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थानेदार के 14 साल के लड़के ने बनाए ये 3 एप, गूगल ने बताया शानदार, कमाई कर दी गरीबों को दान

14 वर्ष का आर्यन राज नौवीं कक्षा का छात्र है। आर्यन मार्च-अप्रैल में स्कूल की छुट्टी के समय तीन एप मोबाइल शॉर्ट कट, कम्प्यूटर शॉर्ट कट और वाट्सएप क्लीनर लाइट तैयार किया। तीनों एप को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करने के लिए भेज दिया। उसके बाद वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया। उधर, गूगल ने उसके तीनों एप की जांच की। रिसर्च किया। पाया गया कि अच्छे और कारगर एप हैं। गूगल ने तीनों एप को अप्रैल में अपने प्ले स्टोर में अपलोड कर दिया है। एक माह में प्ले स्टोर से आर्यन के एप को दस हजार लोगों ने डाउनलोड किया है।

क्या खासियत है एप की

– मोबाइल और कंप्यूटर शॉर्टकट एप : ये दोनों एप इंटरनेट के माध्यम से किसी तरह के मॉलवेयर और वायरस का प्रवेश रोकता है।

– वाट्सएप क्लीनर लाइट एप : यह वाट्सएप के बैकग्राउंड का रंग बदल देता है। साथ ही फोटो और वीडियो के माध्यम से किसी प्रकार के वायरस का प्रवेश रोकता है।

कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है पटना के थानेदार का बेटा

पत्रकार नगर थानाध्यक्ष संजीत सिन्हा का बेटा है आर्यन राज। कक्षा दो से ही वह कंप्यूटर फ्रेंडली हो गया। वह सेंट माइकल दीघा में नौंवी का छात्र है। संजीत सिन्हा कहते हैं कि बेटा इंजीनियर बनना चाहता है। पूर्व में आर्यन ने बिहार पुलिस को लेकर एक एक एप बनाया था, जो सफल नहीं हो सका।

एप बनाने से भी एक बड़ा काम आर्यन ने किया है। उसने पुरस्कार की राशि स्वीकार करने से मना कर दिया। गूगल को बैंक अकाउंट नंबर न देकर यह आग्रह किया है कि इस राशि को उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाए, जो अभाव की वजह से पढ़ाई नहीं पूरी कर पा रहे। पटना के एक थानेदार के बेटे की मेधा और बड़प्पन की खूब चर्चा हो रही।

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जब पस्‍त हुए चिकित्‍सक, तो काम आए योगगुरु

यह सच मध्‍यप्रदेश के एक छोटे जिले मंदसौर का है। योग ने मंदसौर के 50 से अधिक बुजुर्गों को 70 और 80 की उम्र में फिर से युवा बना दिया है। दशपुर कुंज, रामटेकरी और मेघदूत नगर में प्रतिदिन सुबह योग के लिए 200 से अधिक लोग जुटते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो कुछ समय पहले चलने में मोहताज थे। अब युवाओं की तरह दौड़ लगा रहे हैं। शाजापुर में तो योग से पेरालिसिस तक ठीक होने का उदाहरण सामने आया है।

1- 70 के पारिख कर रहे हैं कमाल

मध्‍यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले दिनेशचंद्र पारिख 70 वर्ष के हैं। पारिख का कहना है कि हम योग के लाभ को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकते । वो बताते हैं कि नौ साल पहले हम योग से जुड़े। इसके बाद योग साधना से कुछ लाभ दिखा और मेरी दिलचस्‍पी इसमें गहरी होती गई। धीरे-धीरे योग से शारीरिक और मानसिक लाभ मिला और आस्‍था पैदा होने लगी। उन्‍होंने कहा कि 2008 से मैं नियमित योग कर रहा हूं।

स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त पारिख बताते हैं कि घुटने में तकलीफ से सीढि़यां चढ़ना दूभर हो गया था। इस परेशानी से आजिज आकर मैंने एक साल पहले ही सेवानिवत्ति का मन बना लिया था। चिकित्सकों ने घुटने बदलने की सलाह दी। ऐसे में योग गुरु सुरेंद्र जैन के संपर्क में आकर योग शुरू किया। इससे चलना-फिरना आसान हो गया। छह माह में पैर ठीक हो गया।

2- अब सीढ़ियों पर दौड़ते हैं 70 वर्षीय पामेचा

इसी जिले के निवासी 70 वर्षीय पामेचा 10 वर्ष पूर्व योग से जुड़े। उनका योग में अपार विश्‍वास है। पमोचा कहते हैं कि वह दस वर्षों से निरंतर योगाभ्‍यास कर रहे हैं। उनका यह विश्‍वास अनायास नहीं है। योग से जुड़ने से पहले पोचा चलने-फ‍िरने में मोहताज थे। आज वह योगाभ्‍यास से दौड़ सकते हैं, सीढि़यों पर चढ़ सकते हैं। पामेचा कहते हैं कि 2008 में 70 वर्ष की उम्र में योग से जुड़ा, तब घर की सी़ढ़ियां एक पैर से ही चढ़ पाता था, दूसरा पैर काम नहीं करता था। योग शुरू करते ही पैर ठीक हो गया। मंदसौर के भंवरलाल पामेचा योग को जीवन के लिए हवा और भोजन की तरह ही जरूरी मानते हैं।

3- बीमा एजेंट यशपाल शर्मा पेरालिसिस ठीक हो गया

बीमा एजेंट यशपाल शर्मा को वर्ष 2001 में हार्ट अटैक हुआ। उनके दुखों का यहीं अंत नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद वह पेरालिसिस से भी ग्रसित हो गए। यशपाल का कहना है कि वह तीन वर्षों तक चिकित्‍सकों से इलाज कराते रहे। इलाज में करीब 10 लाख रुपये भी खर्च हो गए। लेकिन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा। हमें कोई आराम नहीं मिला। यशपाल ने कहा कि हारा मन योग की शरण जा पहुंचा। योगाभ्‍यास से धीरे-धीरे आराम मिला। और मैं सालभर में पूरी तरह स्वस्थ हो गया। यशपाल अब योग में डिप्लोमा करने के बाद लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं।

4- रीतेश के जीवन में योग से फैला उजियारा

शहडोल निवासी रीतेश मिश्रा के जीवन में योग ने उजियारा फैलाया। रीतेश का कहना है कि छह साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने बताया कि मैं लगातार 14 साल तक योग कर रोशनी वापस लाने में कामयाब हुआ हूं। मुझे 80 प्रतिशत चीजें नजर आ जाती हैं। मार्कर से लिखे बड़े अक्षर पढ़ लेता हूं। मोबाइल को भी नजदीक से देखकर चला लेते हैं। रीतेश की तारीफ योग गुर बाबा रामदेव भी करते हैं। रीतेश बताते हैं कि बाबा रामदेव से मेरी पहली मुलाकात रीवा में 2008 में हुई थी। इसके बाद योग के प्रति लगाव पैदा हुआ।

रीतेश ने कहा पहले माता-पिता (सीमा मिश्रा व देवानंद मिश्रा) टीवी पर आसन देखकर योग कराते थे। मेरे माता-पिता मुझे लेकर काफी चिंतित थे। खासकर मेरी शिक्षा को लेकर। लेकिन समस्‍याओं के बावजूद रीतेश ने उच्‍च शिक्षा पूरी की। अब वह लोगों को योग सिखा रहे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की योग कक्षा पुलिस लाइन में सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाती है। वेलफेयर फंड से इन्हें कुछ राशि बतौर मेहनताना मिलती है। इनकी योग कक्षा में शामिल रहने वालों में पुलिस अफसर, जज, डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स शामिल हैं।

बता दें कि 21 जून का पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसके अलावा 150 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए करीब 5000 आयोजन हो रहे हैं।

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दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले शख्स बने निकेश अरोड़ा, अब हैं पालो अल्टो नेटवर्क के नए CEO

50 साल के अरोड़ा ने मार्क मिकलॉकलीन जगह ली है. जो पिछले सात सालों से पालो अल्टो के सीईओ के पद पर बने हुए थे. निकेश अरोड़ा सीईओ के साथ ही इस ग्रुप के नए चेयरमैन भी बन गए हैं. निकेश का सालाना वेतन 1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6.7 करोड़ रुपये होगा और इतना ही उन्हें बोनस मिलेगा. इसके साथ ही उन्हें 40 मिलियन डॉलर यानी 268 करोड़ रुपए के रिस्ट्रीक्टेड शेयर मिलेंगे।

कौन हैं निकेश अरोड़ा?
निकेश अरोड़ा का जन्म 6 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के गाजि‍याबाद में हुआ. निकेश के पिता इंडियन एयरफ़ोर्स में अधिकारी थे. उन्होंने दिल्ली के एयरफ़ोर्स के स्कूल से पढ़ाई की. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग आआईटी वाराणसी (बीएचयू) से साल 1989 में किया. आईआईटी की डिग्री के बाद उन्हें विप्रो में नौकरी मिली लेकिन उन्होंने जल्द ही ये नौकरी छोड़ दी औऱ आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली.

निकेश अरोड़ा ने साल 2004 में गूगल कंपनी ज्वाइन की. गूगल में वे कई ऑपरेशन के लीडर के तौर पर काम करते रहे. साल 2004 से 2007 के बीच वे गूगल के यूरोप ऑपरेशन के वाइस प्रेसिडेंट रहे. इसके बाद अफ्रीका रिजन के लिए साल 2009 तक काम किया. साल 2009 से 2010 तक वे गूगल के ग्लोबल बिजनेस डेवपमेंट के प्रेसिडेंट रहे. 2011 में वो गूगल में चीफ़ बिज़नेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही वो उस लीग में आ गए जिन्हें गूगल सबसे ज्यादा सैलरी देता है. साल 2014 में अरोड़ा ने गूगल की नौकरी छोड़ दी.

इसके बाद निकेश ने बतौर सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) सॉफ़्ट बैंक ज्वाइन किया था और यहां उन्हें दो सालों में 200 मिलियन डॉलर का कंपेंसेशन पैकेज मिला. निकेश यहां जून 2016 तक रहे थे. अब जून 2018 में उन्होंने पालो अल्टो का हाथ थामा है.

 

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अच्छी खबर करिश्माई खेती की: डेढ़ लाख लगाकर इस किसान ने 70 दिन में कमाए 21 लाख रुपये

गुजरात के बनासकांठा जिले में एक सातवीं पास किसान सुर्खियों में छाया हुआ है. दरअसल, उसने फसल उगाने की ऐसी तरकीब अपनाई कि महज 70 दिन में 21 लाख रुपये का मुनाफा कमा लिया.

इस किसान का नाम है खेताजी सोलंकी. उसने अपने सात बीघा के खेत में आलू की जगह खरबूजे की फसल बोने का फैसला किया, लेकिन इसमें उन्होंने आधुनिक तकनीकों की मदद ली.

खेताजी सोलंकी ने बेहतर बीज, टपक सिंचाई और सोलर वॉटर पंप का इस्तेमाल किया. उनके खेत में 140 टन खरबूजा पैदा हुए. उन्होंने 1.21 लाख रुपये खर्च किए थे. पैदावार इतनी अच्छी थी कि उन्हें उसे बेचने के लिए कहीं जाना भी नहीं पड़ा बल्कि दूसरे राज्यों से व्यापारी उनके पास आकर खरबूजा खरीदकर ले गए. उन्हें इसके काफी अच्छे पैसे मिले. फरवरी में लगाई फसल अप्रैल में तैयार हो गई और 70 दिन में उन्होंने 21 लाख रुपये कमा लिए.

 

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एबी डिविलियर्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, इनके नाम दर्ज़ है ये विश्व रिकॉर्ड

डिविलियर्स ने द. अफ्रीका के लिए 114 टेस्ट 228 वनडे और 78 टी 20 मैच खेले हैं। 114 टेस्ट मैचों में 8765 रन बनाए हैं जिसमें 22 शतक और 46 अर्धशतक बनाए हैं। वे एक बेहतरीन बल्लेबाज के साथ ही एक शानदार विकेट कीपर भी रह चुके हैं।

एक वीडियो संदेश में कहा कि वे दक्षिण अफ्रीका और दुनियाभर में अपने फैंस के शुक्रगुजार हैं। एबी ने कहा अब समय आ गया है जब दूसरे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाए। ईमानदारी से कहूं तो मैं अब थक गया हूं। ये एक मुश्किल निर्णय है और मैने ये फैसला काफी सोच समझकर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि  मैं अपने संन्यास का एलान बेहतरीन क्रिकेट खेलते हुए करना चाहता था। हालांकि वे घरेलू क्रिकेट के लिए उपलब्ध रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक लगाने का रिकॉर्ड भी ए बी डिविलियर्स के नाम ही है। ये कमाल उन्होंने 18 जनवरी 2015 को वेस्टइंडीज के खिलाफ महज 31 गेंदों में शतक लगाकर किया था। डीविलियर्स ने कोरी एंडरसन के 36 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर ये रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 16 छक्कों और 9 चौके की मदद से वनडे का यह कीर्तिमान बनाया। उन्होंने इस मैच में कुल 149 रन बनाए थे।

एबी डीविलियर्स के नाम 31 गेंदों में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड तो है ही इसके अलावा सबसे तेज 150 रनों का रिकॉर्ड भी डीविलियर्स के ही नाम पर है। साल 2015 विश्व कप में डीविलियर्स ने सिडनी के मैदान पर 64 गेंदों में 150 रन ठोककर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था। उन्होंने इस दौरान नाबाद 66 गेंदों में 162 रन बनाए थे जिसमें 17 चौके और 8 छक्के शामिल थे।

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मौत के पीछे कई सवाल छोड़ गईं हैं सुनंदा, जानें- मौत से पहले क्या-क्या हुआ था

सुनंदा शशि थरूर पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस की एसआइटी ने सवा चार साल बाद चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन इससे उसकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। सुनंदा की मौत के एक साल बाद जब पुलिस ने हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया था तब किसी को नामजद नहीं किया गया था। अब पुलिस ने उनके पति वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर को मुख्य संदिग्ध आरोपी माना है।

कई सवाल छोड़ गई सुनंदा की मौत 

एसआइटी ने थरूर पर सुनंदा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। सवाल यह है कि जब सुनंदा ने आत्महत्या ही की थी तो पुलिस ने साल भर जांच के बाद हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज क्यों किया था। सुनंदा अपनी मौत के पीछे कई सवाल छोड़ गईं हैं।

फोन पर की थी लंबी बातचीत 

17 जनवरी 2014 की शाम चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा लीला होटल के सुइट नंबर 345 में वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं थीं। उस समय पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि मरने से तीन घंटे पहले उन्होंने अपने स्टाफ से कहा था कि वह उनके लिए सफेद रंग का सूट निकालकर रख दें, उन्हें आइपीएल के मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जाना है। उन्होंने मीडिया के आठ कर्मियों को फोन कर उनसे लंबी बातचीत भी की थी।होटल के कमरे को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि उन्होंने खुदकशी की हो।

शरीर पर 12 ताजे घाव के निशान मिले थे

घटना के दौरान सुनंदा के सभी मोबाइल को केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त करने के बजाए तत्कालीन संयुक्त आयुक्त (सदर्न रेंज) विवेक गोगिया ने उसे शशि थरूर को क्यों सौंप दिया था। कमरे में नींद की दवा अल्प्रेक्स के दो खाली पत्ते मिले थे, जबकि वह यह दवा नहीं लेती थीं। आखिर यह दवा वहां कैसे पहुंची, इस बात का भी पुलिस पता नहीं लगा पाई है। बिस्तर पर खून की छींटे व यूरीन और शरीर पर 12 ताजे घाव के निशान मिले थे। बांह पर इंजेक्शन के भी निशान मिले थे। कमरे में ग्लास टूटे हुए मिले थे।

कोई बड़ी साजिश तो नहीं

बड़ा सवाल यह भी है कि होटल की जिस तीसरी मंजिल पर सुनंदा ठहरी हुईं थीं, उस तल के सभी सीसीटीवी कैमरे खराब क्यों थे। क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी। पुलिस ने इस पहलू पर भी तहकीकात नहीं की। दूसरी बार मेडिकल बोर्ड ने अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा था कि सुनंदा की मौत जहर से ही हुई है, लेकिन जहर किसी खाद्य पदार्थ में मिलाकर खिलाया गया या इंजेक्शन के द्वारा दिया गया, इसका पता अभी तक नहीं लग सका है।

शशि थरूर को लेकर थीं परेशान

एम्स फोरेंसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड ने सुनंदा के शरीर में पाए गए केमिकल की जांच के बाद दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट सौंपते हुए कहा था कि उनकी मौत जहर से हुई है। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही तत्कालीन पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी के निर्देश पर सरोजनी नगर थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। मरने से एक दिन पहले 16 जनवरी की रात 12.10 बजे उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार नलिनी सिंह से लंबी बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह शशि थरूर को लेकर काफी परेशान हैं। वह बातचीत के दौरान काफी रोई भी थीं।

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कुली का कमाल: स्‍टेशन के फ्री वाई फाई की मदद से पास की UPSC की परीक्षा

सपने पूरे करने के लिए हौंसला चाहिए सुविधा नहीं इस सच को सुनाती है इस कुली कीकहानी जो स्‍टेशन के फ्री वाईफाई की मदद से सिविल सेवा परीक्षा में पास हुआ।

केरल में एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ के. की कहानी कुछ अनोखी है, जिन्होंने रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध मुफ्त वाईफाई सुविधा के सहारे इंटरनेट के जरिये पढ़ाई की और केरल पब्लिक सर्विस कमीशन, केपीएससी की लिखित परीक्षा पास की। सबसे बड़ी बात ये है कि तैयारी के दौरान वह किताबों में नहीं डूबे रहे बल्‍कि अपना काम करते हुए स्मार्ट फोन और ईयरफोन के सहारे पढ़ाई करते रहे। अब अगर श्रीनाथ साक्षात्‍कार में सफल हो जाते हैं तो वह भूमि राजस्व विभाग के तहत विलेज फील्ड असिस्टेंट के पद पर नियुक्‍त्‍त हो जायेंगे।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

श्रीनाथ पिछले पांच वर्ष से कुली के रूप में काम कर रहे हैं और उनका सिविल परीक्षा के इम्‍तिहान में बैठने का ये तीसरा प्रयास था। उनका कहना है कि यह पहला मौका था, जब उन्‍होंने स्टेशन पर उपलब्ध वाईफाई सुविधा का इस्तेमाल किया। उन्‍होंने ये भी बताया कि कुली का काम करने के दौरान वे हमेशा ईयरफोन कान में लगाए रखते थे और इंटरनेट पर अपने संबंधित विषयों पर लेक्चर सुना करते थे। उसे मन ही मन दोहराते भी रहते थे और रात को मौका मिलते ही फिर रिवाइज कर लेते थे। इसी वाईफाई की मदद से उन्‍होंने ऑनलाइन अपना परीक्षा फार्म भरा और देश दुनिया की ताजा जानकारियों से खुद को अपडेट किया साथ ही अपने विषयों की जम कर तैयारी की।

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दुनिया की 10 सबसे ताकतवर हस्तियों में शुमार हुए नरेंद्र मोदी, No. 1 पर चिनफिंग

प्रतिष्ठित फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली नेताओं की सूची में शुमार हो गए हैं. फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम मोदी नौवें स्‍थान पर काबिज हैं. इस सूची में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार पहले स्‍थान पर काबिज हुए हैं. वह रूसी नेता व्‍लादिमीर पुतिन को हटाकर पहले स्‍थान पर पहुंचे हैं. फोर्ब्‍स 2018 लिस्‍ट में दुनिया को चलाने वाले सबसे ताकतवर 75 नामों को शामिल किया गया है. फोर्ब्‍स ने लिस्‍ट जारी करते हुए कहा, ”दुनिया में करीब 7.5 अरब लोग हैं लेकिन ये 75 लोग दुनिया को चलाते हैं. फोर्ब्‍स की वार्षिक रैंकिंग में हर एक अरब में से एक ऐसे व्‍यक्ति को चुना जाता है जिनके एक्‍शन सबसे ज्‍यादा मायने रखते हैं.”

पीएम नरेंद्र मोदी
फोर्ब्स ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश (भारत) में “बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं.” इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मोदी सरकार के नवंबर 2016 के नोटबंदी के फैसले का हवाला दिया गया है. हाल के वर्षों में पीएम मोदी ने आधिकारिक यात्रा के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की और वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बढ़ाई है. इसके अलावा वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं.

mukesh ambani
PM मोदी के अलावा मुकेश अंबानी लिस्‍ट में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय हैं.(फाइल फोटो)

मुकेश अंबानी
रिलांयस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस सूची में पीएम मोदी के अलावा स्थान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं. वहीं, माइफ्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्या नाडेला को 40वें पायदान पर रखा गया है. अंबानी पर फोर्ब्स ने कहा कि अरबपति उद्योगपति ने 2016 में भारत के अति-प्रतिस्‍पर्द्धी बाजार में 4-G सेवा जियो शुरू करके कीमत की जंग छेड़ दी.

शी जिनपिंग
जिनपिंग ने पिछले लगातार चार वर्ष तक इस सूची में शीर्ष पर चले आ रहे पुतिन को दूसरे स्थान पर धकेल दिया है. सूची में तीसरे पायदान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चौथे पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और पांचवें पर अमेजन प्रमुख जैफ बेजोस हैं. पीएम मोदी के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग(13वें), ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे(14), चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग(15), एपल के सीईओ टिम कुक(24) को रखा गया है. इस वर्ष सूची में 17 नए नामों को शामिल किया गया है, इसमें सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (8वें ) भी हैं. सूची में पोप फ्रांसिस(6), बिल गेट्स(7), फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों(12), अलीबाबा के प्रमुख जैक मा(21) भी शामिल हैं.

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एक कहानी जो यकीनंद आपके दिल को छु जायेगी।

एक लड़की की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ एक सीधे-साधे लड़के से की जाती है जिसके घर मे एक मां के आलावा और कोई नहीं है। दहेज में लड़के को बहुत सारे उपहार और पैसे मिले होते हैं। लड़की किसी और लड़के से बेहद प्यार करती थी और लड़का भी।

लड़की शादी हो के आ गयी अपने ससुराल, सुहागरात के वक्त लड़का दूध लेके आता है तो दुल्हन सवाल पूछती है अपने पति से…एक पत्नी की मर्जी के बिना पति उसको हाथ लगाये तो उसे बलात्कार कहते है या हक?

पति – आपको इतनी लम्बी और गहरी जाने की कोईजरूरत नहीं है..बस दूध लाया हूँ पी लिजीयेगा। हम सिर्फ आपको शुभरात्रि कहने आये थे कहके कमरे से निकल जाता है। लड़कीमन मारकर रह जाती है क्योंकि लड़की चाहती थी कीझगड़ा हो ताकी मैं इस गंवार से पिछा छुटा सकूँ ।है तो दुल्हन मगर घर का कोई भी काम नहीं करती। बसदिनभर online रहती और न जाने किस किस से बातेंकरती मगर उधर लड़के की माँ बिना शिकायत के दिन भरचुल्हा चौका से लेकर घर का सारा काम करती मगर हरपल अपने होंठों पर मुस्कुराहट लेके फिरती । लड़का एककम्पनी मे छोटा सा मुलाजीम है और बेहद ही मेहनती औरइमानदार। करीब महीने भर बित गये मगर पति पत्नीअब तक साथ नहीं सोये… वैसे लड़का बहुत शांत स्वाभाववाला था इसलिए वह ज्यादा बातें नहीं करता था, बसखाने के वक्त अपनी पत्नी से पूछ लेता था कि, कहा खाओगी..अपने कमरे में या हमारे साथ। और सोने से पहले डायरी लिखने की आदत थी जो वह हर रात को लिखता था।ऐसे लड़की के पास एक स्कूटी था वह हर रोज बाहरजाती थी पति के अफीस जाने के बाद और पति के वापसलौटते ही आ जाती थी। छुट्टी का दिन था लड़का भीघर पे ही था तो लड़की ने अच्छे भले खाने को भी गंदा कहके माँ को अपशब्द बोलके खाना फेंक देती है मगर वह शांत रहने वाला उसका पति अपनी पत्नी पर हाथ उठा देता है मगर माँ अपने बेटे को बहुत डांटती है। इधर लड़की को बहाना चाहिए था झगड़े का जो उसे मिल गयाथा, वह पैर पटकती हुई स्कूटी लेके निकल पड़ती है। लड़की जो रोज घर से बाहर जाती थी वह अपने प्यार से मिलने जाती थी, लड़की भले टूटकर चाहती थी लड़के को मगर उसे पता था की हर लड़की की एक हद होती है जिसे इज्जत कहते हैं, वह उसको बचाये रखी थी। इधर लड़कीअपने प्यार के पास पहुँचकर कहती है। अब तो एक पल भी उस घर मे नहीं रहना है मुझे । आज गंवार ने मुझपर हाथ उठाके अच्छा नही किया ।

लड़का – अरे तुमसे तो मैं कब से कहता हूँ की भाग चलो मेरेसाथ कहीं दूर मगर तुम हो की आज कल आज कल पे लगीरहती हो।

लड़की – शादी के दिन मैं आई थी तो तुम्हारे पास। तुमही ने तो लौटाया था मुझे ।

लड़का – खाली हाथ कहा तक भागोगे तुम ही बोलो..मैंनेतो कहा था कि कुछ पैसे और गहने साथ ले लो तुम तोखाली हाथ आई थी।आखिर दूर एक नयी जगह मे जिंदगी नये सिरे से शुरू करने केलिए पैसे तो चाहिए न?

लड़की – तुम्हारे और मेरे प्यार के बारे में जानकर मेरे घरवालो ने बैंक के पास बुक एटी एम और मेरे गहने तक रखलिये थे। तो मैं क्या लाती अपने साथ । हम दोनों मेहनत करके कमा भी तो सकते थे।

लड़का – चालाक इंसान पहले सोचता है और फिर काम करता है। खाली हाथ भागते तो ये इश्क का भूत दो दिन में उतर जाता, समझी?और जब भी तुम्हें छुना चाहता हूँ बहुत नखरे है तुम्हारे ।बस कहती हो शादी के बाद।

लड़की – हाँ शादी के बाद ही अच्छा होता है ये सब औरसब तुम्हारा तो है। मैं आज भी एक कुवारी लड़की हूँ ।शादी करके भी आज तक उस गंवार के साथ सो न सकीक्योंकि तुम्हें ही अपना पति मान चुकी हूँ बस तुम्हारेनाम की सिंदूर लगानी बाकी है। बस वह लगा दो सबकुछतुम अपनी मर्जी से करना।लड़का – ठीक है मैं तैयार हूँ । मगर इस बार कुछ पैसे जरूरसाथ लेके आना, मत सोचना हम दौलत से प्यार करते हैं ।हम सिर्फ तुमसे प्यार करते है बस कुछ छोटी मोटीबिजनेस के लिए पैसे चाहिए ।

लड़की – उस गंवार के पास कहा होगा पैसा, मेरे बाप से 3 लाख रूपया उपर से मारूती कार ली है।बस कुछ गहने है वह लेके आउगी आज।लड़का लड़की को होटल का पता देकर चला जाता है ।लड़की घर आके फिर से लड़ाई करती है।मगर अफसोस वह अकेली चिल्लाती रहती है उससे लड़नेवाला कोई नहीं था।रात 8 बजे लड़के का मैसेज आता है वाटसप पे की कब आरही हो?लड़की जवाब देती है सब्र करो कोई सोया नहीं है। मैं12 बजे से पहले पहुँच जाउगी क्योंकि यंहा तुम्हारे बिना मेरी सांसे घुटती है।

लड़का -ओके जल्दी आना। मैं होटल के बाहर खड़ा रहूंगाbye…लड़की अपने पति को बोल देती है की मुझे खाना नहीं चाहिए मैंने बाहर खा लिया है इसलिए मुझे कोई परेशानन करे इतना कहके दरवाजा बंद करके अंदर आती हैकी…पति बोलता है की…वह आलमारी से मेरी डायरी दे दो फिर बंद करना दरवाजा। हम परेशान नहीं करेंगे ।लड़की दरवाजा खोले बिना कहती है की चाभीया दो अलमारी की।

लड़का – तुम्हारे बिस्तर के पैरों तले है चाबी ।मगर लड़की दरवाजा नहीं खोलती वल्की जोर जोर से गाना सुनने लगती है। बाहर पति कुछ देर दरवाजापिटता है फिर हारकर लौट जाता है। लड़की ने बड़े जोर से गाना बजा रखा था। फिर वह आलमारी खोलके देखतीहै जो उसने पहली बार खोला था, क्योंकि वह अपना समान अलग आलमारी मे रखती थी।आलमारी खोलते ही हैरान रह जाती है।

आलमारी में उसके अपने पास बुक एटी एम कार्ड थे जो उसके घरवालोने छीन के रखे थे, खोलके चेक किया तो उसमें वह पैसे भी एड थे जो दहेज मेलड़के को मिले थे। और बहुत सारे गहने भी जो एक पेपर केसाथ थे और उसकी मिल्कीयेत लड़की के नाम थी, लड़कीबेहद हैरान और परेशान थी।

फिर उसकी नजर डायरी मेपड़ती है और वह जल्दी से वह डायरी निकालके पढ़ने लगती है। लिखा था, तुम्हारे पापा ने एक दिन मेरी मां की जान बचाइ थी अपना खून देकर । मैं अपनी माँ से बेहद प्यारकरता हूँ इसलिए मैंने झूककर आपके पापा को प्रणाम करकेकहा की…आपका ये अनमोल एहसान कभी नही भूलूंगा, कुछदिन बाद आपके पापा हमारे घर आये हमारे तुम्हारेरिश्ते की बात लेकर मगर उन्होंने आपकी हर बात बताईहमें की आप एक लड़के से बेहद प्यार करती हो। आपकेपापा आपकी खुशी चाहते थे इसलिए वह पहले लड़के कोजानना चाहते थे। आखिर आप अपने पापा की princessजो थी और हर बाप अपने Princess के लिए एक अच्छाइमानदार Prince चाहता है। आपके पापा ने खोजकर केपता लगाया की वह लड़का बहुत सी लड़की को धोखा देचुका है। और पहली शादी भी हो चुकी है पर आपको बतान सके क्योंकि उन्हें पता था की ये जो इश्क का नशा हैवह हमेशा अपनों को गैर और गैर को अपना समझता है।ऐक बाप के मुँह से एक बेटी की कहानी सुनकर मै अचम्भीतहो गया। हर बाप यंहा तक शायद ही सोचे। मुझे यकीनहो गया था की एक अच्छा पति होने का सम्मान मिले नमिले मगर एक दामाद होने की इज्जत मैं हमेशा पा सकताहूँ।मुझे दहेज मे मिले सारे पैसे मैंने तुम्हारे ए काउण्ट मे करदिए और तुम्हारे घर से मिली गाड़ी आज भी तुम्हारे घरपे है जो मैंने इसलिए भेजी ताकी जब तुम्हें मुझसे प्यार होजाये तो साथ चलेंगे कही दूर घूमने। दहेज…इस नाम सेनफरत है मुझे क्योंकि मैंने इ दहेज मे अपनी बहन और बापको खोया है। मेरे बाप के अंतिम शब्द भी येही थेकी..कीसी बेटी के बाप से कभी एक रूपया न लेना। मर्दहो तो कमाके खिलाना, तुम आजाद हो कहीं भी जासकती हो। डायरी के बिच पन्नों पर तलाक की पेपर हैजंहा मैंने पहले ही साईन कर दिया है । जब तुम्हें लगे कीअब इस गंवार के साथ नही रखना है तो साईन करके कहींभी अपनी सारी चिजे लेके जा सकती हो।लड़की …हैरान थी परेशान थी…न चाहते हुए भी गंवार केशब्दों ने दिल को छुआ था। न चाहते हुए भी गंवार केअनदेखे प्यार को महसूस करके पलके नम हुई थी।आगे लिखा था, मैंने तुम्हें इसलिए मारा क्योंकि आपने माको गाली दी, और जो बेटा खुद के आगे मा की बेइज्जतीहोते सहन कर जाये…फिर वह बेटा कैसा ।कल आपके भी बच्चे होंगे । चाहे किसी के साथ भी हो, तबमहसूस होगी माँ की महानता और प्यार।आपको दुल्हन बनाके हमसफर बनाने लाया हूँ जबरजस्तीकरने नहीं। जब प्यार हो जाये तो भरपूर वसूल कर लूँगाआपसे…आपके हर गुस्ताखी का बदला हम शिद्दत से लेंगे हमआपसे…गर आप मेरी हुई तो बेपनाह मोहब्बत करकेकिसी और की हुई तो आपके हक मे दुवाये माँग केलड़की का फोन बज रहा था जो भायब्रेशन मोड पे था,लड़की अब दुल्हन बन चुकी थी। पलकों से आशू गिर रहे थे ।सिसकते हुए मोबाइल से पहले सिम निकाल के तोड़ा फिरसारा सामान जैसा था वैसे रख के न जाने कब सो गई पतानहीं चला। सुबह देर से जागी तब तक गंवार अफीस जाचुका था, पहले नहा धोकर साड़ी पहनी । लम्बी सीसिंदूर डाली अपनी माँग मे फिर मंगलसूत्र ।जबकि पहले एक टीकी जैसी साईड पे सिंदूर लगाती थीताकी कोई लड़का ध्यान न देमगर आज 10 किलोमीटर से भी दिखाई दे ऐसी लम्बीऔर गाढी सिंदूर लगाई थी दुल्हन ने। फिर किचन मे जाकेसासुमा को जबर्दस्ती कमरे मे लेके तैयार होने को कहतीहै। और अपने गंवार पति के लिए थोड़े नमकीन थोड़े हलुवेऔर चाय बनाके अपनी स्कूटी मे सासुमा को जबर्दस्तीबिठाकर (जबकी कुछ पता ही नहीं है उनको की बहू आजमुझे कहा ले जा रही है बस बैठ जाती है)फिर रास्ते मे सासुमा को पति के अफीस का पता पूछकरअफीस पहुँच जाती है। पति हैरान रह जाता है पत्नी कोइस हालत मे देखकर।पति – सब ठीक तो है न मां?मगर माँ बोलती इससे पहले पत्नी गले लगाकर कहती हैकी..अब सब ठीक है…I love you forever…अफीस के लोग सब खड़े हो जाते है तो दुल्हन कहती हैकी..मै इनकी धर्मपत्नी हूँ । बनवास गई थी सुबह लौटीहूँअब एक महीने तक मेरे पतिदेव अफीस मे दिखाई नहीं देंगे

अफीस के लोग- ?????

दुल्हन – क्योंकि हम लम्बी छुट्टी पे जा रहें हैं साथ साथ।

पति- पागल..

दुल्हन – आपके सादगी और भोलेपन ने बनाया है।सभी लोग तालीया बजाते हैं और दुल्हन फिर से लिपटजाती है अपने गंवार से …जंहा से वह दोबारा कभी भी छूटना नहीं चाहती।बड़े कड़े फैसले होते है कभी कभी हमारे अपनों के मगर हम समझ नहीं पाते कि हमारे अपने हमारी फिकर खुद से ज्यादा क्यों करते हैं

** मां बाप के फैसलों का सम्मान करे**

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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