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स्टार्टअप बिज़नेस के लिए फंडिंग पाने के सभी उपाय

किसी भी बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। आज के दौर के स्टार्टअप युग में बहुत ऐसी संस्थाएं है, जो कि बेहतर आईडिए को रूप देने में मदद करती हैं। यदि आप के पास एक आइडिया है जो कि आपके आसपास के समाज को प्रभावित करने और किसी समस्या को सुलझाने का कार्य करता है, तो आपको यह लेख जरूर पड़ना चाहिए!

Adto startup funding

अनेकों बिज़नेस पूंजी के अभाव में या तो आईडिया स्टेज तक ही सिमट के रह जाते हैं या कुछ चरण बाद पूंजी न मिलने से बंद हो जाते हैं। आप अपने स्टार्टअप बिज़नेस के लिए मुख्यतः 3 तरीकों से फंडिंग का प्रबंध कर सकते हैं।

1. सरकारी या गैर सरकारी अनुदान(ग्रांट)-

यदि आपका बिज़नेस उन विशेष क्षेत्रों में से है जिन पर अनुदान मिलता है, तो आप भी अनुदान पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। परंतु यह अनुदान मात्र बिज़नेस को लांच और थोड़े संचालन मात्र का ही फंड्स प्रदान कर पाते हैं।

2. बिज़नेस लोन- बैंकों या वित्तीय संस्थाओं से आप बिज़नेस लोन पा सकते हैं जो कि ब्याज सहित तय समय सीमा के भीतर वापिस करना पड़ता है भले ही आपका बिज़नेस चले या न चले।

Adto startup funding

3. इक्विटी फंडिंग- फंडिंग के इस तरीके में आपको इन्वेस्ट करने वाले से पूंजी मिल जाती है और बदले में इन्वेस्टर को आपकी कंपनी के इक्विटी शेयर का कुछ हिस्सा मिलता है। इस दशा में कंपनी को लाभ यह होता है की आपकी कंपनी में इन्वेस्ट करने वाला उसका भागीदार बन जाता है और कंपनी के हित के लिए कार्य करता है। इक्विटी फंडिंग में इन्वेस्टर नफा और नुकसान दोनों में भागीदार होता है। आइए जानते हैं इक्विटी फंडिंग के मुख्य चरण जिनसे स्टार्टअप बिज़नेस को गुजर कर शेयर मॉर्केट तक का सफ़र तय करना होता है!

Adto startup funding stages

1. सेल्फ फंडिंग या बूटस्ट्रैपिंग या सीड इन्वेस्टमेंट– आईडिया स्टेज से बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए आपको फंड्स का प्रबंध स्वतः करना पड़ता है। चाहे आप अपनी जमा पूंजी लगाएं या अपने परिवार या मित्रों से पूंजी का अनुरोध करें। बाहरी पूंजी के बदले में आप अपने बिज़नेस का 5% से 10% तक हिस्सा पूंजी देने वाले को प्रदान कर सकते हैं जो कि आपके आपसी संबंधों पर भी निर्भर करता है। बिज़नेस आईडिए के लिए अपनी कमर कसना या फीते बांधना इस चरण का मुख्य उद्देश्य है जिससे कि आप तेजी से आगे के चरण पार करते जाएं। इस चरण को सीड इन्वेस्टमेंट भी कहते हैं जो कि आपके बिज़नेस आईडिया का बीज स्टार्टअप मार्केट में उगाने का कार्य करता है। यह सीड इन्वेस्टमेंट के लिए बहुत सी संस्थाएं भी कार्यरत हैं परंतु वे आपसे 20% या अधिक की भागीदारी की अपेक्षा रखती हैं जो कि बिज़नेस के आने वाले चरणों के लिए हितकारी नहीं होगा।

2. एंजेल इन्वेस्टमेंट- इस चरण को आसानी से समझा जा सकता है, जैसे कोई फरिश्ता आपके सपनों को सच करने में आपके साथ हो और जो कि आप से ज्यादा परिपक्व तथा अनुभवी हो, साथ ही आपके आईडिया में रूचि रखता हो, आपका भागीदार बन सकता है। इस चरण को एंजेल नाम इसीलिए दिया गया है क्योंकि इस बड़े स्टार्टअप मार्केट में यह एंजेल आपको बिज़नेस की बारीकियों से परिचित कराएगा और एक अच्छी पूंजी आपके बिजनेस में लगाएगा। यह एंजेल आपके स्टार्टअप को आगे ले जाने में आपका पूरा सहयोग देगा और बदले में इक्विटी शेयर में 15% से 25% तक हिस्सेदारी की आशा करेगा। यह आपका निर्णय है कि आपको कितनी पूंजी की आवश्यकता है और आप कितनी हिस्सेदारी तक देने की इच्छा रखते हैं। एंजेल इन्वेस्टर या तो किसी कंपनी के डायरेक्टर होते हैं या खुद एक समूह होते हैं। आपकी कंपनी में इन्वेस्ट करके यह डायरेक्टर बन कर कंपनी के हितों के लिए कार्य करते हैं। इस प्रक्रिया में 50,000 डॉलर से 1 मिलियन डॉलर तक का इन्वेस्टमेंट आप हासिल कर सकते हैं जो की आपके बिज़नेस आईडिया और उसकी मार्केट संभावनाओं पर निर्भर करता है। एंजेल इन्वेस्टमेंट पाने के लिए आप एंजेल इन्वेस्टर्स को या एंजेल नेटवर्क्स को सर्च कर सकते हैं और उनको अपना बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित कर सकते हैं।

3. वेंचर कैपिटल सीरीज A- इस चरण तक आपकी कंपनी ने प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सेलिंग का काम शुरू कर दिया है। अब आपको इस बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए और इसका स्तर बढ़ाने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। इसके लिए वेंचर कैपिटल कंपनियों को अपना आवेदन और बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित कर सकते हैं। यह कंपनियां 1 मिलियन डॉलर से 10 मिलियन डॉलर तक का निवेश इस चरण में करती हैं और 15% से 30% तक हिस्सेदारी की आशा रखती हैं।

Adto startup funding timeline stages

4. वेंचर कैपिटल सीरीज B- फंडिंग के इस चरण तक आपकी कम्पनी एक बड़े स्तर की कंपनी बन चुकी है और इसका मूल्यांकन एंजेल राउंड से 50 गुना से ज्यादा तथा सीरीज A राउंड से 5 से 10 गुना तक हो जाता है। इस फंडिंग राउंड में आप VC कम्पनियों को अपना आगे का बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित करते हैं तथा इस चरण में 10 मिलियन डॉलर से 100 मिलियन डॉलर तक का निवेश 5% से 15% इक्विटी शेयर के बदले में हासिल कर सकते हैं। इसके लिए सीरीज A वाली कंपनी भी दोबारा निवेश कर सकती है या अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकती है।

कुछ कंपनियां VC सीरीज C, D … इत्यादि राउंड की फंडिंग के लिए आवेदन करती हैं तथा अधिकतर कंपनियां VC सीरीज B राउंड के बाद ही आईपीओ लॉन्च कर देती हैं।

5. IPO Launch- Securities and Exchange Bureau of India, सेबी ने ग्रोथ स्टेज बिज़नेस के लिए Institutional Trading Platform, ITP के तहत कुछ नियम बनाए थे जिन्हें मोदी सरकार ने नीतियों में परिवर्तन करके स्टार्टअप्स के लिए Innovators Growth Platform, IGP नाम से नया मॉडल पेश किया जिससे कि स्टार्टअप्स के लिए अपनी कंपनी का Initial Public Offerings, IPO लांच कर शेयर मार्केट में प्रवेश करना आसान हो गया है। मोदी सरकार ने स्टार्टअप्स की मूल भावना को पहचाना और बड़ी बड़ी VC और Private Equity, PE कम्पनियों के पास न जाकर सीधे शेयर मार्केट में कदम रखने को आसान बना दिया। आइए जानते हैं क्या बदलाव हुए हैं IPO लांच की नीति में,

New IGP rules for IPO Launch Stock Market
Image Credit: Yourstory

आसान शब्दों में कहें तो यदि आपकी कंपनी टेक्नोलॉजी, आई पी, डेटा एनालिटिक्स, बायोटेक या नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र से है और आपने 25% या ज्यादा की हिस्सेदारी इन्वेस्टर्स को 2 साल या अधिक समय से दी हुई है तो आप अपनी कंपनी का 25% इक्विटी स्टॉक IGP के तहत शेयर मार्केट में बेचने के लिए आवेदन कर सकते हैं जिसे 6 माह के लिए प्री-इश्यू स्टेज में 2 लाख की प्रारंभिक लॉट लिमिट और 50 आवेदकों की प्रारंभिक सीमा के साथ लॉक किया जाएगा तथा सफलता पूर्वक संचालन होने पर स्टॉक एक्सचेंज में सब लोगों के लिए खोला जाएगा।

आधुनिक भारत की अर्थव्यवस्था में जो सकारात्मकता आई है वो यकीनन्द स्टार्टअप युग का ही योगदान है। फ्लिपकार्ट, पेटीएम जैसी कम्पनियों ने जो इतिहास रचा उसे और अलग अलग क्षेत्रों की कंपनियां आगे बढ़ा रही हैं। जिन कम्पनियों का बाजार मूल्यांकन 1 अरब डॉलर(1 बिलियन डॉलर) से ज्यादा हो जाता है वे स्टार्टअप मार्केट में यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के नाम से जानी जाती हैं। आइए जानते हैं कौन कौन से कम्पनियां शामिल हैं इस स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में,

Indian Startup Unicorn Club Adto

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कामयाब लोग तरीके खोजते हैं और अन्य लोग न कर पाने के बहाने। सफलता के मंत्र!

जिंदगी में भले ही बड़ी से बड़ी मुश्किल आए लेकिन आप का वजूद वही रहेगा जो पहले था। मुसीबत में आपकी क्षमता कम हो जाए यह मात्र मन का वहम है। आपको जरूरत है अपनी क्षमता को पहचान कर उसका हल खोजने की।

आज हम आप को बेहद प्रेरणादायक कहानियां बताएंगे जो निश्चित ही आपके सोचने के रवैये को बदल के रख देगी!

इंसान की कीमत

एकबार एक टीचर क्लास में पढ़ा रहे थे| बच्चों को कुछ नया सिखाने के लिए टीचर ने जेब से 100 रुपये का एक नोट निकाला| अब बच्चों की तरफ वह नोट दिखाकर कहा – क्या आप लोग बता सकते हैं कि यह कितने रुपये का नोट है ?

सभी बच्चों ने कहा – “100 रुपये का”

टीचर – इस नोट को कौन कौन लेना चाहेगा ? सभी बच्चों ने हाथ खड़ा कर दिया|

अब उस टीचर ने उस नोट को मुट्ठी में बंद करके बुरी तरह मसला जिससे वह नोट बुरी तरह कुचल सा गया| अब टीचर ने फिर से बच्चों को नोट दिखाकर कहा कि अब यह नोट कुचल सा गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा ?

सभी बच्चों ने फिर हाथ उठा दिया।

अब उस टीचर ने उस नोट को जमीन पर फेंका और अपने जूते से बुरी तरह कुचला| फिर टीचर ने नोट उठाकर फिर से बच्चों को दिखाया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा ?

सभी बच्चों ने फिर से हाथ उठा दिया|

अब टीचर ने कहा कि बच्चों आज मैंने तुमको एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाया है| ये 100 रुपये का नोट था, जब मैंने इसे हाथ से कुचला तो ये नोट कुचल गया लेकिन इसकी कीमत 100 रुपये ही रही, इसके बाद जब मैंने इसे जूते से मसला तो ये नोट गन्दा हो गया लेकिन फिर भी इसकी कीमत 100 रुपये ही रही|

ठीक वैसे ही इंसान की जो कीमत है और इंसान की जो काबिलियत है वो हमेशा वही रहती है| आपके ऊपर चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएँ, चाहें जितनी मुसीबतों की धूल आपके ऊपर गिरे लेकिन आपको अपनी कीमत नहीं गंवानी है| आप कल भी बेहतर थे और आज भी बेहतर हैं|

हाथी और रस्सी –

एक व्यक्ति रास्ते से गुजर रहा था कि तभी उसने देखा कि एक हाथी एक छोटे से लकड़ी के खूंटे से बंधा खड़ा था| व्यक्ति को देखकर बड़ी हैरानी हुई कि इतना विशाल हाथी एक पतली रस्सी के सहारे उस लकड़ी के खूंटे से बंधा हुआ है|

ये देखकर व्यक्ति को आश्चर्य भी हुआ और हंसी भी आयी| उस व्यक्ति ने हाथी के मालिक से कहा – अरे ये हाथी तो इतना विशाल है फिर इस पतली सी रस्सी और खूंटे से क्यों बंधा है ? ये चाहे तो एक झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है लेकिन ये फिर भी क्यों बंधा है ?

हाथी के मालिक ने व्यक्ति से कहा कि श्रीमान जब यह हाथी छोटा था मैंने उसी समय इसे रस्सी से बांधा था| उस समय इसने खूंटा उखाड़ने और रस्सी तोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन यह छोटा था इसलिए नाकाम रहा| इसने हजारों कोशिश कीं लेकिन जब इससे यह रस्सी नहीं टूटी तो हाथी को यह विश्वास हो गया कि यह रस्सी बहुत मजबूत है और यह उसे कभी नहीं तोड़ पायेगा इस तरह हाथी ने रस्सी तोड़ने की कोशिश ही खत्म कर दी|

आज यह हाथी इतना विशाल हो चुका है लेकिन इसके मन में आज भी यही विश्वास बना हुआ है कि यह रस्सी को नहीं तोड़ पायेगा इसलिए यह इसे तोड़ने की कभी कोशिश ही नहीं करता| इसलिए इतना विशाल होकर भी यह हाथी एक पतली सी रस्सी से बंधा है|

दोस्तों उस हाथी की तरह ही हम इंसानों में भी कई ऐसे विश्वास बन जाते हैं जिनसे हम कभी पार नहीं पा पाते| एकबार असफल होने के बाद हम ये मान लेते हैं कि अब हम सफल नहीं हो सकते और फिर हम कभी आगे बढ़ने की कोशिश ही नहीं करते और झूठे विश्वासों में बंधकर हाथी जैसी जिंदगी गुजार देते हैं|

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मिलिए विजय से जिन्होने तय किया दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल से आइपीएस तक का सफर

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले विजय मूलत: एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गरीब और अभावग्रस्त छात्रों के लिए एक ट्रस्ट भी बनाया है। ट्रस्ट के माध्यम से वह छात्रों को न सिर्फ प्रोत्साहित करते हैं बल्कि आर्थिक सहायता भी देते हैं।

दसवीं में वह महज 55 फीसद अंक से पास हुए। बारहवीं में उनके 67 फीसद अंक आए। वह किसी नौकरी की तलाश में थे। इसमें सफलता न मिलने पर वह टाइल्स का कारोबार कर रहे दोस्त के साथ व्यवसाय करने की सोच रहे थे। उनके पास व्यवसाय के लिए पैसा नहीं था।

इस कारण पिता लक्ष्मण सिंह ने नौकरी की तलाश करने को कहा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। जून 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हो गया। दिल्ली आकर उन्हें पता चला कि एक आइपीएस अफसर के पास समाज सेवा के तमाम अवसर होते हैं। उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि अब आइपीएस ही बनना है। हालांकि, इसकी तैयारी में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम उनके पास नहीं था। इस कारण उन्होंने पहले दारोगा की तैयारी की। कड़ी मेहनत से दिसंबर 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में दारोगा के पद पर हो गया।

इसपद पर रहते हुए उन्हें तैयारी का समय नहीं मिल रहा था। फिर भी उन्होंने एसएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। उनका चयन सेंट्रल एक्साइज में हो गया, लेकिन तैनाती केरल के त्रिवेंद्रम में हो गई। सिविल सेवा की तैयारी दिल्ली में चल रही थी। त्रिवेंद्रम चले जाने से उनकी तैयारी प्रभावित होने लगी। उन्होंने फिर एसएससी की परीक्षा दी। इस बार उनका चयन इनकम टैक्स विभाग में हो गया और उनकी दिल्ली में तैनाती हो गई। इनकम टैक्स की नौकरी करने के साथ ही वह सिविल सेवा की तैयारी करते रहे। 2016 उन्होंने तीसरी बार सिविल सेवा की परीक्षा दी।

संस्कृत जैसे कठिन विषय से मुख्य परीक्षा देने के बाद भी उनका साक्षात्कार के लिए चयन हो गया। वह साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन आठ अंक कम होने के कारण उनका चयन न हो सका। इसके बाद भी विजय हार नहीं माने। वह लगातार 10 घंटे की पढ़ाई नौकरी के साथ करते रहे। जिसका नतीजा है कि पांचवें प्रयास में 2018 में उनका चयन आइपीएस के लिए हुआ। उनकी इस सफलता ने न सिर्फ परिवार का बल्कि पूरे गुर्जर समाज का नाम रोशन कर दिया। रविवार को नोएडा के इंदिरा गांधी कला केंद्र में गुर्जर समाज के सफल युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में विजय गुर्जर को सम्मानित कर समाज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।

अभाव व कम संसाधन कभी विजय रथ को रोक नहीं सकते। यह जरूर है कि अभाव के कारण सफलता पाने में समय लग जाता है। मेरी मां चंदा देवी और पत्नी सुनीता लगातार मेरा मनोबल बढ़ाती रहीं। अब मैं पत्नी सुनीता को सिविल सेवा की तैयारी करा रहा हूं। मैं सिपाही भी रहा हूं। इस कारण मुझे उनका दर्द पता है।

विजय गुर्जर, आइपीएस