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एबी डिविलियर्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, इनके नाम दर्ज़ है ये विश्व रिकॉर्ड

डिविलियर्स ने द. अफ्रीका के लिए 114 टेस्ट 228 वनडे और 78 टी 20 मैच खेले हैं। 114 टेस्ट मैचों में 8765 रन बनाए हैं जिसमें 22 शतक और 46 अर्धशतक बनाए हैं। वे एक बेहतरीन बल्लेबाज के साथ ही एक शानदार विकेट कीपर भी रह चुके हैं।

एक वीडियो संदेश में कहा कि वे दक्षिण अफ्रीका और दुनियाभर में अपने फैंस के शुक्रगुजार हैं। एबी ने कहा अब समय आ गया है जब दूसरे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाए। ईमानदारी से कहूं तो मैं अब थक गया हूं। ये एक मुश्किल निर्णय है और मैने ये फैसला काफी सोच समझकर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि  मैं अपने संन्यास का एलान बेहतरीन क्रिकेट खेलते हुए करना चाहता था। हालांकि वे घरेलू क्रिकेट के लिए उपलब्ध रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक लगाने का रिकॉर्ड भी ए बी डिविलियर्स के नाम ही है। ये कमाल उन्होंने 18 जनवरी 2015 को वेस्टइंडीज के खिलाफ महज 31 गेंदों में शतक लगाकर किया था। डीविलियर्स ने कोरी एंडरसन के 36 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर ये रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 16 छक्कों और 9 चौके की मदद से वनडे का यह कीर्तिमान बनाया। उन्होंने इस मैच में कुल 149 रन बनाए थे।

एबी डीविलियर्स के नाम 31 गेंदों में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड तो है ही इसके अलावा सबसे तेज 150 रनों का रिकॉर्ड भी डीविलियर्स के ही नाम पर है। साल 2015 विश्व कप में डीविलियर्स ने सिडनी के मैदान पर 64 गेंदों में 150 रन ठोककर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था। उन्होंने इस दौरान नाबाद 66 गेंदों में 162 रन बनाए थे जिसमें 17 चौके और 8 छक्के शामिल थे।

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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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आज सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे येदियुरप्पा, BJP सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत से 8 सीट दूर

चुनाव के नतीजे आ गए हैं. लेकिन किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदुरप्पा ने आज सुबह साढे दस बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है. बैठक के बाद, येदुरप्पा विधायक दल के नेता चुने जाने की जानकारी राज्यपाल को देंगे और सरकार बनाने का आधिकारिक दावा पेश करेंगे.

राज्यपाल के पाले में है गेंद

वहीं, एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस की बैठक भी आज है. जेडीएस कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर रही है. बता दें कि कांग्रेस को 78 सीटें मिली है वो दूसरे नंबर की पार्टी बनी है. जबकि जेडीएस को सिर्फ 38 सीटें मिली हैं. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है और देखना होगा कि वह सरकार बनाने का न्योता किसे देते हैं.

हम सबसे बड़ी पार्टी, मौका मिले- येदियुरप्पा

बीएस येदियुरप्पा ने कहा है, ‘’हम सबसे बड़ी पार्टी हैं और ऐसे में सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. बीजेपी 100 प्रतिशत सरकार बनाएगी और विधानसभा में बहमत भी साबित करेगी.’’

पहली प्राथमिकता सरकार का गठन, शर्तों पर फैसला बाद में- सिद्धारमैया

उधर, राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मीडिया से मुखातिब सिद्धारमैया ने कहा, कांग्रेस ने बिना शर्त जेडीएस को समर्थन दिया है. सिद्धारमैया ने कहा कि गठबंधन की शर्तों पर बाद में फैसला होगा. पहली प्राथमिकता सरकार का गठन है. सिद्धारमैया ने दावा किया कि उनके पास मैजिक नंबर है.  उन्होंने कहा कि दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के साथ है

बता दें कि अगर कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन का दावा चल गया तो जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम भी बन सकते हैं.

कौन हैं कुमारस्वामी?

कुमारस्वामी साल 2006 से 2007 तक कर्नाटक के सीएम रह चुके हैं. कुमारस्वामी रामानगरम से तीन बार विधायक रह चुके हैं. रामानगरम सीट कुमारस्वामी का गढ़ मानी जाती है. साल 2013 में कुमारस्वामी रामानगरम से 40 हजार वोटों से जीते थे. कुमारस्वामी दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं.

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Hyundai अगले साल भारत में लांच करेगी पहली इलेक्ट्रिक कार Kona! फुल चार्ज में चलेगी 300km

ह्युंडई की पहली इलेक्ट्रिक कार जल्द ही भारत आनेवाली है. ह्युंडई ने हाल ही में जिनेवा मोटर शो 2018 में नयी इलेक्ट्रिक एसयूवी कोना से पर्दा हटाया है.

बताते चलें कि दिल्ली ऑटो एक्सपो 2018 में कोना का कॉन्सेप्ट मॉडल पेश किया था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो नयी ह्युंडई कोना अगले साल तक भारत में लांच कर दी जायेगी.

कंपनी ने इस कार का प्रॉडक्शन मॉडल पेश करते हुए कंपनी ने 2018 जिनीवा मोटर शो में बताया कि फुल चार्ज पर इस कार की रेंज 300 किलोमीटर की होगी.

बात करें पावर की, तो यह गाड़ी 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड 9.2 सेकंड्स में पकड़ सकती है. इसकी टॉप स्पीड 167 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. इसका मोटर कार को 134 bhp की पावर और 395 Nm का टॉर्क देगा.

ह्युंडई कोना को पावर देगी 39.5 किलोवाट लिथियम आयन बैटरी. इस बैटरी को फुल चार्ज होने में 6 घंटे लगेंगे. 80 पर्सेंट चार्जिंग फास्ट चार्जर के जरिये महज एक घंटे में ही हो जायेगी.

इंटरनेशनल मार्केट में कोना इलेक्ट्रिक एसयूवी 64 किलोवाट की बड़ी बैटरी के साथ आती है. यह बैटरी 211 पीएस का पावर और 470 किलोमीटर रेंज देती है.

यह कार सीकेडी रूट यानी कंप्लीटली बिल्ट यूनिट के तौर पर भारत आ सकती है. भारत में इसकी अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये है.

इस क्रॉसओवर कार में 17 इंच के अलॉय व्हील्स दिये गये हैं. इसके साथ ही एयरोडायनैमिकली डिजाइन्ड बम्पर्स और स्पॉइलर भी इसमें दिये गये हैं.

इसमें आॅल डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, हेड अप डिस्प्ले और 7 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है.

इसके अलावा इसमें कम्पोजिट लाइट, टॉप पर LED DRLs और टू-टोन रूफ के साथ सात रंग के एक्सटीरियर दिये गये हैं. इसके साथ ही, इस कार में विशेष लैंप बेजल और फ्रंट बंपर दिया गया है.

सुरक्षा के लिए इस कार में अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट, रियर क्रॉस ट्रैफिक अलर्ट और आॅटोमैटिक इमर्जेंसी ब्रेकिंग आदि फीचर्स दिये गये हैं.

यहां यह जानना गौरतलब है कि अगर ह्युंडई कोना इलेक्ट्रिक कार अगले साल भारत में लांच हो जाती है तो इसके मुकाबले में कोई नहीं होगा. हालांकि, कीमत के लिहाज से इसका मुकाबला जीप कंपास, नयी होंडा सीआर-वी, फोक्सवैगन टिगुआन सरीखी कारों से होगा.

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Resume of Elon Musk: ऐसा है एलन मस्क का एक पेज का रिज्यूमे, 13 हजार करोड़ के हैं मालिक

कहा जाता है कि रेज्यूमे हमेशा साधारण और सरल भाषा में होना चाहिए. जी हां दुनिया के 54वें अमीर आदमी ने भी कुछ ऐसा ही रेज्यूमे बनाया है. आइए देखते हैं कैसा है इस शख्स का रेज्यूमे

हम बात कर रहे हैं दुनिया के 54वें अमीर आदमी एलन मस्क की, जो अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स और टेस्ला के संस्थापक हैं. उन्होंने अपना रेज्यूमे एक पेज का बना रखा है, जो आपको प्रभावित कर सकता है.

एलन मस्क ने अपने रेज्यूमे में एजुकेशन क्वालीफिकेशन, स्किल्स, प्रोफेशनल एचीवमेंट्स और इंट्रेस्ट के बारे में भी लिखा है. उन्होंने अपने रेज्यूमे को इस तरह से डिजाइन किया है कि एक पेज में उन्होंने अपनी सारी जानकारी डाल दी.

इस बात पर भले ही लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर उन्हें रेज्यूमे की क्या आवश्यकता है, लेकिन नोवोरेज्यूमे की ओर से पोस्ट किया गया ये रेज्यूमे आपको भी प्रेरित कर सकता है. साथ ही इस रेज्यूमे की डिजाइन से आप भी अपना रेज्यूमे बना सकते हैं.

मस्क की कुल संपति 20.3 बिलियन डॉलर यानि करीब 13 हजार करोड़ रुपये है.

वे साउथ अफ्रीका में बड़े हुए और 17 साल की उम्र में कनाडा आ गए. उसके बाद अमेरिका में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्नसेलवेनिआ में पढ़ाई की है.

मस्क पहले पे-पाल के को-फाउंडर थे.

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दिल्ली में बुधवार से चलेगी पिंक मेट्रो, जानिए ख़ास बातें

नॉर्थ दिल्ली को सीधे साउथ दिल्ली से जोड़ने वाली दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन बुधवार से शुरू हो जाएगी। इससे नॉर्थ दिल्ली से साउथ दिल्ली महज 35 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। मेट्रो फेज-3 में मजलिस पार्क से शिव विहार के बीच 59 किमी लंबी पिंक लाइन बन रही है। इसका एक हिस्सा बुधवार से पब्लिक के लिए खुलने जा रहा है। अभी साउथ कैंपस से मजलिस पार्क के बीच मेट्रो चलेगी। बुधवार शाम 6 बजे से आम लोग इस रूट पर सफर कर सकेंगे। इस लाइन पर मेट्रो ने कई अनूठे कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। यहां कारीगरी के इतने सारे नमूने एक साथ देखने को मिलेंगे कि आप देखते रह जाएंगे। पिंक लाइन पर कुल 19 ट्रेनें दौड़ेंगी जिनकी फ्रिक्वेंसी 2 मिनट 28 सेकंड से लेकर 5 मिनट 12 सेकंड होगी। आइए नजर डालते हैं दिल्ली मेट्रो की इस नई लाइन की खासियतों पर;

12 स्टेशनों पर चलेगी मेट्रो
एलिवेटेड स्टेशन: 8 (साउथ कैंपस, दिल्ली कैंट, मायापुरी, राजौरी गार्डन, ईएसआई हॉस्पिटल, पंजाबी बाग वेस्ट, शकूरपुर, मजलिस पार्क)
अंडरग्राउंड स्टेशन : 4 (नारायणा विहार, नेताजी सुभाष प्लेस, शालीमार बाग, आजादपुर)
इंटरचेंज स्टेशन: 4 आजादपुर (यलो लाइन), नेताजी सुभाष प्लेस (रेड लाइन), राजौरी गार्डन (ब्लू लाइन), धौला कुआं (एयरपोर्ट लाइन)

सचमुच का ‘जबरा फैन’
आजादपुर स्टेशन के कोनकोर्स लेवल पर मेट्रो ने खास तरह के 5 पंखे लगाए हैं। ये पंखे साइज में इतने बड़े हैं कि आपने शायद ही पहले कभी इतने बड़े पंखे नहीं देखे होंगे। इनका आकार 5 डायमीटर जितना बड़ा है। ये एचवीएलएस (हाई वॉल्यूम लो स्पीड) फैन चलेंगे स्लो स्पीड में, लेकिन इनसे हवा खूब आएगी। स्टेशन के अनपेड एरिया में एयर कंडिशनिंग सिस्टम के बजाय डीएमआरसी ने पहली बार इस तरह के विशालकाय पंखे लगाए हैं। सामान सिंगापुर से मंगाकर उन्हें यहीं असेंबल किया गया है।

(पिंक लाइन के सबसे ऊंचे पॉइंट से ऐसी दिखती है दिल्ली)

7 मंजिला ऊंचाई पर मेट्रो
धौला कुआं पर मेट्रो 23.6 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगी, जो किसी 7 मंजिला इमारत के बराबर है। नीचे से एयरपोर्ट मेट्रो और उसके नीचे एनएच-8 से गुजरती गाड़ियां दिखेंगी। दूसरी तरफ हरा-भरा रिज एरिया सरदार पटेल मार्ग नजर आएंगे। डीएमआरसी ने ट्रैफिक या एयरपोर्ट मेट्रो को डिस्टर्ब किए बिना पिंक लाइन का रास्ता निकाला है। कुछ ही दूर नारायणा के पास मेट्रो का सबसे गहरा पॉइंट भी है। यहां बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के ऑफिस के नीचे मेट्रो 26 मीटर की गहराई पर गुजरेगी।

कॉरिडोर में आर्ट गैलरी
नेताजी सुभाष प्लेस स्टेशन के कोनकोर्स एरिया में इतनी खूबसूरत पेंटिंग लगाई गई हैं कि देखकर आपको ऐसा लगेगा कि आप किसी मेट्रो स्टेशन में नहीं, बल्कि किसी आर्ट गैलरी में खड़े हैं। यहां दर्जन भर से ज्यादा आर्ट वर्क इंस्टॉल किए गए हैं। कई नामचीन आर्टिस्टों की पेंटिंग्स को ग्लास पर उकेरने के बाद उन्हें यहां लगाया गया है। यह एक सेमी अंडरग्राउंड स्टेशन है, जिसके कोनकोर्स और ग्राउंड लेवल के बीच सिर्फ ढाई मीटर का गैप है।

पिंक लाइन मेट्रो से जुड़े अहम फैक्ट्स

मजलिस पार्क से साउथ कैंपस के बीच शुरू होगी लाइन

19 मेट्रो ट्रेनें चलेंगी इस पूरे सेक्शन पर, हर मेट्रो में होंगे 6 कोच

2.4 मीटर है घरों से मेट्रो लाइन की सबसे कम दूरी राजौरी गार्डन में

23.6 मीटर का बना है सबसे ऊंचा पॉइंट धौला कुआं के पास

26 मीटर है सबसे गहरा पॉइंट पूरे सेक्शन पर नारायणा के पास

एक ही स्टेशन पर 4 प्लैटफॉर्म
इंटरचेंज स्टेशनों पर ही दो से ज्यादा प्लेटफॉर्म देखने को मिलते हैं, लेकिन इस लाइन के 2 स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा न होने के बावजूद 4-4 प्लैटफार्म बनाए गए हैं। शकूरपुर और मजलिस पार्क पर इस तरह का स्ट्रक्चर है। भविष्य में जब यह 59 किमी लंबी लाइन पूरी खुल जाएगी, तो कभी किसी ट्रेन को बीच में रोकने या टर्मिनेट करने की जरूरत भी पड़ सकती है। इसे देखते हुए इन दोनों स्टेशनों पर 4-4 प्लैटफार्म बनाए गए हैं। आमतौर पर इंटरचेंज स्टेशनों पर लाइन चेंज करने के लिए कोनकोर्स लेवल या ग्राउंड पर जाना पड़ता है, मगर राजौरी गार्डन स्टेशन पर आपको प्लैटफॉर्म से एक लेवल और ऊपर जाना पड़ेगा और उसके बाद आप ब्लूलाइन पर पहुंचेंगे। ट्रैक के ऊपर 16.5 मीटर लंबा एक रैंप बनाया है। यहां से 134 मीटर लंबे ट्रैवलेटर से होते हुए ब्लूलाइन वाले राजौरी गार्डन स्टेशन में एंट्री करेंगे। स्टेशन के बगल में राजौरी गार्डन फ्लाइओवर है, ऐसे में मेट्रो ने पहली बार इस तरह का प्रयोग किया।

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छलावा न हों कोरिया से आ रहे सकारत्मक बयान: ट्रंप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर बातचीत की इच्छा जाहिर करने पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है.

ट्रंप ने कहा कि ‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान काफ़ी सकारात्मक हैं’ लेकिन साथ ही कहा कि ये ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

दक्षिण कोरिया ने जानकारी दी थी कि सोमवार को जब उसके अधिकारी उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मिले थे तो ये मुद्दा उठाया गया था.

दक्षिण कोरिया के मुताबिक किम जोंग उन अमरीका से बातचीत के लिए तैयार हैं और हथियारों के परीक्षण पर भी रोक लगा सकते हैं.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

हालांकि, पूर्व में उत्तर कोरिया से हुई बातचीत में कुछ हासिल नहीं हुआ है. अमरीका और उत्तर कोरिया के कुछ अधिकारियों की राय है कि उत्तर कोरिया इसके जरिए हथियार विकसित करने के कार्यक्रम के लिए वक्त हासिल करने की कोशिश में हो सकता है. ये कड़े प्रतिबंधों से राहत पाने की कोशिश भी हो सकती है.

उत्तर कोरिया की ओर से हाल फिलहाल इस बारे में कोई टिप्पणी समाने नहीं आई है.

दक्षिण कोरिया की ओर से उत्तर कोरिया गए प्रतिनिधिमंडल के नेता चुंग इयू योंग ने ही जानकारी दी थी कि दोनों देशों के नेता अगले महीने एक शिखर सम्मेलन में मिलने के लिए सहमत हुए हैं

एक दशक से ज्यादा वक्त के दौरान ये ऐसी पहली मीटिंग होगी. किम जोंग उन साल 2011 से सत्ता में हैं. उनके उत्तर कोरिया का नेता बनने के बाद से ऐसी कोई मीटिंग नहीं हुई है.

फरवरी में दक्षिण कोरिया में हुए विंटर ओलिंपिक के दौरान दोनों देशों के बीच गर्माहट दिखी. यहां तक कि उत्तर कोरिया के खिलाड़ी ने दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों के साथ एक टीम में खेले.

उत्तर कोरिया, अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है: दक्षिण कोरिया

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

ट्रंप ने क्या कहा

वाशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा ‘उत्तर कोरिया के मामले में यकीनन हमने एक लंबा रास्ता तय किया है.’

‘दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया से आ रहे बयान सकारात्मक हैं. पूरी दुनिया के लिए ये बड़ी बात होगी.’

ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में हुए ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए उत्तर कोरिया की तारीफ़ भी की.

लेकिन इससे पहले उन्होंने एक चेताने वाला ट्वीट भी किया था जिसमें कहा गया था कि ये एक ‘झूठी उम्मीद’ भी हो सकती है.

इस बीच अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ बातचीत चाहे जिस दिशा में जाए, हमारा निश्चय दृढ़ है.

उन्होंने कहा, “सभी विकल्प मौजूद हैं और हमारा रूख उत्तर कोरिया के लिए तब तक नहीं बदलेगा जब तक हम उनका परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने की तरफ़ कोई ठोस कदम न देख लें.”

ऐसी उम्मीद है कि उत्तर कोरिया से हुई बातचीत की जानकारी देने के लिए दक्षिण कोरिया की टीम हफ्ते के आखिर में अमरीका जा सकती है.

अमरीका-उत्तर कोरियाइमेज कॉपीरइटREUTERS

उत्तर कोरिया ने क्या कहा?

मंगलवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति दफ्तर से एक बयान जारी किया गया जिसमें बताया गया, “उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियार हटाने की इच्छा जताई है. अगर उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्रवाई का खतरा कम हुआ और सरकार बने रहने की गांरटी दी गई तो उत्तर कोरिया का कहना है कि परमाणु हथियारों को बनाए रखने की उसे कोई वजह नज़र नहीं आती.”

हालांकि आलोचक उत्तर कोरिया की मंशा पर शक जताते हैं. अतीत में भी उत्तर कोरिया अपनी कही बातों से मुकरा है. 2005 में हथियार घटाने का समझौता उनमें से एक है.

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India vs South Africa 3rd T20: निर्णायक मैच में भारत ने दर्ज की 7 रन से जीत, सीरीज पर किया 2-1 से कब्जा

गेंदबाजों के संघर्ष भरे प्रदर्शन के दम पर भारतीय क्रिकेट टीम ने शनिवार (24 फरवरी) को न्यूलैंड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए रोमांचक टी-20 मैच में दक्षिण अफ्रीका को सात रन से हरा दिया। इस जीत के साथ ही भारत ने तीन टी-20 मैचों की सीरीज पर 2-1 से अपने नाम कर ली। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में दक्षिण अफ्रीका को 173 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे हासिल करने में मेजबान टीम केवल सात रनों से चूक गई।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका ने अपना पहला विकेट जल्द ही गंवा दिया। रीजा हैंड्रिक्स (7) भुवनेश्वर कुमार की गेंद पर शिखर धवन के हाथों कैच आउट हुए। सलामी बल्लेबाज डेविड मिलर (24) ने इसके बाद कप्तान जीन पॉल ड्युम्नी (55) के साथ मिलकर 35 रनों की साझेदारी की, लेकिन यहां सुरेश रैना ने मिलर को 45 के कुल योग पर अक्षर पटेल के हाथों कैच आउट करवाकर मेजबान टीम का दूसरा विकेट गिराया। इस बीच, 12वें ओवर में गेंदबाजी करने आए अक्षर पटेल ने पहली ही गेंद पर हेनरिक क्लासेन (7) को लगभग पवेलियन भेज दिया था, लेकिन शार्दूल ठाकुर के हाथों से कैच छूटने के साथ ही अक्षर की सारी मेहनत पर पानी फिर गया।

पिछले मैच में दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले क्लासेन के भाग्य ने दूसरी बार उनका साथ नहीं दिया। 13वें ओवर में वह हार्दिक पांड्या की गेंद पर लंबा शॉट मारने के कराण बाउंड्री के पास खड़े भुवनेश्वर के हाथों में कैच थमा बैठे। कप्तान ड्युम्नी (55) ने इसके बाद इस मैच से टी-20 प्रारूप में पदार्पण करने वाले खिलाड़ी क्रिस्टियन जोंकर (49) के साथ मिलकर 30 रनों की साझेदारी की और टीम को 100 के आंकड़े के पार पहुंचाया।

इस बीच, ड्युम्नी ने अपना अर्धशतक भी पूरा किया। हालांकि, वह अर्धशतक के बाद ज्यादा देर तक मैदान पर टिक नहीं पाए। शार्दूल ने भारत की जीत में परेशानी बनकर खड़े ड्युम्नी को रोहित शर्मा के हाथों कैच आउट करा मेहमान टीम को बड़ी सफलता दिलाई। जसप्रीत बुमराह ने क्रिस मौरिस को 114 के स्कोर पर बोल्ड कर मेजबान टीम का पांचवां विकेट भी गिरा दिया। दक्षिण अफ्रीका अब अपने लक्ष्य से दूर होती जा रही थी। यहां अपना पहला टी-20 मैच खेल रहे जोंकर ने 18वें ओवर में 18 रन बनाने के साथ ही मेजबान टीम को एक आस दे दी।

दक्षिण अफ्रीका को अब 12 गेंदों में 35 रन बनाने थे। ऐसे में उसे हर गेंद में तीन रन बनाने थे। जोंकर ने फरहान बेहरदीन (नाबाद 15) के साथ 51 रनों की अर्धशतकीय साझेदारी की, लेकिन वह अपने लक्ष्य को हासिल करने से केवल सात रन दूर रह गए। अंतिम गेंद पर भुवनेश्वर ने जोंकर रोहित के हाथों कैच आउट करा दिया। उन्होंने 24 गेंदों पर पांच चौके और दो छक्के लगाए।

भारत के लिए भुवनेश्वर ने सबसे अधिक दो विकेट लिए, वहीं बुमराह, शार्दूल, पांड्या और रैना को एक-एक सफलता मिली। इससे पहले, बल्लेबाजी करने वाली भारतीय टीम के लिए पारी की शुरूआत डगमगाई हुई रही। विराट कोहली के स्थान पर टीम की कमान संभाल रहे रोहित (11) जल्दी ही पवेलियन लौट गए। उन्हें जूनियर डाला ने पगबाधा आउट कर मेहमान टीम की पहला विकेट गिराया।

इस बीच, क्रिस मौरिस ने छठे ओवर में शिखर धवन (47) को लगभग पवेलियन का रास्ता दिखा दिया था, लेकिन शम्सी ने कैच चूक कर धवन को जीवनदान दिया। इसके बाद, धवन ने रैना (43) के साथ 65 रनों की शानदार अर्धशतकीय साझेदारी कर टीम को 79 के स्कोर तक पहुंचाया। इसी स्कोर पर रैना को तबरेज शम्सी ने आउट किया। रैना लंबा शॉट मारने की कोशिश में बाउंड्री पर खड़े बेहरादीन के हाथों लपके गए। एक बार फिर धवन की किस्मत मे उनका साथ दिया। 13वें ओवर की तीसरी गेंद पर एक बार फिर शम्सी धवन को कैच करने का अवसर चूक गए। हालांकि, पिछले मैच में भारत के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले मनीष पांडे (13) को जीवनदान नहीं मिल पाया।

पिछले दो मैचों में भारतीय बल्लेबाजों के लिए परेशानी का सबब बने रहने वाले डाल की गेंद पर पांडे लंबा शॉट लगाकर चौका लगाने की आस में मिलर के हाथों लपके गए। दो बार अच्छी किस्मत से बचने वाले धवन भी इसके बाद ज्यादा देर तक मैदान पर नहीं टिक पाए। वह डाला की ही गेंद पर रन आउट हो गए। धवन के आउट होने के बाद पांड्या (21) और महेंद्र सिंह धौनी (12) ने टीम की पारी संभाली। दोनों ने 25 रन ही जोड़े थे कि एक बार फिर परेशानी बनकर खड़े हुए डाला ने इस बार धौनी को अपना शिकार बनाया। धौनी मिलर के हाथों कैच आउट हुए। धौनी जब आउट हुए, तब टीम का स्कोर 151 था।

धौनी के आउट होने के बाद मौरिस ने पांड्या को अधिक देर तक मैदान पर नहीं टिकने दिया। पांड्या विकेट के पीछे खड़े हेनरिक क्लासेन के हाथों लपके गए। मौरिस ने इसके बाद दिनेश कार्तिक (13) को भी पवेलियन का रास्ता दिखाया। इसके बाद अक्षर पटेल (नाबाद 1) और भुवनेश्वर (नाबाद 3) ने टीम को निर्धारित ओवर समाप्त होने तक 172 के स्कोर तक पहुंचाया। दक्षिण अफ्रीका के लिए इस पारी में डाला ने सबसे अधिक तीन विकेट लिए। इसके अलावा, मौरिस को दो और शम्सी को एक सफलता मिली।

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बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी का कार्डियक अरेस्‍ट से निधन, दुबई में शादी अटेंड करनी गई थीं

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी अब हमारे बीच नहीं रही। शनिवार (24 फरवरी) को हृदय-गति रुक जाने (कार्डियक अरेस्ट) की वजह से अचानक उनका निधन हो गया। अपने आखिरी पलों में 54 वर्षीय श्रीदेवी दुबई में थीं। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक श्रीदेवी दुबई में एक शादी अटेंड करने गई थीं। बॉनी कपूर के छोटे भाई और अभिनेता संजय कपूर ने श्रीदेवी के निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना रात 11 से 11.30 बजे के बीच की है।

संजय कपूर ने श्रीदेवी के निधन के बारे में इंडियनएक्सप्रेस ऑनलाइन को बताया कि वह खुद भी दुबई में ही थे और थोड़ी देर पहले भारत लौटे ही थे कि यह खबर आ गई। संजय दोबार दुबई जा रहे हैं। दरअसल, श्रीदेवी अपने पति बॉनी कपूर और छोटी बेटी खुशी के साथ मोहित मारवाह के शादी समारोह में शिरकत करने दुबई गई थीं। उनके निधन की खबर सुनकर लोग मुंबई में उनके घर के पास जमा हो रहे हैं। उनकी बड़ी बेटी जाह्नवी भारत में ही हैं। वह शूटिंग की वजह से परिवार के साथ दुबई नहीं गई थीं।

वहीं श्रीदेवी के निधन की खबर से बॉलीवुड में दुख का माहौल है। उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। बॉलीवुड के कई स्टार्स इस दुखद घटना पर ट्विट कर दुख जता रहे हैं। एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने ट्वीट कर लिखा है कि, ‘मेरे पास कोई शब्द नहीं है। श्रीदेवी को प्यार करनेवाले हर व्यक्ति के प्रति संवेदना। एक काला दिन। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।’ दूसरी ओर, प्रीति जिंटा ने लिखा, ‘यह सुनकर दुखी और स्तब्ध हूं कि मेरी ऑल टाइम फेवरिट श्रीदेवी नहीं रहीं। भगवान उनकी आत्मा को शांति और उनके परिवार को ताकत दें।’

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क्या उत्तर और दक्षिण कोरिया की दुश्मनी ख़त्म हो गई है?

साल 2017 के जाते-जाते कोरियाई प्रायद्वीप में एक बड़ा बदलाव हुआ. परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी जिद पर अड़े उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कुछ नरमी दिखाते हुए अपने पड़ोसी देश से संबंध सुधारने के संकेत दिए.

फिर उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की मेज़बानी में हो रहे शीतकालीन ओलंपिक में अपनी टीम भेजने के फ़ैसला किया और एक क़दम और आगे बढ़ते हुए एलान किया कि उद्घाटन समारोह के दौरान दोनों देशों की टीमें एक ही झंडे के तले मार्च करेंगी.

किम जोंग उन ने ओलंपिक उद्घाटन के लिए अपनी बहन को प्योंगचांग भेजा और लौटने के बाद उनकी बहन ने जो रिपोर्ट सौंपी वो किम जोंग उन को पसंद भी आई.

उद्घाटन समारोह में जब उत्तर और दक्षिण कोरिया की टीमें एक झंडे तले मार्च कर रही थीं तो दुनिया के लिए ये बड़ा संदेश था, इसलिए भी कि जिस झंडे के नीचे ये टीमें थी उसमें सफेद पृष्ठभूमि पर एकीकृत कोरिया को दिखाया गया था.

अपने बीते कल और साझा इतिहास को याद कर उत्तर कोरिया के शीर्ष अधिकारियों की आंखें भी भर आईं और जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन और किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग एक साथ बैठे तो दूरियां कम दिखीं.

कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बनाए रखने के इच्छुक हैं दोनों देश

किम जोंग की बहन किम यो जोंग वहां संयुक्त महिला आइस हॉकी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद थीं तो उत्तर कोरिया की चीयरलीडर्स दुनियाभर से वहाँ पहुँचे दर्शकों का उत्साहवर्धन कर रही थीं.

लेकिन शीतकालीन ओलंपिक से रिश्तों में आई ये गर्माहट लंबे समय तक कायम रहेगी?

नई दोस्ती नहीं आ रही रास

यही लाख टके का सवाल है जिसका जवाब शायद दुनिया का हर शख़्स पाना चाहेगा.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के खेल के बहाने ही सही एक-दूसरे के करीब आने की ख़बर दुनिया के हर कोने में चर्चा का विषय बनी.

लेकिन उत्तर और दक्षिण कोरिया की ये नई दोस्ती दक्षिण कोरिया में हर किसी को रास नहीं आ रही है.

किम यो जोंग
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ऐसे कई लोगों का मानना है कि मून सरकार ने अमरीका से अपना मुंह मोड़ लिया और उत्तर कोरिया की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है.

परंपरावादी इस कदर हतोत्साहित हैं कि उत्तर कोरिया का दक्षिणपंथी मीडिया अपने संपादकीयों में नियमित तौर पर हर चर्चा में उत्तर कोरिया के ज़िक्र पर आपत्ति जताता है.

एक चिंता ये भी है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने का वादा करने के बदले दक्षिण कोरिया और अमरीका के संयुक्त सैन्य अभ्यास को रोकने की मांग कर सकता है.

हक़ीक़त ये है कि उम्मीदें हर तरफ़ से हैं, साथ ही हर कोई ये भी चाहता है कि हालात और बुरे न हों. ये सही है कि एक खेल महोत्सव ने दोनों देशों को करीब लाने का मंच दिया, लेकिन इससे राजनीतिक गतिरोध एकदम दूर हो जाएगा, इसे लेकर संदेह है.

अविश्वास

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दशकों से चली आ रही बातचीत बेनतीजा रही है और बहुत अधिक उदासी या अविश्वास का मतलब प्रायद्वीप में तनाव, घबराहट और असहजता और वो भी स्थाई तौर पर.

65 साल पहले हुए कोरियाई युद्ध के बाद इन दोनों देशों के बीच रिश्ते अमूमन एक जैसे और स्थाई रहे हैं.

उत्तर कोरिया निश्चित तौर पर दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है और इसकी वजह है इसका परमाणु कार्यक्रम. किम जोंग उन के जखीरे में परमाणु हथियारों के होने से इसका ख़तरा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है.

तो क्या उत्तर कोरिया के व्यवहार या नीति में बदलाव रातों-रात आ गया और वो दक्षिण कोरिया के साथ दोस्ती करने के लिए बेताब है?

उत्तर कोरिया पहले भी बातचीत की मेज़ पर बैठ चुका है और कई दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका था. उत्तर कोरियाई बेहद चालाक होते हैं और मोलतोल में भी माहिर होते हैं.

वो हर इंच के लिए लड़ते हैं और हर बुरी बात का देर तक शोक मनाते हैं.

उत्तर कोरिया के साथ मोलभाव इतना आसान नहीं है, हां इतना तय है कि जो उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले बात तक करने को तैयार नहीं था, वो कुछ कदम तो बढ़ा ही है.

उत्तर कोरिया में वामपंथी विचारधारा के लोगों को उम्मीद है कि उनकी सरकार भी इस मौके को बेकार नहीं जाने देगी.

लेकिन राष्ट्रपति मून इस राह पर कितना बढ़ पाएंगे, ये कहना अभी जल्दबाज़ी होगी. राष्ट्रपति मून 41 फ़ीसदी वोटों के साथ सत्ता में आए हैं और शायद खुद के दम पर बहुत दूर न चल पाएं.

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अमरीका की भूमिका

दूसरी तरफ़, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच पनप रही ‘नई दोस्ती’ से ट्रंप प्रशासन असहज महसूस कर रहा है.

किम जोंग उन ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति को उत्तर कोरिया आने का निमंत्रण दिया है और हो सकता है कि आने वाले समय में राष्ट्रपति मून प्योंगयांग जाएं.

हालाँकि ये आमंत्रण औपचारिक तौर पर नहीं दिया गया है और मून ने कहा है कि वो चाहते हैं कि उत्तर कोरिया, अमरीका के साथ बातचीत के लिए तैयार हो.

अभी ये सिर्फ़ माहौल है और एक छोटी सी मुलाक़ात को रिश्तों में सुधार के रूप में पेश नहीं किया जा सकता, वो भी तब जब ये भी पता न हो कि उनके बीच किस मुद्दे पर चर्चा हुई.

दक्षिण कोरिया में चर्चा ये है कि राष्ट्रपति मून बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन परंपरावादियों को डर है इसे कहीं तुष्टीकरण के रूप में न देखा जाए.

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दक्षिण कोरिया के इतिहासकार जॉन डेल्यूरी कहते हैं, “लोगों को लग रहा है कि मून जे इन को ठीक से श्रेय नहीं मिल रहा है. लोगों को लग रहा है उत्तर कोरिया मन बदल रहा है. अमरीका को समझना होगा कि दक्षिण कोरिया के हाथ बंधे हैं. समझना ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया से डर नहीं लगता, बल्कि दक्षिण कोरिया को लगता है, क्योंकि परमाणु हथियार उसके पास नहीं हैं.”

उत्तर कोरिया के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के दौर पूर्व में कामयाब नहीं रहे, लेकिन इस बार शायद उत्तर कोरिया अपने रुख़ में कुछ नरमी बरते- बिल्कुल ओलंपिक की भावना की तरह- आगे आए, बातचीत शुरू करे और उसे लेकर दुनियाभर में जो अविश्वास का माहौल बना है, उसे दूर करे.

लेकिन, ये भी तय है कि किम जोंग उन दक्षिण कोरिया और अमरीका को दूर-दूर करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि उत्तर कोरिया को ये पता है कि राष्ट्रपति ट्रंप को दक्षिण कोरिया में नापसंद करने वालों की कमी नहीं है.

इसलिए, शीतकालीन ओलंपिक के बाद उम्मीद तो बंधी है, लेकिन सच ये है कि इस पहल से बहुत ज़्यादा उम्मीदें न रखी जाएं.