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ISRO ने लॉन्‍च किया 100वां सैटेलाइट, अंतरिक्ष जगत में भारत की उपलब्धि से घबराया पाकिस्‍तान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को अपने अंतरिक्ष केंद्र से दूर संवेदी कार्टोसैट -2 और 30 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। ऐसे में ISRO ने अपना 100वां सैटलाइट सफलतापूर्वक स्पेस में लॉन्च कर दिया है। इसरो के पूर्व चेयरमैन ए.एस. किरण कुमार ने चेन्नई से लगभग 80 किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर में मिशन नियंत्रण केंद्र में बताया, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) ने भारत के 710 किलोग्राम वजनी कार्टोसैट और 10 किलोग्राम नैनो उपग्रह और 100 किलोग्राम वजनी माइक्रो उपग्रह सहित 28 विदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया।

श्रीहरिकोटा हाई आल्टीट्यूड रेंज (एसडीएससी-एसएचएआर) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट और 33 सेकंड के बाद 320 टन वजनी रॉकेट ने काटरेसैट-2 को सूर्य की तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया। कार्टोसैट-2 ने सूर्य की 505 किलोमीटर कक्षा में प्रवेश किया और यह पांच वर्षो की अवधि तक यहां रहेगा। 100 किलोग्राम वजनी माइक्रो उपग्रह ने पृथ्वी से 359 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य की तुल्यकालीक कक्षा में प्रवेश किया। इसकी लॉन्चिंग के बाद ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से बयान आया कि भारत के इस सैटेलाइट क्षेत्र के स्‍थायित्‍व के लिए संकट पैदा होने की आशंका तक जता दी। पाकिस्तान के मुताबिक, दोहरी प्रकृति वाले सेटलाइट से क्षेत्र की सामरिक स्थिरता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

बता दें कि यह 2018 का पहला अंतरिक्ष मिशन है, जो कि हमारे देश की नए साल की नई उपलब्धि है। यह हमारे लिए बेहद गौरवान्वित करने वाली बात है। गौरतलब है कि इससे पहले 31 अगस्त, 2017 को पीएसएलवी-सी39 मिशन असफल हो गया था। किरण कुमार ने कहा, हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रबंध किए थे कि पिछले मिशन (पीएसएलवी-39) की असफलता का कारण बनी हीट शील्ड संबंधी समस्या फिर सामने न आए। इसरो ने कुल 31 उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं, जिनमें से कार्टोसैट-2, नैनो उपग्रह और माइक्रो उपग्रह भारत के हैं। कुमार ने कहा कि मिशन केंद्र से की जा रही निगरानी से पता चला है कि स्थापित किया गया काटरेसैट-2 संतोषजनक प्रदर्शन कर रहा है।

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विश्व बैंक ने कहा- 2018 में चीन को पछाड़ आगे निकल जाएगी भारतीय इकोनॉमी

आम बजट से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि 2018 में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहेगी, जबकि इसके बाद के दो साल तक यह 7.5 फीसदी के स्तर पर रहेगी और चीन को इस मामले में काफी पीछे छोड़ देगी। बैंक के अनुसार चीन की विकास दर 2017 में 6.8 फीसदी रहेगी जो इस दौरान भारत की 6.7 फीसदी से 0.1 फीसदी ज्यादा है, लेकिन इसके बाद 2018 में यह 6.4 फीसदी और 2019 व 2020 में क्रमश: 6.3 और 6.2 फीसदी पर सिमट जाएगी।

बैंक ने बुधवार को जारी ग्लोबल इकोनामिक्स प्रॉस्पेक्ट में कहा है कि व्यापक सुधार की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए महत्वाकांक्षी कदमों के साथ भारत के अंदर अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले विकास की अपार संभावनाएं हैं। नोटबंदी और जीएसटी के कारण प्रारंभिक झटकों से उबरते हुए यह 2017 में 6.7 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है।

विश्व बैंक के निदेशक ऐहान कोसे ने कहा, ‘इस बात की भरपूर संभावना है कि अगले दशक में भारत अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले तेज गति से विकास करेगा। इसलिए मैं निकट भविष्य में आर्थिक विकास के अनुमानों को लेकर चिंतित नहीं हूं। अगले दस साल की बात की जाए तो भारत के अंदर जबर्दस्त संभावनाएं हैं।’

कोसे के अनुसार संभावनाओं को हकीकत में तब्दील करने के लिए भारत को निवेश बढ़ाने के उपाय करने होंगे। श्रम बाजार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े सुधारों को लागू करने और निवेश के रास्ते की बाधाओं को दूर करने से भारत को काफी लाभ होगा। भारत युवाओं का देश है और इस मामले में कोई भी देश उसके आसपास भी नहीं ठहरता है। इन खूबियों के दम पर भारत अगले दस साल तक औसतन सात फीसदी की विकास दर हासिल करने की क्षमता रखता है।

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साल 2017 में भारत ने 28 शहादतों का बदला 138 पाकिस्तानी जवानों को मार कर लिया

भारत और पाकिस्तान भले ही सीधे युद्ध की स्थिति में न हों, लेकिन दोनों देशों की सीमा पर गोलीबारी होती रहती है. इसी गोलीबारी में साल 2017 में भारत ने अपने 28 सैनिक गंवाए, लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान के 138 सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

यह आंकड़े जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर गोलीबारी में हुई मौतों के हैं और भारत सरकार के खुफिया सूत्रों ने जारी किए हैं. सूत्रों का कहना है कि अक्सर यह देखने को मिलता है कि पाकिस्तानी सरकार अपने सैनिकों की मौत को स्वीकार ही नहीं करती.

खुफिया सूत्रों का कहना है कि सीमा पर मारे जाने वाले सैनिकों को पाकिस्तानी सरकार आम नागरिक बताती है. सूत्रों के मुताबिकभारतीय सेना ने पिछले साल घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर काफी सख्त रुख अपनाया था.

सूत्रों के अनुसार कि साल 2017 में सीमा पर हुई गोलीबारी में पाकिस्तान के 138 सैनिकों की जानें गईं और 158 सैनिक घायल हुए. वहीं, इस दौरान 70 भारतीय सैनिक घायल हुए. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों की मौत पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है.

हालांकि, सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा है कि भारतीय सेना सीमा पर होने वाली गोलीबारी का कड़ा जवाब देती है और आने वाले दिनों में भी ऐसा करना जारी रखेगी.

एक आंकड़े के मुताबिक 2017 में पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम तोड़ने की 860 घटनाएं हुईं, जबकि 2016 में ऐसी 221 घटनाएं ही हुई थीं. भारतीय सेना का कहना है कि पाकिस्तान अपने सैनिकों की मौतों को कभी स्वीकार नहीं करता है. करगिल युद्ध में भारत के सबूत दिए जाने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने सैनिकों की मौत से इनकार किया था.

भारत सरकार के खुफिया सूत्रों ने 25 दिसंबर को हुई घटना का भी हवाला दिया, जब पांच पाक सैन्य कमांडो ने सीमा पार कर ली थी और उसमें से तीन कमांडो मारे गए थे. पहले पाकिस्तानी सेना ने एक ट्वीट करके इन मौतों की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में यह ट्वीट डिलीट कर दिया. दो दिन बाद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया था कि भारतीय सेना की गोलीबारी में तीन पाक सैनिक मारे गए हैं.

सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने एलओसी पर स्नाइपर फाइरिंग में 27 पाक सैनिकों को मारा, जबकि पाकिस्तान की ओर से की गई ऐसी कार्रवाई में 7 भारतीय सैनिक मारे गए.

भारतीय सेना लगातार कोशिश में है कि पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के गठजोड़ का मजबूती से सामना किया जाए. पिछले साल मई में भारतीय सेना ने कहा था कि वह एलओसी पर पाकिस्तानी सेना के बंकरों को निशाना बना रही है. इसके कुछ दिनों बाद ही दो भारतीय सैनिकों के सिर काट लिए गए थे.

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इंफोसिस को मिला नया सीईओ, सलिल एस पारेख 5 साल तक संभालेंगे कमान

आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में शुमार इंफोसिस को नया सीईओ मिल गया है। सलिल एस पारेख को इंफोसिस का नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त कर दिया गया है। सलिल सिर्फ सीईओ ही नहीं होंगे बल्कि वो कंपनी में मैनेजिंग डॉयरेक्टर का पद भी संभालेंगे। उनके पास ये दोनों पद अगले पांच सालों तक रहेंगे। हालांकि पारेख की यह नियुक्ति 2 जनवरी 2018 से ही प्रभावी होगी।

इंफोसिस ने अपनी नियामकीय फाइलिंग (स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग) में यह जानकारी दी है कि यह नियुक्ति उस समिति के नामांकन और सिफारिश के आधार पर की गई है जिसका गठन नए सीईओ की तलाश करने के लिए किया गया था। आपको बता दें कि इस समिति का गठन नंदन नीलेकणि के इंफोसिस प्रमुख बनने के बाद किया गया था।

पारेख की नियुक्ति पर क्या बोले नीलेकणि: पारेख की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए इन्फोसिस बोर्ड के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा कि सलिल को सीईओ एवं एमडी के रूप में चुनते हुए कंपनी को खुशी हो रही है। कंपनी बोर्ड का मानना है कि पारेख उद्योग में इस परिवर्तनशील समय में इंफोसिस का नेतृत्व करने के लिहाज से एक उचित व्यक्ति हैं। आपको बता दें कि नीलेकणि आन से पहले इंफोसिस कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रही थी।

पारेख के पास कितना अनुभव: पारेख में आईटी उद्योग में तीन दशकों से अधिक काम करने का अंतर्राष्ट्रीय अनुभव हैं। इसके अलावा व्यापार के बेहतर संचालन और अधिग्रहण के सफल प्रबंधन का भी उनके पास एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। पारेख फ्रांसीसी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी कैपजेमिनी में समूह कार्यकारी बोर्ड के सदस्य थे। वो साल 2000 में कैपजेमिनी से जुड़े थे। उन्होंने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है। साथ ही उनके पास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री भी है।

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भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 1.13 लाख नौकरियों का सृजन किया: भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई)

भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 1,13,000 रोजगार के अवसरों का सृजन किया है और वहां करीब 18 अरब डॉलर का निवेश किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इंडियन रुट्स, अमेरिकन सॉयल शीर्षक वाली यह रिपोर्ट सीआईआई ने मंगलवार को जारी की।

इसमें बताया गया कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व में 14.7 करोड़ डॉलर का योगदान दिया। इसके अलावा भारतीय कंपनियों ने यहां शोध और विकास गतिविधियों पर 58.8 करोड़ डॉलर खर्च किए। इस वार्षिक रिपोर्ट में अमेरिका और प्यूर्टो रिको में कारोबार कर रही 100 भारतीय कंपनियों के निवेश और रोजगार सृजन का ब्योरा दिया गया है।

करीब 50 राज्यों में इन कंपनियों ने 1,13,423 लोगों को रोजगार दिया है। भारतीय कंपनियों ने सबसे ज्यादा 8,572 नौकरियां न्यूजर्सी में दी हैं। टेक्सास में भारतीय कंपनियों ने 7,271, कैलिफोर्निया में 6,749, न्यू यॉर्क में 5,135 और जॉर्जिया में 4,554 नौकरियां दी हैं। जहां तक भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश का सवाल है तो सबसे ज्यादा निवेश न्यू यॉर्क में 1.57 अरब डॉलर का किया गया है।

न्यू जर्सी में 1.56 अरब डॉलर, मैसाचुसेट्स में 93.1 करोड डॉलर, कैलिफोर्निया में 54.2 करोड़ डॉलर और व्योमिंग में 43.5 करोड़ डॉलर का निवेश भारतीय कंपनियों द्वारा किया गया है। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि अमेरिका में भारतीय कंपनियों के निवेश की कहानी से दोनों देशों द्वारा एक दूसरे की सफलता में दिए गए योगदान का पता चलता है।

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शराब पीने के बाद लोग अंग्रेज़ी क्यों बोलते हैं?

गैर-अंग्रेजीभाषियों के साथ आपने अक्सर ऐसा महसूस किया होगा?

अगर आप किसी दूसरी भाषा में बोलने की कोशिश करते हैं तो कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा. सही शब्द आपको मुश्किल से मिलेंगे और उनका ठीक से उच्चारण करना भी चुनौती जैसा लगेगा.

लेकिन अगर आप थोड़ी सी शराब पी लें तो उस दूसरी भाषा के शब्द अपने आप मुंह से धारा प्रवाह निकलेंगे. लफ्जों की तलाश खत्म हो जाएगी और आपकी बातें लच्छेदार लगने लगेंगी. मानो ये जुबान आपकी अपनी हो.

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सामाजिक व्यवहार

ये शराब को लेकर कोई अंदाज़े की बात नहीं है. बल्कि इसे लेकर एक अध्ययन आया है. साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक थोड़ी सी शराब किसी दूसरी भाषा में बोलने में मदद करती है.

ये भी सही है कि शराब हमारी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर असर डालती है और इस लिहाज से ये एक बाधा है. लेकिन दूसरी तरफ ये हमारी हिचकिचाहट भी दूर करती है, हमारा आत्म-विश्वास बढ़ाती है और सामाजिक व्यवहार में संकोच कम करती है.

जब हम किसी दूसरे शख्स से मिलते हैं और बात करते हैं तो इन सब बातों का असर हमारी भाषाई क्षमता पर पड़ता है. इस विचार अब तक बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ही स्वीकार किया जाता था.

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थोड़ा एल्कोहल

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ लीवरपूल, ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज और नीदरलैंड्स के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मास्ट्रिच के शोधकर्ताओं ने इस विचार को टेस्ट किया. टेस्ट के लिए 50 जर्मन लोगों के एक समूह को चुना गया जिन्होंने हाल ही में डच भाषा सीखी थी.

कुछ लोगों को पीने के लिए ड्रिंक दिया गया जिनमें थोड़ा एल्कोहल था. लोगों के वजन के अनुपात में एल्कोहल की मात्रा दी गई थी. कुछ के ड्रिंक्स में एल्कोहल नहीं था. टेस्ट में भाग लेने वाले जर्मन लोगों को नीदरलैंड्स के लोगों से डच में बात करने के लिए कहा गया.

डच भाषियों को ये पता नहीं था कि किसने शराब पी रखी है और किसने नहीं. जांच में ये बात सामने आई कि जिन्होंने शराब पी रखी थी वे बेहतर उच्चारण के साथ बात कर रहे थे. शोधकर्ताओं ने ये साफ किया कि उन्हें ये नतीजे शराब की बहुत कम मात्रा में खुराक देने से मिले हैं.