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वॉटसन ने रचा IPL का नया इतिहास

IPL 2018 के फाईनल मैच में वॉटसन जब अपनी पारी की शुरुआत करने आए तब वो 10 गेंदों के बाद यानी 11वें गेंद पर अपना खाता खोला और इसके बाद ऐसी पारी खेली की टीम को फाइनल में जीत दिला दी। शेन वॉटसन ने इस आइपीएल में अपना दूसरा शतक लगाया। शेन के शतक के दम पर चेन्नई ने तीसरी बार आइपीएल का खिताब अपने नाम किया।

वॉटसन ने रचा इतिहास
चेन्नई के ओपनर बल्लेबाज शेन वॉटसन का खतरनाक रूप हैदराबाद के खिलाफ फाइनल मैच में देखने को मिला। उन्होंने गेंदों 51 पर अपना शतक पूरा किया। वॉटसन ने हैदराबाद के खिलाफ 57 गेंदों पर नाबाद 117 रन की पारी खेली और अपनी टीम को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। शेन वॉटसन आइपीएल इतिहास के पहले ऐसे बल्लेबाज बन गए जिन्होंने रन चेज करते हुए शतक लगाया। वॉटसन ने अपनी शतकीय पारी के दौरान 11 चौके और 8 छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 205.26 का रहा।

ठोका आइपीएल का दूसरा शतक
शेन वॉटसन इस आइपीएल में दो शतक लगाने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे। इस मैच से पहले उन्होंने लीग मुकाबले में राजस्थान के खिलाफ 106 रन की पारी खेली थी। इसके बाद फाइनल मुकाबले में उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ नाबाद 117 रन बनाए।

आइपीएल 2018 में शेन का सफर
शेन वॉटसन की बल्लेबाजी की बात करें तो उन्होंने आइपीएल में खेले 15 मैचों में 39.64 की औसत से 555 रन बनाए। रन बनाने के मामले में आइपीएल में पांचवें नंबर पर रहे। वॉटसन ने 15 मैचों में 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाए और उनका स्ट्राइक रेट 154.59 का रहा। वॉटसन ने इस आइपीएल में 44 चौके और 35 छक्के लगाए। हालांकि गेंदबाजी में वो कुछ खास नहीं कर पाए और सिर्फ 6 विकेट ही ले सके।

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अटवाल वीजा विवाद: भारत पर लगाए आरोपों पर विपक्ष ने मांगी NSA से सफाई, ट्रूडो की पार्टी ने रोका प्रस्ताव

कनाडा के नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर (NSA) डेनियल जेना के उस बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिसमें उन्होंने खालिस्तान समर्थक जसपाल अटवाल को वीजा जारी करने के पीछे भारत की साजिश होने की बात कही थी। शुक्रवार को विपक्ष ने NSA से अपने बयान को साबित करने की मांग करते हुए संसद में एक प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, ट्रूडो की लिबरल पार्टी ने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव रोक दिया। बता दें कि जेना ने कहा था कि ट्रूडो का भारत दौरा नाकाम करने के पीछे भारत का हाथ है। उनके इस बयान का प्रधानमंत्री ट्रूडो ने भी समर्थन किया था।

खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष

– बता दें कि विपक्ष ने गुरुवार को भी ट्रूडो प्रशासन से भारत पर लगाए आरोपों के लिए सबूत की मांग की थी।

– विपक्षी कन्जर्वेटिव पार्टी के नेता एंड्रू शीर ने भारत पर लगाए गए आरोपों को बकवास बताते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री साजिश के दावों पर कोई सबूत भी देंगे?
– इसके साथ ही विपक्ष ने खालिस्तान समर्थकों की निंदा और भारत की एकता के सपोर्ट में संसद में एक प्रस्ताव लाने की बात भी कही थी।

ट्रूडो ने क्या कहा था?

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, साजिश के आरोपों पर ट्रूडो ने कहा, “जब हमारे सीनियर डिप्लोमैट और सिक्युरिटी अफसर देश के नागरिकों से कुछ कह रहे हैं तो वो जानते हैं कि इसमें कुछ सच्चाई हो सकती है।”
– साथ ही उन्होंने कहा, “यह पिछली कंजर्वेटिव (विपक्ष पार्टी) सरकार ही थी, जिसने पब्लिक सर्विस में हर संभव रुकावटें पैदा करने की कोशिश की।”

भारत ने आरोपों को बताया निराधार

– भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमने कनाडा की संसद में हाल की चर्चा को देखा है। हम साफ कहना चाहते हैं कि चाहे वह मुंबई में अटवाल की मौजूदगी हो या नई दिल्ली में डिनर में उसे न्योता दिए जाने का मामला हो, भारत की सुरक्षा एजेंसियों का अटवाल की मौजूदगी से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की बातें आधारहीन हैं और हमें कतई मंजूर नहीं हैं।

ट्रूडो ने अटवाल को बुलाने पर क्या सफाई दी थी?

– अटवाल को स्पेशल डिनर में बुलाने के विवाद पर ट्रूडो ने कहा था, “हमने इस मसले को गंभीरता से लिया। उसे कोई भी न्योता नहीं दिया चाहिए था। जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, कनाडा के हाईकमीशन ने इन्विटेशन रद्द कर दिया। पार्लियामेंट के एक मेंबर ने उसे पर्सनली बुलाया था।”
– कनाडा के पीएमओ ने कहा था, “यह साफ कर देना अहम है कि वह (अटवाल) पीएम (ट्रूडो) के ऑफिशियल डेलिगेशन का हिस्सा नहीं था, न ही उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन्वाइट किया था।”

किस-किस के साथ दिखा था अटवाल?

– मुंबई के एक इवेंट में अटवाल ट्रूडो की पत्नी सोफिया के साथ नजर आया। एक अन्य फोटो में वह ट्रूडो के मंत्री अमरजीत सोही के साथ भी दिखाई दिया था।
– तस्वीरें सामने आने पर विवाद हुआ तो कनाडा के सांसद रणदीप एस. सराई ने अटवाल को मुंबई के इवेंट में बुलाने की जिम्मेदारी ली थी।

कौन है जसपाल अटवाल?

– जसपाल अटवाल खालिस्तान समर्थक रहा है। वह बैन किए गए इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन में काम करता था।
– इस संगठन को 1980 के दशक की शुरुआत में कनाडा सरकार ने आतंकी संगठन घोषित किया था।
– अटवाल को पंजाब के पूर्व मंत्री मलकीत सिंह सिद्धू और तीन अन्य लोगों को 1986 में वैंकूवर आईलैंड में जानलेवा हमला करने के केस में दोषी ठहराया गया था।
– जसपाल उन चारों लोगों में शामिल था, जिन्होंने सिद्धू की कार पर घात लगाकर हमला किया था और गोलियां चलाई थीं। हालांकि, सिद्धू ने आरोपों से इनकार किया था।
– इसके अलावा अटवाल को 1985 में एक ऑटोमोबाइल फ्रॉड केस में भी दोषी पाया गया था।

क्या है खालिस्तान का विवाद?

– पंजाब में कुछ लोगों ने 1980 के दशक में खालिस्तान नाम से अलग देश बनाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने भारत विरोधी हिंसक आंदोलन किए। 1984 में भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर में घुसकर वहां छिपे खालिस्तान सपोर्टर्स पर कार्रवाई की। इसके बाद धीरे-धीरे यह आंदोलन खत्म हो गया।