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भारत ने लिया पहले मैच में मिली हार का बदला, श्रीलंका को 6 विकेट से हराया

ट्राई सीरीज के चौथे मुकाबले में भारत और श्रीलंका एक दूसरे के आमने-सामने थे। बारिश की वजह से इस मैच में टॉस में 1 घंटे 5 मिनट की देरी से हुई और खेल 1 घंटे 20 मिनट की देरी से शरू हुई। बारिश के कारण मैच का ओवर कम करके इसे 19-19 ओवर का कर दिया गया। इस मुकाबले में भारतीय कप्तान रोहित ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने कुशाल मेंडिस के अर्धशतक के दम पर निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट पर 152 रन बनाए। भारत ने जीत के लिए मिले 153 रन के लक्ष्य को 17.3 ओवर में 6 विकेट शेष रहते हासिल कर लिया। अंक तालिका में अब भारत चार अंकों के साथ पहले नंबर पर आ गया है।

मनीष पांडे व दिनेश कार्तिक ने दिलाई जीत

दूसरी पारी में जीत के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। इन दिनों लचर फॉर्म में चल रहे रोहित शर्मा एक बार फिर से फ्लॉप रहे और 11 रन बनाकर अकीला धनंजय की गेंद पर कुशाल मेंडिस द्वारा लपके गए। बेहतरीन फॉर्म में चल रहे धवन को भी अकीला धनंजय ने अपना दूसरा शिकार बनाया। 8 रन के स्कोर पर वो कैच आउट हो गए। तेज बल्लेबाजी कर रहे रैना ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए। उन्हें नुवान प्रदीप ने परेरा के हाथों कैच आउट करवा दिया। लोकेश राहुल मेडिंस की गेंद को खेलने के चक्कर में हिट विकेट आउट हो गए। उन्होंने 17 गेंदों पर 18 रन बनाए। मनीष पांडे ने नाबाद 42 जबकि दिनेश कार्तिक ने नाबाद 39 रन की पारी खेलकर टीम को जीत दिला दी। इन दोनों बल्लेबाजों के बीच पांचवें विकेट के लिए नाबाद 68 रन की साझेदारी हुई।

श्रीलंका की तरफ से अकीला धनंजय को दो जबकि फर्नांन्डो और मेंडिस को एक-एक विकेट मिले।

कुशाल मेंडिस का अर्धशतक

पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका टीम के ओपनर गुणाथिलाका खतरनाक नजर आ रहे थे और उन्होंने 8 गेंदों पर 17 रन बनाए। उनकी पारी का अंत सुरेश रैना ने शानदार कैच पकड़कर किया। रैना ने ये कैच शर्दुल ठाकुर की गेंद पर लिया। भारत को दूसरी सफलता वाशिंगटन सुंदर ने दिलाई। उन्होंने कुशाल परेरा को महज तीन पर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। 22 रन के स्कोर पर उपल थरंगा को विजय शंकर ने क्लीन बोल्ड कर दिया। थिसारा परेरा ने 6 गेंदों पर 15 रन बनाए लेकिन शर्दुल ठाकुर की गेंद पर वो चहल के हाथों कैच आउट हो गए। वाशिंगटन सुंदर ने जीवन मेंडिस को एक रन पर क्लीन बोल्ड कर दिया। कुशाल मेंडिस ने 38 गेंदों पर 55 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में तीन चौके और तीन छक्के लगाए। मेंडिस को चहल ने अपनी गेंद पर रोहित के हाथों कैच आउट करवाया। अकीला धनंजय को उनादकट ने 5 रन पर लोकेश राहुल के हाथों कैच आउट करवाया। शनाका 19 रन बनाकर शर्दुल ठाकुर की गेंद पर विकेट के पीछे कैच आउट हो गए। चमीरा बिना खाता खोले ही शर्दुल की गेंद पर उनदाकट के हाथों कैच हो गए। लकमल पांच रन बनाकर नाबाद रहे।

भारत की तरफ से शर्दुल ठाकुर ने 4, वाशिंगटन सुंदर ने दो जबकि जयदेव उनादकट और विजय शंकर ने एक-एक विकेट लिए।

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पीएम मोदी बोले, कर्तव्य के बिना अधिकार की मांग संविधान की भावना के खिलाफ

अपने कर्तव्य का निर्वाह किये बिना सिर्फ अधिकार की मांग करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। लोगों को सूचना के अधिकार के साथ-साथ ‘एक्ट राइटली’ के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। केंद्रीय सूचना आयोग के नए भवन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सशक्त और जागरूक नागरिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आरटीआइ कानून की तरह ही ‘एक्ट राइटली’ यानी लोगों को उनके कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। बिना कर्तव्य के अहसास के सिर्फ अधिकार की बात करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार संविधान ने नागरिकों को मौलिक अधिकार के साथ-साथ उनके कर्तव्य भी तय कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीआइसी जैसी संस्थाएं, जहां आम जनता के साथ संपर्क बहुत ज्यादा होता हो, उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने आयोग को आरटीआइ का व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल होने के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि इसे रोकने की जिम्मेदारी आयोग की है।

प्रधानमंत्री ने सशक्त और जागरूक नागरिक को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सरकार की ओर इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार इंफोर्मेशन हाईवे की दिशा में काम कर रही है। जिसमें जनता और सरकार दोनों ओर से संवाद होता है। उन्होंन इस इंफोर्मेशन हाईवे के पांच स्तंभों के बारे में विस्तार से बताया। जो सवाल, सुझाव, संवाद, काम और सूचना पर आधारित हैं।

उन्होंने बताया कि माइ गोव दुनिया का सबसे बड़ा सिटिजन इंगेजमेंट प्लेटफार्म है, जहां लोग सीधे सरकार से सवाल पूछते हैं और हमारी सरकार उनकी बात सुनने के लिए लालायित रहती है। आम लोगों के इन सुझाव पर कई बार नीतियों में बदलाव भी किये गए हैं। जनता के संवाद और उसके अनुसार काम करने के बारे में बताते हुए उन्होंने जीएसटी लागू करने के अनुभवों को साझा किया। उनके अनुसार जीएसटी के बारे में सुबह कोई शिकायत मिलती, तो शाम को ठीक करने की कोशिश की गई। हमारी सरकार के मंत्री और मंत्रालय सिर्फ एक ट्वीट पर कई समस्याओं का निपटारा कर रहा है।

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मेघालय में 2 सीट वाली बीजेपी बना रही NDA सरकार, आज CM पद की शपथ लेंगे कोनराड संगमा

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में आए चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंगलवार को कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. गौरतलब है कि एनपीपी की अगुवाई में बन रही सरकार में बीजेपी भी हिस्सेदार है. संगमा करीब सुबह 10 बजे शपथ लेंगे. कोनराड के साथ करीब 11 विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले गठबंधन में हिस्सेदार HSPDP की मांग थी कि वे गैर बीजेपी-गैर कांग्रेस सरकार का गठन चाहते हैं.

कोनराड संगमा, मुख्यमंत्री समेत 7 मंत्री NPP के, दोनकुपर रॉय (यूडीपी) के दो मंत्री, बीजेपी की तरफ से ए.एल. हेक मंत्री पद की शपथ लेंगे.

ऐसी है विधानसभा की स्थिति

3 मार्च को आए नतीजों में 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के खाते में 21 , एनपीपी के खाते में 19 और बीजेपी के खाते में दो सीटें आई थीं. वहीं, यूनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के छह विधायक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दो विधायक चुने गए थे. एनसीपी और खुन हनीट्रैप नेशनल अवेकिंग मूवमेंट के खाते में एक-एक सीट आई है. इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायक भी चुनाव जीते हैं.

पिछड़ गई कांग्रेस

मेघालय में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 21 सीटें मिली हैं, लेकिन वह 60 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने से 10 सीट पीछे रह गई. कांग्रेस की ओर से पार्टी के बड़े नेता अहमद पटेल, कमलनाथ समेत चार नेता वहां पर सरकार बनाने की संभावना तलाशने गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके.

और बन गई बीजेपी सरकार!

वहीं, दूसरे नंबर पर रही नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के पास 19 विधायक हैं. बीजेपी (2 विधायक), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (6 विधायक), एचएसपीडीपी (2 विधायक), पीडीएफ (4 विधायक) और 1 निर्दलीय विधायक के साथ आने से इस गठबंधन के पास 34 विधायकों का समर्थन हो गया है.

कोनराड संगमा कौन हैं?

मेघालय में मजबूत नेता के रूप में सामने आए कोनराड संगमा राज्य में आठवीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं. उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक के रूप में सदन में विपक्ष का नेतृत्व किया. 27 जनवरी 1978 को जन्मे कोनराड संगमा वेस्ट गारो हिल्स जिले के सेलसेल्ला निर्वाचन क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया. इससे पहले कोनराड संगमा 2008 में मेघालय के सबसे युवा वित्त मंत्री बने थे और अभी वह मेघालय की तुरा सीट से लोकसभा सदस्य हैं.

सियासी करियर की शुरुआत

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कोनराड संगमा 1990 दशक के अंतिम दिनों में पिता पीए संगमा के प्रचार प्रबंधक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. उस समय पीए संगमा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में थे. बता दें कि राकांपा से विवाद के बाद अलग होकर पीए संगमा ने जुलाई 2012 में नेशनल पीपुल्स पार्टी का गठन किया था.

मेघालय विधानसभा में 2009-2013 तक कोनराड संगमा विपक्ष के नेता रहे. वह अभी तुरा सीट से लोकसभा सांसद हैं, जो उनके पिता पीए संगमा के निधन के बाद खाली हुई थी.

मेघालय में बन रही बीजेपी सरकार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि मेघालय में बीजेपी धोखे से सत्ता आ रही है. उन्होंने कहा है कि इसी तरह से बीजेपी गोवा और मणिपुर में भी सत्ता में आई थी. राज्य के विधानसभा चुनावों में केवल दो सीटें पाने वाली बीजेपी सरकार में शामिल होने जा रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘सिर्फ 2 सीटों के साथ ही बीजेपी मेघालय में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही. मणिपुर और गोवा की तरह, मेघालय में भी जनादेश का अपमान हुआ. सत्ता के लालच में बीजेपी बड़े पैमाने पर पैसों का इस्तेमाल करके एक अवसरवादी गठबंधन बनाने में कामयाब रही है.’

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पूर्वोत्तर में लहराया भगवा,BJP की जीत से आसान हुई 2019 की राह

2014 के आम चुनाव में केंद्र में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में लगातार पूर्वी भारत का बार-बार जिक्र किया जिसका नतीजा त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में देखने को मिला। पूर्वोत्तर में भाजपा को मिली इस जीत से 2019 की उसकी राह आसान होगी। बता दें कि पूर्वोत्तर राज्यों में लोकसभा की 25 सीटें हैं और 2014 में हुए आम चुनाव में भाजपा को पूर्वोत्तर राज्यों में 8 सीटों पर जीत हासिल हुई थी तो वहीं कांग्रेस को भी 8 सीटों से संतोष करना पड़ा था और सी.पी.एम. को 4 सीटें मिलीं। बाकी सीटें स्थानीय दलों के खाते में चली गईं। 2014 में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार पूर्वोत्तर राज्यों पर फोकस किया और लगातार पूर्वी भारत की बात करते नजर आए।
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देश में है मोदी लहर
2019 में होने वाले आम चुनाव में भाजपा की राह आसान होती नजर आ रही है क्योंकि इस वक्त भाजपा के अधिकतर राज्यों में भाजपा सत्ता पर काबिज है। पी.एम. मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए यह अच्छा है। 2014 में सरकार बनाने के बाद भाजपा लगातार कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती आई है। त्रिपुरा व नागालैंड में मिली जीत के बाद भाजपा आलाकमान संतुष्ट नजर आ रहा है। भाजपा के लिए एक और अच्छी बात यह है कि देश में अभी मोदी लहर का असर बाकी है। वहीं 2009 के आम चुनाव में पूर्वी राज्यों में भाजपा को निराशा हाथ लगी थी। 2009 में पूर्वोत्तर में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी और सी.पी.एम. के हाथ यहां से 16 सीटें लगी थीं, वहीं सी.पी.आई. को 4 सीटों पर ही जीत मिली थी। गौरतलब है कि कांग्रेस की सरकार केंद्र में होने के बावजूद पूर्वोत्तर में पार्टी को ज्यादा सफलता हासिल नहीं हुई थी।
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किस राज्य में किसे फायदा और किसे नुक्सान हुआ
त्रिपुरा
कांग्रेस को हुआ ज्यादा नुक्सान

सबसे ज्यादा नुक्सान कांग्रेस को हुआ। 25 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस यहां मुख्य विपक्षी दल था। इस बार उसके हाथ एक भी सीट नहीं लगी जबकि पिछले चुनावों में उसे 10 सीटें मिली थीं। नार्थ ईस्ट में भाजपा की लगातार बढ़ती सक्रियता और वहां हो रही राजनीतिक उठा-पठक का सबसे ज्यादा नुक्सान कांग्रेस को हो रहा है। त्रिपुरा में 2013 में उसके भले ही सिर्फ 10 विधायक थे लेकिन पार्टी का वोट शेयर 36.5 फीसदी था जो अब घटकर 2 फीसदी से कम हो गया है।

लैफ्ट ने क्या खोया
पिछले 40 साल के दौरान त्रिपुरा में हुए 8 चुनावों में लैफ्ट का वोट शेयर कभी भी 45 प्रतिशत से कम नहीं था। इस बार यह घटता दिख रहा है। बंगाल में सत्ता जाने के बाद त्रिपुरा लैफ्ट का सबसे मजबूत गढ़ था। त्रिपुरा से भी सत्ता जाने के बाद लैफ्ट अब केवल केरल में ही सत्ता में रह गया है।
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मेघालय
चुनाव में सबसे ज्यादा बढ़त किसे

सबसे ज्यादा फायदा भाजपा और एन.पी.पी. को होता दिख रहा है। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों एन.पी.पी. और यू.डी.पी. के साथ मिलकर सरकार बना सकती है। पिछले चुनावों में जहां भाजपा ने इस राज्य में खाता भी नहीं खोला था वहीं यू.डी.पी. और एन.पी.पी. की भी हालत खराब ही थी लेकिन इस बार तीनों पार्टियों की सीटों में इजाफा हुआ।

पी.ए. संगमा की पार्टी का आगे क्या
2013 में पूर्व लोकसभा स्पीकर पी.ए. संगमा की पार्टी एन.पी.पी. को 2 सीटें मिली थीं। उनके निधन के बाद संगमा के बेटे कॉनरोड संगमा के हाथ में पार्टी की कमान है। कॉनरोड को इस बार सी.एम. पद का बड़ा दावेदार बताया जा रहा है।
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नागालैंड
सबसे ज्यादा नुक्सान में कौन रहा

एन.पी.एफ. को चुनाव से पहले ही काफी नुक्सान हो चुका है। नेतृत्व की लड़ाई में पार्टी के दो हिस्से हो चुके हैं। अब पार्टी के हाथ से सत्ता जाती दिख रही है। सी.एम. टी.आर. जेलियांग के लिए बिना नेफ्यू रियो के एन.पी.एफ. को जिताने की मुश्किल चुनौती है।

कांग्रेस मजबूत हुई या कमजोर
पिछले चुनाव में कांग्रेस के यहां 8 एम.एल.ए. थे। यह सभी 2 साल पहले एन.पी.एफ. में शामिल हो गए थे। इस तरह वर्तमान में यहां कांग्रेस का एक भी एम.एल.ए. नहीं है। 15 साल पहले सत्ता में रही कांग्रेस को इस चुनाव में कैंडीडेट मिलने में भी काफी परेशानी हुई। पार्टी ने 23 सीटों पर कैंडीडेट उतारे थे। इनमें से 5 ने नाम वापस ले लिया।

भाजपा मजबूत हुई या कमजोर
15 साल से एन.पी.एफ. की जूनियर पार्टनर रही भाजपा को विशेषज्ञ एन.पी.एफ. में हुई टूट का कारण बताते हैं।  इस पार्टी की टूट का फायदा भाजपा को हुआ है। पार्टी पहली बार कई सीटें जीत कर सरकार बनाने के कगार पर है।

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सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 10 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर के नक्सल प्रभावित पुजारी कांकेर इलाके में तेलंगाना पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी (नक्सल ऑपरेशंस) ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में मिली इस सफलता की पुष्टि की है। इस ऑपरेशन में एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गया।

सुरक्षाबलों की यह कामयाबी इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया था। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन पुलिस जवान घायल हो गए थे। संयुक्त दल जब मुंगारी और दुलारगुफा के मध्य पहाड़ी में था, तभी घात लगाए नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी।

25 फरवरी को भी नक्सलियों ने विस्फोट कर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के दो जवान को जख्मी कर दिया था। घायलों में एक सहायक प्लाटून कमांडर भी शामिल था। वहीं, बीते 18 फरवरी को सुकमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों में एक एसटीएफ और एक डीआरजी से जुड़े थे।

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INDvsSA : 5 हीरो जिन्होंने दिलाई टीम इंडिया को कभी न भूलने वाली जीत

टीम इंडिया को आखिरकार वह जीत मिल ही गई, जिसके लिए टीम पिछले 26 साल से इंतजार कर रही थी. टेस्ट सीरीज में पहले दो टेस्ट बुरी तरह हारने के बाद टीम इंडिया का टेस्ट सीरीज जीतने का सपना टूट गया. लेकिन जोहानिसगबर्ग में तीसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया को मिली जीत के बाद सब कुछ बदल गया. टीम ने छह मैचों की सीरीज के 5वें मैच में ही सभी हार और इतिहास को भुलाते हुए अफ्रीका को पहली बार उसकी ही धरती पर धूल चटा दी. टीम को इस जीत के लिए 26 साल लंबा इंतजार करना पड़ा.

टीम इंडिया की इस जीत में अगर ध्यान से देखें तो 5 खिलाड़ियों का सबसे अहम योगदान रहा. विराट कोहली, शिखर धवन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और पांचवें मैच में फॉर्म में लौटे रोहित शर्मा. एक मैच में रहाणे का बल्ला भी बोला. हालांकि टीम का मध्यक्रम इस पूरी सीरीज में बुरी तरह नाकाम साबित हुआ. ये टीम के लिए चिंता की बात होगी.

वैसे देखे जाए तो इस पूरी सीरीज में अगर शिखर धवन और विराट कोहली का बल्ला अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं गरजता तो भारत को ये ऐतिहासिक जीत शायद ही मिलती. टीम इंडिया के इन दो बल्लेबाजों ने अफ्रीका में सबसे ज्यादा रन बनाए. यही हाल गेंदबाजी में रहा. टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज इस सीरीज में कुछ खास कमाल नहीं कर सके.

1. विराट कोहली : इस सीरीज के सबसे बड़े हीरो विराट कोहली ही रहे. टेस्ट के बाद वनडे सीरीज में भी वह 5 मैचों में सबसे ज्यादा रन बना चुके हैं. उनके बल्ले ने अब तक 2 शतक और दो अर्धशतकों की मदद से 429 रन बनाए हैं. विराट दक्षिण अफ्रीका में द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 350 से अधिक रन बनाने वाले एबी डिविलियर्स के बाद दूसरे बल्लेबाज बन गए. डिविलियर्स ने 2013 में पाकिस्तान के खिलाफ 367 रन बनाये थे.

2. शिखर धवन : 5 मैचों में शिखर धवन अब तक 305 रन बना चुके हैं. इसमें 2 अर्धशतक और 1 शतक शामिल है. चौथे मैच में उन्होंने अपने 100वें मैच में शतक जड़कर पहले भारतीय होने का गौरव पाया. इससे पहले अपने 100वें मैच में कोई भी भारतीय खिलाड़ी शतक नहीं जड़ पाया था. इस पूरी सीरीज में वह शानदार रहे हैं.

3. युजवेंद्र चहल : युजवेंद्र चहल 5 मैचों की 5 पारियों में 14 विकेट ले चुके हैं. अफ्रीका की तेज पिचों पर किसी स्पिनर का इस तरह से विकेट लेना अचंभित कर रहा है. एक बार वह 5 विकेट भी ले चुके हैं. वह इस सीरीज में विदेशी दौरे पर किसी भी भारतीय द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेटों के रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं. मैच अभी बाकी हैं, हो सकता है वह इसमें कामयाब हो जाएं.