Posted on

अमेरिकी संसद ने बदला कानून, भारत के लिए रूस से हथियार खरीदने का रास्ता साफ

अमेरिकी संसद ने राष्ट्रीय रक्षा विधेयक, 2019 पारित कर सीएएटीएस कानून के तहत भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगने की आशंका को खत्म करने का रास्ता निकाल लिया है. प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून (सीएएटीएसए) के तहत उन देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाते हैं जो रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद करते हैं.

अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट ने 2019 वित्त वर्ष के लिए जॉन एस मैक्केन नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनटीएए) (रक्षा विधेयक) 10 मतों के मुकाबले 87 मतों से पारित कर दिया गया. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है. अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के वास्ते व्हाइट हाउस जाएगा. इस विधेयक में CAATSA के प्रावधान 231 को समाप्त करने की बात कही गई है.

व्हाइट हाउस में राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहे जोसुआ व्हाइट ने बताया कि सीएएटीएसए के नये संशोधित प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने के बाद भारत के लिए रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदना आसान हो जाएगा.

हालांकि, उनका कहना है कि कानून की भाषा बेहद कठोर लग रही है, लेकिन रूस से रक्षा खरीद करने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधानों का बेहद नरम कर दिया गया है.

रक्षा विधेयक में एक प्रावधान किया गया है जिसके तहत अमेरिका और अमेरिकी रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को राष्ट्रपति एक प्रमाणपत्र जारी कर सीएएटीएसए के तहत प्रतिबंधों से छूट दे सकता है.

Posted on

दीवार के पीछे की हमारी हलचल को पकड़ सकता है एम आई टी का नया एआइ सिस्टम

शोधकर्ताओं ने लोगों की सामान्य गतिविधियों, जैसे टहलने, बातचीत करने, बैठने, दरवाजा खोलने या लिफ्ट का इंतजार करने की हजारों फोटो एकत्र कीं। फिर इन तस्वीरों को कैमरे से निकालकर उनके स्टिक फिगर्स (एक तरह के रेखा-चित्र) प्राप्त किए गए। संबंधित रेडियो सिग्नल के साथ इन्हें न्यूरल नेटवर्क से जोड़ा गया। इस संयोजन के साथ सिस्टम रेडियो सिग्नल और स्टिक फिगर्स के बीच संबंध को समझ गया। ट्रेनिंग के बाद आरएफ-पोज इतना समर्थ हो गया कि वह कैमरे के बिना केवल वायरलेस रिफ्लेक्शन के आधार पर लोगों के मूवमेंट को नोट करने लगा।

निगरानी में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिस्टम सही तरह से काम करे तो बुजुर्गों की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी और उन्हें गिरने, चोट लगने और एक्टिविटी पैटर्न में बदलाव जैसी चीजों से बचाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं की टीम मौजूदा समय में डॉक्टरों के साथ मिलकर हेल्थकेयर में इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर काम कर रही है।

सेंसर पहनने व डिवाइस चार्ज करने की जरूरत नहीं

एमआइटी के वैज्ञानिक दीना कताबी कहते हैं, हमने देखा है कि अक्सर लोगों को तेज चलते और सामान्य कामकाज करते हुए देखने के आधार पर ही डॉक्टर मर्ज को समझते हैं और इलाज की दिशा तय करते हैं। यहीं से हमें इसे तैयार करने का विचार आया। हमने इसी का एक जरिया उपलब्ध कराने की कोशिश की है। अब तक यह व्यवस्था नहीं थी।

शोधकर्ता के अनुसार, हमारी पहल की एक खासियत यह है कि इसमें मरीज को न तो कोई सेंसर पहनना पड़ता है और न ही अपनी डिवाइस को चार्ज करने की चिंता करनी पड़ती है। हेल्थकेयर के अलावा नया सिस्टम यानी आरएफ-पोज ऐसे वीडियो गेमों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जिनमें खिलाड़ियों का मूवमेंट होता है।

Posted on

48 घंटे में धरती पर बरसेगा सूरज का कहर बंद होगा टीवी, मोबाइल और जीपीएस

अगले 48 घंटे में धरतीवासियों को सूरज का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। सूरज के कोप से आपके मोबाइल का सिग्नल जाम हो सकता है, जीपीएस गड़बड़ा सकता है और तो और आपको एंटरटेन करने वाला टीवी भी बंद हो सकता है।

सूरज का यह गुस्सा दरअसल एक खगोलीय घटना है, जिसे सौर तूफान कहते हैं। खगोल वैज्ञानिकों ने सूरज पर चलने वाले तूफान के अगले 48 घंटे में धरती से टकराने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके प्रभाव से उपग्रह आधारित सेवाएं जैसे मोबाइल, केबल नेटवर्क, जीपीएस नैविगेशन प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा रेडिएशन के खतरे की भी आशंका है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से पहले इसका असर अमेरिका और यूके में दिख सकता है। सौर तूफान के धरती से टकराने पर कुछ समय के लिए टेक ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है। नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने कहा है कि जब यह तूफान आएगा तो उत्तर और दक्षिण में तेज रोशनी नजर आएगी। हालांकि संस्थान ने इसे जी-1 या हल्का सौर तूफान ही करार दिया है। असोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि यह तूफान रविवार या सोमवार को आ सकता है। इस दौरान काफी तजे सौर हवाएं चलेंगी।

नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर में गैस के इस तूफान को देखा जा सकता है। विदेशी मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक सूरज में एक कोरोनल होल खुलेगा, जिसके कारण उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। इसमें कॉस्मिक कण भी होंगे। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके जरिये सूरज से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा।

बता दें कि सौर तूफान सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। इनमें जी-5 श्रेणी का तूफान सबसे खतरनाक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि जी-1 श्रेणी के तुफान का सबसे ज्यादा असर पावर ग्रिड और माइग्रेटरी बर्ड्स पर पड़ता है।

Posted on

गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

Posted on

व्हाट्सएप का नया QR कोड पेमेंट फीचर पेटीएम और फ्रीचार्ज के लिए बनेगा सिरदर्द

फेसबुक अधिकृत व्हाट्सएप सिर्फ एक मैसेजिंग एप तक ही सीमित नहीं रही है। भले ही इस एप की शुरुआत टेस्टिंग और फोटोज, वीडियोज भेजने से हुई हो। लेकिन इन सालों में व्हाट्सएप ने स्नैपचैट की तरह स्टेटस फीचर्स से लेकर इन-एप यूट्यूब प्लेबैक, वॉयस और वीडियो कालिंग और पेमेंट्स फीचर जोड़ दिया है। इससे यूजर्स का अनुभव और बेहतर हुआ है।

आसानी से भेज पाएंगे पैसे : अब व्हाट्सएप ने QR फीचर पेश किया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स आसानी से पैसे भेज पाएंगे। फिलहाल, यह फीचर बीटा वर्जन में है। यह फीचर इससे पहले पेश किए गए सेंड टू यूपीआई आईडी फीचर में जोड़ा गया है।

भारत में QR फीचर पेटीएम, फ्रीचार्ज और मोबिक्विक जैसे ई-वॉलेट एप्स पर पहले से उपलब्ध है। व्हाट्सएप का यह नया पेमेंट फीचर यूजर्स को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को भी बूस्ट देगा।

कहां उपलब्ध है यह फीचर: यह नया फीचर गूगल प्ले बीटा प्रोग्राम के तहत व्हाट्सएप वर्जन 2.18.93 पर उपलब्ध है। एंड्रॉयड बीटा यूजर्स सेटिंग्स में पेमेंट में जाएं। इसके बाद न्यू पेमेंट्स पर टैप करें। इसमें स्कैन QR कोड का विकल्प दिखाई देगा। इसमें आप जितनी भी राशि भेजना चाहे उसे एंटर कर के सेंड कर दें।

प्रतिस्पर्धियों के लिए खतरा : व्हाट्सएप पे के लॉन्च के कारण भारत में मौजूद लोकल पेमेंट सेवा प्रदाताओं के बीच हलचल मच गई। पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा का डर तो ट्विटर पर सबके सामने भी आ चुका है। उन्होंने कुछ समय पहले ट्ववीट किया था की व्हाट्सएप के इस नए फीचर के आने से यूपीआई सिस्टम आहत होगा।

इस मामले में पेटीएम सीईओ ने किया था ट्ववीट : विजय शेखर शर्मा ने एक बयान में कहा की-”फेसबुक अपना पेमेंट सिस्टम लाकर देश में बड़ा प्लेयर बनकर मोनोपॉली स्थापित करने ओर यूपीआई को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहा है।”

हालांकि, अन्य लोकल प्लेयर्स का मानना है की भले ही गूगल ओर व्हाट्सएप जैसी कंपनियों को यूपीआई प्लेटफार्म स्थापित करने के लिए थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी दी जा रही है लेकिन उनसे भी सभी दिशानिर्देशों का पालन करवाया जा रहा है। भारत में व्हाट्सएप लगभग 80 प्रतिशत छोटे बिजनेस को उपभोक्तओं से कनेक्ट करने के लिए मदद करता है।

व्हाट्सएप में जुड़ेंगे ये खास फीचर्स : व्हाट्सएप भविष्य में ऑटो रेस्पोंसेज, बिजनेस प्रोफाइल बनाना, चाट माइग्रेशन ओर एनालिटिक्स जैसे फीचर्स लेकर आएगा। यूजर्स व्हाट्सएप बिजनेस के लिए लैंडलाइन नंबर भी रजिस्टर कर पाएंगे। यह कंपनी द्वारा लिया जाने वाला बड़ा कदम हो सकता है। क्योंकि लोगों को ग्राहकों के साथ अपना निजी नंबर शेयर करना पसंद नहीं होता। बिजनसेज Away का ऑटोमेटेड रिस्पांस भी सेट कर पाएंगे। यह मैसेज उपभोक्ताओं को तब मिलेगा जब वो कंटेट्स करने का प्रयास कर रहे होंगे और आप उपलब्ध नहीं होंगे।

व्हाट्सएप की योजना को ध्यान में रखते हुए यह बात तो साफ है की लोकल ई-वॉलेट कंपनियों के सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा है। ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए इन कंपनियों को नए सिरे से योजना बनानी होगी।अन्यथा देश में व्हाट्सएप का एकाधिकार होना संभव है।

Posted on

सरकार ने एक बार फिर बताया 670 करोड़ रुपये में खरीदा है एक राफेल जेट

राफेल सौदे को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बार फिर सरकार ने संसद में बताया कि एक राफेल फाइटर जेट की कीमत 670 करोड़ रूपये है. रक्षा राज्यमंत्री सुभाषराव भामरे ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में बताया कि ये कीमत बिना किसी साजों-सामान, हथियार और मेंटनेंस इत्यादि के है.

Once again, the government told that they bought a Rafael jet for Rs 670 crore
लेकिन आज ही देश के गोला-बारूद पर हुए एक सेमिनार के बाद मीडिया से बात करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया से कहा कि राफेल जेट की कीमत क्या है उसपर पहले ही लिखित जवाब दे दिया गया है. मीडिया ने दरअसल, निर्मला सीतारमण से ये सवाल पूछा था कि क्या जो राफेल जेट भारत ने फ्रांस से खऱीदा है उसकी कीमत कतर और मिश्र से कम है या ज्यादा. लेकिन उन्होनें ये कहकर सवाल टाल दिया कि इस बारे में पहले ही लिखित जवाब दे दिया गया है.

एबीपी न्यूज के पास आज राज्यसभा में रक्षा राज्यमंत्री ने जो लिखित जवाब दिया है उसकी कॉपी मौजूद है. इसमें साफ तौर से लिखा है कि नबम्बर 2016 में जो मुद्रा विनियम का जो रेट था उसके हिसाब से बिना राफेल जेट के जरूरी साजों-सामान, हथियार, मेंटनेंट स्पोर्ट और सर्विस तथा भारत के हिसाब से जरूरी इन्हेंसमेंट के एक राफेल जेट की कीमत करीब 670 करोड़ रूपये है.

रक्षा राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि ये तथ्य गलत है कि पिछली (यूपीए) सरकार ने 126 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा 10.2 बिलियन डॉलर (यानि 66 हजार करोड़ रुपये) में किया था. उन्होनें कहा 126 विमानों के लिए आरएफपी यानि रिक्यूस्ट फॉर प्रपोजल वर्ष 2007 में दी गई थी लेकिन 2014 तक भी कीमत का मोल-भाव नहीं हो पाया था.

साथ ही 108 विमानों के लिए सिर्फ बनाने का लाईसेंस था ना कि ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी यानि तकनीकी हस्तांतरण था. सुभाषराव भामरे के मुताबिक“इसलिए 126 विमानों की कीमत का उन 36 विमानों से तुलना नहीं की जा सकती जिन्हें सीधे फ्लाई-वे हालत में खरीदा जा रहा है.”

रक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए सीसीएस यानि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से 24 अगस्त 2016 को मंजूरी ली गई थी और 23 सितम्बर 2016 को सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे.

रक्षा राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड या फिर किसी अन्य सरकारी उपक्रम का राफेल जेट बनाने वाली कंपनी, दसॉल्ट एवियेशन से किसी भी तरह का कोई करार नहीं हुआ था. क्योंकि (पिछली) सरकार कभी भी ना तो सौदे को लेकर किसी नतीजे पर पहुंच पाई थी और ना ही कोई करार कर पाई थी.

आपको बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल खड़ी कर रही है. सवालों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले संसद सत्र में जवाब दिया था कि सरकार राफेल सौदे की कीमत फ्रांस से हुए सुरक्षा समझौते को लेकर नहीं बता सकती है. लेकिन खुद रक्षा राज्यमंत्री नबम्बर 2016 में ही एक राफेल लड़ाकू विमान की कीमत संसद में बता चुके थे. आज दूसरी बार सरकार ने एक राफेल की कीमत बताई है.

सौदे में ऑफसेट को लेकर रिलायंस कंपनी से हुए करार पर भी रक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि राफेल जेट बनाने वाली कंपनी किसी भी भारतीय कंपनी को अपना ऑफसेट-पार्टनर चुनने के लिए स्वतंत्र है.

Posted on

भारत में बनेगी अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर की बॉडी

अमेरिकी सेना सहित दुनियाभर में कहीं भी उपयोग में आने वाले एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर की बॉडी भारत में हैदराबाद स्थित संयंत्र में बनेगी। इनका निर्माण टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) करेगी, जिसकी उत्पादन इकाई का शुभारंभ गुरुवार को हैदराबाद में किया गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन, तेलंगाना के उद्योग व आइटी मंत्री के. टी. राव तथा बोइंग और संबंधित कंपनियों के कई शीर्ष अधिकारी इस मौके पर मौजूद थे।

टीबीएएल अमेरिकी कंपनी बोइंग और भारत की टाटा संस नियंत्रित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) का संयुक्त उपक्रम है। बोइंग की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टीबीएएल संयंत्र से निकले एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के बॉडीज बोइंग के सभी ग्राहकों को डिलिवर किए जाएंगे, जिनमें अमेरिकी सेना समेत दुनियाभर के 15 अन्य देश शामिल है। कंपनी का हैदराबाद स्थित संयंत्र करीब 14,000 वर्गमीटर में फैला है, जिनमें 350 बेहद कुशल पेशेवर काम करेंगे। भविष्य में दुनियाभर में जहां कहीं से भी एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर की मांग आएगी, उसकी बॉडी का निर्माण हैदराबाद स्थित इसी संयंत्र में होगा। कंपनी के मुताबिक इस संयंत्र से पहली बॉडी का निर्माण इसी वर्ष अनुमानित है।

सीतारमन ने टीबीएएल को भारत के रक्षा क्षेत्र में इस तरह के बड़े निवेश के लिए बधाई दी। इस संयंत्र के लिए दोनों कंपनियों ने वर्ष 2015 में करार किया था और संयंत्र का निर्माण वर्ष 2016 में शुरू हुआ।

बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सेक्योरिटी की प्रेसीडेंट व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लिएन कैरेट ने कहा कि पिछले दो वर्षो में भारत से बोइंग की सोर्सिग 100 करोड़ डॉलर (करीब 6,500 करोड़ रुपये) को पार कर गई है। उन्होंने कहा, ‘कंपनी योग्य पेशेवरों, कौशल प्रशिक्षण और एडवांस्ड एयरोस्पेस मैन्यूफैक्चरिंग के लिए काम करने वाले योग्य कर्मचारियों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए बड़ा निवेश कर रही है। हम इस संयंत्र से सिर्फ बॉडी ही नहीं, बल्कि बहुत जल्द वर्टिकल स्पार बॉक्स जैसे उपकरणों का भी उत्पादन करेगी।

Posted on

राजस्थान के युवक ने रिमोट से चलाया ट्रैक्टर

राजस्थान के बारां जिले के बम्बौरी कलां गांव के एक किसान के बेटे ने रिमोट से ट्रैक्टर चलाकर सबको हैरत में डाल दिया। रिमोट से ट्रेक्टर चलाने वाले युवक योगेश नागर ने बताया कि उसके पिता को ट्रैक्टर चलाते समय पेट में तकलीफ होती थी।

जिससे वह काम नहीं कर पाते थे। यह दर्द महसूस कर योगेश ने बिना चालक के ट्रैक्टर चलाने की तरकीब ढूंढ निकालने की ठानी तथा एक ऐसा रिमोट तैयार किया जिससे ट्रैक्टर को बिना चालक के चलाया जा सके।

योगेश ने बताया कि इस तकनीक को विकसित करने के लिए कुछ उपकरण स्वयं बनाए तथा कुछ उपकरण बाजार से खरीदे। जिस पर 47 हजार रूपये का खर्चा आया। इस रिमोट की सीमा करीब एक से डेढ़ किलोमीटर है।

युवक के इस आविष्कार से सभी हैरत में हैं तथा इसकी सफलता के बाद कयी किसान उससे यह तकनीक हासिल करना चाहते हैं। योगेश ट्रेक्टर तक ही अपने को सीमित नहीं रखना चाहता बल्कि भारतीय सेना के लिए भी उपकरण बनाना चाहता है।