Posted on

फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

Posted on

बख्तरबंद ट्रेन से बीजिंग आए तानाशाह किम, पूरी दुनिया की लगी रही निगाह, चीन रहा चुप

उत्तर कोरिया से चीन की राजधानी बीजिंग पहुंची एक खास ट्रेन पर कई देशों की नजर लगी हुई है। लेकिन इसको लेकर अब तक चीन ने असमंजस बरकरार रखा हुआ है। इस ट्रेन को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने यहां तक कहा है कि इस ट्रेन से बीजिंग कौन आया इसकी कोई जानकारी उन्‍हें नहीं है। चीन ने इस ट्रेन को लेकर जिस किस्‍म की खामोशी बरती है उसको जानने के लिए हर कोई उत्‍सुक है। अमेरिकी मीडिया ने फिलहाल इस ट्रेन के बीजिंग से वापस होने की भी खबर दी है। इसके बाद भी चीन अपने बयान पर कायम है।

किम की बीजिंग यात्रा

माना जा रहा है कि इस ट्रेन से उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन अपने लाव-लश्‍कर के साथ बीजिंग पहुंचे हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ऐसी अटकलें लगाई गई हैं कि कथित तौर पर इस ट्रेन में बीजिंग पहुंचे किम यहां पर अमेरिका से होने वाली अहम वार्ता से पहले कुछ खास रणनीति बनाने पहुंचे हैं। बहरहाल, चीन, उत्तर और दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका ने भी अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि इस खास ट्रेन से किम ही बीजिंग पहुंचे हैं। इसको लेकर चल रही अटकलों के पीछे सबसे बड़ी वजह यह बताई गई है कि इसी ट्रेन से उत्तर कोरिया के पूर्व प्रमुख और किम के पिता किम जोंग इल और उनके दादा भी बीजिंग गए थे।

जवाब मिलना काफी मुश्किल 

बहरहाल, हमारी खबर सिर्फ इसको लेकर ही नहीं है बल्कि इससे आगे की है। प्‍योंगयोंग से बीजिंग पहुंची ट्रेन को लेकर जितने सवाल उठ रहे हैं उनके जवाब मिलना काफी मुश्किल है। इसकी वजह ये है कि चीन की मी‍डिया पर खास ट्रेन से आए मेहमान को लेकर पूरी तरह से खामोश है। यहां पर ये भी जानना बेहद दिलचस्‍प है कि आखिर जहां विश्‍व के तमाम नेता अपनी विदेश यात्रा के लिए विमान का इस्‍तेमाल करते हैं वहीं किम ने इस हाईप्रोफाइल बैठक के लिए ट्रेन को क्‍यों चुना है। खास ट्रेन से बीजिंग पहुंचे इस मेहमान के लिए बीजिंग में खास सुरक्षा व्‍यवस्‍था भी की गई है। कुछ खबरों में यहां तक कहा गया है कि किम को बीजिंग में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा। अटकलों के बीच बीजिंग में कई प्रमुख सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है।

बीजिंग की सड़कें सुनसान

सबसे पहले आपको बता दें कि किम की इस कथित यात्रा के बाद बीजिंग की सड़कें सुनसान हो गई हैं। चप्‍पे-चप्‍पे पर जवानों को तैनात किया गया है। बीजिंग में कई प्रमुख सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। त्यानआनमेन स्‍क्‍वायर पर भी अभू‍तपूर्व सुरक्षा व्‍यवस्‍था है। इसके अलावा बीजिंग के दिओयोयुतई स्‍टेट गेस्‍ट हाउस की तरफ आने वाली सभी गाडि़यों की जांच की जा रही है। इस ओर हर गाड़ी को आने की इजाजत भी नहीं दी गई है। इस ओर आने वाले मार्ग पर भी केवल खास गाडि़यां ही आ रही हैं। यहां आने वाले खास मेहमान पर यहां के लोगों की भी निगाहें लगी हुई हैं।

जापान के निप्‍पो टीवी नेटवर्क ने दोनों देशों के बीच बने फ्रेंडशिप ब्रिज से गुजरती हुई इस ट्रेन का वीडियो भी जारी किया है। इसके अलावा एक दूसरे वीडियो में स्‍टेशन के बाहर बाहरी सुरक्षा घेरे में लिमोजिन गाड़ी के अंदर जाने और बाहर आने का भी वीडियो सामने आया है। एक तीसरे वीडियो में सुरक्षा घेरे के बीच में एक लिमोजिन गाड़ी को चौराहे से गुजरते हुए भी दिखाया गया है।

किम की ट्रेन है बेहद खास

किम और उनकी खास ट्रेन को लेकर जिस तरह से अटकलों का बाजार गर्म है उसके बारे में आपको बेहद कम ही जानकारी होगी। आपको बता दें कि बीजिंग में प्‍योंगयोंग से पहुंची खास ट्रेन से वर्ष 2011 में किम के पिता किम जोंग इल ने भी बीजिंग की यात्रा की थी। उनसे पहले किम इल संग जो कि मौजूदा तानाशाह के दादा थे, ने भी इसी खास ट्रेन से बीजिंग और रूस की यात्रा की थी। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह महज एक ट्रेन ही नहीं है बल्कि एक चलता फिरती हाईटैक वैपंस से सुसज्जित वाहन है, जिसको खास किम परिवार के लिए ही तैयार किया गया है। यही वजह है कि किम के पिता और दादा ने विमान से यात्रा करने से ज्‍यादा इस खास ट्रेन पर ही भरोसा किया है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अपने निधन से कुछ पहले अगस्‍त 2011 में किम जोंग इल ने इसी खास ट्रेन से मास्‍को की यात्रा की थी। इस दौरान उन्‍होंने वहां पर रूसी राष्‍ट्रपति दमित्री मेडवेडेव से मुलाकात की थी।

खास ट्रेन को लेकर वीडियो वायरल 

बीजिंग में इस खास ट्रेन को लेकर एक वीडियो भी वायरल हो गया है। कहा जा रहा है इससे आए मेहमानों को बीजिंग के खास गेस्‍ट हाउस में ठहराया जाएगा। इस ट्रेन में किम की सुविधा और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। पूर्व रशियन डिप्‍लोमेटिक ने वर्ष 2001 में हुई किम की यात्रा को याद और इस ट्रेन के बारे में बताया था कि यह वास्‍तव में बेहद खास है। उनके मुताबिक यह ट्रेन बाहर और अंदर से बेहद सुंदर है और इसमें उनकी सुख-सुविधा के अलावा सुरक्षा के भी बेहतरीन उपाय किए गए हैं। इसके अंदर लेडी कंडक्‍टर हैं। इन सभी के अलावा ट्रेन में किम के परिवार के लिए दुनिया की बेहतरीन शराब का इंतजाम किया जाता है। पीली पट्टी वाली हरे रंग की यह ट्रेन में सोमवार दोपहर को बीजिंग पहुंची थी।

साथ चलती हैं दो और ट्रेन 

डिप्‍लोमेट के मुताबिक किम के मास्‍को आगमन पर वहां उनकी शान में कोरियाई और रूसी भाषा में गीत प्रस्‍तुत किए गए थे। यहां पर एक खास बात यह भी है कि जब कभी भी मौजूदा किम जोंग उन या उनके पिता और दादा ने इस ट्रेन की सवारी की तब-तब इस ट्रेन के साथ दो और ट्रेन चलती हैं। यह ट्रेन किम की सुरक्षा के लिए साथ चलती थी। हालांकि जिस ट्रेन में किम सफर करते हैं उस ट्रेन में भी उनकी सुरक्षा की पुख्‍ता व्‍यवस्‍था होती है। किम की ट्रेन में कांफ्रेंस रूम के अलावा ऑडियेंस चैंबर, बैडरूम, सैटेलाइट फोन, अलग से टीवी रूम की भी सुविधा मौजूद है।

सत्ता संभालने के बाद कभी देश से बाहर नहीं गए किम

आपको यहां पर ये भी बता दें कि जब से किम ने सत्ता संभाली है तब से वह कभी देश के बाहर नहीं गए हैं। ऐसे में उनका ट्रेन से बीजिंग जाना वह भी ऐसे समय जब ट्रंप से उनकी वार्ता होनी है कई तरह के सवाल खडे करता है। यहां ये भी जानना जरूरी है कि चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्‍यापारिक साझेदार है। उत्तर कोरिया का करीब 90 फीसद कारोबार महज चीन से होता है बाकि दस फीसद में पूरा विश्‍व समाया हुआ है। हालांकि अमेरिका और यूएन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने भी उत्तर कोरिया को भेजे जाने वाले सामान की आपूर्ति रोक दी थी। इन सभी के बीच जापान और अमेरिका की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया था कि चीन और रूस चोरी छिपे उत्तर कोरिया को चीजों की आपूर्ति करने में लगे हैं। दोनों देशों ने इसको लेकर सुबूत भी मुहैया करवाए थे।

Posted on

ब्लूमबर्ग मीडिया का दावा: 2019 छोड़िए जनाब, 2029 तक पीएम रहेंगे नरेंद्र मोदी

यूपी उपचुनाव के नतीजों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है क्योंकि उसे हराने के लिए उसके सारे विरोधी एक जुट हो गए। जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के सारे विरोधी एक साथ होकर चुनाव लड़ेंगे, जिससे कि नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने से रोका जाए। लेकिन इसी बीच भाजपा के लिए एक सुखद खबर आई है, जिसने उसे मुस्कुराने का मौका दे दिया है।

ब्लूमबर्ग मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र मोदी केवल 2019 ही नहीं बल्कि 2029 तक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। पीएम मोदी भारत देश में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं ब्लूमबर्ग मीडिया समूह ने दुनिया के 16 देशों के नेताओं का एक आकलन किया है, जिसके बाद उसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पीएम मोदी भारत देश में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं। उनके प्रशंसक एक 10 साल का बच्चा भी है तो वहीं 90 साल के बुजुर्ग भी उन्हें पसंद करते हैं। Loading ad मोदी को लोग पसंद करते हैं ये ही उनकी ताकत है, भाजपा को लोग पसंद करे ना करें लेकिन मोदी को लोग पसंद करते हैं और उनकी बातों पर भरोसा करते हैं , जिसके कारण लोग उन्हें देश के कल्याण के लिए एक और मौका दे सकते हैं। मोदी की 2029 तक पीएम बने रहने की प्रबल संभावना और अगर ऐसा हुआ तो 2019 में भी उनके नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी, यहीं नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी की 2029 तक पीएम बने रहने की प्रबल संभावना है। उनके समक्ष अभी देश में कोई दमदार नेता नहीं है , जिसका फायदा निश्चित तौर पर नरेंद्र मोदी को मिलेगा ।

डोनाल्ड ट्रंप से नाराज है लोग पीएम मोदी के अलावा रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के तानाशाह किंग किम जोंग, सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को भी कहा गया है कि ये भी अपने देश की सत्ता लंबे वक्त तक संभाल सकते हैं, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में रिपोर्ट कहती है कि ये जनता के बीच खासे लोकप्रिय नहीं है इसलिए हो सकता है कि ये उनका पहला और आखिरी कार्यकाल हो, संभव है कि वो अपना कार्यकाल भी पूरा ना कर पाए।

व्लादिमिर पुतिन जबकि रूस में राष्ट्रपति चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाले व्लादिमिर पुतिन को 2024 में पद त्यागना पड़ सकता है। जबकि नेतन्याहू के बारे में रिपोर्ट कहती है कि उनका नाम घोटलों में शामिल है। अगर वे इसमें दोषी पाए गए तो उनकी सत्ता हाथ से जा सकती है। जबकि ब्लूमबर्ग मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जापान के पीएम शिंजो आबे भी कई आरोपों के घेरे में हैं, ऐसे में उनकी सत्ता में वापसी मुश्किल दिख रही है।

Posted on

पाकिस्तान पहुंची UN टीम, पर सईद ने भारत-US की कोशिशों के खिलाफ चला अपना दांव

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की टीम के पैर रखने से पहले अपना दांव चल दिया है. इस टीम के पाक दौरे की वजह से हाफिज सईद को अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा था. बुधवार दोपहर को यह टीम पाकिस्तान पहुंची, लेकिन तब तक हाफिज खुद को सुरक्षित कर चुका था.

जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ने इस टीम के दौरे की वजह से मंगलवार शाम को लाहौर हाई कोर्ट में अपील की कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. कोर्ट ने हाफिज सईद की अपील सुनने के बाद उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

सईद ने कहा था कि भारत और अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तानी सरकार उसे फिर से गिरफ्तार कर सकती है. हाफिज की शिकायत के बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी सरकार को हाफिज के खिलाफ कोई आशंकित कदम लेने से रोक दिया है.

जानकारी के मुताबिक यूएनएससी की 1267 सेंक्शंस कमेटी की निगरानी समिति बुधवार दोपहर को पाकिस्तान पहुंच गई. समिति यह देखने के लिए आई है कि पाकिस्तान यूएन के प्रतिबंधों को लागू कर रहा है या नहीं. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तानी सरकार यूएन की कमेटी को हाफिज सईद या उसके परिसरों तक नहीं जाने देगी.

इससे पहले, हाफिज ने मंगलवार शाम को ही हाफिज सईद ने अपने वकील एके डोगर के जरिए अदालत में याचिका देकर कहा था कि उसके या उसके संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए. उसने इस याचिका में अपने चैरिटी अस्पतालों और स्कूलों का भी हवाला दिया था.

आपको बता दें कि हाफिज सईद को पिछले साल नवंबर में ही नजरबंदी से रिहाई मिली है. इसके बाद से वह पाकिस्तानी राजनीति में आने की कोशिश में लगा है. उसने इसके लिए नई राजनीतिक पार्टी ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ भी बनाई है.

माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना हाफिज सईद के राजनीति में आने में उसकी मदद कर रही है. पिछले दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस ही नहीं है तो उस पर कैसे कार्रवाई करें.

हाफिज का नाम 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 में शामिल किया गया था. वहीं अमेरिका ने जून 2014 में लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन करार दिया था.

Posted on

UN टीम को हाफिज सईद-आतंकी संगठनों की सीधी जांच नहीं करने देगा PAK

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठनों की जांच के लिए पाकिस्तान आ रही UN की जांच टीम की राह में पहले ही रोढ़े अटका दिए गए हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि UN की स्पेशल जांच टीम को सईद और उसके संगठनों की सीधी जांच नहीं करने दी जाएगी। ये टीम 25 और 26 जनवरी को पाकिस्तान में रहेगी। इस टीम की पाकिस्तान विजिट इसलिए भी खास हो जाती है कि क्योंकि पिछले ही हफ्ते पाकिस्तान के पीएम शाहिद खकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस नहीं है, लिहाजा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकती।

सईद तक सीधी पहुंच मुमकिन नहीं

– पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ ने यूएन टीम की जांच के बारे में एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें पाकिस्तान सरकार के सूत्रों के हवाले से कई अहम जानकारियां दी गई हैं।
– इन सूत्रों के मुताबिक, यूएन सिक्युरिटी काउंसिल की sanctions monitoring team टीम को हाफिज सईद या जमात-उद-दावा के अलावा इससे जुड़े बाकी संगठनों तक सीधी पहुंच (direct access) नहीं दी जाएगी।
– एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार ने तय किया है कि हाफिज सईद के मामले में वो दबाव में नहीं आएगी।

अभी मंजूरी नहीं मांगी गई

– रिपोर्ट में पाकिस्तान सरकार के एक बड़े अफसर के हवाले से कहा गया- उन्होंने (UNSC टीम) ने फिलहाल, हमसे हाफिज सईद तक सीधी पहुंच की मंजूरी नहीं मांगी है। लेकिन, वो इसकी इजाजत मांगते भी हैं तो उन्हें ये नहीं दी जाएगी। हम उनसे बातचीत कर रहे हैं।
– एक और अफसर ने कहा- ये टीम पाकिस्तान के अफसरों से मिलेगी और बैन किए गए संगठनों की लिस्ट मांगेगी। हमने यूएन के ऑर्डर फॉलो किए हैं। इसलिए, इस मामले में परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।

किन संगठनों पर बैन

– यूएन ने पाकिस्तान में कई संगठनों को बैन किया है। इनमें जमात-उद-दावा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, लश्कर-ए-झांगवी, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और लश्कर-ए-तैयबा शामिल हैं। इनके अलावा इन संगठनों के सरगनाओं जिनमें हाफिज सईद भी शामिल को भी बैन किया गया है।

पाकिस्तान सरकार के दावों पर भरोसा नहीं

– पाकिस्तान सरकार ने दावा किया था कि उसने हाफिज सईद के जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के चंदा लगाने और पब्लिक प्रोग्राम करने पर रोक लगा दी है। हालांकि, उसके इन दावों की हकीकत पर सवाल उठते रहे।
– पाकिस्तान के ही कुछ सांसदों ने हाफिज सईद को देश के लिए खतरा बताया। मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया कि सईद पर किसी तरह की कोई बंदिशें नहीं हैं और वो अपने संगठनों के नाम बदलकर काम कर रहा है।
– खतरा तब और बढ़ता नजर आया है जब पता लगा कि पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट में फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को रजिस्टर कराने की कोशिश खुद पाकिस्तान सरकार कर रही है। इसके बाद भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया।

 अमेरिका की पाकिस्तान को दो टूक

– शुक्रवार को अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने पाकिस्तान से दो टूक कहा कि हाफिज सईद एक आतंकवादी है और उसके खिलाफ पूरी तरह कार्रवाई होनी चाहिए।
– अमेरिका का यह बयान पाकिस्तान के पीएम द्वारा सईद को क्लीन चिट देने के बाद आया। अब्बासी ने कहा था कि सईद के खिलाफ कानूनी तौर पर कोई केस दर्ज नहीं है और इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
– सईद को 9 महीने हाउस अरेस्ट में रखने के बाद पिछले साल नवंबर में ही रिहा किया गया था। जमात-उद-दावा को 2014 में आतंकी संगठन घोषित किया गया था।

Posted on

कौन हैं संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आईना दिखाने वाली ये महिला?

संयुक्त राष्ट्र में एक गलत तस्वीर दिखाकर मुश्किल में फंसे पाकिस्तान पर भारत ने एक बार फिर पलटवार किया.

यूएन में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने भारत पर इल्ज़ाम लगाते हुए एक तस्वीर दिखाई थी जिसमें एक लड़की का चेहरा पेलेट गन से ज़ख़्मी दिख रहा है.

तस्वीर को कश्मीर का बताया गया जबकि ये फ़लस्तीन की थी.

अब बारी भारत की थी और उसने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत पाकिस्तान की तस्वीर के बदले एक और तस्वीर दिखाई.

भारत ने दिया पाकिस्तान को जवाब

पॉलोमी त्रिपाठी
इमेज कॉपीरइट FACEBOOK

यूएन में भारत की परमानेंट मिशन के साथ नियुक्त सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाब देते हुए लेफ़्टिनेंट उमर फ़य्याज़ की तस्वीर दिखाई.

इस साल मई में जम्मू कश्मीर के अफ़सर उमर फ़य्याज़ को अगवा कर बाद में हत्या कर दी गई थी.

भारत की तरफ़ से संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के 72वें सत्र में भारत की तरफ़ से पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाब दिया.

इस जवाब में कहा गया है, ”मैं यहां पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि के 23 सितंबर, शनिवार को पटल पर रखे गए बयान का जवाब देने के लिए हूं.”

कौन हैं उमर फ़य्याज़?

पॉलोमी त्रिपाठी
इमेज कॉपीरइट TWITTER

पोलॉमी ने कहा, ”पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि ने एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के केंद्र के रूप में पाकिस्तान की भूमिका से ध्यान हटाने की कोशिश की. ऐसा उन्होंने एक ज़ख़्मी लड़की की तस्वीर दिखाते हुए किया.”

”ये फ़लस्तीन की लड़की राव्या अबु जॉम है और तस्वीर अमरीकी फ़ोटोग्राफ़र हेदी लेवाइन ने जुलाई 2014 में ली थी. 24 मार्च 2015 को ये फ़ोटो न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापी और कैप्शन था ‘कंफ़्लिक्ट, करेज एंड हीलिंग इन गाज़ा.”

”पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि ने इस तस्वीर के ज़रिए भारत के बारे में झूठ फैलाने की कोशिश की. फ़र्ज़ी तस्वीर के ज़रिए फ़र्ज़ी नेरेटिव गढ़ने का प्रयास किया.”

पाकिस्तान ने दिखाई थी गलत तस्वीर

पॉलोमी त्रिपाठी
इमेज कॉपीरइटTWITTER

”पाकिस्तान की इस झूठी कोशिश के सामने हम असेंबली को उस दर्द की सच्ची तस्वीर दिखाना चाहते हैं जो पाकिस्तान की साज़िशों की वजह से भारत को भुगतने पड़ रहे हैं.”

”ये नकली नहीं बल्कि लेफ़्टिनेंट उमर फ़य्याज़ की असली तस्वीर है. वो भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर के एक नौजवान अफ़सर थे.”

एक शादी समारोह से उन्हें अगवा किया गया. और पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादियों ने मई 2017 में उन्हें बर्बर तरीके से प्रताड़ित कर मार डाला.”

”ये असली तस्वीर है, जो कड़वी हक़ीक़त दिखाती है…पाकिस्तान का असली चेहरा अब किसी से छिपा नहीं है.”

कौन हैं पॉलोमी त्रिपाठी?

पॉलोमी त्रिपाठी
इमेज कॉपीरइट TWITTER

ज़ाहिर है यूएन में भारत का रुख़ इस बार काफ़ी कड़ा दिख रहा है. सोशल मीडिया पर भी संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दल की तारीफ़ हो रही है.

कामयाबी टीम वर्क की है लेकिन पॉलोमी सामने हैं, ऐसे में उनकी प्रशंसा होना लाज़िमी है.

पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमए और एमफ़िल किया है. वो सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ रीजनल डेवलपमेंट में पढ़ाई किया करती थीं.

साल 2006 में वो रेवेन्यू सर्विस में चुनी गईं और उसके बाद साल 2007 में फ़ॉरेन सर्विसेज़ में.

जून में पहुंची हैं यूएन

पॉलोमी त्रिपाठी
इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES

मूल रूप से कोलकाता की रहने वालीं पॉलोमी का विवाह साल 2007 में हुआ और उनके पति दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं.

वो शुरू से ही फॉरेन सर्विस में जाना चाहती थीं. उनका परिवार इस बात पर काफ़ी गर्व महसूस कर रहा है लेकिन उनका कहना है कि ये टीम वर्क है.

पॉलोमी इसी साल जून में यूएन में गई और उन्हें मौजूदा ज़िम्मेदारी संभाले हुए कुछ ही महीने हुए हैं.

रेवेन्यू से फ़ॉरेन सर्विस तक

पॉलोमी त्रिपाठी
इमेज कॉपीरइटTWITTER

वो इससे पहले चार साल साउथ ब्लॉक में डिप्टी सेक्रेटरी (एडमिनिस्ट्रेशन) रह चुकी हैं. साल 2007 से 2009 के बीच वो अंडर ट्रेनिंग रहीं और साल 2009 से 2013 के बीच स्पेन में पोस्टेड रहीं.

साल 2013-14 के बीच आसियान मल्टी लेटरल में उन्होंने अहम ज़िम्मेदारी संभाली और साल 2014 से जून तक एडमिनिस्ट्रेशन में रहीं. साल 2017 में जून में वो यूएन पहुंचीं.

दिलचस्पी की बात करें तो पॉलोमी को पढ़ना और पसंद है और ऐसा बताया जाता है कि वो बिना पढ़ें सोती नहीं हैं. ऐसे में किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं.

Posted on

उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए अमरीका में नो एंट्री

अमरीका ने नए यात्रा प्रतिबंध जारी किए हैं जिनमें उत्तर कोरिया, वेनेज़ुएला और चाड के नागरिक भी अमरीका नहीं आ सकेंगे.

वेनेज़ुएला के लिए लगाए गए प्रतिबंध सिर्फ़ सरकार के लिए काम कर रहे लोगों और उनके परिवारों पर ही लागू होंगे.

डोनल्ड ट्रंप और किम योंग उनइमेज कॉपीरइट “GETTY IMAGES”

अमरीका के यात्रा प्रतिबंधों में शामिल देशों की सूची में से सूडान को निकाल दिया गया है.

ईरान, यमन, लीबिया, सोमालिया और सीरिया के लोगों के अमरीका आने पर रोक जारी रहेगी.

डोनल्ड ट्रंप का ट्वीटइमेज कॉपीरइटTWITTER/@REALDONALDTRUMP

ट्रंप का ट्वीट

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को इस सिलसिले में ट्वीट भी किया.

उन्होंने लिखा, “अमरीका को सुरक्षित बनाना मेरी पहली प्राथमिकता है. हम उन लोगों को अपने यहां स्वीकार नहीं करेंगे जिनकी सुरक्षा जांच को लेकर हम आश्वस्त नहीं हो सकते.”

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइट “GETTY IMAGES”

क्या हैं यात्री प्रतिबंध?

यात्री प्रतिबंध यानी ट्रैवल बैन का मतलब है किसी देश के नागरिकों या नागरिकों के समूह के अपने यहां आने पर प्रतिबंध लगा देना.

राष्ट्रपति ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध शुरू से विवादों में रहे हैं.

पहले उन्होंने छह मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों पर यह प्रतिबंध लगाया था और इसे बड़े स्तर पर ‘मुस्लिम प्रतिबंध’ की तरह देखा गया था.

इसे कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा और बड़े स्तर पर इसके ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए. अक्टूबर में अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई होगी.

स्कूली बच्चों जैसे लड़ रहे हैं ट्रंप और किमः रूस

डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइट “GETTY IMAGES” डोनल्ड ट्रंप की ट्रैवल बैन नीति के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं

नए प्रतिबंधों का मतलब?

उत्तर कोरिया और वेनेज़ुएला के इस सूची में जुड़ने का अर्थ होगा कि यात्री प्रतिबंध अब सिर्फ़ मुस्लिम बहुल देशों के लिए सीमित नहीं रह जाएंगे.

नई प्रतिबंध सूची सुरक्षा जांच की प्रक्रिया और सहयोग पर आधारित बताई जा रही है और हर देश के लिए इसके आधार अलग हैं, जो इस प्रकार हैं –

  • व्हाइट हाउस ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने अमरीकी सरकार के साथ किसी भी तरह से सहयोग नहीं किया और सारे मोर्चों पर निराश किया, इसलिए उसके नागरिकों के अमरीका आने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाता है.
उत्तर कोरिया पर यूएन में क्या बोले ट्रंप
  • आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में चाड एक अहम सहयोगी देश है, लेकिन फिर भी उसने आतंकवाद से जुड़ी दूसरी सूचनाएं साझा नहीं कीं- जिनकी अमरीका को ज़रूरत थी. लिहाज़ा उसके नागरिको को अब बिजनेस और टूरिस्ट वीज़ा नहीं दिया जाएगा.
  • वेनेज़ुएला के कुछ सरकारी अफ़सरों और उनके परिवार के सदस्यों के आने पर प्रतिबंध है. हाल ही में अमरीका ने वेनेज़ुएला की सरकार पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन अब अमरीका के मुताबिक, यह जांचने में वेनेज़ुएला सहयोग नहीं कर रहा है कि उसके नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा या जनसुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा कर सकते हैं या नहीं और वह प्रत्यर्पित किए जाने वाले नागरिकों को भी स्वेच्छा से स्वीकार नहीं कर रहा है.

नए प्रतिबंध 18 अक्टूबर से लागू होंगे, लेकिन जिन्हें पहले से वीज़ा मिल चुका है, वे इससे बेअसर रहेंगे. ज़्यादातर पाबंदियों के तहत, बी-1 और बी-2 बिजनेस और टूरिस्ट वीज़ा को रद्द कर दिया जाएगा.

व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि इराक़ भी ज़रूरी मानकों पर खरा नहीं उतरा है, लेकिन फिर भी उस पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं क्योंकि अमरीका से उसका करीबी और सहयोगी रिश्ता है और दोनों मिलकर इस्लामिक स्टेट से लड़ रहे हैं.

Posted on

UN के मंच से सुषमा ने उठाए ये 10 मुद्दे, PAK को दिखाई औकात

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र के संबोधन में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निशाने पर पाकिस्तान के अलावा चीन और अमेरिका भी रहे. सुषमा स्वराज ने अपनी बात की शुरुआत तो पीएम मोदी द्वारा उठाए गए विकास कार्यों को बताने से की, लेकिन आतंकवाद के मसले पर आते-आते विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की जमकर क्लास लगानी शुरू कर दी. सुषमा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जिन समस्याओं का समाधान तलाश रहा है उनमें आतंकवाद सबसे ऊपर है.

1. सुषमा ने अपने संबोधन में कहा, ‘अगर हम अपने शत्रु को परिभाषित नहीं कर सकते तो फिर मिलकर कैसे लड़ सकते हैं? अगर हम अच्छे आतंकवादियों और बुरे आतंकवादियों में फर्क करना जारी रखते हैं तो साथ मिलकर कैसे लड़ेंगे? अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं बना पाती है तो फिर हम मिलकर कैसे लड़ सकते हैं?’ सुषमा सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन का परोक्ष रूप से हवाला दे रही थीं जिसने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के भारत के प्रयास को बार-बार अवरुद्ध करने का काम किया है. सुषमा स्वराज ने कहा, ‘मैं इस सभा से आग्रह करना चाहूंगी कि इस बुराई को आत्म-पराजय और निरर्थक अंतर के साथ देखना बंद किया जाए, बुराई तो बुराई होती है. आइए स्वीकार करें कि आतंकवाद मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा है. इस निर्मम हिंसा को कोई किसी तरह से उचित नहीं ठहरा सकता.’

2. सुषमा ने सवाल पूछा, ‘आज मैं पाकिस्तान के नेताओं से कहना चाहूंगी कि क्या आपने कभी सोचा है कि भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए. लेकिन आज भारत की पहचान दुनिया में आईटी की महाशक्ति के रूप में क्यों हैं और पाकिस्तान की पहचान आतंकवाद का निर्यात करने वाले देश और एक आतंकवादी देश की क्यों है?’ उन्होंने कहा, ‘हमने वैज्ञानिक, विद्वान, डॉक्टर, इंजीनियर पैदा किए और आपने क्या पैदा किया? आपने आतंकवादियों को पैदा किया. आपने आतंकी शिविर बनाए हैं, आपने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और हक्कानी नेटवर्क पैदा किया है. सुषमा ने कहा कि पाकिस्तान ने जो पैसा आतंकवाद पर खर्च किया, अगर अपने विकास पर खर्च करता तो आज दुनिया अधिक सुरक्षित और बेहतर होती.

3. पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की ओर से शांति और मित्रता की बुनियाद पर विदेश नीति तामीर किए जाने के अब्बासी के दावे पर सुषमा ने कहा कि वह नहीं जानतीं कि जिन्ना ने किन सिद्धांतों की पैरवी की थीं, लेकिन इतना जरूर कह सकती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार संभालने के बाद शांति और दोस्ती का हाथ बढ़ाया. सुषमा ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह जवाब देना चाहिए कि आपके देश ने इस प्रस्ताव को क्यों ठुकराया.’

4. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से पैदा हुई चुनौतियों पर ‘चर्चा से ज्यादा कार्रवाई’ की आवश्यकता है. उन्होंने विकसित देशों के नेताओं से अपील की कि वे अविकसित देशों की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और हरित जलवायु वित्तपोषण के जरिये मदद करें. विकसित दुनिया को अन्य की तुलना में अधिक सावधानी से सुनना चाहिये क्योंकि उनके पास दूसरों की तुलना में अधिक क्षमता है. पेरिस समझौते से चीन और भारत जैसे देशों के अधिक लाभान्वित होने का दावा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जलवायु परिवर्तन पर समझौता अमेरिका के लिये सही नहीं है क्योंकि यह उसके व्यापार और नौकरियों को बुरी तरह प्रभावित करता है.

5. यूएनजीए में अपने पिछले वर्ष के भाषण का जिक्र करते हुए सुषमा ने कहा कि उन्होंने जलवायु परिवर्तन को अपने अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया था. विदेश मंत्री ने कहा, ‘भारत कह चुका है कि वह पेरिस समझौते के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह ऐसा इसलिए नहीं है कि हम किसी ताकत से डरे हुए हैं, किसी दोस्त या दुश्मन से प्रभावित हैं या किसी लालच के वश में ऐसा कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि यह हमारे पांच हजार वर्षों के दर्शन का परिणाम है.

6. सुषमा ने कहा, ‘जब हम विश्व शांति की बात करते हैं तो हमारा मतलब न केवल मनुष्यों के बीच शांति की बात होती है, बल्कि प्रकृति के साथ शांति की भी बात होती है. हम समझते हैं कि मनुष्य का स्वभाव कई बार प्रकृति के प्रतिकूल होता है, लेकिन जब मनुष्य का स्वभाव गलत दिशा में जा रहा हो तो हमें इसमें बदलाव लाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘जब हम प्रकृति को अपने लालच से कष्ट पहुंचाते हैं, तो कई बार वह विस्फोटक रूप धारण कर लेती है. हमें प्रकृति के परिणामों, चक्रों और नवीन परिवर्तन के साथ रहना सीखना चाहिए.’

7. सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए टेक्स्ट आधारित वार्ता पर जल्द शुरुआत करने का आह्वान किया. सुषमा बोलीं- सुरक्षा परिषद के सुधार एवं विस्तार पर टेक्स्ट आधारित वार्ता पर प्रयास गत सत्र में शुरू किया गया था. 160 से अधिक देशों ने इस प्रयास के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया था. अगर हम गंभीर हैं, तब कम से कम हम यह कर सकते हैं कि हम एक ऐसा टेक्स्ट तैयार करें जो वार्ता के लिए आधार हो सके.’ उन्होंने कहा कि अगर यह होता है तो यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी. उन्होंने कहा, ‘हमें संयुक्त राष्ट्र के नये महासचिव से बहुत अधिक उम्मीदें हैं.

8. सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से इसी साल अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को लेकर समझौते पर पहुंचने के लिये नई प्रतिबद्धता दिखाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यद्यपि भारत ने 1996 में भी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) का प्रस्ताव दिया था लेकिन दो दशक बाद भी संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद की परिभाषा पर सहमत नहीं हो सका है. उन्होंने कहा, ‘हम भयानक और यहां तक कि दर्दनाक आतंकवाद के सबसे पुराने पीड़ित हैं. जब हमने इस समस्या के बारे में बोलना शुरू किया तो दुनिया की कई बड़ी शक्तियों ने इसे कानून व्यवस्था का मुद्दा बताकर खारिज कर दिया. अब वे इसे बेहतर तरीके से जानते हैं. सवाल है कि हम इस बारे में क्या करें.’

9. आतंकवाद पर अपनी बात रखती हुईं सुषमा ने कहा, ‘हम सबको आत्ममंथन करना चाहिये और खुद से पूछना चाहिए कि क्या हमारी चर्चा, जो कार्रवाई हम करते हैं कहीं से भी उसके करीब है. हम इस बुराई की निंदा करते हैं और अपने सभी बयानों में इससे लड़ने का संकल्प जताते हैं. सच्चाई यह है कि ये सिर्फ दस्तूर बन गए हैं.’ उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि जब हमें इस शत्रु से लड़ने और उसका नाश करने की जरूरत है तो कुछ का स्वहित उन्हें दोहरेपन की ओर ले जाता है.

10. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया कि समुद्री सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं और परमाणु प्रसार को लेकर फिर से खतरनाक खबरें सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा, ‘कुछ उकसावे वाले और उत्तेजक मिले-जुले कारणों से लोग अपने परंपरागत गृह क्षेत्र की मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक और आर्थिक सहूलियत छोड़ रहे हैं और दूसरे देश में शरण मांग रहे हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचैनी का माहौल बनता है. विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी भूख और गरीबी का शिकार है. युवा उम्मीद खो रहे हैं क्योंकि वे बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि महिलाएं, ऐतिहासिक रूप से भेदभाव की शिकार हैं और वे लैंगिक सशक्तीकरण की मांग कर रही हैं.