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#Kathua: कठुआ गैंगरेप मामले में दिल्ली की फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा

कश्मीर से कन्याकुमारी तक दिल को झकझोर देने वाले कठुआ गैंग रेप मामले में एक अहम खबर सामने आई है, इस केस के तमाम सबूतों की जांच करने वाली दिल्ली की फॉरेंसिक लैब (FSL) ने सभी सबूतों को सच माना है। FSL की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि होती है कि मंदिर में मिले खून के निशान पीड़िता के ही है, जिससे ये बात सत्यापित होती है कि मंदिर के अंदर ही आठ साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया था।

आरोपी शुभम सांगरा के खिलाफ अहम सबूत

रिपोर्ट के हिसाब से मंदिर में मिले बाल का डीएनए इस केस के आठ आरोपियों में से एक शुभम सांगरा से मिलते हैं, पीड़िता के कपड़े पर मिले खून के निशान का डीएनए भी शुभभ के डीएनए से मिलता है। रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि पीड़िता के यौनांग में खून पाया गया था। आपको बता दें कि इस केस की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) टीम को इस बात की शिकायत थी कि उसे जो सबूत मिले हैं, वो आरोपियों को गुनाहगार साबित करने को काफी नहीं थी क्योंकि ऐसी बात सामने आई थी कि आरोपियों ने कथित तौर से कुछ स्थानीय पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर पीड़िता के कपड़े धुले थे ताकि सबूत को नष्ट किया जा सके। ये ही वजह थी कि एसआईआटी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं कर पा रही थी।

शुभम सांगरा और परवेश के भी ब्लड सेम्पल भेजे गए थे

मार्च में ही पीडि़ता के कपड़ों, खून, बाल, मल जैसे सबूतों को दिल्ली की फॉरेंसिक लैब में भेजा गया था और इसके साथ ही आरोपी पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, शुभम सांगरा और परवेश के भी ब्लड सेम्पल भेजे गए थे। इस केस की 28 अप्रैल को सुनवाई आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले के रासना गांव में बकरवाल समुदाय की 8 साल की बच्ची को 10 जनवरी में अगवा किया गया था। एक हफ्ते बाद घर से कुछ दूर उसका शव बरामद हुआ था। 10 अप्रैल को दायर पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या की गई थी।आरोप गांव के एक मंदिर के सेवादार पर लगा। कहा जा रहा है कि बकरवाल समुदाय को गांव से बेदखल करने के इरादे से यह साजिश रची गई थी। इस मामले में एक नाबालिग समेत 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। सेशन कोर्ट इस केस की 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

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सस्ता हुआ LPG सिलेंडर, जानिए अब देने होंगे कितने कम दाम

होली से ठीक पहले घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी गैस सिलेंडर) के दाम कम कर दिए गए हैैं। सरकार ने बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में कटौती के साथ-साथ सब्सिडी वाले सिलेंडर के भी दाम घटा दिये हैं। इसके अलावा कॉमर्शियल इस्तेमाल में आने वाले 19 किलोग्राम के रसोई सिलेंडर के दाम में भी कटौती की गई है। नई दरें आज से ही लागू हो गई हैं।

बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में कटौती:

बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 45.50 रुपये प्रति सिलेंडर से लेकर 47 रुपये प्रति सिलेंडर तक की कटौती की गई है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का दाम 47 रुपये की कटौती के बाद 689 रुपये हो गया है, इसके अलावा कोलकाता में यह 45.50 रुपये की कटौती के साथ 711.50 रुपये, मुंबई में 47 रुपये की कटौती के बाद 661 रुपये और चेन्नई में 46.50 रुपये घटकर 699.50 रुपये हो गया है।

सब्सिडी वाला सिलेंडर भी हुआ सस्ता

वहीं, सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में 2.5 रुपये से अधिक की कटौती की गई है। आज से, यानि कि एक मार्च से सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए दिल्ली में 493.09 रुपये देने होंगे। पहले इसकी कीमत 495.63 रुपये थी। कोलकाता में इसकी कीमत 2.53 रुपये घटाकर 496.60 रुपये, मुंबई में 2.55 रुपये घटाकर 490.80 रुपये और चेन्नई में 2.48 रुपये घटाकर 481.21 रुपये कर दी गई है।

कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती

इसी तरह 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में सात रुपये से लेकर 80 रुपये तक की कटौती कर दी गई है। दिल्ली में इसकी कीमत 78.50 रुपये घटाकर 1230 रुपये, कोलकाता में 77 रुपये घटाकर 1270.50 रुपये, मुंबई में 79 रुपये घटाकर 1181 रुपये और चेन्नई में 80 रुपये घटाकर 1307 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया है।

बीएसई पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का हाल-

करीब 12.45 बजे हिंदुस्तान पेट्रोलियन कॉरपोरेशन लिमिटेड 0.07 फीसद की बढ़त के साथ 380.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 384.90 और निम्नतम 367.90 का स्तर रहा है। वहीं, इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 493 और निम्नतम 327 रुपये का स्तर रहा है।

बीएसई पर आईओसी 0.13 फीसद की बढ़त के साथ 379.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 380.90 का स्तर और निम्नतम 378.05 का स्तर रहा है। वहीं 52 हफ्तों का उच्चतम 462.60 का स्तर और निम्नतम 361.85 का स्तर रहा है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड 2.83 फीसद की तेजी के साथ 441.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 443.85 का स्तर और निम्नतम 430.65 का स्तर रहा है। वहीं, 52 हफ्तों का उच्चतम 550 और निम्नतम 400.37 का स्तर रहा है।

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सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 10 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर के नक्सल प्रभावित पुजारी कांकेर इलाके में तेलंगाना पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी (नक्सल ऑपरेशंस) ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में मिली इस सफलता की पुष्टि की है। इस ऑपरेशन में एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गया।

सुरक्षाबलों की यह कामयाबी इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया था। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन पुलिस जवान घायल हो गए थे। संयुक्त दल जब मुंगारी और दुलारगुफा के मध्य पहाड़ी में था, तभी घात लगाए नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी।

25 फरवरी को भी नक्सलियों ने विस्फोट कर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के दो जवान को जख्मी कर दिया था। घायलों में एक सहायक प्लाटून कमांडर भी शामिल था। वहीं, बीते 18 फरवरी को सुकमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों में एक एसटीएफ और एक डीआरजी से जुड़े थे।

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उस इंटरव्यू में क्या बोले बराक़ ओबामा जो प्रिंस हैरी ने लिया

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोशल मीडिया के गैरज़िम्मेदाराना इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है.

जनवरी में पद से हटने के बाद बराक ओबामा का शायद ये पहला और अपनी तरह का अनोखा इंटरव्यू था.

ये इस वजह से भी ख़ास था क्योंकि ‘बीबीसी रेडियो 4’ के टुडे प्रोग्राम के लिए प्रिंस हैरी ओबामा का इंटरव्यू ले रहे थे.

ब्रिटेन के राज परिवार के प्रोटोकॉल में प्रिंस हैरी पांचवें पायदान पर हैं.

सोशल मीडिया के गैरज़िम्मेदाराना इस्तेमाल पर ओबामा ने चेतावनी दी कि इसे ग़लतफहमियां बढ़ती हैं और जटिल मुद्दों पर लोगों की समझदारी पर असर पड़ता है.

बराक ओबामाइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionजनवरी में व्हाइट हाउस छोड़ते समय आख़िरी बार बतौर राष्ट्रपति प्रेस से बात करते हुए बराक ओबामा

सोशल मीडिया की इंतेहा पर…

पूर्व राष्ट्रपति ने आने वाले कल की उस स्थिति को लेकर चिंता ज़ाहिर की ‘जिसमें हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा और लोग केवल वही बातें पढ़ना और सुनना चाहेंगे जो उनके अपने विचारों से मेल खाती हों.’

“इंटरनेट का एक ख़तरा ये भी है कि लोग पूरी तरह से अलग हक़ीक़तों में जी सकते हैं. लोगों के अपने पूर्वाग्रह होते हैं और वे इन्हीं पूर्वाग्रहों को मज़बूत करने वाली सूचनाओं के दायरे में सिमटकर दुनिया से अलग-थलग से बने रह सकते हैं.”

“सवाल ये है कि हम किस तरह से टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करते हैं ताकि अलग-अलग तरह की आवाज़ों की जगह मिल सके, जो विविधता के लिए गुंजाइश बनाए और जो बंटवारे को बढ़ावा देने वाली ताक़तों को मौका न दे.”

ओबामा के उत्तराधिकारी ट्रंप ट्विटर का खूब इस्तेमाल करते हैं लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने उनका नाम नहीं लिया. ट्रंप पर ट्विटर के ज़्यादा इस्तेमाल का आरोप लगता रहा है हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ये मानते हैं कि ट्विटर की वजह से अमरीकी लोगों से सीधे जुड़ने में सहूलियत होती है.

बराक ओबामा, डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

राष्ट्रपति पर पड़ने वाले दबाव पर…

ये मुश्किल है, लोगों की नज़र में बने रहना कई तरह से असहज करता है. एक तरह से ये चुनौतीपूर्ण भी है. जिन्हें आप पसंद करते हों, उन्हें भी दिक्कतें पेश आ सकती हैं. 20-30 साल पहले ऐसा नहीं होता था.

इसलिए ये एक तरह से बलिदान जैसा है. मुझे लगता है कि जब लोग राजनीति में जाने का फ़ैसला करते हैं तो उन्हें खुद को शांत रखना चाहिए. लेकिन आख़िरकार अगर आप दुनिया में सार्थक बदलाव ला पाते हैं तो राजनीति में आपका आना सार्थक हो जाता है.

ओबामा इन सब चुनौतियों के बीच अपनी पत्नी मिशेल से मिले सपोर्ट के लिए शुक्रगुजार महसूस करते हैं.

बराक ओबामाइमेज कॉपीरइटAFP

व्हाइट हाउस छोड़ने पर

“मिलाजुला अनुभव होता है. उन सभी कामों के लिए जो अधूरे रह गए. चिंता इस बात की है कि देश किस तरह से आगे बढ़े लेकिन आप जानते हैं कि मिलाजुलाकर सब कुछ ठीक है.”

व्हाइट हाउस में अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा खुद को एक रीले रनर के तौर पर देखते हैं.

अगर आप मेहनत से दौड़ते हैं और आप अपना बेस्ट करते हैं तो आप कामयाबी से अपनी मशाल आगे बढ़ा सकते हैं. आप अपना काम अच्छे से करते हैं तो दुनिया थोड़ी बेहतर होती है.

लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने वाले ओबामाकेयर प्रोजेक्ट को वे अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हैं.

“ये कहना कितना बड़ी बात है कि दो करोड़ अमरीकियों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराया गया जो उनके पास पहले नहीं था.”

बराक ओबामा, डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइटREUTERS

आना वाला कल कैसा दिखता है?

दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं को ख़ारिज किए बिना ओबामा सकारात्मक बने हुए हैं.

अगर हम अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, इसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं, इसमें हिस्सा लेते हैं, इससे जुड़ते हैं, इस पर खुलकर बात करते हैं, अगर हम समुदायों के साथ काम करते हैं तो हर मुश्किल का हर निकाला जा सकता है, बावजूद उन डरावनी ख़बरों के जो हम देखते हैं.

अगर मानव इतिहास में कोई एक लम्हा आपको चुनने का मौका मिले जिसमें आप पैदा होना चाहें तो आप आज को चुनेंगे क्योंकि हक़ीक़त यही है कि दुनिया आज सबसे ज़्यादा स्वस्थ, संपन्न, ज्यादा शिक्षित, अधिक सहिष्णु और आधुनिक और कम हिंसक है.

बराक ओबामा, प्रिंस हैरीइमेज कॉपीरइटREUTERS

प्रिंस हैरी क्या बोले?

एडिटिंग के अलावा प्रिंस हैरी ने ये इंटरव्यू ख़ुद लिया.

“मैंने बहुत ज़्यादा इंटरव्यू नहीं किए हैं लेकिन ये एक अच्छा अनुभव था. ख़ासकर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का. हकीकत तो ये थी कि वे मुझे इंटरव्यू करना चाहते थे.”

“ये अनुभव हासिल करने के साथ-साथ सीखने जैसा भी था. लेकिन कई और भी अहम मुद्दे हैं जिनपर सोचने और बात किए जाने की ज़रूरत है.”

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भारत में लॉन्च हुई डुकाटी का सबसे सस्ती बाइक

डुकाटी ने भारत में स्क्रैंबलर Mach बाइक लॉन्च की है. इस बाइक की एक्स-शोरूम कीमत 8.52 लाख रुपए है. यह बाइक भारत में डुकाटी सीरीज की सबसे सस्ती बाइक है. कंपनी ने स्क्रैंबलर बाइक के लुक में कई बदलाव किए गए हैं. इनमें स्पेशल पेंट स्कीम भी शामिल है.  आइये जानते हैं इस बाइक में क्या खास फीचर्स हैं….

Scrambler Mach 2.0 में 803 सीसी का 4 इंजन लगा है, जो कि 8250 rpm पर 72 bhp पावर और 5750 rpm पर 67 Nm टॉर्क जनरेट करता है. कंपनी ने इस इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स से लैस किया है. Scrambler Mach 2.0 बाइक में एल्यूमीनियम हैंडलबार, ब्लैक एग्जॉस्ट और सिलिंडर हैड कवर्स यूज किए गए हैं. डुकाटी स्क्रैंबलर बाइक के पुराने मॉडल में 250 सीसी सिंगल सिलिंडर इंजन लगा था. Scrambler Mach बाइक का मुकाबला ट्रायम्फ स्ट्रीट ट्रिपल S से है. ट्रायम्फ स्ट्रीट ट्रिपल S मोटरसाइकिल में 937cc का इंजन लगा है. इस बाइक की कीमत 13.5 लाख रुपये के करीब है.

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10 EPF अकाउंट एक बार में UAN से जोड़े जा सकेंगे, EPFO ने शुरू की नई सर्विस

EPFO ने इम्प्लॉईज के लिए एक नई सर्विस शुरू की है। इसके तहत कोई भी इम्प्लॉई अपने 10 पुराने अकाउंट को एक ही बार में करंट यूनिवर्सल पोर्टेबल अकाउंट नंबर (UAN) से लिंक करा सकता है। EPFO की इस सर्विस से उसके 4.5 करोड़ मेंबर्स को फायदा होगा। उनके कई अकाउंट्स को अब एक ही बार में एक ही यूएएन से लिंक किया जा सकेगा।

अभी क्या करना होता है?

– अभी तक यह फैसेलिटी EPFO मेंबर्स को नहीं मिलती। फिलहाल, जो नियम है उसके तहत EPFO मेंबर्स को यूएएन पोर्टल पर ट्रांसफर के लिए अलग-अलग क्लेम करने होते हैं। इसमें वक्त भी लगता है और दिक्कतें भी होती हैं।
– नई फैसेलिटी का फायदा लेने के लिए मेंबर्स को अपना यूएएन एक्टिवेट करना होगा। यह यूएएन आधार और बैंक अकाउंट से लिंक होना चाहिए।
– इसके जरिए वो मेंबर्स जिन्होंने यूएएन एक्टिवेशन नहीं किया है वो भी ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम कर सकेंगे।

नई फैसेलिटी क्यों?

– EPFO के एक सीनियर अफसर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि नई फैसेलिटी के जरिए ‘एक इम्प्लॉई-एक ईपीएफ अकाउंट’ हासिल करना मुमकिन होगा।
– EPFO ने इस हफ्ते के शुरू में अपने 120 अफसरों को ऑर्डर जारी कर इस फैसेलिटी को लागू करने को कहा था। इनसे कहा गया था कि वो ये तय करें कि किसी मेंबर के कई अकाउंट्स को एक ही अकाउंट में मर्ज किया जाए। इसे जल्द से जल्द लागू करने को भी कहा गया है।

इसके लिए क्या जरूरी होगा?

– इस फैसेलिटी को पाने के लिए मेंबर्स को अपना करंट और एक्टिवेटेड यूएएन, मेंबर आईडी और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर देना होगा। ये जानकारी यूएएन पोर्टल पर होगी।
– EPFO इनकी जांच करेगा। इसके बाद वो मेंबर्स के अलग-अलग और पुराने ईपीएफ अकाउंट नंबर को करंट यूएएन से जोड़ देगा।
– यह सुविधा EPFO की वेबसाइट के इम्प्लॉई कॉर्नर पर मौजूद है।

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GES में हिस्सा लेने पहुंची डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका, पीएम मोदी से की मुलाकात

आठवें वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन (जीईसी 2017) में भाग लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप आज तड़के हैदराबाद पहुंची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इवांका ट्रंप के साथ ‘वीमेन फर्स्ट, प्रॉस्पेरिटी फॉर ऑल’ (महिला पहले, सबके लिए समृद्धि) विषय पर आधारित तीन दिवसीय सम्मेलन का आज उद्घाटन करेंगे। सभी की निगाहें इवांका की स्पीच पर टिकी हैं। 

इसके साथ ही समिट में हिस्सा लेने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ भी मुलाकात की है। इवांका विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हाथों में हाथ डाले हुए नजर आईं। 

हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एचआईसीसी)में होने वाले इस सम्मलेन में 150 देशों के 1,500 उभरते हुए उद्यमी, निवेशक और पारिस्थिकि तंत्र के समर्थक हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मलेन को अमेरिकी विदेश विभाग व अमेरिका की अन्य एजेंसियां भारत के नीति आयोग के साथ मिलकर आयोजित कर रही हैं।

इवांका ट्रंप के स्वागत के लिए हैदराबाद पूरी तरह सजकर तैयार है। हैदराबाद के सड़क, प्लाईओवर को खूबसूरत ढंग से सजाया गया है। समिट के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी अतिथियों को रॉयल डिनर देंगे। इसके लिए ताज फलकनुमा होटल दुल्हन की तरह सजा है। सम्मेलन में 52.5 प्रतिशत प्रतिभागी शामिल होंगे, जो जीईएस के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा दर है। अफगानिस्तान, सऊदी अरब और इजरायल उन 10 देशों में शामिल हैं, जिनका प्रतिनिधित्व सर्व-महिला प्रतिनिधिमंडल करेंगे।

इवांका ट्रंप और पीएम मोदी करेंगे सम्मेलन का उद्धाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इवांका तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। नीति आयोग अमेरिकी विदेश मंत्रालय और अन्य अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इवांका उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। वह उद्घाटन सत्र के अलावा बुधवार को भी एक अन्य सत्र को संबोधित करेंगी। सम्मेलन में महिला उद्यमियों पर फोकस किया गया है। इस बार के सम्मेलन का विषषय भी ‘वीमेन फ‌र्स्ट, प्रॉस्पेरिटी फॉर ऑल (महिला पहल, सबके लिए खुशहाली)’ रखा गया है।
चार उद्योगों पर फोकस
सम्मेलन में नवोन्मेषषकों खासकर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए माहौल बनाने पर जोर होगा। चार नवोन्मेषषी और उच्च विकास वाले उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ये हैं स्वास्थ्य सेवा एवं जीव विज्ञान, डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं वित्तीय तकनीक, ऊर्जा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर और मीडिया एवं मनोरंजन। सम्मेलन में करीब 100 नवोन्मेषषी स्टार्टअप, उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रमुख वक्ता
सम्मेलन को कई जानीमानी हस्तियां संबोधित करेंगी। इनमें यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष जॉन चैंबर्स, चेरी ब्लेयर फाउंडेशन फॉर वीमेन की संस्थापक चेरी ब्लेयर, फेयरफैक्स फिनांशियल होल्डिंग्स लि. के अध्यक्ष एवं सीईओ प्रेम वत्स, आईसीआईसीआई बैंक की एमडी एवं सीईओ चंदा कोचर और डीआरडीओ निदेशक टेसी थॉमस प्रमुख हैं।
मानुषी छिल्लर भी होंगी शामिल
नई मिस व‌र्ल्ड मानुषी छिल्लर, अभिनेत्री सोनम कपूर एवं अदिति हैदरी, टेनिस स्टार सानिया मिर्जा, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज भी सम्मेलन की रौनक ब़़ढाएंगी।

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हर रोज कम हो रही धरती की रफ्तार , 2018 में खूब डोलेगी धरती

यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोरैडो के रोजर बिल्हम और यूनिवर्सिटी ऑफ मोंटाना की रेबेका बेंडिक के नये शोध के अनुसार, अगले साल यानी 2018 और उसके बाद दुनिया के कई हिस्सों में बड़े भूकंप आ सकते हैं. वैज्ञानिकों ने इसके लिए पृथ्वी की गति में हो रहे परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि गति परिवर्तन के नतीजे हमेशा से बड़े भूकंपों के रूप में सामने आये हैं.

रेबेका और रोजर ने कहा कि पिछली सदी में पांच बार ऐसा हुआ है जब सात तीव्रता के भूकंप आये हैं. भूकंप के बाद उसके कारणों का अध्ययन करने पर हर बार इन भूकंप का संबंध पृथ्वी के घूमने की रफ्तार से जुड़ा पाया गया. हालांकि, कई बार पृथ्वी पर दिन के छोटे होने पर इनमें कमी भी देखी गयी है. इन वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी के किनारों में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव भी भूकंप से जुड़े हो सकते हैं.

रोजर और रेबेका ने जियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ अमेरिका को इसकी पूरी जानकारी भेज दी है. हालांकि, इस रिपोर्ट में साफ तौर पर यह नहीं बताया गया है कि ये भूकंप किन क्षेत्रों में आ सकते हैं. इसके लिए उन्होंने रिपोर्ट में सभी देशों से एडवांस वार्निंग सिस्टम विकसित करने और आपदा प्रबंधन को लगातार दुरूस्त रखने को कहा है.

हर रोज कम हो रही धरती की रफ्तार
भूवैज्ञानिक पृथ्वी की गति में होने वाले मिली सेकेंड के परिवर्तन को भी मापने में सक्षम हो गये हैं. इसी परिवर्तन को आधार बनाकर भूवैज्ञानिकों की एक शोध टीम ने वर्ष 1900 के बाद आये ऐसे हर भूकंप का विश्लेषण किया जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर सात से ज्यादा थी. उन्होंने पाया कि लगभग हर 32 साल के अंतराल पर दुनिया भर में भूकंपों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो रही थी. हैरानी होने पर जब उन्होंने और गहन पड़ताल की तो पता चला कि यह बढ़ोतरी उसी दौरान हुई है जब धरती के घूमने की रफ्तार में कमी आयी थी. वैज्ञानिकों ने पाया कि हर 25-30 साल बाद यह रफ्तार कम हुई.

पहले 10 घंटे में लगाती थी एक चक्कर

पृथ्वी 23 घंटे 56 मिनट 4.09 सेकंड में अपनी धुरी पर पूरी तरह घूम जाती है. लेकिन, अब से 4.8 अरब साल पहले धरती अपनी धुरी पर लगभग 10 घंटे में एक चक्कर लगा लेती थी. तब दिन और रात आज के मुकाबले काफी छोटे होते थे. वैज्ञानिकों का आकलन है कि सौ साल में धरती के घूमने की गति में करीब तीस सेकेंड का इजाफा हो रहा है. इससे धीरे-धीरे साल के दिनों की संख्या भी कम होती जायेगी. तकरीबन 60 करोड़ साल पहले 455 दिन का एक साल होता था. एक शोध में यह बात सामने आयी है कि पृथ्वी के कोर में हो रही उथल-पुथल दिनों की लंबाई को प्रभावित करती है.

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AdTo पर अब किसी भी भाषा में ले सकेंगे आनंद: 15 क्षेत्रीय भाषाओँ सहित 103 भाषाओँ में अनुवाद संभव

आदतों पर अब किसी भी भाषा में ले सकेंगे आनंद: 15 क्षेत्रीय भाषाओँ सहित 103 भाषाओँ में अनुवाद संभव हो गया है। गूगल के सहयोग से अब आप किसी भी मनचाही भाषा में वेबसाइट का अनुवाद कर आनंद उठा सकते हैं। साथ ही फेसबुक पेज को भी वेबसाइट से लिंक किया गया है।

विदित हो की अभी तक हमारी वेबसाइट ने किसी भी प्रचार के उपयोग के बिना ही अपना हर कार्य सुचारु रूप से किया है। केवल सबसे पहले ही नहीं वरन सूचनाओं की गुणवत्ता और सत्यता पर हमारा विशेष जोर रहा है। हम आप तक किसी भी ऐसी सुचना या खबर से वंचित नहीं रखना चाहते जिससे आपके जीवन में सकारात्मकता आये और नई ऊर्जा का संचार हो।

अच्छी खबरों के लिए विशेषतः हमारी वेबसाइट बुकमार्क करें।

अन्य जानकारी हेतु संपर्क करें: guru@adto.in

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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे बना Battlefield, जमीन से लेकर आसमान तक हुई भयंकर गर्जन

आगरा एक्सप्रेस-वे आज कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जहां वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख विमानों और विशालकाय हरक्यूलिस विमान ने अपने जौहर तथा हैरतअंगेज कौशल का नमूना पेश करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया कि वे युद्ध तथा शांति के समय में किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वायुसेना के जगुआर, मिराज और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों तथा विशाल मालवाहक विमान सी-130 ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव के बांगरमऊ के पास तीन किलोमीटर हिस्से का हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल करते हुए इस पर ‘लैंडिंग तथा टेक ऑफ’ कर वायु सेना की तैयारियों का नमूना पेश किया।

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15 लड़ाकू विमानों ने दिखाए करतब
उत्तर प्रदेश सरकार और वायु सेना के इस संयुक्त अभियान के तहत 15 लड़ाकू विमानों तथा एक हरक्यूलिस विमान ने अपने करतब दिखाए जिससे एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा जमीन से लेकर आसमान तक थर्रा उठा। एक्सप्रेस-वे के 3.3 किमी़ लंबे तथा 33 मीटर चौड़े हिस्से को खासतौर पर तैयार किया गया था। विशाल हरक्यूलिस विमान सी-130 ने अभियान की शुरुआत करते हुए वायु सेना के जांबाज दस्ते गरूड़ के कमांडो तथा उनके वाहनों को एक्सप्रेस-वे पर उतारा। कमांडो ने पलक झपकते ही दुश्मन के खिलाफ एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर अपने मोर्चे संभाल लिए और स्थिति को काबू में करते हुए घेराबंदी कर ली।

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मिराज ने दिखाई बाज जैसी फुर्ती
रक्षा-एक्सप्रेस-वे लड़ाकू विमान दो अंतिम उन्नाव इसके बाद वायु सेना के 15 घातक लड़ाकू विमानों ने एक्सप्रेस वे पर आपात स्थिति में उतरने तथा उड़ान भरने के असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया। सबसे पहले छह मिराज लड़ाकू विमानों ने बाज जैसी फुर्ती के साथ लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेस-वे को छुआ और पलक झपकते ही उड़ान भर हैरतअंगेज कारनामा किया। इसके बाद तीन-तीन के समूह में छह सुखोई विमानों और तीन जगुआर विमानों ने इस रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब का अछ्वुत नजारा पेश किया। विमानों ने हवा में मार करने वाले अंदाज में आक्रामक रूख अपनाते हुए जमीन से लेकर आसमान तक भयंकर गर्जन किया।

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हरक्यूलिस-हिंडन ने भरी उड़ान
वायु सेना के हरक्यूलिस विमान ने हिंडन एयरबेस गाजियाबाद, मिराज ने ग्वालियर, जगुआर ने गोरखपुर और सुखोई ने बरेली एयरबेस से उड़ान भरी। अभियान में हिस्सा लेने वाले गरुड़ कमांडो वायुसेना के आगरा एयरबेस से आए थे। यह समूचा अभियान वायुसेना की मध्य कमान की देखरेख में हुआ और इसका नेतृत्व एयर मार्शल ए़ एस़ बुटौला ने किया। एयर मार्शल बुटौला ने कहा कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वायुसेना की क्षमता और रणकौशल को बढाना है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से को हवाई पट्टी के रुप में विकसित करना बहुत अच्छी पहल है। इससे वायुसेना को कम लागत में सामरिक महत्व की जगहों पर सस्ती और टिकाऊ हवाई पट्टी मिलती हैं। जिनका युद्ध और शांति के समय किसी भी आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की भविष्य में अन्य एक्सप्रेस-वे पर भी इस तरह की हवाई पट्टियां बनाने की योजना है और इसे केवल युद्ध की दृष्टि से देखा जाना सही नहीं है। इस अभ्यास को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई की आशंका के मद्देनजर किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की वायु सेना की तैयारियों के रूप में भी देखा जा रहा है। साथ ही इसका उद्देश्य मानवीय सहायता या आपदा राहत जैसी स्थितियों में वायु सेना की तैयारियों को कसौटी पर परखने का भी है।

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आपात लैडिंग के लिए 12 राजमार्गों पर मिली मंजूरी
सरकार ने विभिन्न आपात परिस्थितियों से निपटने की रणनीति के तहत लगभग 12 राजमार्गों में वायुसेना के विमानों की लैंडिंग के लिए मंजूरी दी थी लेकिन अभी तक केवल दो में इसका परीक्षण किया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान, चीन और स्विटजरलैंड जैसे देश युद्ध और आपात स्थितियों में हवाई आपरेशन सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभ्यास करते रहे हैं। सबसे पहले यह अभ्यास मिराज-2000 लड़ाकू विमान ने मई 2015 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर किया। इसके बाद नवंबर 2016 में सुखोई और मिराज विमानों ने लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे पर इस कारनामे को दोबारा अंजाम देकर देशवासियों को आश्वस्त किया कि वायु सेना किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस अभ्यास के लिए एक्सप्रेस-वे के इस हिस्से को विशेष रूप से तैयार किया गया था और एक्सप्रेस को दो दिन पहले वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था।