Posted on

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने पत्नी सुनंदा पुष्कर हत्याकांड पर दी सफाई। जाने पूरा मामला!

थरूर ने अपनी सफाई में एक पत्र जारी किया है। इसमें उन्‍होंने कहा, ‘मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं, वो ऊटपटांग और आधारहीन हैं। मेरे खिलाफ द्वेषपूर्ण और बदला लेने के उद्देश्‍य से अभियान चलाया जा रहा है।’ दरअसल, सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में आरोपी बनाए गए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान शशि थरूर को 7 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया है। यहां पर बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में सुनंदा पुष्कर के पति शशि थरूर को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोपी माना है।

वहीं, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर भी सुनवाई हुई। स्वामी ने कहा कि अपराध हुआ था, उस समय सबूत मिटाए गए थे। एक साल बाद एफआईआर दर्ज की गई, दिल्ली पुलिस ने सही तरीके से जांच नहीं की। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वामी की याचिका पर हम अलग से गौर करेंगे। इस पर पुलिस को अगली सुनवाई में जवाब देना है।

यहां पर बता दें कि पिछले महीने 14 मई को बहुचर्चित सुनंदा पुष्कर मौत मामले में सवा चार साल बाद विशेष जांच दल (एसआइटी) ने पटियाला हाउस कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इस चार्जशीट में सुनंदा के पति व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की भूमिका को संदिग्ध माना था। तकरीबन 4 साल बाद दिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर मामले में कोर्ट में 3000 पेज की चार्जशीट पेश की थी। चार्जशीट में आईपीसी की धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने और वैवाहिक जीवन में प्रताड़ित करने के की बात कही गई है।

प्रताड़ना से तंग आकर सुनंदा ने की थी खुदकशी

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा की 17 जनवरी 2014 को चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा होटल लीला पैलेस के सुइट नंबर 345 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

मौत को पहले आत्महत्या बताया गया था, लेकिन एक साल बाद विसरा रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले की जांच के लिए एसआइटी बनाई गई। लेकिन, सवा चार साल बाद भी न तो केस सुलझ सका और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई।

एम्स के मेडिकल बोर्ड ने सुनंदा के शव का पोस्टमार्टम किया था। 29 सितंबर 2014 को मेडिकल बोर्ड ने दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सुनंदा की मौत जहर से हुई है। बोर्ड ने कहा था कि कई ऐसे रसायन हैं जो पेट में जाने या खून में मिलने के बाद जहर बन जाते हैं। लिहाजा, बाद में उनके वास्तविक रूप के बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

इस रिपोर्ट के बाद 1 जनवरी, 2015 को सरोजनी नगर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद सुनंदा के विसरा को जांच के लिए फोरेंसिक ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ), अमेरिका की लैब में भेज दिया गया था। लेकिन, वहां की लैब में भी जहर के बारे में पता नहीं लग सका। उस वक्त दवाओं के ओवरडोज को मौत की वजह बताया गया था।

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्‍‌नी सुनंदा पुष्कर का शव दिल्ली के होटल लीला से बरामद किया गया था। सुनंदा का शव कमरे के बिस्तर पर मिला था। सुनंदा और शशि थरूर की शादी 2010 में ही हुई थी। यह सुनंदा की तीसरी और शशि थरूर की दूसरी शादी थी।

Posted on

CM त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत 12 अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज, जानिए पूरा मामला

मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद सरस्वती ने प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत 12 अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में वाद दाखिल किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशुतोष मिश्रा ने इस पर सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है।

अधिवक्ता अरुण कुमार भदौरिया ने बताया कि मातृसदन जगजीतपुर के ब्रह्मचारी दयानंद ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तराखंड शासन के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, प्रमुख सचिव खनन आनंदवर्धन, जिलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत, एडीएम (प्रशासन) भगवत किशोर मिश्रा, एसडीएम हरिद्वार मनीष कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक उत्तराखंड वन विकास निगम एसटीएस लेपचा और प्रभागीय लौगिंग प्रबंधक ज्वालापुर आईपीएस रावत के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में एक वाद दाखिल किया है।
 

उनका कहना है कि उनके गुरु स्वामी शिवानंद अवैध खनन के खिलाफ काफी समय से संघर्षरत हैं। आरोप लगाया गया है कि सात दिसंबर को 11.30 बजे मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी हरिद्वार एवं अपर जिलाधिकारी प्रशासन के कहने पर एसडीएम हरिद्वार मनीष कुमार सिंह अपने साथ दर्जनों पुलिस कर्मियों को लेकर आश्रम का गेट जबरदस्ती खुलवाकर घुस आए और ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को एंबुलेंस में डालकर किसी अन्य जगह ले गए हैं, जबकि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद शांतिपूर्वक अपना अनशन कर रहे थे।

उनको ले जाने की कोई लिखित या मौखिक सूचना अभी तक नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि उत्तराखंड शासन के अधिकारी पूर्व में भी माफिया के इशारे पर दो संतों की हत्या करवा चुके हैं। आत्मबोधानंद को भी हत्या के उद्देश्य उठाकर ले जाया गया है। मामले में सुनवाई करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशुतोष मिश्रा ने वाद को प्रथम अपर सिविल जज वरिष्ठ वर्ग, न्यायिक मजिस्ट्रेट हरिद्वार के न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया है। अब अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तिथि नियत की गई है।