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दुनिया की इन 10 जगहों पर किसी को भी जाने की नहीं है इजाजत

आज इंसान अंतरिक्ष में रहने की तैयारियां कर रहा है। मगर इतनी तरक्की करने के बाद भी दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जहां इंसान नहीं पहुंच सकते हैं। इंसानों पर ये पाबंदी वहां की सरकारों ने लगाई है। ऐसे ही कुछ इलाकों की सैर इन तस्वीरों के जरिए करिए।

ग्लोबल सीड वॉल्ट, नॉर्वे- ये एक अंडरग्राउंड बीज भंडारण केंद्र है। जिसे नार्वे के एक आइलैंड पर पहाड़ के अंदर बनाया गया है। यहां दुनिया की 4 हजार प्रजातियों के लगभग 8,40,000 बीज संरक्षित किए गए हैं। यहां पर सिर्फ उन्हीं लोगों को आने की इज़ाजत है, जो इसके सदस्य हैं और अपने बीज सुरक्षित रखना चाहते हैं।

स्नैक आयलैंड, ब्राजील- ब्राजील के साओ पाउलो से कुछ 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद Ilha da Queimada Granda नाम के आईलैंड पर 5-10 सांप हर 10 वर्ग फ़ीट पर मौजूद हैं। ये सांप बहुत ही ज़हरीले हैं, इसलिए यहां लोगों का जाना मना है।

द क्वींस बेडरूम, यूनाइडेट किंगडम- ब्रिटेन की महारानी Buckingham Palace में रहती हैं और ये 1837 से राजघराने का शाही महल रहा है। इस महल के एक भाग को छोड़ कर बाकी सभी को टूरिस्टों के लिए खोला गया है। जो हिस्सा बचा के रखा गया है, वो है महारानी का बेडरूम। जहां किसी को भी जाने की मंजूरी नहीं है।

नॉर्थ सेंटिनेल आयलैंड, भारत- भारत के अंडमान में मौजूद इस आइलैंड पर कोई भी व्यक्ति नहीं जा सकता, अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो यहां मौजूद कुछ आदिवासी उसे जान से मारने पर उतारू हो जाते हैं। उनकी मानना है कि ये बहुत ही पवित्र क्षेत्र है, जहां इंसानों को नहीं जाना चाहिए।

एरिया 51, यूएसए- अमेरिका के नेवादा में मौजूद इस इलाके में भी घूमने-फिरना मना है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो इसे अमेरिकी सेना ने एलियन टेस्टिंग के लिए बनाया है। हालांकि ये बात सही है या नहीं, ये आज तक नहीं पता चल पाया है। लेकिन यहां जाना जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ने यहां लैंड माइंस बिछा रखी हैं।

निहाऊ, अमेरिका- इसे The Forbidden Island भी कहा जाता है,क्योंकि इसकी झलक आप दिन ढ़लने के बाद ही पा सकते हैं, इसका स्वामित्व 150 सालों से एक ही परिवार के हाथ में है।

पोवेगलिया, इटली- इटली के वीनस शहर के पास ये एक छोटा सा आइलैंड है। यहां 14वीं शताब्दी में प्लेग फैलने के कारण सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी भी कहानी है कि, 19वीं सदी में यहां एक पागल खाना बना था। इस पागल खाने में बहुत से मरीज़ों पर जानलेवा प्रयोग किए जाते थे। फिलहाल इस डरावनी जगह पर सैलानियों के जाने पर पूरी तरह से पाबंदी है।

किन शी हुआंग मकबरा, चीन- चीन के पहले सम्राट के पास टेराकोटा वारियर्स नाम की एक सेना थी। ये सैनिक अपने राजा की रक्षा के लिए तैनात थे। जब उनकी मौत हुई, तब क्रब में टेराकोटा वॉरियर्स की हजारों मूर्तियां दफन की गई थी। यहां जाना बैन है, क्योंकि इस मकबरे में मौजूद पारे के कारण लोगों की जान जाने का खतरा है।

कोका-कोला रेसिपी वॉल्ट, अमेरिका- सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी कोका कोला को बनाने वाली रेसिपी को एक 6.6 फ़ीट की तिज़ोरी में अटलांटा में सुरक्षित रखा गया है। इसकी सुरक्षा में हर दम हथियारबंद गार्ड तैनात रहते हैं। जिमी होफा ने इसकी खोज की थी, जिनकी बाद में हत्या कर दी गई थी। इस तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है।

बोहेमियन ग्रोव, अमेरिका- कैलिफोर्निया के मोंटे रियो में ये जगह एक खेल मैदान की तरह है, मगर इस मैदान पर चुनिंदा शख्सियतों को ही जाने की इजाजत है। जिनमें कुछ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति, संगीतकार और बड़े सरकारी अफसर शामिल हैं। इसकी सदस्यता हासिल करना भी बड़ी टेढ़ी खीर साबित होता है। सदस्यतों की मंजूरी के बाद ही यहां कोई आ सकता है।

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अमेरिकी संसद ने बदला कानून, भारत के लिए रूस से हथियार खरीदने का रास्ता साफ

अमेरिकी संसद ने राष्ट्रीय रक्षा विधेयक, 2019 पारित कर सीएएटीएस कानून के तहत भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगने की आशंका को खत्म करने का रास्ता निकाल लिया है. प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून (सीएएटीएसए) के तहत उन देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाते हैं जो रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद करते हैं.

अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट ने 2019 वित्त वर्ष के लिए जॉन एस मैक्केन नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनटीएए) (रक्षा विधेयक) 10 मतों के मुकाबले 87 मतों से पारित कर दिया गया. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है. अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के वास्ते व्हाइट हाउस जाएगा. इस विधेयक में CAATSA के प्रावधान 231 को समाप्त करने की बात कही गई है.

व्हाइट हाउस में राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहे जोसुआ व्हाइट ने बताया कि सीएएटीएसए के नये संशोधित प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने के बाद भारत के लिए रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदना आसान हो जाएगा.

हालांकि, उनका कहना है कि कानून की भाषा बेहद कठोर लग रही है, लेकिन रूस से रक्षा खरीद करने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधानों का बेहद नरम कर दिया गया है.

रक्षा विधेयक में एक प्रावधान किया गया है जिसके तहत अमेरिका और अमेरिकी रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को राष्ट्रपति एक प्रमाणपत्र जारी कर सीएएटीएसए के तहत प्रतिबंधों से छूट दे सकता है.

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वर्ल्‍ड ट्रेड वार में भारत ने भी दिया अमेरिका को उसकी ही भाषा में जवाब

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी कारोबार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रॉबर्ट लाइटहाइजर के कार्यालय ने भारत सरकार द्वारा वस्तुओं के निर्यात को लेकर चलाई जाने वाली योजनाओं तथा निर्यात से जुड़ी इकाइयों की योजनाओं व अन्य ऐसी योजनाओं को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के खिलाफ कारोबारी विवाद आपत्तियों के निपटारे हेतु कठोर आवेदन प्रस्तुत किया था। अमेरिका की इन आपत्तियों पर भारत सरकार ने दलील दी कि उसके द्वारा दी जा रही विभिन्न राहत और सुविधाएं डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत ही हैं। लेकिन अमेरिका अनुचित और अन्यायपूर्ण ढंग से भारत पर व्यापार प्रतिबंध बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत ने विगत 18 मई को डब्ल्यूटीओ को अमेरिका से आयातित 30 उत्पादों की सूची सौंपी थी, जिन पर वह आयात शुल्क बढ़ाना चाहता था। अब भारत ने इनमें से 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।

वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर
इससे यही लगता है कि बीते कुछ दिनों से वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर यानी वैश्विक व्यापार युद्ध को लेकर जो आशंका जताई जा रही थी, वह सही साबित होने लगी है। यह सही है कि अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कोई सात दशक तक वैश्विक व्यापार, पूंजी प्रवाह और कुशल श्रमिकों के लिए न्यायसंगत आर्थिक व्यवस्था के निर्माण और पोषण में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन अब वही वैश्विक व्यवस्था मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदमों से जोखिम में है। इस साल अमेरिका ने चीन, मैक्सिको, कनाडा, ब्राजील, अर्जेटीना, जापान, दक्षिण कोरिया व यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों के साथ-साथ भारत की कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए हैं। जैसे-जैसे अमेरिका विभिन्न देशों के आयातों पर शुल्क बढ़ा रहा है, जवाब में वे देश भी वैसा ही कर रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव भी भारत के वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि 19 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के आयात पर 10 फीसद शुल्क लगाने की चेतावना दी।

चीन ने लगाया शुल्‍क
इसके चार दिन पूर्व ही ट्रंप ने चीन से 50 अरब डॉलर मूल्य के सामान के आयात पर 25 फीसद शुल्क लगाने को मंजूरी दे दी। इसके बाद चीन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी 50 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाएगा। इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि इसी माह कनाडा के क्यूबेक सिटी में आयोजित जी-7 देशों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और नीतियों की वजह से तमाशा बनकर रह गया। जी-7 के सदस्य देश कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, फ्रांस तथा ब्रिटेन जहां पहले ही ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर नाखुश थे, वहीं जी-7 सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिका ने इस समूह के विभिन्न देशों से होने वाले कुछ आयातों पर नए व्यापारिक प्रतिबंध घोषित करते हुए ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका को और गहरा दिया।

डब्ल्यूटीओ की भूमिका
इस संदर्भ में डब्ल्यूटीओ की भूमिका अहम हो जाती है। डब्ल्यूटीओ एक ऐसा संगठन है, जो सदस्य देशों के बीच व्यापार तथा वाणिज्य को सहज-सुगम बनाने का उद्देश्य रखता है। यद्यपि डब्ल्यूटीओ एक जनवरी, 1995 से प्रभावी हुआ, परंतु वास्तव में यह 1947 में स्थापित एक बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के नए एवं बहुआयामी रूप में अस्तित्व में आया। जहां गैट वार्ता वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रही थीं, वहीं इससे आगे बढ़कर डब्ल्यूटीओ का लक्ष्य वैश्विक व्यापारिक नियमों को अधिक कारगर बनाने के प्रयास के साथ-साथ सेवाओं एवं कृषि में व्यापार संबंधी वार्ता को व्यापक बनाने का रहा है। किंतु वैश्विक व्यापार को सरल और न्यायसंगत बनाने के 71 वर्ष बाद तथा डब्ल्यूटीओ के कार्यशील होने के 23 वर्ष बाद भारत सहित विकासशील देशों के करोड़ों लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि डब्ल्यूटीओ के तहत विकासशील देशों का शोषण हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय
ऐसे में दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञ यही आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका के संरक्षणवादी रवैये से वैश्विक व्यापार युद्ध की शुरुआत हो गई है। लिहाजा इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करना जरूरी है कि यदि विश्व व्यापार व्यवस्था वैसे काम नहीं करती, जैसे उसे करना चाहिए तो डब्ल्यूटीओ ही एक ऐसा संगठन है, जो इसे दुरुस्त कर सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दुनियाभर में घातक व्यापार लड़ाइयां 21वीं सदी की हकीकत बन जाएंगी। बेहतर यही होगा कि विभिन्न देश एक-दूसरे को व्यापारिक हानि पहुंचाने की होड़ में उलझने के बजाय डब्ल्यूटीओ के मंच से ही आसन्न ग्लोबल ट्रेड वॉर के नकारात्मक प्रभावों का उपयुक्त हल निकालें। यद्यपि भारत ने कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है, लेकिन अब बेहतर यही होगा कि वह इस मामले में धैर्य का परिचय दे और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक हितों के व्यापक पहलुओं पर गौर करे।

सबसे बड़ा निर्यातक बाजार
यह इसलिए भी जरूरी है कि जहां भारत के लिए अमेरिका दुनिया का सबसे पहले क्रम का निर्यातक बाजार है, वहीं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। पिछले वित्त-वर्ष में भारत ने अमेरिका को 47.9 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया था। हम उम्मीद करें कि भारत सरकार और भारतीय उद्यमी निर्यात की नई उभरती चुनौतियों के बीच विभिन्न देशों में विभिन्न वस्तुओं के निर्यात के नए मौके ढूंढने की डगर पर आगे बढ़ेंगे। खासकर चीन व अन्य देशों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ने के कारण अमेरिका से आयातित सोयाबीन, तंबाकू, फल, गेहूं, मक्का तथा रसायन जैसी जो कई चीजें महंगी हो गई हैं, वहां के बाजारों में ये भारतीय उत्पाद सस्ते होने के कारण सरलता से अपनी पैठ बना सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड वॉर की स्थिति के चलते हमारे निर्यात, निवेश व आर्थिक विकास दर घटने की जो आशंकाएं बढ़ गई हैं, उनसे निपटने हेतु सरकार को पुख्ता रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

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दीवार के पीछे की हमारी हलचल को पकड़ सकता है एम आई टी का नया एआइ सिस्टम

शोधकर्ताओं ने लोगों की सामान्य गतिविधियों, जैसे टहलने, बातचीत करने, बैठने, दरवाजा खोलने या लिफ्ट का इंतजार करने की हजारों फोटो एकत्र कीं। फिर इन तस्वीरों को कैमरे से निकालकर उनके स्टिक फिगर्स (एक तरह के रेखा-चित्र) प्राप्त किए गए। संबंधित रेडियो सिग्नल के साथ इन्हें न्यूरल नेटवर्क से जोड़ा गया। इस संयोजन के साथ सिस्टम रेडियो सिग्नल और स्टिक फिगर्स के बीच संबंध को समझ गया। ट्रेनिंग के बाद आरएफ-पोज इतना समर्थ हो गया कि वह कैमरे के बिना केवल वायरलेस रिफ्लेक्शन के आधार पर लोगों के मूवमेंट को नोट करने लगा।

निगरानी में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिस्टम सही तरह से काम करे तो बुजुर्गों की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी और उन्हें गिरने, चोट लगने और एक्टिविटी पैटर्न में बदलाव जैसी चीजों से बचाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं की टीम मौजूदा समय में डॉक्टरों के साथ मिलकर हेल्थकेयर में इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर काम कर रही है।

सेंसर पहनने व डिवाइस चार्ज करने की जरूरत नहीं

एमआइटी के वैज्ञानिक दीना कताबी कहते हैं, हमने देखा है कि अक्सर लोगों को तेज चलते और सामान्य कामकाज करते हुए देखने के आधार पर ही डॉक्टर मर्ज को समझते हैं और इलाज की दिशा तय करते हैं। यहीं से हमें इसे तैयार करने का विचार आया। हमने इसी का एक जरिया उपलब्ध कराने की कोशिश की है। अब तक यह व्यवस्था नहीं थी।

शोधकर्ता के अनुसार, हमारी पहल की एक खासियत यह है कि इसमें मरीज को न तो कोई सेंसर पहनना पड़ता है और न ही अपनी डिवाइस को चार्ज करने की चिंता करनी पड़ती है। हेल्थकेयर के अलावा नया सिस्टम यानी आरएफ-पोज ऐसे वीडियो गेमों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जिनमें खिलाड़ियों का मूवमेंट होता है।

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किम के बड़े कदम से टली परमाणु आपदा, अब नए रिश्ते की होगी शुरुआत: डोनाल्ड ट्रम्प

सिंगापुर में मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने का वादा किया। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन डीसी लौटते वक्त ट्वीट किया, ‘अपने लोगों के उज्जवल भविष्य की खातिर साहसिक कदम उठाने के लिए मैं किम को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारी अप्रत्याशित मुलाकात से यह साबित होता है कि वास्तविक बदलाव संभव है।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘रॉकेट लांच, परमाणु परीक्षण या रिसर्च और नहीं। हम लोगों का एक साथ गुजरा दिन ऐतिहासिक रहा। धन्यवाद किम।’

दक्षिण कोरिया, चीन के दौरे पर पोंपियो

ट्रंप-किम शिखर वार्ता संपन्न होने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो दक्षिण कोरिया रवाना हो गए, जहां से वह चीन जाएंगे। पोंपियो दोनों देशों के अपने समकक्षों को शिखर वार्ता के बारे में जानकारी देंगे।

अन्य मिसाइल लांच स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे किम

शिखर वार्ता के एक दिन बाद ट्रंप ने बताया कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल परीक्षण स्थल को नष्ट करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम आगामी कुछ दिनों में अन्य मिसाइल स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे। उत्तर कोरिया ने पिछले महीने विदेशी मीडिया की मौजूदगी में अपना एक परमाणु परीक्षण स्थल ध्वस्त कर दिया था।

किम ने ट्रंप को दिया प्योंगयांग आने का न्योता

किम जोंग उन ने शिखर वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग आने का न्योता दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बुधवार को कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। दोनों ने इस आमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया है। इससे नए रिश्ते की शुरुआत होगी।

ट्रंप-किम वार्ता को उत्तर कोरिया के मीडिया ने बताया अपनी जीत

उत्तर कोरिया के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता को उत्तर कोरिया की जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर छाई रही। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट ने हालांकि शिखर वार्ता में हुए समझौते का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किए जाने पर सवाल भी उठाए।

दोनों अखबारों ने पहले पेज पर शिखर वार्ता की खबर को ट्रंप-किम की तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रॉडोंग सिनमुन ने अपने पहले पेज पर शिखर वार्ता को ‘सदी की बैठक’ बताया। सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने लिखा, ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को बंद करने, उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी देने और प्रतिबंधों को हटाने का इरादा जाहिर किया है।

उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन पर स्टार न्यूज एंकर री चुन ही ने भी इसी तरह की खबर पढ़कर सुनाई। 75 वर्षीय री आमतौर पर बड़ी घोषणाओं के मौके पर ही सामने आती हैं। पिछले साल सितंबर में उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण का एलान भी उन्होंने ही किया था।

सरकारी अखबार ने पहले पेज पर ट्रंप और किम के हाथ मिलाने समेत कई तस्वीरों को प्रकाशित किया है। जबकि अंदर के पेज पर अधिकारियों के साथ शिखर वार्ता, लंच और संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर करने की तस्वीरें छापी गई हैं।

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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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दुनिया की 10 सबसे ताकतवर हस्तियों में शुमार हुए नरेंद्र मोदी, No. 1 पर चिनफिंग

प्रतिष्ठित फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली नेताओं की सूची में शुमार हो गए हैं. फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम मोदी नौवें स्‍थान पर काबिज हैं. इस सूची में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार पहले स्‍थान पर काबिज हुए हैं. वह रूसी नेता व्‍लादिमीर पुतिन को हटाकर पहले स्‍थान पर पहुंचे हैं. फोर्ब्‍स 2018 लिस्‍ट में दुनिया को चलाने वाले सबसे ताकतवर 75 नामों को शामिल किया गया है. फोर्ब्‍स ने लिस्‍ट जारी करते हुए कहा, ”दुनिया में करीब 7.5 अरब लोग हैं लेकिन ये 75 लोग दुनिया को चलाते हैं. फोर्ब्‍स की वार्षिक रैंकिंग में हर एक अरब में से एक ऐसे व्‍यक्ति को चुना जाता है जिनके एक्‍शन सबसे ज्‍यादा मायने रखते हैं.”

पीएम नरेंद्र मोदी
फोर्ब्स ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश (भारत) में “बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं.” इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मोदी सरकार के नवंबर 2016 के नोटबंदी के फैसले का हवाला दिया गया है. हाल के वर्षों में पीएम मोदी ने आधिकारिक यात्रा के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की और वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बढ़ाई है. इसके अलावा वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं.

mukesh ambani
PM मोदी के अलावा मुकेश अंबानी लिस्‍ट में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय हैं.(फाइल फोटो)

मुकेश अंबानी
रिलांयस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस सूची में पीएम मोदी के अलावा स्थान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं. वहीं, माइफ्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्या नाडेला को 40वें पायदान पर रखा गया है. अंबानी पर फोर्ब्स ने कहा कि अरबपति उद्योगपति ने 2016 में भारत के अति-प्रतिस्‍पर्द्धी बाजार में 4-G सेवा जियो शुरू करके कीमत की जंग छेड़ दी.

शी जिनपिंग
जिनपिंग ने पिछले लगातार चार वर्ष तक इस सूची में शीर्ष पर चले आ रहे पुतिन को दूसरे स्थान पर धकेल दिया है. सूची में तीसरे पायदान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चौथे पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और पांचवें पर अमेजन प्रमुख जैफ बेजोस हैं. पीएम मोदी के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग(13वें), ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे(14), चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग(15), एपल के सीईओ टिम कुक(24) को रखा गया है. इस वर्ष सूची में 17 नए नामों को शामिल किया गया है, इसमें सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (8वें ) भी हैं. सूची में पोप फ्रांसिस(6), बिल गेट्स(7), फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों(12), अलीबाबा के प्रमुख जैक मा(21) भी शामिल हैं.

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।