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ममता ने दी गृहमंत्री राजनाथ सिंह को धमकी “NRC बंगाल पर थोपा गया तो गृह युद्ध”

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुद्दे पर गर्म हो रही सियासत के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने एनआरसी बिल की जगह नया बिल लाने पर विचार करने का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा है कि एनआरसी से बाहर रह गए लोगों को केंद्र या राज्य सरकार कतई परेशान नहीं करेगी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी का प्रकाशन असम समझौते और केंद्र सरकार, असम सरकार एवं अॉल असम स्टूडेंट यूनियन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के तहत किया गया है। जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है उन्हें पर्याप्त मौका दिया जाएगा।

इससे पहले ममता बनर्जी ने दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक कार्यक्रम में एनआरसी के मसले पर केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा सिर्फ चुनाव जीतने के लिए यह सरकार लोगों को निशाना नहीं बना सकती। क्या उन्हें इस बात का आभास भी है कि जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं होगा वे अपनी पहचान खो देंगे। केंद्र को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विभाजन से पहले भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश एक ही थे। मार्च 1971 तक जो भी व्यक्ति बांग्लादेश से भारत में आ गया वह भारतीय नागरिक है।

फिर देश का क्या होगा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अगर बंगाली लोग बिहार के लोगों को बंगाल में न रहने दें, दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारतीयों से वापस लौटने को कह दें और उत्तर भारतीय लोग दक्षिण भारत के लोगों को अपने वहां नहीं रहने देंगे तो फिर इस देश का क्या होगा। हम सब साथ हैं, हमारा देश एक परिवार की तरह है।’

ये तो आश्चर्य की बात है
ममता बनर्जी ने कहा, ‘मुझे आश्चर्य है कि पूर्व राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों का नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं है। इसमें मैं और क्या-क्या कहूं? बहुत से ऐसे लोग हैं जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है।’ उन्होंने कहा, हम बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि वहां पर हम हैं। आज स्थिति यह है कि इन लोगों के पास मतदान का अधिकार भी नहीं है।

अपने ही देश में रिफ्यूजी हो गए लोग
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आज आसाम में एनआरसी को लेकर जो कुछ हो रहा है। इसमें सिर्फ बंगाली लोग ही नहीं पिस रहे, इसमें अल्पसंख्यक, हिंदू, बिहारी सब लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कल की ही बात है जब 40 लाख से ज्यादा लोगों ने सत्तारूढ़ दल के लिए मतदान किया था और आज अचानक उन्हें अपने ही देश में रिफ्यूजी बना दिया गया है।’

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वर्ल्‍ड ट्रेड वार में भारत ने भी दिया अमेरिका को उसकी ही भाषा में जवाब

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी कारोबार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रॉबर्ट लाइटहाइजर के कार्यालय ने भारत सरकार द्वारा वस्तुओं के निर्यात को लेकर चलाई जाने वाली योजनाओं तथा निर्यात से जुड़ी इकाइयों की योजनाओं व अन्य ऐसी योजनाओं को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के खिलाफ कारोबारी विवाद आपत्तियों के निपटारे हेतु कठोर आवेदन प्रस्तुत किया था। अमेरिका की इन आपत्तियों पर भारत सरकार ने दलील दी कि उसके द्वारा दी जा रही विभिन्न राहत और सुविधाएं डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत ही हैं। लेकिन अमेरिका अनुचित और अन्यायपूर्ण ढंग से भारत पर व्यापार प्रतिबंध बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत ने विगत 18 मई को डब्ल्यूटीओ को अमेरिका से आयातित 30 उत्पादों की सूची सौंपी थी, जिन पर वह आयात शुल्क बढ़ाना चाहता था। अब भारत ने इनमें से 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।

वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर
इससे यही लगता है कि बीते कुछ दिनों से वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर यानी वैश्विक व्यापार युद्ध को लेकर जो आशंका जताई जा रही थी, वह सही साबित होने लगी है। यह सही है कि अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कोई सात दशक तक वैश्विक व्यापार, पूंजी प्रवाह और कुशल श्रमिकों के लिए न्यायसंगत आर्थिक व्यवस्था के निर्माण और पोषण में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन अब वही वैश्विक व्यवस्था मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदमों से जोखिम में है। इस साल अमेरिका ने चीन, मैक्सिको, कनाडा, ब्राजील, अर्जेटीना, जापान, दक्षिण कोरिया व यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों के साथ-साथ भारत की कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए हैं। जैसे-जैसे अमेरिका विभिन्न देशों के आयातों पर शुल्क बढ़ा रहा है, जवाब में वे देश भी वैसा ही कर रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव भी भारत के वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि 19 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के आयात पर 10 फीसद शुल्क लगाने की चेतावना दी।

चीन ने लगाया शुल्‍क
इसके चार दिन पूर्व ही ट्रंप ने चीन से 50 अरब डॉलर मूल्य के सामान के आयात पर 25 फीसद शुल्क लगाने को मंजूरी दे दी। इसके बाद चीन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी 50 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाएगा। इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि इसी माह कनाडा के क्यूबेक सिटी में आयोजित जी-7 देशों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और नीतियों की वजह से तमाशा बनकर रह गया। जी-7 के सदस्य देश कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, फ्रांस तथा ब्रिटेन जहां पहले ही ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर नाखुश थे, वहीं जी-7 सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिका ने इस समूह के विभिन्न देशों से होने वाले कुछ आयातों पर नए व्यापारिक प्रतिबंध घोषित करते हुए ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका को और गहरा दिया।

डब्ल्यूटीओ की भूमिका
इस संदर्भ में डब्ल्यूटीओ की भूमिका अहम हो जाती है। डब्ल्यूटीओ एक ऐसा संगठन है, जो सदस्य देशों के बीच व्यापार तथा वाणिज्य को सहज-सुगम बनाने का उद्देश्य रखता है। यद्यपि डब्ल्यूटीओ एक जनवरी, 1995 से प्रभावी हुआ, परंतु वास्तव में यह 1947 में स्थापित एक बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के नए एवं बहुआयामी रूप में अस्तित्व में आया। जहां गैट वार्ता वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रही थीं, वहीं इससे आगे बढ़कर डब्ल्यूटीओ का लक्ष्य वैश्विक व्यापारिक नियमों को अधिक कारगर बनाने के प्रयास के साथ-साथ सेवाओं एवं कृषि में व्यापार संबंधी वार्ता को व्यापक बनाने का रहा है। किंतु वैश्विक व्यापार को सरल और न्यायसंगत बनाने के 71 वर्ष बाद तथा डब्ल्यूटीओ के कार्यशील होने के 23 वर्ष बाद भारत सहित विकासशील देशों के करोड़ों लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि डब्ल्यूटीओ के तहत विकासशील देशों का शोषण हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय
ऐसे में दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञ यही आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका के संरक्षणवादी रवैये से वैश्विक व्यापार युद्ध की शुरुआत हो गई है। लिहाजा इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करना जरूरी है कि यदि विश्व व्यापार व्यवस्था वैसे काम नहीं करती, जैसे उसे करना चाहिए तो डब्ल्यूटीओ ही एक ऐसा संगठन है, जो इसे दुरुस्त कर सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दुनियाभर में घातक व्यापार लड़ाइयां 21वीं सदी की हकीकत बन जाएंगी। बेहतर यही होगा कि विभिन्न देश एक-दूसरे को व्यापारिक हानि पहुंचाने की होड़ में उलझने के बजाय डब्ल्यूटीओ के मंच से ही आसन्न ग्लोबल ट्रेड वॉर के नकारात्मक प्रभावों का उपयुक्त हल निकालें। यद्यपि भारत ने कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है, लेकिन अब बेहतर यही होगा कि वह इस मामले में धैर्य का परिचय दे और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक हितों के व्यापक पहलुओं पर गौर करे।

सबसे बड़ा निर्यातक बाजार
यह इसलिए भी जरूरी है कि जहां भारत के लिए अमेरिका दुनिया का सबसे पहले क्रम का निर्यातक बाजार है, वहीं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। पिछले वित्त-वर्ष में भारत ने अमेरिका को 47.9 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया था। हम उम्मीद करें कि भारत सरकार और भारतीय उद्यमी निर्यात की नई उभरती चुनौतियों के बीच विभिन्न देशों में विभिन्न वस्तुओं के निर्यात के नए मौके ढूंढने की डगर पर आगे बढ़ेंगे। खासकर चीन व अन्य देशों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ने के कारण अमेरिका से आयातित सोयाबीन, तंबाकू, फल, गेहूं, मक्का तथा रसायन जैसी जो कई चीजें महंगी हो गई हैं, वहां के बाजारों में ये भारतीय उत्पाद सस्ते होने के कारण सरलता से अपनी पैठ बना सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड वॉर की स्थिति के चलते हमारे निर्यात, निवेश व आर्थिक विकास दर घटने की जो आशंकाएं बढ़ गई हैं, उनसे निपटने हेतु सरकार को पुख्ता रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।

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किम के बड़े कदम से टली परमाणु आपदा, अब नए रिश्ते की होगी शुरुआत: डोनाल्ड ट्रम्प

सिंगापुर में मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने का वादा किया। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन डीसी लौटते वक्त ट्वीट किया, ‘अपने लोगों के उज्जवल भविष्य की खातिर साहसिक कदम उठाने के लिए मैं किम को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारी अप्रत्याशित मुलाकात से यह साबित होता है कि वास्तविक बदलाव संभव है।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘रॉकेट लांच, परमाणु परीक्षण या रिसर्च और नहीं। हम लोगों का एक साथ गुजरा दिन ऐतिहासिक रहा। धन्यवाद किम।’

दक्षिण कोरिया, चीन के दौरे पर पोंपियो

ट्रंप-किम शिखर वार्ता संपन्न होने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो दक्षिण कोरिया रवाना हो गए, जहां से वह चीन जाएंगे। पोंपियो दोनों देशों के अपने समकक्षों को शिखर वार्ता के बारे में जानकारी देंगे।

अन्य मिसाइल लांच स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे किम

शिखर वार्ता के एक दिन बाद ट्रंप ने बताया कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल परीक्षण स्थल को नष्ट करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम आगामी कुछ दिनों में अन्य मिसाइल स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे। उत्तर कोरिया ने पिछले महीने विदेशी मीडिया की मौजूदगी में अपना एक परमाणु परीक्षण स्थल ध्वस्त कर दिया था।

किम ने ट्रंप को दिया प्योंगयांग आने का न्योता

किम जोंग उन ने शिखर वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग आने का न्योता दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बुधवार को कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। दोनों ने इस आमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया है। इससे नए रिश्ते की शुरुआत होगी।

ट्रंप-किम वार्ता को उत्तर कोरिया के मीडिया ने बताया अपनी जीत

उत्तर कोरिया के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता को उत्तर कोरिया की जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर छाई रही। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट ने हालांकि शिखर वार्ता में हुए समझौते का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किए जाने पर सवाल भी उठाए।

दोनों अखबारों ने पहले पेज पर शिखर वार्ता की खबर को ट्रंप-किम की तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रॉडोंग सिनमुन ने अपने पहले पेज पर शिखर वार्ता को ‘सदी की बैठक’ बताया। सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने लिखा, ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को बंद करने, उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी देने और प्रतिबंधों को हटाने का इरादा जाहिर किया है।

उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन पर स्टार न्यूज एंकर री चुन ही ने भी इसी तरह की खबर पढ़कर सुनाई। 75 वर्षीय री आमतौर पर बड़ी घोषणाओं के मौके पर ही सामने आती हैं। पिछले साल सितंबर में उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण का एलान भी उन्होंने ही किया था।

सरकारी अखबार ने पहले पेज पर ट्रंप और किम के हाथ मिलाने समेत कई तस्वीरों को प्रकाशित किया है। जबकि अंदर के पेज पर अधिकारियों के साथ शिखर वार्ता, लंच और संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर करने की तस्वीरें छापी गई हैं।

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Box Office Report: आलिया की राज़ी ने चार दिन में इतना पैसा कमाया

राज़ी ने बॉक्स ऑफ़िस पर चौथे दिन भी कमाल का प्रदर्शन किया है। हरिंदर सिक्का ने उस दौरान हुई एक सच्ची घटना को किताब के पन्नों में कैद किया था। सहमत का वो किरदार आलिया भट्ट ने निभाया और फिल्म में विक्की कौशल, रजित कपूर, सोनी राजदान, अमृता खानविलकर, शिशिर शर्मा और जयदीप अहलावत ने काम किया है। करीब दो घंटे 18 मिनट की इस फिल्म को प्रचार के खर्च के साथ 30 करोड़ रूपये में बनाया गया और देश में 1200 व वर्ल्ड वाइड 450 स्क्रीन्स में रिलीज़ किया गया।

पाकिस्तानी हरकतों की जासूसी कर भारत को ख़ुफ़िया जानकारी देने की बहादुरी करने वाली सहमत का रोल निभा कर आलिया भट्ट इन दिनों देश-दुनिया में अपने नाम की तालियां बजवा रही हैं और यही कारण हैं कि उनकी फिल्म राज़ी ने सोमवार को भी कलेक्शन का कमाल दिखाया है। मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी फिल्म राज़ी ने घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ के चौथे दिन छह करोड़ 30 लाख रूपये का कलेक्शन किया है। राज़ी ने सात करोड़ 53 लाख से ओपनिंग ली थी यानि हफ़्ते के पहले सामान्य दिन पर सिर्फ साढ़े 16 प्रतिशत की गिरावट आई है जो बेहतरीन मानी जा रही है। सबसे बड़ी बात कि फिल्म को देश के सभी इलाकों में सराहा गया है और तगड़ी माउथ पब्लिसिटी भी मिल रही है। राज़ी को चार दिनों में अब 39 करोड़ 24 लाख रूपये का कलेक्शन हासिल हो चुका है।

राज़ी के पास अब ये पूरा हफ़्ता है, शुक्रवार के पहले तक जब वो अपना कलेक्शन और बेहतर साबित कर सकती है। शुक्रवार को हॉलीवुड की फिल्म डेडपूल रिलीज़ हो रही है और माना जा रहा है कि एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर की तरह इस फिल्म को भी जबरदस्त सफलता मिल सकती है। राज़ी का 75 करोड़ लाइफ़ टाइम कलेक्शन होने का अनुमान लगाया गया है। फिल्म राज़ी पहले ही इस साल की पांचवी सबसे अधिक वीकेंड कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। राज़ी, साल 2008 में आई हरिंदर सिक्का की किताब ‘कॉलिंग सहमत’ की कहानी पर आधारित है। राज़ी कहानी है साल 1971 की जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव चरम पर था। तभी आये एक ‘सीक्रेट कोड’ ने भारतीय सेना के हौसलों को बुलंद कर दिया था। कश्मीर की कॉलेज जाने वाली एक लड़की सहमत ने ऐसा कर दिखाया था। पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करने निकली वो लड़की अपनी देशभक्ति के लिए जासूस बन जाती है। पाकिस्तान के आर्मी जनरल के लड़के से शादी कर लेती है और उसका मिशन होता है कि वो हर रोज़ भारतीय ख़ुफ़िया तंत्र को पाकिस्तान गतिविधियों की जानकारी पहुंचाये।

 

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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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Avengers ने Box Office पर मचाई तबाही, दुनिया के कई रिकॉर्ड ध्वस्त

आपने बॉक्स ऑफ़िस पर बड़े उथल-पुथल देखे होंगे। कमाई का तूफ़ान और सुनामी भी देखी होगी लेकिन डेढ़ दर्जन सुपरहीरोज़ से लैस एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर ने तीन दिन में भारतीय बॉक्स ऑफ़िस पर जिस तरह से करोड़ों बटोरे हैं वो आपको हैरान करने के लिए काफ़ी हैं।

एंथोनी और जो रूसो के निर्देशन में बनी एवेंजर्स- इनफिनिटी वॉर ने इंडियन बॉक्स ऑफिस पर पहले वीकेंड में 94 करोड़ 30 लाख रूपये का विशाल कलेक्शन कर लिया है। हिंदी, तमिल और तेलुगु में रिलीज़ हुई इस फिल्म ने अपनी रिलीज़ के तीसरे  32 करोड़ 50 लाख रूपये का कलेक्शन किया जो तीन दिनों में सबसे ज़्यादा है। फिल्म ने दूसरे दिन 30 करोड़ करोड़ 50 लाख रूपये का कलेक्शन किया और एवेंजर्स ने पहले ही दिन 31 करोड़ 30 लाख का कलेक्शन कर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। रॉबर्ट डाउनी जूनियर, क्रिस हेम्सवर्थ, मार्क रुफालो, बेनेडिक्ट कम्बरबैच, सबस्टियन स्टान, क्रिस इवांस,स्कारलेट जोहेनसन और चैडविक बोसमैन जैसे बड़े सितारों से सजी ये फिल्म करीब 300 मिलियन डॉलर में बनाई गई और इसे भारत में 2000 से अधिक स्क्रीन्स में रिलीज़ किया गया, जिसमें से एक हजार के करीब थियेटर्स में ये फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु के डब वर्जन में देखने मिल रही है । एवेंजर्स पहले ही इस साल की इंडियन बॉक्स ऑफिस की सबसे बड़ी ओपनर बन चुकी है , जिसने बाग़ी 2 के 25 करोड़ 10 लाख रूपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया।

उधर दुनिया भर में एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर का जलवा हैl बिना चीन में रिलीज़ हुए फिल्म ने दुनिया भर से एक वीकेंड में 630 मिलियन डॉलर की कमाई कर एक नया विश्व कीर्तिमान बना दिया है l अकेले अमेरिका में भी फिल्म ने 250 मिलियन डॉलर का कलेक्शन किया है जो स्टारवार्स –द फ़ोर्स अवेकंस से अधिक है l यही नहीं फिल्म ने दुनिया भर में भी एक रिकॉर्ड बनाया है l इससे पहले एक वीकेंड में द फेट ऑफ द फ्यूरियस को 541.9 मिलियन डॉलर की कमाई हुई थी l

एवेंजर्स ने कई सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इनमें फ़ास्ट एंड फ्यूरियस 7 का एक वीकेंड का 50 करोड़ 11 लाख रूपये का और जंगल बुक का एक हफ़्ते में कमाया गया 74 करोड़ करोड़ 63 लाख रूपये का कलेक्शन भी शामिल है। उम्मीद की जा रही है कि ये फिल्म सोमवार के कलेक्शन के साथ फास्ट एंड फ्यूरियस 7 के लाइफ़ टाइम कलेक्शन 108 करोड़ को तोड़ देगी।   

अगर घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर भारतीय फिल्मों की बात करें तो इस साल आई पद्मावत के तीन दिन के कलेक्शन 78 करोड़ और बाग़ी 2 के 73 करोड़ 10 लाख रूपये की कमाई को ये फिल्म पीछे छोड़ चुकी है। बाग़ी 2 के 165 करोड़ रूपये के कलेक्शन को पीछे छोड़ना भी इस फिल्म के लिए मामूली बात लग रही है। हालांकि फिल्म सुल्तान, प्रेम रतन धन पायो और बाहुबली 2 के पहले वीकेंड के कलेक्शन को पीछे नहीं छोड़ पाई। 

माना रहा है कि देश में सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी के चलते 15 से 20 करोड़ रूपये का कलेक्शन हो सकता है।  फिल्म को एक मई को मे डे की छुट्टी का भी भरपूर फ़ायदा मिलेगा।

हालांकि फिलहाल ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन सबसे अधिक कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्म बन गई है। अब जंगल बुक (13.51 करोड़) दूसरे, एवेंजर्स- एज ऑफ़ अल्ट्रॉन (11.95 करोड़) तीसरे, फास्ट एंड फ्यूरियस 8 ( 9.75 करोड़ ) चौथे और कैप्टन अमेरिका सिविल वॉर (8.79 करोड़) पांचवे नंबर पर है।

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सीरिया में रासायनिक हमला: रूस के ख़िलाफ़ अमरीका हुआ आक्रामक

अमरीका ने कहा है कि सीरिया के डूमा में हुए कथित रासायनिक हमले के कसूरवारों को कड़ा जवाब दिया जाएगा.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि इस घटना का कड़ा जवाब दिया जाएगा और अमरीका के पास कई सारे सैन्य विकल्प हैं. उन्होंने कहा कि इन पर ‘आज रात’ या ‘शीघ्र’ फ़ैसला लिया जा सकता है.

ट्रंप ने कहा कि शनिवार को डूमा में जो घटना हुई उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस पर अमरीका ‘स्पष्टता’ चाह रहा था.

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस घटना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां से सोमवार शाम बात की और दोनों ही नेताओं ने एक ‘मज़बूत प्रतिक्रिया’ को लेकर इच्छा व्यक्त की है.

निक्की हेली

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Image captionनिक्की हेली ने कहा है कि रूस के हाथ ‘सीरियाई बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का आक्रामक रुख़

वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका और रूस ने एक दूसरे पर जमकर हमले किए.

रूस के प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि सीरिया के डूमा में हुई घटना ‘गढ़ी गई है’ और इसके जवाब में अमरीकी सेना की कार्रवाई के ‘भयानक प्रभाव’ हो सकते हैं.

इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की दूत निक्की हेली ने कहा कि सीरिया को सैन्य मदद देने वाले रूस के हाथ ‘सीरिया के बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा था कि दुनिया की बड़ी शक्तियां रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की अनदेखी कर रही हैं.

वहीं, निक्की हेली ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को “शैतान” करार देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिषद कार्रवाई करे न करे, ‘अमरीका किसी न किसी तरह से प्रतिक्रिया देगा.’

उन्होंने कहा, “बैठकें चल रही हैं और जिस समय हम बात कर रहे हैं, महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जा रहे हैं.”

रूस का जवाब

संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि ने कहा कि डूमा में विद्रोहियों ने इस घटना को ख़ुद रचा. उन्होंने इसे अमरीका की शह पर उठाया गया क़दम बताया ताकि रूस को नुक़सान पहुंचाया जाए.

संयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधिइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionसंयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधि

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को जल्द से जल्द सीरिया जाकर जांच करने को कहा. उन्होंने कहा कि इस दौरान कथित हमले वाली जगह तक उन्हें रूस के सैनिक ले जाएंगे.

रूस ने कहा है कि उसे क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं.

अमरीका ने सैन्य हमला किए जाने की संभावनाओं को ख़ारिज नहीं किया है.

इससे पहले उसने पिछले साल अप्रैल में सीरिया के एयरबेस पर क्रूज़ मिसाइल से हमला किया था.

सीरिया में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शेखोन में सरीन गैस के इस्तेमाल से 80 लोगों की मौत के बाद यह क़दम उठाया गया था. जांचकर्ताओं ने इस हमले के लिए सीरिया को ज़िम्मेदार ठहराया था.

गूटा

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Image captionपूर्वी गूटा का डूमा विद्रोहियों के कब्ज़े वाला इकलौता शहर बचा है

क्या हुआ था डूमा में?

सीरिया में राहत बचावकर्मियों ने शनिवार को दावा किया था कि डूमा शहर में ज़हरीली गैस से हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हुई है.

हालांकि, अमरीकी विदेश विभाग का कहना था कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

सीरिया-अमरीकी मेडिकल सोसाइटी ने बताया था कि पूर्वी गूटा क्षेत्र के डूमा में 500 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों पर लाया गया था.

सोसाइटी का कहना था कि इन लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ त्वचा का रंग नीला पड़ने और मुंह से झाग निकलने जैसी दिक्कतें पेश आ रही थीं.

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चीन का अमेरिका को जवाब, 100 से ज्यादा अमेरिकी उत्पादों पर बढ़ायेगा शुल्क

अमेरिका के इस्पात एवं एल्युमीनियम पर शुल्क का जवाब देने के लिए चीन ने शुक्रवार को सूअर के मांस (पोर्क) और पाइप सहित अन्य अमेरिकी उत्पादों पर उच्च शुल्क लागू करने की योजना जारी की. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस कदम के तहत सूअर के मांस, वाइन (शराब) और स्टील की पाइपों समेत 128 अमेरिकी उत्पादों से शुल्क रियायतें हटायी जायेंगी.

मंत्रालय के मुताबिक, इन उपायों में फल, अखरोट, वाइन (शराब) और इस्पात की पाइपों समेत अन्य उत्पादों पर 15 प्रतिशत शुल्क एवं सूअर के मांस तथा पुनरावर्तित एल्युमीनियम उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क शामिल होगा. ये उपाय दो चरणों में लागू किये जायेंगे.

सरकारी समचार एजेंसी शिन्हुआ ने मंत्रालय के हवाले से कहा कि यदि दोनों देश तय समय के भीतर व्यापार से जुड़े मामलों पर समझौता नहीं करते हैं तो पहले चरण में 15 प्रतिशत शुल्क लगाया जायेगा. वहीं, दूसरे चरण में, अमेरिकी नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जायेगा.

चीन का यह कदम अमेरिका के उस निर्णय का पलटवार माना जा रहा है, जिसमें उसने इस्पात आयात पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम आयात पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगाया है. इस फैसले से कनाडा और मेक्सिको को शुरुआती छूट मिली है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कल कहा था कि वह अपने हितों और अधिकारों के बचाव के लिए ‘सभी आवश्यक कदम’ उठायेगा.

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चाहे जो भी कर लो, बच नहीं पाओगे! Avengers Infinity War Official Trailor in Hindi

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Iron Man, Thor, the Hulk and the rest of the Avengers unite to battle their most powerful enemy yet — the evil Thanos. On a mission to collect all six Infinity Stones, Thanos plans to use the artifacts to inflict his twisted will on reality. The fate of the planet and existence itself has never been more uncertain as everything the Avengers have fought for has led up to this moment.

Now it’s time to watch the official Hindi Trailor of Avengers Infinity War