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रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक, होम पेज पर दिखाई दे रहा चीनी अक्षर

शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट को किसी ने हैक कर लिया है। वेबसाइट के होम पेज पर चीनी अक्षर दिखाई दे रहा है। वेबसाइट को खोलने करने पर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (अंग्रेजी में) और हिंदी में रक्षा मंत्रालय लिखा दिख रहा है। इस घटना के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, उचित कदम उठाए जा रहे हैं। वेबसाइट को जल्द ही चालू किया जाएगा। आने वाले समय में हर संभावित कदम उठाए जाएंगे ताकि इस तरह की चीजों को होने से रोका जाए।

अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट पर चीनी अक्षर नजर आये जो इस बात का संकेत है कि चीनी हैकर उसमें शामिल हो सकते हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ” मामले पर हमारी पैनी नजर है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र उसे बहाल करने का प्रयास कर रहा है।यह  केंद्र वेबसाइट का रखरखाव करता है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चीनी हैकर इस वेबसाइट को बिगाड़ने में शामिल हो सकते हैं।
 

Nirmala Sitharaman(Twitter)

@nsitharaman

 Action is initiated after the hacking of MoD website ( http://mod.nic.in  ). The website shall be restored shortly. Needless to say, every possible step required to prevent any such eventuality in the future will be taken. @DefenceMinIndia @PIB_India @PIBHindi

बता दें कि खबर लिखे जाने तक साइट नहीं खुल रही है। भारतीय रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट https://mod.gov.in है। शुक्रवार शाम करीब 4.30 बजे रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक होने की खबर सामने आई। चीनी कैरक्टर दिखने से तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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छलावा न हों कोरिया से आ रहे सकारत्मक बयान: ट्रंप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर बातचीत की इच्छा जाहिर करने पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है.

ट्रंप ने कहा कि ‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान काफ़ी सकारात्मक हैं’ लेकिन साथ ही कहा कि ये ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

दक्षिण कोरिया ने जानकारी दी थी कि सोमवार को जब उसके अधिकारी उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मिले थे तो ये मुद्दा उठाया गया था.

दक्षिण कोरिया के मुताबिक किम जोंग उन अमरीका से बातचीत के लिए तैयार हैं और हथियारों के परीक्षण पर भी रोक लगा सकते हैं.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

हालांकि, पूर्व में उत्तर कोरिया से हुई बातचीत में कुछ हासिल नहीं हुआ है. अमरीका और उत्तर कोरिया के कुछ अधिकारियों की राय है कि उत्तर कोरिया इसके जरिए हथियार विकसित करने के कार्यक्रम के लिए वक्त हासिल करने की कोशिश में हो सकता है. ये कड़े प्रतिबंधों से राहत पाने की कोशिश भी हो सकती है.

उत्तर कोरिया की ओर से हाल फिलहाल इस बारे में कोई टिप्पणी समाने नहीं आई है.

दक्षिण कोरिया की ओर से उत्तर कोरिया गए प्रतिनिधिमंडल के नेता चुंग इयू योंग ने ही जानकारी दी थी कि दोनों देशों के नेता अगले महीने एक शिखर सम्मेलन में मिलने के लिए सहमत हुए हैं

एक दशक से ज्यादा वक्त के दौरान ये ऐसी पहली मीटिंग होगी. किम जोंग उन साल 2011 से सत्ता में हैं. उनके उत्तर कोरिया का नेता बनने के बाद से ऐसी कोई मीटिंग नहीं हुई है.

फरवरी में दक्षिण कोरिया में हुए विंटर ओलिंपिक के दौरान दोनों देशों के बीच गर्माहट दिखी. यहां तक कि उत्तर कोरिया के खिलाड़ी ने दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों के साथ एक टीम में खेले.

उत्तर कोरिया, अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है: दक्षिण कोरिया

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ट्रंप ने क्या कहा

वाशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा ‘उत्तर कोरिया के मामले में यकीनन हमने एक लंबा रास्ता तय किया है.’

‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान सकारात्मक हैं. पूरी दुनिया के लिए ये बड़ी बात होगी.’

ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में हुए ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए उत्तर कोरिया की तारीफ़ भी की.

लेकिन इससे पहले उन्होंने एक चेताने वाला ट्वीट भी किया था जिसमें कहा गया था कि ये एक ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

इस बीच अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ बातचीत चाहे जिस दिशा में जाए, हमारा निश्चय दृढ़ है.

उन्होंने कहा, “सभी विकल्प मौजूद हैं और हमारा रूख उत्तर कोरिया के लिए तब तक नहीं बदलेगा जब तक हम उनका परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने की तरफ़ कोई ठोस कदम न देख लें.”

ऐसी उम्मीद है कि उत्तर कोरिया से हुई बातचीत की जानकारी देने के लिए दक्षिण कोरिया की टीम हफ्ते के आखिर में अमरीका जा सकती है.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटREUTERS

उत्तर कोरिया ने क्या कहा?

मंगलवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति दफ्तर से एक बयान जारी किया गया जिसमें बताया गया, “उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियार हटाने की इच्छा जताई है. अगर उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्रवाई का खतरा कम हुआ और सरकार बने रहने की गांरटी दी गई तो उत्तर कोरिया का कहना है कि परमाणु हथियारों को बनाए रखने की उसे कोई वजह नज़र नहीं आती.”

हालांकि आलोचक उत्तर कोरिया की मंशा पर शक जताते हैं. अतीत में भी उत्तर कोरिया अपनी कही बातों से मुकरा है. 2005 में हथियार घटाने का समझौता उनमें से एक है.