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यहां हुई है बादल और बर्फ की चोरी, इस देश पर लगा है आरोप

ईरान में हो रहे जलवायु परिवर्तन को देखते हुए इजरायल संदेह के घेरे में है। अन्‍य देशों के साथ इजरायल की कोशिश है कि ईरान में बारिश न हो। लेकिन ईरानी मौसम विभाग प्रमुख अहद वजीफे इससे सहमत नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के सवाल और आरोपों से समाधान नहीं मिलने वाला है हम अपने इस संकट का सही समाधान करने में जुटे हैं।

अहमदीनेजाद ने भी लगाया था ऐसा आरोप
जलाली ने कहा कि अफगानिस्तान और भूमध्य सागर के बीच का 2200 मीटर का पहाड़ी हिस्सा बर्फ से ढका होता है, लेकिन ऐसा ईरान में नहीं है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है कि जब ईरान में किसी अफसर ने अन्य देश पर बारिश चोरी का आरोप लगाया हो। इसके पहले भी 2011 में पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा था कि पश्चिमी देशों के चलते ईरान में सूखा पड़ा हुआ है। यूरोपीय देश एक खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल करके बादलों को कैद कर लेते हैं।

ईरान के मौसम विभाग के प्रमुख अहद वजीफे ने इससे स्‍पष्‍ट तौर से इन्कार करते हुए कहा है कि बादल या बर्फ की चोरी नहीं की जा सकती। ईरान लंबे वक्त से सूखे से जूझ रहा है। यह एक वैश्विक समस्या है न कि केवल ईरान की।

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लेनिन की मूर्ति पर घमासान: वामदल घटना के खिलाफ देशभर में करेंगे प्रदर्शन

त्रिपुरा में प्रशासन, भाजपा और माकपा की ओर से सभी से शांति बनाए रखने के आह्वान के बावजूद चुनाव के बाद की हिंसा जारी रही। सोमवार को बेलोनिया टाउन में रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की प्रतिमा बुल्डोजर से गिरा दिया गया।

इसके बाद हिंसा और भड़क गई और सियासी घमासान शुरू हो गया। घटना के खिलाफ कोलकाता में वामदलों ने प्रदर्शन किया। इस बीच, मंगलवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल और डीजीपी से नई सरकार के कामकाज संभालने तक शांति सुनिश्चित करने को कहा।

माकपा का आरोप है कि त्रिपुरा में भगवा पार्टी की जीत के बाद बेलोनिया स्थित कॉलेज स्क्वायर में कथित तौर पर भाजपाइयों ने सोमवार दोपहर बुल्डोजर से पांच फुट लंबी प्रतिमा गिरा दी। इस दौरान भारत माता की जय के नारे भी लगाए गए। कुछ महीने पहले पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रकाश करात ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। माकपा ने कथित तौर पर वामपंथी कैडरों और कार्यालय पर हुए हमलों की एक सूची भी जारी की है।

सामने आया भाजपा का असली चेहरा: येचुरी

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने मंगलवार को कहा कि भाजपा और आरएसएस का असली चेहरा सामने आ गया है। भाजपा की सोच सिर्फ साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर चुनाव जीतना है। माकपा नेता ने यह भी कहा कि इस घटना के विरोध में सभी राज्यों की राजधानी में प्रदर्शन होगा। भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ हम अपने जनसंघर्षों के साथ देश भर में जनता तक पहुंचेंगे। भाजपा की सहयोगी जदयू के सांसद हरिवंश ने कहा, हमारा देश रूस नहीं है। हिंसा की घटनाएं गलत हैं।

लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं

भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि यह लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। हम लोकतंत्र में कुछ पार्टियां जीत जाती हैं और कुछ हार जाती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वे हिंसा का सहारा ले सकते हैं। लेनिन की प्रतिमा गिराना निंदनीय है।

कई इलाकों में निषेधाज्ञा

जिला मजिस्ट्रेट मिलिंद रामटेके ने बताया कि हिंसा के कारण श्रीनगर, लेफुंगाख, मंडई, आमतली, राधापुर, अरुंधति नगर,  जिरनिया, मोहनपुर सहित दक्षिण त्रिपुरा जिले के कई इलाकों में निषेघाज्ञा लागू कर दी गई है। दक्षिण त्रिपुरा जिले के एसपी मोनचक इप्पर ने बताया कि जेसीबी मशीन (बुलडोजर) चालक ने शराब पी रखी थी। उसे गिरफ्तार कर बुलडोजर को सीज कर दिया है। बाद में जमानत पर उसे रिहा कर दिया गया।

हालात की जानकारी ली

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल राज्यपाल तथागत राय और डीजीपी एके शुक्ला से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान गृहमंत्री को भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन की जीत के बाद भड़की हिंसा पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराया गया। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सिंह ने राज्यपाल और डीजीपी से हर तरह की हिंसा पर रोक लगाने और त्रिपुरा में नई सरकार के गठन तक शांति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

लोकतांत्रिक सरकार सब ठीक कर सकती है 

लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार जो कर सकती है, एक अन्य लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार उसे ठीक कर सकती है। – तथागत रॉय, त्रिपुरा के राज्यपाल

विदेशी नेताओं की प्रतिमाओं के लिए भारत में जगह नहीं: अहीर

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने मंगलवार को कहा कि सरकार हर तरह की हिंसा की निंदा करती है, लेकिन विदेशी नेताओं की प्रतिमाओं के लिए भारत में कोई स्थान नहीं है। अहीर की टिप्पणी उस वक्त आई है जब कल त्रिपुरा में सोवियत संघ के संस्थापक लेनिन की प्रतिमा गिरा दी गई।

मंत्री ने कहा, हम हर तरह की हिंसा की निंदा करते हैं और राज्य सरकार इस मामले को देख रही है। परंतु मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारत में विदेशी नेताओं की प्रतिमाओं की जरूरत नहीं है। इस देश में महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, बीआर अंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय और राम मनोहर लोहिया जैसे कई बड़े आदर्श पुरुष हैं।

जनता सही जवाब देगी

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने त्रिपुरा में भाजपा के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद मंगलवार को कहा कि राज्य की जनता ने वोटों के जरिये हत्याओं का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वामपंथी पार्टियों ने त्रिपुरा में भाजपा के नौ कार्यकर्ताओं की हत्या की थी और जनता ने चुनावों में इसका जवाब दे दिया है। कर्नाटक में कांग्रेस की शह पर 24 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, इसका जवाब भी जल्द ही जनता देगी।

वाम मोर्चे से उत्पीड़ित लोगों ने प्रतिमा गिराई होगी: गिरिराज

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को कहा कि त्रिपुरा में वाम मोर्चे के 25 साल के शासन के दौरान उत्पीड़ित लोगों ने सोवियत संघ के संस्थापक व्लादिमीर लेनिन की प्रतिमा गिराई होगी। भाजपा या उसकी विचारधारा हिंसा को बढ़ावा नहीं देती, लेकिन वामपंथी ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा, वाम शासन के दौरान बहुत सारे लोगों का उत्पीड़न हुआ। उनमें से कुछ लोगों में बदले की भावना रही होगी। यह समय बताएगा कि लेनिन की प्रतिमा गिराने के लिए कौन जिम्मेदार हैं।

मुख्यालय में प्रतिमा लगाएं कम्युनिस्ट पार्टी: स्वामी

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि लेनिन तो विदेशी हैं। ऐसे व्यक्ति की मूर्ति हमारे देश में क्यों? वे कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय के अंदर मूर्ति रख सकते हैं और पूजा कर सकते हैं।

मैं माकपा के खिलाफ हूं और मार्क्स या लेनिन मेरे नेता नहीं हैं। मैंने हमेशा माकपा के अत्याचारों के खिलाफ विरोध जताया है। इसी तरह से मैं भाजपा के अत्याचारों को स्वीकार नहीं कर सकती। -ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख

यह भाजपा की घटिया दर्जे की हिंसा और तोड़फोड़ है। यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। -सुधाकर रेड्डी, वामपंथी नेता

यह कम्युनिस्टों को राष्ट्रीय स्तर पर निशाना बनाने का षड्यंत्र है। भाजपा को यह नहीं सोचना चाहिए कि सिर्फ चार प्रतिमाओं को ढहाने से कम्युनिस्टों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। -पी. विजयन, केरल के मुख्यमंत्री

विचारधारा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कोई मूर्ति तोड़ना ठीक नहीं। भारतीयों की विचारधारा सबको साथ लेकर चलने की है। -संजय राउत, शिवसेना सांसद

माकपा ने प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली। त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को लेकर माकपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें राज्य में शांति बहाल करने और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

लोकसभा में पार्टी के उपनेता एवं पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि त्रिपुरा में चुनाव के नतीजे आने के बाद से माकपा समर्थकों, पार्टी के कार्यकर्ताओं, पार्टी कायार्लयों तथा जन संगठनों के दफ्तरों पर हमले हो रहे हैं। सोमवार तक 1539 घरों पर हमले हुए हैं और 196 घरों को आग लगा दी गई है। उन्होंने त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह संवैधानिक पद पर आसीन हैं, लेकिन हिंसा की घटनाओं को न्यायोचित ठहरा रहे हैं।

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ट्रिपल तलाक: कैबिनेट की बिल को मंजूरी, जानें- क्या हैं इसमें प्रावधान

सरकार ने शुक्रवार को उस प्रस्तावित कानून के मसौदे को मंजूरी प्रदान कर दी जिसके तहत एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी एवं अमान्य ठहराया जाएगा और ऐसे करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा होगी। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विचार किया और अपनी मंजूरी दी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह ने विधेयक का मसौदा तैयार किया था। इस समूह में वित्त मंत्री अरूण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी शामिल थे।

प्रस्तावित कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक के मामले में लागू होगा और इससे पीड़िता को अधिकार मिलेगा कि वह ‘उचित गुजारा भत्ते की मांग करते हुए मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सके। बता दें, बीते 22 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था।

बिल में क्या हैं प्रावधान-

प्रस्तावित बिल के मुताबिक तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही यह गैरजमानती अपराध होगा। अगर कोई पति अपनी पत्नी को ट्रिपल तलाक देता है तो उसे तीन साल की सजा हो सकती है और इस दौरान उसे जमानत भी नहीं मिलेगी।  ‘मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल’ प्रस्तावित कानून में पीड़िता को अपने पति से हर्जाना मांगने का भी अधिकार होगा। इसके साथ ही वह अपने बच्चे की कस्टडी की मांग भी कर सकती है। यह कानून केवल ‘एक साथ तीन तलाक’ देने पर लागू होगा।

इस बिल का ड्राफ्ट केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर मंत्री समूह ने बनाया है। राजनाथ के अलावा इस समूह में वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और कानून राज्यमंत्री पीपी चौधरी भी शामिल थे।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने हालही में तीन तलाक के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे खत्म कर दिया था। पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन तलाक से संबंधित कानून बनाने को कहा था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उम्मीद जताई थी कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा।

बता दें, सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने 3:2 के मत से सुनाए गए फैसले में तीन तलाक को कुरान के मूल तत्व के खिलाफ बताया। कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिमों में तीन तलाक के जरिए दिए जाने वाले तलाक की प्रथा अमान्य, अवैध और असंवैधानिक है। प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर जहां तीन तलाक की प्रथा पर छह माह के लिए रोक लगाकर सरकार को इस संबंध में नया कानून लेकर आने के लिए कहने के पक्ष में थे। वहीं जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस यू यू ललित ने इसे संविधान का उल्लंघन करार दिया था। इस पीठ में खेहर के अलावा, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल थे।