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ISIS चीफ बगदादी ने राहुल गांधी को शुक्रिया कहा। चाहता है राहुल से सहयोग। जानिए पूरा मामला!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जर्मनी के हैम्बर्ग में अपने भाषण के दौरान इराक में बेरोजगारी को खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के गठन की वजह बतलाया। उन्होंने इराक का उदाहरण देते हुए भारत सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ‘भारत सरकार की मौजूदा नीति में विकास की प्रक्रिया से आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को बाहर रखा जा रहा है, जिसके खतरनाक परिणाम होंगे।’ हैम्बर्ग में 23 देशों के प्रतिनिधियों के सामने कई विषयों पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने आगे कहा कि ’21वीं सदी में लोगों को बाहर रखना काफी खतरनाक है। अगर आप 21वीं सदी में लोगों को कोई विजन नहीं देते तो कोई और देगा और विकास प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखना असली खतरा है।’

बुधवार को अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने यहां जीएसटी, नोटबंदी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की थी। लेकिन अब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के बयान को लेकर मजाक उड़ाया जा रहा है। कई तरह के फनी मीम्स भी इसे लेकर शेयर किये जा रहे हैं। एक यूजर ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ‘आईएस चीफ अबु बकर अल बगदादी ने राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए उनसे कहा है कि वो सभी आईएसआईएस सदस्यों को अमेठी में रोजगार उपलब्ध कराएं।’

बहरहाल आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष के इस भाषण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिस प्रकार से आतंकवाद को सही ठहराने का प्रयास किया और आईएसआईएस के बारे में जो जस्टिफिकेशन दिया है उससे भयावह और चिंताजनक कुछ नहीं हो सकता है।

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पीएम मोदी ने पाकिस्तान को कहा आतंकवाद की फैक्ट्री, तो बचाव में उतरा चीन

चीन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस्लामाबाद को आंतकवाद का निर्यात करने वाली फैक्ट्री बाताए जाने वाले बयान पर पाकिस्तान का बचाव किया। चीन ने इस संबंध में कहा कि पाकिस्तान की आंतकवाद से लड़ने में मदद किए जाने की जरूरत है।

लंदन में पीएम मोदी ने पाक पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत आतंकवाद को निर्यात करने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। मोदी ने आगे कहा कि यहां आतंकवाद की फैक्ट्री लगा रही है और सीधे युद्ध में सामना न कर पाने की ताकत न होने के कारण पीठ पर वार करते हैं। ऐसी स्थिति में हमे पता है कि कैसे जबाव देना है। जाहिर तौर पर मोदी का इशारा पाकिस्तान की ओर था।

मोदी के इस बयान पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हु आ चुनयिंग ने कहा कि आतंकवाद सभी का दुश्मन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों को मिलकर आतंकवाद से लड़ने की जरूरत है। साथ ही सभी देशों को पाकिस्तान की आतंकवाद से लड़ने में मदद करनी चाहिए।

इस बयान के साथ चीन ने इशारा किया है कि शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन(एससीओ) में आतंकवाद भी एक बड़ा मुद्दा होगा। पिछले साल एससीओ में भारत और पाकिस्तान दोनों शामिल थे। एससीओ का वार्षिक सम्मेलन अब जून में चीन के किंगदाओ शहर में होना है।

विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन में आतंकवाद पर चर्चा के सवाल पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मेरा मानना है कि एससीओ का उद्देश आतंकवाद के मुद्दे पर साथ मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ना है।

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हाफिज सईद का राजनीतिक दल आतंकी संगठन घोषित; यूएस की कार्रवाई का स्वागत- भारत

अमेरिका ने मंगलवार को मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। यह मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राजनीतिक संगठन है। ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पाकिस्तान में एमएमएल को एक राजनैतिक दल के रूप में मान्यता देने की कवायद चल रही थी। वहीं, भारत ने अमेरिका की कार्रवाई का स्वागत किया है।

एमएमएल के 7 मेंबर भी आतंकी घोषित
– द यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही एमएमएल और तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर (टीएजेके) को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया गया।
– इनके अलावा एमएमएल के 7 सदस्यों को लश्कर के लिए काम करने की वजह से आतंकी घोषित किया गया है।

पाकिस्तान ने नहीं की प्रभावी कार्रवाई

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत यूएस की कार्रवाई का स्वागत करता है। मिल्ली मुस्लिम लीग लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। यह लीग आतंकी संगठन के लिए काम कर रही थी। अमेरिका की कार्रवाई भारत के दावे को पुख्ता करती है कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।”

हाफिज जारी कर चुका अपना घोषणापत्र
– हाफिज ने 23 मार्च को एमएमएल का घोषणा पत्र जारी कर दिया था। मिल्ली मुस्लिम लीग को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया था।

17 साल पहले लश्कर घोषित किया गया था आतंकी संगठन
– लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 के दशक में हुआ था। वह 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
– अमेरिका ने लश्कर को 26 दिसंबर 2001 में विदेशी और वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके मुखिया हाफिज सईद को भी वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था।

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ISIS के चंगुल से भागे भारतीय हरजीत मसीह की कहानी पर सुषमा ने उठाया पर्दा

इराक में बीते दिनों अगवा हुए 39 भारतीय लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी पुष्टि विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने मंगलवार को राज्‍यसभा में की। उन्‍होंने बताया कि 38 लोगों का डीएनए मैच हो गया है, जबकि 39वें का डीएनए 70 प्रतिशत तक मैच हो गया है। लाशों के ढेर में से भारतीयों के शवों को ढूंढा गया जिसके बाद उनके मारे जानें का पता चला। विदेश मंत्री ने बताया कि इन 39 भारतीयों के शवों को अमृतसर एयरपोर्ट लाया जाएगा। विदेश मंत्री ने बताया कि इनमें से 31 पंजाब के और चार हिमाचल प्रदेश के हैं। विदेश मंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के लोगों के प्रति संवेदना जताई। वहीं सुषमा ने बताया इनमें से एक भारतीय हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौट आया था लेकिन उसने जो कहानी सुनाई थी, वह झूठी थी।

सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा, जहां से उसने सुषमा स्वराज को फोन किया था। स्वराज ने कहा कि आईएसआईएस के आतंकियों ने एक कंपनी में काम कर रहे 40 भारतीयों को एक टेक्सटाइल कंपनी में भिजवाने को कहा था। उनके साथ कुछ बांग्लादेशी युवा भी थे। यहां पर उन्होंने बांग्लादेशियों और भारतीयों को अलग-अलग रखने को कहा लेकिन हरजीत मसीह ने अपने मालिक के संग जुगाड़ करके अपना नाम अली किया और बांग्लादेशियों वाले समूह में शामिल हो गया। यहां से वह इरबिल पहुंच गया। सुषमा ने बताया कि यह कहानी इसलिए भी सच्ची लगती है क्योंकि इरबिल के नाके से ही हरजीत मसीह ने उन्हें फोन किया था।

 

सुषमा ने आगे बताया, ‘हरजीत की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता।’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो।’

 

यह थी हरजीत मसीह की कहानी
मसीह ने बताया था कि किस तरह आईएस के आतंकी 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर किसी पहाड़ी पर ले गए थे। उसके मुताबिक, ‘आईएस के आतंकी हमें किसी पहाड़ी पर ले गए और हम सभी को किसी दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया। आतंकियों ने दो दिन तक हम सभी को अपने कब्जे में रखा।’

 

मसीह ने बताया, ‘एक रोज हम सभी को कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए। इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं। मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा। बाकी सभी लोग मारे गए।’ मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया।

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टेरर से जंग किसी धर्म के खिलाफ नहीं: मोदी

कट्टरपंथ और आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए पीएम मोदी ने गुरुवार को कहा कि आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई किसी पंथ के खिलाफ नहीं बल्कि युवाओं को गुमराह करने वाली मानसिकता के खिलाफ है।

पूरी खुशहाली, समग्र विकास तभी संभव है, जब मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में कुरान शरीफ हो और दूसरे हाथ में कंप्यूटर। मोदी ने यह बात एक सम्मेलन में कही, जिसमें जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय भी मौजूद थे।

शाह ने कहा कि कट्टरपंथ चिंता का विषय है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है।

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सुंजवान अटैक: PAK को इस हमले की कीमत चुकानी होगी, वहां बैठा अजहर मसूद है मास्टर माइंड- सीतारमण

सुंजवान आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि हमले का मास्टर माइंड पाकिस्तान बेस्ड जैश-ए-मोहम्मद का चीफ अजहर मसूद है,जिसे वहां पर सपोर्ट मिलता है। रक्षा मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, “सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। लेकिन, पाकिस्तान को सबूत देना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ये हर बार साबित हुआ है कि वे ही जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान को इस हरकत की कीमत चुकानी होगी।” रक्षामंत्री का ये सख्त वॉर्निंग मुफ्ती के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान से बातचीत करना चाहिए। सोमवार को सीतारमण ने मुफ्ती से भी मुलाकात की। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 3 दिन में दो आतंकी हमले हुए। पहला हमला शनिवार को जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप और दूसरा सोमवार को श्रीनगर के सीआरपीएफ कैंप पर हुआ। जिसमें 5 जवान शहीद हुए और एक सिविलियन की मौत हो गई। सीआरपीएफ कैंप हमले में एक जवान शहीद हो गया।

सुंजवान अटैक पर क्या बोलीं रक्षा मंत्री सीतारमण?

1) जैश-ए-मोहम्मद के थे आतंकी
– निर्मला सीतारमण ने कहा, “सुंजवान में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन सुबह 10.30 पर खत्म हो गया है। लेकिन, सेनिटेशन ऑपरेशन जारी है। आतंकियों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद से था, जिसे पाकिस्तान में बैठा अजहर मसूद ऑपरेट करता है और जिसे वहां से सपोर्ट मिलता है।”

2) आतंकियों को लोकल सपोर्ट की आशंका

“आतंकियों ने मिलिट्री स्टेशन को हमले के लिए चुना जहां इंडियन आर्मी के जवानों और उनकी फैमिली के घर थे। ये जगह इंटरनेशनल बॉर्डर से करीब 30 किलोमीटर दूर है। यहां काफी घनी आबादी है। कैंटोंमेंट की डेमोग्राफी और आसपास के इलाके से ये लगता है कि आतंकियों को लोकल सपोर्ट मिला।”

3) फैमिली क्वॉर्टर्स की ओर भागे आतंकी
– “इस हमले के मद्देनजर एक अलर्ट जारी हुआ। इसके बाद क्विक रिएक्शन टीमों को जरूरी जगहों पर तैनात किया गया। ऐसा महसूस हुआ कि पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड
टेरिरिस्ट सॉफ्ट टारगेट की ओर जाएंगे इसलिए QRT को सुंजवान की फैमिली एकोमडेशन में भी भेजा गया। आतंकियों की घुसपैठ को संतरी ने रोका और QRT ने भी तुरंत इसका जवाब दिया। दोनों के बीच भारी गोलीबारी हुई। इस फायरिंग के चलते आतंकियों को बिखरना पड़ा और वे कोऑर्डिनेटेड हमले नहीं कर पाए। इसके बाद आतंकी फैमिली क्वॉर्टर्स की तरफ भागे और कुछ ब्लॉक्स पर कब्जा कर लिया।”

4) 189 फ्लैट्स से फैमलीज को सुरक्षित निकाला
– “आतंकवादी सेना की वर्दी में थे और उनकी पहचान मुश्किल थी इसलिए ऑपरेशन को इस तरह से अंजाम दिया गया, ताकि मिस्टेकन आइडेंटिटी की वजह से किसी की जान पर जोखिम ना हो। ऑपरेशन के दौरान 26 ब्लॉक्स को सर्च किया गया और 189 फ्लैट्स से फैमिलीज को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसमें वक्त लगा और ये काफी चुनौतीभरा भी था।”

5) आतंकियों ने निहत्थे जवानों पर फायरिंग की
– “काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन के दौरान एक सिविलियन समेत 6 जवानों की जान गई। आतंकियों ने निहत्थे जवानों और उनकी फैमिली पर फायरिंग की। वे फैमिली क्वॉर्टर्स में जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहे थे।”

6) 4 में से 3 आतंकी मार गिराए
– “3 आतंकियों को सेना ने मार गिराया। इलाके में 4 टेररिस्ट होने की इन्फर्मेशन थी। हो सकता है कि चौथा आतंकी गाइड हो और वो कैम्प में ना घुसा हो।”

7) सीमा पार से हैंडलर्स आतंकियों को कंट्रोल कर रहे थे
– रक्षा मंत्री बोलीं, “जैश के जिस मॉड्यूल ने हमले को अंजाम दिया है, हो सकता है कि वो कुछ अरसा पहले भारत में दाखिल हुआ हो। इसकी भी संभावना है कि उन्हें ऑपरेशन से पहले लोकल सपोर्ट भी मिला हो। हमारे इंटेलिजेंस इनपुट इशारा करते हैं कि इन टेररिस्ट को सीमा पार बैठे हैंडलर्स कंट्रोल कर रहे थे। सबूतों की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी ने की, जो जल्द ही डिटेल रिपोर्ट देगी।”

8) घुसपैठ रोकने में कामयाबी मिली है
– “पाकिस्तान पीरपंजाल के दक्षिण में टेररिज्म को स्पॉन्सर कर रहा है और घुसपैठ के लिए सीजफायर वॉयलेशन कर रहा है। इन कोशिसों का माकूल जवाब दिया गया। लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ रोकने के लिए हमारे सिस्टम के जरिए बड़ी कामयाबी मिली है। सिक्युरिटी फोर्सेस की लगातार कोशिशों के चलते आतंकी गतिविधियों पर रोक लगी है। मौसम और बर्फबारी के चलते घुसपैठ को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता है, इसके लिए सरकार मॉडर्न तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। एडिशनल सेंसर्स, यूएवी और लॉन्ग रेंज सर्विलांस डिवाइसेस को लाइन ऑफ कंट्रोल को कवर करने के लिए लगाया गया है।’

9) जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा
– “आखिर में मैं अपने बहादुर जवानों की जान जाने पर और उनके परिवारों पर कायराना हमले के लिए शोक जाहिर करती हूं। मैं देश को ये भरोसा दिलाती हूं कि उनका बलिदान बेकार नहीं जाएगा। हम पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के जरिए देश में हिंसा फैलाने की हर कोशिश को रोकेंगे और जरूरी कदम उठाए जाएंगे।’

10) मुफ्ती के साथ हालात पर चर्चा की
– सीतारमण ने कहा, “मैं घायलों से मिलिट्री हॉस्पिटल में मुलाकात की। मैंने चीफ मिनिस्टर (महबूबा मुफ्ती) से भी मुलाकात की, उनके साथ मैंने विस्तार से हालात पर चर्चा की। उन्होंने इतने शॉर्ट नोटिस पर मुलाकात की, इसके लिए मैं उनकी शुक्रगुजार हूं।”

पांच शहीदों में दो सूबेदार, 1 हवलदार

– सूबेदार मदन लाल चौधरी
– सूबेदार मोहम्मद अशरफ मीर
– हवलदार हबीबुल्लाह कुरैशी
– नायक मंजूर अहमद
– लांस नायक मोहम्मद इकबाल
– लांस नायक मो. इकबाल के पिता (सिविलियन)

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ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान पर किया ड्रोन से हमला

पाकिस्तान की वित्तीय सहायता पर रोक के बाद अब अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ खुद ही कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिका ने बुधवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर ड्रोन से हमले कर हक्कानी नेटवर्क के 2 कमांडरों सहित 2 आतंकियों को ढेर कर दिया है। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसकी जमीन पर ड्रोन हमले उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है।

यह इलाका अफगानिस्तान सीमा से जुड़ा है। पाकिस्तानी अखबार डान के मुताबिक, बुधवार को स्पीन थाल क्षेत्र में एक मकान पर ड्रोन से दो मिसाइल दागे गए। इस हमले में हक्कानी नेटवर्क का कमांडर अहसान उर्फ खवारी और उसके दो साथी मारे गए। अमेरिकी जासूसी विमान के जरिये अफगान शरणार्थियों के घर को निशाना बनाकर ये हमले किए गए।

17 जनवरी को भी किया था ड्रोन अटैक

ओरकजाई एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क के ठिकानों पर हमले किए गए। इससे पहले 17 जनवरी को इस साल के पहले ड्रोन हमले में खुर्रम एजेंसी के बादशाह कोट इलाके में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। पिछले साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई अफगान नीति के बाद खुर्रम एजेंसी में ड्रोन हमलों में तेजी आई है। इस नीति में पाकिस्तान पर आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप भी लगाया गया है।  गौरतलब है कि 2016 में ऐसे हमले में तालिबान का शीर्ष आतंकी मुल्ला अख्तर मंसूर मार गया था।

ट्रंप ने कहा था झूठा और धोखेबाज देश है पाकिस्तान

नए साल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में साफ-साफ लिखा था, ‘अमेरिका मूर्खों की तरह पाकिस्तान को 15 सालों से सैन्य सहायता देता आ रहा है लेकिन इसके जवाब में उसे वापस धोखा और झूठ मिला है। 15 साल से अब तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है लेकिन हर बार हमें मूर्ख बनाया गया है। पाकिस्तान हमेशा से आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है।’

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा, राष्ट्रपति ने बिल्कुल सही कहा। पाकिस्तान ने 15 वर्षो में आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से 33 अरब डॉलर (दो लाख दस हजार करोड़ रुपये) लिये। लेकिन वास्तव में उसने आतंकियों को पाला-पोसा और पनाह दी। इन्हीं आतंकियों से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को लड़ना पड़ा। इससे पाकिस्तान का झूठा और धोखेबाज चरित्र सामने आया।

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पाकिस्तान पहुंची UN टीम, पर सईद ने भारत-US की कोशिशों के खिलाफ चला अपना दांव

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की टीम के पैर रखने से पहले अपना दांव चल दिया है. इस टीम के पाक दौरे की वजह से हाफिज सईद को अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा था. बुधवार दोपहर को यह टीम पाकिस्तान पहुंची, लेकिन तब तक हाफिज खुद को सुरक्षित कर चुका था.

जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ने इस टीम के दौरे की वजह से मंगलवार शाम को लाहौर हाई कोर्ट में अपील की कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. कोर्ट ने हाफिज सईद की अपील सुनने के बाद उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

सईद ने कहा था कि भारत और अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तानी सरकार उसे फिर से गिरफ्तार कर सकती है. हाफिज की शिकायत के बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी सरकार को हाफिज के खिलाफ कोई आशंकित कदम लेने से रोक दिया है.

जानकारी के मुताबिक यूएनएससी की 1267 सेंक्शंस कमेटी की निगरानी समिति बुधवार दोपहर को पाकिस्तान पहुंच गई. समिति यह देखने के लिए आई है कि पाकिस्तान यूएन के प्रतिबंधों को लागू कर रहा है या नहीं. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तानी सरकार यूएन की कमेटी को हाफिज सईद या उसके परिसरों तक नहीं जाने देगी.

इससे पहले, हाफिज ने मंगलवार शाम को ही हाफिज सईद ने अपने वकील एके डोगर के जरिए अदालत में याचिका देकर कहा था कि उसके या उसके संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए. उसने इस याचिका में अपने चैरिटी अस्पतालों और स्कूलों का भी हवाला दिया था.

आपको बता दें कि हाफिज सईद को पिछले साल नवंबर में ही नजरबंदी से रिहाई मिली है. इसके बाद से वह पाकिस्तानी राजनीति में आने की कोशिश में लगा है. उसने इसके लिए नई राजनीतिक पार्टी ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ भी बनाई है.

माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना हाफिज सईद के राजनीति में आने में उसकी मदद कर रही है. पिछले दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस ही नहीं है तो उस पर कैसे कार्रवाई करें.

हाफिज का नाम 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 में शामिल किया गया था. वहीं अमेरिका ने जून 2014 में लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन करार दिया था.

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शोपियां में गुस्साए ग्रामीणों ने पांच लाख के इनामी आतंकी शौकत अहमद फलाही को मारा डाला

कश्मीर के लोग अब न आतंकियों के फरमानों से डरते हैं और न ही उनके नापाक इरादों से। कश्मीरियों में आतंकियों के खिलाफ गुस्सा इतना अधिक है कि वे उनसे भिड़ने से नहीं घबराते। सोमवार देर शाम आतंकियों ने शोपियां में सत्ताधारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के हलका प्रधान व पूर्व सरपंच की उसके घर के बाहर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। इससे गुस्साए ग्रामीण और नेता के परिजन आतंकियों पर टूट पड़े और उन्होंने बी श्रेणी के पांच लाख के इनामी आतंकी शौकत अहमद फलाही को मारा डाला।

उसके दो अन्य साथियों को जान बचाकर भागना पड़ा। शौकत 25 अक्टूबर 2016 को आतंकी बना था। बीते 15 सालों मेंजम्मू-कश्मीर में यह तीसरा मौका है जब ग्रामीणों ने किसी आतंकी को मौत के घाट उतारा है। इससे पूर्व दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में बक्करवाल ने एक आतंकी को कुल्हाड़ी से काट डाला था। जम्मू संभाग के राजौरी जिले में भी एक बहादुर लड़की रुखसाना ने आतंकी को कुल्हाड़ी से काट डाला था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक डॉ. एसपी वैद ने भी ट्वीट कर इस घटना पर कहा कि तीन आतंकियों ने शोपियां में पूर्व सरपंच की हत्या कर दी। इस दौरान हुई हाथापाई में एक आतंकी भी मारा गया, लेकिन उन्होंने हाथापाई की प्रकृति या उसके कारणों का रहस्योद्घाटन नहीं किया है।

रात करीब आठ बजे स्वचालित हथियारों से लैस हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकी शोपियां जिले के जेनपोरा इमामसाहब के साथ सटे होमुन गांव में पहुंचे। आतंकी पीडीपी नेता मुहम्मद रमजान शेख (50) के घर में घुसकर उसे बाहर ले आए। पीडीपी नेता के परिजन भी घर के बाहर आ गए। इस बीच, आतंकियों ने पीडीपी नेता के साथ मारपीट शुरू कर दी और उन्होंने उस पर सुरक्षा बलों का मुखबिर होने का आरोप लगाया।

कुछ लोगों ने दावा किया है कि ग्रामीणों व पीडीपी नेता के परिजनों ने आतंकियों का प्रतिरोध किया और इस दौरान आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी, जिसमें पीडीपी नेता की जान चली गई। इससे गुस्साए ग्रामीण और परिजन आतंकियों के साथ भिड़ गए। इस दौरान एक ग्रामीण ने कथित तौर पर आतंकी शौकत से उसकी राइफल छीनकर उसके सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि ग्रामीणों के प्रतिरोध पर आतंकी शौकत ने भी अपने साथियों से कहा था कि वह पीडीपी नेता को मारने के बजाय उसकी टांगों में गोली मार उसे छोड़ दें। इस पर उसकी अपने साथियों के साथ बहस व धक्कामुक्की के दौरान चली गोली से वह मारा गया।

शोपियां के एसएसपी एसआर अंबरकर के अनुसार, आतंकियों व ग्रामीणों के बीच हुई धक्का-मुक्की में आतंकी शौकत मारा गया। उन्होंने बताया कि शौकत के अन्य दो साथियों को जिंदा अथवा मुर्दा पकड़ने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली गई है और तलाशी अभियान जारी है।