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अब नहीं होगी हर काम में पैन कार्ड की जरूरत। आधार नंबर ही बन जाएगा पैन!

भारत सरकार के यूनियन बजट 2019 में इंकम टैक्स रूल में फेरबदल किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए इन नए रूल्स के बारे में बताया।

टैक्सदाताओं की सहूलियत के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड को विनिमय योग्य कर दिया जाएगा। इसका अर्थ जिनके पास पैन कार्ड नहीं है वे इंकम टैक्स फाइल करते समय आधार कार्ड को पैन कार्ड की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही अन्य जगहों पर भी यह पैन कार्ड के विकल्प के रूप में कार्य करेगा।

अब पैन अप्लाई करते समय UIDAI से आधार का डेमोग्राफिक डेटा लिया जाएगा। अगर पैन कार्ड में आपका आधार लिंक है तब आप अपनी इच्छानुसार पैन कार्ड की जगह आधार का उपयोग कर सकते हैं।

इसके साथ ही बड़ी बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए आधार कार्ड या पैन कार्ड डेटा से वेरिफाई करवाना अनिवार्य हो गया है।

सभी इंकम टैक्स फाईलिंग के लिए आधार से वेरिफिकेशन को भी अनिवार्य कर दिया गया है।

रविशंकर प्रसाद ने संसद में महत्वपूर्ण आधार अमेंडमेंट बिल पेश किया जिसके अंतर्गत अब 18 वर्ष से कम उम्र के आधार नंबर होल्डर्स 18 वर्ष की आयु में आने पर अपना आधार कैंसिल करवा सकते हैं। इसके साथ ही इन्होंने आधार डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की।

क्या हुआ महंगा

सोने के आयात शुल्क में 2.5% बढ़ाने के साथ साथ पेट्रोल, डीजल और आयातित पुस्तकों पर 5% शुल्क बढ़ाया गया है। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स में सिंथेटिक रबर, पी वी सी, टाइल्स, ऑप्टिकल फाइबर, चांदी, स्टेनलेस उत्पाद, मूल धातु के फिटिंग और फ्रेम्स, एयरकंडीशनर, लाउडस्पीकर, वीडियो रिकॉर्डर, CCTV कैमरे, तम्बाकू उत्पाद तथा हॉर्न पर भी शुल्क में बढ़ोत्तरी की गई।

क्या हुआ सस्ता

इलेक्ट्रिक कारों पर GST को 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है तथा इसके लिए लोन पर ब्याज में 1.5 लाख तक कि इंकम टैक्स में छूट दी गई है। होम लोन भी सस्ते हुए जिसमे 45 लाख के होम लोन में 3 लाख की छूट भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त साबुन,शैम्पू, हेयरोइल, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट पौडर, पंखे, लैंप, ब्रीफकेस, यात्री बैग, सेनेटरी वीयर, बोतल, कंटेनर, रसों बर्तन, बिस्तर, गद्दे, चश्मों के फ्रेम, बांस फर्नीचर, पास्ता, मेयोनेज़, नमकीन, सूखा नारियल, सेनेटरी नैपकिन, धूपबत्ती, ऊन तथा ऊन के उत्पादों को और सस्ता करा गया है।

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संसद ने ‘टैक्स फ्री ग्रेच्युटी’ की सीमा की दोगुनी, 20 लाख की रकम तक नहीं देना होगा कोई कर

ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को गुरुवार को संसद की मंजूरी मिल गई. विधेयक में निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के ऐसे कर्मचारियों के उपदान (ग्रेच्यूटी) की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं. लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है. कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन और आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है. आज भी इन्हीं मुद्दों पर सदन में हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही बैठक शुरू होने के करीब 20 मिनट बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई. लेकिन ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार के अनुरोध पर बिना चर्चा के, सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

गंगवार ने विधेयक पेश करते हुए कहा ‘यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और मैं अनुरोध करता हूं कि इसे चर्चा के बिना पारित कर दिया जाए.’ विधेयक के लिए कांग्रेस के डॉ सुब्बीरामी रेड्डी ने दो संशोधन पेश किए थे लेकिन आज उन्होंने अपने दोनों ही संशोधन वापस ले लिये. इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘प्रसूति छुट्टी की अवधि’ को अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है.

उल्लेखनीय है कि अभी दस अथवा अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए उपदान भुगतान अधिनियम 1972 लागू है जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने पांच वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है. इसी के तहत उपदान (ग्रेच्यूटी) संदाय की योजना अधिनियमित की गई थी. अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी.

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया. इसलिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी महंगाई और वेतन वृद्धि पर विचार करते हुए सरकार का अब यह विचार है कि उपदान भुगतान अधिनियम,1972 के अधीन शामिल कर्मचारियों के लिए उपदान (ग्रेच्यूटी) की पात्रता में संशोधन किया जाना चाहिए.

इस अधिनियम को लागू करने का मुख्‍य उद्देश्‍य सेवानिवृत्ति के बाद कामगारों की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे सेवानिवृत्ति की नियमावली के परिणामस्‍वरूप सेवानिवृत्ति हुई हो अथवा शरीर के महत्‍वपूर्ण अंग के नाकाम होने से शारीरिक विकलांगता के कारण सेवानिवृत्ति हुई हो.

विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि उपदान संदाय संशोधन विधेयक 2017 में अन्य बातों के साथ साथ अधिनियम की धारा 2क का संशोधन करने का प्रावधान किया गया है जिससे सरकार को निरंतर सेवा विधेयक में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘प्रसूति छुट्टी की अवधि’ को अधिसूचित किया जाए. ऐसा इसलिये किया गया क्योंकि प्रसूति सुविधा संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से प्रसूति छुट्टी की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया था. ऐसे में केंद्र सरकार को वर्तमान 12 सप्ताह की अवधि को ऐसी अन्य अवधि के लिये अधिसूचित करने की बात कही गई है.

इसके तहत दस लाख रुपये शब्द के स्थान पर ‘एक ऐसी रकम जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय समय पर अधिसूचित की जाए’ शब्द रखने के लिये अधिनियम की धारा 4 का संशोधन करने का प्रस्ताव है.

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Box Office पर इस हफ़्ते पड़ेगी Raid, जानिये कितना माल बरामद होगा

अजय देवगन ने रोमांटिक फिल्मों से अपना फिल्मी सफ़र शुरू किया था और फिर एक्शन, इमोशन से लेकर कॉमेडी में भी हाथ आजमाया। रियलिस्टिक फिल्मों में भी उनका खासा दखल रहा और अब वो बड़े परदे पर एक और सच्ची कहानी लेकर आ रहे हैं फिल्म रेड के जरिये।

‘नो वन किल्ड जेसिका और आमिर जैसी फिल्म बनाने वाले निर्देशक राजकुमार गुप्ता रेड (Raid) इसी हफ़्ते यानि 16 मार्च रिलीज़ हो रही है। फिल्म के नाम से ही तय है कि ये कहानी छापामारी की है। इस बार मामला आयकर विभाग से जुड़ा है और कहानी भी उसी इनकम टैक्स के रेड की है, जिसके बारे में सुनकर बड़े बड़े मालदार हिल जाते हैं। फिल्म रेड, 1981 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में हुई एक सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म में अजय इनकम टैक्स ऑफिसर बने हैं और उनकी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम है।

…ये कहानी है लखनऊ के इनकम टैक्स कमिश्नर शारदा प्रसाद पांडे की, जिसने साल 1981 में लखनऊ के बड़े उद्योगपति सरदार इंदर सिंह के यहां छापा मारा था। इस दौरान 420 करोड़ रूपये मूल्य के गहने और कैश की संपत्ति बरामद की गई। करीब 18 घंटे तक चली इस रेड में नोट गिनने के लिए 45 लोग लगे थे।…

फिल्म में इलियाना डिक्रूज़, अजय की पत्नी के किरदार में हैं और फिल्म सौरभ शुक्ला, अमित सयाल और पुष्पा जोशी का बड़ा रोल है। इस फिल्म की कहानी ‘पिंक’ जैसी बेहतरीन फिल्म के राइटर रितेश शाह ने लिखी है। फिल्म रेड में अजय का काफ़ी इंटेंस लुक दिख रहा है। अजय की पिछली फिल्म गोलमाल रिटर्न्स के फैन्स के लिए ये काफ़ी अलग फिल्म होगी लेकिन अजय देवगन को ऐसे किरदार बहुत सूट करते हैं ये सभी जानते हैं। करीब दो घंटे की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यू/ए सर्टिफिकेट के साथ पास किया है।

पाकिस्तान ने फिल्म रेड को अपने यहाँ रिलीज़ की हरी झंडी दे दी है।

जानकारी के मुताबिक रेड को दस करोड़ के प्रचार खर्च के साथ करीब 40 करोड़ रूपये में बनाया गया है और इसे देश भर में 2500 से अधिक स्क्रीन्स में रिलीज़ किया जाएगा। ट्रेड सर्किल के मुताबिक फिल्म को पहले दिन 10 से 12 करोड़ रूपये के कलेक्शन का अनुमान है। रेड के लिए सबसे ख़ास बात ये है कि इसके साथ इस हफ़्ते को भी आल इंडिया रिलीज़ नहीं है और अगले हफ़्ते भी रानी मुखर्जी की हिचकी को छोड़ कर कोई बड़ी फिल्म नहीं है। हां, सोनू के टीटू की स्वीटी का अच्छा बिज़नेस थोड़ा प्रभावित कर सकता है।

अजय देवगन की पिछले साल आई फिल्म गोलमाल अगेन ने पहले दिन 30 करोड़ 14 लाख रूपये का कलेक्शन किया था।

अजय देवगन-इलियाना डिक्रूज़ के कम्बीनेशन वाली बादशाहो ने पहले दिन 12 करोड़ 60 लाख रूपये का कलेक्शन किया था।

राजकुमार गुप्ता की नो वन किल्ड जेसिका को पहले दिन तीन करोड़ 25 लाख रूपये की कमाई हुई थी।

वैसे अजय देवगन, अक्षय कुमार की तरह सोशल रेस्पोंसिबिल्टी निभाने वाली फिल्मों की तरफ़ तो नहीं मुड़े हैं लेकिन सच्ची घटनाओं से जुड़े सस्पेंस और थ्रिलर में उनकी ख़ासी दिलचस्पी रही है।

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जीएसटी काउंसिल की 26वीं बैठक आज, हो सकते हैं ये 4 बड़े फैसले

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की आज 26वीं बैठक होनी है। इस अहम बैठक में रिटर्न प्रक्रिया को और आसान किए जाने समेत कई बड़े फैसलों पर आम सहमति बनने की संभावना है। हम अपनी इस खबर में उन्हीं बड़े फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर आज चर्चा हो सकती है।

GSTR-3B की डेडलाइन बढ़ सकती है: आज होने वाली अहम बैठक में पंजीकृत व्यवसायों के लिए रिटर्न फाइलिंग को और आसान किए जाने के लिए प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है। एक अधिकारी के मुताबिक, “नए रिटर्न फाइलिंग सिस्टम को अगर काउंसिल की ओर से सहमति मिलती है, तो इसके कार्यान्वित होने में लगभग 3 महीने का वक्त लग सकता है तब तक जीएसटीआर-3बी जारी रह सकता है।”जीएसटीआर 3बी फाइलिंग की डेडलाइन 31 मार्च 2018 है जिसे बढ़ाकर जून 2018 किया जा सकता है।

ई-वे बिल पर आ सकता है अहम फैसला: ई-वे बिल सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल है। ऐसा माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में वैट और एक्साइज के तर्ज पर प्रोविजनल इनपुट टैक्स क्रेडिट देने के विकल्प देने पर विचार करने के साथ ही ई-वे बिल की व्यवस्था को 1 अप्रैल से लागू होने को मंजूरी दी जा सकती है।

रिटर्न फाइलिंग को और आसान करने पर बन सकती है सहमति: केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल जिसमें अन्य राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियों के लिये सरल रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकती है। माना जा रहा है कि जीएसटी के तहत टैक्स रिटर्न भरने के लिए 3 की बजाय सिर्फ 1 ही फॉर्म भरने की व्यवस्था शुरू की जा सकती है।

ईएनए पर जीएसटी लगाने पर हो सकता है विचार: जीएसटी लागू होने के बाद परोक्ष कर संग्रह में अपेक्षानुरूप वृद्धि न होते देख सरकार अब खजाना भरने के लिए अतिरिक्त उपाय करने में जुट गयी है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्र शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रयास कर रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में शनिवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में ईएनए पर जीएसटी लगाने पर विचार किया जा सकता है। काउंसिल में अगर इस प्रस्ताव पर आम राय बनी तो ईएनए पर 18 फीसद की दर से जीएसटी लगाया जा सकता है।

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आयकर विभाग ने शाहरुख का घर किया सील, ये सितारे भी कर चुके हैं इस परेशानी का सामना

आयकर विभाग ने बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान का मुंबई स्थित अलीबाग में बने फार्म हाउस को सील कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शाहरुख़ पर आरोप है कि उन्होंने खेती की जमीन पर जालसाजी से एक फार्म हाउस बना लिया था। बताया जा रहा है कि आयकर विभाग ने इस मामले में शाहरुख को नोटिस भेजकर 90 दिन के भीतर जवाब मांगा है। अगर तय तारीख तक एक्टर जवाब नहीं देते हैं तो विभाग द्वारा उनपर कार्रवाई भी की जा सकती है। खैर, शाहरुख अकेले ऐसे बॉलीवुड सेलेब्रिटी नहीं हैं, जिनपर आयकर विभाग का रेड पड़ा है, इससे पहले ये सेलेब्रिटी भी इस परेशानी का सामना कर चुके हैं।

सलमान खान पर आय से अधिक संपत्ति का मामला 
बॉलीवुड के दबंग कहे जाने वाले सुपरस्टार सलमान खान भी एक बार आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंस चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2000 में आयकर विभाग ने सलमान के मुंबई स्थित पनवेल प्रॉपर्टी पर छापा मारा था, जिसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। उस दौरान विभाग ने सलमान के साथ उनके भाई अरबाज से भी इस मामले में पूछताछ की थी।

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प्रियंका चोपड़ा के घर विभाग का छापा 
बॉलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा भी आयकर मामले में फंस चुकी हैं। बताया जाता है कि प्रियंका के घर पर साल 2011 में आयकर विभाग ने छापा मारा था, जिसमें 7.5 करोड़ की बेनामी संपति बरामद हुई थी। इस मामले को लेकर प्रियंका और विभाग के बीच काफी दिनों तक विवाद चला था।

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कैटरीना के घर विभाग का छापा 
प्रियंका चोपड़ा के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ भी एक बार आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंस चुकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2011 में आयकर विभाग द्वारा कैटरीना के घर पर भी छापा मारा गया था। इस छापे में कई चीजें बरामद हुई, जिसको लेकर उनसे काफी सवाल जवाब किये गए, लेकिन उस समय उनके घर को सील नहीं किया गया।

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संजय दत्त के घर छापा 
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त भी आयकर मामले से बच नहीं पाए हैं। साल 2012 में आयकर विभाग ने संजय दत्त के मुंबई में बांद्रा स्थित घर पर छापा मारा था, जिसके बाद उनसे कुछ संपत्ति को लेकर पूछताछ भी की गई थी।

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माधुरी दीक्षित के घर छापा 
बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित के घर पर भी आयकर विभाग का छापा पड़ चुका है। बताया जाता है कि विभाग ने पैसे खोजने के लिए अभिनेत्री के निवास की दीवारों और फर्नीचर को भी तोड़ दिया था।

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