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यात्रा तुंगनाथ-चंद्रशिला: रोमांच से भरपूर हैं तृतीय केदार के दर्शन

तुंगनाथ बहुत ही जाना-माना मंदिर है। तुंगनाथ, पंच केदार ( केदारनाथ, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रूद्रनाथ और कल्पेश्वर) में से एक है और यह तीसरे स्थान पर आता है। ज्यादातर लोग सिर्फ केदारनाथ के बारे में ही जानते हैं लेकिन ये पांचों केदार भी उतना ही महत्व रखते हैं, जितना केदारनाथ। तुंगनाथ मंदिर से चंद्रशिला एक किलोमीटर दूर है, लेकिन चढ़ाई बहुत खड़ी है। कई बार तो लोग सिर्फ तुंगनाथ से ही वापस लौट जाते हैं। बर्फबारी की वजह से रास्ता और भी फिसलन वाला हो जाता है। चंद्रशिला पीक पर मां गंगा का मंदिर बना हुआ है और यहां से चारों तरफ बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां दिखाई देती हैं। यहां से नंदादेवी चोटी को साफ-साफ देखा जा सकता है।

कब और कैसे पहुंचे

मार्च से नवंबर तक यहां आने के लिए सही समय है। हालांकि आ तो कभी भी सकते है, लेकिन सर्दियों में बर्फ ज्यादा होने की वजह से रास्ता बंद हो जाता है, जिससे ट्रैकिंग बढ़ जाती है।

यहां पहुंचने के दो रास्ते हैं

1. ऋषिकेश से गोपेश्वर 212 किमी और गोपेश्वर से चोपता 40 किमी।

2. ऋषिकेश से ऊखीमठ 183 किमी और ऊखीमठ से चोपता 25 किमी। ऋषिकेश से गोपेश्वर के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है। इससे आगे बस व शेयरिंग जीप व प्राइवेट टैक्सी करके भी जाया जा सकता है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है जो देश के सभी हिस्सों से जुड़ा है। नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून में है।

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चेन्नई बनी आइपीएल 2018 की चैंपियन, तीसरी बार जीता खिताब

IPL 2018 के फाईनल मैच में मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में सीएसके ने सनराइजर्स हैदराबाद को 8 विकेट से हराकर आइपीएल 2018 का खिताब अपने नाम कर लिया। धौनी की कप्तानी में चेन्नई ने तीसरी बार आइपीएल खिताब पर कब्जा जमाया।

इससे पहले चेन्नई ने धौनी की कप्तानी में ही वर्ष 2010 और 2011 में लगातार दो बार आइपीएल खिताब पर कब्जा किया था। इसके सात वर्ष बाद एक बार फिर से धौनी ने अपना दम दिखाते हुए टीम को खिताब दिलाया। अब धौनी आइपीएल खिताब जीतने के मामले में रोहित शर्मा की बराबरी पर आ गए हैं जिन्होंने तीन बार मुंबई को खिताब दिलाया था। आइपीएल 2018 में जीत हासिल करने वाली टीम चेन्नई को 20 करोड़ रुपए पुरस्कार के तौर पर दिया गया जबकि रनर-अप रही टीम हैदराबाद को 12 करोड़ 50 लाख रुपए मिले।

फाइनल मैच में सीएसके के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने टॉस जीता और हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन को बल्लेबाजी का न्योता दिया। पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने कप्तान केन और यूसुफ पठान की अच्छी पारियों के दम पर 20 ओवर में 6 विकेट पर 178 रन बनाए। चेन्नई को जीत के लिए 179 रन बनाने थे और जीत के लिए मिले इस लक्ष्य को सीएसके ने शेन वॉटसन की नाबाद तूफानी शतकीय पारी के दम पर 18.3 ओवर में 2 विकेट पर हासिल कर लिया। चेन्नई ने 18.3 ओवर में 2 विकेट पर 181 रन बनाए।

शेन वॉटसन की तूफानी शतकीय पारी

आइपीएल 2018 के फाइनल मैच की दूसरी पारी में चेन्नई के ओपनर बल्लेबाज फॉफ डू प्लेसिस ने 11 गेंदों पर 10 रन बनाए और संदीप शर्मा की गेंद पर उन्हें ही कैच थमा बैठे। सुरेश रैना ने 24 गेंदों पर 32 रन की पारी खेली और वो ब्रेथवेट की गेंद पर विकेट के पीछे श्रीवत्स गोस्वामी के हाथों लपके गए। रैना ने वॉटसन के साथ दूसरे विकेट के लिए 117 रन की साझेदारी कर टीम के जीत की नींव रखी। शेन वॉटसन ने टीम के लिए 57 गेंदों पर 117 रन की नाबाद तूफानी शतकीय पारी खेली और टीम को जीत दिला दी। अंबाती रायडू 19 गेंदों पर 16 रन बनाकर नाबाद रहे।

हैदराबाद की तरफ से संदीप शर्मा और कार्लोस ब्रेथवेट को एक-एक सफलता मिली।

केन और पठान ने खेली तेज पारी

फाइनल मैच की पहली पारी में बल्लेबाजी के लिए उतरी हैदराबाद टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एसआरएच ने अपना पहला विकेट 13 रन के स्कोर पर गवां दिया। ओपनिंग बल्लेबाजी करने आए श्रीवत्स गोस्वामी 5 रन बनाकर रन आउट हो गए। करन शर्मा ने धौनी को थ्रो दिया और उन्होंने कोई गलती ना करते हुए विकेट उखाड़ दिया। शिखर धवन 25 गेंद पर 26 रन बनाकर अहम मौके पर आउट हो गए। रवींद्र जडेजा ने शिखर धवन को क्लीन बोल्ड कर दिया। धवन ने केन के साथ दूसरे विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की। केन विलियमसन ने 36 गेंदों पर 47 रन की बेहतरीन पारी खेली। केन को धौनी ने करन शर्मा की गेंद पर स्टंप आउट किया। केन ने तीसरे विकेट के लिए शाकिब के साथ 37 रन की साझेदारी की। शाकिब अल हसन ने 15 गेंदों पर 23 रन की पारी खेली। उन्हें डीजे ब्रावो ने सुरेश रैना के हाथों कैच आउट करवा दिया। दीपक हुडा 3 रन बनाकर कैच आउट हो गए। कार्लोस ब्रेथवेट ने 11 गेंदों पर 21 रन बनाए और शर्दुल ठाकुर की गेंद पर अंबाती रायडू के हाथों कैच आउट हुए। यूसुफ पठान 25 गेंद पर 45 रन बनाकर नाबाद रहे।

चेन्नई की तरफ से दीपक चाहर को छोड़कर सभी गेंदबाजों ने विकेट लिए। चेन्नई के गेंदबाज लुंगी नजीडी, शर्दुल ठाकुर, करन शर्मा, ड्वेन ब्रावो और रवींद्र जडेजा ने एक-एक विकेट लिए।

टॉस को लेकर हुआ ड्रामा

आइपीएल फाइनल से पहले टॉस को लेकर बड़ा ड्रामा देखने को मिला। सिक्का उछलने के बाद केन विलियसमन ने टेल कहा लेकिन हेड आने के बाद धौनी ने टॉस जीत लिया। इसके बाद जब एंकर के तौर पर वहां मैजूद संजय मांजरेकर ने धौनी से पूछा किया आप क्या करेंगे तो धौनी बार-बार केन की तरफ उंगली करके मजाक करने लगे और कहा कि उन्होंने टेल बोला है। धौनी के इस तरह बोलने से मांजरेकर भी परेशान हो गए लेकिन आखिरकार धौनी ने हंसते हुए इस मजाक का अंत किया और कहा कि वो टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करेंगे।

सातवीं बार चेन्नई ने खेला फाइनल

चेन्नई की टीम ने सातवीं बार आइपीएल फाइनल खेला और तीसरी बार उन्होंने खिताब जीता। सनराइजर्स हैदाराबाद की बात करें तो ये टीम एक बार आइपीएल का खिताब डेविड वार्नर की कप्तानी में जीत चुका है और केन विलियमसन की कप्तानी में दूसरी बार इस खिताब को जीतने की दहलीज पर थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

धौनी के अनुभव के सामने नहीं टिके केन

इस आइपीएल में इन दोनों टीमों के बीच चार बार मैच खेला गया और हर बार चेन्नई को ही जीत मिली। लीग मुकाबले में पहले चेन्नई ने हैदराबाद को दोनों बार हराया। इसके बाद मुंबई में ही पहले क्वालीफायर में चेन्नई ने हैदराबाद को हराकर फाइनल में सीधे जगह बनाई और इसके बाद फाइनल में फिर से चेन्नई के हाथों हैदराबाद को हार झेलनी पड़ी और दूसरी बार खिताब जीतने का सपना टूट गया।

बॉलीवुड स्टार्स के साथ कमेंट्री भी रही काफी दिलचस्प

इस मैच में कमेंट्री के द्वारा दर्शकों का दिल लुभाने के लिए कई बॉलीवुड स्टार्स भी कॉमेंट्री बॉक्स में दिखाई दिए। जहां एक और बॉबी देओल ने काफी समय बाद ऑन स्क्रीन शेयर की वहीं सलमान खान और अनिल कपूर की दिलचस्प बातों से फाइनल का अंत भी अत्यंत रोमांचकहो गया।

इन खिलाड़ियों को मिले ये अवॉर्ड

दिल्ली के बल्लेबाज रिषभ पंत को इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन का खिताब दिया गया। ट्रेंट बोल्ट को परफेक्ट कैच ऑफ दी सीजन चुना गया जबकि सुनील नरेन सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन रहे। रिषभ पंत स्टाइलिश प्लेयर ऑफ द सीजन रहे। सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले एंड्रयू टे (24 विकेट) को पर्पल कैप सौंपा गया जबकि सबसे केन विलियमसन ने सबसे ज्यादा रन बनाए और वो औरेंज कैप विनर रहे।

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एबी डिविलियर्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, इनके नाम दर्ज़ है ये विश्व रिकॉर्ड

डिविलियर्स ने द. अफ्रीका के लिए 114 टेस्ट 228 वनडे और 78 टी 20 मैच खेले हैं। 114 टेस्ट मैचों में 8765 रन बनाए हैं जिसमें 22 शतक और 46 अर्धशतक बनाए हैं। वे एक बेहतरीन बल्लेबाज के साथ ही एक शानदार विकेट कीपर भी रह चुके हैं।

एक वीडियो संदेश में कहा कि वे दक्षिण अफ्रीका और दुनियाभर में अपने फैंस के शुक्रगुजार हैं। एबी ने कहा अब समय आ गया है जब दूसरे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाए। ईमानदारी से कहूं तो मैं अब थक गया हूं। ये एक मुश्किल निर्णय है और मैने ये फैसला काफी सोच समझकर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि  मैं अपने संन्यास का एलान बेहतरीन क्रिकेट खेलते हुए करना चाहता था। हालांकि वे घरेलू क्रिकेट के लिए उपलब्ध रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक लगाने का रिकॉर्ड भी ए बी डिविलियर्स के नाम ही है। ये कमाल उन्होंने 18 जनवरी 2015 को वेस्टइंडीज के खिलाफ महज 31 गेंदों में शतक लगाकर किया था। डीविलियर्स ने कोरी एंडरसन के 36 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर ये रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 16 छक्कों और 9 चौके की मदद से वनडे का यह कीर्तिमान बनाया। उन्होंने इस मैच में कुल 149 रन बनाए थे।

एबी डीविलियर्स के नाम 31 गेंदों में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड तो है ही इसके अलावा सबसे तेज 150 रनों का रिकॉर्ड भी डीविलियर्स के ही नाम पर है। साल 2015 विश्व कप में डीविलियर्स ने सिडनी के मैदान पर 64 गेंदों में 150 रन ठोककर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था। उन्होंने इस दौरान नाबाद 66 गेंदों में 162 रन बनाए थे जिसमें 17 चौके और 8 छक्के शामिल थे।

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आखिर ऐसा क्या हुआ जिसे याद कर आज भी कपिल शर्मा की आंखों से निकल जाते हैं आंसू, जानें

टेलीविजन किंग कॉमेडियन कपिल शर्मा ने फिर से छोटे पर्दे पर वापसी कर ली है. कपिल शर्मा ने सोनी टीवी पर फैमिली टाइम विद कपिल से कमबैक किया है. यूं तो कपिल शर्मा का नाम सुनते ही सभी के चेहरों पर मुस्कराहाट छा जाती है लेकिन पिछले कुछ समय से कपिल शर्मा का विवादों से चोली दामन का साथ सा बन गया था. आगे जानिए कॉमेडियन कपिल शर्मा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

आपको बताते हैं आखिर देश का सबसे बड़े कॉमेडियन कैसे बने कपिल शर्मा. कपिल शर्मा का सफर शुरू हुआ अमृतसर से. कपिल शर्मा का जन्म पंजाब के अमृतसर में 2 अप्रैल 1981 को हुआ था. कपिल के पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कांस्टेबल थे और मां जनक रानी एक हाउसवाइफ हैं. कपिल का बचपन अमृतसर की पुलिस कॉलोनी में बीता. यही वजह है कि कपिल अपने करियर की शुरुआत में अक्सर शमशेर सिंह नाम के पुलिसवाले के किरदार में नजर आते थे. कपिल ने अपनी पढ़ाई अमृतसर के हिंदू कॉलेज से की है लेकिन कपिल की जिंदगी इतनी आसान नहीं थी. जब कपिल दसवीं क्लास मे पढ़ रहे थे तो उन्होंने अपनी पॉकेट मनी के लिए अमृतसर के एक टेलीफोन बूथ में भी काम किया था.

कपिल ने एक इंटरव्यू मे बताया कि उन्होंने चंद पैसों के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के क्रेट्स तक उठाए हैं. साथ ही कपिल ने अपने कॉलेज में पढ़ाई करने के साथ साथ ऑर्ट ऑफ परफॉर्मेंस की क्लासेज भी देनी शुरू कर दी यानि अपने ही कॉलेज में कपिल स्टूडेंट भी थे और टीचर भी. कपिल की जिंदगी का एक अहम हिस्सा थियेटर करते हुए भी गुजरा. कपिल जिंदगी में स्ट्रगल कर रहे थे. वो सबको हंसाना चाहते थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब कपिल की आंखों में आ गए थे आंसू और आज भी उन बातों को याद कर भावुक हो जाते हैं कपिल. दरअसल, कैंसर से पीड़ित पिता का साया उनके सिर से 2004 में उठ गया तो वहीं दूसरी और परिवार को एक वक्त खाने कि दिक्कत देखनी पड़ी पर कपिल ने कभी हार नहीं मानी.

कपिल बड़े कॉमेडियन बनना चाहते थे लेकिन किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद कपिल को लगा कि उनकी जिंदगी बदल जाएगी. साल 2007 में कपिल को स्टार टीवी के कॉमेडी शो ‘ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज 3’ में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया लेकिन किस्मत ने यहां कपिल का साथ नहीं दिया और वो शो में सेलेक्ट नहीं हुए. कपिल को तो शो में नहीं लिया गया लेकिन कपिल के दोस्त चंदन प्रभाकर को सेलेक्ट कर लिया. चंदन प्रभाकर इन दिनों कपिल के शो में उनके नौकर राजू का किरदार निभाते हैं.

इस रिजेक्शन के बाद जैसे कपिल का दिल टूट गया. लेकिन किस्मत को अभी एक और करवट लेनी थी. कपिल को इस शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली और उसके बाद तो कपिल ने अपनी कॉमेडी का खूब जादू चलाया और ये शो जीत गए. कपिल शर्मा ने जब लाफ्टर चैलेंज जीता तो उन्हें 10 लाख रुपए का इनाम मिला. उस वक्त कपिल को अपनी बहन की सगाई करनी थी और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे. लेकिन जब ये दस लाख रुपए हाथ आए तो कपिल ने सबसे पहले अपनी बहन की ही ये बात बताई और फिर कपिल ने अपनी बहन की शादी धूमधाम से की.

लॉफ्टर चैलेज जीतने के बाद कपिल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इसके बाद कपिल सोनी टीवी के शो कॉमेडी सर्कस में नजर आए जहां कपिल ने अलग अलग किरादरों के जरिए दर्शकों को खूब हंसाया. कलर्स टीवी ने साल 2013 में कपिल के साथ एक नया शो शुरू किया जिसका नाम था कॉमेडी नाइट्स विद कपिल. ये शो कपिल के नाम से शुरू किया. कपिल ने इस शो से एक नई तरह की कॉमेडी की शुरुआत की. दर्शकों ने इस शो को खूब पसंद किया और देखते ही देखते कपिल ने कामयाबी का एक नया इतिहास रच दिया. कपिल के शो की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड का हर बड़ा कलाकार अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कपिल के शो में आता था.

कपिल शर्मा टेलीविजन तक ही सीमित नहीं रहे. साल 2015 में कपिल को अबास-मस्तान की फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ में काम किया. कपिल की इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद तो किया लेकिन फिल्म समीक्षकों ने यही कहा कि ये फिल्म कपिल के टीवी शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल जैसी ही है. कपिल की कामयाबी और उनकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति सीजन 8 के पहले एपिसोड में कपिल को बतौर गेस्ट बुलाया.

कपिल को करण जौहर भी अपने शो ‘कॉफी विद करण’ में बुला चुके हैं. जबकि कपिल बहुत अच्छी इंग्लिश नहीं बोल पाते और करण का शो अंग्रेजी भाषा का शो है लेकिन ये कपिल की पॉपुलैरिटी ही है कि करण को उन्हें अपने शो में बुलाना पड़ा.

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जब एक पार्सल बन गया था ऐश्वर्या राय बच्चन के लिए मुसीबत, जानिए वजह

बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हालांकि, एक बार ऐश्वर्या राय के लिए विदेश से आया एक पार्सल मुसीबत बन गया था। साल 2016 में बैलार्ड पोस्ट ऑफिस में 16 किलोग्राम का एक पार्सल नीदरलैंड से आया था। पार्सल पर अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन के घर का पता लिखा था। खास बात यह है कि पार्सल पर कस्टम विभाग की मुहर थी। हालांकि, एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय को विभाग की ओर से एक लेटर भी भेजा गया, जिसमें लिखा था कि पार्सल खुलने के समय आपका कस्टम ऑफिस में उपस्थित होना अनिवार्य है।

उस समय ऐश्वर्या राय बच्चन फिल्म ‘जोधा-अकबर’ की शूटिंग में बिजी थीं। फिल्म की शूटिंग जयपुर में हो रही थी। हालांकि, कस्टम विभाग के अधिकारियों ने ऐश्वर्या राय की गैर मौजूदगी में यह पार्सल खोला तो वे हैरान रह गए, क्योंकि पार्सल में कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैजेट्स थे, इसके साथ ही एक शर्ट में विदेशी मुद्रा (यूरो) भी थी। उस समय उस विदेशी मुद्रा की कीमत भारत में करीब 13 लाख रुपए थी। इतनी विदेशी मुद्रा मिलने के कारण कस्टम विभाग ने ऐश्वर्या राय को सफाई देने का नोटिस जारी कर दिया। एक्ट्रेस के वकील गिरीश कुलकर्णी ने बताया कि पार्सल भेजने वाले का नाम है अविनिश्नर, हालांकि ऐश्वर्या पार्सल भेजने वाले को नहीं जानती हैं, वह यह भी नहीं जानती हैं कि पार्सल क्यों भेजा गया है।

 

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इसके बाद ऐश्वर्या राय अपनी मां और वकील के साथ कस्टम अधिकारियों से मिलीं। ऐश्वर्या राय ने सफाई दी कि आईफा अवॉर्ड के लिए वह नीदरलैंड गई जरूर थीं, लेकिन वह पार्सल भेजने वाले को नहीं जानती हैं और न ही उस शख्स से उनका कोई लेना-देना है। ऐश्वर्या राय की सफाई सुनने के बाद कस्टम विभाग के अधिकारियों को उनकी बात पर विश्वास हुआ और उन्होंने अभिनेत्री को क्लीन चिट दे दी थी।

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डेटा लीक: भारत-ब्राजील में चुनाव को देखते हुए अपने सिक्युरिटी फीचर्स में इजाफा करेगा फेसबुक: जुकरबर्ग

डाटा लीक मामला सामने आने के बाद फेसबुक अब भारत-ब्राजील में आगामी चुनावों के मद्देनजर सिक्युरिटी फीचर्स को और सख्त करने जा रहा है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने गुरुवार को इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए फेसबुक के सिक्युरिटी फीचर्स में और इजाफा किया जाएगा। इससे पहले जुकरबर्ग ने कहा था कि यूजर्स की डाटा सीक्रेसी को लेकर मेरी कंपनी ने गलती की है। किसी के पर्सनल डाटा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया ने दावा किया है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा का यूएस इलेक्शन में गलत इस्तेमाल किया था।

आर्टीफिशियल टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है फेसबुक
– जुकरबर्ग ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि इलेक्शन के दौरान न्यूज में हेरफेर (मैनुपुलेट) करने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले फेक अकाउंट का पता लगाने के लिए फेसबुक आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। ये टूल पहली बार फ्रेंच इलेक्शन में इस्तेमाल किए गए थे।

– “इन नए टूल्स को 2016 में 30,000 से ज्यादा फेक अकाउंट मिलने के बाद बनाया गया था। हमारा मानना है कि इन सभी का रशियन कनेक्शन था। इन्होंने उसी तरह की टैक्टिक्स अपनाने की कोशिश की थी, जो 2016 इलेक्शन में यूएस में अपनाई गई थींं। हम इन्हें बंद करने में कामयाब रहे। उधर, फ्रांस इलेक्शन में ऐसा होने से हमने बड़े स्तर पर रोका भी।”

2017 में भी हमने ऐसा ही किया?
– “पिछले साल अलबामा के विशेष चुनाव के दौरान हमने कुछ नए एआई टूल्स फेक अकाउंट और झूठी खबरों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया था। हमें बड़ी तादाद में मैसेडोनियन अकाउंट्स भी मिले थे, जो झूठी खबरें फैलाने की कोशिश कर रहे थे। हमने इन्हें हटा दिया था।”

भारत में चुनाव हमारे लिए अहम
– बकौल जुकरबर्ग, “हम 2018 में अमेरिका में होने वाले चुनावों पर ही नजर नहीं रख रहे। भारत समेत अन्य जगहों पर भी इस साल होने वाले आम चुनाव हमारे लिए अहमियत रखते हैं। रूस जैसे देशों के दखल को रोकने के लिए फेसबुक को कड़ी मशक्कत करनी होगी। हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि फेक न्यूज न फैलाई जाए। ये साल काफी अहम है। ब्राजील में भी चुनाव होने हैं। दुनियाभर में कई जगह इलेक्शन हैं। हम हर चीज के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भरोसा दिलाते हैं कि फेसबुक की सुरक्षा कायम रहेगी ताकि चुनावों की विश्वसनीयता बनी रहे।”
– सीएनएन को दिए इंटरव्यू में जुकरबर्ग ने आशंका जताई थी कि कोई 2018 में अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन में दखलअंदाजी कर सकता है।

जुकरबर्ग ने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा?

– “मैंने फेसबुक शुरू किया था। इस प्लेटफॉर्म पर जो होता है, उसके लिए अंत में मैं ही जिम्मेदार हूं। डाटा लीक रोकने के लिए मैं काफी गंभीर हूं। अपने यूजर्स का डाटा लीक होने से रोकने के लिए फेसबुक ही जिम्मेदार है। लेकिन हम इसमें नाकाम रहे। हम आपको सेवाएं देने के लिए लायक नहीं हैं। अब हमारी कंपनी को बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमने गलती की है। हम जरूरी कदम उठाएंगे। और हम ऐसा कर रहे हैं।”

5 प्वाइंट में समझिए क्या हैं ये मामला?

2016: ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव जीतने से शुरुआत
– आरोप लगा कि ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जिताने के लिए रूसी दखल था। हिलेरी की रणनीतियां हैक करके ट्रम्प को भेजी गईं। सोशल मीडिया डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ। एफबीआई ने रूस के 13 लोगों और तीन कंपनियों पर आरोप तय किए हैं।

17 मार्च 2018: अमेरिकी-ब्रिटिश मीडिया में खुलासा
– गार्डियन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापा कि ट्रम्प के कैंपेन से जुड़ी ब्रिटिश फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने 2014 में 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हासिल किया था। फेसबुक को इसका पता था, पर यूजर्स को सतर्क नहीं किया गया।

18 मार्च 2018: वादा नहीं निभाया एनालिटिका ने
– फेसबुक ने एनालिटिका को अपने प्लेटफॉर्म से सस्पेंड कर दिया। साथ ही सफाई दी कि 2015 में ही उसका एप बैन कर दिया था। एनालिटिका ने सारा डेटा डिलिट करने का भरोसा दिया था, पर अब पता चला कि उसने ऐसा नहीं किया।

19 मार्च 2018: सीईओ का स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा
– ब्रिटिश चैनल 4 ने एनालिटिका के सीईओ एलेग्जेंडर निक्स का स्टिंग किया। उन्होंने माना कि क्लाइंट को जिताने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं। डेटा पर काम करने के चलते ट्रम्प को बड़ी जीत हासिल हुई।

आखिर डेटा का गलत इस्तेमाल होता कैसे है…
– एनालिटिका के सीईओ ने बताया कि कंपनी फेसबुक यूजर्स के साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के साथ अपने क्लाइंट के समर्थन में और विरोधी के खिलाफ सूचनाएं प्लांट करती है। इससे जनमत बदलता है।

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ब्लूमबर्ग मीडिया का दावा: 2019 छोड़िए जनाब, 2029 तक पीएम रहेंगे नरेंद्र मोदी

यूपी उपचुनाव के नतीजों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है क्योंकि उसे हराने के लिए उसके सारे विरोधी एक जुट हो गए। जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के सारे विरोधी एक साथ होकर चुनाव लड़ेंगे, जिससे कि नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने से रोका जाए। लेकिन इसी बीच भाजपा के लिए एक सुखद खबर आई है, जिसने उसे मुस्कुराने का मौका दे दिया है।

ब्लूमबर्ग मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी केवल 2019 ही नहीं बल्कि 2029 तक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। पीएम मोदी भारत देश में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं ब्लूमबर्ग मीडिया समूह ने दुनिया के 16 देशों के नेताओं का एक आकलन किया है, जिसके बाद उसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पीएम मोदी भारत देश में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं। उनके प्रशंसक एक 10 साल का बच्चा भी है तो वहीं 90 साल के बुजुर्ग भी उन्हें पसंद करते हैं। Loading ad मोदी को लोग पसंद करते हैं ये ही उनकी ताकत है, भाजपा को लोग पसंद करे ना करें लेकिन मोदी को लोग पसंद करते हैं और उनकी बातों पर भरोसा करते हैं , जिसके कारण लोग उन्हें देश के कल्याण के लिए एक और मौका दे सकते हैं। मोदी की 2029 तक पीएम बने रहने की प्रबल संभावना और अगर ऐसा हुआ तो 2019 में भी उनके नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी, यहीं नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी की 2029 तक पीएम बने रहने की प्रबल संभावना है। उनके समक्ष अभी देश में कोई दमदार नेता नहीं है , जिसका फायदा निश्चित तौर पर नरेंद्र मोदी को मिलेगा ।

डोनाल्ड ट्रंप से नाराज है लोग पीएम मोदी के अलावा रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के तानाशाह किंग किम जोंग, सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को भी कहा गया है कि ये भी अपने देश की सत्ता लंबे वक्त तक संभाल सकते हैं, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में रिपोर्ट कहती है कि ये जनता के बीच खासे लोकप्रिय नहीं है इसलिए हो सकता है कि ये उनका पहला और आखिरी कार्यकाल हो, संभव है कि वो अपना कार्यकाल भी पूरा ना कर पाए।

व्लादिमिर पुतिन जबकि रूस में राष्ट्रपति चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाले व्लादिमिर पुतिन को 2024 में पद त्यागना पड़ सकता है। जबकि नेतन्याहू के बारे में रिपोर्ट कहती है कि उनका नाम घोटलों में शामिल है। अगर वे इसमें दोषी पाए गए तो उनकी सत्ता हाथ से जा सकती है। जबकि ब्लूमबर्ग मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जापान के पीएम शिंजो आबे भी कई आरोपों के घेरे में हैं, ऐसे में उनकी सत्ता में वापसी मुश्किल दिख रही है।

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‘बहुत ज़्यादा सवाल करते थे स्टीफ़न हॉकिंग’

दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में स्टीफ़न हॉकिंग के साथ पढ़ाई की थी.

इसके बाद साइंस से संबंधित कई ग्लोबल सम्मेलनों में दोनों की मुलाक़ात होती रही. डॉक्टर नारलीकर के अनुसार, कॉलेज के दिनों में वो स्टीफ़न हॉकिंग के साथ टेबल टेनिस के मैच भी खेल चुके हैं.

कॉलेज की उन यादों पर डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने बीबीसी से बात की. पढ़िए, उन्होंने क्या-क्या बताया:

स्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर
Image captionस्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर

मैं और स्टीफ़न हॉकिंग कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे. वो मुझसे साल दो साल जूनियर ही थे. वो बाक़ी आम स्टूडेंट्स की तरह ही थे. उस वक़्त कोई उनकी प्रतिभा के बारे में नहीं जानता था.

लेकिन कुछ सालों के भीतर ही लोगों को ये अंदाज़ा हो गया था कि स्टीफ़न में कुछ ख़ास बात है.

मुझे याद है कि ब्रिटेन की रॉयल ग्रीनविच शोध विद्यालय ने साल 1961 में एक साइंस सम्मेलन आयोजित किया था. वहां स्टीफ़न हॉकिंग से पहली बार मेरी सीधी मुलाक़ात हुई थी.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटJIM WATSON/GETTY IMAGES

उस वक़्त वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. मैं एक छात्र ही था, लेकिन मुझे वहां एक लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था.

लेक्चर शुरू होने के कुछ देर बाद ही मैंने पाया कि एक स्टूडेंट है जो बहुत ज़्यादा सवाल कर रहा है. वो थे स्टीफ़न हॉकिंग.

उन्होंने मानो मुझपर सवालों की बौछार कर दी थी. वो ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में जानना चाहते थे. वो जानना चाहते थे कि बिग बैंग थियोरी है क्या?

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मैंने उनके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश की. लेकिन ब्रह्मांड से जुड़े उनके सवाल पैने होते चले गए. वो वाक़ई इस विषय पर गंभीर थे.

बहरहाल, सम्मेलन ख़त्म होने के बाद हम दोनों ने टेबल टेनिस खेला. हमारे बीच दो मैच हुए और दोनों ही मैच मैं जीता!

स्टीफ़न पीएचडी करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे. उस वक़्त तक लोगों को समझ आ चुका था कि हॉकिंग के मस्तिष्क की क्षमता कितनी है.

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सच कहूं तो पहली बार मुझे लगा था कि स्टीफ़न हॉकिंग सिर्फ़ ज़्यादा सवाल करते हैं. उन्हें उनके जवाबों से कोई लेनादेना नहीं.

लेकिन उनकी पीएचडी की थीसिस पढ़कर सब हैरान रह गए थे. क्योंकि अपनी थीसिस में ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में उन्होंने कई बेहद दिलचस्प बातें लिखी थीं.

उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफ़ेसर क़रीब 30 साल काम किया. ब्लैक होल पर उनकी रिसर्च को सबसे ज़्यादा पहचान मिली.

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साइंस की दुनिया के हिसाब के कहूं तो ब्लैक होल के नियमों को स्टीफ़न ने ही स्थापित किया.

स्टीफ़न की सबसे अच्छी बात थी कि वो डायलॉग में विश्वास करते थे. बहस करना उनकी आदत में शामिल नहीं था.

कैम्ब्रिज में उनके साथ मैंने विज्ञान के कई सिद्धांतों पर कई बार चर्चा की. लेकिन कभी हमारे बीच गर्म बहस नहीं हुई. हमने हमेशा एक दूसरे से सीखा ही.

अपनी बीमारी की वजह से बीते कई सालों से स्टीफ़न लेक्चर नहीं दे पा रहे थे. लेकिन लोगों की जिज्ञासाओं और उनके सवालों के जवाब वो कई माध्यमों से देते रहे.

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मुझे याद है जब पहली बार स्टीफ़न ने कहा था कि दुनिया किसी ईश्वर के इशारे पर नहीं चलती. भगवान कुछ नहीं है. और संभावना है कि इस विश्व के अलावा भी कोई दुनिया हो.

लोगों को हमेशा ये उनकी कल्पना ही लगी. स्टीफ़न के पास भी इसे साबित करने के लिए कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. लेकिन उन्होंने मरते दम तक इसे साबित करने की कोशिश की और उनकी इस ललक का सम्मान किया जाना चाहिए.

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Stephen Hawking dies aged 76

The British physicist was known for his work with black holes and relativity, and wrote several popular science books including A Brief History of Time.

At the age of 22 Stephen Hawking was given only a few years to live after being diagnosed with a rare form of motor neurone disease. The illness left him wheelchair-bound and largely unable to speak except through a voice

synthesizer.

His family said that he died peacefully in his home near Cambridge University, where he did much of his ground-breaking work on black holes.

“We are deeply saddened that our beloved father passed away today,” a family statement said.

In the statement his children, Lucy, Robert and Tim said: “He was a great scientist and an extraordinary man whose work and legacy will live on for many years.

They praised his “courage and persistence” and said his “brilliance and humour” inspired people across the world.

“He once said, ‘It would not be much of a universe if it wasn’t home to the people you love.’ We will miss him forever.”

Prof Hawking was the first to set out a theory of cosmology as a union of relativity and quantum mechanics.


Factfile: Stephen Hawking

  • Born 8 January 1942 in Oxford, England
  • Earned place at Oxford University to read natural science in 1959, before studying for his PhD at Cambridge
  • By 1963, was diagnosed with motor neurone disease and given two years to live
  • Outlined his theory that black holes emit “Hawking radiation” in 1974
  • Published his book A Brief History of Time in 1988, which has sold more than 10 million copies
  • His life story was the subject of the 2014 film The Theory of Everything, starring Eddie Redmayne
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ये है भैयाजी जोशी के फिर से सरकार्यवाह बनने के पीछे की कहानी

तमाम कयासों के बाद आज आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक में 70 साल के भैयाजी जोशी को चौथी बार सर्वसम्मति से सरकार्यवाह चुना गया. भैयाजी जोशी 2009 से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शनिवार को दोपहर 3.40 बजे  सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. मध्य क्षेत्र के अशोक सोनी को चुनाव अधिकारी बनाया गया. पश्चिम क्षेत्र के जयंती भाई भदेसिया ने भैयाजी के कार्यकाल में जो काम हुए उसका उल्लेख करते भैयाजी जोशी का नाम फिर से सरकार्यवाह के लिए प्रस्तावित किया. उसके बाद जयंती भाई भदेसिया के प्रस्ताव का विरेंद्र सिंह पराक्रमदित्य, दक्षिण क्षेत्र रजेंद्रन, विठ्ठल जी और उमेश चक्रवर्ती ने समर्थन किया.

मजेदार बात ये है कि भैयाजी जोशी के अलावा किसी और उम्मीदवार ने अपनी दावेदारी पेश नहीं की और प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से भैयाजी जोशी को एक बार फिर से 3 साल के लिए सरकार्यवाह के लिए चुन लिया.

हर तीन साल में नागपुर में होने वाली बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव होता है. सूत्रों की माने तो संघ के कुछ नेता चाहते थे कि इस बार सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाए. लेकिन दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी चाहते थे कि भैयाजी जोशी को एक और सरकार्यवाह का कार्यकाल देना चाहिए.

पिछली बार की ही तरह भैयाजी जोशी ने सरकार्यवाह के चुनाव में भावुक भाषण दिया और कहा कि दो बार से मैं कह रहा हूं कि मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए और यंग ब्लड को आगे लाकर जिम्मेदारी दी जाये. तब आप लोगों ने मेरी बात को नहीं माना लेकिन इस बार मान लीजिए. लेकिन भैयाजी जोशी के कहने के बाद भी प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से उनको ही सरकार्यवाह चुना.

2015 में प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह के चुनाव के समय भैयाजी जोशी के स्वास्थ को लेकर संघ के वरिष्ठ नेताओं को चिंता थी लेकिन उसके बावजूद, उन्हें ही तीसरी बार सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

सूत्रों की माने तो संघ के कई नेताओं का मानना है कि सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी तो वो वैसी ही परिस्तिथि पैदा होगी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के समय में केसी सुदर्शन संघ प्रमुख और मोहन भागवत सरकार्यवाह के रहते समय आयी थी. सुदर्शन पद में बड़े जरूर थे, लेकिन वो उम्र और तजुर्बे में कम थे. इस बार संघ नहीं चाहता था कि दोबारा ऐसी समस्या खड़ी हो.

सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को संघ के कई बड़े नेता इसीलिए सरकार्यवाह बनाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उनका इतिहास संघ के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का रहा है और संघ में हमेशा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को एक राजनीतिक संगठन के तौर पर ही देखा जाता है. दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह का इतिहास कभी संघ के सह सरकार्यवाह रहे मदनदास देवी का भी रहा है.

दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह मदनदास देवी में सरकार्यवाह बनने की योग्यताएं थीं लेकिन उसके बाद भी उन्हें सरकार्यवाह की जिम्मेदारी नहीं दी गई. सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह नहीं बनाने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि मोदी सरकार और बीजेपी संगठन में उनके अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समकालीन जुड़े नेता से अच्छे रिश्ते भी हैं.

मतलब साफ है कि संघ भले ही परदे के पीछे से राजनीति से जुड़ा हो लेकिन अभी संघ अपने दो सर्वोच्च पदों को राजनीति से जुड़ाव रखने वाले अपने नेताओं को ये पद नहीं देना चाहता था.