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SC/ST Act: सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च के फैसले पर नहीं लगाई रोक, 10 दिन बाद होगी सुनवाई

SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच अनिवार्य करने के मामले में केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. सुनवाई के दौरान एजी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बेगुनाह को सजा न मिले, यह देखा जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

  • हम फिलहाल तुरंत गिरफ्तारी पर रोक के निर्देश पर रोक नहीं लगाएंगे.
  • SC/ST एक्ट में केस दर्ज दर्ज करने के लिए प्रारंभिक जांच जरूरी
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीडित को मुआवजे का भुगतान तुरंत किया जा सकता है चाहे शिकायत आने के बाद FIR दर्ज ना हुई हो
  • कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि FIR IPC के अन्य प्रावधानों पर दर्ज हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी –

  • कोर्ट ने जो सुरक्षा उपाय किये है ताकि किसी निर्दोष को सजा न मिले.
  • ये अकेला ऐसा कानून है कि जिसमें किसी व्यक्ति को कोई कानूनी उपचार नहीं मिलता.
  • अगर एक बार मामला दर्ज हुआ तो व्यक्ति गिरफ़्तार हो जाता है.
  • इस मामले में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है.
  • जबकि दूसरे मामलों में संरक्षण के लिए फ़ोरम है, कोर्ट हैं जो झूठे मामलों में सरंक्षण दे सकता है.
  • कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन बेगुनाह को सजा न मिले.
  • कोर्ट ने कहा कि प्रेरित, दुर्भावना और झूठे आरोप लगाकर उनकी स्वतंत्रता का हनन नहीं कर सकते.

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने ये भी कहा

  • इस कानून में आरोपों को वैरीफाई करना मुश्किल है इसलिए इस तरह की गाइडलाइन जारी की गई.
  • जबकि अन्य अपराध में आरोपों को वैरीफाई किया जा सकता है.

जस्टिस गोयल ने कहा
हम एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, हमारा मकसद सिर्फ निर्दोष को बचाना है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

  • जो लोग सडकों पर प्रदर्शन कर रहे हैं शायद उन्होंने हमारे फैसले को नहीं पढ़ा
  • सरकार क्यों ये चाहती है कि जांच के बिना हीलोग गिरफ्तार हो
  • अगर सरकारी कर्मी पर कोई आरोप लगाए तो वो कैसे काम करेगा
  • हमने एक्ट को नहीं बल्कि सीआरपीसी की व्याख्या की है

जस्टिस यू यू ललित ने कहा

  • हमने जो गाइडलाइन जारी की हैं वो कानून में सेफगार्ड हैं
  • ये जरूरी नहीं कि समुदाय के लोग ही इसका मिसयूज करें, पुलिस भी कर सकती है

केंद्र की दलील –

  • केंद्र सरकार ने कहा कि इस कानून के प्रावधान में किसी गाइडलाइन की जरूरत नहीं है.
  • AG ने जस्टिस करनन के मामले का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने चीफ जस्टिस व सुप्रीम कोर्ट के जजों पर दलित होने की वजह से प्रताडित करने का आरोप लगाया था.
  • AG ने कहा कि वो आरोप सही नहीं थे तो कोई कार्रवाई नहीं की गई

AG ने कहा
इस आदेश के बाद समाज में जबरदस्त रोष है और प्रदर्शन हो रहे हें

जस्टिस गोयल ने कहा
  • हम सिर्फ कानूनी बात करेंगे, बाहर क्या हो रहा है हमें नहीं पता
  • हमने शिकायत की वैरिफिकेशन के लिए सात दिनों का वक्त रखा है

अमिक्स क्यूरी अमरेंद्र शरण ने कहा कि

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखे को सीआरपीसी भी यही कहता है कि गिरफ्तारी से पहले जांच हो.
  • भले ही प्रावधान एक्ट के हों लेकिन प्रक्रिया सीआरपीसी की होती है
  • ये गाइडलाइन जारी होने से केस की जांच, ट्रायल आदि प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

इससे पहले सुनवाई में एजी की ओर से खुली अदालत में इस संबंध में सुनवाई की अपील पर कोर्ट ने हामी भर दी थी. कोर्ट में एजी केके वेणुगोपाल ने कहा कि आज ही सुनवाई हो. इस पर जस्टिस आदर्श गोयल ने कहा कि वो खुली अदालत में सुनवाई को तैयार हैं, कोई परेशानी नहीं है लेकिन वही बेंच होनी चाहिए जिसका फैसला था. जस्टिस गोयल ने कहा कि बेंच के गठन के लिए चीफ जस्टिस के सामने मेंशन करें. केंद्र की ओर से AG ने आज ही दो बजे सुनवाई की मांग की. AG केके वेणुगोपाल ने सीजेआई कोर्ट में कहा, देश में कानून व्यवस्था खराब हो रही है. ऐसे में मामले की आज ही सुनवाई की जानी चाहिए. कोर्ट ने मांग मान ली. अमिक्स क्यूरी अमरेंद्र शरण ने इसका विरोध किया.

सुनवाई के बाद CJI ने कहा – वही बेंच आज दो बजे सुनवाई करेगी जिसने फैसला दिया. फैसले पर रोक लगे या नहीं वहीं बेंच तय करेगी.

शरण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि कानून व्यवस्था खराब हो रही है. बता दें कि 20 मार्च के फैसले के खिलाफ केंद्र ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. मामले पर जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यू यू ललित की बेंच ने आदेश दिया था.

SC/ ST एक्ट मामले में केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का 20 मार्च का फैसला SC/ ST समुदाय के संविधान के तहत दिए गए अनुच्छेद 21 के तहत जीने के मौलिक अधिकार से वंचित करेगा. SC/ ST के खिलाफ अपराध लगातार जारी है तथ्य बताते हैं कि कानून के लागू करने में कमजोरी है ना कि इसका दुरुपयोग हो रहा है.
अगर आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई तो वो पीडित को आतंकित करेगा और जांच को रोकेगा.

अग्रिम जमानत का प्रावधान 1973 में अधिकार के तहत जोड़ा गया. कोर्ट ने गलत कहा है कि जमानत देने से इंकार करना जीने के अधिकार का उल्लंघन है.

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भारत बंद की सफलता का श्रेय लेने उतरी कांग्रेस, बोले “सबसे पहले उठाई आवाज”

दलित उत्पीड़न कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई का श्रेय कांग्रेस खुद लेने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस ने भारत बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए दावा किया कि सबसे पहले उसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राजनीतिक मोर्चाबंदी करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर बंद के दौरान हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के पास अधिकार है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद कर दे। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर जो फैसला दिया था उसे संसद में रद किया जा सकता था। सरकार कदम बढ़ाती को सभी दल साथ होते, लेकिन चुप्पी छाई रही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देती तो सोमवार को बंद के दौरान हिंसा नहीं होती।

अब तक कांग्रेस पुनर्विचार याचिका की बात कहती रही थी। अब सरकार ने पुनर्विचार याचिका पेश कर दी है तो कांग्रेस ने संसद के जरिये इसे रद करने का दबाव बढ़ाया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, सिर्फ पुनर्विचार याचिका से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसकी सुनवाई समान बेंच में होती है। इसके लिए सरकार को क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी चाहिए या फिर संसद बजट सत्र के बचे हुए चार दिनों में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करना चाहिए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने देश में दलित उत्पीड़न कानून लागू करने और उसे और मजबूत करने का श्रेय भी लेने की कोशिश की। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलित उत्पीड़न कानून राजीव गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और 2014 में संप्रग सरकार ने संशोधन का अध्यादेश लाकर इसे और कड़ा कर दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून के दुरुपयोग के सवाल को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग तो किसी भी कानून हो सकता है, लेकिन इसका उपाय उस कानून को खत्म करना नहीं होता। उनके अनुसार दलित उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के मामले 2-3 फीसद से अधिक नहीं हैं।

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SC/ST एक्ट में बदलाव को लेकर विरोध में हिंसक प्रदर्शन, 8 की मौत; कई शहरों में कर्फ्यू

अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एसएसी/एसटी एक्ट) को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने देशभर में विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुअा। कई जगह तोड़फोड़ व अगजनी की घटनाएं सामने अाई है। वहीं मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान 5 लोगों की मौत हो गई है।

कई जगह ट्रेनें रोकी गई हैं। इसके अलावा कुछ शहरों में झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एससी/एसटी एक्ट में कई बदलाव हुए थे। हालांकि, सरकार ने अब इस मामले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

पुनर्विचार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
केन्द्र सरकार ने एससी एसटी एक्ट में तत्काल एफआइआर और तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। सरकार ने कोर्ट से याचिका पर खुली अदालत में बहस और सुनवाई की मांग की है। याचिका में सरकार ने तर्क दिया कि फ़ैसले से कानून का उद्देश्य कमज़ोर होगा। पुनर्विचार याचिका मे सरकार ने अभियुक्त के लिए अग्रिम जमानत के रास्ते खोलने का विरोध किया और कहा कि इसका अभियुक्त दुरुपयोग करेगा और पीड़ित को धमका सकता है, साथ ही जांच भी प्रभावित कर सकता है। सरकार ने कहा कि इस कानून मे अभियुक्त को अग्रिम जमानत का हक न देने से अनुच्छेद 21 में उसे मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन नही होता। एससीएसटी कानून में ये 1973 मे नये अधिकार के तौर पर जोड़ा गया था।उधर एससी एसटी पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आल इंडिया फ़ेडरेशन आफ एससी एसटी आर्गनाइजेशन की ओर से आज सुप्रीम कोर्ट मे अलग से नई याचिका दाखिल की गई, जिसमें कोर्ट से फ़ैसले पर रोक लगाने और मामले पर विचार कर फ़ैसले मे बदलाव की मांग की गई है। याचिका पर वकील मनोज गोरकेला ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ से जल्द सुनवाई की मांग की। लेकिन कोर्ट ने जल्द सुनवाई की मांग ठुकराते हुए कहा कि मामले पर नियमित क्रम मे ही सुनवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक की मौत, लगाया गया कर्फ्यू

मुरैना में विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। हिंसा के उग्र होने के बाद यहां कर्फ्यू लगा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश के मुरैना शहर में जमकर हिंसा हुई। यहां विरोध प्रदर्शन के दौरान हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने की वजह से हालात बेकाबू हो गए। मुरैना में बंद समर्थकों ने बस स्टैंड, बैरियर चौराहे पर पथराव किया। इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा तो मुरैना रेलवे स्टेशन पर उपद्रव शुरू हो गया। बंद समर्थकों ने यहां पटरियों पर डेरा जमा लिया, जिसके बाद ट्रेनों की आवाजाही थम गई है। मीडिया खबरों के मुताबिक, ग्‍वालियर में भारत बंद के दौरान हुई हिंसक झड़पों में 19 लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से 2 की मौत हो गई है। आईजी कानून एवं व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने बताया कि मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अभी तक 5 लोगों की मौत हो गई है।

दिल्ली में पुलिस बल पर पथराव, ठप हुए राजमार्ग

एसटी-एसी एक्ट 1989 में संशोधन के खिलाफ दिल्‍ली एनसीआर में भारत बंद ने हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुई। इससे निपटने के लिए पुलिस ने हल्‍के बल का प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने एनएच 24 और दिल्ली-देहरादून हाइवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर जाम लगा दिया। इससे कई राजमार्ग पर यातायात व्‍यवस्‍था पूरी तरह से ठप हो गई। गाजियाबाद में रेलवे फटकी पर जाम के कारण ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है।

बिहार में दिन चढ़ने के साथ बढ़ता जा रहा भारत बंद का असर
बिहार में यह बंद असरदार दिख रहा है। बिहार में पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है। बंद के कारण जगह-जगह रेल व सड़क यातायात प्रभावित हैं। बंद समर्थकों ने पटना व हाजीपुर के बीच उत्तर व दक्षिण बिहार की लाइफलाइन ‘महात्मा गांधी सेतु’ को जाम कर दिया है। इस बंद को राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। बंद के दौरान वैशाली में एक कोचिंग संस्‍थान को बंद कराने के दौरान छात्रों से बंद समर्थकों की भिड़त हो गई। इसमें दर्जनों छात्र घायल बताए जा रहे हैं। बंद समर्थक पटना सहित राज्‍य के विभिन्‍न जगहों पर एंबुलेंस सहित आवश्‍यक सेवाओं की गाडि़यों को भी रोक रहे हैं।

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

राजस्थान में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। राजस्‍थान के डीजीपी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अलवर में फायरिंग हुई, जिसमें एक शख्‍स की मौत हो गई है। कुछ क्षेत्रों में पत्‍थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। हिंसक प्रदर्शन कर रहे काफी लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई और धारा 144 लगा दी गई है, ताकि हालात ज्‍यादा न बिगड़ें। बाड़मेर में दलित और पुलिस में झड़प हो गई है। इस झड़प में 25 लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू के गोले दागे। दूसरी तरफ करणी सेना भी दलितों के प्रदर्शन के विरोध में सड़कों पर उतर आई है। जिसकी वजह से दोनों गुटों के बीच भिड़ंत हो गई। सड़क पर दोनों गुट भिड़ गए। बाड़मेर में वाहनों को आग लगा दी गई।

उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में हालात बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं। मुजफ्फरनगर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के मरने की सूचना है। मृतक का नाम अमरीश निवासी गादला, थाना भोपा है। इसकी बॉडी जिला अस्पताल लाई गई है। रेलवे के कर्मचारी प्रताप की कमर में भी गोली लगी है, उसकी हालत भी गंभीर बनी हुई है। उत्‍तर प्रदेश के डीआइजी ने बताया कि प्रदेश के सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्‍से में ही हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें 2 शख्‍स की मौत हो गई है और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश के 90 प्रतिशत हिस्‍से में शांति का माहौल है। प्रदर्शनकारियों से सख्‍ती से निपटा जा रहा है। पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया। हम विश्‍वास दिलाते हैं कि किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। आजमगढ़ में एक बस पर हमला कर दिया और उसमें आग लगा दी गई। मेरठ तथा आगरा व मैनपुरी में दलित संगठन से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए हैं। कई जगह पर प्रदर्शनकारी ट्रेन के सामने खड़े हो गए हैं। एससी-एसटी एक्ट पर फैसले का आगरा में भी कई संगठनों ने काफी विरोध किया है। बसपा के कार्यकर्ता यहां शहर के सभी बाजारों में भीड़ जबरन बाजार बंद करा रही है। यह लोग विरोध में लाठी-डंडे के साथ सड़क पर उतरे और दुकानों में काफी लूटपाट करने के साथ ही महिलाओं से भी छेड़छाड़ की। एंबुलेंस में फंसे मरीजों के साथ अभद्रता की गई। शाहगंज क्षेत्र के बारह खंभा के पास लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इसके साथ ही यहां एत्माद्दौला के टेढ़ी बगिया में चक्का जाम किया गया है। करीब एक घण्टे से जाम के चलते रामबाग तक बड़ी संख्या में वाहनों की कतार लग गई है। जगह-जगह पर इसको लेकर प्रदर्शन हो रहा है। इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है।

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद दलित संगठनों के दो अप्रैल को भारत बंद के मद्देनजर पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों की सरकारों ने चौकसी कड़ी कर दी है। पंजाब मे सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय व बैंक सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद करने के आदेश हैं।

पंजाब में दलितों के बंद का मिलाजुला असर
एससी-एसटी एक्‍ट संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनों द्वारा किए गए बंद के आह्वान का पंजाब के अधिकांश इलाकों में मिलाजुला असर दिख रहा है। जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, पटियाला सहित अन्य जिलों में दलित संगठनों के लोग सक्रिय हैं। संगठनों के कार्यकर्ता तड़के से ही सड़कों पर उतर आए। अमृतसर में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने सचखंड एक्सप्रेस रोक दी, जिससे यात्री परेशान रहे। किसी भी आशंका से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के क़ड़े इंतजाम किए हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने कल ही प्रदेश में सभी स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालयों को सोमवार को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। सरकारी व प्राइवेट बस सेवा के साथ ही कल रात 11 बजे तक मोबाइल व डोंगल इंटरनेट सेवाएं तथा एसएमएस सेवाएं भी बंद कर दी गई थी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के 12 हजार अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया है।

झारखंड में पुलिस ने किया लाठी चार्ज
रांची में बंद समर्थक सड़क पर उतर चुके हैं। दुकानों को बंद करवाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, रांची के आदिवासी हॉस्टल के बंद समर्थकों ने जमकर उपद्रव किया। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और उन पर लाठी चार्ज किया।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया था। कोर्ट ने कहा था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच हो। कोर्ट ने कहा था कि केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है।

राजद, सपा, कांग्रेस और शरद का समर्थन

सोमवार को बुलाए गए भारत बंद को बिहार में राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है। दलित संगठनों ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में सोमवार को आहूत भारत बंद का समर्थन किया है।