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क्या होती है जीडीपी और क्या हैं इसके मायने?

हाल में आपने एक खबर पढ़ी होगी कि वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के साथ भारत चीन (6.8 प्रतिशत) को पछाड़कर विश्व की सबसे तेज विकास दर वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। अक्सर आपको अखबार में जीडीपी, विकास दर जैसी आर्थिक शब्दावली पढ़ने को मिलती है। इनका अर्थ क्या है? इसमें वृद्धि या गिरावट का आशय क्या है? ‘जागरण पाठशाला’ में हम ऐसी ही आर्थिक शब्दावली समझने का प्रयास करेंगे। जीडीपी के साथ आज हम इसकी शुरुआत कर रहे हैं।

सकल घरेलू उत्पाद

किसी देश में एक साल में कृषि, उद्योग और सेवाओं के रूप में कितना उत्पादन हुआ? उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है? यह जानने का प्रचलित तरीका सकल घरेलू उत्पाद (ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट)है।

किसी देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य(रुपये के हिसाब से मूल्य) को जीडीपी कहते हैं। हालांकि जीडीपी का आकलन करते वक्त सकल मूल्य व‌र्द्धन यानी जीवीए में टैक्स को जोड़ दिया जाता है जबकि इसमें से सब्सिडी को घटा दिया जाता है। जीडीपी दो प्रकार से व्यक्त होता है-प्रचलित मूल्य यानी वर्तमान कीमतों पर और स्थायी मूल्य यानी आधार वर्ष पर (जैसे 2011-12 के मूल्य स्तर पर)। जीडीपी जब स्थायी मूल्यों पर होता है तो उसमें से मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटा दिया जाता है। यही वजह है कि जब किसी तिमाही या वर्ष में जीडीपी वृद्धि स्थायी मूल्यों पर व्यक्त की जाती है तो उसे ‘विकास दर’ कहते हैं।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय करता है जीडीपी की गणना

संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (यूनएनएसएनए) के तहत सभी देश अपने यहां राष्ट्रीय उत्पादन या कहें राष्ट्रीय आय की गणना के लिए जीडीपी का तरीका अपनाते हैं। हमारे देश में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) जीडीपी की गणना करता है। सैद्धांतिक तौर पर जीडीपी गणना तीन आधार- उत्पादन, आय और व्यय पर होती है। सीएसओ के मुताबिक, ”जीडीपी एक संदर्भ अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए सभी निवासी उत्पादक इकाइयों के सकल मूल्य व‌र्द्धन (जीवीए) का कुल योग होता है।”

इन तीन बातों को समझना है बहुत जरूरी

इससे स्पष्ट है कि जीडीपी समझने के लिए तीन बातों- ‘संदर्भ अवधि’, ‘निवासी उत्पादक इकाइयां’ और ‘सकल मूल्य व‌र्द्धन को समझना’ जरूरी है। संदर्भ अवधि से आशय तिमाही या वित्त वर्ष से है जो एक अप्रैल से अगले साल 31 मार्च तक होता है। वित्त वर्ष चार तिमाहियों- अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर, अक्टूबर से दिसंबर और जनवरी से मार्च- तक होता है और प्रत्येक तिमाही के लिए जीडीपी के अलग आंकड़े आते हैं। उदाहरण के लिए 28 फरवरी को जीडीपी में 7.2 प्रतिशत वृद्धि का जो आंकड़ा सीएसओ ने जारी किया वह चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) का था। इस तरह इसमें संदर्भ अवधि तीसरी तिमाही थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जीडीपी में वृद्धि का यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही के जीडीपी की तुलना वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के जीडीपी से कर के ज्ञात किया गया। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप इस साल किसी तिमाही के जीडीपी वृद्धि के आंकड़े पर गौर कर रहे हैं तो उसकी तुलना पिछले साल की समान तिमाही से ही करनी होगी क्योंकि पूर्व तिमाही से तुलना करने पर विसंगति आ जाती है।

अब हम ‘निवासी उत्पादक इकाइयों’ का अर्थ समझते हैं। दरअसल जब व्यक्ति या कंपनी भारत में छह माह से अधिक रहते हैं और उनका मुख्यत: आर्थिक हित भारत में ही है तो उन्हें निवासी इकाइयां माना जाता। यहां यह जानना जरूरी है कि निवासी उत्पादक इकाई की परिभाषा में आने के लिए भारतीय नागरिक या भारतीय कंपनी होना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई अमेरिकी कंपनी भारत में अपना कारखाना लगाती है तो उसका उत्पादन भारत के जीडीपी में शामिल होगा।

सकल मूल्य व‌र्द्धन

अब हम ‘सकल मूल्य व‌र्द्धन’ को समझते हैं क्योंकि जीवीए में टैक्स को जोड़ने और सब्सिडी को घटाने पर ही जीडीपी का आंकड़ा प्राप्त होता है। दरअसल जब किसी उत्पाद के मूल्य से उसकी इनपुट लागत को घटा दिया जाता है तो जो राशि बचती है उसे जीवीए कहते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी 20 रुपये में ब्रेड का पैकेट बेचती है और इसे बनाने में 16 रुपये का इनपुट इस्तेमाल होता है तो उस स्थिति में जीवीए 4 रुपये माना जाएगा। इस तरह भारत में अर्थव्यवस्था के तीन सेक्टर- प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक को मुख्यत: आठ क्षेत्रवार समूहों में विभाजित जीवीए का अनुमान लगाया जाता है।

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D Story behind “Ladies First”

Long ago , a man & woman were madly in luv . Dey wanted 2 marry . Parents didn’t approve. They decided 2 suicide 2gether & planned 2 jump frm a mountain . D man couldn’t bare 2 c his sweetheart fall …

He convinced her dat he wil jump first , he jumpd ….

Dat lady never did …!!!

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लगभग हर क्षेत्र से आ चूके हैं होली के नतीजों की ताज़ा तस्वीरें!?

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सस्ता हुआ LPG सिलेंडर, जानिए अब देने होंगे कितने कम दाम

होली से ठीक पहले घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी गैस सिलेंडर) के दाम कम कर दिए गए हैैं। सरकार ने बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में कटौती के साथ-साथ सब्सिडी वाले सिलेंडर के भी दाम घटा दिये हैं। इसके अलावा कॉमर्शियल इस्तेमाल में आने वाले 19 किलोग्राम के रसोई सिलेंडर के दाम में भी कटौती की गई है। नई दरें आज से ही लागू हो गई हैं।

बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में कटौती:

बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 45.50 रुपये प्रति सिलेंडर से लेकर 47 रुपये प्रति सिलेंडर तक की कटौती की गई है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का दाम 47 रुपये की कटौती के बाद 689 रुपये हो गया है, इसके अलावा कोलकाता में यह 45.50 रुपये की कटौती के साथ 711.50 रुपये, मुंबई में 47 रुपये की कटौती के बाद 661 रुपये और चेन्नई में 46.50 रुपये घटकर 699.50 रुपये हो गया है।

सब्सिडी वाला सिलेंडर भी हुआ सस्ता

वहीं, सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में 2.5 रुपये से अधिक की कटौती की गई है। आज से, यानि कि एक मार्च से सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए दिल्ली में 493.09 रुपये देने होंगे। पहले इसकी कीमत 495.63 रुपये थी। कोलकाता में इसकी कीमत 2.53 रुपये घटाकर 496.60 रुपये, मुंबई में 2.55 रुपये घटाकर 490.80 रुपये और चेन्नई में 2.48 रुपये घटाकर 481.21 रुपये कर दी गई है।

कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती

इसी तरह 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में सात रुपये से लेकर 80 रुपये तक की कटौती कर दी गई है। दिल्ली में इसकी कीमत 78.50 रुपये घटाकर 1230 रुपये, कोलकाता में 77 रुपये घटाकर 1270.50 रुपये, मुंबई में 79 रुपये घटाकर 1181 रुपये और चेन्नई में 80 रुपये घटाकर 1307 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया है।

बीएसई पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का हाल-

करीब 12.45 बजे हिंदुस्तान पेट्रोलियन कॉरपोरेशन लिमिटेड 0.07 फीसद की बढ़त के साथ 380.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 384.90 और निम्नतम 367.90 का स्तर रहा है। वहीं, इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 493 और निम्नतम 327 रुपये का स्तर रहा है।

बीएसई पर आईओसी 0.13 फीसद की बढ़त के साथ 379.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 380.90 का स्तर और निम्नतम 378.05 का स्तर रहा है। वहीं 52 हफ्तों का उच्चतम 462.60 का स्तर और निम्नतम 361.85 का स्तर रहा है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड 2.83 फीसद की तेजी के साथ 441.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 443.85 का स्तर और निम्नतम 430.65 का स्तर रहा है। वहीं, 52 हफ्तों का उच्चतम 550 और निम्नतम 400.37 का स्तर रहा है।

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हरिद्वार सीट से लडूंगा आगामी लोस चुनाव : हरीश

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह एनएच-74 घोटाले की जांच में हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं। बशर्ते कि जांच हाईकोर्ट की निगरानी में करानी होगी। रावत ने आगामी आम चुनाव हरिद्वार लोकसभा सीट से लड़ने का दावा किया है। साथ ही दोहराया कि प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मंगलौर के मोहल्ला किला निवासी पूर्व राज्यमंत्री सैय्यद अली हैदर जैदी के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। जहां प्रेसवार्ता में हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार के कार्यो की जांच कराने के नाम पर अपने गलत कार्यों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की ओर से चलाई गई जनकल्याण योजनाओं को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में केवल महापौर और चेयरमैन को पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ाया जाएगा। जबकि सभासद के चुनाव में स्थानीय विधायक और चेयरमैन अपने स्तर से मदद करके चुनाव को जीतने का काम करेंगे।

इस अवसर पर कौसर कैरानवी, रजि हेदर, विधायक काजी निजामुददीन, नगर पालिका चेयरमैन इस्लाम चौधरी, नईम, शराफत, परवेज नंबरदार, अशोक कुमार, रईस हैदर, काजिम रजा आदि मौजूद रहे।

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महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शुरू हुई मशरूम और कीड़ा-जड़ी की ऑनलाइन बिक्री। आज ही आर्डर करें!

मशरूम में जहा आपको तंदुरुस्त रखने की सभी खूबियां होती हैं वही कीड़ा-जड़ी एक अत्यंत लाभकारी और दुर्लभता से पायी जाने वाली औषिधीय गुणों से युक्त विशिष्ट मशरूम प्रजाति है। हमारी कंपनी ने देहरादून की मशरूम उत्पादक और शोध कार्य करने वाली अग्रणी कंपनी सौम्या फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर मशरूम और कीड़ा-जड़ी की ऑनलाइन बिक्री करने हेतु हाथ मिलाया है।

हमारे माध्यम से कीड़ा-जड़ी को वास्तविक रूप में आप तक पहुँचाने का ये प्रयास अपने आप में अनोखा है। हमारे पास उपयुक्त स्रोत हैं जिसका लाभ आप भी उठा सकते हैं। आपको अब हिमालय के वन क्षेत्रों में कीड़ा-जड़ी को खोजने की आवश्यकता नहीं है। आपको ऍफ़ एस एस ए आई द्वारा स्वीकृत एवं प्रमाणित 100% शुद्ध मशरूम व कीड़ा-जड़ी घर बैठे ही मिल सकती है।
हमारा प्रयास आपको स्वस्थ और प्रसन्न रखने का है। ईश्वर का ये जीवन अनमोल है और कीड़ा-जड़ी इस जीवन को और मनोरंजक व आसान बनाने के लिए रामबाण उपाय है।


सौम्या फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर दिव्या रावत जी के अथक परिश्रम और शोध के फलस्वरूप ये मुमकिन हो पाया है। हमारा प्रयास है की पहाड़ों में होने वाला पलायन रोका जा सके और वहां के लोगों को वह व्यवसाय दिया जाये जिससे उनका जीवन यापन आसानी से हो सके। इन अभूतपूर्व प्रयासों के फलस्वरूप दिव्या जी को राष्ट्रपति से नारीशक्ति पुरुस्कार मिल चुका है और नित नए प्रयासों के लिए इनकी जितनी सराहना की जाये कम है।

हम आपको उपलब्ध करा रहे हैं ओएस्टर मशरुम सौ ग्राम के पैक में, तथा जल्द ही शिटाके और गैनोडर्मा मशरुम भी हमारे पोर्टल पर उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही मशरुम के विभिन्न आचार का भी आनंद आप घर बैठे ले सकेंगे।

Oyster Mushrooms 100 Grams

 

कीड़ा-जड़ी हमारे पास दस ग्राम के पैक से शुरू है जोकि आपको तीन सौ रूपये प्रति ग्राम की साधारण राशि में मिल जाएगी। इसके अलावा पचीस ग्राम का पैक तथा पचास ग्राम का पैक भी उपलब्ध है। पचास ग्राम के पैक में आपको 1250 रूपये की बचत होगी। इसलिए इंतिजार मत कीजिये, आर्डर कीजिये।

Cordyceps Militaris/ कीड़ा-जड़ी 50 Grams

जाने मशरुम और कीड़ा-जड़ी की अनमोल खूबियों के बारे में, सिर्फ एक क्लिक में। STAY HEALTHY! STAY BLESSED!

ॐ नमः शिवाय !

 

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मशरूम के होते हैं अनेक फायदे: घर बैठे पाइये 100% सेहतमंद मशरूम प्रोडक्ट्स

मशरूम स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं।

सेहत का खजाना ‘मशरूम’

वेजिटेरियन हों या फिर नॉन वेजिटेरियन, मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है। और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ जो है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। चीन में तो इसे महौषधि एवं रसायन सदृश्य माना जाता है। वहीं रोम के लोग मशरूम को र्इश्वर का आहार मानते हैं। भारत में उगने वाले मशरूम की दो सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रजातियां वाइट बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम है।

सेहत का खजाना 'मशरूम'

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

मशरूम में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट हमें हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स से बचाते हैं। मशरूम का सेवन करने से शरीर में एंटीवाइरल और अन्‍य प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है, जो शरीर की कोशिकाओं को रिपेयर करता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो कि माइक्रोबियल और अन्‍य फंगल संक्रमण को भी ठीक करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

हृदय रोगों से बचाव

मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

हृदय रोगों से बचाव

कैंसर के लिए मशरूम

मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम

मधुमेह

मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।

मधुमेह

मोटापा से बचाए

मशरूम में लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में मददगार होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट लेने की सलाह दी जाती है, जिसके लिए मशरूम खाना बेहतर विकल्पों में से एक माना जाता है।

मोटापा से बचाए

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

पेट के विकार करे दूर

ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।

पेट के विकार करे दूर

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

कुपोषण से बचाए

मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।

कुपोषण से बचाए

ट्यूमर को रोके

मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है। साथ  ही इसमें लगभग 22-35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह शाकभाजी व जन्तु प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखता है।
इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व भी होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते है।

ट्यूमर को रोके

मशरूम और AdTo.In

आपको जानकर ख़ुशी होगी की हमारी कंपनी उत्तराखंड की एक अग्रणी मशरूम उत्पादक कंपनी सौम्या फूड्स के साथ हाथ मिला चुकी है और जल्द ही AdTo पर मशरूम के कई उत्पादों जैसे ओएस्टर मशरूम, बटन मशरूम, मिल्की मशरूम पिकल, बटन मशरूम पिकल, ओएस्टर मशरूम पिकल, मिक्स मशरूम पिकल, शिटाके और गैनोडर्मा मशरूम के साथ साथ औषिधीय गुणों से युक्त पहाड़ों की अनमोल खाद्य वस्तु कीड़ाजड़ी भी आप ऑनलाइन आर्डर कर घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे।
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खुशी मिलेगी हरिद्वार घूमकर, इन जगहों पर जरूर जाएं

भारत देश की धार्मिक आस्थाओं में हरिद्वार नगर का विशेष महत्व है। महादेव की नगरी हरिद्वार धार्मिक आस्था का केंद्र तो है ही पर्यटकों के बीच भी खासा आकर्षण रखता है। यहां की हरियाली, कलकल बहती गंगा नदी, शांत और मनोहर घाट पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करते हैं। अगर आप भी देव भूमि हरिद्वार जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। आपका मन प्रसन्न हो जाएगा…

हर की पैड़ी हो पहला पड़ाव
हरिद्वार आएं और हर पैड़ी न जाएं तो आपकी यात्रा एकदम अधूरी है। स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हर की पैड़ी। सबसे पहले यहां जाकर आप पावन-निर्मल गंगा में स्नान करें। आप चाहें तो यहां होनेवाली आरती में भी शामिल हो सकते हैं। आपका दिन बन जाएगा। इसके बाद हरिद्वार स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भारत माता मंदिर। यह 8 मंजिला मंदिर है और इसका हर फ्लोर भारत देश की सुंदरता और भारत माता की महानता को समर्पित है।

ये पर्वत हैं माता के निवास स्थान
स्टेशन से करीब 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पर्वत पर मां मंसा देवी विराजमान हैं। इनके दर्शनों के लिए आप चाहें तो उड़न खटोले से जा सकते हैं। आप अगर पहाड़ों पर चहलकदमी का मज़ा लेना चाहते हैं तो सड़क के रास्ते पैदल भी जा सकते हैं। वहीं, हिमालय की दक्षिण पर्वत माला के नील पर्वत के ऊपर स्थित है चंडी माता मंदिर। इस मंदिर की मुख्य मूर्ति की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी। जबकि मंदिर का निर्माण राजा सुचात सिंह ने 1929 में कराया। स्टेशन से इस मंदिर की दूरी करीब 5 किलोमीटर है।

यहां देखें, रात की आरती का मनोहर दृश्य
आप बह्मकुंड पर गंगा आरती के मनोहर दृश्य को देखना बिल्कुल न भूलें। गंगा आरती का दृश्य दिल में उतर जाता है। इस कुंड की हरिद्वार स्टेशन से दूरी 2 किलोमीटर है। साथ ही इंडिया टेंपल में आप भारतीय आस्था और संस्कृति से सुंदर नजारों को दर्शन कर सकते हैं। स्टेशन से इसकी दूरी करीब 6 किलोमीटर है।

मां आनंदमयी आश्रम और दक्ष प्रजापति मंदिर, कनखल
माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति के नाम पर बना है दक्ष प्रजापति मंदिर। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कनखल स्थित यही वह स्थान है जहां राजा दक्ष ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया और भगवान भोलेनाथ को नहीं बुलाया। इसी जगह पर माता सती ने कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। हरिद्वार स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है मां आनंदमयी आश्रम। यहां प्रसिद्ध संत मां आनंदमयी ने समाधि ली थी। यह बहुत सुंदर और शांत जगह है।

ऋषिकेश में सबसे महत्वपूर्ण
ऋषिकेश स्थित त्रिवेणी घाट की सुंदरता आपको मोह लेगी। यह घाट सुकून से कुछ पल बैठने के लिए बेहद प्यारी जगह है। शिव-पार्वती और गंगा के चरणों में बैठकर कुछ देर जरूर रहें। साथ ही ऋषिकेष स्थित नीलकंठ महादेव का मंदिर देवभूमि पर स्थित वह स्थान है, जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन में निकला विष पिया था। हरिद्वार स्टेशन से यहां की दूरी करीब 30 किलोमीटर है।

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हरिद्वार जिले में सर्वाधिक बढ़े सर्किल रेट

हरिद्वार जिले में गैर कृषि और कृषि दोनों ही श्रेणियों में चिह्नित क्षेत्रों में राज्य में सर्वाधिक सर्किल रेट तय किए गए हैं। जिले के आबादी क्षेत्र में गैर कृषि भूमि में सर्किल रेट में एक फीसद से 233 फीसद तक वृद्धि की गई है। सर्वाधिक 233 फीसद की वृद्धि पिरान कलियर के बेड़पुर गांव में की गई है। गांव में अब 1500 रुपये प्रति वर्गमीटर सर्किल रेट को बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया है। रुड़की क्षेत्र में हरिद्वार मार्ग, नया बाइपास, बुग्गावाला समेत प्रमुख मार्गों पर सर्किल छह फीसद से 100 फीसद तक बढ़ाए गए हैं। वहीं कृषि भूमि में शून्य से 400 फीसद तक वृद्धि हुई है। हाईवे स्थित पतंजलि योगपीठ के समीप हरिद्वार बार्डर पर सांतरशाह में सर्किल रेट को 60 लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर तीन करोड़ प्रति हेक्टेयर किया गया है। यह रेट बाजार भाव से अब भी काफी कम बताया जा रहा है।

ऊधमसिंहनगर में 25 फीसद तक वृद्धि

ऊधमसिंहनगर जिले के आबादी क्षेत्रों की गैर कृषि भूमि में तीन फीसद से 25 फीसद तक सर्किल रेट बढ़ाने का निर्णय हुआ। 25 फीसद तक वृद्धि वाले क्षेत्रों में गदरपुर के 13 गांव शामिल हैं। इनमें सर्किल रेट 4400 रुपये प्रति वर्गमीटर से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया है। सितारगंज के कुछ मोहल्लों में सर्किल रेट में 30 फीसद तक कमी भी की गई है। रुद्रपुर के प्रमुख मार्ग व नए नगरीय क्षेत्रों में भी सर्किल रेट में 25 फीसद तक वृद्धि हुई है। वहीं कृषि भूमि के सर्किल रेट तीन से 81 फीसद तक बढ़े हैं। सर्किल रेट में सर्वाधिक 81 फीसद वृद्धि दिनेशपुर मार्ग पर की गई है। कृषि भूमि के सर्किल रेट में  सामान्य वृद्धि 15 फीसद तक है।

  • नैनीताल: सर्वाधिक 60 हजार रुपये सर्किल रेट नैनीताल जिले में आबादी क्षेत्र में गैर कृषि भूमि के सर्किल रेट एक फीसद से 208 फीसद तक बढ़े हैं। हालांकि आबादी क्षेत्र में सामान्य वृद्धि 15 फीसद है।

पर्वतीय जिले

  • टिहरी-गैर कृषि भूमि में सर्किल रेट में दो फीसद से 20 फीसद और कृषि भूमि में दो फीसद से 35 फीसद तक वृद्धि की गई है। जिले में चंबा रोड पर सर्किल रेट में काफी इजाफा हुआ है।
  • पौड़ी-अकृषि और कृषि दोनों भूमि श्रेणियों के सर्किल रेट में 10 फीसद से 100 फीसद तक इजाफा। सौ फीसद इजाफा लैंसडौन क्षेत्र में किया गया है। जिले के प्रमुख मार्गों के इर्द-गिर्द कृषि भूमि के सर्किल रेट भी बढ़ाए गए हैं।
  • उत्तरकाशी-गैर कृषि और कृषि भूमि के सर्किल रेट में पांच से दस फीसद तक वृद्धि।
  • रुद्रप्रयाग-गैर कृषि व कृषि भूमि सर्किल रेट में पांच से दस फीसद वृद्धि
  • चमोली-गैर कृषि व कृषि भूमि सर्किल रेट में तीन फीसद से 15 फीसद तक इजाफा
  • अल्मोड़ा-कृषि व अकृषि भूमि सर्किल रेट में पांच से दस फीसद वृद्धि
  • पिथौरागढ़-गैर कृषि भूमि में तीन फीसद से 20 फीसद और कृषि भूमि के सर्किल रेट में एक फीसद से 20 फीसद तक इजाफा
  • चंपावत-अकृषि भूमि व कृषि भूमि के सर्किल रेट में दो फीसद से 25 फीसद तक बढ़ोतरी
  • बागेश्वर-गैर कृषि व कृषि भूमि के सर्किल रेट में दो फीसद से दस फीसद तक इजाफा।