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जानें कौन हैं देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 7 बाइक्स

ये हैं देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 7 बाइक्स

1. हीरो स्प्लेंडर

देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक की लिस्ट में सबसे ऊपर हीरो स्प्लेंडर का नाम आता है। मई 2018 में कंपनी ने इस बाइक की कुल 2,80,763 यूनिट्स बेचीं थी। स्प्लेंडर एक लम्बे समय से अपने सेगमेंट में अच्छा परफॉर्म कर रही है।

2. हीरो HF Deluxe

दूसरे नंबर पर भी हीरो मोटोकॉर्प की ही HF Deluxe बाइक रही है। मई महीने में इसकी 1,84,131 यूनिट्स की बिक्री हुई है। इस बाइक की लगातार बिक्री बढ़ रही है। डेली यूज के लिए इसे अच्छी बाइक कह सकते हैं। यह एक किफायती बाइक है।

3. होंडा CB शाइन

तीसरे नंबर पर होंडा की CB शाइन है। मई महीने में कंपनी ने इसकी 99812 यूनिट्स की बिक्री की। 125cc सेगमेंट में होंडा की CB शाइन एक अच्छी बाइक साबित हुई है। इस बाइक का मुकाबला हीरो की ग्लैमर, बजाज डिस्कवर से होगा। साल-दर-साल के आधार पर इस बाइक की बिक्री में इजाफा देखने को मिल रहा है।

4. हीरो पैशन

हीरो मोटोकॉर्प की पैशन बाइक एक बार फिर से टॉप 7 की रेस में अपना दबदबा बनाये हुए है। मई महीने में कंपनी ने पैशन की 96389 यूनिट्स बेचीं। हाल ही में हीरो ने पैशन सीरिज को पूरी तरह से अपग्रेड किया है। इस समय बाजार में पैशन सीरिज को काफी पसंद किया जा रहा है। भारतीय बाजार में पैशन 110cc में दो वेरिएंट – प्रो और एक्सप्रो में उपलब्ध है।

5. हीरो ग्लैमर

नंबर 5 पर एक बार फिर से हीरो मोटोकॉर्प की बाइक है। मई में 72102 यूनिट्स बेच कर ग्लैमर ने यह स्थान हांसिल किया है। 125cc सेगमेंट में यह बेहद पॉपुलर बाइक है।

6. बजाज पल्सर

छठे स्थान पर बजाज ऑटो की सबसे ज्यादा बिकने वाली पल्सर मौजूद है। बजाज पल्सर की मई 2018 में 70056 यूनिट्स की बिक्री हुई है। अभी हाल ही में बजाज ने पल्सर को अपग्रेड किया है।

7. बजाज CT100

सातवें नंबर पर बजाज की CT100 बाइक है, कंपनी ने मई महीने में इसकी 64,622 यूनिट्स की बिक्री की है।CT100 अपने सेगमेंट की सबसे किफायती बाइक है और इसको चलाना भी सस्ता पड़ता है। इस बाइक में 100cc का इंजन लगा है।

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दुनिया की 10 सबसे ताकतवर हस्तियों में शुमार हुए नरेंद्र मोदी, No. 1 पर चिनफिंग

प्रतिष्ठित फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली नेताओं की सूची में शुमार हो गए हैं. फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम मोदी नौवें स्‍थान पर काबिज हैं. इस सूची में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार पहले स्‍थान पर काबिज हुए हैं. वह रूसी नेता व्‍लादिमीर पुतिन को हटाकर पहले स्‍थान पर पहुंचे हैं. फोर्ब्‍स 2018 लिस्‍ट में दुनिया को चलाने वाले सबसे ताकतवर 75 नामों को शामिल किया गया है. फोर्ब्‍स ने लिस्‍ट जारी करते हुए कहा, ”दुनिया में करीब 7.5 अरब लोग हैं लेकिन ये 75 लोग दुनिया को चलाते हैं. फोर्ब्‍स की वार्षिक रैंकिंग में हर एक अरब में से एक ऐसे व्‍यक्ति को चुना जाता है जिनके एक्‍शन सबसे ज्‍यादा मायने रखते हैं.”

पीएम नरेंद्र मोदी
फोर्ब्स ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश (भारत) में “बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं.” इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मोदी सरकार के नवंबर 2016 के नोटबंदी के फैसले का हवाला दिया गया है. हाल के वर्षों में पीएम मोदी ने आधिकारिक यात्रा के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की और वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बढ़ाई है. इसके अलावा वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं.

mukesh ambani
PM मोदी के अलावा मुकेश अंबानी लिस्‍ट में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय हैं.(फाइल फोटो)

मुकेश अंबानी
रिलांयस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस सूची में पीएम मोदी के अलावा स्थान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं. वहीं, माइफ्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्या नाडेला को 40वें पायदान पर रखा गया है. अंबानी पर फोर्ब्स ने कहा कि अरबपति उद्योगपति ने 2016 में भारत के अति-प्रतिस्‍पर्द्धी बाजार में 4-G सेवा जियो शुरू करके कीमत की जंग छेड़ दी.

शी जिनपिंग
जिनपिंग ने पिछले लगातार चार वर्ष तक इस सूची में शीर्ष पर चले आ रहे पुतिन को दूसरे स्थान पर धकेल दिया है. सूची में तीसरे पायदान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चौथे पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और पांचवें पर अमेजन प्रमुख जैफ बेजोस हैं. पीएम मोदी के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग(13वें), ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे(14), चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग(15), एपल के सीईओ टिम कुक(24) को रखा गया है. इस वर्ष सूची में 17 नए नामों को शामिल किया गया है, इसमें सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (8वें ) भी हैं. सूची में पोप फ्रांसिस(6), बिल गेट्स(7), फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों(12), अलीबाबा के प्रमुख जैक मा(21) भी शामिल हैं.

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India is Tolerant: सहिष्णु देशों में भारत ने पाया चौथा स्थान: सर्वे

हर कोई यह मानकर चल रहा था कि देश में लोग दिनोंदिन ज्यादा असहिष्णु होते जा रहे हैं। समाज बंट रहा है। लोगों की इस सोच के इतर सामाजिक समरसता की तस्वीर पेश करती यह अच्छी खबर है। 27 देशों में इप्सोस मोरी द्वारा किए एक अध्ययन के अनुसार भारत चौथा सबसे सहिष्णु देश है। देश के 63 फीसद लोग मानते हैं कि यहां एक-दूसरे के प्रति लोग बहुत सहिष्णु हैं। कनाडा सूची में शीर्ष पर जबकि हंगरी सबसे नीचे है।

अमीर और गरीब का अंतर दूसरी और देश के मूल निवासी व प्रवासियों के मध्य मतभेद तीसरी सबसे बड़ी वजह है। भारत के 49 फीसद लोग मानते हैं कि राजनीतिक विचारों में भिन्नता तनाव की वजह है। 48 फीसद अलग-अलग धर्मों और 37 फीसद सामाजिक-आर्थिक हैसियत के अंतर को इसका कारण मानते हैं। करीब 53 प्रतिशत भारतीयों ने माना कि अलग संस्कृति, विचारों और पृष्ठभूमि में रहने से और लोगों के बीच लगातार घुलते मिलते रहने से आपसी समझ और सम्मान बढ़ता हैं।

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ताजमहल Ownership केस: सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां का वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
– ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
– पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, “शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।”
– कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
– सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
– एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
– बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
– एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
– 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
– बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

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ब्लूमबर्ग मीडिया का दावा: 2019 छोड़िए जनाब, 2029 तक पीएम रहेंगे नरेंद्र मोदी

यूपी उपचुनाव के नतीजों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है क्योंकि उसे हराने के लिए उसके सारे विरोधी एक जुट हो गए। जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के सारे विरोधी एक साथ होकर चुनाव लड़ेंगे, जिससे कि नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने से रोका जाए। लेकिन इसी बीच भाजपा के लिए एक सुखद खबर आई है, जिसने उसे मुस्कुराने का मौका दे दिया है।

ब्लूमबर्ग मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी केवल 2019 ही नहीं बल्कि 2029 तक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। पीएम मोदी भारत देश में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं ब्लूमबर्ग मीडिया समूह ने दुनिया के 16 देशों के नेताओं का एक आकलन किया है, जिसके बाद उसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पीएम मोदी भारत देश में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं। उनके प्रशंसक एक 10 साल का बच्चा भी है तो वहीं 90 साल के बुजुर्ग भी उन्हें पसंद करते हैं। Loading ad मोदी को लोग पसंद करते हैं ये ही उनकी ताकत है, भाजपा को लोग पसंद करे ना करें लेकिन मोदी को लोग पसंद करते हैं और उनकी बातों पर भरोसा करते हैं , जिसके कारण लोग उन्हें देश के कल्याण के लिए एक और मौका दे सकते हैं। मोदी की 2029 तक पीएम बने रहने की प्रबल संभावना और अगर ऐसा हुआ तो 2019 में भी उनके नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी, यहीं नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी की 2029 तक पीएम बने रहने की प्रबल संभावना है। उनके समक्ष अभी देश में कोई दमदार नेता नहीं है , जिसका फायदा निश्चित तौर पर नरेंद्र मोदी को मिलेगा ।

डोनाल्ड ट्रंप से नाराज है लोग पीएम मोदी के अलावा रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के तानाशाह किंग किम जोंग, सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को भी कहा गया है कि ये भी अपने देश की सत्ता लंबे वक्त तक संभाल सकते हैं, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में रिपोर्ट कहती है कि ये जनता के बीच खासे लोकप्रिय नहीं है इसलिए हो सकता है कि ये उनका पहला और आखिरी कार्यकाल हो, संभव है कि वो अपना कार्यकाल भी पूरा ना कर पाए।

व्लादिमिर पुतिन जबकि रूस में राष्ट्रपति चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाले व्लादिमिर पुतिन को 2024 में पद त्यागना पड़ सकता है। जबकि नेतन्याहू के बारे में रिपोर्ट कहती है कि उनका नाम घोटलों में शामिल है। अगर वे इसमें दोषी पाए गए तो उनकी सत्ता हाथ से जा सकती है। जबकि ब्लूमबर्ग मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जापान के पीएम शिंजो आबे भी कई आरोपों के घेरे में हैं, ऐसे में उनकी सत्ता में वापसी मुश्किल दिख रही है।

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85 प्रतिशत भारतीय करते हैं अपनी सरकार पर भरोसा: सर्वे

भारत में 85 प्रतिशत लोग अपनी सरकार में विश्वास रखते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आधे से ज्यादा लोग सैन्य शासन और तानाशाही का भी समर्थन करते हैं। पीईडब्लू के ताजा सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है।

38 देशों में कराए गए इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जैसे देश में जिसका सात दशकों का मजूबत लोकतंत्र का इतिहास है, वहां के 55 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तानाशाही का भी समर्थन करते हैं। यही नहीं, 27 प्रतिशत लोग शक्तिशाली नेता की कामना करते हैं।

यही नहीं भारत एशिया के उन तीन देशों में शुमार है जहां के लोग टेक्नोक्रेसी का भी समर्थन करते हैं। भारत में इनका प्रतिशत 65, विएतनाम में 67 और फिलीपींस में 62 है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे दो बड़े लोकतांत्रिक देशों में क्रमशः 53 प्रतिशत और 52 प्रतिशत लोग सैन्य शासन को अपने देश के लिए अच्छा मानते हैं। खास बात यह है कि इन दोनों ही देशों में 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग सैन्य शासन के ज्यादा पक्षधर नहीं हैं।

  • 70 फीसदी लोग चाहते हैं मोदी एक बार फिर बनें प्रधानमंत्री

  • नोटबंदी पर 90 प्रतिशत जनता पीएम के साथ, ऐप पर दिया जवाब

  • नोटबंदी सर्वेः 85 फीसद जनता PM मोदी के साथ