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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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48 घंटे में धरती पर बरसेगा सूरज का कहर बंद होगा टीवी, मोबाइल और जीपीएस

अगले 48 घंटे में धरतीवासियों को सूरज का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। सूरज के कोप से आपके मोबाइल का सिग्नल जाम हो सकता है, जीपीएस गड़बड़ा सकता है और तो और आपको एंटरटेन करने वाला टीवी भी बंद हो सकता है।

सूरज का यह गुस्सा दरअसल एक खगोलीय घटना है, जिसे सौर तूफान कहते हैं। खगोल वैज्ञानिकों ने सूरज पर चलने वाले तूफान के अगले 48 घंटे में धरती से टकराने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके प्रभाव से उपग्रह आधारित सेवाएं जैसे मोबाइल, केबल नेटवर्क, जीपीएस नैविगेशन प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा रेडिएशन के खतरे की भी आशंका है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से पहले इसका असर अमेरिका और यूके में दिख सकता है। सौर तूफान के धरती से टकराने पर कुछ समय के लिए टेक ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है। नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने कहा है कि जब यह तूफान आएगा तो उत्तर और दक्षिण में तेज रोशनी नजर आएगी। हालांकि संस्थान ने इसे जी-1 या हल्का सौर तूफान ही करार दिया है। असोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि यह तूफान रविवार या सोमवार को आ सकता है। इस दौरान काफी तजे सौर हवाएं चलेंगी।

नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर में गैस के इस तूफान को देखा जा सकता है। विदेशी मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक सूरज में एक कोरोनल होल खुलेगा, जिसके कारण उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। इसमें कॉस्मिक कण भी होंगे। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके जरिये सूरज से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा।

बता दें कि सौर तूफान सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। इनमें जी-5 श्रेणी का तूफान सबसे खतरनाक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि जी-1 श्रेणी के तुफान का सबसे ज्यादा असर पावर ग्रिड और माइग्रेटरी बर्ड्स पर पड़ता है।

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13 राज्‍यों में जारी किया आंधी-तूफान का अलर्ट, हरियाणा में आज और कल बंद रहेंगे स्‍कूल, बरतें ये सावधानियां

दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में शुक्रवार तक आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है. हाल ही में हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में ताजा बर्फबारी हुई. भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक और केरल आंधी-तूफान से प्रभावित हो सकते हैं.

9 मई तक ऐसे ही हालात

आंधी-तूफान की चपेट में इस बार राजधानी दिल्ली भी आ सकती है. दिल्ली में तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान जताया गया है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली में मंगलवार दोपहर 4 बजे बारिश हो सकती है. हालांकि सोमवार रात आंधी तूफान का असर कम दिखेगा, लेकिन मंगलवार को इसकी तीव्रता ज्यादा हो सकती है. ऐसे हालात 9 मई तक बने रह सकते हैं.

मौसम विभाग ने कहा कि हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर आंधी की संभावना है. राजस्थान में धूलभरी आंधी चलने की चेतावनी जारी की गई है, जबकि छह पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की उम्मीद है. महाराष्ट्र के विदर्भ में कुछ इलाकों में लू की भी चेतावनी दी गई है.

मौसम लेगा करवट

मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में आंधी के साथ गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी जारी की है. हरियाणा सरकार ने सोमवार को एहतियातन दो दिनों के लिए स्कूल बंद करने के निर्देश दिए. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में सोमवार को हल्की बर्फबारी हुई जबकि कुछ हिस्सों में बारिश हुई. स्थानीय मौसम विभाग ने बुधवार तक राज्य में धूलभरी आंधी, बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी है.

आंधी-तूफान के दौरान बरतें ये सावधानी

-अगर बाहर हों तो किसी पेड़ के नीचे न ठहरें और न ही अपनी गाड़ी पेड़ के नीचे पार्क करें.

-तेज आंधी तूफान आने पर घर में ही रहें, बाहर न निकले.

-अगर बाहर फंस भी जाएं तो पार्क जैसी किसी खुली जगह में लेट जाएं.

-घर के अंदर ऐसे जगह पर जमा हो जाएं जो सबसे मजबूत हो.

-घर में लाइट, गैस, पानी के नल पूरी तरह बंद कर दें.

-अगर एक तरफ से तेज हवा आ रही हो तो दूसरी तरफ की खिड़कियां खोल दें.

पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आंधी की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. 4 मई को आए भयंकर आंधी तूफान ने यूपी में करीब 70 और राजस्थान में करीब 40 लोगों की जान ले ली. आगरा में ही करीब 45 लोगों की मौत हुई. इस बार अलर्ट के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने 7 और 8 मई को स्कूल बंद रखने का ऐलान किया है. इसके अलावा दूसरी राज्य सरकारें भी पूरी तरह अलर्ट हैं.

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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सीरिया में रासायनिक हमला: रूस के ख़िलाफ़ अमरीका हुआ आक्रामक

अमरीका ने कहा है कि सीरिया के डूमा में हुए कथित रासायनिक हमले के कसूरवारों को कड़ा जवाब दिया जाएगा.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि इस घटना का कड़ा जवाब दिया जाएगा और अमरीका के पास कई सारे सैन्य विकल्प हैं. उन्होंने कहा कि इन पर ‘आज रात’ या ‘शीघ्र’ फ़ैसला लिया जा सकता है.

ट्रंप ने कहा कि शनिवार को डूमा में जो घटना हुई उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस पर अमरीका ‘स्पष्टता’ चाह रहा था.

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस घटना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां से सोमवार शाम बात की और दोनों ही नेताओं ने एक ‘मज़बूत प्रतिक्रिया’ को लेकर इच्छा व्यक्त की है.

निक्की हेली

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Image captionनिक्की हेली ने कहा है कि रूस के हाथ ‘सीरियाई बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का आक्रामक रुख़

वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका और रूस ने एक दूसरे पर जमकर हमले किए.

रूस के प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि सीरिया के डूमा में हुई घटना ‘गढ़ी गई है’ और इसके जवाब में अमरीकी सेना की कार्रवाई के ‘भयानक प्रभाव’ हो सकते हैं.

इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की दूत निक्की हेली ने कहा कि सीरिया को सैन्य मदद देने वाले रूस के हाथ ‘सीरिया के बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा था कि दुनिया की बड़ी शक्तियां रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की अनदेखी कर रही हैं.

वहीं, निक्की हेली ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को “शैतान” करार देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिषद कार्रवाई करे न करे, ‘अमरीका किसी न किसी तरह से प्रतिक्रिया देगा.’

उन्होंने कहा, “बैठकें चल रही हैं और जिस समय हम बात कर रहे हैं, महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जा रहे हैं.”

रूस का जवाब

संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि ने कहा कि डूमा में विद्रोहियों ने इस घटना को ख़ुद रचा. उन्होंने इसे अमरीका की शह पर उठाया गया क़दम बताया ताकि रूस को नुक़सान पहुंचाया जाए.

संयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधिइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionसंयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधि

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को जल्द से जल्द सीरिया जाकर जांच करने को कहा. उन्होंने कहा कि इस दौरान कथित हमले वाली जगह तक उन्हें रूस के सैनिक ले जाएंगे.

रूस ने कहा है कि उसे क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं.

अमरीका ने सैन्य हमला किए जाने की संभावनाओं को ख़ारिज नहीं किया है.

इससे पहले उसने पिछले साल अप्रैल में सीरिया के एयरबेस पर क्रूज़ मिसाइल से हमला किया था.

सीरिया में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शेखोन में सरीन गैस के इस्तेमाल से 80 लोगों की मौत के बाद यह क़दम उठाया गया था. जांचकर्ताओं ने इस हमले के लिए सीरिया को ज़िम्मेदार ठहराया था.

गूटा

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Image captionपूर्वी गूटा का डूमा विद्रोहियों के कब्ज़े वाला इकलौता शहर बचा है

क्या हुआ था डूमा में?

सीरिया में राहत बचावकर्मियों ने शनिवार को दावा किया था कि डूमा शहर में ज़हरीली गैस से हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हुई है.

हालांकि, अमरीकी विदेश विभाग का कहना था कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

सीरिया-अमरीकी मेडिकल सोसाइटी ने बताया था कि पूर्वी गूटा क्षेत्र के डूमा में 500 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों पर लाया गया था.

सोसाइटी का कहना था कि इन लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ त्वचा का रंग नीला पड़ने और मुंह से झाग निकलने जैसी दिक्कतें पेश आ रही थीं.

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अमेरिका के प्रतिबंध पर करारा जवाब देगा रूस, दूसरे शीत युद्ध का हो सकता है आगाज

रूस ने अमेरिका के लगाए नए प्रतिबंधों पर हाथ पर हाथ रख बैठने की जगह मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है। दरअसल, पूर्व जासूस सरगेई स्क्रीपाल को जहर देने के बाद से दोनों के बीच राजनयिक संकट पैदा हो गया। इसके बाद अमेरिका ने रूस के सात सबसे प्रभावशाली कुलीनों, 12 कंपनियों, 17 वरिष्ठ अधिकारियों और हथियार निर्यातक सरकारी कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है।

2016 में राष्ट्रपति चुनाव, साइबर युद्ध और यूक्रेन व सीरिया में दखल के लिए अमेरिका ने रूस को सजा देने के लिए कानून बनाया था। इसी आधार पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगाया गया।

इसपर सख्त रुख अपनाते हुए रूस ने कहा, हम रूस के खिलाफ लिए गए हर कदम का करारा जवाब देंगे। रूस के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘अमेरिका पहले भी 50 चरणों में प्रतिबंध लगाकर भी कुछ हासिल नहीं कर पाया। इसलिए वह वीजा जारी न करने और रूसी औद्योगिक कंपनियों की संपत्ति जब्त करने की धमकी दे रहा है। शायद वह भूल गया है कि निजी संपत्ति जब्त करना चोरी है। प्रतिबंध लगाने से अमेरिका खुद ही बाजार अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा का दुश्मन बन रहा है।’

दूसरे शीत युद्ध का हो सकता है आगाज
अमेरिका ने अल्यूमीनियम कारोबारी ओलेग डेरीपास्का और सरकारी उर्जा कंपनी गजप्रौम के निदेशक एलेक्सी मिलर पर प्रतिबंध लगाया है। ओलेग पर रूसी सरकार के लिए काम करने का आरोप है। ये दोनों राष्ट्रपति पुतिन के करीबी माने जाते हैं। अमेरिका के इस कदम से एक बार फिर शीत युद्ध हो सकता है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि किसी तरह का दबाव हमें अपने मकसद से नहीं भटका सकता है।
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ट्रंप के ट्वीट से अमेजॉन को 45 अरब डॉलर का नुक्सान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऑनलाइन रिटेल कंपनी अमेजॉन पर लगातार निशाना साधे जाने के बाद कंपनी के शेयरों में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेजॉन का शेयर वैल्यू 5.9 प्रतिशत गिर गया यानी 45 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। अमेजन की मार्केट वैल्यू $1,362.48 है। उन्होंने कंपनी पर सस्ते शिपिंग लागत को लेकर अमेरिकी डाक सेवा (यू.एस.पी.एस.) घोटाले को अंजाम देने का आरोप लगाया है।

पोस्ट ऑफिस घोटाला बंद हो
ट्रंप ने शनिवार को ट्वीट किया, ‘चूंकि हम इस विषय में बात कर रहे हैं, यह जानकारी मिली है कि अमेरिकी पोस्ट ऑफिस को अमेजन के लिए डिलीवर किए जाने वाले हर पैकेज पर औसतन 1.50 डॉलर की चपत लगेगी। यह रकम अरबों डॉलर में है।’ ट्वीट में उन्होंने कहा था कि अगर यूएस पोर्टल सर्विस अपने पार्सल रेट बढ़ाता है तो अमेजॉन का शिपिंग लागत बढ़कर 2.6 अरब हो जाएगा। ट्रंप ने लिखा कि यह पोस्ट ऑफिस घोटाला जरूर बंद होना चाहिए।

पिछले साल सिटीग्रुप द्वारा जारी एक विश्लेषण के मुताबिक, अगर लागत निष्पक्ष तरीके से निर्धारित किया जाता है तो अमेजॉन को यू.एस.पी.एस. के जरिए भेजने पर औसतन एक पैकेज पर 1.46 डॉलर से ज्यादा का शिपिंग लागत आएगा। अमेजॉन पर यह नया निशाना ट्रंप के उस दावे के दो दिन बाद साधा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेजॉन द्वारा शिपिंग लागत में धांधली करने से खुदरा व्यवसाय और स्थानीय सरकारों पर नकारात्मक असर पड़ा है।

अमेजॉन के साथ चिंता जाहिर की
ट्रंप अक्सर समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट की आलोचना करते रहते हैं। जिसका स्वामित्व अमेजॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेफ बेजोस के पास है। ट्रंप ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा था, ‘मैंने चुनाव के काफी पहले अमेजॉन के साथ अपनी चिंता जाहिर की थी। दूसरों के विपरीत, वे देश और स्थानीय सरकारों को कर का भुगतान बहुत कम करते हैं या नहीं करते हैं। हमारी डाक प्रणाली का इस्तेमाल वे डिलीवरी का काम करने वाले शख्स की तरह करते हैं (जिससे अमेरिका को काफी नुकसान हो रहा है) और हजारों खुदरा व्यापारियों के व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रहे हैं।’ ट्रंप के दौलतमंद मित्रों ने भी उनसे शिकायत की है कि अमेजॉन उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रहा है।

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हाफिज सईद का राजनीतिक दल आतंकी संगठन घोषित; यूएस की कार्रवाई का स्वागत- भारत

अमेरिका ने मंगलवार को मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। यह मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राजनीतिक संगठन है। ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पाकिस्तान में एमएमएल को एक राजनैतिक दल के रूप में मान्यता देने की कवायद चल रही थी। वहीं, भारत ने अमेरिका की कार्रवाई का स्वागत किया है।

एमएमएल के 7 मेंबर भी आतंकी घोषित
– द यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही एमएमएल और तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर (टीएजेके) को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया गया।
– इनके अलावा एमएमएल के 7 सदस्यों को लश्कर के लिए काम करने की वजह से आतंकी घोषित किया गया है।

पाकिस्तान ने नहीं की प्रभावी कार्रवाई

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत यूएस की कार्रवाई का स्वागत करता है। मिल्ली मुस्लिम लीग लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। यह लीग आतंकी संगठन के लिए काम कर रही थी। अमेरिका की कार्रवाई भारत के दावे को पुख्ता करती है कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।”

हाफिज जारी कर चुका अपना घोषणापत्र
– हाफिज ने 23 मार्च को एमएमएल का घोषणा पत्र जारी कर दिया था। मिल्ली मुस्लिम लीग को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया था।

17 साल पहले लश्कर घोषित किया गया था आतंकी संगठन
– लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 के दशक में हुआ था। वह 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
– अमेरिका ने लश्कर को 26 दिसंबर 2001 में विदेशी और वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके मुखिया हाफिज सईद को भी वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था।

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न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर पाकिस्तान के पीएम अब्बासी की तलाशी, जांच के बाद बेल्ट कसते दिखे

 

यहां जॉन एफ केनेडी एयरपोर्ट पर सिक्युरिटी जांच के नाम पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी की तलाशी ली गई। पाकिस्तान मीडिया ने यह दावा किया। इसे एक रुटीन प्रॉसेस बताया जा रहा है, लेकिन पाकिस्तान मीडिया में इसे लेकर नाराजगी जाहिर की जा रही है।

क्या निजी दौरे की वजह से हुई चेकिंग?

– बताया जा रहा है कि पिछले दिनों अब्बासी अपनी बीमार बहन को देखने अमेरिका गए थे। यह उनका निजी दौरा था। हालांकि, इस दौरान वह अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस से भी मिले।

– पाकिस्तान मीडिया का कहना है कि यह निजी दौरा था तब भी प्रधानमंत्री के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है। ऐसे में उनकी जांच करना गलत है। पाकिस्तान के टीवी चैनल्स पर इस जांच का एक वीडियो भी जारी किया गया।

कुछ ने अब्बासी की तारीफ की, कुछ ने आलोचना

– जियो न्यूज के मुताबिक, अब्बासी ने सभी यात्रियों के लिए लागू स्टैंडर्ड सिक्युरिटी प्रोटोकॉल का पालन किया। जैसा कि वे अपनी सादगी के लिए ही जाने जाते हैं।
– कुछ मीडिया रिपोर्टों में अब्बासी की आलोचना की गई है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रप्रमुख होने के लिहाज से एक शर्मिंदगी-भरी प्रक्रिया का पालन किया, जबकि उनके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था।

पाबंदियों को लेकर पाक-अमेरिका में चल रही तनातनी

– पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की चेकिंग से पहले अमेरिका ने 7 पाकिस्तानी कंपनियों को परमाणु व्यापार के शक में बैन कर दिया था।

– कहा जा रहा है कि अमेरिका पाकिस्तानी सरकार पर वीजा बैन समेत कई और प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है।

– बता दें कि आतंकवाद पर नरमी के चलते अमेरिका पाकिस्तान से खफा है। ट्रम्प प्रशासन ने उसे दी जाने वाली करीब 25.5 करोड़ डॉलर की सहायता राशि रोक दी है।

कलाम की तलाशी पर अमेरिका ने मांगी थी माफी

– 2011 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर तलाशी ली गई थी। हालांकि, भारत की आपत्ति के बाद अमेरिका ने माफी मांगी थी।

जॉर्ज फर्नांडीज की कपड़े उतारकर ली गई थी तलाशी

– पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का वाशिंगटन के डल्लास अतंर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सन् 2002 और 2003 में स्ट्रिप सर्च किया गया था। जिस पर उन्होंने वहां के डिप्टी सेक्रेटरी स्ट्रोब टैलबॉट से गुस्से में शिकायत की थी।

शाहरुख समेत कई भारतीय लिए जा चुके हिरासत में

– अगस्त 2016 में शाहरुख खान को अमेरिका के लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। इसकी जानकारी खुद शाहरुख ने ट्वीटर पर दी।

– एक्टर इरफान खान को 2008 में लॉस एंजिल्स और 2009 में न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।

– 2009 में ही नील नितिन मुकेश को न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया।

– 2010 में भारत के तत्कालीन एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल से शिकागो के एयरपोर्ट पर पूछताछ की गई।

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चीन का अमेरिका को जवाब, 100 से ज्यादा अमेरिकी उत्पादों पर बढ़ायेगा शुल्क

अमेरिका के इस्पात एवं एल्युमीनियम पर शुल्क का जवाब देने के लिए चीन ने शुक्रवार को सूअर के मांस (पोर्क) और पाइप सहित अन्य अमेरिकी उत्पादों पर उच्च शुल्क लागू करने की योजना जारी की. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस कदम के तहत सूअर के मांस, वाइन (शराब) और स्टील की पाइपों समेत 128 अमेरिकी उत्पादों से शुल्क रियायतें हटायी जायेंगी.

मंत्रालय के मुताबिक, इन उपायों में फल, अखरोट, वाइन (शराब) और इस्पात की पाइपों समेत अन्य उत्पादों पर 15 प्रतिशत शुल्क एवं सूअर के मांस तथा पुनरावर्तित एल्युमीनियम उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क शामिल होगा. ये उपाय दो चरणों में लागू किये जायेंगे.

सरकारी समचार एजेंसी शिन्हुआ ने मंत्रालय के हवाले से कहा कि यदि दोनों देश तय समय के भीतर व्यापार से जुड़े मामलों पर समझौता नहीं करते हैं तो पहले चरण में 15 प्रतिशत शुल्क लगाया जायेगा. वहीं, दूसरे चरण में, अमेरिकी नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जायेगा.

चीन का यह कदम अमेरिका के उस निर्णय का पलटवार माना जा रहा है, जिसमें उसने इस्पात आयात पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम आयात पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगाया है. इस फैसले से कनाडा और मेक्सिको को शुरुआती छूट मिली है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कल कहा था कि वह अपने हितों और अधिकारों के बचाव के लिए ‘सभी आवश्यक कदम’ उठायेगा.