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WhatsApp पर पाएं ट्रेनों का लाइव स्टेटस, जानें कैसे

आपको अब रेलवे के पूछताछ नंबर 139 पर फोन करने की या फिर इंटरनेट से पीएनआर के जरिए जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको ट्रेन के डिपार्चर से लेकर उसके स्टेशन के बारे में भी जानकारी व्हाट्सऐप के जरिए मिल जाएगी। इसके अलावा इससे टैक्सी, लाने-ले जाने की सुविधा, रिटायरिंग रूम, होटल, टूर पैकेज, ई-कैटरिंग और यात्रा से जुड़ीं अन्य जानकारियां भी हासिल की जा सकती हैं।

बस इस नंबर को करें सेव और..
ट्रेन का लाइव स्टेट्स जानने के लिए आपको अपने मोबाइल में 7349389104 नंबर को सेव करना होगा। इसके बाद आप किसी भी ट्रेन का नंबर इस नंबर पर सेंड कर उसके बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। आपको ट्रेन की अपटेड स्थिति इस नंबर से मिल जाएगी। 10 सेकंड में आपको आपकी ट्रेन का लाइव स्टेटस उसी ग्रुप में मिल जाएगा। इस तरीके को अपनाकर आप महसूस करेंगे कि पहले से काफी आसान हो गया है ट्रेन का स्टेटस जानना।

पश्चिमी रेलवे के वरिष्ठ डिवीजनल कमर्शियल मैनेजर आरती सिंह परीर ने कहा, ‘आम यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति के बारे में अपडेट के लिए रेलवे ने इस नंबर को लॉन्च किया है। हमारा प्रयास यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है। यह यात्रियों के लिए एक बहुत उपयोगी सुविधा है और उन्होंने इसकी सराहना की है।’

10 सेकंड में रेलवे की तरफ से आएगा जवाब
आपको इस बात का ध्याोन रखना होगा कि आपका मैसेज सर्वर पर तब तक नहीं पहुंचेगा जब तक डबल टिक न हो जाए। कभी-कभी सर्वर पर ज्यादा ट्रैफिक होने से ऐसा हो सकता है। इस नंबर पर मैसेज करने पर डबल टिक आए तो समझ जाएं कि मैसेज रेलवे सर्वर तक पहुंच गया है। डबल टिक ब्लू हो जाए तो समझ जाएं कि रेलवे सर्वर ने मैसेज को रीड कर लिया है। इसका मतलब है कि अब जवाब आने ही वाला है। ब्लू टिक आने के बाद ही व्हाट्सऐप पर रिवर्ट आता है। कोई सर्वर प्रॉब्लम न होने पर आमतौर पर 10 सेकंड में रिवर्ट आ ही जाता है।

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अच्छी खबर: वेटिंग लिस्ट ई-टिकट वाले यात्री अब कर सकेंगे ट्रेन में सफर

रेलवे के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया है। जिसके तहत अगर किसी भी रेल यात्री के पास ई-टिकट है और उसका नाम वेटिंग लिस्ट में शामिल है, तो उन्हें भी यात्रा करने का पूरा अधिकार रहेगा। हालांकि अब तक सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर रेलवे की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

दरअसल, साल 2014 में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि काउंटर टिकट धारकों की तरह वेटिंग वाले ई-टिकट वालों यात्रियों का भी टिकट कैंसिल नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ई-टिकट वालों को भी राहत दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने रेलवे को यह भी आदेश दिया है कि वह जल्द से जल्द एक ऐसी स्कीम लागू करे जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फर्जी नामों से टिकट बुक कराने वालें एजेंट्स पर रोक लगाई जा सके।

वेटिंग ई-टिकट यात्रियों के लिए खुशखबरी

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2014 में विभास कुमार झा द्वारा दायर की गई एक याचिका में कहा गया था कि काउंटर टिकट धारकों की तरह वेटिंग वाले ई-टिकट वालों का टिकट नहीं कैंसिल होना चाहिए। रेलवे के अभी तक के नियम के अनुसार वेटिंग ई-टिकट रखने वाले यात्रियों को ट्रेन मे चढ़ने की इजाजत नहीं मिलती थी, जबकि काउंटर टिकट रखने वाले लोगों पर ऐसी कोई रोक नहीं थी। इसलिए अगर कोई कन्फर्म टिकट वाला व्यक्ति नहीं आता था तो वह सीट इन्हें दे दी जाती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को रद किए जाने की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका रद किए जाने के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश के मुताबिक रेलवे को नियम बनाने पड़ेंगे, ताकि दोनों तरह की टिकटों के बीच के अंतर को खत्म किया जा सके। बता दें कि हाईकोर्ट ने कहा था कि काउंटर टिकट और ई-टिकट लेने वाले यात्रियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

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सीएम योगी ने खोया आपा, कुशीनगर में दी ‘नौटंकी’ बंद करने की चेतावनी

कुशीनगर में गुरुवार को रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना आपा खो बैठे। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह एक दुखद घटना है और इस वक्त नारेबाजी बंद कर दें। मैं अभी भी बोल रहा हूं नोट कर लो। यह नौटंकी बंद करो। दुखद घटना है और हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’

कुशीनगर में एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण हादसे में 13 स्‍कूली बच्‍चों की मौत हो गई। हादसे के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माना कि ड्राइवर ने कान में ईयरफोन लगा रखा था जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

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बख्तरबंद ट्रेन से बीजिंग आए तानाशाह किम, पूरी दुनिया की लगी रही निगाह, चीन रहा चुप

उत्तर कोरिया से चीन की राजधानी बीजिंग पहुंची एक खास ट्रेन पर कई देशों की नजर लगी हुई है। लेकिन इसको लेकर अब तक चीन ने असमंजस बरकरार रखा हुआ है। इस ट्रेन को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने यहां तक कहा है कि इस ट्रेन से बीजिंग कौन आया इसकी कोई जानकारी उन्‍हें नहीं है। चीन ने इस ट्रेन को लेकर जिस किस्‍म की खामोशी बरती है उसको जानने के लिए हर कोई उत्‍सुक है। अमेरिकी मीडिया ने फिलहाल इस ट्रेन के बीजिंग से वापस होने की भी खबर दी है। इसके बाद भी चीन अपने बयान पर कायम है।

किम की बीजिंग यात्रा

माना जा रहा है कि इस ट्रेन से उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन अपने लाव-लश्‍कर के साथ बीजिंग पहुंचे हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ऐसी अटकलें लगाई गई हैं कि कथित तौर पर इस ट्रेन में बीजिंग पहुंचे किम यहां पर अमेरिका से होने वाली अहम वार्ता से पहले कुछ खास रणनीति बनाने पहुंचे हैं। बहरहाल, चीन, उत्तर और दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका ने भी अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि इस खास ट्रेन से किम ही बीजिंग पहुंचे हैं। इसको लेकर चल रही अटकलों के पीछे सबसे बड़ी वजह यह बताई गई है कि इसी ट्रेन से उत्तर कोरिया के पूर्व प्रमुख और किम के पिता किम जोंग इल और उनके दादा भी बीजिंग गए थे।

जवाब मिलना काफी मुश्किल 

बहरहाल, हमारी खबर सिर्फ इसको लेकर ही नहीं है बल्कि इससे आगे की है। प्‍योंगयोंग से बीजिंग पहुंची ट्रेन को लेकर जितने सवाल उठ रहे हैं उनके जवाब मिलना काफी मुश्किल है। इसकी वजह ये है कि चीन की मी‍डिया पर खास ट्रेन से आए मेहमान को लेकर पूरी तरह से खामोश है। यहां पर ये भी जानना बेहद दिलचस्‍प है कि आखिर जहां विश्‍व के तमाम नेता अपनी विदेश यात्रा के लिए विमान का इस्‍तेमाल करते हैं वहीं किम ने इस हाईप्रोफाइल बैठक के लिए ट्रेन को क्‍यों चुना है। खास ट्रेन से बीजिंग पहुंचे इस मेहमान के लिए बीजिंग में खास सुरक्षा व्‍यवस्‍था भी की गई है। कुछ खबरों में यहां तक कहा गया है कि किम को बीजिंग में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा। अटकलों के बीच बीजिंग में कई प्रमुख सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है।

बीजिंग की सड़कें सुनसान

सबसे पहले आपको बता दें कि किम की इस कथित यात्रा के बाद बीजिंग की सड़कें सुनसान हो गई हैं। चप्‍पे-चप्‍पे पर जवानों को तैनात किया गया है। बीजिंग में कई प्रमुख सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। त्यानआनमेन स्‍क्‍वायर पर भी अभू‍तपूर्व सुरक्षा व्‍यवस्‍था है। इसके अलावा बीजिंग के दिओयोयुतई स्‍टेट गेस्‍ट हाउस की तरफ आने वाली सभी गाडि़यों की जांच की जा रही है। इस ओर हर गाड़ी को आने की इजाजत भी नहीं दी गई है। इस ओर आने वाले मार्ग पर भी केवल खास गाडि़यां ही आ रही हैं। यहां आने वाले खास मेहमान पर यहां के लोगों की भी निगाहें लगी हुई हैं।

जापान के निप्‍पो टीवी नेटवर्क ने दोनों देशों के बीच बने फ्रेंडशिप ब्रिज से गुजरती हुई इस ट्रेन का वीडियो भी जारी किया है। इसके अलावा एक दूसरे वीडियो में स्‍टेशन के बाहर बाहरी सुरक्षा घेरे में लिमोजिन गाड़ी के अंदर जाने और बाहर आने का भी वीडियो सामने आया है। एक तीसरे वीडियो में सुरक्षा घेरे के बीच में एक लिमोजिन गाड़ी को चौराहे से गुजरते हुए भी दिखाया गया है।

किम की ट्रेन है बेहद खास

किम और उनकी खास ट्रेन को लेकर जिस तरह से अटकलों का बाजार गर्म है उसके बारे में आपको बेहद कम ही जानकारी होगी। आपको बता दें कि बीजिंग में प्‍योंगयोंग से पहुंची खास ट्रेन से वर्ष 2011 में किम के पिता किम जोंग इल ने भी बीजिंग की यात्रा की थी। उनसे पहले किम इल संग जो कि मौजूदा तानाशाह के दादा थे, ने भी इसी खास ट्रेन से बीजिंग और रूस की यात्रा की थी। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह महज एक ट्रेन ही नहीं है बल्कि एक चलता फिरती हाईटैक वैपंस से सुसज्जित वाहन है, जिसको खास किम परिवार के लिए ही तैयार किया गया है। यही वजह है कि किम के पिता और दादा ने विमान से यात्रा करने से ज्‍यादा इस खास ट्रेन पर ही भरोसा किया है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अपने निधन से कुछ पहले अगस्‍त 2011 में किम जोंग इल ने इसी खास ट्रेन से मास्‍को की यात्रा की थी। इस दौरान उन्‍होंने वहां पर रूसी राष्‍ट्रपति दमित्री मेडवेडेव से मुलाकात की थी।

खास ट्रेन को लेकर वीडियो वायरल 

बीजिंग में इस खास ट्रेन को लेकर एक वीडियो भी वायरल हो गया है। कहा जा रहा है इससे आए मेहमानों को बीजिंग के खास गेस्‍ट हाउस में ठहराया जाएगा। इस ट्रेन में किम की सुविधा और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। पूर्व रशियन डिप्‍लोमेटिक ने वर्ष 2001 में हुई किम की यात्रा को याद और इस ट्रेन के बारे में बताया था कि यह वास्‍तव में बेहद खास है। उनके मुताबिक यह ट्रेन बाहर और अंदर से बेहद सुंदर है और इसमें उनकी सुख-सुविधा के अलावा सुरक्षा के भी बेहतरीन उपाय किए गए हैं। इसके अंदर लेडी कंडक्‍टर हैं। इन सभी के अलावा ट्रेन में किम के परिवार के लिए दुनिया की बेहतरीन शराब का इंतजाम किया जाता है। पीली पट्टी वाली हरे रंग की यह ट्रेन में सोमवार दोपहर को बीजिंग पहुंची थी।

साथ चलती हैं दो और ट्रेन 

डिप्‍लोमेट के मुताबिक किम के मास्‍को आगमन पर वहां उनकी शान में कोरियाई और रूसी भाषा में गीत प्रस्‍तुत किए गए थे। यहां पर एक खास बात यह भी है कि जब कभी भी मौजूदा किम जोंग उन या उनके पिता और दादा ने इस ट्रेन की सवारी की तब-तब इस ट्रेन के साथ दो और ट्रेन चलती हैं। यह ट्रेन किम की सुरक्षा के लिए साथ चलती थी। हालांकि जिस ट्रेन में किम सफर करते हैं उस ट्रेन में भी उनकी सुरक्षा की पुख्‍ता व्‍यवस्‍था होती है। किम की ट्रेन में कांफ्रेंस रूम के अलावा ऑडियेंस चैंबर, बैडरूम, सैटेलाइट फोन, अलग से टीवी रूम की भी सुविधा मौजूद है।

सत्ता संभालने के बाद कभी देश से बाहर नहीं गए किम

आपको यहां पर ये भी बता दें कि जब से किम ने सत्ता संभाली है तब से वह कभी देश के बाहर नहीं गए हैं। ऐसे में उनका ट्रेन से बीजिंग जाना वह भी ऐसे समय जब ट्रंप से उनकी वार्ता होनी है कई तरह के सवाल खडे करता है। यहां ये भी जानना जरूरी है कि चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्‍यापारिक साझेदार है। उत्तर कोरिया का करीब 90 फीसद कारोबार महज चीन से होता है बाकि दस फीसद में पूरा विश्‍व समाया हुआ है। हालांकि अमेरिका और यूएन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने भी उत्तर कोरिया को भेजे जाने वाले सामान की आपूर्ति रोक दी थी। इन सभी के बीच जापान और अमेरिका की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया था कि चीन और रूस चोरी छिपे उत्तर कोरिया को चीजों की आपूर्ति करने में लगे हैं। दोनों देशों ने इसको लेकर सुबूत भी मुहैया करवाए थे।

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दिल्ली में बुधवार से चलेगी पिंक मेट्रो, जानिए ख़ास बातें

नॉर्थ दिल्ली को सीधे साउथ दिल्ली से जोड़ने वाली दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन बुधवार से शुरू हो जाएगी। इससे नॉर्थ दिल्ली से साउथ दिल्ली महज 35 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। मेट्रो फेज-3 में मजलिस पार्क से शिव विहार के बीच 59 किमी लंबी पिंक लाइन बन रही है। इसका एक हिस्सा बुधवार से पब्लिक के लिए खुलने जा रहा है। अभी साउथ कैंपस से मजलिस पार्क के बीच मेट्रो चलेगी। बुधवार शाम 6 बजे से आम लोग इस रूट पर सफर कर सकेंगे। इस लाइन पर मेट्रो ने कई अनूठे कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। यहां कारीगरी के इतने सारे नमूने एक साथ देखने को मिलेंगे कि आप देखते रह जाएंगे। पिंक लाइन पर कुल 19 ट्रेनें दौड़ेंगी जिनकी फ्रिक्वेंसी 2 मिनट 28 सेकंड से लेकर 5 मिनट 12 सेकंड होगी। आइए नजर डालते हैं दिल्ली मेट्रो की इस नई लाइन की खासियतों पर;

12 स्टेशनों पर चलेगी मेट्रो
एलिवेटेड स्टेशन: 8 (साउथ कैंपस, दिल्ली कैंट, मायापुरी, राजौरी गार्डन, ईएसआई हॉस्पिटल, पंजाबी बाग वेस्ट, शकूरपुर, मजलिस पार्क)
अंडरग्राउंड स्टेशन : 4 (नारायणा विहार, नेताजी सुभाष प्लेस, शालीमार बाग, आजादपुर)
इंटरचेंज स्टेशन: 4 आजादपुर (यलो लाइन), नेताजी सुभाष प्लेस (रेड लाइन), राजौरी गार्डन (ब्लू लाइन), धौला कुआं (एयरपोर्ट लाइन)

सचमुच का ‘जबरा फैन’
आजादपुर स्टेशन के कोनकोर्स लेवल पर मेट्रो ने खास तरह के 5 पंखे लगाए हैं। ये पंखे साइज में इतने बड़े हैं कि आपने शायद ही पहले कभी इतने बड़े पंखे नहीं देखे होंगे। इनका आकार 5 डायमीटर जितना बड़ा है। ये एचवीएलएस (हाई वॉल्यूम लो स्पीड) फैन चलेंगे स्लो स्पीड में, लेकिन इनसे हवा खूब आएगी। स्टेशन के अनपेड एरिया में एयर कंडिशनिंग सिस्टम के बजाय डीएमआरसी ने पहली बार इस तरह के विशालकाय पंखे लगाए हैं। सामान सिंगापुर से मंगाकर उन्हें यहीं असेंबल किया गया है।

(पिंक लाइन के सबसे ऊंचे पॉइंट से ऐसी दिखती है दिल्ली)

7 मंजिला ऊंचाई पर मेट्रो
धौला कुआं पर मेट्रो 23.6 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगी, जो किसी 7 मंजिला इमारत के बराबर है। नीचे से एयरपोर्ट मेट्रो और उसके नीचे एनएच-8 से गुजरती गाड़ियां दिखेंगी। दूसरी तरफ हरा-भरा रिज एरिया सरदार पटेल मार्ग नजर आएंगे। डीएमआरसी ने ट्रैफिक या एयरपोर्ट मेट्रो को डिस्टर्ब किए बिना पिंक लाइन का रास्ता निकाला है। कुछ ही दूर नारायणा के पास मेट्रो का सबसे गहरा पॉइंट भी है। यहां बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के ऑफिस के नीचे मेट्रो 26 मीटर की गहराई पर गुजरेगी।

कॉरिडोर में आर्ट गैलरी
नेताजी सुभाष प्लेस स्टेशन के कोनकोर्स एरिया में इतनी खूबसूरत पेंटिंग लगाई गई हैं कि देखकर आपको ऐसा लगेगा कि आप किसी मेट्रो स्टेशन में नहीं, बल्कि किसी आर्ट गैलरी में खड़े हैं। यहां दर्जन भर से ज्यादा आर्ट वर्क इंस्टॉल किए गए हैं। कई नामचीन आर्टिस्टों की पेंटिंग्स को ग्लास पर उकेरने के बाद उन्हें यहां लगाया गया है। यह एक सेमी अंडरग्राउंड स्टेशन है, जिसके कोनकोर्स और ग्राउंड लेवल के बीच सिर्फ ढाई मीटर का गैप है।

पिंक लाइन मेट्रो से जुड़े अहम फैक्ट्स

मजलिस पार्क से साउथ कैंपस के बीच शुरू होगी लाइन

19 मेट्रो ट्रेनें चलेंगी इस पूरे सेक्शन पर, हर मेट्रो में होंगे 6 कोच

2.4 मीटर है घरों से मेट्रो लाइन की सबसे कम दूरी राजौरी गार्डन में

23.6 मीटर का बना है सबसे ऊंचा पॉइंट धौला कुआं के पास

26 मीटर है सबसे गहरा पॉइंट पूरे सेक्शन पर नारायणा के पास

एक ही स्टेशन पर 4 प्लैटफॉर्म
इंटरचेंज स्टेशनों पर ही दो से ज्यादा प्लेटफॉर्म देखने को मिलते हैं, लेकिन इस लाइन के 2 स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा न होने के बावजूद 4-4 प्लैटफार्म बनाए गए हैं। शकूरपुर और मजलिस पार्क पर इस तरह का स्ट्रक्चर है। भविष्य में जब यह 59 किमी लंबी लाइन पूरी खुल जाएगी, तो कभी किसी ट्रेन को बीच में रोकने या टर्मिनेट करने की जरूरत भी पड़ सकती है। इसे देखते हुए इन दोनों स्टेशनों पर 4-4 प्लैटफार्म बनाए गए हैं। आमतौर पर इंटरचेंज स्टेशनों पर लाइन चेंज करने के लिए कोनकोर्स लेवल या ग्राउंड पर जाना पड़ता है, मगर राजौरी गार्डन स्टेशन पर आपको प्लैटफॉर्म से एक लेवल और ऊपर जाना पड़ेगा और उसके बाद आप ब्लूलाइन पर पहुंचेंगे। ट्रैक के ऊपर 16.5 मीटर लंबा एक रैंप बनाया है। यहां से 134 मीटर लंबे ट्रैवलेटर से होते हुए ब्लूलाइन वाले राजौरी गार्डन स्टेशन में एंट्री करेंगे। स्टेशन के बगल में राजौरी गार्डन फ्लाइओवर है, ऐसे में मेट्रो ने पहली बार इस तरह का प्रयोग किया।

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भारत की पहली शीशे की छत वाली ट्रेन हुई शुरू, मुंबई से गोवा का सफर होगा दिलचस्प

किसी जगह की ट्रिप का मजा और भी दुगुना हो जाता है, जब सफर सुकूनभरा होता है. पिछले एक दशक से यात्रियों के सफर को सुकूनभरा बनाने के लिए सरकार काफी कदम उठा रही है. देश भर के शहरों को छोटे कस्बे और गांवों से जोड़ने का काम तेजी से हो रहा है. होली और दिवाली जैसे कई त्योहारों पर स्पेशल ट्रेन और बस चलाई जाती है. इसी तरह अब मुंबई से गोवा का सफर और भी दिलचस्प हो जाएगा. 18 सितंबर से दादर और मडगांव के बीच चलने वाली जन शताब्दीट एक्सलप्रेस में एक विस्टािडोम (ग्लास-टॉप) कोच शुरू किया जाएगा.

जानें क्या है खास बातें

एसी विस्टाडोम ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री इस विशेष कोच में रोटेटेबल कुर्सियों पर बैठेंगे. साथ ही इसमें मनोरंजन के लिए हैंगिंग एलसीडी टीवी भी है. 40 सीटों वाले इस कोच की लागत 3.38 करोड़ रुपये है. इस ट्रेन में 360 डिग्री पर घूमने वाली चौड़ी सीटें हैं, जिससे सफर में बाहर के नजारों का बेहतरीन अनुभव मिलेगा.

कितने दिन चलेगी ट्रेन?

इस खास कोच को सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्रीय रेलवे ने अपने मुख्यालय छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर रिसीव किया था. जानकारी के अनुसार मॉनसून में यह ट्रेन सप्तामह में तीन दिन चलेगी और मॉनसून खत्म होने के बाद सप्ताह में पांच दिन चलेगी. जन शताब्दी एक्सप्रेस के दादर से चलने का समय सुबह 5.25 बजे है और यह उसी दिन शाम 4 बजे तक मडगांव पहुंच जाती है.

एक्जीक्यूटिव क्लास जितना किराया

विस्टाडोम कोचों को चेन्नई की द इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनाया गया है. इन कोचों का किराया शताब्दी एक्सप्रेस के एक्जीयक्यूटिव क्लास जितना होगा. मूल किराए के अतिरिक्त रिजर्वेशन चार्ज, जीएसटी और कोई अन्य‍ चार्ज जोड़ा जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई कंसेशन (छूट) नहीं मिलेगा और सभी यात्रियों को पूरा किराया देना होगा. इसकी न्यूनतम यात्रा दूरी 50 किलोमीटर होगी.’

पर्यटन को बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम

विस्टाडोम कोच देश में पहली बार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किए जा रहे हैं. जिससे मुंबई या गोवा घूमने के अलावा लोग इस ट्रेन का सफर भी यात्रियों को दिलचस्प लग सके.

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गोधरा कांड : 11 दोषियों की सज़ा उम्रकैद में बदली, मास्टरमाइंड इस बार भी बरी

खास बातें

  1. 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा है
  2. 20 दोषियों को उम्रकैद बरकरार रखी
  3. 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा

गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा स्टेशन पर वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगाकर 59 लोगों की जान लेने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए जा चुके 11 लोगों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है, जबकि 20 दोषियों को उम्रकैद तथा 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा है. विशेष अदालत ने इस मामले में कुल 94 में से 63 आरोपियों को बरी कर दिया था, और कुल 31 आरोपियों को दोषी करार देकर उनमें से 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.

गोधरा स्टेशन पर हुई इस वारदात के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 1,000 से भी ज़्यादा लोग मारे गए थे. इस मामले में सभी 94 आरोपी मुस्लिम थे, और उन पर हत्या तथा षड्यंत्र रचने के आरोप थे. वर्ष 2011 में विशेष अदालत ने आगज़नी की वारदात का मास्टरमाइंड माने जाने वाले मौलवी उमरजी समेत 63 लोगों को बरी कर दिया था, और हाईकोर्ट ने भी उस फैसले में कोई बदलाव नहीं किया है.

31 लोगों को हत्या, हत्या की कोशिश तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी करार दिया गया था, और उनमें से 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी, और सोमवार को हाईकोर्ट ने फांसी की सज़ा पाए 11 दोषियों की सज़ा को भी उम्रकैद में तब्दील कर दिया.

अहमदाबाद से लगभग 130 किलोमीटर दूर गोधरा स्टेशन पर फरवरी, 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के जिस कोच (डिब्बे) में आग लगाई गई थी, उसमें 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जिनमें से ज़्यादातर अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे. मामले के आरोपियों का आखिर तक यही दावा रहा कि उन्होंने 27 फरवरी, 2002 को ट्रेन के कोच में आग नहीं लगाई थी.
यह ट्रेन अयोध्या में मौजूद बाबरी मस्जिद के उस विवादित ढांचास्थल से लौट रही थी, जिसे लाखों दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं तथा वॉलंटियरों ने दिसंबर, 1992 में ढहा दिया था. वर्ष 2011 में विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि ट्रेन को बाकायदा साज़िश रचकर आग लगाई गई थी.