस के हाथ ‘सीरिया के बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा था कि दुनिया की बड़ी शक्तियां रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की अनदेखी कर रही हैं.

वहीं, निक्की हेली ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को “शैतान” करार देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिषद कार्रवाई करे न करे, ‘अमरीका किसी न किसी तरह से प्रतिक्रिया देगा.’

उन्होंने कहा, “बैठकें चल रही हैं और जिस समय हम बात कर रहे हैं, महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जा रहे हैं.”

रूस का जवाब

संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि ने कहा कि डूमा में विद्रोहियों ने इस घटना को ख़ुद रचा. उन्होंने इसे अमरीका की शह पर उठाया गया क़दम बताया ताकि रूस को नुक़सान पहुंचाया जाए.

संयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधिइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionसंयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधि

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को जल्द से जल्द सीरिया जाकर जांच करने को कहा. उन्होंने कहा कि इस दौरान कथित हमले वाली जगह तक उन्हें रूस के सैनिक ले जाएंगे.

रूस ने कहा है कि उसे क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं.

अमरीका ने सैन्य हमला किए जाने की संभावनाओं को ख़ारिज नहीं किया है.

इससे पहले उसने पिछले साल अप्रैल में सीरिया के एयरबेस पर क्रूज़ मिसाइल से हमला किया था.

सीरिया में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शेखोन में सरीन गैस के इस्तेमाल से 80 लोगों की मौत के बाद यह क़दम उठाया गया था. जांचकर्ताओं ने इस हमले के लिए सीरिया को ज़िम्मेदार ठहराया था.

गूटा

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Image captionपूर्वी गूटा का डूमा विद्रोहियों के कब्ज़े वाला इकलौता शहर बचा है

क्या हुआ था डूमा में?

सीरिया में राहत बचावकर्मियों ने शनिवार को दावा किया था कि डूमा शहर में ज़हरीली गैस से हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हुई है.

हालांकि, अमरीकी विदेश विभाग का कहना था कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

सीरिया-अमरीकी मेडिकल सोसाइटी ने बताया था कि पूर्वी गूटा क्षेत्र के डूमा में 500 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों पर लाया गया था.

सोसाइटी का कहना था कि इन लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ त्वचा का रंग नीला पड़ने और मुंह से झाग निकलने जैसी दिक्कतें पेश आ रही थीं.

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Resume of Elon Musk: ऐसा है एलन मस्क का एक पेज का रिज्यूमे, 13 हजार करोड़ के हैं मालिक

कहा जाता है कि रेज्यूमे हमेशा साधारण और सरल भाषा में होना चाहिए. जी हां दुनिया के 54वें अमीर आदमी ने भी कुछ ऐसा ही रेज्यूमे बनाया है. आइए देखते हैं कैसा है इस शख्स का रेज्यूमे

हम बात कर रहे हैं दुनिया के 54वें अमीर आदमी एलन मस्क की, जो अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स और टेस्ला के संस्थापक हैं. उन्होंने अपना रेज्यूमे एक पेज का बना रखा है, जो आपको प्रभावित कर सकता है.

एलन मस्क ने अपने रेज्यूमे में एजुकेशन क्वालीफिकेशन, स्किल्स, प्रोफेशनल एचीवमेंट्स और इंट्रेस्ट के बारे में भी लिखा है. उन्होंने अपने रेज्यूमे को इस तरह से डिजाइन किया है कि एक पेज में उन्होंने अपनी सारी जानकारी डाल दी.

इस बात पर भले ही लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर उन्हें रेज्यूमे की क्या आवश्यकता है, लेकिन नोवोरेज्यूमे की ओर से पोस्ट किया गया ये रेज्यूमे आपको भी प्रेरित कर सकता है. साथ ही इस रेज्यूमे की डिजाइन से आप भी अपना रेज्यूमे बना सकते हैं.

मस्क की कुल संपति 20.3 बिलियन डॉलर यानि करीब 13 हजार करोड़ रुपये है.

वे साउथ अफ्रीका में बड़े हुए और 17 साल की उम्र में कनाडा आ गए. उसके बाद अमेरिका में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्नसेलवेनिआ में पढ़ाई की है.

मस्क पहले पे-पाल के को-फाउंडर थे.

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सबसे अमीर क्षेत्रीय पार्टी है सपा, दूसरे नंबर पर DMK

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में अपनी 634.96 करोड़ की संपति का ब्यौरा देते हुए 20 रीजनल पार्टियों की सूची में टॉप करते हुए सबसे अमीर रीजनल पार्टी साबित हुई है. उसके बाद डीएमके 257.18 करोड़ और एआईएडीएमके 224.84 करोड़ की संपति के साथ है.

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म यानी एडीआर की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2011-12 में सपा की कुल संपत्ति 212.86 करोड़ थी, जो वर्ष 2015-16 में 198 प्रतिशत बढ़कर 634.96 करोड़ हो गई है. वित्तीय वर्ष 2011-12 में एआईएडीएमके की कुल संपत्ति 88.21 करोड़ थी, जो वर्ष 2015-16 में 155 प्रतिशत बढ़कर 224.87 करोड़ हो गई है.

रीजनल पार्टियों की कुल संपत्ति को 6 मुख्य आधारों पर गिना गया है जिसमें, लोन, एडवांस, डिपॉज़िट्स, फिस्क्सड असेट्स, टीडीएस, इन्वेस्टमेंट्स और दूसरी संपतियां आती हैं.

लिस्ट में जुड़ी नई राजनीतिक पार्टियों में मार्च 2011 में रजिस्टर हुई YSR कांग्रेस और नवंबर 2012 में रजिस्टर हुई आम आजमी पार्टी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2012-13 में इन पार्टियों की कुल संपत्ति 1.165 करोड़ बताई गई, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 3.765 करोड़ हो गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, लिस्ट में तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ऋण के मामले में टॉप टू पर बनी हुई है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में टीआरएस द्वारा कुल ऋण 15.97 करोड़ बताया गया. जबकि वर्ष 2011-12 में टीआरएस ने कोई ऋण नहीं दिखाया था. दूसरा सबसे बड़ ऋण 8.186 करोड़ का टीडीपी पार्टी ने दिखाया.

इसके अलावा शिवसेना ने पॉज़िटिव ट्रेंड दिखाते हुए वर्ष 2015-16 में अपने ऋणों को कम किया है.

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दुनिया का 16वां महंगा शहर है मुंबई, जानें 1m डॉलर में कहां खरीद सकते हैं कितनी जगह

दुनिया के 20 महंगे शहरों की सूची जारी की गई है जिसमें मुंबई को 16वां स्थान दिया गया है। यह जानकारी नाइट फ्रैंक वेल्थ रिपोर्ट 2018 के जरिए सामने आई है। आपको बता दें कि साल 2016 में मुंबई को 15वां स्थान हासिल हुआ था। साल 2016 में आप मुंबई के भीतर 1 मिलियन डॉलर में 990.28 वर्गफीट जमीन खरीद सकते थे।

देश की वित्तीय राजधानी कही जाने वाली मुंबई की रैंकिंग में यह सुधार देश में धन के तेज सृजन के चलते देखने को मिला है। इस सूचकांक में चार प्रमुख संकेतकों को शामिल किया गया है: धन, निवेश, जीवनशैली और भविष्य। आपको बता दें कि साल 2016 के दौरान मुंबई 15वां सबसे महंगा शहर था। एक अनुमान के मुताबिक धनी आबादी के मामले में साल 2022 तक भारत चीन और जापान के बाद तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा।

साल 2016-17 के दौरान हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल में बढ़त देखने को मिली। करीब 21 फीसद लोग ऐसे थे जिनकी नेटवर्थ 5 मिलियन डॉलर या उससे ऊपर थी, वहीं 21 फीसद लोग ऐसे थे जिनकी नेटलर्थ 50 मिलियन डॉलर और उससे ऊपर की थी और करीब 18 फीसद लोग ऐसे थे जिनकी नेटवर्थ 500 मिलियन डॉलर और उससे ऊपर की थी।

जानिए 1 मिलियन डॉलर में आप दुनियां में कहां कहां कितनी जमीन खरीद सकते हैं

जर्मनी को पछाड़ धनकुबेरों के मामले में भारत तीसरे स्थान पर:

प्रतिष्ठित अमेरिकी बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स ने 2018 में विश्व के 2,208 धनकुबेरों की सूची जारी की है। सूची में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिनकी संपत्ति एक अरब डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) से अधिक है। 121 धनकुबेरों के साथ भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर आ गया है। भारत ने जर्मनी को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। 585 अमीरों के साथ अमेरिका पहले नंबर और 373 धनकुबेरों के साथ चीन दूसरे स्थान पर है।

पिछले साल के मुकाबले भारत में 19 धनकुबेर बढ़े हैं। सूची में 110 अरब डॉलर (करीब 7.15 लाख करोड़ रुपये) मूल्य की संपत्ति के साथ ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के मालिक जेफ बेजोस पहले स्थान पर रहे हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स को पछाड़ा है। भारतीयों में सबसे अमीर का ताज मुकेश अंबानी के सिर पर सजा है। उनके पास कुल 40.1 अरब डॉलर (करीब 2.61 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति है। वैश्विक सूची में उन्हें 19वें स्थान पर रखा गया है।

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खुशी मिलेगी हरिद्वार घूमकर, इन जगहों पर जरूर जाएं

भारत देश की धार्मिक आस्थाओं में हरिद्वार नगर का विशेष महत्व है। महादेव की नगरी हरिद्वार धार्मिक आस्था का केंद्र तो है ही पर्यटकों के बीच भी खासा आकर्षण रखता है। यहां की हरियाली, कलकल बहती गंगा नदी, शांत और मनोहर घाट पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करते हैं। अगर आप भी देव भूमि हरिद्वार जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। आपका मन प्रसन्न हो जाएगा…

हर की पैड़ी हो पहला पड़ाव
हरिद्वार आएं और हर पैड़ी न जाएं तो आपकी यात्रा एकदम अधूरी है। स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हर की पैड़ी। सबसे पहले यहां जाकर आप पावन-निर्मल गंगा में स्नान करें। आप चाहें तो यहां होनेवाली आरती में भी शामिल हो सकते हैं। आपका दिन बन जाएगा। इसके बाद हरिद्वार स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भारत माता मंदिर। यह 8 मंजिला मंदिर है और इसका हर फ्लोर भारत देश की सुंदरता और भारत माता की महानता को समर्पित है।

ये पर्वत हैं माता के निवास स्थान
स्टेशन से करीब 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पर्वत पर मां मंसा देवी विराजमान हैं। इनके दर्शनों के लिए आप चाहें तो उड़न खटोले से जा सकते हैं। आप अगर पहाड़ों पर चहलकदमी का मज़ा लेना चाहते हैं तो सड़क के रास्ते पैदल भी जा सकते हैं। वहीं, हिमालय की दक्षिण पर्वत माला के नील पर्वत के ऊपर स्थित है चंडी माता मंदिर। इस मंदिर की मुख्य मूर्ति की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी। जबकि मंदिर का निर्माण राजा सुचात सिंह ने 1929 में कराया। स्टेशन से इस मंदिर की दूरी करीब 5 किलोमीटर है।

यहां देखें, रात की आरती का मनोहर दृश्य
आप बह्मकुंड पर गंगा आरती के मनोहर दृश्य को देखना बिल्कुल न भूलें। गंगा आरती का दृश्य दिल में उतर जाता है। इस कुंड की हरिद्वार स्टेशन से दूरी 2 किलोमीटर है। साथ ही इंडिया टेंपल में आप भारतीय आस्था और संस्कृति से सुंदर नजारों को दर्शन कर सकते हैं। स्टेशन से इसकी दूरी करीब 6 किलोमीटर है।

मां आनंदमयी आश्रम और दक्ष प्रजापति मंदिर, कनखल
माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति के नाम पर बना है दक्ष प्रजापति मंदिर। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कनखल स्थित यही वह स्थान है जहां राजा दक्ष ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया और भगवान भोलेनाथ को नहीं बुलाया। इसी जगह पर माता सती ने कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। हरिद्वार स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है मां आनंदमयी आश्रम। यहां प्रसिद्ध संत मां आनंदमयी ने समाधि ली थी। यह बहुत सुंदर और शांत जगह है।

ऋषिकेश में सबसे महत्वपूर्ण
ऋषिकेश स्थित त्रिवेणी घाट की सुंदरता आपको मोह लेगी। यह घाट सुकून से कुछ पल बैठने के लिए बेहद प्यारी जगह है। शिव-पार्वती और गंगा के चरणों में बैठकर कुछ देर जरूर रहें। साथ ही ऋषिकेष स्थित नीलकंठ महादेव का मंदिर देवभूमि पर स्थित वह स्थान है, जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन में निकला विष पिया था। हरिद्वार स्टेशन से यहां की दूरी करीब 30 किलोमीटर है।

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दुनिया का सबसे आलिशान इंटीरियर हैं मुकेश अम्बानी के इस घर में. देखें घर के अन्दर का अद्भुत नजारा

भारत के सबसे अमीर बिजनेस मैन मुकेश अंबानी की जिंदगी शानों-शौकत से भरी पड़ी हैं. देश में ऐसा कोई नहीं होगा जो मुकेश अम्बानी के बारे में नहीं जानता होगा. यदि केवल उनके घर की बात की जाए तो उनका घर मुंबई में किसी टूरिस्ट स्पोट से कम नहीं हैं. मुकेश अम्बानी ने अपने इस खूबसूरत महल का नाम एंटीलिया रखा है. इस घर की कीमत भी करोड़ों में नहीं बल्कि अरबों में गिनी जाती है. आइए जानिए मुकेश अंबानी के घर के इंटीरियर के बारे में.

कीमत


मुकेश अंबानी का घर करीब 4,00,000 स्केवयर फुट की जगह में बना हुआ है और इसे बनाने में कुल 11 हजार करोड़ रूपए का खर्चा किया गया है. मुंबई में बने इस आलीशान घर को दुनिया के सबसे मंहगे घरों में गिना जाता है.

द्वीप के नाम पर घर

मुकेश अम्बानी ने अपने घर का नाम अंटलाटिक महासागर के एक पुराने द्वीप के नाम पर एंटीलिया रखा हैं

घर का इंटीरियर

घर का इंटीरियर इस तरह से बनाया गया है कि अगर 8 रिक्टर स्केल भूकंप भी आ जाए तो इसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

सर्व सुविधा युक्त है

27 मंजिलों वाले इस घर में 600 लोग काम करते हैं. इस घर की नीचे वाली 6 मंजिलों में सिर्फ पार्किंग के लिए ही जगह बनाई गई है और यहां करीब 168 कारें एक समय में पार्क की जा सकती हैं. पार्किंग के ऊपरी मंजिल यानी 7वें फ्लोर पर 50 सीटों वाला सिनेमा हॉल है और उसके ऊपर एक आउटडोर गार्डन बनाया गया है.

इन्होने बनाया है

एंटीलिया का इंटीरियर डिजाइन शिकागो के रहने वाले आर्किटेक्ट पर्किन्स ने किया है. इस बंगले की छत पर 3 हेलीपैड रखने की भी सुविधा है. एंटीलिया में इतने कमरे है कि गिनते गिनते थक जाओगे. और हर कमरे का इंटीरियर एक-दूसरे से अलग है.

मंदिर भी है इस घर में

मुकेश अंबानी के इस आलीशान घर में 9 लिफ्ट लगी हैं. यही नहीं यहां उन्होंने एक स्पा और मंदिर भी बनवा रखा है. एंटीलिया में सबके रहने के लिए अलग-अलग फ्लोर है और इसके अंदर ही योगा स्टूडियो, आइसक्रीम रूप और तीन से ज्यादा स्वीमिंग पूल हैं.