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श्रीकृष्ण से लेकर इंद्र तक से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी, जानें क्यों मनाते हैं राखी

मुख्य रूप से रक्षाबन्धन को हिन्दू आैर जैन त्योहार के तौर पर मान्यता प्राप्त है। ये प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। सावन में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी अर्थात रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व होता है। ये सूत्र कच्चे सूत से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, सोने आैर चाँदी जैसी मंहगी धातु तक से र्निमित हो सकते हैं। हांलाकि राखी सामान्यतः बहनें ही भाई को बांधती हैं परन्तु कर्इ स्थानों पर बेटियों द्वारा पिता या परिवार के बड़े लोगों को, ब्राह्मणों, आैर गुरुओं को भी बांधने की परंपरा है। राखी बांधने के पीछे मूल भावना प्रेम आैर रक्षा का आश्वासन ही होता है। कन्याएं अपने भार्इ आैर पिता को राखी इसी भावना के तहत बांधती हैं। राखी से जुड़ी कथायें भी इसी का संदेश देती हैं। राखी कैसे शुरू हुर्इ इससे जुड़ी इसी तरह की कर्इ कथायें बतार्इ जाती हैं।

भगवान विष्णु आैर बलि की कथा

कहते हैं कि भगवान विष्णु के प्रभाव से जब राजा बलि को पताल लोक में जाना पड़ा इससे देवताओं की रक्षा हुई तभी से हिंदू धर्मावलंबी रक्षाबंधन मनाते हैं। दूसरी आेर उसी समय बलि ने विष्णु जी से अपने साथ रहने का आर्शिवाद प्राप्त कर लिया आैर उससे अपने पति को वापस लाने आैर अपने साथ रखने के लिए माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधीं आैर बदले में अपने पति को वापस प्राप्त किया। तबसे राखी की परंपरा की शुरूआत मानी जाती है, क्योंकि इस तरह लक्ष्मी जी के सौभाग्य की रक्षा हुर्इ। बलि से जुड़ा ये श्लोक भी इसी की पुष्टि करता है। येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं। हे रक्षे मतलब राखी! तुम अडिग रहना यानि तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।

इंद्र से जुड़ी कथा

भविष्यपुराण के अनुसार देवराज इंद्र जब देव दानव युद्घ में दानवों से पराजित हो रहे थे तो उनकी पत्नी इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए उपरोक्त श्लोक पढ़ा था जिसके चलते ना सिर्फ इंद्र की रक्षा हुर्इ थी बल्कि उनकी जीत भी हुर्इ थी। इसे भी रक्षाबंधन की शुरूआत कहा जाता है।

कृष्ण आैर युधिष्ठिर की कथा

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में भी रक्षाबन्धन का प्रसंग है ये कहा जाता है। इसी प्रकार मान्यता है कि द्वापर युग में ही युधिष्ठिर ने वासुदेव नंदन श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा चली आ रही है। अपनी इन्हीं विशेषताआें के चलते धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने वाला माना जाता है।

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सलमान को मिली जमानत, घर ले जाने बॉडीगार्ड के साथ पहुंची बहन

काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान की जमानत की अर्जी कोर्ट ने स्वीकार कर ली। शनिवार को जोधपुर सेशन कोर्ट में वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं, जिसके बाद 3 बजे कोर्ट ने 50 हजार के मुचलके पर सलमान को जमानत दे दी। उनके परिजनों को पूरी उम्मीद थी कि सलमान आज जेल से बाहर आ जाएंगे। इसी वजह से उनकी बहन अलवीरा सेशन्स कोर्ट पहुंची थीं

 

शेरा ने किया गार्ड

– जोधपुर सेशन्स कोर्ट के बाहर सलमान खान के समर्थकों की भारी भीड़ जमा थी। भीड़ से बचाने के लिए सलमान की बहन अलवीरा के साथ उनके बॉडीगार्ड शेरा भी मौजूद थे।

– शेरा लगातार अलवीरा को भीड़ से प्रॉटेक्ट करते रहे। उन्होंने मीडिया को भी उसके पास फटकने नहीं दिया।

आगे क्या होगा?

– विश्नोई समाज के वकील महीपाल विश्नोई ने बताया, “सलमान खान को 25-25 हजार के दो मुचलके भरने के ऑर्डर कोर्ट ने दिए हैं। वे अदालत की इजाजत के बिना देश नहीं छोड़ सकते हैं। उन्हें 7 मई को खुद अदालत के सामने पेश होना होगा।”

कोर्ट रूम में क्या हुआ?

– सलमान के वकील महेश बोड़ा ने कहा कि 20 साल से जारी इस केस में सलमान हमेशा जमानत पर रहे। उन्होंने हमेशा कोर्ट के आदेश का पालन किया और जब भी बुलाया गया वे हाजिर हुए। ऐसे में उन्हें जमानत दी जाए।

– इस पर सरकारी वकील पोकरराम ने कहा कि गवाहों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ है कि सलमान ने गोली मारकर हिरण का शिकार किया। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
– वहीं, विश्नोई समाज के वकील महिपाल विश्नोई ने कहा कि सलमान के खिलाफ आरोप साबित हो चुका है। ऐसे में उन्हें जमानत देने के बजाय जेल में रखने के मामले की सुनवाई जल्द करनी चाहिए। सबूतों के आधार पर उन्हें आगे भी दोषी ही माना जाएगा।