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बालों की सेहत के लिए हर किसी को खानी चाहिए ये विशेष चीजें

आइए जानते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें खाने से आपके बाल ना केवल स्वस्थ रहेंगे बल्कि खूबसूरत और चमकीले भी नजर आएंगे.

पालक-
अगर आप शाकाहारी हैं तो पालक से बेहतर बालों के लिए कोई चीज हो ही नहीं सकती है. पालक आयरन, विटामिन ए, सी औऱ प्रोटीन का बढ़िया स्रोत होता है. आय़रन की कमी से ही सबसे ज्यादा बाल झड़ते हैं. पालक केवल आयरन से ही भरपूर नहीं होता है बल्कि इसमें सेबम भी होता है जो बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर माना जाता है. इसमें ओमेगा-3 एसिड, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होता है. इससे स्कैल्प हेल्दी और बाल स्वस्थ रहते हैं.

अंडा और दुग्ध उत्पाद-
बालों की ग्रोथ के लिए और मोटे-घने बालों के लिए अंडा व दुग्ध उत्पाद बहुत जरूरी हैं. दूध, योगर्ट और अंडे में कई सारे जरूरी पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन बी12, आयरन, जिंक और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं. दुग्ध उत्पाद बियोटीन (विटामिन बी7) का भी अच्छा स्रोत है जो बालों को झड़ने से रोकता है.

नट्स-
बालों को झड़ने से रोकने के लिए अपनी डाइट में नट्स को शामिल कीजिए.  खासकर अखरोट इकलौता ऐसा नट है जिसमें बियोटीन, बी विटामिन्स, विटामिन ई और प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और मैग्नीशियम होता है. ये सभी बालों को मजबूत बनाते हैं.

अमरूद-
ये तो आप जानते ही होंगे कि बालों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी कितना जरूरी होता है. विटामिन सी बालों को पतला होने से रोकता है. अमरूद में संतरे से भी ज्यादा विटामिन सी होता है. इसकी पत्तियों में भी विटामिन बी और सी होता है जो बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी कोलाजेन ऐक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करता है.

दालें-
दालें प्रोटीन, आय़रन, जिंक, बायोटिन का भंडार होती हैं जोकि बालों के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इसके अलावा दालें फोलिक एसिड का भी खजाना हैं. फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं को दुरुस्त करती है जिससे स्किन और स्कैल्प को जरूरी ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाती है और बाल टूटना रुक जाता है.

जौ- जौ में खूब विटामिन ई होता है जो पतले बालों को ठीक करने में मदद करता है. जौ में आयरन और कॉपर भी होता है जो रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.

चिकन-
चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तो आप टोफू और पीनट्स से इसकी भरपाई कर सकते हैं.

अलसी का बीज-
अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है. आपका शरीर जरूरी फैटी एसिड का उत्पादन नहीं कर पाता है इसलिए आपको अपने आहार से इसकी आपूर्ति करनी चाहिए. अलसी का बीज सबसे बढ़िया विकल्प है.

गाजर-
गाजर केवल आंखों की रोशनी के लिए ही नहीं बल्कि आपके बालों के लिए भी बहुत जरूरी है. इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है जो नैचुरल कंडीशनर का काम करता है और आपके बालों को झड़ने से रोकता है.

विटामिन सी की खुराक के लिए खट्टे फल-
आपके शरीर को आयरन के अवशोषण के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है इसलिए आपको अपनी डाइट में साइट्रस फ्रूट्स को जरूर शामिल करना चाहिए. न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि एक गिलास नींबू पानी भी पर्याप्त साबित होगा.

इसके अतिरिक्त स्वीट पोटैटो भी विटामिन ए का अच्छा स्रोत है. बालों को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

 

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टेरर से जंग किसी धर्म के खिलाफ नहीं: मोदी

कट्टरपंथ और आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई किसी पंथ के खिलाफ नहीं बल्कि युवाओं को गुमराह करने वाली मानसिकता के खिलाफ है।

पूरी खुशहाली, समग्र विकास तभी संभव है, जब मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में कुरान शरीफ हो और दूसरे हाथ में कंप्यूटर। मोदी ने यह बात एक सम्मेलन में कही, जिसमें जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय भी मौजूद थे।

शाह ने कहा कि कट्टरपंथ चिंता का विषय है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है।

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विश्व बैंक ने कहा- 2018 में चीन को पछाड़ आगे निकल जाएगी भारतीय इकोनॉमी

आम बजट से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि 2018 में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहेगी, जबकि इसके बाद के दो साल तक यह 7.5 फीसदी के स्तर पर रहेगी और चीन को इस मामले में काफी पीछे छोड़ देगी। बैंक के अनुसार चीन की विकास दर 2017 में 6.8 फीसदी रहेगी जो इस दौरान भारत की 6.7 फीसदी से 0.1 फीसदी ज्यादा है, लेकिन इसके बाद 2018 में यह 6.4 फीसदी और 2019 व 2020 में क्रमश: 6.3 और 6.2 फीसदी पर सिमट जाएगी।

बैंक ने बुधवार को जारी ग्लोबल इकोनामिक्स प्रॉस्पेक्ट में कहा है कि व्यापक सुधार की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए महत्वाकांक्षी कदमों के साथ भारत के अंदर अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले विकास की अपार संभावनाएं हैं। नोटबंदी और जीएसटी के कारण प्रारंभिक झटकों से उबरते हुए यह 2017 में 6.7 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है।

विश्व बैंक के निदेशक ऐहान कोसे ने कहा, ‘इस बात की भरपूर संभावना है कि अगले दशक में भारत अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले तेज गति से विकास करेगा। इसलिए मैं निकट भविष्य में आर्थिक विकास के अनुमानों को लेकर चिंतित नहीं हूं। अगले दस साल की बात की जाए तो भारत के अंदर जबर्दस्त संभावनाएं हैं।’

कोसे के अनुसार संभावनाओं को हकीकत में तब्दील करने के लिए भारत को निवेश बढ़ाने के उपाय करने होंगे। श्रम बाजार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े सुधारों को लागू करने और निवेश के रास्ते की बाधाओं को दूर करने से भारत को काफी लाभ होगा। भारत युवाओं का देश है और इस मामले में कोई भी देश उसके आसपास भी नहीं ठहरता है। इन खूबियों के दम पर भारत अगले दस साल तक औसतन सात फीसदी की विकास दर हासिल करने की क्षमता रखता है।

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अयोध्या में बने राम मंदिर, हम जमीनी हक छोड़ देंगे: शिया वक्फ बोर्ड का नया फॉर्मूला

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या विवाद पर नया प्रपोजल दिया है। अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले वक्फ बोर्ड की तरफ से ये प्रस्ताव आया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि हमने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया है। ड्राफ्ट में अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनाने की बात कही है। इस प्रपोजल पर कई महंतों ने सहमति जताई है। 5 दिसंबर को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

शिया वक्फ बोर्ड का फॉर्मूला, 5 प्वाइंट

1) विवादित जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक नहीं
– शिया वक्फ बोर्ड का दावा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का पूरा केस 26 फरवरी 1944 को जारी एक नोटिफिकेशन पर बेस्ड है। इसमें उसने बाबरी मस्जिद पर हक जताया था। लेकिन कोर्ट ने इस नोटिफिकेशन की वैलिडिटी पर शक जताया था। बाबरी मस्जिद पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन भी फैजाबाद कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर अवैध घोषित हो चुका था। लिहाजा, सुन्नी वक्फ बोर्ड को इस मामले में फैसला लेने का हक नहीं है।

2) हम अयोध्या में जमीन का पूरा हक छोड़ने को तैयार
– शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हिंदुओं की आस्था का सम्मान करते हुए और राष्ट्र हित में विवाद खत्म करने के मकसद से हम राम मंदिर बनाने के लिए पूरी जमीन पर अपना हक छोड़ते हैं।

3) लखनऊ में मस्जिद के लिए मिले जगह
लखनऊ के मोहल्ला हुसैनाबाद में नजूल की खाली पड़ी एक एकड़ जमीन शिया समुदाय को मस्जिद बनाने के लिए मिले। यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार दे।

4) लखनऊ में मस्जिद किसी मुगल बादशाह के नाम पर नहीं होगी
– मीर बाकी या किसी मुगल बादशाह के नाम पर मस्जिद नहीं होगी। इसे अमन की मस्जिद नाम दिया जाएगा।

– इस प्रपोजल पर यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी, हनुमान गढ़ी निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास, नृत्य गोपालदास, रामविलास वेदान्ती, श्रीपंच निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास जैसे नेताओं के दस्तखत हैं।

5) बाबर का सेनापति शिया मुसलमान था

– ड्राफ्ट में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद को 1528 से 1529 के बीच मीर बाकी ने अयोध्या में बनवाया था। मीर बाकी बाबर के सेनापति थे और वो शिया मुसलमान थे।
– बाबरी मस्जिद बनने के बाद उसके मुतल्लवी (केयरटेकर) मीर बाकी ही रहे। मीर बाकी के बाद 1945 तक उनके परिवार के लोगों ने इस मस्जिद के मुतल्लवी का जिम्मा संभाला। ये सभी लोग शिया मुसलमान थे।

शिया कमेटी ही वसीम रिजवी को नहीं मानती: इकबाल अंसारी

– हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा कि वसीम रिजवी को तो शिया कमेटी भी नहीं मानती है। घोटालों से बचने के लिए यह राम मंदिर बनाना चाहते हैं। हमारे यहां सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड जो करेगा वही माना जाएगा। ड्राफ्ट भले ही दे दिया गया हो लेकिन कोर्ट का फैसला ही माना जाएगा।

– हाशिम, बाबरी विवाद में ही पक्षकार थे। उनकी मौत हो चुकी है।

अयोध्या विवाद में कौन-कौन से पक्ष हैं ?

– निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड।

तीनों पक्षों का दावा क्या है ?

– निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा शुरू से करता रहा है। लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए।
– रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वह रामलला के करीबी मित्र हैं। चूंकि भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं।
– सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी। मुस्लिम वहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

– 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।