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बदेशी भाषा बोलने वाले तीन आख़िरी इंसान

क्या आप उस भाषा के कुछ शब्द सीखना चाहेंगे जिसे बोलने वाले दुनिया में मात्र तीन ही लोग बचे हैं?

उत्तरी पाकिस्तान की पहाड़ियों में बर्फ से ढ़की दूर-दराज की एक घाटी में बदेशी भाषा बोली जाती है. लेकिन अब इस भाषा को लुप्त मान लिया गया है.

दुनिया की तमाम भाषाओं के बारे में जानकारी देने वाली एथनोलॉग के अनुसार बीते तीन या अधिक पीढ़ियों से इस भाषा को बोलने वाला कोई भी नहीं है.

लेकिन बिशीग्राम घाटी में हमने तीन ऐसे लोगों को खोजा है जो अब भी बदेशी भाषा में जानते हैं और इस भाषा में बात करते हैं.

 

वो भाषा जिसे सिर्फ़ तीन लोग जानते हैं

रहीम गुल को नहीं पता कि उनकी उम्र कितनी है. उनके चेहरे से लगता है कि वो करीब 70-75 साल के होंगे. वो कहते हैं, “अब से एक पीढ़ी पहले तक इस गांव के साभी लोग बदेशी भाषा में ही बात करते थे.”

“लेकिन फिर हमरी गांव में शादी कर के जो लड़कियां दूसरे गांव से आईं वो तोरवाली भाषा बोलती थीं. उनके बच्चों ने भी अपनी मातृभाषा तोरवाली भाषा में ही बात करना शुरु किया और इस कारण हमारी भाषा मरने लगी.”

इस इलाके में अधिकतर लोग तोरवाली भाषा का प्रयोग करते हैं जिसका खुद का अस्तित्व अधिक बोली जाने वाली पश्तो के कारण ख़तरे में है. लेकिन इस भाषा ने बदेशी को लुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया है.

 

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

रहीम गुल के दूर के भाई सईद गुल कहते हैं, “अब हमारे बच्चे और उनके बच्चे तोरवाली ही बोलते हैं. हम चाहें भी तो अपनी भाषा में किससे बात करें?”

सईद गुल को भी अपनी उम्र के बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं है. जब उन्होंने अपनी उम्र 40 बताई तो गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें टोका और कहा, “आप 80 साल के लगते हैं.” सईद गुल ने तुंरत पलट कर कहा, “नहीं, 50 का हो सकता हूं, 80 का तो बिल्कुल ही नहीं हूं.”

इस इलाके में युवाओं के लिए रोज़गार के मौक़े लगभग ना के बराबर हैं. इस कारण यहां से लोगों ने स्वात घाटी का रुख़ किया जहां वो पर्यटन का व्यवसाय करने लगे. यहीं पर उन्होंने पश्तो सीखी और अब ये लोग अधिकतर इसी भाषा में बात करते हैं.

वक्त के साथ-साथ बदेशी बोलने वले कम होते गए और इस तीन लोगों के लिए बदेशी में बात करने के मौक़े कम होते गए जिस कारण अब ये भी बदेशी भूलते जा रहे हैं.

 

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

आपस में बात करते वक्त रहीम गुल और सईद गुल कई शब्द भूल जाते थे और काफी सोचने के बाद कुछ शब्दों को याद कर पा रहे थे.

रहीम के एक बेटे हैं जिनके पांच बच्चे हैं और सभी तोरवाली में बात करते हैं. रहीम के बेटे कहते हैं, “मेरी मां तोरवाली बोलती थीं और मेरे माता-पिता घर में बदेशी में बात नहीं करते थे. मुझे बचपन से ही ये भाषा नहीं सीखने का मौक़ा नहीं मिला. मैं कुछ शब्द तो जानता हूं लेकिन पूरी भाषा नहीं जानता. मेरे सभी बच्चे तोरवाली में ही बात करते हैं.”

“मुझे इस बात का पछतावा है, लेकिन मैं अब 32 साल का हूं और अब बदेशी सीख सकूंगा ऐसा नहीं लगता. मुझे दुख होता है कि ये भाषा मेरे पिता के साथ ही खत्म हो जाएगी.”

ग़ैरसरकारी संस्था फोरम ऑफ़ लैग्वेज इनिशिएटिव पाकिस्तान में लुप्त हो रही भाषाओं को बचाने की कोशिश कर रही है.

इस संस्था के साथ काम करने वाले भाषाविद सागर ज़मान कहते हैं, “मैंने तीन बार इस घाटी का दौर किया है. लेकिन इस भाषा को जानने वाले इस भाषा में सामने बात करने से हिचकिचा रहे थे.”

“मैंने और अन्य भाषाविदों ने मिल कर इस भाषा के करीब 100 शब्दों को लिखा है. इन शब्दों से संकेत मिलता है कि ये भाषा इंडो-आर्यन भाषा परिवार से है.”

बदेशी बोलने वाले रहीम गुल और सईद गुल

सागर ज़मान कहते हैं तोरवाली और पश्तो बोलने वाले बदेशी भाषा को अपमान की नज़र से देखते हैं और इसीलिए इसे बालने वालों के लिए ऐसा करने कलंक के समान माना जाता है.

ऐसा लगता है कि बदेशी भाषा को बचाने में अब बहुत देर कर दी गई है. लेकिन आप कम से कम इस भाषा को कुछ सीख सकते हैं और इस भाषा को आंशिक रूप से ही सही जिंदा रखने में मदद कर सकते हैं.

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थीन हाल खाले थी? – आप कैसे हैं?

मै ग्रोट खेतकी – मैंने खाना खा लिया है

ईशू काले हीम काम इकथी – इस साल कुछ ज़्यादा बर्फबारी नहीं हुई

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टुकड़े-टुकड़े में नीलाम होगी सहारा की एंबी वैली, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट में टुकड़े-टुकड़े में सहारा की एंबी वैली नीलाम होगी. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी के लिए और वक्त दिया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर ने कोर्ट में कहा कि एक साथ पूरी एंबी वैली को बेचना संभव नहीं है. इसके अलग-अलग हिस्सों को चल और अचल संपत्ति के हिसाब से बेचा जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि जैसे गोल्फ कोर्स, इंटरनेशनल स्कूल, रेस्तरां, कान्वेंशन हॉल, हवाई पट्टी आदि हैं जिन्हें अलग-अलग बेचा जा सकता है. सहारा की सभी 48 संपत्तियों को बेचा नहीं जा पा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने रिसीवर को कहा कि पहले चल संपत्ति को बेचा जाए इसके बाद अचल को. बॉम्बे हाईकोर्ट लिक्विडेटर ने कोर्ट को बताया कि एंबी वैली की संपत्ति को पहले बेचा जाए. कोर्ट को बताया गया कि दो बड़ी कंपनियां महिंद्रा और पिरामल एंबी वैली को खरीदने में रुचि दिखा रही हैं. सहारा की तरफ से कहा गया कि हमने डिजिटलाइजेशन में 50 करोड़ रुपये खर्च किया है, जिन्हें पैसा दिया है उनका वैरिफिकेशन किया जाए और जल्द मामले की सुनवाई हो. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई 19 अप्रैल को करेंगे.

बता दें कि सहारा सेबी विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को कहा कि वो एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाए. सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी के लिए रिसीवर नियुक्त किया था. बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को ऑफिसियल लिक्विडेटर को नियुक्त किया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीलामी सही तरीके से हो ये रिसीवर की जिम्मेदारी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को कहा कि आप नीलामी प्रकिया में बाधा न डाले, एंबी वैली प्रोपेर्टी को सुप्रीम कोर्ट ने अटैच की हुई है, अब आप प्रॉपर्टी से बाहर हैं.