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अक्षय कुमार दिखेंगे इस महान राजपूत योद्धा के किरदार में, केसरी के बाद फिरसे निभाएंगे महान युद्धवीर की भूमिका

1897 के बैटल ऑफ़ सारागढ़ी पर आधारित ‘केसरी’ के बाद अक्षय कुमार एक और फ़िल्म में इतिहास का सफ़र कर रहे हैं। चाणक्य धारावाहिक और ‘पिंजर’ जैसी कालजयी फ़िल्म बनाने वाले डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी अब पृथ्वीराज चौहान पर फ़िल्म बना रहे हैं, जिसे यशराज फ़िल्म्स जैसा बड़ा प्रोडक्शन हाउस प्रोड्यूस कर रहा है। इस फ़िल्म में अक्षय पृथ्वीराज चौहान का किरदार ही निभा रहे हैं। फ़िल्म की बाक़ी स्टार कास्ट अभी तय की जा रही है। शूटिंग अगले साल शुरू होने की संभावना है।

अजय देवगन सरदार भगत सिंह बनकर पर्दे पर आ चुके हैं, अब वो मराठा योद्धा तानाजी मालसुरे के अंदाज़ में बड़े पर्दे पर उतरेंगे। इस फ़िल्म का शीर्षक ‘तानाजी- द अनसंग वॉरियर’ है, जिसकी पहली झलक अजय ने ट्विटर के ज़रिए शेयर की थी। तानाजी सत्रहवीं सदी में शिवाजी के जनरल थे।

हड़प्पा संस्कृति पर आधारित फ़िल्म ‘मोहनजो-दाड़ो’ बनाने के बाद निर्देशक आशुतोष गोवारिकर एक बार फिर इतिहास की तरफ़ देख रहे हैं। इस बार उन्होंने पानीपत की तीसरी लड़ाई चुनी है, जिस पर वो ‘पानीपत’ शीर्षक से फ़िल्म बना रहे हैं। फ़िल्म में अर्जुन कपूर, संजय दत्त और कृति सनोन भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। अर्जुन सदाशिव राव भाऊ के रोल में हैं, तो कृति उनकी पत्नी पार्वतीबाई का रोल निभा रही हैं। संजय दत्त अफ़गान शासक अहमद शाह अब्दाली के किरदार में हैं।

अंग्रेजों से लोहा लेने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की बायोपिक ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ़ झांसी’ में कंगना रनौत झांसी की रानी का किरदार निभाने वाली हैं। यह फ़िल्म कृष के निर्देशन में बन रही है, जिन्होंने अक्षय कुमार की फ़िल्म ‘गब्बर इज़ बैक’ से बॉलीवुड में डायरेक्टोरियल पारी शुरू की थी। बंगाली कलाकार जीशु सेनगुप्ता राजा गंगाधर राव के किरदार में हैं, जबकि अतुल कुलकर्णी तात्या टोपे का रोल निभा रहे हैं। इस फ़िल्म से टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे बॉलीवुड डेब्यू कर रही हैं, जो झलकारीबाई के किरदार में हैं।

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Hyundai अगले साल भारत में लांच करेगी पहली इलेक्ट्रिक कार Kona! फुल चार्ज में चलेगी 300km

ह्युंडई की पहली इलेक्ट्रिक कार जल्द ही भारत आनेवाली है. ह्युंडई ने हाल ही में जिनेवा मोटर शो 2018 में नयी इलेक्ट्रिक एसयूवी कोना से पर्दा हटाया है.

बताते चलें कि दिल्ली ऑटो एक्सपो 2018 में कोना का कॉन्सेप्ट मॉडल पेश किया था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो नयी ह्युंडई कोना अगले साल तक भारत में लांच कर दी जायेगी.

कंपनी ने इस कार का प्रॉडक्शन मॉडल पेश करते हुए कंपनी ने 2018 जिनीवा मोटर शो में बताया कि फुल चार्ज पर इस कार की रेंज 300 किलोमीटर की होगी.

बात करें पावर की, तो यह गाड़ी 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड 9.2 सेकंड्स में पकड़ सकती है. इसकी टॉप स्पीड 167 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. इसका मोटर कार को 134 bhp की पावर और 395 Nm का टॉर्क देगा.

ह्युंडई कोना को पावर देगी 39.5 किलोवाट लिथियम आयन बैटरी. इस बैटरी को फुल चार्ज होने में 6 घंटे लगेंगे. 80 पर्सेंट चार्जिंग फास्ट चार्जर के जरिये महज एक घंटे में ही हो जायेगी.

इंटरनेशनल मार्केट में कोना इलेक्ट्रिक एसयूवी 64 किलोवाट की बड़ी बैटरी के साथ आती है. यह बैटरी 211 पीएस का पावर और 470 किलोमीटर रेंज देती है.

यह कार सीकेडी रूट यानी कंप्लीटली बिल्ट यूनिट के तौर पर भारत आ सकती है. भारत में इसकी अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये है.

इस क्रॉसओवर कार में 17 इंच के अलॉय व्हील्स दिये गये हैं. इसके साथ ही एयरोडायनैमिकली डिजाइन्ड बम्पर्स और स्पॉइलर भी इसमें दिये गये हैं.

इसमें आॅल डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, हेड अप डिस्प्ले और 7 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है.

इसके अलावा इसमें कम्पोजिट लाइट, टॉप पर LED DRLs और टू-टोन रूफ के साथ सात रंग के एक्सटीरियर दिये गये हैं. इसके साथ ही, इस कार में विशेष लैंप बेजल और फ्रंट बंपर दिया गया है.

सुरक्षा के लिए इस कार में अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट, रियर क्रॉस ट्रैफिक अलर्ट और आॅटोमैटिक इमर्जेंसी ब्रेकिंग आदि फीचर्स दिये गये हैं.

यहां यह जानना गौरतलब है कि अगर ह्युंडई कोना इलेक्ट्रिक कार अगले साल भारत में लांच हो जाती है तो इसके मुकाबले में कोई नहीं होगा. हालांकि, कीमत के लिहाज से इसका मुकाबला जीप कंपास, नयी होंडा सीआर-वी, फोक्सवैगन टिगुआन सरीखी कारों से होगा.

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छलावा न हों कोरिया से आ रहे सकारत्मक बयान: ट्रंप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर बातचीत की इच्छा जाहिर करने पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है.

ट्रंप ने कहा कि ‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान काफ़ी सकारात्मक हैं’ लेकिन साथ ही कहा कि ये ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

दक्षिण कोरिया ने जानकारी दी थी कि सोमवार को जब उसके अधिकारी उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मिले थे तो ये मुद्दा उठाया गया था.

दक्षिण कोरिया के मुताबिक किम जोंग उन अमरीका से बातचीत के लिए तैयार हैं और हथियारों के परीक्षण पर भी रोक लगा सकते हैं.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

हालांकि, पूर्व में उत्तर कोरिया से हुई बातचीत में कुछ हासिल नहीं हुआ है. अमरीका और उत्तर कोरिया के कुछ अधिकारियों की राय है कि उत्तर कोरिया इसके जरिए हथियार विकसित करने के कार्यक्रम के लिए वक्त हासिल करने की कोशिश में हो सकता है. ये कड़े प्रतिबंधों से राहत पाने की कोशिश भी हो सकती है.

उत्तर कोरिया की ओर से हाल फिलहाल इस बारे में कोई टिप्पणी समाने नहीं आई है.

दक्षिण कोरिया की ओर से उत्तर कोरिया गए प्रतिनिधिमंडल के नेता चुंग इयू योंग ने ही जानकारी दी थी कि दोनों देशों के नेता अगले महीने एक शिखर सम्मेलन में मिलने के लिए सहमत हुए हैं

एक दशक से ज्यादा वक्त के दौरान ये ऐसी पहली मीटिंग होगी. किम जोंग उन साल 2011 से सत्ता में हैं. उनके उत्तर कोरिया का नेता बनने के बाद से ऐसी कोई मीटिंग नहीं हुई है.

फरवरी में दक्षिण कोरिया में हुए विंटर ओलिंपिक के दौरान दोनों देशों के बीच गर्माहट दिखी. यहां तक कि उत्तर कोरिया के खिलाड़ी ने दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों के साथ एक टीम में खेले.

उत्तर कोरिया, अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है: दक्षिण कोरिया

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ट्रंप ने क्या कहा

वाशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा ‘उत्तर कोरिया के मामले में यकीनन हमने एक लंबा रास्ता तय किया है.’

‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान सकारात्मक हैं. पूरी दुनिया के लिए ये बड़ी बात होगी.’

ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में हुए ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए उत्तर कोरिया की तारीफ़ भी की.

लेकिन इससे पहले उन्होंने एक चेताने वाला ट्वीट भी किया था जिसमें कहा गया था कि ये एक ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

इस बीच अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ बातचीत चाहे जिस दिशा में जाए, हमारा निश्चय दृढ़ है.

उन्होंने कहा, “सभी विकल्प मौजूद हैं और हमारा रूख उत्तर कोरिया के लिए तब तक नहीं बदलेगा जब तक हम उनका परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने की तरफ़ कोई ठोस कदम न देख लें.”

ऐसी उम्मीद है कि उत्तर कोरिया से हुई बातचीत की जानकारी देने के लिए दक्षिण कोरिया की टीम हफ्ते के आखिर में अमरीका जा सकती है.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटREUTERS

उत्तर कोरिया ने क्या कहा?

मंगलवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति दफ्तर से एक बयान जारी किया गया जिसमें बताया गया, “उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियार हटाने की इच्छा जताई है. अगर उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्रवाई का खतरा कम हुआ और सरकार बने रहने की गांरटी दी गई तो उत्तर कोरिया का कहना है कि परमाणु हथियारों को बनाए रखने की उसे कोई वजह नज़र नहीं आती.”

हालांकि आलोचक उत्तर कोरिया की मंशा पर शक जताते हैं. अतीत में भी उत्तर कोरिया अपनी कही बातों से मुकरा है. 2005 में हथियार घटाने का समझौता उनमें से एक है.

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पुतिन के प्रेजेंटेशन में फ़्लोरिडा परमाणु हमले के निशाने पर क्यों?

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने गुरुवार को परमाणु हथियारों के नए ज़खीरे को दुनिया के सामने लाते हुए एक प्रेज़ेंटेशन दिखाया. इस दौरान एक वीडियो ग्राफ़िक्स में अमरीका के फ़्लोरिडा पर मिसाइलों की बारिश होती दिखाई गई.

लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि रूस परमाणु युद्ध की स्थिति में सनशाइन स्टेट फ़्लोरिडा को लक्ष्य क्यों बनाना चाहेगा?

फ़्लोरिडा में वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड और एवरग्लेड्स नेशनल पार्क जैसे पर्यटक स्थल हैं. इसके साथ ही यहां राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के मार-ए-लागो रिसॉर्ट जैसे हाई प्रोफाइल टारगेट भी हैं.

रूस में 18 मार्च को राष्ट्रपति चुनाव होने हैंइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionरूस में 18 मार्च को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं

ऐसा क्या है फ़्लोरिडा में?

अमरीकी रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि पेंटागन को पुतिन की इन बातों से आश्चर्य नहीं हुआ.

रूसी ख़तरे को महत्वहीन करार देते हुए पेंटागन प्रवक्ता डैना व्हाइट ने कहा, “अमरीकी लोग आश्वस्त रहें, हम पूरी तरह तैयार हैं.”

पुतिन के इस वीडियो एनिमेशन में कई परमाणु हथियारों को फ़्लोरिडा की ओर जाते दिखाया गया है.

राष्ट्रपति ट्रंप के फ़्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो रिसॉर्ट में कई परमाणु बंकर हैं, जहां राष्ट्रपति बनने के बाद वो कई वीकेंड गुज़ार चुके हैं.

परमाणु हथियारइमेज कॉपीरइटREUTERS

1927 में निर्मित मार-ए-लागो में इन बंकरों में से तीन कोरियाई युद्ध के दौरान स्थापित किए गए थे.

कुछ मील की दूरी पर वेस्ट पाम बीच में ट्रंप के गोल्फ़ कोर्स में (अमरीकी मैगज़ीन स्कवायर के अनुसार दूसरे होल के नीचे) एक और बम शेल्टर है.

दूसरा बंकर राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी के लिए बनाया गया था जो मार-ए-लागो से बहुत दूर नहीं है.

पीनट आइलैंड पर स्थित इस बंकर से महज 10 मिनट की दूरी पर पाम बीच हाउस है, जहां केनेडी अकसर ठहरा करते थे.

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जानकार क्या मानते हैं?

विशेषज्ञ कहते हैं कि ये बंकर चाहे जितने भी शानदार तरीके से बनाए गए हों, सीधे हमले की स्थिति में कोई भी बंकर सुरक्षित नहीं बच सकेगा.

एक और लक्ष्य अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) हो सकता है, जिसका मुख्यालय टैंपा के मैक्डिल एयरबेस में है.

सेंटकॉम पर मध्य-पूर्व, मध्य एशिया और उत्तर अफ्रीका के कुछ हिस्सों में ऑपरेशन के ज़िम्मेदारी है.

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु युद्ध की स्थिति में मुख्य लक्ष्य फ़्लोरिडा नहीं होगा.

मैथ्यू क्रोएनिग अपनी किताब द लॉजिक ऑफ़ अमरीकन न्यूक्लियर स्ट्रैटजी में लिखते हैं कि रूस की प्राथमिकता अमरीका के मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को कमज़ोर करने की होगी.

वो लिखते हैं, “बहुत संभव है कि मॉस्को मोंटाने के मालस्टॉर्म एयरफ़ोर्स बेस, नॉर्थ डकोटा में मिनोट एयरफोर्स बेस, ओमाहा, नेब्रास्का और ऑफ़ट जैसे एयर फोर्स बेस को लक्ष्य बनाना चाहेगा.”

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सिर्फ़ एक संदेश

क्रोएगिन लिखते हैं, “रूस सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दो अमरीकी पन्डुब्बियों के ठिकानों, वॉशिंगटन के बांगोर और जॉर्जिया के किंग्स बे के साथ ही देश भर में फैले 70 अन्य अमरीकी सैन्य अड्डों को मिटाना चाहेगा.”

वो आगे लिखते हैं, “और साथ ही वो यहां की औद्योगिक क्षमता को नष्ट करने और बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचाने के लिए सबसे अधिक आबादी वाले अमरीकी शहरों पर दो-दो मिसाइलें दागेगा.”

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्टडीज के मार्क फिट्ज़पैट्रिक ने बीबीसी से कहा, “फ़्लोरिडा पर हमले के वीडियो से युद्ध नीति का कोई संबंध नहीं है. यह एक संदेश है, जिसके संकेत मात्र के रूप में यह वीडियो है.”

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एयर इंडिया की रणनीतिक जीत, सऊदी अरब एयरस्पेस के इस्तेमाल की मिली मंजूरी

एयरलाइंस एयर इंडिया को सऊदी अरब पर एक रणनीतिक जीत मिली है।सऊदी अरब ने एयर इंडिया को इसराईल  के तेल अवीव शहर की उड़ान के लिए अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। एयर इंडिया अब इजरायल के लिए डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने जा रही है। इसराईल के पर्यटन मंत्रालय ने एयर इंडिया को इन उड़ानों के लिए एकमुश्त 750,000 यूरो देने की घोषणा की है। एयर इंडिया के विमान नई दिल्ली से तेल अवीव के लिए सीधी उड़ान भर सकेंगे।  खास बात यह है कि सऊदी अरब पिछले 70 सालों से इसराईल जाने वाली कमर्शियल उड़ानों के लिए अपना हवाई रास्ते का इस्तेमाल नही करने देता था।

दरअसल सऊदी अरब इसराईल को मान्यता नहीं देता है। इसलिए वह पिछले 70 सालों से अपने उड़ान क्षेत्र पर इसराईल जाने वाले विमानों को रास्ता नहीं देता है। गौरतलब है कि इसराईल और सऊदी अरब दोनों ही अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देशों में से हैं। लेकिन इन दोनों देशों के बीच ईरान से जुड़ी चिंताओं के चलते तनाव रहता है। अधिकारियों के अनुसार सऊदी अरब के अपने हवाई क्षेत्र में भारतीय एयरलाइंस एयर इंडिया को उड़ान भरने की अनुमति दी है। इससे एयर लाइंस एक छोटा रास्ता लेकर अहमदाबाद, मस्कट, सऊदी अरब होते हुए अब तेल अवीव में अपने विमान उतार सकेगी। इस मार्ग से दो शहरों के बीच की दूरी तय करने में महज अढ़ाई घंटे लगेंगे। साथ ही ईंधन की भी भारी बचत होगी।

फिलहाल मुंबई से तेल अवीव की उड़ान भरने वाली इसराईल की एलएआइ उड़ानों में 7 घंटे का लंबा समय लगता है। यह विमान लाल सागर से होते हुए अदन की खाड़ी से होकर तब भारत में प्रवेश करता है। ताकि सऊदी अरब, अफगानिस्तान, यूएई, ईरान व पाकिस्तान और अन्य ऐसे देशों से गुजरने से बचा जा सके। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता और इसराईली हवाई अड्डा प्राधिकरण ने बताया कि राष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपने नियामक डीजीसीए से दिल्ली से तेल अवीव के लिए हफ्ते में तीन उड़ानों के लिए अनुमति मांगी है। एयर लाइंस की एक महिला प्रवक्ता ने बताया कि यह विमान सेवा मार्च से शुरू होगी। एयर इंडिया के एक अन्य अधिकारी के अनुसार एयरलाइंस को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और तेल अवीव के बेन गुर्सियन अंतर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों के लिए कई टाइम स्लॉट मिलने का इंतजार है।

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अब ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से लिंक करना होगा जरूरी, सरकार ने शुरू की तैयारी

केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस को आधार नंबर से जोड़ने की प्रक्रिया में जुटी है। इससे जाली लाइसेंस बनवाना खत्म हो जाएगा। इसके लिए सभी राज्यों को कवर करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। सड़क सुरक्षा पर अदालत द्वारा नियुक्त समिति ने बुधवार को जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ को सूचित किया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज केएस राधाकृष्णन इस समिति के अध्यक्ष हैं।

आधार योजना और इसका समर्थन करने वाले 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। ऐसे समय में समिति द्वारा दी गई सूचना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शीर्ष अदालत में सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि उसने पिछले वर्ष 28 नवंबर को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव के साथ बैठक की थी। इस बैठक में फर्जी लाइसेंस लेने और इसे खत्म करने सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्जी लाइसेंस के मुद्दे पर मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने सूचित किया कि एनआईसी (नेशनल इन्फार्मेशन सेंटर) अब सारथी-4 तैयार कर रहा है। इसके तहत सभी लाइसेंस आधार से जु़ड़े होंगे। यह सॉफ्टवेयर सभी राज्यों को कवर करेगा। इससे किसी के लिए देश में कहीं भी डुप्लीकेट या फर्जी लाइसेंस लेना संभव नहीं होगा।

हाल ही में खबर आ रही थी कि आधार से निजी जानकारी चोरी होने का खतरा है, लेकिन सरकार ने इस खबर को सिरे से नकार दिया है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि  आधार डेटा पर किसी तरह का खतरा नहीं है और देश की एक बड़ी जनता इस योजना पर विश्वास करती है कि ये पूरी तरह से सुरक्षित है।। आधार को गेम चेंजर बताते हुए रविशंकर ने कहा कि देश की 120 करोड़ जनता के पास आधार है और 57 करोड़ बैंक अकाउंट इससे लिंक है जिससे देश में 57,000 करोड़ की बचत हुई है।

बता दें कि हाल ही में खाद्य सुरक्षा योजना के सभी लाभुकों के आधार सीडिंग 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से पूरा करने का निर्देश दिया गया था। यदि लाभुकों की आधार सीडिंग नहीं हुई तो केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आवंटित खाद्यान्न को रोक सकती है।

गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी कंपनी LIC ने भी आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। अब एलआईसी की नई पॉलिसी लेने या किसी बीमा की रकम लेने के लिए आधार कार्ड देना होगा। अब पॉर्टल पर आधार नंबर डाले बिना बीमा खरीदने जैसे काम नहीं किए जा सकते हैं। यहां तक की अपनी पुरानी पॉलिसी को एक्सेस करने के लिए भी आधार नंबर की जरूरत पड़ेगी। अगर पॉलिसी धारक ने अपना आधार नंबर अपडेट नहीं कर रखा है तो वह अपनी पॉलिसी को ऑनलाइ चैक नहीं कर सकता इसके अलावा पेमेंट हिस्ट्री को भी एक्सेसे नहीं कर सकता है।

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भारत में नहीं चलेगी लोन वुल्फ अटैक की चाल, NSG कमांडोज ले रहे खास ट्रेनिंग

पूरी दुनिया में आतंकवादी संगठनों ने आतंकवादी वारदात की जो लोन वुल्फ अटैक की नई रणनीति अपनाई है, वह भारत में कामयाब नहीं होगी. क्योंकि हमारे NSG कमांडोज आतंकवाद की इस नई चुनौती से निपटने की तैयारी में जुट चुके हैं.

पश्चिमी देशों में किसी एक आतंकवादी द्वारा वाहन को भरी भीड़ पर चढ़ा देना या चाकू से हमला कर लोगों को मार देने जैसे आतंकवादी वारदात तेज हो गए हैं. जिसे देखते हुए भारत में इस तरह के आतंकवादी हमलों से निपटने के लिए NSG कमांडोज को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है.

सेना के सूत्रों का भी कहना है कि किसी अकेले आतंकवादी द्वारा बिना ज्यादा पैसा खर्च किए किसी भीड़-भाड़ भरी जगह में इस तरह का लोन वुल्फ अटैक कहीं अधिक खतरनाक है.

फ्रांस के नीस में हाल ही में इसी तरह के आतंकी वारदात को अंजाम दिया गया, जब एक आतंकवादी ने भीड़ से भरे बाजार में छुट्टियां मना रहे लोगों पर ट्रक चढ़ा दी. इस आतंकी हमले में 86 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक घायल हुए थे.

भारत में अमूमन इस तरह के हमलों से निपटने के लिए ब्लैक कैट कमांडोज को ट्रेन किया जाता है. इस आतंकवाद-रोधी फोर्स के जवानों को कई देशों की सेनाएं ट्रेनिंग देती हैं.

सूत्रों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने फ्रांस और जर्मनी में हाल के दिन में हुए इस तरह की लोन वुल्फ अटैक घटनाओं और लंदन ट्यूब में विस्फोटक रखे जाने की घटनाओं का अध्ययन किया.

NSG के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया, “अकेले आतंकवादी द्वारा चाकू से हमला करना या ट्रक चढ़ा देने जैसे आतंकवादी हमलों की गंभार संभावनाएं हैं, क्योंकि पूरी दुनिया में यह तेजी से हो रहा है. हम इससे निपटने के लिए अपनी तकनीक खुद इजाद कर रहे हैं, साथ ही दूसरे देशों के सुरक्षाबलों की भी मदद ले रहे हैं कि कैसे इस तरह के हमले से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.”