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‘बहुत ज़्यादा सवाल करते थे स्टीफ़न हॉकिंग’

दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में स्टीफ़न हॉकिंग के साथ पढ़ाई की थी.

इसके बाद साइंस से संबंधित कई ग्लोबल सम्मेलनों में दोनों की मुलाक़ात होती रही. डॉक्टर नारलीकर के अनुसार, कॉलेज के दिनों में वो स्टीफ़न हॉकिंग के साथ टेबल टेनिस के मैच भी खेल चुके हैं.

कॉलेज की उन यादों पर डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने बीबीसी से बात की. पढ़िए, उन्होंने क्या-क्या बताया:

स्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर
Image captionस्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर

मैं और स्टीफ़न हॉकिंग कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे. वो मुझसे साल दो साल जूनियर ही थे. वो बाक़ी आम स्टूडेंट्स की तरह ही थे. उस वक़्त कोई उनकी प्रतिभा के बारे में नहीं जानता था.

लेकिन कुछ सालों के भीतर ही लोगों को ये अंदाज़ा हो गया था कि स्टीफ़न में कुछ ख़ास बात है.

मुझे याद है कि ब्रिटेन की रॉयल ग्रीनविच शोध विद्यालय ने साल 1961 में एक साइंस सम्मेलन आयोजित किया था. वहां स्टीफ़न हॉकिंग से पहली बार मेरी सीधी मुलाक़ात हुई थी.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटJIM WATSON/GETTY IMAGES

उस वक़्त वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. मैं एक छात्र ही था, लेकिन मुझे वहां एक लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था.

लेक्चर शुरू होने के कुछ देर बाद ही मैंने पाया कि एक स्टूडेंट है जो बहुत ज़्यादा सवाल कर रहा है. वो थे स्टीफ़न हॉकिंग.

उन्होंने मानो मुझपर सवालों की बौछार कर दी थी. वो ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में जानना चाहते थे. वो जानना चाहते थे कि बिग बैंग थियोरी है क्या?

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटHAWKING.ORG.UK

मैंने उनके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश की. लेकिन ब्रह्मांड से जुड़े उनके सवाल पैने होते चले गए. वो वाक़ई इस विषय पर गंभीर थे.

बहरहाल, सम्मेलन ख़त्म होने के बाद हम दोनों ने टेबल टेनिस खेला. हमारे बीच दो मैच हुए और दोनों ही मैच मैं जीता!

स्टीफ़न पीएचडी करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे. उस वक़्त तक लोगों को समझ आ चुका था कि हॉकिंग के मस्तिष्क की क्षमता कितनी है.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटSTR/GETTY IMAGES

सच कहूं तो पहली बार मुझे लगा था कि स्टीफ़न हॉकिंग सिर्फ़ ज़्यादा सवाल करते हैं. उन्हें उनके जवाबों से कोई लेनादेना नहीं.

लेकिन उनकी पीएचडी की थीसिस पढ़कर सब हैरान रह गए थे. क्योंकि अपनी थीसिस में ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में उन्होंने कई बेहद दिलचस्प बातें लिखी थीं.

उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफ़ेसर क़रीब 30 साल काम किया. ब्लैक होल पर उनकी रिसर्च को सबसे ज़्यादा पहचान मिली.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटLEON NEAL/GETTY IMAGES

साइंस की दुनिया के हिसाब के कहूं तो ब्लैक होल के नियमों को स्टीफ़न ने ही स्थापित किया.

स्टीफ़न की सबसे अच्छी बात थी कि वो डायलॉग में विश्वास करते थे. बहस करना उनकी आदत में शामिल नहीं था.

कैम्ब्रिज में उनके साथ मैंने विज्ञान के कई सिद्धांतों पर कई बार चर्चा की. लेकिन कभी हमारे बीच गर्म बहस नहीं हुई. हमने हमेशा एक दूसरे से सीखा ही.

अपनी बीमारी की वजह से बीते कई सालों से स्टीफ़न लेक्चर नहीं दे पा रहे थे. लेकिन लोगों की जिज्ञासाओं और उनके सवालों के जवाब वो कई माध्यमों से देते रहे.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटCHINA PHOTOS/GETTY IMAGES

मुझे याद है जब पहली बार स्टीफ़न ने कहा था कि दुनिया किसी ईश्वर के इशारे पर नहीं चलती. भगवान कुछ नहीं है. और संभावना है कि इस विश्व के अलावा भी कोई दुनिया हो.

लोगों को हमेशा ये उनकी कल्पना ही लगी. स्टीफ़न के पास भी इसे साबित करने के लिए कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. लेकिन उन्होंने मरते दम तक इसे साबित करने की कोशिश की और उनकी इस ललक का सम्मान किया जाना चाहिए.

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Stephen Hawking dies aged 76

The British physicist was known for his work with black holes and relativity, and wrote several popular science books including A Brief History of Time.

At the age of 22 Stephen Hawking was given only a few years to live after being diagnosed with a rare form of motor neurone disease. The illness left him wheelchair-bound and largely unable to speak except through a voice

synthesizer.

His family said that he died peacefully in his home near Cambridge University, where he did much of his ground-breaking work on black holes.

“We are deeply saddened that our beloved father passed away today,” a family statement said.

In the statement his children, Lucy, Robert and Tim said: “He was a great scientist and an extraordinary man whose work and legacy will live on for many years.

They praised his “courage and persistence” and said his “brilliance and humour” inspired people across the world.

“He once said, ‘It would not be much of a universe if it wasn’t home to the people you love.’ We will miss him forever.”

Prof Hawking was the first to set out a theory of cosmology as a union of relativity and quantum mechanics.


Factfile: Stephen Hawking

  • Born 8 January 1942 in Oxford, England
  • Earned place at Oxford University to read natural science in 1959, before studying for his PhD at Cambridge
  • By 1963, was diagnosed with motor neurone disease and given two years to live
  • Outlined his theory that black holes emit “Hawking radiation” in 1974
  • Published his book A Brief History of Time in 1988, which has sold more than 10 million copies
  • His life story was the subject of the 2014 film The Theory of Everything, starring Eddie Redmayne
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श्रीदेवी जैसा ही हसीन था श्रीदेवी का फ़िल्मी सफर: वो ‘लम्हे’ वो ‘चांदनी’ और अब ये ‘जुदाई’ का ‘सदमा’

 

श्री देवीइमेज कॉपीरइटMR. INDIA FILM POSTER

“जब मैं हवा-हवाई गाना शूट कर रहा था तो मुझे समझ नहीं आता था कि मैं श्रीदेवी का क्लोज़ अप लूँ या फिर दूर से शूट करूँ.”

श्रीदेवी के साथ फ़िल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में काम करते वक़्त अपनी उलझन निर्देशक शेखर कपूर ने बरसों पहले कुछ यूँ बयां की थी.

“उनके चेहरे के भाव, उनकी आँखें इतनी मोहक थीं कि लगता था कि इन्हीं को दिखाता रहूँ जो क्लोज़ अप में ही मुमकिन था, लेकिन इसमें उनका डांस छूट जाता था. उनका डांस ऐसा ग़ज़ब था कि लगता था, दूर से कैमरे में हर एक अदा कैद कर लूँ.”

अलग अलग फ़िल्मों में कुछ ऐसा था श्रीदेवी का करिश्मा..

श्री देवीइमेज कॉपीरइटSADMA MOVIE POSTER

‘सदमा’ की वो श्रीदेवी

‘सदमा’ की वो 20 साल की लड़की जो पुरानी ज़िंदगी भूल चुकी है और वो सात साल की मासूमियत लिए एक छोटी बच्ची की तरह कमल हसन के साथ उसके घर पर रहने लगती है.

रेलवे स्टेशन का वो सीन जहाँ याददाश्त वापस आने के बाद ट्रेन में बैठी श्रीदेवी कमल हसन को भिखारी समझ बेरुख़ी से आगे बढ़ जाती है और कमल हसन बच्चों-सी हरकतें करते हुए श्रीदेवी को पुराने दिन याद दिलाने की कोशिश और करतब करते हैं- शायद हिंदी फ़िल्मों के बेहतरीन दृश्यों में होगा.

एक ऐसी अदाकारा जो मोम की तरह किसी भी रोल में बख़ूबी ढल जाया करती थीं- 11 साल की उम्र में उन्होंने तेलुगू फ़िल्म में एक ऐसी बच्ची का रोल किया था जो देख नहीं सकती थी.

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या सफ़ेद लिबास में ढली ‘चांदनी’ जो अपने मंगेतर के ठुकराए जाने से दुखी तो हैं पर किसी और के साथ दोबारा ज़िंदगी शुरू करने से हिचकिचाती नहीं भले ही वो कोशिश नाकाम रही.

या फिर अपनी उम्र से दोगुने व्यक्ति से प्रेम करने का साहस करने वाली ‘लम्हे’ की पूजा. या फिर एक ही फ़िल्म में नरम और लड़क मिज़ाज वाली दो बहनों का रोल ‘चालबाज़’ की मंजू और अंजू .

या फ़िल्म ‘मॉम’ में अपनी बेटी के गैंगरेप का बदला लेने निकली माँ का वो रूप जिसमें वो पूछती हैं कि अगर ग़लत और बहुत ग़लत में से चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे?

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पूरी ज़िंदगी फ़िल्मों के नाम

ये पिछले ही साल की बात है कि श्रीदेवी ने फ़िल्मों में 50 साल पूरे किए और 54 साल की उम्र में उन्होंने जीवन को अलविदा कह दिया है.

जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उन्होंने लगभग पूरी ज़िंदगी फ़िल्मों में लगा दी.

51 साल पहले चार साल की एक छोटी-सी बच्ची तमिल सिनेमा की स्क्रीन पर नज़र आई थी. दरअसल पर्दे पर उन्होंने एक छोटे लड़के का रोल किया था. नाम था श्रीदेवी.

तमिल-तेलुगू में चाइल्ड आर्टिस्ट का काम करते करते हुए वो हिंदी सिनेमा तक आ पहुँची जब लोगों ने 1975 में उन्हें ‘जूली’ में बाल कलाकार के तौर पर देखा.

श्रीदेवीइमेज कॉपीरइटSOLVA SAWAN MOVIE POSTER

और यही श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की पहली सुपरस्टार कहलाईं हालांकि उन्होंने बतौर लीड एक्टर सबसे पहले रजनीकांत के साथ 1976 में तमिल फ़िल्म में काम किया था जिसमें कमल हासन की ख़ास भूमिका थी.

1978 में जब भारतीराजा की हिंदी फ़िल्म ‘सोलवां सावन’ में श्रीदेवी पर्दे पर आईं तो शायद ही किसी की नज़र फ़िल्म पर पड़ी.

श्रीदेवी का वज़न उस समय था कोई 75 किलो और लोग उन्हें ‘थंडर थाइज़’ कहते थे. फिर 1983 में ‘हिम्मतवाला’ रिलीज़ हुई.

बड़ी-बड़ी आँखों वाली श्रीदेवी ने धीमे-धीमे अपने काम और अभिनय से सबका मुँह बंद करा दिया. उस ज़माने में लोग उन्हें ‘लेडी अमिताभ’ भी कहते थे.

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शुरुआती जीवन

उनके परिवार की बात करें तो पिता के. अयप्पन एक वकील थे और घर में बहन श्रीलता और भाई सतीश किसी ज़माने में उनके पिता ने कांग्रेस के टिकट पर शिवकासी से चुनाव भी लड़ा था और श्रीदेवी ने अपने पिता के लिए चुनाव अभियान में हिस्सा भी लिया था.

श्रीदेवी की माँ ने शुरुआती दौर में उनके करियर में अहम रोल निभाया.

कम्प्लीट एक्टर को बयां करते हुए जिन लोगों का नाम ज़हन में आता है- उसमें श्रीदेवी ज़रूर से एक हैं. कॉमेडी, एक्शन, डांस, ड्रामा -हर विधा में वो माहिर थीं.

‘मिस्टर इंडिया’ के एक सीन में जहाँ वो चार्ली चैपलिन जैसे गेट अप में एक होटल में जाती हैं, उस सीन में अपनी कॉमिक टाइमिंग के ज़रिए उन्होंने सबको चारों खाने चित्त कर दिया था.

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अव्वल डांसर

डांस के मामले में भी वो अव्वल थीं, फिर वो ‘हवा हवाई हो’, ‘मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियाँ हों’ या ‘नैनों में सपना’ हो या फ़िल्म ‘नगीना’ का वो क्लाइमेक्स डांस जिसमें वो नागिन बनी थीं.

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कैसे फ़िल्म ‘नगीना’ में क्लाइमेक्स गाना और डांस शूट होना था और सेट एक ही दिन के लिए उपलब्ध था.

सुबह उन्होंने डांस शूट करना शुरू किया और साथ ही सेट को तोड़ने का काम शुरू हो गया.

खाली एक दीवार बची थी और उसी दायरे में श्रीदेवी को डांस करना था, लेकिन गाना देखने के बाद कभी इस बात का एहसास नहीं होता.

हालांकि अपनी आवाज़ के लिए शुरू में उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी थी.

जब श्रीदेवी ने शादी का फ़ैसला किया

निजी ज़िंदगी की बात करें तो 90 के दशक में उनके जीवन में उथल पुथल मची जब बोनी कपूर के साथ उनकी शादी हुई जो पहले से शादीशुदा थे.

श्रीदेवीइमेज कॉपीरइटTWITTER @SRIDEVIBKAPOOR

बतौर निर्देशक बोनी कपूर के साथ वे कई फ़िल्में कर चुकी थीं और 1997 में फ़िल्म ‘जुदाई’ के बाद उन्होंने लंबा ब्रेक लिया.

लेकिन 2012 में जब वो ‘इंग्लिश विंग्लिश’ में हिंदी फ़िल्मों में लौटीं तो ऐसा लगा ही नहीं कि वो कभी पर्दे से गई थीं.

“मर्द खाना बनाए तो कला है, औरत बनाए तो उसका फ़र्ज़ है”- फ़िल्म में जब वो ये डायलॉग बोलती हैं तो शशि के रोल में एक घरेलू महिला की दबी इच्छाओं, उसकी अनदेखी को बयां कर जाती हैं.

पिछले साल 2017 में आई ‘मॉम’ उनकी आख़िरी फ़िल्म रही. अपनी दोनों बेटियों के साथ श्रीदेवी का बड़ा लगाव था-किसी भी माँ की तरह.

सोशल मीडिया पर अकसर वो अपनी बेटियों के साथ अपनी तस्वीरें डाला करती थीं.

श्रीदेवीइमेज कॉपीरइटMOM MOVIE POSTER

उनकी बेटी जाह्नवी की पहली फ़िल्म ‘धड़क’ पाँच महीने बाद 20 जुलाई 2018 को रिलीज़ होने वाली है.

अक्सर जब भी श्रीदेवी के ट्विटर पेज पर जाओ तो उनकी बेटी की पहली फ़िल्म धड़क का पोस्टर सबसे ऊपर मिलता है जिसे उन्होंने पिन टू टॉप करके रखा था.

वो अक्सर कहा करती थीं कि ‘मदर इंडिया’ उनका ड्रीम रोल था. ‘मॉम’ उनके करियर की आख़िरी और 300वीं फ़िल्म थी.

मुझे पिछले साल का एक इंटरव्यू याद है जब पति बोनी कपूर ने बहुत नाज़ से कहा था, ‘श्रीदेवी ने एक्टिंग में 50 साल पूरे कर लिए हैं, उनकी 300वीं फ़िल्म आ रही है. आप जानती हैं और किसी ऐसे एक्टर को. ऐसे एक्टर और भी होंगे शायद.’

लेकिन ‘चांदनी’ की सी रोशनी बिखेरनी वाली, बड़ी बड़ी आँखों वाली श्रीदेवी एकदम जुदा थीं जिनकी फ़िल्में चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट छोड़ जाती हैं.

फ़िल्म ‘चालबाज़’ के एक सीन में रजनीकांत श्रीदेवी से तंग होकर उन्हें ताने मारते हैं- ये रोज़-रोज़ नाच गाना तेरे बस का नहीं है.

और श्रीदेवी चैलंज करते हुए कहती हैं- तुझे तो मैं ऑल इंडिया स्टार बनकर दिखाऊँगी….ज़िंदगी में उन्होंने ऐसा ही कर दिखाया.

श्रीदेवीइमेज कॉपीरइटCHANDNI MOVIE/YASHRAJ FILMS

वो उन चंद अभिनेत्रियों में से थीं जिन्हें हिंदी, तमिल, तेलुगू फ़िल्मों के लिए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिला.

यहाँ तक कि केरल फ़िल्म इंडस्ट्री में भी उन्हें 1970 में बतौर बाल कलाकार सम्मानित किया गया था.

(हिंदी ही नहीं उन्होंने तेलुगू, तमिल, कन्नड और मलायलम फ़िल्मों में भी ख़ूब काम किया. )

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बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी का कार्डियक अरेस्‍ट से निधन, दुबई में शादी अटेंड करनी गई थीं

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी अब हमारे बीच नहीं रही। शनिवार (24 फरवरी) को हृदय-गति रुक जाने (कार्डियक अरेस्ट) की वजह से अचानक उनका निधन हो गया। अपने आखिरी पलों में 54 वर्षीय श्रीदेवी दुबई में थीं। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक श्रीदेवी दुबई में एक शादी अटेंड करने गई थीं। बॉनी कपूर के छोटे भाई और अभिनेता संजय कपूर ने श्रीदेवी के निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना रात 11 से 11.30 बजे के बीच की है।

संजय कपूर ने श्रीदेवी के निधन के बारे में इंडियनएक्सप्रेस ऑनलाइन को बताया कि वह खुद भी दुबई में ही थे और थोड़ी देर पहले भारत लौटे ही थे कि यह खबर आ गई। संजय दोबार दुबई जा रहे हैं। दरअसल, श्रीदेवी अपने पति बॉनी कपूर और छोटी बेटी खुशी के साथ मोहित मारवाह के शादी समारोह में शिरकत करने दुबई गई थीं। उनके निधन की खबर सुनकर लोग मुंबई में उनके घर के पास जमा हो रहे हैं। उनकी बड़ी बेटी जाह्नवी भारत में ही हैं। वह शूटिंग की वजह से परिवार के साथ दुबई नहीं गई थीं।

वहीं श्रीदेवी के निधन की खबर से बॉलीवुड में दुख का माहौल है। उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। बॉलीवुड के कई स्टार्स इस दुखद घटना पर ट्विट कर दुख जता रहे हैं। एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने ट्वीट कर लिखा है कि, ‘मेरे पास कोई शब्द नहीं है। श्रीदेवी को प्यार करनेवाले हर व्यक्ति के प्रति संवेदना। एक काला दिन। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।’ दूसरी ओर, प्रीति जिंटा ने लिखा, ‘यह सुनकर दुखी और स्तब्ध हूं कि मेरी ऑल टाइम फेवरिट श्रीदेवी नहीं रहीं। भगवान उनकी आत्मा को शांति और उनके परिवार को ताकत दें।’

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