Posted on

4 लाख से कम कीमत में आती हैं ये टॉप 3 कारें

आज हम अपनी इस खबर में हैचबैक सेगमेंट की उन टॉप मॉडल कारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी कीमत 4 लाख रुपये से कम है।

1. रेनो क्विड

रेनो की एंट्री लेवल हैचबैक सेगमेंट कार क्विड की डिमांड काफी तेजी से बढ़ रही है। छोटी कारों में स्टाइलिश लुक और फीचर्स के मामले में क्विड को सबसे पहले गिना जाता है। रेनो क्विड चार अलग-अलग वेरिएंट में उपलब्ध है और इसके टॉप वेरिएंट को आप 4 लाख रुपये से कम कीमत पर खरीद सकते हैं, जिसमें सेफ्टी के तौर पर आपको साइड एयरबैग का विकल्प भी मिलेगा। इसकी कीमत 2.66 लाख से 3.82 लाख रुपए (एक्‍स शोरूम दि‍ल्‍ली) है। इसमें 799 cc का इंजन दिया गया है जो 54 PS की पावर जनरेट करता है। एक लीटर पेट्रोल में यह कार 25.17 किमी का माइलेज देती है।

फीचर्स के तौर पर कार में ड्राइवर एयरबैग ऑप्शन, मोनो टोन डैशबोर्ड, प्लेन डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, प्लेन साइड एयर वेंट, फ्लोर कनसोल के साथ दो कैन होल्डर्स, पार्किंग ब्रेक कंसोल, सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक पावर स्टियरिंग दिए गए हैं।

2. ऑल्टो 800

मारुति सुजुकी इंडिया की सबसे सस्ती और छोटी कार ऑल्टो 800 देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार है। इस कार के टॉप मॉडल को भी आप 4 लाख रुपये से कम कीमत में खरीद सकते हैं। इसकी कीमत 2.54 लाख से 3.81 लाख रुपये (एक्‍स शोरूम दि‍ल्ली) है। कार में 796cc का इंजन दिया गया है, जो 48 PS की पावर जनरेट करता है। एक लीटर पेट्रोल में यह कार 24.7 किमी का माइलेज देती है और एक किलोग्राम सीएनजी पर यह 33.44 किमी का माइलेज देती है।

फीचर्स की बात करें तो कार में फॉग लैंप, सीएनजी विकल्प, फैब्रि‍क आपहोलस्‍ट्री ऑन डोर पैनल, रीयर डोर चाइल्‍ड लॉक, रीमोट कीलेस एंट्री, डि‍जि‍टल क्‍लॉक (स्‍पीडोमीटर डि‍स्‍प्‍ले) दिए गए हैं।

3. डेटसन रेडी-गो

छोटी हैचबैक सेगमेंट में डेटसन रेडी-गो तेजी से पॉपुलर हो रही है। डैटसन की इस हैचबैक को कई वेरिएंट्स – रेडी गो स्मार्ट ड्राइव ऑटो, रेडी गो गोल्ड, रेडी-गो 1.0 लीटर और रेडी गो 0.8 लीटर में उतारा गया है। बाजार में इसकी कीमत 2.50 लाख से 4.05 लाख रुपये (एक्‍स शोरूम दि‍ल्ली) रखी गई है। कार में 799 सीसी का इंजन लगा है, जो 54 PS की पावर जनरेट करता है।

फीचर्स के तौर पर कार में डे लाइट रनिंग लैंप रेडियो, सीडी, एमपी3, यूएसबी और ऑक्स, इन फ्रंट पावर, माइलेज और डिस्टेंस टू एम्टी डिसप्ले, ब्लूटुथ ऑडियो सिस्टम, रिमोट कीलेस एंट्री दिए गए हैं।

Posted on

बदेशी भाषा बोलने वाले तीन आख़िरी इंसान

क्या आप उस भाषा के कुछ शब्द सीखना चाहेंगे जिसे बोलने वाले दुनिया में मात्र तीन ही लोग बचे हैं?

उत्तरी पाकिस्तान की पहाड़ियों में बर्फ से ढ़की दूर-दराज की एक घाटी में बदेशी भाषा बोली जाती है. लेकिन अब इस भाषा को लुप्त मान लिया गया है.

दुनिया की तमाम भाषाओं के बारे में जानकारी देने वाली एथनोलॉग के अनुसार बीते तीन या अधिक पीढ़ियों से इस भाषा को बोलने वाला कोई भी नहीं है.

लेकिन बिशीग्राम घाटी में हमने तीन ऐसे लोगों को खोजा है जो अब भी बदेशी भाषा में जानते हैं और इस भाषा में बात करते हैं.

 

वो भाषा जिसे सिर्फ़ तीन लोग जानते हैं

रहीम गुल को नहीं पता कि उनकी उम्र कितनी है. उनके चेहरे से लगता है कि वो करीब 70-75 साल के होंगे. वो कहते हैं, “अब से एक पीढ़ी पहले तक इस गांव के साभी लोग बदेशी भाषा में ही बात करते थे.”

“लेकिन फिर हमरी गांव में शादी कर के जो लड़कियां दूसरे गांव से आईं वो तोरवाली भाषा बोलती थीं. उनके बच्चों ने भी अपनी मातृभाषा तोरवाली भाषा में ही बात करना शुरु किया और इस कारण हमारी भाषा मरने लगी.”

इस इलाके में अधिकतर लोग तोरवाली भाषा का प्रयोग करते हैं जिसका खुद का अस्तित्व अधिक बोली जाने वाली पश्तो के कारण ख़तरे में है. लेकिन इस भाषा ने बदेशी को लुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया है.

 

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

रहीम गुल के दूर के भाई सईद गुल कहते हैं, “अब हमारे बच्चे और उनके बच्चे तोरवाली ही बोलते हैं. हम चाहें भी तो अपनी भाषा में किससे बात करें?”

सईद गुल को भी अपनी उम्र के बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं है. जब उन्होंने अपनी उम्र 40 बताई तो गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें टोका और कहा, “आप 80 साल के लगते हैं.” सईद गुल ने तुंरत पलट कर कहा, “नहीं, 50 का हो सकता हूं, 80 का तो बिल्कुल ही नहीं हूं.”

इस इलाके में युवाओं के लिए रोज़गार के मौक़े लगभग ना के बराबर हैं. इस कारण यहां से लोगों ने स्वात घाटी का रुख़ किया जहां वो पर्यटन का व्यवसाय करने लगे. यहीं पर उन्होंने पश्तो सीखी और अब ये लोग अधिकतर इसी भाषा में बात करते हैं.

वक्त के साथ-साथ बदेशी बोलने वले कम होते गए और इस तीन लोगों के लिए बदेशी में बात करने के मौक़े कम होते गए जिस कारण अब ये भी बदेशी भूलते जा रहे हैं.

 

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

आपस में बात करते वक्त रहीम गुल और सईद गुल कई शब्द भूल जाते थे और काफी सोचने के बाद कुछ शब्दों को याद कर पा रहे थे.

रहीम के एक बेटे हैं जिनके पांच बच्चे हैं और सभी तोरवाली में बात करते हैं. रहीम के बेटे कहते हैं, “मेरी मां तोरवाली बोलती थीं और मेरे माता-पिता घर में बदेशी में बात नहीं करते थे. मुझे बचपन से ही ये भाषा नहीं सीखने का मौक़ा नहीं मिला. मैं कुछ शब्द तो जानता हूं लेकिन पूरी भाषा नहीं जानता. मेरे सभी बच्चे तोरवाली में ही बात करते हैं.”

“मुझे इस बात का पछतावा है, लेकिन मैं अब 32 साल का हूं और अब बदेशी सीख सकूंगा ऐसा नहीं लगता. मुझे दुख होता है कि ये भाषा मेरे पिता के साथ ही खत्म हो जाएगी.”

ग़ैरसरकारी संस्था फोरम ऑफ़ लैग्वेज इनिशिएटिव पाकिस्तान में लुप्त हो रही भाषाओं को बचाने की कोशिश कर रही है.

इस संस्था के साथ काम करने वाले भाषाविद सागर ज़मान कहते हैं, “मैंने तीन बार इस घाटी का दौर किया है. लेकिन इस भाषा को जानने वाले इस भाषा में सामने बात करने से हिचकिचा रहे थे.”

“मैंने और अन्य भाषाविदों ने मिल कर इस भाषा के करीब 100 शब्दों को लिखा है. इन शब्दों से संकेत मिलता है कि ये भाषा इंडो-आर्यन भाषा परिवार से है.”

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

सागर ज़मान कहते हैं तोरवाली और पश्तो बोलने वाले बदेशी भाषा को अपमान की नज़र से देखते हैं और इसीलिए इसे बालने वालों के लिए ऐसा करने कलंक के समान माना जाता है.

ऐसा लगता है कि बदेशी भाषा को बचाने में अब बहुत देर कर दी गई है. लेकिन आप कम से कम इस भाषा को कुछ सीख सकते हैं और इस भाषा को आंशिक रूप से ही सही जिंदा रखने में मदद कर सकते हैं.

मीन नाओ रहीम गुल थी – मेरा नाम है रहीम गुल

मीन बदेशी जिबे आसा – मैं बदेशी भाषा बोलता हूं

थीन हाल खाले थी? – आप कैसे हैं?

मै ग्रोट खेतकी – मैंने खाना खा लिया है

ईशू काले हीम काम इकथी – इस साल कुछ ज़्यादा बर्फबारी नहीं हुई

Posted on

चारा घोटाले मामले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा

चारा घोटाला मामले में आज सीबीआइ की विशेष अदालत ने शाम चार बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए लालू यादव को सजा सुना दी। लालू को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई है। इस कारण से अब उन्‍हें जमानत के लिए हाईकोर्ट में जाना होगा।

वहीं अन्‍य अरोपी महेंद्र, राजाराम, सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार को भी साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख जुर्माना देना होगा। फूलचंद, महेश और बेक जूलियस को साढ़े तीन साल की कैद और 5 लाख जुर्माना देना होगा। सुनील गांधी, त्रिपुरारी, अजय अग्रवाल, गोपीनाथ को 7 साल की कैदी और 10 लाख जुर्माना देना होगा। जगदीश शर्मा को सात साल की सजा और 10 लाख का जुर्माना होगा।

मामला चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी का है जिसमें  रांची की सीबीआई कोर्ट आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव समेत 16 दोषियों की सजा पर फैसला आया।

चारा घोटाले में शुक्रवार को लालू प्रसाद यादव की सजा पर बहस पूरी हो गई थी और शनिवार को आखिरकार उन्हें सजा सुनाई दी गई। शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई पूरी हुई। इस मामले में लालू प्रसाद के वकील ने सीबीआई कोर्ट में अर्जी दाखिल करके कम सजा की मांग की थी।

छह दोषियों के खिलाफ सजा के बिंदु पर हुई सुनवाई 

देवघर कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित चारा घोटाले में 16 दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान की संभावनाओं के बीच कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा। हालांकि छह दोषियों के खिलाफ सजा के बिंदु पर सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में शनिवार को हुई और सुनवाई जल्द ही पूरी हो गई।

इसके पूर्व पिछले दो दिनों में दस अभियुक्तों के खिलाफ सजा के बिंदु पर सुनवाई हो चुकी थी। सुनवाई दो बजे से शुरु हुई और ढाई बजे खत्म भी हो गई। शनिवार की सुनवाई भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही हुई।

हालाकि कोर्ट परिसर में लगाई गई सुरक्षा व्यवस्था का देखकर अनुमान लगाया जा रहा था कि सभी दोषियों की उपस्थिति सशरीर अदालत में पेश किया जाएगा लेकिन इनकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई। वर्तमान में कोर्ट परिसर में कोतवाली डीएसपी भोला प्रसाद सिंह, थाना प्रभारी सी मंडल सहित पुलिस व आइआरबी के जवान तैनात रहे।

आज जिन अभियुक्तों के खिलाफ सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई, उसमें अधिसंख्य आपूर्तिकर्ता शामिल थे। राजनीतिक नेता और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सजा के बिंदु पर सुनवाई गुरुवार व शुक्रवार को हो चुकी है।

इन दोषियों के सजा के बिंदु पर हुई सुनवाई : 

1. त्रिपुरारी मोहन प्रसाद :  प्रोपराइटर मेसर्स बिहार सर्जिको मेडिको एजेंसी, एसके पुरी पटना

2. सुशील कुमार झा : मैनेजिंग पार्टनर मेसर्स श्री गौरी डिस्ट्रीब्यूटर हेड ऑफिस एमबीडी रोड, भागलपुर

3. सुनील कुमार सिन्हा : प्रोपराइटर मेसर्स श्री बाबा केमिकल वक्र्स श्री कृष्णापुरी पटना

4. संजय कुमार अग्रवाल :  प्रोपराइटर मेसर्स संजय कुमार, जिलानपाड़ा रोड, दुमका

5. सुनील गांधी : प्रोपराइटर, मेसर्स मगध डिस्ट्रीब्यूटर राजेंद्र नगर, पटना

6. सुबीर भट्टाचार्य,

बता दें कि लालू समेत 11 आरोपियों की सजा पर कल बहस पूरी हो चुकी है और पांच आरोपियों की सजा पर आज बहस होनी बाकी है इसलिए अदालत ने फैसला अगली सुनवाई तक टाल दिया था।

बता दें कि वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था और लगभग 21 साल बाद इस मामले में गत 23 दिसंबर को फैसला आया था और लालू सहित  कई अन्य दोषी करार दिए गए थे और वहीं जगन्नाथ मिश्रा बरी कर दिए गए थे।

Posted on

भ्रष्टाचार को लेकर चीन ने रोका CPEC परियोजनाओं का फंड, सदमे में पाकिस्तान

पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार का असर 50 अरब डॉलर वाली (32 हजार करोड़ रुपये ज्यादा) सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है। चीन ने बड़ा कदम उठाते हुए अस्थायी रूप से कम से कम तीन बड़े रोड प्रोजेक्ट के लिए फंड रोक दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस फैसले से उसके खास ‘दोस्त’ पाकिस्तान स्तब्ध है। सीपीईसी चीन की प्रमुख ओबीओआर (वन बेल्ट वन रो़ड) परियोजना का ही हिस्सा है।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पाकिस्तान नेशनल हाइवे अथॉरिटी की अरबों डॉलर की परियोजनाओं को तगड़ा झटका लगा है। इसके चलते कम से कम तीन परियोजनाओं में देरी की आशंका जताई जा रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चीन की ओर से नई गाइडलाइंस जारी होने के बाद फंड जारी किया जाएगा। ओबीओआर परियोजना पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से भी गुजरेगी। इस परियोजना के जरिए चीन का शिनजियांग इलाका पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से जुड़ेगा।

इन परियोजनाओं पर पड़ेगा असर

फंड रोके जाने का असर 210 किलोमीटर लंबी डेरा इस्माइल खान-झोब रोड पर पड़ेगा। इसमें लगभग 81 अरब रुपये की लागत का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट के तहत 66 अरब रुपये सड़क निर्माण और 15 अरब रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च होगा।

इसके अलावा 19.76 अरब रुपये की 110 किलोमीटर लंबी खुजदार-बसिमा रोड परियोजना पर भी इसका असर पड़ेगा। वहीं तीसरी परियोजना रायकोट से थाकोट के बीच काराकोरम हाइवे है। 136 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण पर करीब 8.5 अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है।

मूल रूप से ये तीनो प्रोजेक्ट पाकिस्तानी सरकार का हिस्सा थे। लेकिन, दिसंबर 2016 में एनएचए प्रवक्ता ने इन प्रोजेक्ट को सीपीईसी के तहत शामिल करने की घोषणा की थी जिससे इन्हें वित्तीय मदद मिल सके।