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Elon Musk के बारे में हर वो बात जो आपको जरूर जाननी चाहिए

दुनिया का सबसे शक्तिशाली और दोबारा से इस्तेमाल किया जाने वाला रॉकेट फॉल्कन हैवी बनाने वाले करीब एक दर्जन कंपनियों के मालिक एलन मस्क के बारे में हम आज आपको हर वो बात बताएंगे जो आपको जरूर जाननी चाहिए।

बचपन में ही मिला कई देशों का अनुभव

एलन रीव मस्क 28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में एक कनाडाई- अफ़्रीकी दंपति के यहाँ जन्मे एक सुप्रसिद्ध बिजनेस टायकून हैं। एलन की माँ एक मॉडल और डाइटीशियन रहीं थीं वहीं एलन के पिता एक इलेक्ट्रोकेमिकल इंजीनियर, पायलट और सेलर थे। 1980 में इनके माता-पिता का तलाक होने के बाद ये पिता के साथ प्रिटोरिया में रहे। स्कूल में पढ़ने वाले एलन के सहपाठी इनकी अक्सर पिटाई कर दिया करते थे। एक बार तो एलन को हॉस्पिटल भी जाना पड़ा जब सहपाठियों द्वारा इन्हें सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया गया और बेहोश होने तक पिटाई की गई। कंप्यूटर में रूचि इनकी बचपन से थी। मात्र 10 वर्ष की छोटी उम्र में इन्होंने बेसिक लैंग्वेज खुद सीखनी शुरू की और 2 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद एक गेम ‘ब्लास्टर’ बनाया जो की एक मैगजीन “PC and Office Technology” द्वारा 500 डॉलर में ख़रीदा गया।

जून 1989 को अपने जन्मदिन से एक दिन पहले एलन अपनी माँ के पास कनाडा आ गए क्योंकि वो जानते थे कि अमेरिका में सपनों को जीने का सफर कनाडा आ जाने से और आसान हो जाएगा। इसके लिए इन्होंने अफ़्रीकी मिलेट्री की अनिवार्य सर्विस छोड़ दी और कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 2 साल बाद इन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में दाखिला लिया जहाँ इन्होंने इकोनॉमिक्स और फिजिक्स दोनों की पढ़ाई की। इसके बाद इन्होंने कैलिफोर्निया की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टैनफोर्ड में एनर्जी फिजिक्स में Ph.D में दाखिल लिया लेकिन 2 दिन बाद ही पढ़ाई छोड़ इंटरनेट बूम को देख कर व्यापार करने का फैसला किया।

इंटरनेट बूम मिलेनियम क्रैश और एलन के स्टार्टअप्स

एलन ने फरवरी 1995 में अपने भाई किम्भल मस्क के साथ मिलकर एक मार्केटिंग और सिटी सर्च कंपनी ‘Zip2’ बनाई जो की न्यूजपेपर्स के लिए सर्विस देती थी। Zip2 को Compaq ने 307 मिलियन डॉलर कैश और 34 मिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा।

मिलेनियम क्रैश के वक्त एक ओर जहाँ सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी वहीं ऐसे मौके पर एलन के पास मिलियंस डॉलर का मुनाफा था।

इसके बाद एलन ने मार्च 1999 में इंटरनेट पेमेंट ट्रांसफर सिस्टम ‘X.com’ की शुरुआत की जो बेहद सफल रही। कैलिफोर्निया में X.com के ऑफिस के पास ही पीटर थील का भी ऑफिस था जो अपनी कंपनी ‘Confinity’ के माध्यम से यही कार्य कर रहे थे। एक साल बाद दोनों ने अपनी कम्पनियों का विलय कर ‘PayPal Services’ की शुरुआत 2001 में की जिसका बाद में नाम ‘PayPal’ कर दिया गया।

मई 2002 में एलन ने ‘SpaceX’ की शुरुआत करी जिसका उद्देश्य मार्स ओएसिस को मंगल ग्रह पर बनाना और वहाँ मानव बस्तियाँ बसाने के साथ- साथ लांच वेहिकल्स और रेवोल्यूशनरी रॉकेट बनाना है। ऑक्टूबर 2002 को PayPal को Ebay ने 1.5 बिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा जिसमे से 11.7% के लिए एलन को 165 मिलियन डॉलर मिले जिसका निवेश इन्होने SpaceX में किया।

फरवरी 2004 में ‘Tesla’ की Series A फंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जून 2003 में बनी इस कम्पनी के चेयरमैन बन गए। 2007 में CEO और प्रोडक्ट आर्किटेक्ट बनने के बाद 2008 में कंपनी ने पहली इलेक्ट्रिक कार Tesla Roadster लॉन्च की जो बेहद सफल रही।

मुश्किलें आती रही और कदम बढ़ते रहे

एलन को SpaceX की सफलता रातों रात नहीं मिली। सारी पूंजी और निवेशकों का धन लगाकर जो पहले 3 रॉकेट लॉन्च हुए वो फेल रहे। हार न मानने का जज्बा ही था कि इन्होने चौथा रॉकेट सफलता पूर्ण लॉन्च किया और SpaceX को नासा से 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ।


दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट फॉल्कन हेवी एलन की ही खोज है और रॉकेट को दोबारा से इस्तेमाल किये जाने की तकनीक भी एलन की ही देन है। जरूरत पड़ने पर Tesla और SpaceX कंपनी में स्लीपिंग बैग में सो जाना एलन को बेहद पसन्द है क्योंकि एलन काम के समय सिर्फ काम पर ही अपना सारा ध्यान देते हैं और किसी भी लक्ष्य को मुश्किल नही मानते।

एलन SpaceX, Tesla और Neuralink के CEO हैं। एलन Zip2, OpenAI, PayPal और Neuralink के Co-Founder हैं तथा X.com , theboringcompany और SpaceX के Founder हैं।

एलन एक बहुआयामी सोच वाले उत्कृष्ट बुद्धि से संपन्न वैज्ञानिक और आंत्रेप्रीन्योर हैं जिनकी विलक्षण प्रतिभा का लोहा समस्त विश्व मानता है। एलन 21वें सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व के स्वामी और दुनिया के 54वें सबसे धनी व्यक्ति हैं। एक बेहद खास रिपोर्ट के अनुसार एलन ने वर्ष 2017 में X.com को दोबारा से ख़रीदा है और जल्द ही इसके साथ एक नई पारी शुरू करना वो जरूर पसंद करेंगे।

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उत्तर प्रदेश में है दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल, 300 रुपये कर्ज लेकर हुआ था शुरू

कम लोग ही ये जानते होंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भारत में है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना ये स्कूल पूरी दुनिया में मशहूर है और यहां हजारों लोग पढ़ाई करते हैं. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े इस स्कूल के बारे में और जानते हैं यहां क्या खास है…
बता दें कि लखनऊ का सिटी मोंटेसरी स्कूल दुनिया में सबसे बड़ा स्कूल है. यह स्कूल बच्चों की संख्या को लेकर सबसे बड़ा स्कूल है. इस स्कूल में करीब 55 हजार बच्चे पढ़ाई करते हैं.
इस स्कूल में 55 हजार बच्चों के लिए 4500 लोगों को स्टाफ काम करता है. स्कूल के लखनऊ शहर में 18 कैंपस हैं.
यह स्कूल साल 1959 में 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ था. उस वक्त यह 300 रुपये की कैपिटल से शुरू किया गया था. आज इस स्कूल का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है.
इसकी स्कूल की स्थापना डॉ जगदीश गांधी और डॉ भारती गांधी ने की थी. अब यह स्कूल से आईसीएसई से मान्यता प्राप्त है. इस स्कूल का रिजल्ट भी सर्वश्रेष्ठ रहता है.
वैसे तो लखनऊ के इस स्कूल ने 2005 में ही 29,212 छात्रों के साथ रिकॉर्ड बना लिया था. इससे पहले सबसे बड़े स्कूल का रिकॉर्ड फिलिपीन्स के मनीला स्थित रिजाल हाई स्कूल के नाम था, जिसमें केवल 19,738 छात्र थे.
इस स्कूल में 2,500 टीचर हैं, 3,700 कंप्यूटर और 1,000 क्लासरूम है, जहां हजारों बच्चे शिक्षा लेते हैं. हालांकि किसी भी अन्य निजी स्कूल की तरह यहां भी बच्चों के माता पिता को इन सब सुविधाओं की अच्छी खासी कीमत देनी होती है.
वहीं पढ़ाई के साथ यहां खेलकूद को लेकर भी खास ध्यान दिया जाता है. पहला मॉनटेसरी स्कूल खोलने वाली मारिया कभी शिक्षा को व्यवसाय नहीं मानती है.
स्कूल को यूनेस्को से भी पीस एजुकेशन का अवार्ड मिल चुका है.
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अमेरिका: पूर्व छात्र ने गुस्से में स्कूल में की अंधाधुंध गोलीबारी, 17 की मौत; 14 घायल

अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित हाईस्कूल में एक पूर्व छात्र ने अचानक फायरिंग कर दी। इस हमले में 17 लोगों के मारे जाने की खबर है और 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। भारतीय समयानुसार घटना  देर रात हुई। स्थानीय पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के कर्मी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं।

यह घटना पार्कलैंड के मार्जरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल में हुई। यह शहर मियामी से 80 किलोमीटर उत्तर की ओर है। गोलीबारी के दौरान छात्र बुरी तरह डर गए थे और चीखने लगे थे। उन्होंने अपने दोस्तो और परिवार के लोगों को बचाने के लिए संदेश भेजे।

आरोपी छात्र की पहचान 19 साल के निकोल्स क्रूज के रुप में की गई है। क्रूज इसी स्कूल में पढ़ता था। कुछ दिन पहले ही उसकी गलत आदतों और गलत व्यवहार के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया था जिसके बाद से वह गुस्सा में था। आरोपी छात्र के पास स्कूल से संबंधित सभी जानकारी थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले स्कूल का फायर अलार्म बजाया। फायर अलार्म बजते ही स्कूल में अफरा तफरी मच गई जिसके बाद आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। आरोपी छात्र ने इस वारदात में AR-15 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किया।

ब्रोवर्ड काउंटी स्कूल के सुपरिटेंडेंट रॉबर्ट रुन्सी ने कहा कि घटनास्थल पर स्थिति भयावह है। उन्होंने कहा कि स्कूल के पास संभावित हमलावर की कोई जानकारी नहीं थी। बंदूकधारी हमलावर ने चुपचाप पुलिस को आत्मसमर्पण कर दिया। हमले में घायल 14 लोगों को इलाज के लिए नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अमेरीकी टीवी चैनलों के अनुसार स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के परिवार के लोग बड़ी संख्या में पुलिस परिसर के बाहर जमा हो गए हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा में जुटे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट कर अपनी संवेदनाएं जतायीं। उन्होंने कहा, ‘मेरी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं फ्लोरिडा में हुई गोलीबारी में पीड़ितों के साथ हैं।’

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प्रद्युम्न मामले में अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा

गुड़गांव के चर्चित प्रद्युम्न हत्याकांड में एक बड़ा फ़ैसला आया है.

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने फ़ैसला दिया है कि प्रद्युम्न की हत्या के नाबालिग अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाएगा.

11वीं में पढ़ने वाले इस अभियुक्त को सीबीआई ने आठ नवंबर को गिरफ़्तार किया था.

इस फ़ैसले के बाद अब जुवेनाइल बोर्ड ने ये मामला ज़िला सत्र अदालत को सौंप दिया है जहां 22 दिसंबर को अभियुक्त की पेशी होगी.

सात साल के प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या आठ सितंबर को हुई थी. उनका शव गुड़गांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में शौचालय के बाहर मिला था.

अभियुक्त भी उसी स्कूल का छात्र है. सीबीआई का दावा है कि अभियुक्त ने प्रद्युम्न की हत्या परीक्षाएं टलवाने के लिए की थी.

जुवेनाइल जस्टिस क़ानून में बदलाव के बाद ये पहला मामला है जिसमें किसी नाबालिग को जघन्य अपराध करने की वजह से बालिग मानकर मुकदमा चलाया जाएगा.

दिसंबर 2012 में हुए निर्भया हत्याकांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस क़ानून को सख़्त किया गया था. नया क़ानून जनवरी 2016 में लागू हुआ.

रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांवइमेज कॉपीरइट/AFP/GETTY

इस क़ानून के मुताबिक़

  • अगर जुर्म ‘जघन्य’ हो, यानी आईपीसी में उसकी सज़ा सात साल से ज़्यादा हो तो, 16 से 18 साल की उम्र के नाबालिग़ को वयस्क माना जा सकता है.
  • ऐसा होने पर किशोर अपराधी पर सामान्य कोर्ट में मुकदमा चलाए जाने के बारे में निर्णय लेने का अधिकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास होगा.
  • पुराने क़ानून के तहत 18 साल से कम उम्र के अभियुक्त पर मुकदमा अदालत की जगह जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता था.
  • जघन्य अपराधों में दोषी पाए गए किशोर अपराधी को जेल की सज़ा दी जा सकती है, हालांकि उसे उम्र क़ैद या मौत की सज़ा नहीं होगी.
  • दोषी पाए जाने की सूरत में अपराधी को अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए किशोर सुधार गृह भेजा जाता है.
रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांवइमेज कॉपीरइट/PTI

बालिग की तरह मुकदमा

किस अभियुक्त को बालिग माना जाए, इसकी सिफ़ारिश जांच एजेंसी करती है.

प्रद्युम्न मामले में सीबीआई ने अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की सिफ़ारिश की थी. साथ ही प्रद्युम्न के पिता ने भी इसके लिए अर्ज़ी लगाई थी.

जुवेनाइल बोर्ड के वजह पूछने पर सीबीआई ने बताया कि अभियुक्त का जुर्म जघन्य की श्रेणी में आता है.

  • अभियुक्त को अगले तीन साल तक सुधार गृह में रखा जा सकता है.
  • उसके बाद भी अगर ज़मानत न मिली तो उसे जेल भेज दिया जाएगा.
  • उस पर मुकदमा बालिग के तौर पर चलेगा लेकिन उसे उम्र क़ैद या फांसी की सज़ा नहीं हो सकती
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डेंटर ने अपने पैसे से बनाया स्कूल, सिलाई केंद्र और गरीबों के लिए गाड़ी

पिछले लंबे समय से हरिद्वार में कारों की डेंटिंग पेंटिंग करने वाला एक मिस्त्री समाज के लिए मिसाल बन गया है. अपने छोटी-छोटी बचत से मिस्त्री ने लोगों के वह सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं जो कायदे से सरकार को उपलब्ध करवानी चाहिए थी.

मोती बाबा के नाम से मशहूर इस मिस्त्री ने अपनी कमाई से थोड़ा-थोड़ा पैसा जोड़कर गरीब बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल और विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई केंद्र खोला है. अब इन्होंने टिबड़ी क्षेत्र के गरीब लोगों के लिए एक गाड़ी भी तैयार करके दी है.

इसका उपयोग कोई भी दुख परेशानी के समय में मुफ़्त में कर सकता है. बाबा की इस पहल ने सरकारी तंत्र को आइना दिखाने का काम किया है.

कारों की डेंटिंग पेंटिंग से होने वाली रोज़ की कमाई से बाबा एक हिस्सा निकाल देते हैं. इस बचत से टिबड़ी क्षेत्र की जनता के लिए उन्होंने एक कार तैयार कर दी है जो परेशानी के समय महिलाओं को निशुल्क सेवा देगी.


इसके अलावा बाबा ने गरीब बच्चों के लिए एक छोटा सा स्कूल और विधवा हुई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई केंद्र भी खोला है.

बाबा की इस पहल का क्षेत्र की जनता खूब स्वागत कर रही है. महिलाओं का तो यहां तक कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़े-बड़े नेता आए लेकिन आज तक किसी ने उनके लिए कुछ नहीं किया. अब इस गाड़ी के मिलने से परेशानी के समय में उन्हें बड़ी राहत मिलेगी.

ख़ास बात यह है कि बाबा ने जो कार तैयार कर टिबड़ी के लोगों के लिए सौंप दी है उसका खर्च भी वे खुद ही वहन करेंगे.

आज के समय में जनता से वोट लेने वाले नेता सिर्फ चुनाव के समय में ही लोगों के बीच नज़र आते हैं तो वही इस मिस्त्री ने अपनी जन सेवा की भावना से इन नेताओं को आइना दिखाने का काम किया है.