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यूपी पीसीएस 2018 के लिए ऑनलाइन आवेदन छह से, एसडीएम के 119 पद, जानें क्या एग्जाम पैटर्न में क्या हुए बदलाव

इस बदलाव से अब पीसीएस की मुख्य परीक्षा का महत्व बढ़ जाएगा। साथ ही साक्षात्कार की आड़ में अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देकर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की शिकायतों को पर भी विराम लगेगा।

इसके अलावा अब दो की बजाय वैकल्पिक विषय एक ही होगा। सामान्य अध्ययन के दो की जगह अब चार पेपर होंगे। प्रदेश में भाजपा की सरकार ने इस अहम निर्णय पर पहले ही अपनी मुहर लगा दी है, ताकि पीसीएस परीक्षा में पारदर्शिता रहे। गौरतलब है कि अभी तक पीसीएस परीक्षा में लिखित परीक्षा 1500 नंबर और की होती थी और साक्षात्कार 200 नंबर के होते थे।

बदलाव के बाद लिखित परीक्षा तो 1500 अंकों की ही रहेगी लेकिन, साक्षात्कार में 100 नंबर घटा दिए जाने से चयन प्रक्रिया कुल 1600 नंबरों में पूरी की जाएगी। इस बार कई बदलाव के साथ यूपीएससी ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यूपीएससी से होने वाली आइएएस परीक्षा की तर्ज पर पीसीएस 2018 में भी दो अलग-अलग क्षेत्रों की प्रारंभिक परीक्षाएं एक साथ कराने की योजना तैयार की है। सचिव जगदीश ने बताया कि इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा में पीसीएस के साथ सहायक वन संरक्षक का पेपर भी होगा। यानी प्रश्न पत्र एक ही आएगा जबकि मुख्य परीक्षा अलग-अलग होगी।

19 अगस्त को प्रारंभिक परीक्षा पर असमंजस बरकरार

यूपीपीएससी ने दूसरी छमाही के कैलेंडर में पीसीएस 2018 की प्रारंभिक कराने की तारीख 19 अगस्त घोषित कर रखी है। पहले यह तारीख 24 जून तय थी। अब आवेदन लेने का सिलसिला अगस्त माह के पहले सप्ताह तक चलेगा, ऐसे में परीक्षा तारीख पर असमंजस बना है। हालांकि सचिव का कहना है कि इम्तिहान तय तारीख पर कराने की तैयारी है।

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UPSC 2017 RESULT: उन होनहारों की कहानी जिन्होंने UPSC में लहराया परचम

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फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को पहुंचाएगा फायदा प्राइवेसी लॉ!

यूरोप में अगले माह एक नया नियम का प्रस्ताव आने वाला है, जिसके तहत प्राइवेट लोगों के हाथ में लोगों के निजी डाटा को जाने से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

इस नए नियम के तहत कंपनी डाटा शेयर करने से पहले उपभोक्ता से इसके लिए इजाजत लेगी। सरकार के इस कदम से जहां इंटरनेट पर बड़ी कंपनियों का वर्चस्व खत्म होगा। वहीं छोटी कंपनियों को भी फायदा होगा। हाल के वर्षों में कुछ छोटी कंपनियों ने निजता के नियमो का सम्मान किया है, जबकि बड़ी कंपनियों की ओर से हमेशा इन नियमों की अनदेखी की गई है।

टोरंटो विश्वविद्याल के मार्केटिंग प्रोफेसर एवी गोल्डफार्ब ने प्रतिस्पर्धा पर गोपनीयता नियमों के प्रभावों का अध्ययन किया। गोल्डफार्ब वर्ष 2013 की एक रिपोर्ट के सह-लेखक भी थे, जिसमें कहा गया था कि गोपनियाता से बाजार की प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर होगा क्योंकि उपभोक्ता से किसी चीज की इजाजत लेना एक छोटी कंपनी की लागत बढ़ा सकता है। ऐसे में ये स्टार्टअप के लिए नुकसानदायक होगा।

फेसुबक के मुताबिक एक राजनीतिक रिसर्च करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करीब 87 मिलियन यूजर्स की गोपनीय जानकारी हासिल करके उसका उपयोग किया। इसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस की ओर से मार्क जुकरबर्ग को निशाना बनाया गया। गूगल की वीडियो सर्विस यूट्यूब को लेकर भी कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं।

मॉडल की जांच कर सकेंगे दूसरे देश

यूरोप और अमेरिका की तरह ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश प्राइवेसी को लेकर फेसबुक औऱ गूगल जैसी कंपनियों के विज्ञापन आधारित मॉडल की जांच कर सकती है। अमेरिका के कानून निर्माताओं ने इस माह जुकरबर्गक की संसद में गवाही के दौरान सिलिकॉन वैली को गोपनियता के मुद्दे पर ज्यादा विनियमित बनाने पर जोर दिया। यूरोप में ऐसा ही एक प्रयोग सफल रहा है, जब वर्ष 2014 में वहां की उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लोगों की इच्छा के मुताबिक उनके कंटेट को ऑनलाइट होने से हटाया जा सकेगा।

नहीं पड़ा व्‍यापार पर असर

इसके अलावा वर्ष 2011 के यूरोपियन कानून बेबसाइटों की ओर से लोगों को कूकीज के बारे में जानकारी देने को कहा गया, जिससे कि वो ब्राउजिंग हिस्ट्री को सुरक्षित रखा जा सके और कोई इसका दुरुपयोग न कर सके। इसके बाद पॉपअप वार्निंग को लेकर काम किया गया। इसी के साथ आज के दौर में डेटा की गोपनियता के बीच फेसबुक और गूगल के उपयोग को कम किया जा रहा है। फेसबुक की ओर से कहा गया कि कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले से उनके व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है, जबकि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने कहा इस तिमाही में उनके कर संग्रह में 26 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी कंपनियां

यूरोप में डेटा रेग्यूलेशन को लेकर लाए जा रहे कानून को ‘द जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन’ का नाम दिया गया है। इस कानून के तहत टेक कंपनियों की ओर से यूजर्स के डेटा कलेक्शन, स्टोर और उनके प्रयोग पर कंट्रोल रखा जा सकेगा। यह नया नियम 25 मई से प्रभाव में आएगा। इसके बाद टेक कंपनियों को बताना होगा कि उन्होंने लोगों का डेटा किस तरह से प्राप्त किया है, कहां प्रयोग किया है, और कहां सुरक्षित किया है। ऐसे में कंपनियां उपभोक्ताओं के समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी।

कंपनियां होंगी मजबूत

कुछ लोगों का मानना है कि प्राइवेसी के नियन बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले होंगे। लेकिन छोटी कंपनियों को ये प्रतियोगिता से बाहर कर देंगे। लेकिन पेरिस की एक स्टार्टअप कंपनी के सीईओ की मानें तो डेटा प्रोटेक्शन के नए नियम से कंपनी मजबूत होगी क्योंकि उनका मूल संपत्ति ग्राहक का विश्वास है। गोपनियता कानून के बाद टारगेटेड विज्ञापनों को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी फेसबूक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां फायदे में रहेगी, क्योंकि विज्ञापन देने वाले ज्यादा ऑडियंस उसकी ओर रुख करेंगे। ऐसे में फेसबुक और गूगल की यूट्यूब जैसी कंपनियों को ज्यादा विज्ञापन मिलेगा, जिनके पास क्रमश: 2.2 मिलियन और 1.5 बिलियन मासिक उपभोक्ता हैं।

यूजर्स देंगे सहमति

यूरोपीय डेटा संरक्षण पर्यवेक्षक जोवोवानी बुट्टारेली के मुताबिक गूगल और फेसबुक की निगरानी आयरिश डेटा अथॉरिटी की ओर से की जाएगी, उनके यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय को अलग तरह से ट्रीट करने की बात कही। गूगल प्राइवेसी इंजीनियर योनातन जुंगर के मुताबिक बड़ी कंपनियां डेटा को उपयोग करने के लिए शर्त जोड़ सकती हैं, जबकि छोटी कंपनियां ऐसी शर्त नहीं जोड़ पाएंगी। जैसा कि पिछले दिनों फेसबुक ने वैश्विक स्तर पर उपयोगकर्ताओं से नया सहमति फार्म भरवाना शुरु किया है, जिसके तहत थर्ड पार्टी को उपभोक्ता की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक से इसकी इजाजत लेनी होगी।

नई चुनौती

गोपनियता के आलोचकों ने फेसबुक के नए सहमति फार्म की चुनौती दी है, उनके मुताबिक वे उपयोगकर्ताओं की सूचनाओं को व्यापक रुप में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। न्यू अमेरिका के ओपन टेक्नोलॉजी इंसटीट्यूट के एक वरिष्ठ सलाहकार बेन स्कॉट के मुताबिक नए कानून जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन (जीडीपीआर) को लेकर मेरी चिताएं हैं। मैं उन लोगों को लेकर चिंतित हूं, जो जीडीपीआर में काफी कुछ निवेश करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोपनियता कानून कितना सफल होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस तरह से लागू किया गया है।

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अमेरिका के प्रतिबंध पर करारा जवाब देगा रूस, दूसरे शीत युद्ध का हो सकता है आगाज

रूस ने अमेरिका के लगाए नए प्रतिबंधों पर हाथ पर हाथ रख बैठने की जगह मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है। दरअसल, पूर्व जासूस सरगेई स्क्रीपाल को जहर देने के बाद से दोनों के बीच राजनयिक संकट पैदा हो गया। इसके बाद अमेरिका ने रूस के सात सबसे प्रभावशाली कुलीनों, 12 कंपनियों, 17 वरिष्ठ अधिकारियों और हथियार निर्यातक सरकारी कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है।

2016 में राष्ट्रपति चुनाव, साइबर युद्ध और यूक्रेन व सीरिया में दखल के लिए अमेरिका ने रूस को सजा देने के लिए कानून बनाया था। इसी आधार पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगाया गया।

इसपर सख्त रुख अपनाते हुए रूस ने कहा, हम रूस के खिलाफ लिए गए हर कदम का करारा जवाब देंगे। रूस के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘अमेरिका पहले भी 50 चरणों में प्रतिबंध लगाकर भी कुछ हासिल नहीं कर पाया। इसलिए वह वीजा जारी न करने और रूसी औद्योगिक कंपनियों की संपत्ति जब्त करने की धमकी दे रहा है। शायद वह भूल गया है कि निजी संपत्ति जब्त करना चोरी है। प्रतिबंध लगाने से अमेरिका खुद ही बाजार अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा का दुश्मन बन रहा है।’

दूसरे शीत युद्ध का हो सकता है आगाज
अमेरिका ने अल्यूमीनियम कारोबारी ओलेग डेरीपास्का और सरकारी उर्जा कंपनी गजप्रौम के निदेशक एलेक्सी मिलर पर प्रतिबंध लगाया है। ओलेग पर रूसी सरकार के लिए काम करने का आरोप है। ये दोनों राष्ट्रपति पुतिन के करीबी माने जाते हैं। अमेरिका के इस कदम से एक बार फिर शीत युद्ध हो सकता है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि किसी तरह का दबाव हमें अपने मकसद से नहीं भटका सकता है।
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5 दिन में डिफॉल्‍टर हो सकता है पंजाब नेशनल बैंक, जानें क्‍या होगा लाखों कस्‍टमर्स का

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नया बैंकिंग घोटाला 1394 करोड़ का एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का, CBI ने दर्ज किया केस

बैंक से जुड़े धोखाधड़ी और अरबों रुपए के घोटाले खत्म होने का नाम नहीं ले रहे. एक के बाद एक बैंक से जुड़े घोटाले सामने आ रहे हैं. एक नए घोटाले में सीबीआई ने टोटेम इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ 1,395 करोड़ के घोटाले के लिए केस दर्ज किया है.

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) की ओर से गुरुग्राम स्थित टोटेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (हैदराबाद) के खिलाफ मिली शिकायत के बाद इस कंपनी और इसके प्रोमोटर्स तथा निदेशक टोटेमपुड़ी सालालिथ और टोटेमपुड़ी कविता पर केस दर्ज कर लिया है. कंपनी पर आरोप है कि उसने 8 बैंकों के साथ धोखाधड़ी करते हुए 1,395 करोड़ रुपए का घोटाला किया.

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की इंडस्ट्रियल फाइनेंस शाखा ने सीबीआई को भेजे अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने बैंक के साथ 303.84 करोड़ की धोखाधड़ी की.

केस के अनुसार, कंसोर्टियम के जरिए यूबीआई की अगुवाई में 8 बैंकों से कर्ज लिया गया. इस तरह सभी बैंकों की कंसोर्टियम राशि 1394.43 करोड़ हो गई. टोटेम इंफ्रा रोड प्रोजेक्ट, वॉटर वर्क्स और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कारोबार से संबंधित है. टोटेम इंफ्रा ने देश की जानीमानी कंपनियां जैसे एलएंडटी, आरआईटीईएस और इरकॉन इंटरनैशनल के लिए सबकॉन्ट्रैक्ट पर भी काम किया है.

एक सीबीआई अधिकारी ने कहा, ‘ऋण यूबीआई समेत 8 बैंकों से लिया गया. कंपनी पर सभी बैंकों का कुल 1,394.43 करोड़ रुपए बकाया है. ऋण और ब्याज भुगतान डिफॉल्ट होने के बाद इस खाते को 30 जून 2012 को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में डाल दिया गया था.’ यह कंपनी सड़क निर्माण, जल कार्य और इमारत निर्माण से जुड़ी हुई है.

कर्ज देने वाले बैंक का दावा है कि कंपनी ने उससे कर्ज लेने के बाद फंड डायवर्ट किया है. वहीं अपना घाटा दिखाने के लिए कंपनी ने अपने खर्च और सैलरी के मद को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया है. बैंक के मुताबिक कर्ज में डिफॉल्ट करने के बाद से कंपनी के प्रमोटर्स फरार हैं और बैंक के पास उनके नए ठिकाने की कोई जानकारी नहीं मौजूद है.

इससे पहले, बुधवार को भी सीबीआई ने चेन्नई की ज्वैलर कंपनी कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 14 बैंकों से कुल 824.15 करोड़ रुपए ऋण धोखाधड़ी में मामला दर्ज किया था. इस राशि को भी एनपीए में डाल दिया गया है.

कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से पूछताछ की जा रही है. कंपनी द्वारा कर्ज की अदायगी न करने पर इनको दिए लोन को एनपीए में डाल दिया गया था.

पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद देश में वित्तीय फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आ चुके हैं. राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के अलावा कई जगहों पर विभिन्न कंपनियों द्वारा बैंकों को चूना लगाने का मामला सामने आ चुका है और जांच एजेंसियों पड़ताल में जुटी हैं.

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कनिष्‍क गोल्‍ड के डायरेक्‍टर भूपेश जैन, नीता जैन से CBI ने की पूछताछ, 824Cr का है फ्रॉड

करीब 824 करोड़ रुपए के एसबीआई फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर्स भूपेश जैन और नीता जैन से पूछताछ की। साथ ही सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड के प्रमोटर्स और डायरेक्‍टर्स के खिलाफ लूक-आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। चेन्‍नई की कंपनी कनिष्‍क गोल्‍ड को 14 बैंकों के कंसोर्टियम ने लोन दिया था, जिसमें एसबीआई सबसे आगे है। यह लोन अब एनपीए घोषित हो चुका है। इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने एसबीआई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनबी में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद फ्रॉड का यह दूसरा बड़ा मामला है।

2007 से कनिष्‍क गोल्‍ड ने लोन लेना शुरू किया 
एसबीआई की ओर से कहा गया, कनिष्क गोल्ड ने 2007 से कर्ज लेना शुरू किया और बाद में उसने अपनी क्रेडिट की सीमा बढ़वा लिया। कनिष्क का रजिस्टर्ड ऑफिस चेन्नई में है। इसके मालिक और प्रमोटर-डायरेक्टर भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन हैं। एसबीआई ने शिकायत में कहा कि ज्वैलर ने सबसे पहले मार्च 2017 में ब्याज भुगतान में 8 सदस्य बैंकों से डिफॉल्ट किया। अप्रैल 2017 तक कनिष्क ने सभी 14 बैंकों को पेमेंट रोक दी। 5 अप्रैल 2017 को स्टॉक ऑडिट की शुरुआत के समय बैंकर्स प्रमोटर से संपर्क करने में असफल रहे।

मार्च 2017 में सामने आया डिफॉल्‍ट 
एसबीआई के मुताबिक, मार्च 2017 में कनिष्क ज्वैलरी का डिफॉल्ट सामने आया था। जब उसने 8 सदस्य बैंकों का ब्याज नहीं चुकाया। इसके बाद अप्रैल 2017 में सभी 14 बैंकों का ब्याज चुकाने में असमर्थता जताते हुए पेमेंट रोक दी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से संपर्क किया लेकिन वह नहीं मिले। 25 मई 2017 को कनिष्क के कॉर्पोरेट ऑफिस का दौरा करने बैंकर्स पहुंचे, लेकिन फैक्ट्री और शोरूम दोनों ही बंद थे। भूपेश जैन ने उसी दिन बैंकों को लेटर लिखकर दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और सभी स्टॉक को हटाने के बारे में बताया। मद्रास ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक, कनिष्क गोल्ड लगातार घाटे में जा रही थी और उसके लिए काम जारी रखना संभव नहीं हो पा रहा था। मई 2017 में ही उसने घाटे से बचने के लिए अपने सभी आउटलेट्स बंद कर दिए।

SBI ने अकेले 240 करोड़ का लोन दिया
जानकारी के अनुसार एसबीआई ने ज्वैलरी कंपनी को 240 करोड़ रुपए लोन दिया था। इसके अलावा पीएनबी ने 128 करोड़, आईडीबीआई ने 49 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 46 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 54 करोड़, यूनियन बैंक ने 53 करोड़, यूकों बैंक ने 45 करोड़, सेंट्रल बैंक ने 22 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 23 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 32 करोड़, तमिलनाडु बैंक ने 27 करोड़, एचडीएफसी बैंक ने 27 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक ने 27 करोड़ और आंध्रा बैंक ने 32 करोड़ रुपए लोन दिया था।

नीरव मोदी केस से कैसे अलग है ये फ्रॉड?
यह मामला नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा पीएनबी में किए गए फ्रॉड से अलग है। पीएनबी के मामले में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का गलत इस्तेमाल कर बैंक से पैसे लिए गए। कनिष्‍क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मामले में बैंक को गलत फाइनेंशियल एस्टेमेंट और रिकॉर्ड दिखाकर लोन लिया गया। कुल लोन 824 करोड़ रुपए का है, लेकिन ब्याज सहित यह र‍कम इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है।

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पुतिन के प्रेजेंटेशन में फ़्लोरिडा परमाणु हमले के निशाने पर क्यों?

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने गुरुवार को परमाणु हथियारों के नए ज़खीरे को दुनिया के सामने लाते हुए एक प्रेज़ेंटेशन दिखाया. इस दौरान एक वीडियो ग्राफ़िक्स में अमरीका के फ़्लोरिडा पर मिसाइलों की बारिश होती दिखाई गई.

लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि रूस परमाणु युद्ध की स्थिति में सनशाइन स्टेट फ़्लोरिडा को लक्ष्य क्यों बनाना चाहेगा?

फ़्लोरिडा में वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड और एवरग्लेड्स नेशनल पार्क जैसे पर्यटक स्थल हैं. इसके साथ ही यहां राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के मार-ए-लागो रिसॉर्ट जैसे हाई प्रोफाइल टारगेट भी हैं.

रूस में 18 मार्च को राष्ट्रपति चुनाव होने हैंइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionरूस में 18 मार्च को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं

ऐसा क्या है फ़्लोरिडा में?

अमरीकी रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि पेंटागन को पुतिन की इन बातों से आश्चर्य नहीं हुआ.

रूसी ख़तरे को महत्वहीन करार देते हुए पेंटागन प्रवक्ता डैना व्हाइट ने कहा, “अमरीकी लोग आश्वस्त रहें, हम पूरी तरह तैयार हैं.”

पुतिन के इस वीडियो एनिमेशन में कई परमाणु हथियारों को फ़्लोरिडा की ओर जाते दिखाया गया है.

राष्ट्रपति ट्रंप के फ़्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो रिसॉर्ट में कई परमाणु बंकर हैं, जहां राष्ट्रपति बनने के बाद वो कई वीकेंड गुज़ार चुके हैं.

परमाणु हथियारइमेज कॉपीरइटREUTERS

1927 में निर्मित मार-ए-लागो में इन बंकरों में से तीन कोरियाई युद्ध के दौरान स्थापित किए गए थे.

कुछ मील की दूरी पर वेस्ट पाम बीच में ट्रंप के गोल्फ़ कोर्स में (अमरीकी मैगज़ीन स्कवायर के अनुसार दूसरे होल के नीचे) एक और बम शेल्टर है.

दूसरा बंकर राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी के लिए बनाया गया था जो मार-ए-लागो से बहुत दूर नहीं है.

पीनट आइलैंड पर स्थित इस बंकर से महज 10 मिनट की दूरी पर पाम बीच हाउस है, जहां केनेडी अकसर ठहरा करते थे.

पुतिन का प्रज़ेंटेशनइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

जानकार क्या मानते हैं?

विशेषज्ञ कहते हैं कि ये बंकर चाहे जितने भी शानदार तरीके से बनाए गए हों, सीधे हमले की स्थिति में कोई भी बंकर सुरक्षित नहीं बच सकेगा.

एक और लक्ष्य अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) हो सकता है, जिसका मुख्यालय टैंपा के मैक्डिल एयरबेस में है.

सेंटकॉम पर मध्य-पूर्व, मध्य एशिया और उत्तर अफ्रीका के कुछ हिस्सों में ऑपरेशन के ज़िम्मेदारी है.

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु युद्ध की स्थिति में मुख्य लक्ष्य फ़्लोरिडा नहीं होगा.

मैथ्यू क्रोएनिग अपनी किताब द लॉजिक ऑफ़ अमरीकन न्यूक्लियर स्ट्रैटजी में लिखते हैं कि रूस की प्राथमिकता अमरीका के मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को कमज़ोर करने की होगी.

वो लिखते हैं, “बहुत संभव है कि मॉस्को मोंटाने के मालस्टॉर्म एयरफ़ोर्स बेस, नॉर्थ डकोटा में मिनोट एयरफोर्स बेस, ओमाहा, नेब्रास्का और ऑफ़ट जैसे एयर फोर्स बेस को लक्ष्य बनाना चाहेगा.”

परमाणु हथियारइमेज कॉपीरइटREUTERS

सिर्फ़ एक संदेश

क्रोएगिन लिखते हैं, “रूस सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दो अमरीकी पन्डुब्बियों के ठिकानों, वॉशिंगटन के बांगोर और जॉर्जिया के किंग्स बे के साथ ही देश भर में फैले 70 अन्य अमरीकी सैन्य अड्डों को मिटाना चाहेगा.”

वो आगे लिखते हैं, “और साथ ही वो यहां की औद्योगिक क्षमता को नष्ट करने और बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचाने के लिए सबसे अधिक आबादी वाले अमरीकी शहरों पर दो-दो मिसाइलें दागेगा.”

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्टडीज के मार्क फिट्ज़पैट्रिक ने बीबीसी से कहा, “फ़्लोरिडा पर हमले के वीडियो से युद्ध नीति का कोई संबंध नहीं है. यह एक संदेश है, जिसके संकेत मात्र के रूप में यह वीडियो है.”

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बजट विशेष: जानिए कैसा रहा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट

अरुण जेटली ने गुरुवार को मौजूदा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। इस बजट में अगले 14 महीने में देश में होने वाले लोकसभा समेत 14 चुनावों का इफेक्ट नजर आया। मिडिल क्लास के लिए ऐसा कोई एलान नहीं हुआ, जिससे उसे टैक्स में फायदा मिले। लेकिन कांग्रेस के परंपरागत वोटरों को साधने के मकसद से गरीबों-किसानों के लिए कुछ एलान हुए। इनमें आयुष्मान भारत योजना शामिल है। इसके तहत 10 करोड़ परिवारों को हॉस्पिटलाइजेशन पर 5 लाख रुपए सालाना का हेल्थ कवर मिलेगा। इसका फायदा 40 से 50 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा। वहीं, किसानों को ध्यान में रखते हुए खरीफ की फसलों पर डेढ़ गुना मिनिमम सपोर्ट प्राइज देने की भी जेटली ने घोषणा की। सरकार इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन से 8,000 करोड़ रुपए तो गंवाएगी, लेकिन हेल्थ और एजुकेशन पर 1% सेस बढ़ाकर 11 हजार करोड़ रुपए वसूल लेगी।

बजट में हमारी चिंताओं पर क्या?

1) इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदला

– उम्मीद थी कि सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करेगी ताकि मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को फायदा हो, लेकिन स्लैब को बरकरार रखा गया। इससे देश के 4 करोड़ इंडीविजुअल टैक्स पेयर्स को निराशा हुई।
– 80C के तहत डेढ़ लाख रुपए इन्वेस्ट कर इनकम टैक्स में छूट हासिल करने की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई।

2) 1% सेस बढ़ाया, ताकि सरकार को 11000 करोड़ मिले
– पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स पर एजुकेशन पर 3% सेस लगता था। इसकी जगह अब हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर की फंडिंग के लिए 4% सेस लगेगा। इससे सरकार को 11 हजार करोड़ रुपए का एडिशनल रेवेन्यू मिलेगा।

3) पेट्रोल-डीजल पर जितनी एक्साइज ड्यूटी घटाई, उतना ही रोड सेस लगाया
– सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए की बेसिक एक्साइज ड्यूटी कम की और 6 रुपए एडिशनल एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। 8 रुपए की यह राहत आम आदमी को इसलिए नहीं मिलेगी, क्योंकि सरकार ने 8 रुपए का रोड सेस लगा दिया है।

4) स्टैंडर्ड डिडक्शन
– करीब 12 साल बाद सरकार सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन लाई है। ये डिडक्शन 40 हजार रुपए का होगा। लेकिन, इसे मेडिकल एक्सपेंस पर 15 हजार और ट्रैवलिंग अलाउंस पर 19200 रुपए की रिबेट के बदले लाया गया है यानी जो डिडक्शन पहले 34,200 रुपए का था, अब वह 40,000 रुपए का होगा। कुल फायदा साल में केवल 5,800 रुपए होगा।

14 महीने, 14 चुनाव. इसलिए गरीबों-किसानों-महिलाओं पर फोकस

# कब-कहां चुनाव
– 2018 में कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, नगालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में चुनाव होंगे। अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे। इसी के साथ आंध्र, तेलंगाना, ओडिशा, अरुणाचल, सिक्किम के चुनाव होंगे। अभी लोकसभा में बीजेपी है, बाकी 13 चुनावी राज्यों में से 7 में वह या एनडीए सत्ता में है।
– इन्हीं 14 चुनावों के मद्देनजर आम बजट में गरीबों-किसानों-महिलाओं से जुड़े एलान किए गए हैं। गरीब और किसान कांग्रेस के परंपरागत वोट माने जाते रहे हैं।

1) दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवर स्कीम का दावा
– जेटली ने आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम का एलान किया। इसका फायदा 10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा। उन्हें हॉस्पिटलाइजेशन पर सालाना 5 लाख रुपए का कवर मिलेगा।
– बजट के बाद मोदी ने भी दावा किया कि आयुष्मान भारत योजना से 40 से 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा और ये दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस योजना है।

3) किसान
– रबी की फसलों की तरह सरकार ने खरीफ की फसलों पर भी किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने का एलान किया।
– सरकार 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण एग्रीकल्चर मार्केट (Gram) में अपग्रेड करेगी। इन Grams को इलेक्ट्रॉनिकली e-NAM (नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) से जोड़ा जाएगा। इससे किसान अपनी उपज सीधे उपभोक्ता को बेच सकेंगे।

4) महिलाओं के लिए 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन

– सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने का एलान किया। सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन दिए जाएंगे। फॉर्मल सेक्टर जॉब्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए EPF में महिलाओं की हिस्सेदारी पहले तीन सालों के लिए घटाकर 8% कर दी गई।

– नेशनल रूरल लिवली हुड मिशन के लिए बजट में 5750 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। महिलाओं के स्व सहायता समूहों के लिए लोन भी 75 हजार करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया।

5) सीनियर सिटिजन

– बजट में सीनियर सिटिजन को डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर छूट 10,000 से बढ़ाकर 50,000 सालाना कर दी गई। वहीं, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट भी 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। गंभीर बीमारियों के केस में डिडक्शन लिमिट 1 लाख कर दी गई।
– प्रधानमंत्री वय वंदना योजना मार्च 2020 तक बढ़ाई जाएगी। इस योजना में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) सीनियर सिटीजन्स को 8% निश्चित रिटर्न देता है। स्कीम में सीनियर सिटीजन के इन्वेस्टमेंट की लिमिट 7.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख कर दी गई है।

– जेटली ने कहा, “सोशियो-इकोनॉमिक कॉस्ट सेंसस के मुताबिक, सरकार हर बुजुर्ग, विधवा, अनाथ बच्चे, वंचितों तक सरकार पहुंचने की कोशिश करेगी। इस साल नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत 9,975 करोड़ रुपए के बजट का एलान किया गया।”

6) महंगा-सस्ता

महंगा सस्ता
कार कच्चा काजू, निकल
मोटरसाइकिल सोलर टेम्पर्ड ग्लास
सोना-चांदी सोलर पैनल और मॉड्यूल वाले ग्लास
वेजिटेबल, फ्रूट जूस एलएनजी, मेक इन इंडिया वाटर प्यूरीफायर
चश्मे
परफ्यूम, टॉयलेट वाटर्स
सनस्क्रीन, सनटैन, मैनीक्योर, पैडीक्योर प्रिपरेशंस
ओरल डेंटल हाईजीन प्रिपरेशंस, पेस्ट, पाउडर, डेंटल फ्लॉस
प्री शेव, शेविंग, आफ्टर शेव प्रिपरेशंस, सेंटेड स्प्रे, टॉयलेट स्प्रे
ट्रक, बस टायर
सिल्क फैब्रिक, फुटवियर, रंगीन पत्थर, हीरा,
स्मार्ट वॉच, वियरेबल डिवाइस, एलसीडी, एलईडी, फर्नीचर
मैट्रेस, लैंप, रिस्ट वॉच, पॉकेट वॉच, क्लॉक्स
ट्राइ साइकिल, स्कूटर, पैडल कार्स, व्हील्ड टॉयज, डॉल्स कैरिएज, टॉयज
वीडियो गेम्स कंसोल, स्पोर्ट्स और आउटडोर स्पोर्ट्स इक्विपमेंट
सिगरेट और दूसरे लाइटर्स, कैंडल्स, काइट्स
खाने का तेल

7) सफर में सहूलियत

रेलवे:आम बजट में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए दिए गए। लगातार चौथे साल किराए में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। सामान की ढुलाई में तेजी लाने का वादा किया गया। सबसे ज्यादा फोकस सेफ्टी और ट्रैक मेंटेनेंस पर किया गया। इसके तहत देश की सभी नैरोगज लाइनों को ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। 4267 अनमैन्ड रेलवे क्रॉसिंग को बंद किया जाएगा। ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे फिट किए जाएंगे। प्लेटफॉर्म पर इनकी तादाद बढ़ाई जाएगी। रेलवे का ग्रॉस बजटरी सपोर्ट बढ़कर 3 लाख करोड़ किया गया है।

एयरपोर्ट:जेटली ने कहा, “56 अनसर्व्ड एयरपोर्ट्स और 31 अनसर्व्ड हेलिपैड्स को उड़ान योजना के तहत कनेक्ट किया जाएगा। 16 ऐसे एयरपोर्ट्स पर ऑपरेशंस पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। एयरपोर्ट्स की कैपेसिटी को पांच गुना ज्यादा बढ़ाया जाएगा ताकि आने वाले वक्त में एक अरब सालाना उड़ानों को हैंडल किया जा सके। तीन साल में डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक 18% कीदर से बढ़ा है। हमारी एयरलाइंस कंपनियों ने 900 नए एयरक्राफ्ट्स का ऑर्डर दिया है। रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान पिछले साल लॉन्च हुई। इसके लिए अनसर्व्ड, अंडरसर्व्ड एयरोपोर्ट्स को कनेक्ट करने की जरूरत है, साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए हवाई सफर मुहैया कराने की जरूरत है। उड़ान योजना से देश के हवाई चप्पल पहनने वाले लोग भी हवाई जहाज में यात्रा कर रहे हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया 124 एयरपोर्ट मैनेज करती है।”

8) राष्ट्रपति-सांसदों की सैलरी बढ़ाई

– अरुण जेटली ने बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गवर्नर्स की सैलरी बढ़ाए जाने का एलान किया। प्रेसिडेंट को अभी 1.5 लाख सैलरी मिलती है, उन्हें 5 लाख सैलरी दी जाएगी। वाइस प्रेसिडेंट की सैलरी 1.2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख की गई। गवर्नर्स को 1.1 लाख की बजाय अब 3.5 लाख सैलरी दी जाएगी।

– सासंदों की सैलरी को लेकर बहस होती रही हैं। अब सांसदों की सैलरी हर 5 साल में रिवाइज्ड की जाएगी। हालांकि, ये रिवीजन महंगाई को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

9) डिफेंस

– डिफेंस बजट में इस साल महज 7.81 फीसदी बढ़ोतरी की गई। डिफेंस के लिए 2018-19 में 2.95 लाख करोड़ रुपए अलॉट किए गए हैं। डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ाने के इंडस्ट्री के प्रमोशन के लिए सरकार 2 डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्री फ्रैंडली मिलिट्री प्रोडक्शन पॉलिसी लाई जाएगी। इसमें से 99,947 करोड़ रुपए से नए हथियार, एयरक्राफ्ट्स, वारशिप्स और दूसरे मिलिट्री हार्डवेयर खरीदे जाएंगे।

10) इन्फ्रास्ट्रक्चर

– जेटली ने कहा, “इकोनॉमी के विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर ड्राइवर की तरह है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर का बजट 1 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ाकर 5.97 लाख करोड़ रुपए कर रहे हैं। हमारे देश को जीडीपी ग्रोथ और रेल-रोड-एयर-इनलैंड वाटर के जरिए देश को कनेक्ट करने के लिए करीब 50 लाख करोड़ रुपए के बड़े इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में टारगेट और अचीवमेंट का रिव्यू किया। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम प्रगति के जरिए पता चला है कि 9.46 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट फास्ट ट्रैक मोड पर शुरू हो चुके हैं। 2018-19 तक 9000 किलोमीटर तक नेशनल हाईवे पूरे हो जाएंगे। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत भारत के दूरदराज और पिछड़े इलाकों को जोड़ा जाएगा। इसमें पहले चरण में 5.35 लाख करोड़ की लागत से 35,000 किलोमीटर हाईवे बनाए जाएंगे।”