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Box Office Report: आलिया की राज़ी ने चार दिन में इतना पैसा कमाया

राज़ी ने बॉक्स ऑफ़िस पर चौथे दिन भी कमाल का प्रदर्शन किया है। हरिंदर सिक्का ने उस दौरान हुई एक सच्ची घटना को किताब के पन्नों में कैद किया था। सहमत का वो किरदार आलिया भट्ट ने निभाया और फिल्म में विक्की कौशल, रजित कपूर, सोनी राजदान, अमृता खानविलकर, शिशिर शर्मा और जयदीप अहलावत ने काम किया है। करीब दो घंटे 18 मिनट की इस फिल्म को प्रचार के खर्च के साथ 30 करोड़ रूपये में बनाया गया और देश में 1200 व वर्ल्ड वाइड 450 स्क्रीन्स में रिलीज़ किया गया।

पाकिस्तानी हरकतों की जासूसी कर भारत को ख़ुफ़िया जानकारी देने की बहादुरी करने वाली सहमत का रोल निभा कर आलिया भट्ट इन दिनों देश-दुनिया में अपने नाम की तालियां बजवा रही हैं और यही कारण हैं कि उनकी फिल्म राज़ी ने सोमवार को भी कलेक्शन का कमाल दिखाया है। मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी फिल्म राज़ी ने घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ के चौथे दिन छह करोड़ 30 लाख रूपये का कलेक्शन किया है। राज़ी ने सात करोड़ 53 लाख से ओपनिंग ली थी यानि हफ़्ते के पहले सामान्य दिन पर सिर्फ साढ़े 16 प्रतिशत की गिरावट आई है जो बेहतरीन मानी जा रही है। सबसे बड़ी बात कि फिल्म को देश के सभी इलाकों में सराहा गया है और तगड़ी माउथ पब्लिसिटी भी मिल रही है। राज़ी को चार दिनों में अब 39 करोड़ 24 लाख रूपये का कलेक्शन हासिल हो चुका है।

राज़ी के पास अब ये पूरा हफ़्ता है, शुक्रवार के पहले तक जब वो अपना कलेक्शन और बेहतर साबित कर सकती है। शुक्रवार को हॉलीवुड की फिल्म डेडपूल रिलीज़ हो रही है और माना जा रहा है कि एवेंजर्स इनफिनिटी वॉर की तरह इस फिल्म को भी जबरदस्त सफलता मिल सकती है। राज़ी का 75 करोड़ लाइफ़ टाइम कलेक्शन होने का अनुमान लगाया गया है। फिल्म राज़ी पहले ही इस साल की पांचवी सबसे अधिक वीकेंड कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। राज़ी, साल 2008 में आई हरिंदर सिक्का की किताब ‘कॉलिंग सहमत’ की कहानी पर आधारित है। राज़ी कहानी है साल 1971 की जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव चरम पर था। तभी आये एक ‘सीक्रेट कोड’ ने भारतीय सेना के हौसलों को बुलंद कर दिया था। कश्मीर की कॉलेज जाने वाली एक लड़की सहमत ने ऐसा कर दिखाया था। पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करने निकली वो लड़की अपनी देशभक्ति के लिए जासूस बन जाती है। पाकिस्तान के आर्मी जनरल के लड़के से शादी कर लेती है और उसका मिशन होता है कि वो हर रोज़ भारतीय ख़ुफ़िया तंत्र को पाकिस्तान गतिविधियों की जानकारी पहुंचाये।

 

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जानिए कठुआ रेप कांड का पूरा सच। डी एन ए रिपोर्ट! #Kathua #JusticeForAsifa #Truth

जानिए डेली न्यूज़ एंड एनालिसिस रिपोर्ट से कठुआ रेप कांड से जुड़ा हर सच। किसी भी प्रतिक्रिया देने से पहले सच जानना जरुरी है। हम मांग करते हैं अगर उन्नाव केस की CBI जाँच हो सकती है तो कठुआ रेप कांड की भी CBI जाँच होनी चाहिए और केस को फ़ास्ट ट्रैक कर के सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द अपराधियों को सूली पर चढ़ाया जाये।

कठुआ रेप कांड का पूरा सच

 

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भगत सिंह के केस से जुड़ी सभी फाइलें पाक में सार्वजनिक, दस्तावेजों से सामने आई एक अनोखी बात

शहीद भगत सिंह और उनके साथियों पर चल रहे मुकदमे और फांसी से जुड़ी सभी फाइलों को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने सार्वजनिक कर दिया है। इस केस से जुड़ी कुछ फाइलें हफ्ते की शुरआत में ही सार्वजनिक कर दी गई थीं। पंजाब सरकार ने भगत सिंह की फांसी के 87 साल गुजर जाने के बाद यह फैसला लिया था।

(वीडियो: पाक मीडिया रिपोर्ट)

भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव व राजगुरु को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या में 23, मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी। सार्वजनिक किए गए नए रिकार्ड में केस से जुड़ी खबरों की क्लिपिंग, सांडर्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुखदेव व राजगुरु को फांसी देने का वारंट समेत ब्रिटिश पुलिस द्वारा सिंह और उनके साथियों के अड्डे पर छाप मारने में बरामद हुए पिस्टल व बुलेट की तस्वीरें समेत कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

भगत सिंह द्वारा 27 अगस्त, 1930 को कोर्ट के फैसले की कॉपी मांगने के साथ सिंह की सजा के खिलाफ उनके पिता सरदार किशन सिंह की कोर्ट में दाखिल की गई याचिका को पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया था।

23 मार्च, 1931 को जेल निरीक्षक द्वारा बनाए गए मुत्यु प्रमाण पत्र को भी सार्वजनिक किया गया है। साथ ही जेल में किताबों और अखबार मुहैया कराने की मांग के लिए भगत सिंह के पत्र को भी आम नागरिकों के सामने प्रत्यक्ष किया गया है। कई दस्तावेज भगत सिंह के साथियों के ठिकानों पर ब्रिटिश पुलिस की छापेमारी से भी संबंधित हैं।

दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद भगत सिंह से जुड़ी एक अनोखी बात भी सामने आई है। सिंह अपने किसी भी पत्र में आपका आभारी या आज्ञाकारी लिखने की जगह आपका आदि, आदि लिखा करते थे। पंजाब के अभिलेख विभाग का कहना है कि अभी सिंह के केस से जुड़ी कुछ फाइलों को ही सार्वजनिक किया जा रहा है। बाकी दस्तावेज मंगलवार को सार्वजनिक किए जाएंगे।

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LIVE विधानसभा चुनाव परिणाम: लेफ़्ट भारत के किसी भी हिस्से के लिए राइट नहीं है- अमित शाह

  • त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के रुझानों में बीजेपी को भारी बढ़त25 साल से है लेफ्ट की सरकार.
  • मेघालय में रुझानों में कांग्रेस को बढ़त. राज्य में अभी है कांग्रेस की सरकार.
  • नागालैंड में बीजेपी गठबंधन और नगा पीपुल्स फ्रंट में कांटे का मुकाबला.

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है. त्रिपुरा विधानसभा में बीजेपी की कामयाबी के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस जीत के लिए जनता का धन्यवाद किया.

उन्होंने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिली है. साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में वामपंथी हिंसा में मारे गए बीजेपी के नौ कार्यकर्ताओं को यह जीत एक श्रद्धांजली है.

अमित शाहइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionबीजेपी अध्यक्ष ने त्रिपुरा की जीत को जनता की जीत बताया है

2013 के चुनावों की बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि उस समय पार्टी को 1.3 फ़ीसदी वोट मिले थे और एक सीट छोड़कर सारे उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त हो गई थी. उन्होंने आगे कहा कि इस बार बीजेपी गठबंधन को 50 फ़ीसदी से अधिक वोट मिले हैं.

अमित शाह ने वामपंथी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, “लेफ़्ट भारत के किसी भी हिस्से के लिए राइट नहीं है.”

मेघालय के चुनाव परिणामों को अमित शाह ने त्रिशंकु बताया है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि जहां विधयाक बीजेपी के साथ होंगे वहां उनकी पार्टी की सरकार बनेगी. बीजेपी के गोल्डन पीरियड पर अमित शाह ने कहा कि वह कर्नाटक, केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद आएगा.

त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड विधानसभा चुनाव 2018

त्रिपुरा

त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 292 उम्मीदवार हैं, जिनमें 23 महिलाएं हैं. त्रिपुरा की 59 सीटों पर वोटिंग हुई है.

राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से 59 पर मतगणना हो रही है. चारीलाम सीट से मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार रामेंद्र नारायण देबर्मा के निधन की वजह से इस सीट पर 12 मार्च को मतदान होगा.

माणिक सरकार, त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड विधानसभा चुनाव 2018
Image captionमाणिक सरकार

त्रिपुरा में साल 1993 से ही मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा की सरकार रही है और पिछले 20 सालों से राज्य की बागडोर मुख्यमंत्री माणिक सरकार के हाथों में है. हालांकि इस बार शुरुआती रुझानों में इस बार बीजेपी माकपा को टक्कर देती दिख रही है. यहां बीजेपी ने क्षेत्रीय दल इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ गठबंधन किया है.

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने त्रिपुरा में 50 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 49 की जमानत जब्त हो गई थी. तब बीजेपी को यहां केवल 1.87 फ़ीसदी वोट मिले थे और वो एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. वहीं माकपा को 49 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस को 10 सीटों से संतोष करना पड़ा था.

पूर्वोत्तर विधानसभा चुनाव नतीजे, त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड विधानसभा चुनाव 2018

नागालैंड

नागालैंड में 59 सीटों के लिए हुए चुनाव में 193 उम्मीदवार मैदान में हैं.

नगालैंड में बीजेपी इस बार नवगठित नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के साथ गठबंधन कर चुनावी अखाड़े में उतरी. बीजेपी ने 20 जबकि एनडीपीपी ने 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारे.

विलियमनगर सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के उम्मीदवार जोनाथन संगमा की 18 फरवरी को ईस्ट गारो हिल्स जिले में आईईडी विस्फोट में मौत के बाद इस सीट पर मतदान रद्द कर दिया गया.

कांग्रेस राज्य पर एक दशक से राज कर रही है. पार्टी ने इस बार भी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे.

कांग्रेस ने 2013 चुनाव में 29 सीटें हासिल की थी. राज्य के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा इस बार दो विधानसभाओं अमपाती और सोंगसक से चुनाव में उतरे और दोनों ही सीटें उन्होंने जीत लीं.

त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड विधानसभा चुनाव 2018इमेज कॉपीरइटDILEEP SHARMA-BBC

मेघालय

मेघालय विधानसभा की 59 सीटों के लिए 372 उम्मीदवार मैदान में हैं.

मेघालय में इस बार 84 फ़ीसदी मतदान हुआ है. सत्तारूढ़ कांग्रेस के अलावा बीजेपी, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नवगठित पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट मुकाबले में है.

साल 2013 के चुनाव में भाजपा ने इस राज्य में 13 उम्मीदवार उतारे थे, मगर कोई जीत न सका था. एनपीपी को 32 में से मात्र दो सीटें मिली थीं.

त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड विधानसभा चुनाव 2018इमेज कॉपीरइटDEBALIN ROY/BBC

सभी राज्यों में मतों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरू हुई. त्रिपुरा में 18 फ़रवरी को वोट डाले गए थे, जबकि मेघालय और नगालैंड में 27 फ़रवरी को मतदान हुआ था.

तीनों राज्यों में कुल 857 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला होना है.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा नज़रें त्रिपुरा पर टिकी हैं, जहां पिछले 25 सालों से वाम दलों का शासन है. केरल के अलावा लेफ्ट की सरकार बस इसी राज्य में है. अगर त्रिपुरा में वामपंथियों की हार होती है तो उनके लिए यहां एक युग का अंत हो जाएगा.

त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड विधानसभा चुनाव 2018इमेज कॉपीरइटDEBALIN ROY/BBC
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पूर्ण चंद्रग्रहण आज: 150 साल बाद ऐसा नाजारा दिखेगा; आज जानें सुपर मून, ब्लू मून और ब्लड मून क्या होता

यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा यानी इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से कुछ देर के लिए पूरी तरह ढक जाएगा। यह पूरे देश में दिखाई देगा। यह स्थिति 35 साल बाद बनी है। इस साल का पहला चंद्रग्रहण आज है। इसके साथ ही एशिया में 35 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब ब्लू मून ब्लड मून और सुपर मून एक साथ दिखेगा।

सुपर मून क्या होता है?
चंद्रमा का अपने सामान्य आकार से ज्यादा बड़ा दिखाई देना सुपर मून कहलाता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होता है। सुपर मून का आकार सामान्य से 10 से 14 फीसदी बड़ा होता है।

ब्लू मून क्या होता है?
एक महीने में जब दो पूर्णिमा पड़ती हैं तो इस स्थिति को ब्लू मून कहते हैं। इस बार 2 जनवरी को भी पूर्णिमा थी। दूसरी 31 जनवरी को है। NASA के ब्लू मून हर ढाई साल में एक बार नजर आता है। इस दौरान चंद्रमा का नीचे का हिस्सा ऊपरी हिस्से से ज्यादा चमकीला दिखाई देता है और नीली रोशनी देता है।

ब्लड मून क्या होता है?

बीएम बिरला साइंस सेंटर के डायरेक्टर बीजी सिद्धार्थ ने न्यूज एजेंसी को बताया जब तीनों (सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा) एक सीध में होंगे तो यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। इस दौरान सूर्य की कुछ किरणें पृथ्वी के एटमॉस्फेयर से होकर चंद्रमा पर पड़ती हैं। इस दौरान वह हल्का भूरे और लाल रंग में चमकता है। कुछ लोग इसे ब्लड मून भी कहते हैं।

शाम 5:20 से रात 8:43 बजे तक नजर आएगा
यह चंद्रग्रहण शाम 5.20 बजे शुरू होगा। यह ठीक ढंग से सूर्यास्त के बाद 6:25 बजे से नजर आएगा और 8.43 बजे तक रहेगा।

भारत के अलावा यह एशिया रूस मंगोलिया जापान आस्ट्रेलिया आदि में चंद्रमा के उदय के साथ ही शुरू हो जाएगा। नॉर्थ अमेरिका कनाडा और पनामा के कुछ हिस्सों में चंद्रमा के अस्त होते वक्त दिखाई देगा।

इस साल भारत में सूर्यग्रहण नहीं दिखेगा
इस साल 2 चंद्रग्रहण और 3 सूर्यग्रहण होंगे। भारत में दोनों चंद्रग्रहण दिखाई देंगे लेकिन सूर्यग्रहण नहीं दिखाई देगा। इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण 27 जुलाई को है।

19 साल बाद नजर आएगा ब्लू-ब्लड मून
ब्लड-ब्लू मून की स्थिति इससे पहले 1982 में बनी थी।
सुपर ब्लू-ब्लड मून के दिन चंद्रमा सामान्य से 10 फीसदी या इससे ज्यादा बड़ा नजर आएगा। यह 30 फीसदी ज्यादा चमकदार भी दिखाई देता है।
इसके बाद 31 जनवरी 2037 को भी सुपर ब्लू-ब्लड मून नजर आएगा।

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असली आतिशबाजी देखनी हो तो तारीख लिख लीजिये

टूटता तारा किसे अच्छा नहीं लगता. दिख जाए तो आस्तिक उसे देखकर कुछ मांगने लगते हैं. नास्तिक एकटक देखते रहते हैं. लेकिन टूटता तारा दिखता बड़ी मुश्किल से है. कितने लोग आसमान ताकते रात बिता देते हैं. इन लोगों के लिए अच्छी खबर है. 20-22 अक्टूबर, 2017 की रात ये सैकड़ों तारे टूटते देख सकते हैं. क्योंकि ये वक्त है सालाना ओरियनिड मीटियोर शावर का.

मीटियोर माने टूटता तारा. शावर माने बारिश. तो मीटियोर शावर तारों की बारिश है. इस दौरान एक घंटे के अंदर 100 तक टूटते तारे दिखाई दे सकते हैं. इस साल के ओरियनिड मीटियोर शावर के दौरान सबसे तगड़ा नज़ारा 21 अक्टूबर को रहने की उम्मीद है.

धूमकेतु आगे बढ़ते हुए अपने पीछे मलबा छोड़ते चलते हैं (फोटोःरॉयटर्स)

21 अक्टूबर को कहां से आएंगे इतने तारे?

आपने हेलीज़ कॉमेट के बारे में सुना होगा. कॉमेट माने धूमकेतू. माने पुच्छल तारा. पुश्तों से इंसान इस धूमकेतू को आसमान में देख रहा था. लेकिन एडमंड हेली ने सबसे पहले बताया कि ये हर 74-79 साल में धरती का चक्कर लगाता है. इसलिए इसे हेली का नाम दिया गया.

एक इंसान नंगी आंखों से हेलीज़ कॉमेंट को अपनी ज़िंदगी में दो बार ही देख सकता है (वो बाबा रामदेव के योग से 400 साल जी जाए तो बात और है.) लेकिन दूसरे धूमकेतुओं की तरह ही हेलीज़ कॉमेट भी अंतरिक्ष में बढ़ते हुए ढेर सारा मलबा पीछे छोड़ता रहता है. हेलीज़ के कॉमेट की तरह ही ये मलबा भी वक्त पर चलता है. धरती का गुरुत्व इन्हें अपनी ओर खींच लेता है. नीचे आते हुए मलबे के ये पत्थर धरती के इर्द-गिर्द हवा में घर्षण से जलने लगते हैं. हर साल अक्टूबर-नवंबर के बीच इनकी तादाद इतनी होती है कि टूटते तारों की बारिश नज़र आती है, नंगी आंखों से.

मीटियोर शावर के दौरान ढेर सारे टूटते तारे आसमान में नज़र आते हैं (फोटोःरॉयटर्स)

यहां ये समझा जाए कि धूमकेतु और टूटते तारे में फर्क है. धूमकेतु बर्फ, धूल और चट्टानों का एक गोला होता है जो अंतरिक्ष में चक्कर लगाता रहता है. ये जब सूरज के पास से गुज़रता है तो इसमें से बर्फ भाप बनकर निकलने लगती है. ऐसे में ढीले हो चुके पत्थर और धूल भी निकलते हैं. ये मलबा एक पूंछ की तरह धूमकेतु के पीछे उड़ता है. पूंछ के लिए शब्द है ‘कोमा’ (coma). इसी से कॉमेट (comet) शब्द बना है. पूंछ है, तो देसी भाषा में पुच्छल तारा भी कह देते हैं.

इसी तरह कई चट्टानें भी अंतरिक्ष में भटकती रहती हैं. ये जब धरती की तरफ आते हैं तो धरती का गुरुत्व उन्हें पास खींच लेता है. धरती पर गिरते हुए इन चट्टानों पर वायुमंडल में मौजूद हवा से रगड़ पड़ती है और वो गरम होकर दमकने लगते हैं. यही चमक हमें टूटकर गिरते एक तारे का आभास कराती है.

मीटियोर या टूटता तारा. (फोटोःविकिमीडिया कॉमन्स)

लेकिन इस मीटियोर शावर को ओरियनिड नाम क्यों पड़ा?

साइंस की किताब याद कीजिए. उसमें एक चैप्टर कॉनस्टेलेशन पर था. माने नक्षत्र. माने तारों का एक पैटर्न जो आसमान में एक खास जगह नज़र आता है, हर रात. इनमें से एक है ओरियन. ओरियन को अपने यहां मृग कहते हैं. हेलीज़ कॉमेट के चलते होने वाली तारों की बारिश आसमान में वहीं नज़र आती है, जहां ओरियन नज़र आता है. इसलिए इसे ओरियनिड मीटियोर शावर कहते हैं.

2017 में ओरियनिड मीटियोर शावर सबसे बढ़िया 20-22 अक्टूबर के दरमियान दिखाई देगा. मीटियोर शावर देखने के लिए टेलिस्कोप की ज़रूरत नहीं पड़ती, ये नंगी आंखों से नज़र आ जाता है. लेकिन इस साल ये वक्त अमावस्या के वक्त पड़ रहा है, इसलिए तारों की बारिश देखने में कुछ आसानी होगी.

अलग-अलग मीटियोर शावर साल में तय वक्त पर नज़र आते हैं

कहां देखें तारों की बारिश को?

नासा का कहना है कि ये नज़ारा पूरी धरती पर कहीं से भी देखा जा सकता है. लेकिन बेहतर ये होगा कि किसी ऐसी जगह जाएं जहां लाइट पॉल्यूशन कम हो.

ऐसी किसी जगह जाएं जो किसी बड़े शहर से दूर हो. आस-पास ज़्यादा रोशनी नहीं हो तो बेहतर है. लेकिन एक पेच है. आपने दिवाली में सुप्रीम कोर्ट की समझाइश के बाद भी इतना गदर काट दिया है कि आसमान में धुआं-धुआं बचा है बस. तो आप मन मसोसते रहिए. आप धम-धड़ाम की दिवाली मना चुके. असल दिवाली वहां के लोग देखेंगे, जिनके पास आपसे सेर भर दिमाग ज़्यादा है.

ओरियनिड मीटियोर शावर के दौरान टूटता एक तारा (फोटोःरॉयटर्स)

और भी कभी दिखता है?

हेलीज़ कॉमेट का मलबा धरती पर नवंबर के पहले हफ्ते तक गिरता रहता है. लेकिन ओरियनिड शावर को देखने का सबसे बढ़िया समय अक्टूबर में ही होता है, अमूमन 20-22 तारीख के बीच. लेकिन अगर आप इसे मिस कर जाएं तो आप नवंबर की 18 तारीख को लियोनिड (लियो माने सिंह) शावर या फिर 14 दिसंबर को जेमिनिड (जेमिनी माने मिथुन) शावर देख सकते हैं. तो कैलेंडर पर तारीख का गोदना बना लीजिए।

(सौजन्य: लल्लनटोप)