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X या SpaceX ! कौन है एलन मस्क के सबसे करीब? जानें एलन से जुड़ी हर बात

दुनिया का सबसे शक्तिशाली और दोबारा से इस्तेमाल किये जा सकने वाले राकेट फॉल्कन हैवी को बनाने वाले एलन मस्क के बारे में हम आपको आज वो बातें बताएंगे जो आपको जरूर जाननी चाहिए।

बचपन में ही मिला कई देशों का अनुभव

एलन रीव मस्क 28 जून 1971 को साउथ अफ्रीका के प्रीटोरिया में एक कनाडाई- अफ़्रीकी दंपत्ति के यहाँ जन्मे सुप्रसिद्ध अमेरिकी बिज़नस टायकून हैं। एलन की माँ एक मॉडल और डाइटीशियन रही थी जबकि एलन के पिता एक इलेक्ट्रोकैमिकल इंजीनयर, पायलट और सेलर रहे थे। 1980 में इनके माता-पिता का तलाक होने के बाद ये अपने पिता के साथ प्रीटोरिया में रहे थे। स्कूल में एलन के साथ पड़ने वाले बच्चे एलन की अक्सर पिटाई कर दिया करते थे। एक बार तो एलन को हॉस्पिटल भी जाना पड़ा जब इनको सहपाठियों ने सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया गया और तब तक मारा गया जब तक ये होश खो बैठे। कंप्यूटिंग में रूचि इनको बचपन से थी। 10 वर्ष की छोटी उम्र में इन्होंने बेसिक लैंग्वेज खुद ही सीखनी शुरू की और 2 वर्षों की मेहनत से एक गेम “ब्लास्टर” बनाया जो की एक मैगजीन PC and Office Technology ने 500 डॉलर में खरीदा।

जून 1989 को अपने जन्मदिन से एक दिन पहले एलन अपनी माँ के पास कनाडा आ गए क्योंकि वो जानते थे कि अमेरिका में सपनों को जीने का सफर कनाडा चले जाने से और आसान हो जायेगा। इसके लिए इन्होंने अफ़्रीकी मिलिट्री की आवश्यक सर्विस छोड़ दी और कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 2 साल बाद इन्होने यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिल्वेनिया में दाखिला लिया। यहाँ इन्होंने इकोनॉमिक्स और फिजिक्स दोनों की पढ़ाई की। इसके बाद इन्होंने कलिफ़ोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में एनर्जी फिजिक्स में PH.D. करने के लिए दाखिला लिया लेकिन 2 दिन बाद ही पढ़ाई छोड़ के इंटरनेट बूम को देखकर व्यापार करने का फैसला किया।

इंटरनेट बूम मिलेनियम क्रैश और एलन के स्टार्टअप्स

फरवरी 1995 में अपने भाई किम्भल मस्क के साथ मिलकर एक मार्केटिंग और सिटी सर्च कंपनी Zip2 बनाई जो कि न्यूजपेपर्स के लिए सर्विस देती थे। Zip2 को Compaq ने 1999 में 307 मिलियन डॉलर कैश और 34 मिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा।

मिलेनियम क्रैश के वक्त एक ओर जहां समस्त विश्व की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी थी वहीं एलन के पास ऐसे वक्त में मिलियंस डॉलर्स का मुनाफा था।

इसके बाद एलन ने एक इंटरनेट पेमेंट ट्रांसफर सिस्टम X.com की शुरुआत मार्च 1999 में की जो कि बेहद सफल रही। कैलिफ़ोर्निया में X.com के पास ही पीटर थील की Confinity कंपनी का ऑफिस था और वो भी यही काम कर रहे थे। एक साल बाद दोनों की कंपनियों की जगह मिलकर PayPal Service की शुरुआत 2001 में हुई जिसका बाद में नाम PayPal कर दिया गया।

मई 2002 में एलन ने SpaceX की शुरुआत करी, जिसका उद्देश्य मार्स ओएसिस को मंगल गृह पर बनाना है और वहां पर मानव बस्तियों की शुरुआत करने के साथ साथ स्पेस लांच व्हीकल्स और रेवोक्यूशनरी राकेट बनाना है।ऑक्टूबर 2002 में PayPal को Ebay ने 1.5 बिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा जिसमे एलन को 11.7% शेयर के लिए 165 मिलियन डॉलर मिले और उसका निवेश इन्होंने SpaceX में किया।

फ़रवरी 2004 में Tesla की सीरीज ए फंडिंग में एलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जून 2003 में बनी कम्पनी के चेयरमैन बन गए। 2007 में Tesla के CEO और प्रोडक्ट आर्किटेक्ट बनने के बाद 2008 में कम्पनी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार Tesla Roadster लांच की जो कि बेहद सफल रही।

मुश्किलें आती रहीं और कदम बढ़ते रहे

एलन को SpaceX की सफलता रातों रात नहीं मिली। सारी पूंजी और निवेशकों का धन लगाकर जो पहले 3 रॉकेट लांच किये वो विफल रहे। हार न मानने का जज्बा ही था कि इन्होंने चौथी लांचिंग पर सफलता पा ही ली और नासा को SpaceX में 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश करने को मना लिया।

दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट फॉल्कन हेवी भी एलन की ही देन है और दुबारा रॉकेट के इस्तेमाल को सफल बनाने की तकनीक भी एलन ने ही खोजी है। जरूरत पड़ने पर Tesla और SpaceX की फैक्ट्री में स्लीपिंग बैग में सो जाना एलन को बेहद पसन्द है क्योंकि काम के वक्त वो सिर्फ काम पर ही ध्यान देना पसन्द करते हैं।

आज के वक्त में टेस्ला कार्स की टेक्नोलॉजी, फॉल्कन रॉकेट की टेक्नोलॉजी और हाइपरलूप की टेक्नोलॉजी और पेटेंट्स एलन के ही पास हैं।

एलन SpaceX, Tesla और Neuralink के CEO हैं। एलन Zip2, OpenAI, PayPal और Neuralink के Co-Founder हैं और X.com, The Boring Company और SpaceX के Founder हैं।

एलन एक बहुआयामी सोच वाले उत्कृष्ट बुद्धि से संपन्न वैज्ञानिक और इंटरप्रेन्योर हैं जिनकी विलक्षण प्रतिभा का लोहा समस्त विश्व मानता है। एलन 21वें सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व के स्वामी और 54वें सबसे धनी व्यक्ति हैं। साथ ही ताजा जानकारी के अनुसार गत वर्ष 2017 में एलन ने x.com को फिर से खरीदा है और जल्द ही एक और पारी खेलना वो जरूर पसंद करेंगे।

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48 घंटे में धरती पर बरसेगा सूरज का कहर बंद होगा टीवी, मोबाइल और जीपीएस

अगले 48 घंटे में धरतीवासियों को सूरज का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। सूरज के कोप से आपके मोबाइल का सिग्नल जाम हो सकता है, जीपीएस गड़बड़ा सकता है और तो और आपको एंटरटेन करने वाला टीवी भी बंद हो सकता है।

सूरज का यह गुस्सा दरअसल एक खगोलीय घटना है, जिसे सौर तूफान कहते हैं। खगोल वैज्ञानिकों ने सूरज पर चलने वाले तूफान के अगले 48 घंटे में धरती से टकराने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके प्रभाव से उपग्रह आधारित सेवाएं जैसे मोबाइल, केबल नेटवर्क, जीपीएस नैविगेशन प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा रेडिएशन के खतरे की भी आशंका है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से पहले इसका असर अमेरिका और यूके में दिख सकता है। सौर तूफान के धरती से टकराने पर कुछ समय के लिए टेक ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है। नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने कहा है कि जब यह तूफान आएगा तो उत्तर और दक्षिण में तेज रोशनी नजर आएगी। हालांकि संस्थान ने इसे जी-1 या हल्का सौर तूफान ही करार दिया है। असोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि यह तूफान रविवार या सोमवार को आ सकता है। इस दौरान काफी तजे सौर हवाएं चलेंगी।

नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर में गैस के इस तूफान को देखा जा सकता है। विदेशी मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक सूरज में एक कोरोनल होल खुलेगा, जिसके कारण उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। इसमें कॉस्मिक कण भी होंगे। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके जरिये सूरज से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा।

बता दें कि सौर तूफान सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। इनमें जी-5 श्रेणी का तूफान सबसे खतरनाक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि जी-1 श्रेणी के तुफान का सबसे ज्यादा असर पावर ग्रिड और माइग्रेटरी बर्ड्स पर पड़ता है।

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फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला व रॉकेट बनाने वाली कंपनी स्पेसएक्स के मालिक और खरबपति एलन मस्क फिर से अपनी ‘फैक्ट्री में सोने’ लगे हैं. ऐसा उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट के जवाब में कहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला की मॉडल-3 इलेक्ट्रिक कार के प्रॉडक्शन में देरी होने की वजह से एलन फैक्ट्री जाने लगे हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला…
फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

टेस्ला की पिछली कार मॉडल एक्स की लॉन्चिंग के दौरान भी एलन स्लीपिंग बैग रखा करते थे और जरूरत पड़ने पर सो सकते थे. तब साथ में स्लिपिंग बैग रखने की काफी चर्चा हुई थी.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलन ने टेस्ला के इंजीनियरिंग हेड डुग फील्ड से प्रोडक्शन का काम अपने हाथ में ले लिया है. जबकि पिछले साल डुग ही प्रॉडक्शन और इंजीनियरिंग, दोनों काम देख रहे थे.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

एलन ने कहा है कि डुग को दोनों काम इसलिए दिया गया था कि ताकि प्रॉडक्शन आसान हो. उन्होंने कहा कि टेस्ला ऐसी कार नहीं डिजाइन करती जिसका निर्माण करना मुश्किल हो.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के ऊपर ग्राहकों की डिमांड पूरा करने का दबाव है. Bloomberg के मुताबिक, हफ्ते में 2200 कारें बन रही हैं, जबकि 2500 का लक्ष्य रखा गया था.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

एलन अक्सर मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं. पिछले दिनों उन्होंने ट्विटर पर एक चैलेंज दिए जाने के बाद अपनी कंपनियों के दो फेसबुक पेज डिलीट कर दिए थे. दोनों पेज वेरिफाइड था और उस पर करीब 50 लाख फॉलोअर्स थे. उन्होंने ऐसा तब किया है, जब फेसबुक डाटा लीक मामले में विवादों में आया.

फैक्ट्री में ही सो जाता है ये खरबपति, स्लीपिंग बैग हुआ था चर्चित

अरबों रुपये के मालिक ने तब कहा था कि वे फेसबुक यूज नहीं करते हैं. असल में व्हाट्सऐप के को-फाउंडर ब्रायन ऐक्टन ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि अब फेसबुक डिलीट करने का समय आ गया है. इसके जवाब में एलन ने लिखा था कि फेसबुक क्या है.

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Resume of Elon Musk: ऐसा है एलन मस्क का एक पेज का रिज्यूमे, 13 हजार करोड़ के हैं मालिक

कहा जाता है कि रेज्यूमे हमेशा साधारण और सरल भाषा में होना चाहिए. जी हां दुनिया के 54वें अमीर आदमी ने भी कुछ ऐसा ही रेज्यूमे बनाया है. आइए देखते हैं कैसा है इस शख्स का रेज्यूमे

हम बात कर रहे हैं दुनिया के 54वें अमीर आदमी एलन मस्क की, जो अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स और टेस्ला के संस्थापक हैं. उन्होंने अपना रेज्यूमे एक पेज का बना रखा है, जो आपको प्रभावित कर सकता है.

एलन मस्क ने अपने रेज्यूमे में एजुकेशन क्वालीफिकेशन, स्किल्स, प्रोफेशनल एचीवमेंट्स और इंट्रेस्ट के बारे में भी लिखा है. उन्होंने अपने रेज्यूमे को इस तरह से डिजाइन किया है कि एक पेज में उन्होंने अपनी सारी जानकारी डाल दी.

इस बात पर भले ही लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर उन्हें रेज्यूमे की क्या आवश्यकता है, लेकिन नोवोरेज्यूमे की ओर से पोस्ट किया गया ये रेज्यूमे आपको भी प्रेरित कर सकता है. साथ ही इस रेज्यूमे की डिजाइन से आप भी अपना रेज्यूमे बना सकते हैं.

मस्क की कुल संपति 20.3 बिलियन डॉलर यानि करीब 13 हजार करोड़ रुपये है.

वे साउथ अफ्रीका में बड़े हुए और 17 साल की उम्र में कनाडा आ गए. उसके बाद अमेरिका में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्नसेलवेनिआ में पढ़ाई की है.

मस्क पहले पे-पाल के को-फाउंडर थे.

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‘बहुत ज़्यादा सवाल करते थे स्टीफ़न हॉकिंग’

दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में स्टीफ़न हॉकिंग के साथ पढ़ाई की थी.

इसके बाद साइंस से संबंधित कई ग्लोबल सम्मेलनों में दोनों की मुलाक़ात होती रही. डॉक्टर नारलीकर के अनुसार, कॉलेज के दिनों में वो स्टीफ़न हॉकिंग के साथ टेबल टेनिस के मैच भी खेल चुके हैं.

कॉलेज की उन यादों पर डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने बीबीसी से बात की. पढ़िए, उन्होंने क्या-क्या बताया:

स्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर
Image captionस्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर

मैं और स्टीफ़न हॉकिंग कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे. वो मुझसे साल दो साल जूनियर ही थे. वो बाक़ी आम स्टूडेंट्स की तरह ही थे. उस वक़्त कोई उनकी प्रतिभा के बारे में नहीं जानता था.

लेकिन कुछ सालों के भीतर ही लोगों को ये अंदाज़ा हो गया था कि स्टीफ़न में कुछ ख़ास बात है.

मुझे याद है कि ब्रिटेन की रॉयल ग्रीनविच शोध विद्यालय ने साल 1961 में एक साइंस सम्मेलन आयोजित किया था. वहां स्टीफ़न हॉकिंग से पहली बार मेरी सीधी मुलाक़ात हुई थी.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटJIM WATSON/GETTY IMAGES

उस वक़्त वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. मैं एक छात्र ही था, लेकिन मुझे वहां एक लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था.

लेक्चर शुरू होने के कुछ देर बाद ही मैंने पाया कि एक स्टूडेंट है जो बहुत ज़्यादा सवाल कर रहा है. वो थे स्टीफ़न हॉकिंग.

उन्होंने मानो मुझपर सवालों की बौछार कर दी थी. वो ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में जानना चाहते थे. वो जानना चाहते थे कि बिग बैंग थियोरी है क्या?

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटHAWKING.ORG.UK

मैंने उनके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश की. लेकिन ब्रह्मांड से जुड़े उनके सवाल पैने होते चले गए. वो वाक़ई इस विषय पर गंभीर थे.

बहरहाल, सम्मेलन ख़त्म होने के बाद हम दोनों ने टेबल टेनिस खेला. हमारे बीच दो मैच हुए और दोनों ही मैच मैं जीता!

स्टीफ़न पीएचडी करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे. उस वक़्त तक लोगों को समझ आ चुका था कि हॉकिंग के मस्तिष्क की क्षमता कितनी है.

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सच कहूं तो पहली बार मुझे लगा था कि स्टीफ़न हॉकिंग सिर्फ़ ज़्यादा सवाल करते हैं. उन्हें उनके जवाबों से कोई लेनादेना नहीं.

लेकिन उनकी पीएचडी की थीसिस पढ़कर सब हैरान रह गए थे. क्योंकि अपनी थीसिस में ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में उन्होंने कई बेहद दिलचस्प बातें लिखी थीं.

उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफ़ेसर क़रीब 30 साल काम किया. ब्लैक होल पर उनकी रिसर्च को सबसे ज़्यादा पहचान मिली.

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साइंस की दुनिया के हिसाब के कहूं तो ब्लैक होल के नियमों को स्टीफ़न ने ही स्थापित किया.

स्टीफ़न की सबसे अच्छी बात थी कि वो डायलॉग में विश्वास करते थे. बहस करना उनकी आदत में शामिल नहीं था.

कैम्ब्रिज में उनके साथ मैंने विज्ञान के कई सिद्धांतों पर कई बार चर्चा की. लेकिन कभी हमारे बीच गर्म बहस नहीं हुई. हमने हमेशा एक दूसरे से सीखा ही.

अपनी बीमारी की वजह से बीते कई सालों से स्टीफ़न लेक्चर नहीं दे पा रहे थे. लेकिन लोगों की जिज्ञासाओं और उनके सवालों के जवाब वो कई माध्यमों से देते रहे.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटCHINA PHOTOS/GETTY IMAGES

मुझे याद है जब पहली बार स्टीफ़न ने कहा था कि दुनिया किसी ईश्वर के इशारे पर नहीं चलती. भगवान कुछ नहीं है. और संभावना है कि इस विश्व के अलावा भी कोई दुनिया हो.

लोगों को हमेशा ये उनकी कल्पना ही लगी. स्टीफ़न के पास भी इसे साबित करने के लिए कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. लेकिन उन्होंने मरते दम तक इसे साबित करने की कोशिश की और उनकी इस ललक का सम्मान किया जाना चाहिए.

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Stephen Hawking dies aged 76

The British physicist was known for his work with black holes and relativity, and wrote several popular science books including A Brief History of Time.

At the age of 22 Stephen Hawking was given only a few years to live after being diagnosed with a rare form of motor neurone disease. The illness left him wheelchair-bound and largely unable to speak except through a voice

synthesizer.

His family said that he died peacefully in his home near Cambridge University, where he did much of his ground-breaking work on black holes.

“We are deeply saddened that our beloved father passed away today,” a family statement said.

In the statement his children, Lucy, Robert and Tim said: “He was a great scientist and an extraordinary man whose work and legacy will live on for many years.

They praised his “courage and persistence” and said his “brilliance and humour” inspired people across the world.

“He once said, ‘It would not be much of a universe if it wasn’t home to the people you love.’ We will miss him forever.”

Prof Hawking was the first to set out a theory of cosmology as a union of relativity and quantum mechanics.


Factfile: Stephen Hawking

  • Born 8 January 1942 in Oxford, England
  • Earned place at Oxford University to read natural science in 1959, before studying for his PhD at Cambridge
  • By 1963, was diagnosed with motor neurone disease and given two years to live
  • Outlined his theory that black holes emit “Hawking radiation” in 1974
  • Published his book A Brief History of Time in 1988, which has sold more than 10 million copies
  • His life story was the subject of the 2014 film The Theory of Everything, starring Eddie Redmayne
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जब ब्रह्मांड नहीं था, तब क्‍या था? स्‍टीफन हॉकिंग ने खोला राज!

बिगबैंग थ्‍योरी के बारे में तो आप शायद जानते ही होंगे। हमारा संसार, आकाश गंगाएं, सौरमंडल और सारे ग्रह Big Bang के कारण अपने अस्तित्‍व में हैं। सालों से वैज्ञानिक यही मानते और बताते चले आ रहे हैं कि इस संसार में सबसे पहले बिगबैंग हुआ और उसके कारण ही पूरे ब्रह्मांड का उदय हुआ। अब दुनिया के फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने वो राज खोला है, जिसे पूरी दुनिया बरसों से जानता चाहती है। स्‍टीफन हॉकिंग ने हाल ही में बिगबैंग के पहले के संसार के बारे में कुछ ऐसा बताया है, जिसे जानकर विज्ञान भी अचंभित है।

बिगबैंग के पहले क्‍या था संसार में? स्‍टीफन हॉकिंग ने किया खुलासा

आज से करीब 13.8 अरब साल पहले ब्रह्मांड बहुत छोटे से आकार से बढ़ना शुरु हुआ था। फिर बहुत ज्‍यादा तापमान और फोर्स के दम पर इसका आकार बढ़ना शुरु हुआ। इसके बाद अणुओं को आपस में मिलना शुरु हुआ। पहले उनका आकार बहुत बढ़ा और फिर उनका विघटन शुरु हुआ, जिससे तमाम तारा मंडल, ग्रह और आकाश गंगाएं अस्तित्‍व में आईं। यही बिगबैंग था, जिससे हमारा संसार बना और आजतक ब्रह्मांड का आकार धीरे धीरे बढ़ रहा है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के बारे में यही जानते हैं, लेकिन इस बिगबैंग के पहले क्‍या था या कहें कि दुनिया कैसी थी, इस पर अब तक वैज्ञानिक कुछ खास नहीं जान सके हैं और इस पर वैज्ञानिकों की बहस का कोई रिजल्‍ट नहीं निकल पाया है। इसी बीच वर्ल्‍ड फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने टीवी शो StarTalk पर खुलासा करते हुए बताया है कि बिगबैंग के पहले आखिर क्‍या हुआ करता था।

क्‍या बताया स्‍टीफन हॉकिंग ने

वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने इस शो के होस्‍ट और एस्‍ट्रोफिजीसिस्‍ट नील डिग्रास से बात करते हुए बताया कि बिगबैंग के पहले क्‍या था, इस बारे में मेरा यह कहना है कि वो जितना आसान था उतना ही ज्‍यादा कॉम्‍प्‍लेक्‍स था, क्‍योंकि वास्‍तव में बिगबैंग से पहले कुछ नहीं था। हॉकिंग ने कहा कि एल्‍बर्ट आइंसटाइन की जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटीविटी के अनुसार स्‍पेस और टाइम ने साथ मिलकर दुनिया में स्‍पेस और समय का कभी न रुकने वाला चक्र बनाया है, लेकिन सच में वो बिल्‍कुल सपाट नहीं है बल्कि ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के दबाव के कारण ये आपस में घूमा हुआ है। यहीं वजह है कि इसे समझ पाना आसान नहीं है।

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स्‍टीफन हॉकिंग ने बताया, बिगबैंग के पहले समय’ का भी अस्तित्‍व नहीं था

बिगबैंग के पहले की दुनिया को लेकर स्‍टीफन हॉकिंग ने एक काफी नया विचार इस रखा है जो चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि बिगबैंग के पहले टाइम यानि समय का भी कोई अस्तित्‍व नहीं था। वो कहते हैं कि Einstein के सिद्धांत के मुताबिक ब्रह्मांड की उत्‍पत्ति के समय संसार में मौजूद सभी भौतिक पदार्थ और ऊॅर्जा बहुत ही छोटी जगहों पर केंद्रित थी, लेकिन उनकी यह थ्‍योरी बिगबैंग के पहले और बाद की कंडीशन के बीच कोई गणितीय लिंक नहीं बताती।

स्‍टीफन हॉकिंग की थ्‍योरीज दुनिया के लिए अचंभा

वैसे तो स्‍टीफन हॉकिंग हमारी दुनिया और हमारे भविष्‍य के बारे में इससे पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं। जैसे कि उनका मानना है कि कोई भी एलियन प्रजाति हम इसांनो को खत्‍म नहीं करेंगे, बल्कि विज्ञान द्वारा बनाया गया आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ही धरती पर हम इसांनों को रिप्‍लेस कर देगा। उनका तो यह भी कहना है कि इंसानों जल्‍दी से जल्‍दी इस धरती को छोड़ देना चाहिए। स्‍टीफन हॉकिंग के लॉजिक्‍स भले ही कई बार आम लोगों को समझ नहीं आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक उनके दिमाग का लोहा मानते हैं।