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अविराम गौसेवा के लिए जर्मन मूल की मथुरा निवासी अम्मा जी को पद्मश्री। जानें गौसेवा से जुड़ी यह अनोखी दास्तां!

42 वर्षों से मथुरा में गोसेवा कर रही जर्मन मूल की सुदेवी गोवर्धन “अम्मा जी” को पद्मश्री मिलने पर बहुत बहुत बधाई।

पाँच बीघा के क्षेत्र में फैले सुरभि गौशाला का संचालन कर रही सुदेवी ने 1,500 से भी अधिक गायों को पाल रखा है, जिनकी वह लगातार देखभाल करती हैं। इन गायों में से अधिकतर बीमार, नेत्रहीन या अपाहिज हैं। इनमें से 52 गायें नेत्रहीन है जबकि 350 पैरों से अपाहिज है। उनके पैरों की नियमित मरहम-पट्टी की जाती है।

जर्मन महिला फ्रेड्रिन इरिन ब्रूनिंग उर्फ़ ‘सुदेवी दासी गोवर्धन’ को केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। सुदेवी राधाकुंड धाम में विगत 42 वर्षों से गौसेवा कर रहीं हैं। बीमार और असहाय गायों की सेवा करने के कारण उन्हें ‘गायों की मदर टेरेसा’ भी कहा जाता है। उन्हें पद्म सम्मान मिलने का समाचार पाकर स्थानीय निवासी भी ख़ुश हुए और गौशाला पहुँच कर उन्होंने सुदेवी को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्हें शनिवार (मार्च 16, 2019) को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

सुदेवी के अनुसार, जब मंत्रालय द्वारा उन्हें पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई, तब उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। फिर स्थानीय निवासियों ने उन्हें इस से अवगत कराया। ये तब की बात है, जब सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा की थी।

अपने माता-पिता की इकलौती संतान फ्रेड्रिन 42 वर्ष पहले भारत भ्रमण पर आई थी। इस दौरान उन्होंने ब्रज आकर श्रीकृष्ण के भी दर्शन किए। कृष्ण-भक्ति ने उन्हें अपनी तरफ ऐसा खींचा कि उन्होंने भारत में रहने की ठान ली। ब्रज में उन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिसके बीमार होने के बाद उन्होंने उसकी काफ़ी देखभाल की। इसके बाद वह जहाँ भी बीमार गाय देखती, उसकी देखभाल और सेवा में लग जाती। इसके बाद तो जैसे उन्होंने गोसेवा को ही अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन ही गोसेवा को समर्पित कर दिया।

सुदेवी के पिता तीस वर्ष पहले तक दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में कार्यरत थे। इकलौती संतान होने के कारण उन्होंने पिता से मिलने वाली सारी धनराशि को गोसेवा में ही ख़र्च किया। उनकी गौशाला में गायों के लिए एक स्पेशल एम्बुलेंस भी है। अगर किसी गाय की मृत्यु निकट आ जाए और उसके बचने की कोई संभावना न रहे, तब सुदेवी उसे गंगाजल का सेवन कराती है। मरणोपरांत गायों के शरीर का अंतिम संस्कार भी पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है।

सुदेवी बताती हैं कि गायों की सेवा में हर महीने ₹35 लाख तक ख़र्च होते हैं। गायों का इलाज डॉक्टरों द्वारा करवाया जाता है। सुदेवी दानदाताओं और जर्मनी से आने वाले रुपयों की मदद से इस गौशाला का संचालन कर रहीं हैं। सुरभि गौशाला में 70 से 80 कर्मचारी कार्यरत हैं। किराए की भूमि पर गौशाला चला रहीं सुदेवी को उम्मीद है कि उन्हें इस पुरस्कार के मिलने के बाद गौशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने इस बात की भी उम्मीद जताई कि अब गोसेवा के रास्ते में आने वाली अड़चनें दूर होंगी।

सुदेवी ने बताया कि अगर गौशाला के लिए उन्हें भूमि मिल जाती है तो मासिक किराए में ख़र्च हो रहे रुपयों की बचत होगी और उसका उपयोग गौसेवा में किया जाएगा। हाल ही में जब उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी तब उन्होंने मथुरा की सांसद हेमा मालिनी से लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक के दरवाज़े खटखटाए थे। इसके बाद उन्हें वीजा मिल गया था। सुदेवी अविवाहित हैं और अभी भी एक झोपड़ी में ही रहती हैं। स्थानीय निवासियों ने उन्हें भारतीय नागरिकता देने की भी माँग की है। उनके अतुलनीय सेवा कार्य के लिए हम सदा आभारी रहेंगे।

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ताजमहल Ownership केस: सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां का वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
– ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
– पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, “शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।”
– कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
– सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
– एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
– बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
– एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
– 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
– बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

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भारत बंद के दौरान बिहार में हिंसा, आरा में फायरिंग और गया में लाठीचार्ज

SC/ST एक्ट में हुए बदलावों के विरोध में 2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. अब आरक्षण के विरोध में आज भारत बंद बुलाया गया है. इस बंद को लेकर देश के सभी राज्यों की पुलिस हाईअलर्ट पर है, गृहमंत्रालय ने भी सभी राज्यों को सख्ती बरतने के लिए कहा है. कई राज्यों में भारत बंद के चलते धारा 144 लागू की गई है. ये भारत बंद आरक्षण के विरोध में बुलाया गया है.

बिहार – आरा नगर थाने में आनंदनगर इलाके में बंद समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसक झड़प हुई है. दोनों तरफ से फायरिंग की जा रही है. इसके अलावा आरा में ही सैकड़ों युवाओं ने पटना पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया. आक्रोशित युवाओं ने रेल पटरी पर उतरकर आरक्षण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. आरा में पत्थरबाजी के दौरान सात लोग घायल हुए हैं. घायल में एसडीओ भी शामिल हैं. गया में भारत बंद के दौरान उपद्रवियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है. कई उपद्रवियों को गिरफ्तार भी किया गया है. आरा में धारा 144 लागू की गई है.

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 बिहार के वैशाली में भी आरक्षण के विरोध में बंद के दौरान कई जगह से प्रदर्शन और जाम की तस्वीर सामने आई हैं. आरक्षण विरोधियों ने कई जगह रेल ट्रैक पर आगजनी कर परिचालन को भी बाधित किया है.

इसके अलावा पटना-कोलकाता रेलखंड का परिचालन ठप हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने बरौनी पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया है. कई लोग रेल पटरी पर बैठकर ही प्रदर्शन कर रहे हैं. दरभंगा की ललित नारायण मिश्रा यूनिवर्सिटी ने अपने बीए के पेपर को टाल दिया है. इसके अलावा कई प्राइवेट स्कूलों को भी बंद किया गया है.

आरक्षण के खिलाफ भारत बंद के दौरान भोजपुर में आक्रोशित युवाओं ने सड़क पर आगजनी कर आवागमन बाधित कर दिया. नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा मोड़ के समीप आरक्षण के खिलाफ नारे लगा रहे युवाओं ने 84 आरा बक्सर मुख्य मार्ग को सुबह से ही जाम लगाना शुरू कर दिया.

बिहार के मुजफ्फरपुर में हिंसा के दौरान लोगों ने तीन राउंड फायरिंग की है. समर्थकों ने पुलिस और मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी भी की.

केंद्रीय मंत्री से बदसलूकी

भारत बंद का सबसे ज्यादा असर बिहार में दिख रहा है. इस दौरान हाजीपुर में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा जाम में फंस गए. बंद समर्थकों ने केंद्रीय मंत्री से बदसलूकी भी की गई. ये घटना हाजीपुर के शुभाई की है.

जो युवा नारेबाजी कर रहे थे उनका कहना था कि आरक्षण जाति के हिसाब से नहीं बल्कि आर्थिक रुप से कमजोर लोगों को मिलना चाहिए ताकि हर वर्ग के लोग समाज की मुख्यधारा में आ सके. इसके अलावा बिहार में NH 219 के पास रतवार गांव में लोगों ने सड़क को जाम कर दिया है और नारेबाजी कर रहे हैं. मुजफ्फरपुर में मंगलवार सुबह पटना रोड के पास टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया. इसके अलावा भगवानपुर में मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया गया है.

बिहार में भी भारत बंद के चलते सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज बिहार में ही हैं, इसलिए सुरक्षा वैसे ही बढ़ाई गई है. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि केंद्र सरकार की एंटी-दलित छवि बनती जा रही है. उन्होंने कहा कि एक साल में सबकुछ ठीक हो जाएगा, सरकार दलितों के लिए बहुत कुछ कर रही है.

उत्तर प्रदेश –

भारत बंद का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिख रहा है. मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर में रविवार से ही सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सहारनपुर में अग्रिम आदेशों तक इंटरनेट की सुविधा को बंद कर दिया गया है. इसके अलावा हापुड़ और मुजफ्फरनगर में भी इंटरनेट की सेवा बंद है. वहीं फिरोजाबाद और मुजफ्फरनगर में स्कूलों को भी बंद रखा गया है. रविवार रात से ही कई इलाकों में पुलिस ने मार्च किया. अभी शुरुआत में मेरठ में भारत बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है.

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 No impact of #BharatBandh call seen as yet in Meerut. MHA had issued an advisory that some groups would be protesting against caste-based reservations in jobs and education.

पंजाब

 पंजाब के फिरोजपुर में भारत बंद के दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प हो गई. दुकान बंद करवाने के दौरान लोगों ने मोटरसाइकिल पर पथराव किया. इस दौरान लोगों ने तलवारों से हमला किया, जिसमें दो घायल हुए हैं.

मध्य प्रदेश –

2 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा मध्यप्रदेश में ही हुई थी. इस बार भारत बंद को देखते हुए राज्य के कई शहरों में धारा 144 लागू की गई है. भिंड, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, श्योपुर, शिवपुरी में इंटरनेट की सुविधा पर रोक लगा दी गई है. भिंड और मुरैना में कर्फ्यू लगा दिया हया है. पैरामिलिट्री फोर्स की 6 कंपनियों को तैनात किया गया है.

ग्वालियर में उपद्रवियों से निपटने के लिए 2 हज़ार से ज्यादा पुलिस बलों को तैनात किया गया है. इसके अलावा सीआरपीएफ को भी तैनात किया गया है. भोपाल, रायसेन, टीकमगढ़ में धारा 144 को लागू किया गया है. वहीं सागर में किसी भी तरह के धरने, रैली और जुलूस पर प्रतिबंध लगाया गया है.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर, मुरैना और भिंड में हुई हिंसा के बाद, उच्च जातियों के संगठनों द्वारा 10 अप्रैल को प्रस्तावित भारत बंद और 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है.

राजस्थान –

राजस्थान में इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया गया है. जयपुर में मोबाइल इंटरनेट सुविधा पर रोक लगा दी गई है और शहर में धारा 144 लागू की गई है.

केरल – 

केरल में आज CPIM भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन करेगी. CPIM राज्य के हर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेगी. CPIM का आरोप है कि बीजेपी के राज में दलितों पर अत्याचार बढ़ा है.

गृह मंत्रालय ने मुहैया कराई सुरक्षा

आपको बता दें कि भारत बंद को देखते हुए देशभर में गृहमंत्रालय ने 30 अर्धसैनिक बलों की कंपनियों को तैनात किया है. इसमें 14 कंपनी अर्धसैनिक बल की उत्तर प्रदेश में, 4 कंपनी सीआरपीएफ की मध्यप्रदेश में, 8 कंपनी CRPF की राजस्थान में और बिहार में CRPF की 4 कंपनियां तैनात की गई हैं.

गृह मंत्रालय ने सोमवार को ही सभी राज्यों को एडवाइज़री जारी की थी. इसमें राज्यों के डीएम और एसपी को अलर्ट जारी किया गया था और बंद के दौरान सतर्क रहने को कहा गया था. आपको बता दें कि ये बंद किसी संगठन के द्वारा नहीं बुलाया गया है. बल्कि 2 अप्रैल के बाद लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों के जरिए ही बुलाया गया है.

आपको बता दें कि बीते 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में बदलावों के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. इस भारत बंद में काफी हिंसा हुई थी, जिसमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. इस दौरान उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में काफी हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी.

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SC/ST एक्ट में बदलाव को लेकर विरोध में हिंसक प्रदर्शन, 8 की मौत; कई शहरों में कर्फ्यू

अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एसएसी/एसटी एक्ट) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने देशभर में विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुअा। कई जगह तोड़फोड़ व अगजनी की घटनाएं सामने अाई है। वहीं मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान 5 लोगों की मौत हो गई है।

कई जगह ट्रेनें रोकी गई हैं। इसके अलावा कुछ शहरों में झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एससी/एसटी एक्ट में कई बदलाव हुए थे। हालांकि, सरकार ने अब इस मामले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

पुनर्विचार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
केन्द्र सरकार ने एससी एसटी एक्ट में तत्काल एफआइआर और तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। सरकार ने कोर्ट से याचिका पर खुली अदालत में बहस और सुनवाई की मांग की है। याचिका में सरकार ने तर्क दिया कि फ़ैसले से कानून का उद्देश्य कमज़ोर होगा। पुनर्विचार याचिका मे सरकार ने अभियुक्त के लिए अग्रिम जमानत के रास्ते खोलने का विरोध किया और कहा कि इसका अभियुक्त दुरुपयोग करेगा और पीड़ित को धमका सकता है, साथ ही जांच भी प्रभावित कर सकता है। सरकार ने कहा कि इस कानून मे अभियुक्त को अग्रिम जमानत का हक न देने से अनुच्छेद 21 में उसे मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन नही होता। एससीएसटी कानून में ये 1973 मे नये अधिकार के तौर पर जोड़ा गया था।उधर एससी एसटी पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आल इंडिया फ़ेडरेशन आफ एससी एसटी आर्गनाइजेशन की ओर से आज सुप्रीम कोर्ट मे अलग से नई याचिका दाखिल की गई, जिसमें कोर्ट से फ़ैसले पर रोक लगाने और मामले पर विचार कर फ़ैसले मे बदलाव की मांग की गई है। याचिका पर वकील मनोज गोरकेला ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ से जल्द सुनवाई की मांग की। लेकिन कोर्ट ने जल्द सुनवाई की मांग ठुकराते हुए कहा कि मामले पर नियमित क्रम मे ही सुनवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक की मौत, लगाया गया कर्फ्यू

मुरैना में विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। हिंसा के उग्र होने के बाद यहां कर्फ्यू लगा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश के मुरैना शहर में जमकर हिंसा हुई। यहां विरोध प्रदर्शन के दौरान हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने की वजह से हालात बेकाबू हो गए। मुरैना में बंद समर्थकों ने बस स्टैंड, बैरियर चौराहे पर पथराव किया। इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा तो मुरैना रेलवे स्टेशन पर उपद्रव शुरू हो गया। बंद समर्थकों ने यहां पटरियों पर डेरा जमा लिया, जिसके बाद ट्रेनों की आवाजाही थम गई है। मीडिया खबरों के मुताबिक, ग्‍वालियर में भारत बंद के दौरान हुई हिंसक झड़पों में 19 लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से 2 की मौत हो गई है। आईजी कानून एवं व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने बताया कि मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अभी तक 5 लोगों की मौत हो गई है।

दिल्ली में पुलिस बल पर पथराव, ठप हुए राजमार्ग

एसटी-एसी एक्ट 1989 में संशोधन के खिलाफ दिल्‍ली एनसीआर में भारत बंद ने हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुई। इससे निपटने के लिए पुलिस ने हल्‍के बल का प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने एनएच 24 और दिल्ली-देहरादून हाइवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर जाम लगा दिया। इससे कई राजमार्ग पर यातायात व्‍यवस्‍था पूरी तरह से ठप हो गई। गाजियाबाद में रेलवे फटकी पर जाम के कारण ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है।

बिहार में दिन चढ़ने के साथ बढ़ता जा रहा भारत बंद का असर
बिहार में यह बंद असरदार दिख रहा है। बिहार में पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है। बंद के कारण जगह-जगह रेल व सड़क यातायात प्रभावित हैं। बंद समर्थकों ने पटना व हाजीपुर के बीच उत्तर व दक्षिण बिहार की लाइफलाइन ‘महात्मा गांधी सेतु’ को जाम कर दिया है। इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। बंद के दौरान वैशाली में एक कोचिंग संस्‍थान को बंद कराने के दौरान छात्रों से बंद समर्थकों की भिड़त हो गई। इसमें दर्जनों छात्र घायल बताए जा रहे हैं। बंद समर्थक पटना सहित राज्‍य के विभिन्‍न जगहों पर एंबुलेंस सहित आवश्‍यक सेवाओं की गाडि़यों को भी रोक रहे हैं।

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। राजस्‍थान के डीजीपी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अलवर में फायरिंग हुई, जिसमें एक शख्‍स की मौत हो गई है। कुछ क्षेत्रों में पत्‍थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। हिंसक प्रदर्शन कर रहे काफी लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई और धारा 144 लगा दी गई है, ताकि हालात ज्‍यादा न बिगड़ें। बाड़मेर में दलित और पुलिस में झड़प हो गई है। इस झड़प में 25 लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू के गोले दागे। दूसरी तरफ करणी सेना भी दलितों के प्रदर्शन के विरोध में सड़कों पर उतर आई है। जिसकी वजह से दोनों गुटों के बीच भिड़ंत हो गई। सड़क पर दोनों गुट भिड़ गए। बाड़मेर में वाहनों को आग लगा दी गई।

उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में हालात बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं। मुजफ्फरनगर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के मरने की सूचना है। मृतक का नाम अमरीश निवासी गादला, थाना भोपा है। इसकी बॉडी जिला अस्पताल लाई गई है। रेलवे के कर्मचारी प्रताप की कमर में भी गोली लगी है, उसकी हालत भी गंभीर बनी हुई है। उत्‍तर प्रदेश के डीआइजी ने बताया कि प्रदेश के सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्‍से में ही हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें 2 शख्‍स की मौत हो गई है और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश के 90 प्रतिशत हिस्‍से में शांति का माहौल है। प्रदर्शनकारियों से सख्‍ती से निपटा जा रहा है। पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया। हम विश्‍वास दिलाते हैं कि किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। आजमगढ़ में एक बस पर हमला कर दिया और उसमें आग लगा दी गई। मेरठ तथा आगरा व मैनपुरी में दलित संगठन से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए हैं। कई जगह पर प्रदर्शनकारी ट्रेन के सामने खड़े हो गए हैं। एससी-एसटी एक्ट पर फैसले का आगरा में भी कई संगठनों ने काफी विरोध किया है। बसपा के कार्यकर्ता यहां शहर के सभी बाजारों में भीड़ जबरन बाजार बंद करा रही है। यह लोग विरोध में लाठी-डंडे के साथ सड़क पर उतरे और दुकानों में काफी लूटपाट करने के साथ ही महिलाओं से भी छेड़छाड़ की। एंबुलेंस में फंसे मरीजों के साथ अभद्रता की गई। शाहगंज क्षेत्र के बारह खंभा के पास लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इसके साथ ही यहां एत्माद्दौला के टेढ़ी बगिया में चक्का जाम किया गया है। करीब एक घण्टे से जाम के चलते रामबाग तक बड़ी संख्या में वाहनों की कतार लग गई है। जगह-जगह पर इसको लेकर प्रदर्शन हो रहा है। इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है।

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद दलित संगठनों के दो अप्रैल को भारत बंद के मद्देनजर पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों की सरकारों ने चौकसी कड़ी कर दी है। पंजाब मे सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय व बैंक सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद करने के आदेश हैं।

पंजाब में दलितों के बंद का मिलाजुला असर
एससी-एसटी एक्‍ट संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनों द्वारा किए गए बंद के आह्वान का पंजाब के अधिकांश इलाकों में मिलाजुला असर दिख रहा है। जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, पटियाला सहित अन्य जिलों में दलित संगठनों के लोग सक्रिय हैं। संगठनों के कार्यकर्ता तड़के से ही सड़कों पर उतर आए। अमृतसर में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने सचखंड एक्सप्रेस रोक दी, जिससे यात्री परेशान रहे। किसी भी आशंका से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के क़ड़े इंतजाम किए हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने कल ही प्रदेश में सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालयों को सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही कल रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद कर दी गई थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के 12 हजार अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया है।

झारखंड में पुलिस ने किया लाठी चार्ज
रांची में बंद समर्थक सड़क पर उतर चुके हैं। दुकानों को बंद करवाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, रांची के आदिवासी हॉस्टल के बंद समर्थकों ने जमकर उपद्रव किया। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और उन पर लाठी चार्ज किया।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया था। कोर्ट ने कहा था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच हो। कोर्ट ने कहा था कि केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है।

राजद, सपा, कांग्रेस और शरद का समर्थन

सोमवार को बुलाए गए भारत बंद को बिहार में राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। दलित संगठनों ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में सोमवार को आहूत भारत बंद का समर्थन किया है।

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विपक्ष के बर्हिगमन के बीच विधानसभा में UP-COCA विधेयक पारित

विपक्ष के व्यापक विरोध और सदन से बर्हिगमन के बीच विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध निरोधक विधेयक (यूपीकोका)आज एक बार फिर पारित हो गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधेयक पेश करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिये जरुरी बताया, जबकि विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका जमकर दुरुपयोग किया जायेगा। विपक्ष का कहना था कि विधेयक में कई खामियां हैं, इसलिये इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया जाये। इससे पहले विधानसभा से गत 21 दिसंबर को विधेयक पारित होने के बाद विधान परिषद भेजा गया था।

परिषद ने विधेयक को प्रवर समिति के हवाले कर दिया था। प्रवर समिति से बिना संशोधन के विधेयक परिषद वापस कर दिया गया था। परिषद में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिये सरकार ने आज इसे फिर सदन में पेश किया। विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच यूपीकोका विधेयक पारित हो गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे मंजूरी के लिये राज्यपाल रामनाईक के पास भेजा जायेगा। अगर जरूरी हुआ तो राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी संदर्भित कर सकते है। सरकार का दावा है कि यूपीकोका से भूमाफिया, खनन माफिया समेत अन्य संगठित अपराधों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। सफेदपोशों को बेनकाब करने वाले इस कानून में 28 ऐसे प्रावधान है जो गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) का हिस्सा नही थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपीकोका के जरिये फिरौती के लिये अपहरण,अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री, बाहुबल के बूते ठेकों को हथियाना, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और वन संपत्तियों का दोहन,वन्य जीवों का शिकार और बिक्री, फर्जी दवाओं का कारोबार, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा, रंगदारी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा। इसके जरिये संगठित अपराध करने वाले लोगों की मदद करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।

योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ यह कानून प्रभावी होगा। पांच वर्ष में एक से अधिक मामलों में जिसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होंगें, उन्हीं पर यह कानून लागू होगा। यूपीकोका लगाने से पहले पुलिस महानिरीक्षक या उपमहानिरीक्षक से अनुमोदन लेना जरुरी होगा। इसमें अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले भी इन्हीं अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग रोकने के लिये उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण बनाया जायेगा। इसमें प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। इसके लिये प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया जायेगा। ऐसी ही समिति जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाँ, समाज की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये एक साल में किये गये कार्यों का सिलसिलेवार ब्याैरा दिया।

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कभी न चलने वाली सरकारी बंदूकें उगल रही हैं गोलियां, अब तक 1350

यूपी में पिछले 11 महीनों की योगी सरकार में करीब 1350 एनकाउंटर किए हैं. यानी हर महीने सौ से भी ज्यादा एनकाउंटर. इस दौरान 3091 वॉन्टेड अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं जबकि 43 अपराधियों को मार गिराया गया. यूपी पुलिस का दावा है कि मरने वालों बदमाशों में 50 फीसदी इनामी अपराधी थे, जिन्हें पुलिस शिद्दत से तलाश रही थी.

यूपी पुलिस के इन आंकड़ों ने अपराधियों में इस कदर खौफ भर दिया कि पुलिस एक्शन के डर से पिछले 10 महीने में 5409 अपराधियों ने बाकायदा अदालत से अपनी ज़मानत ही रद्द कराई है ताकि ना वो बाहर आएं और ना गोली खाएं. एक तरफ यूपी की सरकारी बंदूकें चलती ही नहीं थी, और अब अचानक वहीं बंदूकें दनादन गोलियां उगल रही हैं.

बदमाशों में एनकाउंटर का खौफ

बीते दिनों शामली के झिंझाना इलाके में एनकाउंटर के डर से हत्यारोपी ने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर किया था. हत्यारोपी ने एसपी अजय पाल शर्मा को एक शपथ पत्र दिया है, जिसमें लिखा है कि वह भविष्य में किसी भी अपराध में शामिल नहीं होंगे.

इनामी बदमाश ने थाने में किया सरेंडर

हापुड़ में 15 हजार इनामी एक बदमाश ने थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया. बदमाश की पहचान अंकित के रूप में हुई है. शामली के कैराना में योगी सरकार के एनकाउंटर का असर देखने को मिला, जहां दो सगे भाई ने अपने हाथ में पोस्टर लेकर घूमते नज़र आए. उस पोस्टर पर लिखा था कि वे लोग अब से अपराध नहीं करेंगे.

यूपी में एनकाउंटर का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 11 महीने के कार्यकाल में अब तक प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के बीच 1350 एनकाउंटर हो चुके हैं. 3091 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. वहीं, 43 अपराधियों को पुलिस ने मार गिराया. इस मामले में पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे आगे रहा.

करीब 800 हिस्ट्रीशीटरों ने लिया शपथ

सीतापुर के एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर हरगांव, सदरपुर और इमिलिया सुल्तानपुर समेत जनपद के लगभग सभी थानों में शपथ दिलाई जा रही है. एसपी आनंद कुलकर्णी ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया कि अब तक जिले के करीब 800 नामी अपराधी और हिस्ट्रीशीटर शपथ लेकर एफिडेविट दे चुके हैं कि वो भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं रहेंगे. उन्होंने बताया कि उनका मकसद इन बदमाशों को समाज की मुख्यधारा में लाना है.

एनकाउंटर पर सवाल

यूपी पुलिस द्वारा लगातार किए जा रहे एनकाउंटर पर सवाल भी उठने लगे हैं. यूपी राज्‍य मानवाधिकार आयोग ने यूपी पुलिस से चार मुठभेड़ से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है. बताया जाता है कि इन मुठभेड़ों में मारे गए लोगों के परिजनों का आरोप है कि यूपी पुलिस ने फर्जी तरीके से एनकाउंटर किए हैं जबकि मारे गए लोगों का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है.

1982 में हुआ था पहला एनकाउंटर

एनकाउंटर यानी मुठभेड़ शब्द का इस्तेमाल हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बीसवीं सदी में शुरू हुआ. एनकाउंटर का सीधा-सीधा मतलब होता है. बदमाशों के साथ पुलिस की मुठभेड़. हिंदुस्तान में पहला एनकाउंटर 11 जनवरी 1982 को मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था.

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लगभग हर क्षेत्र से आ चूके हैं होली के नतीजों की ताज़ा तस्वीरें!?

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मुरैना: खेत में बैठ कर शराब पी रहा था युवक, नशे में सांप को काटा, सांप की मौत

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद हैरतअंगेज खबर सामने आई है. सबलगढ़ तहसील के पचेर गाँव में शराब के नशे में धुत एक युवक ने एक सांप को दबोच लिया और उसे काट लिया, जिससे सांप की मौत हो गई. हाल ही में एक ऐसा मामला यूपी से भी सामने आया था.

शराबी युवक भी बाद में बेहोश होकर गिर पड़ा. जिला अस्पताल में भर्ती युवक को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है.

जिला अस्पताल के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ राघवेंद्र यादव ने बताया कि युवक कल्याण जालिम सिंह कुशवाह अपने खेत पर शराब पी रहा था. तभी वहां एक जहरीला सांप निकला. सांप को देखते ही वह बौखला गया और उसने झपट्टा मार सांप को दबोच लिया और उसे काट लिया. सांप ने कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया.

डॉ यादव ने बताया कि सांप का जहर जैविक प्रोटीन होता है. बॉडी में इंजेक्ट होने और खून में मिलने के बाद ही इसका असर होता है. युवक को ज़हर का असर नहीं हुआ. वह अधिक शराब पीने और घबराहट की वजह से बेहोश हो गया था. होश में आने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया.

यूपी के हरदोई में भी हुआ था ऐसा मामला

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में किसान सोनेलाल (40) अपने जानवरों के लिए खेत से चारा लेने गए थे. चारा बीनते समय झाड़ियों में छुपे सांप ने सोनेलाल को काट लिया. सांप के काटने के बाद सोनेलाल ने बिना डरे उसे पकड़ लिया और सांप के फन को दांत से काटकर खा गया, और गांव लेकर आ गया.

गांव के लोगों ने उसे समझाया मगर उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ. जब गुस्सा शांत हुआ तो उसने सांप को फेंक दिया. किसान के इस काम को देखकर लोग हैरत में पड़ गए. परिजनों ने सीएचसी में उसे भर्ती कराया जहां उसे प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गयी. अब उसकी हालत ठीक है लेकिन चिकित्सक भी इस घटना को लेकर हैरान है.

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Mission 2019 के लिए बनेगा सबसे बड़ा हथियार यूपी इंवेस्टर्स समिट

देश के सबसे बड़े सूबे के तौर पर उत्तर प्रदेश की पहचान होती है। एक कहावत भी है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। लेकिन उत्तर प्रदेश को एक और नाम से जाना जाता है जिसे बीमारू कहते हैं। पीएम मोदी 2014 के चुनाव से पहले अपनी जनसभाओं में कहा करते थे कि एक ऐसा सूबा जो प्राकृतिक संसाधनों से लैस है,एक ऐसी धरती जहां के लोग कुछ कर गुजरने की माद्दा रखते हैं लेकिन नीतियों के अभाव में अदूरदर्शी निर्णयों की वजह से भारत मां का ये हिस्सा विकास की रेस में पिछड़ गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का असाधारण प्रदर्शन रहा और इस बात की उम्मीद जगने लगी कि शायद अब कुछ बदलाव की बयार महसूस होगी। यूपी सरकार अपने कार्यकाल के एक साल पूरा करने से पहले दो दिवसीय इंवेस्टर्स समिट के जरिए ये संदेश देने की कोशिश कर रही है यूपी में अब निवेश सुरक्षित है और उस दिशा में सरकार एक कदम बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

इंवेस्टर्स समिट के पहले दिन 4 लाख 28 हजार करोड़ के एक हजार से ज्यादा करार पर दस्तखत हुए। इन करारों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि देश का दूसरा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को बुंदेलखंड में स्थापित किया जाएगा जिससे ढ़ाई लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकेगा। लेकिन एक सवाल ये भी है कि क्या ये यूपी की सूरत और सीरत को बदलने की कवायद है या 2019 के लक्ष्य को साधने की कोशिश है। इस गूढ़ सवाल का जवाब तलाशने से पहले ये जानना जरूरी है कि पीएम मोदी इन्वेस्टर्स समिट में क्या कुछ कहा।

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दस लाख से अधिक छात्रों ने यूपी बोर्ड परीक्षा छोड़ बनाया नया रिकॉर्ड

यूपी बोर्ड परीक्षा में नया रिकॉर्ड बना है। दस लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा छोड़ दी है। यह आंकड़ा परीक्षा शुरू होने के महज चौथे दिन का है। पिछले वर्षों में पूरी परीक्षा के दौरान अधिकतम साढ़े छह लाख छात्रों ने ही इम्तिहान से किनारा किया। बड़ी संख्या में परीक्षा छोडऩे का कारण नकल पर प्रभावी अंकुश लगना है। इसमें सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, परीक्षा केंद्रों में संसाधन जुटाना और शिक्षा व प्रशासन के अफसरों का सामंजस्य नकलचियों पर भारी पड़ा है।

इसे संयोग ही कहेंगे कि बीते वर्ष योगी सरकार 19 मार्च को सत्तारूढ़ हुई तो उसके चंद दिन पहले (16 मार्च से) ही यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हुई। मंत्रिमंडल गठन व विभाग आवंटन होते परीक्षाएं अंतिम दौर में पहुंच गईं। ऐसे में सरकार उसी समय से अगले वर्ष की परीक्षा तैयारियों में जुट गई। 2018 में परीक्षा शुरू होने की तारीख व विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम तय समय से काफी पहले घोषित किया गया, ताकि परीक्षार्थियों को तैयारी करने का पूरा मौका मिले, फिर परीक्षा केंद्रों के संसाधन व उनके निर्धारण पर फोकस किया गया।

पहली बार केंद्र निर्धारण का कार्य जिला व मंडल स्तर से छीनकर बोर्ड मुख्यालय को सौंपा गया, जहां कंप्यूटर के जरिए केंद्र बनाए गए। इसका यह असर रहा कि केंद्रों की संख्या पिछले वर्षों से करीब ढाई हजार घट गई। सरकार ने परीक्षा की निगरानी को हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य किया। जिन केंद्रों पर छात्राएं अपने स्कूल में परीक्षार्थी बनी वहां अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक सहित नकल रोकने के अन्य प्रभावी इंतजाम किए गए। अपर मुख्य सचिव पिछले कुछ महीनों से लगातार हर कार्य की खुद मानीटरिंग कर रहे थे, पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए वीडियो कांफ्रेसिंग करके नकल रोकने के सख्त निर्देश दिए। इसमें जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक व मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को नकल के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

सरकार के सामूहिक प्रयासों का ही परिणाम रहा कि परीक्षा के पहले दिन से ही नकलची छात्र-छात्राओं ने किनारा करना शुरू कर दिया और महज चौथे दिन ही परीक्षा छोडऩे वालों का आंकड़ा दस लाख पार कर गया है। 10 लाख 44 हजार 619 यूपी बोर्ड के इतिहास में परीक्षा छोडऩे वालों की सर्वाधिक संख्या है। इसमें हाईस्कूल के छह लाख 24 हजार 473 व इंटर के चार लाख 20 हजार 146 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। खास बात यह है कि परीक्षा छोडऩे वालों की संख्या उन्हीं जिलों व केंद्रों पर अधिक है, जो पिछले वर्षों में नकल कराने के लिए कुख्यात रहे हैं।