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राजिस्थान रॉयल्स ने किंग्स इलेवन पंजाब को घरेलू मैदान में 15 रन से हराया

IPL के 40वें मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान ने 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 158 रन बनाए। पंजाब को जीत के लिए 159 का लक्ष्य मिला थे लेकिन पूरी टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 143 रन बना पाई।

राजस्थान के खिलाफ पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही। ओपनर बल्लेबाज क्रिस गेल सिर्फ एक रन पर कृष्णप्पा गौतम की गेंद पर स्टंप आउट हो गए। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए टीम के कप्तान अश्विन को गौतम ने खाता भी नहीं खोलने दिया और क्लीन बोल्ड कर दिया। करुण नायरको 3 रन पर जोफ्रा आर्चर ने जयदेव उनादकट के हाथों कैच करवा दिया। पहली बार टीम में जगह पाने वाले आकाशदीप नाथ को ईश सोढ़ी ने 9 रन पर कैच आउट करवा दिया। मनोज तिवारी को बेन स्टोक्स ने अपनी गेंद पर रहाणे के हाथों कैच करवा दिया। उन्होंने 7 रन बनाए। अक्षर पटेल 9 रन बनाकर रन आउट हो गए। स्टॉयनिस 11 रन बनाकर उनादकट की गेंद पर गौतम के हाथों कैच आउट हुए। उन्होंने 11 रन बनाए। लोकेश राहुल ने 70 गेंदों पर नाबाद 95 रन की पारी खेली लेकिन अपनी टीम को जीत नहीं दिला पाए। एंड्रयू टे एक रन बनाकर नाबाद लौटे।

राजस्थान की तरफ से गौतम ने दो, जोफ्रा आर्चर, जयदेव उनादकट, बेन स्टोक्स और ईश सोढ़ी ने एक-एक विकेट लिए।

जोस बटलर ने खेली 82 रन की पारी

राजस्थान की शुरुआत पंजाब की खिलाफ अच्छी नहीं रही। टीम के ओपनर बल्लेबाज और कप्तान अजिंक्य रहाणे सिर्फ 9 रन बनाकर एंड्रयू टे की गेंद पर आकाशदीप नाथ के हाथों कैच आउट हो गए। कृष्णप्पा गौतम को स्टॉयनिस ने अपना शिकार बनाया और 8 रन पर मनोज तिवारी के हाथों कैच करवा दिया। राजस्थान को तीसरा झटका संजू सैमसन के तौर पर लगा। उन्होंने 18 गेंदों पर 22 रन बनाए। मुजीब की गेंद पर उनका कैच मनोज तिवारी ने लपका। मुजीब ने अपना दूसरा शिकार जोस बटलर को बनाया जिन्होंने 58 गेंदों पर 82 रन बनाए। मुजीब की गेंद पर लोकेश राहुल ने उन्हें स्टंप आउट किया। स्टुअर्ट बिन्नी 11 रन बनाकर रन आउट हो गए। बेन स्टोक्स 14 रन पर टे का शिकार बने। उनका कैच अश्विन ने पकड़ा। जोफ्रा आर्चर बिना खाता खोले ही टे की गेंद पर कैच आउट हो गए। जयदेव उनादकट शून्य पर कैच आउट हुए। लोमरोर 9 रन बनाकर नाबाद रहे।

पंजाब की तरफ से एंड्रयू टे ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट लिए। मुजीब उर रहमान ने दो और स्टॉयनिस ने एक विकेट लिया।

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मानो या न मानो षड्यंत्र बहुत ही योजनाबद्ध है। #JusticeForAsifa #CBI4KathuaCase #CBI4Ashifa

मैं बार-बार बस यही सोच रहा हूँ, आसिफा की ये फोटो किसने और क्यूँ ली?

बड़ी और गौर करने वाली बात ये है कि फोटो खींचने वाले को कैसे पता था ये फोटो पूरे भारत में एक एजेंडा चलाने में काम आएगी क्यूंकि आसिफा की लाश भी इन्हीं कपड़ों में मिली थी। क्या आपने निर्भया रेप कांड की प्रताड़ित दामिनी(जिसकी पहचान भी अब तक किसी को नहीं पता) की तस्वीर कभी देखी, तो सोचिये सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन्स के उलट एक रेप प्रताड़ित की तस्वीर वायरल होना भी एक बहुत बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है।

प्रारम्भिक जाँच के बाद लिखी गयी FIR में सिर्फ हत्या का केस दर्ज हुआ था और वारदात की जगह भी लकड़ी का गोदाम था। फिर जाँच राज्य की क्राइम ब्रांच के पास आते ही यह केस ऐसे पलटा की अब इसके सहारे कुछ नेतागण अपनी बिखर चुकी राजनीति पलटने की कोशिश कर रहे हैं!

कौन हैं आखिर वो लोग?? मानो या न मानो षड्यंत्र बहुत ही योजनाबद्ध है।

जहाँ एक तरफ आरोपियों के बार बार बोलने पर भी जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच उनका नार्को टेस्ट नहीं करवा रही और बस आरोप थोप के कबूल करने के लिए प्रताड़ित कर रही है, यह बेहद ही संघीन है।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का CBI जाँच की मंजूरी अब तक न देना उनके कर्तव्य-परायण पर भी संदेह उत्पन्न करता है।

भारतीय राजनीतिज्ञों का स्तर भी अब इतना गिर चुका है कि बस रोटियां सिंकनी चाहिए, फिर चाहें वो छोटे बच्चों के रेप और मौत करने के बाद उनकी लाशों पर ही क्यों न सेंकनी पड़े!

आइये आपको ABP News का एक विश्लेषण दिखाएं जिसमे उस मंदिर के बारे में रची गयी मनगढ़ंत बातें बिलकुल साफ हो जाएँगी।

इस मुहीम को आगे बढ़ाएं और निष्पक्ष जाँच की मांग करें। #JusticeForAsifa #CBI4KathuaCase #CBI4Ashifa

(लेख: संपादकीय)

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जानिए कठुआ रेप कांड का पूरा सच। डी एन ए रिपोर्ट! #Kathua #JusticeForAsifa #Truth

जानिए डेली न्यूज़ एंड एनालिसिस रिपोर्ट से कठुआ रेप कांड से जुड़ा हर सच। किसी भी प्रतिक्रिया देने से पहले सच जानना जरुरी है। हम मांग करते हैं अगर उन्नाव केस की CBI जाँच हो सकती है तो कठुआ रेप कांड की भी CBI जाँच होनी चाहिए और केस को फ़ास्ट ट्रैक कर के सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द अपराधियों को सूली पर चढ़ाया जाये।

कठुआ रेप कांड का पूरा सच

 

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पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं यहां की महारानी, सामने आए ऐसे दावे

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं। ये सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन मोरक्को के एक न्यूजपेपर ने ऐसा दावा किया है। अखबार ने ये दावा एक रिसर्च स्टडी के हवाले से किया है, जो खबरों में है। हालांकि, महारानी के पैगंबर मोहम्मद की वंशज होने का ये दावा कोई पहली बार नहीं किया गया है। 1986 में भी इसी तरह की एक रिपोर्ट सामने आई थी।

शाही फैमिली की बुक में भी ऐसे दावे…

– मोरक्को के अखबार के मुताबिक, शाही फैमिली की वंशावली की 43 पीढ़ियों को देखने के बाद इतिहासकारों का दावा है कि क्वीन एलिजाबेथ सेकंड असल में पैगंबर की दूर की रिश्तेदार हैं।
– ब्रिटिश वेबसाइट डेलीमेल ने भी दावा किया है कि इसी तरह की रिसर्च 1986 में बुर्केज पीराज (Burke’s Peerage) में भी पब्लिश हुई थी। इस बुक को शाही वंशावली के बारे में ऑथराइज्ड ब्रिटिश गाइड माना जाता है।
– हिस्टोरियंस के मुताबिक, एलिजाबेथ सेकंड की ब्लडलाइन 14वीं सदी के अर्ल ऑफ कैंब्रिज से जुड़ी हैं। ये ब्लडलाइन मध्यकालीन मुस्लिम स्पेन से लेकर पैगंबर साहब की बेटी फातिमा तक जाती हैं।
– फातिमा पैगंबर मोहम्मद की बेटी थीं और उनके वंशज स्पेन के राजा थे। इन्हीं से महारानी एलिजाबेथ का संबंध बताया जा रहा है। यही वजह है कि उन्हें पैगंबर का वंशज बताया जा रहा है।

ऐसे जोड़ा गया कनेक्शन

– मोरक्को के अखबार में इस पर आर्टिकल देने वाले हामिद अल अवनी ने लिखा कि 11 वीं सदी में स्पेन के सेविले के किंग अबू अल कासिम मुहम्मद बिन अब्बाद पैगंबर साहब की बेटी फातिमा के वंशज थे।
– उनकी बेटी का नाम जायदा था। बुर्केज पीराज की स्टडी के मुताबिक, महारानी मुस्लिम प्रिसेंज जायदा की फैमिली से ताल्लुक रखती हैं।
– जायदा बाद में सेविले के शासक अल मुतामिद इब्न अब्बाद की चौथी वाइफ बनीं, जिनका सांचो नाम का एक बेटा था।
– अब्बादी साम्राज्य पर हमला हुआ तो जायदा सेविले भागकर स्पेन के राजा अल्फोंसो सिक्स्थ के पास पहुंच गई। वहां उन्होंने धर्म परिवर्तन करा लिया और ईसाई बन गई। उनका नाम जायदा से इसाबेला हो गया।
– इसके बाद उनके बेटे सांचो के वंशज ने थर्ड अर्ल ऑफ कैंब्रिज रिचर्ड ऑफ कोनिसबर्ग से शादी कर ली। अर्ल ऑफ कैंब्रिज इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय के पोते थे।

दावों को लेकर मतभेद
– कुछ हिस्टोरियन इसके सपोर्ट में नहीं हैं, लेकिन इस दावे का प्रारंभिक मध्ययुगीन स्पेन की वंशावली के रिकॉर्ड ने समर्थन किया है। मिस्र के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती अली गोमा द्वारा भी इसे सत्यापित किया गया था।

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उन्नाव गैंगरेप: BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भाई गिरफ्तार, पीड़िता बोली-फांसी पर लटका दो

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में युवती ने गैंगरेप मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के आरोपी भाई अतुल सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि यह गिरफ्तारी सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुई है. पीड़ित परिवार की ओर से लगातार आरोप लगाए जा रहे थे कि मौजूदा बीजेपी सरकार विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके परिवार को बचा रही है. इसके बाद सीएम योगी ने आश्वासन दिया था कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.

इस गिरफ्तारी पर पीड़िता ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, ‘कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मैं नहीं जानती की उसके भाई को गिरफ्तार किया गया है. मैं चाहती हूं कि उसे फांसी पर लटका दिया जाए. उन्होंने मेरी जिंदगी को नरक बना दिया है. मेरे पिता की हत्या कर दी.’

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ANI UP

@ANINewsUP

Kuldeep Singh (Sengar) isn’t being arrested. I don’t know if his brother is arrested. I demand that they be hanged till death. They’ve made my life miserable. I want justice. They killed my father: Woman who has leveled rape allegations against BJP MLA Kuldeep Singh Sengar #Unnao

BJP विधायक पर आरोप लगाने वाले शख्स की जेल में मौत
पीड़िता के पिता ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके परिवार वालों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था. आरोप है कि पुलिस ने पीड़िता के पिता के कहने पर मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया था, लेकिन विधायक की ओर से छवि खराब करने का मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद पीड़िता के पिता को जेल में डाल दिया गया था, जहां रविवार रात उनकी मौत हो गई.

पीड़िता के पिता की मौत पर 2 अफसर समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड
पुलिस हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत पर 2 पुलिस अधिकारी और 4 कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है. उन्नाव की पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि देवी ने कहा, ‘घटना की गंभीरता को देखते हुए 2 पुलिस अधिकारी और 4 कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि बलात्कार पीड़िता के पिता को पीटने वाले चार आरोपियों सोनू, बउवा, विनीत और शैलू को गिरफ्तार कर लिया है.’ विधायक पर जेल में हत्या कराये जाने के आरोप के बारे में पूछे जाने पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. मामले की मजिस्ट्रेट से जांच के आदेश दिये गए हैं. साथ ही मृतक का डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए गए हैं.

एफआईआर में विधायक का नाम नहीं
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक FIR की कॉपी में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम ही दर्ज नहीं है. एफआईआर में विधायक का नाम नहीं होने को लेकर रेप पीड़ित की बहन ने कहा कि मेरे पिता की पहले ही मौत हो चुकी है, अब पुलिस कह रही है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आगे उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि FIR में विधायक कुलदीप सिंह और अरुण सिंह का नाम शामिल कर दोनों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए.

Unnao gangrape

आरोपों के बाद सीएम से मिलने पहुंचे थे विधायक
अपने ऊपर लगे आरोपों के बाद बीजेपी विधायक सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने एनेक्सी बिल्डिंग पहुंचे थे. आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ साजिश हुई है, मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आने को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे बुलाया नहीं गया है, बल्कि मैं खुद उनसे मिलने आया हूं. उन्होंने कहा कि मुझे जांच से कोई समस्या नहीं है. जांच होने दीजिए और दोषी को कड़ी सजा होनी चाहिए. जांच में यदि मैं दोषी पाया जाता हूं तो मैं सजा का सामना करने के लिए तैयार हूं.

सीएम ने ADG लखनऊ को सौंपी है मामले की जांच
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि लखनऊ के ADG को इस मामले की गंभीरता से जांच के आदेश दे दिए गए हैं. इस मामले में जो कोई आरोपी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. युवती और उसके परिवार वालों ने रविवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर खुदकुशी करने की कोशिश की थी. युवती ने रविवार दोपहर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास के पास परिवार के साथ पहुंचकर आत्मदाह करने की कोशिश की थी.

जिलाधिकारी रवि कुमार एनजी ने कहा कि जब दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था तो एक पक्ष को ही जेल क्यों भेजा गया, इसकी जांच कराई जाएगी.

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ये है भैयाजी जोशी के फिर से सरकार्यवाह बनने के पीछे की कहानी

तमाम कयासों के बाद आज आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक में 70 साल के भैयाजी जोशी को चौथी बार सर्वसम्मति से सरकार्यवाह चुना गया. भैयाजी जोशी 2009 से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शनिवार को दोपहर 3.40 बजे  सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. मध्य क्षेत्र के अशोक सोनी को चुनाव अधिकारी बनाया गया. पश्चिम क्षेत्र के जयंती भाई भदेसिया ने भैयाजी के कार्यकाल में जो काम हुए उसका उल्लेख करते भैयाजी जोशी का नाम फिर से सरकार्यवाह के लिए प्रस्तावित किया. उसके बाद जयंती भाई भदेसिया के प्रस्ताव का विरेंद्र सिंह पराक्रमदित्य, दक्षिण क्षेत्र रजेंद्रन, विठ्ठल जी और उमेश चक्रवर्ती ने समर्थन किया.

मजेदार बात ये है कि भैयाजी जोशी के अलावा किसी और उम्मीदवार ने अपनी दावेदारी पेश नहीं की और प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से भैयाजी जोशी को एक बार फिर से 3 साल के लिए सरकार्यवाह के लिए चुन लिया.

हर तीन साल में नागपुर में होने वाली बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव होता है. सूत्रों की माने तो संघ के कुछ नेता चाहते थे कि इस बार सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाए. लेकिन दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी चाहते थे कि भैयाजी जोशी को एक और सरकार्यवाह का कार्यकाल देना चाहिए.

पिछली बार की ही तरह भैयाजी जोशी ने सरकार्यवाह के चुनाव में भावुक भाषण दिया और कहा कि दो बार से मैं कह रहा हूं कि मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए और यंग ब्लड को आगे लाकर जिम्मेदारी दी जाये. तब आप लोगों ने मेरी बात को नहीं माना लेकिन इस बार मान लीजिए. लेकिन भैयाजी जोशी के कहने के बाद भी प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से उनको ही सरकार्यवाह चुना.

2015 में प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह के चुनाव के समय भैयाजी जोशी के स्वास्थ को लेकर संघ के वरिष्ठ नेताओं को चिंता थी लेकिन उसके बावजूद, उन्हें ही तीसरी बार सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

सूत्रों की माने तो संघ के कई नेताओं का मानना है कि सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी तो वो वैसी ही परिस्तिथि पैदा होगी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के समय में केसी सुदर्शन संघ प्रमुख और मोहन भागवत सरकार्यवाह के रहते समय आयी थी. सुदर्शन पद में बड़े जरूर थे, लेकिन वो उम्र और तजुर्बे में कम थे. इस बार संघ नहीं चाहता था कि दोबारा ऐसी समस्या खड़ी हो.

सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को संघ के कई बड़े नेता इसीलिए सरकार्यवाह बनाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उनका इतिहास संघ के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का रहा है और संघ में हमेशा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को एक राजनीतिक संगठन के तौर पर ही देखा जाता है. दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह का इतिहास कभी संघ के सह सरकार्यवाह रहे मदनदास देवी का भी रहा है.

दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह मदनदास देवी में सरकार्यवाह बनने की योग्यताएं थीं लेकिन उसके बाद भी उन्हें सरकार्यवाह की जिम्मेदारी नहीं दी गई. सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह नहीं बनाने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि मोदी सरकार और बीजेपी संगठन में उनके अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समकालीन जुड़े नेता से अच्छे रिश्ते भी हैं.

मतलब साफ है कि संघ भले ही परदे के पीछे से राजनीति से जुड़ा हो लेकिन अभी संघ अपने दो सर्वोच्च पदों को राजनीति से जुड़ाव रखने वाले अपने नेताओं को ये पद नहीं देना चाहता था.

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इच्‍छा मृत्‍यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 7 सवालों के जवाब जो आपको पता होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने देश में इच्‍छा मृत्‍यु को मंजूरी दे दी है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय का यह फैसला एक व्‍यक्ति की इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत पर सुनवाई के दौरान सुनाया। अपने देश में दया मृत्‍यु को पहले से ही कानूनी मान्‍यता है।

7 सवालों के जवाब जो आपको पता होना चाहिए

1- क्‍या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
एक मरणासन्‍न व्‍यक्ति की लिविंग विल यानी इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत को चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के नेतृत्‍व में संविधान पीठ ने मंजूरी दे दी है। पीठ ने कहा कि कुछ ऐसा तरीका होना चाहिए जिससे सम्‍मान के साथ मृत्‍यु हो सके। कोर्ट ने फैसले में कहा कि लिविंग विल तभी मान्‍य होगी बशर्ते वह मजिस्‍ट्रेट और दो गवाहों के समक्ष तैयार की गई हो। इच्‍छा मृत्‍यु का दुरुपयोग न हो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन तय की गई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने लिविंग विल का विरोध किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था क्‍या किसी मरणासन्‍न व्‍यक्ति को उसकी इच्‍छा के बगैर लाइफ सपोर्ट पर जीवित रखने को मजबूर किया जाना ठीक रहेगा?

2- क्‍या है इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत?
कोई स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति पहले से ही कानूनी ढंग से इच्‍छा मृत्‍यु की वसीयत या लिविंग विल तैयार करता है। वह अपनी वसीयत में इस बात का जिक्र करता है कि यदि भविष्‍य में उसका स्‍वास्‍थ्‍य इतना बिगड़ जाए कि वह मरणासन्‍न अवस्‍था में पहुंच जाए। ऐसी अवस्‍था में उसे जीने की उम्‍मीद धूमिल हो जाए लेकिन उसके प्राण न निकल रहे हों तो उसे इच्‍छा मृत्‍यु दे दी जाए।

3- क्‍या है दया मृत्‍यु?
जब कोई मरीज किसी गंभीर बीमारी से अचेत पड़ा हो और उसके ठीक होने की संभावना न बची हो। जैसे वह ब्रेन डेट हो चुका हो लेकिन उसका हार्ट काम कर रहा हो या फिर वह कोमा या उसकी जैसी स्थिति में लाइफ सपोर्ट पर पड़ा हो। दूसरे शब्‍दों में कहें तो डॉक्‍टर यह मान चुके हों कि अब उसे ठीक कर पाना संभव नहीं है तो उसका कोई नजदीकी रिश्‍तेदार या तीमारदार दया मृत्‍यु के लिए कहे।

4- कैसे दी जाती है इच्‍छा मृत्‍यु?
दुनिया में दो प्रकार से किसी को इच्‍छा मृत्‍यु दी जाती है। एक को एक्टिव यूथेनेशिया कहते हैं और दूसरे को पैसिव यूथेनेशिया कहा जाता है। दुनिया में जहां भी इच्‍छा मृत्‍यु कानूनी रूप से मान्‍य है वहां ज्‍यादातर पैसिव यूथेनेशिया दिया जाता है।

5- क्‍या है एक्टिव यूथेनेशिया?
जब कोई मेडिकल प्रैक्टिशनर या अन्‍य व्‍यक्ति के द्वारा कुछ करने से किसी मरणासन्‍न मरीज की मौत हो जाए तो इसे एक्टिव यूथेनेशिया कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी मरणासन्‍न मरीज को जहर का इंजेक्‍शन लगा देना ताकि उसकी मृत्‍यु हो जाए।

6- क्‍या है पैसिव यूथेनेशिया?
जब किसी मरणासन्‍न व्‍यक्ति के जीवित रहने के लिए डॉक्‍टरों द्वारा कुछ प्रयास न किया जाए ताकि वह मरीज मौत के रास्‍ते चला जाए तो इसे पैसिव यूथेनेशिया कहते हैं। उदाहरण के लिए सालों से कोमा में रह रहे व्‍यक्ति का लाइफ सपोर्ट हटा देना।

7- कब से लीगल है पैसिव यूथेनेशिया?
अरूणा शानबाग के दया मृत्‍यु वाली याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च, 2011 को एक फैसला दिया। कोर्ट ने माना कि कुछ शर्तों के साथ पैसिव यूथेनेशिया द्वारा मरणासन्‍न मरीज को दया मृत्‍यु की इजाजत दी जा सकती है। शर्तों के मुताबिक या तो मरीज के मस्तिष्‍क की मौत यानी ब्रेन डेड हो चुका हो या फिर वह ‘परसिस्‍टेंट वेजिटेटिव स्‍टेट’ यानी उसका मस्तिष्‍क कोई प्रतिक्रिया न दे रहा हो बोले तो कोमा जैसी स्थिति। ऐसे मरीज को मेडिकल बोर्ड की सहमति के बाद दया मृत्‍यु पैसिव यूथेनेशिया द्वारा दी जा सकती है।

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जब ब्रह्मांड नहीं था, तब क्‍या था? स्‍टीफन हॉकिंग ने खोला राज!

बिगबैंग थ्‍योरी के बारे में तो आप शायद जानते ही होंगे। हमारा संसार, आकाश गंगाएं, सौरमंडल और सारे ग्रह Big Bang के कारण अपने अस्तित्‍व में हैं। सालों से वैज्ञानिक यही मानते और बताते चले आ रहे हैं कि इस संसार में सबसे पहले बिगबैंग हुआ और उसके कारण ही पूरे ब्रह्मांड का उदय हुआ। अब दुनिया के फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने वो राज खोला है, जिसे पूरी दुनिया बरसों से जानता चाहती है। स्‍टीफन हॉकिंग ने हाल ही में बिगबैंग के पहले के संसार के बारे में कुछ ऐसा बताया है, जिसे जानकर विज्ञान भी अचंभित है।

बिगबैंग के पहले क्‍या था संसार में? स्‍टीफन हॉकिंग ने किया खुलासा

आज से करीब 13.8 अरब साल पहले ब्रह्मांड बहुत छोटे से आकार से बढ़ना शुरु हुआ था। फिर बहुत ज्‍यादा तापमान और फोर्स के दम पर इसका आकार बढ़ना शुरु हुआ। इसके बाद अणुओं को आपस में मिलना शुरु हुआ। पहले उनका आकार बहुत बढ़ा और फिर उनका विघटन शुरु हुआ, जिससे तमाम तारा मंडल, ग्रह और आकाश गंगाएं अस्तित्‍व में आईं। यही बिगबैंग था, जिससे हमारा संसार बना और आजतक ब्रह्मांड का आकार धीरे धीरे बढ़ रहा है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के बारे में यही जानते हैं, लेकिन इस बिगबैंग के पहले क्‍या था या कहें कि दुनिया कैसी थी, इस पर अब तक वैज्ञानिक कुछ खास नहीं जान सके हैं और इस पर वैज्ञानिकों की बहस का कोई रिजल्‍ट नहीं निकल पाया है। इसी बीच वर्ल्‍ड फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने टीवी शो StarTalk पर खुलासा करते हुए बताया है कि बिगबैंग के पहले आखिर क्‍या हुआ करता था।

क्‍या बताया स्‍टीफन हॉकिंग ने

वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने इस शो के होस्‍ट और एस्‍ट्रोफिजीसिस्‍ट नील डिग्रास से बात करते हुए बताया कि बिगबैंग के पहले क्‍या था, इस बारे में मेरा यह कहना है कि वो जितना आसान था उतना ही ज्‍यादा कॉम्‍प्‍लेक्‍स था, क्‍योंकि वास्‍तव में बिगबैंग से पहले कुछ नहीं था। हॉकिंग ने कहा कि एल्‍बर्ट आइंसटाइन की जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटीविटी के अनुसार स्‍पेस और टाइम ने साथ मिलकर दुनिया में स्‍पेस और समय का कभी न रुकने वाला चक्र बनाया है, लेकिन सच में वो बिल्‍कुल सपाट नहीं है बल्कि ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के दबाव के कारण ये आपस में घूमा हुआ है। यहीं वजह है कि इसे समझ पाना आसान नहीं है।

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स्‍टीफन हॉकिंग ने बताया, बिगबैंग के पहले समय’ का भी अस्तित्‍व नहीं था

बिगबैंग के पहले की दुनिया को लेकर स्‍टीफन हॉकिंग ने एक काफी नया विचार इस रखा है जो चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि बिगबैंग के पहले टाइम यानि समय का भी कोई अस्तित्‍व नहीं था। वो कहते हैं कि Einstein के सिद्धांत के मुताबिक ब्रह्मांड की उत्‍पत्ति के समय संसार में मौजूद सभी भौतिक पदार्थ और ऊॅर्जा बहुत ही छोटी जगहों पर केंद्रित थी, लेकिन उनकी यह थ्‍योरी बिगबैंग के पहले और बाद की कंडीशन के बीच कोई गणितीय लिंक नहीं बताती।

स्‍टीफन हॉकिंग की थ्‍योरीज दुनिया के लिए अचंभा

वैसे तो स्‍टीफन हॉकिंग हमारी दुनिया और हमारे भविष्‍य के बारे में इससे पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं। जैसे कि उनका मानना है कि कोई भी एलियन प्रजाति हम इसांनो को खत्‍म नहीं करेंगे, बल्कि विज्ञान द्वारा बनाया गया आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ही धरती पर हम इसांनों को रिप्‍लेस कर देगा। उनका तो यह भी कहना है कि इंसानों जल्‍दी से जल्‍दी इस धरती को छोड़ देना चाहिए। स्‍टीफन हॉकिंग के लॉजिक्‍स भले ही कई बार आम लोगों को समझ नहीं आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक उनके दिमाग का लोहा मानते हैं।

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मोदी ने किया मनसुख काका का जिक्र: बोले- बधाई, उन्होंने मनमोहन को सच्चाई बता दी

नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ राजकोट में हुई घटना का जिक्र किया। दरअसल, राजकोट में मनसुख भाई नाम के एक बुजुर्ग शख्स ने मनमोहन को रोककर उन्हें यूपीए सरकार के दौरान हुए करप्शन की एक किताब थमा दी थी। मनसुख ने मनमोहन से सवाल किया- आप अपनी सरकार के दौरान हुए घोटालों पर क्यों नहीं बोलते? मोदी ने बनासकांठा के भाबर में इस घटना का जिक्र किया। कहा- मनसुख काका को बधाई। उन्होंने मनमोहन को सच्चाई बता दी। बता दें कि मनसुख के सवाल पर मनमोहन ने बिना कोई जवाब दिए बस हाथ जोड़ लिए थे।

मोदी ने क्या कहा?

– मोदी ने कहा- आप जानते हैं राजकोट में क्या हुआ? डॉक्टर मनमोहन सिंह मीडिया से मिले और इसके बाद एक बुजुर्ग शख्स मनसुख काका उनसे मिलने पहुंच गए। उन्होंने मनमोहन सिंह को यूपीए सरकार के दौरान हुए घोटालों की एक किताब सौंप दी। मैं मनसुख काका को बधाई देता हूं। उन्होंने सच्चाई और ईमानदार सरकार के लिए आवाज उठाई।

– पूर्व पीएम मनमोहन सिंह राजकोट में थे। वह सभास्थल से लौट रहे थे, तभी बुजुर्ग मनसुखभाई ने उन्हें आवाज लगाई। मनमोहन रुके तो मनसुख ने उन्हें एक किताब दिखाकर कहा कि आपके शासन में करोड़ों रुपए के घोटाले हुए, आप उन पर क्यों नहीं बोले? इस पर मनमोहन ने हाथ जोड़ लिए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बोला बीजेपी पर हमला

1) आर्थिक नीतियों की आलोचना की
– मनमोहन सिंह ने राजकोट में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की। खासकर नोटबंदी और जीएसटी को गलत बताया।
– उन्होंने कहा- “नरेंद्र मोदी ने गुजरातियों के भरोसे को तोड़ने के साथ उन्हें धोखा भी दिया है। गुजरात की जनता ने नोटबंदी के मोदी जी के फैसले का यह सोच का समर्थन किया कि उनके त्याग से शायद देश को फायदा हो जाए पर ऐसा नहीं हुआ। उनकी उम्मीदें और भरोसा टूट गया। 99% पुराने नोट बैंक में आ गए और काले धन को सफेद बना लिया गया।”
– “इससे छोटे और मझोले उद्योगों को सबसे तगड़ी चोट लगी और लाखों नौकरियां चली गईं, जबकि नई नौकरियों के मौके नहीं बन रहे।”

2) मोदी करप्शन पर कार्रवाई करें
– मनमोहन ने कहा- “उनकी यूपीए सरकार के दौरान करप्शन के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होती थी और अगर मोदी जी भी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के दावे करते हैं तो उन्हें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी पर लगे आरोपों समेत अन्य आरोपों की जांच करानी चाहिए।”

3) राम मंदिर पर कुछ भी कहने से इनकार किया
– मनमोहन सिंह ने राम मंदिर से जुड़े एक सवाल पर केवल यही कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसलिए वह इस पर वह कुछ नहीं कहना चाहते। कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह मान्य होगा।

4) नर्मदा प्रोजेक्ट को लेकर मोदी मुझसे कभी नहीं मिले
– सिंह ने कहा- जहां तक मुझे ध्यान है, नर्मदा प्रोजेक्ट को लेकर मोदी मुझसे प्रधानमंत्री रहते कभी नहीं मिले।