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बिना सिम के भी कर सकेंगे मोबाइल से कॉल। जाने कैसे

यह सर्विस मोबाइल यूजर को नजदीकी पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क के जरिए कॉल कनेक्ट करने में मदद करेगी। DoT ने टेलिकॉम कंपनियों से कहा है कि उन्हें सब्सक्राइबर्स को इस सर्विस से संबंधित डिटेल में जानकारी देनी आवश्यक है जिससे वो ठीक से निर्णय ले पाएं। इसके साथ ही DoT से सभी टेलिकॉम कंपनियों को वॉयस कॉल वाई-फाई से कनेक्ट करते समय एक दूसरे के डाटा नेटवर्क इस्तेमाल करने की भी इजाजत दे दी है। साथ ही अगर थर्ड पार्टी लाइसेंस खरीदती है तो उन्हें भी इस सर्विस की इजाजत मिल जाएगी। वहीं, DoT ने टेलिकॉम कंपनियों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कंपनियां इस सर्विस से संबंधित सभी नियमों का पालन कर रही हैं।

कॉल्स की सफलता दर में होगी बढ़ोतरी:

ट्राई के मुताबिक, यह सर्विस वॉयस कॉल का एक प्रभावी विकल्प साबित होगा। इससे वॉयस कॉलिंग की सफलता दर में बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है। खासतौर से यह सर्विस खराब या लो नेटवर्क क्षेत्रों में काफी कारगर साबित होगी जहां इंटरनेट सर्विस तो उपलब्ध रहती है लेकिन मोबाइल नेटवर्क नहीं आते हैं। वहीं, टेलिकॉम कंपनियों के विरोध पर ट्राई ने असहमति जताई है। ट्राई का कहना है कि इससे यूजर्स को कॉल करने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

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मोदी सरकार को चाहिए 10 जॉइंट सेक्रेटरी, बिना UPSC किये प्रोफेशनल्स की होगी भर्ती

अब संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित होने वाली सिविल सर्विसेज परीक्षा पास किए बिना भी योग्य उम्मीदवार सरकार में वरिष्ठ अधिकारी बन सकते हैं.

कौन कर सकता है अप्लाई

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार इन पदों के लिए वो लोग अप्लाई कर सकते हैं, जिनकी उम्र 1 जुलाई तक 40 साल हो गई है और उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना आवश्यक है. उम्मीदवार को किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव होना भी आवश्यक है.

कब तक होगी नियुक्ति

इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति तीन साल तक के लिए की जाएगी और सरकार इस कॉन्ट्रेक्ट को पांच साल तक बढ़ा भी सकती है. बता दें कि इन पदों के लिए प्रोफेशनल उम्मीदवार ही अप्लाई कर सकते हैं.

कितनी होगी सैलरी

मोदी सरकार इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 1.44 लाख से 2.18 रुपये प्रति महीना सैलरी देगी और इस सैलरी के साथ उम्मीदवारों को कई भत्ते और सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी जाएंगी.

किन विभागों में होगी नियुक्ति

सरकार ने जिन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, उनकी नियुक्ति 10 मंत्रालयों में होनी है. इनमें वित्तीय सेवा, इकोनॉमिक अफेयर, कृषि, सड़क परिवहन, शिपिंग, पर्यावरण और वन, नागरिक उड्डयन और वाणिज्य क्षेत्र शामिल हैं.

बता दें कि सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी. पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने 10 विभागों में बतौर जॉइंट सेक्रेटरी 10 पदों के लैटरल एंट्री से जुड़ी अधिसूचना पर कहा कि इससे उपलब्ध स्रोतों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनने का मौका मिलेगा. गौरतलब है कि किसी मंत्रालय या विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी का पद काफी अहम होता है और तमाम बड़ी नीतियों को अंतिम रूप देने में या उसके अमल में इनका अहम योगदान होता है.

कैसे होगा चयन

इनके चयन के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाएगा और कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमिटी इनका इंटरव्यू लेगी.

आवेदन करने की आखिरी तारीख- 30 जुलाई 2018

सालों से ठंडे बस्ते में था प्रस्ताव

ब्यूरोक्रेसी में लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी. लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया. फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई. लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई.

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Donald Trump to meet Kim Jong Un: A recap of US-North Korea’s vehement relations

Following a historic announcement at the White House, US President Donald Trump and North Korean leader Kim Jong Un are poised for a face-to-face meeting.

Since the end of the Korean War, the countries` relations have been marked by high tensions and periodic, but short-lived, thaws.

Here is a recap of their troubled history: In 1945 Japan`s defeat in World War II ends its occupation of Korea. The peninsula is divided along the 38th parallel between the Soviet-backed regime of Kim Il-Sung in the North and a South under US protection.

In June 1950 North Korea, later assisted by China, invades the South. A coalition led by the United States retakes Seoul. In July 1953, an armistice — not a full-fledged peace treaty — is signed and Washington imposes sanctions on Pyongyang.In January 1968, the spy ship USS Pueblo is captured by North Korea. After 11 months, its 83 crew members are released. According to Pyongyang, the ship violated its territorial waters, a charge the United States denies.

In 1969, North Korea shoots down a US reconnaissance aircraft.In June 1994, former US president Jimmy Carter makes an unprecedented visit to North Korea.

In October, three months after the death of Kim Il-Sung and his succession by his son Kim Jong-Il, Pyongyang and Washington sign a bilateral agreement. North Korea commits to freeze and dismantle its military nuclear program in exchange for the construction of civilian reactors.

In 1999, a year after its first test of a long-range ballistic missile, Kim Jong-Il declares a moratorium on missile tests and Washington eases sanctions.

In October 2000, US Secretary of State Madeleine Albright meets Kim Jong-Il in Pyongyang.In January 2002, US president George W. Bush labels North Korea, Iran and Iraq an “axis of evil.”

In October, Washington accuses Pyongyang of conducting a secret uranium enrichment program in violation of the 1994 agreement.

In August 2004, North Korea declares it is impossible to participate in a new nuclear program with the United States, attacking Bush as a “tyrant” worse than Hitler and a “political imbecile.”

In 2006, Pyongyang conducts its first nuclear test.In October 2008, the United States withdraws North Korea from its blacklist of state sponsors of terrorism in return for controls on all of its nuclear installations.

Pyongyang had been on the blacklist since 1988 due to its suspected involvement in the bombing of a South Korean airliner in 1987 that killed 115 people. In January 2016, American student Otto Wambier is arrested and sentenced to 15 years of hard labor for allegedly stealing a propaganda poster.

He dies in June 2017, one week after being returned home to the US in a coma. Numerous Americans have been held for years before being repatriated. Three are currently detained there.On January 2, 2017, then US President-elect Donald Trump says North Korea will never be allowed to develop a nuclear weapon capable of reaching US territory.

In July, North Korea conducts two intercontinental ballistic missile tests. Kim declares: “The entire US territory is now within our ICBM range.”

On August 8, Trump threatens “fire and fury” if Pyongyang continues to threaten the United States.

On August 29, Pyongyang test fires a ballistic missile over Japan. The US president says, “Talking is not the answer,” although his defense secretary does not rule out diplomacy.

September 3, North Korea carries out its sixth nuclear test, announcing a “perfect test” of a hydrogen bomb that it claims can be mounted on a missile.On September 21, Washington unveils tougher sanctions to curb North Korea`s nuclear and ballistic missile program. The announcement comes on the heels of Trump`s maiden speech to the UN General Assembly, in which he nicknames Kim “Rocket Man” and declares him to be on a “suicide mission.”

A day later on September 22, Kim brands Trump “mentally deranged” and a “dotard”, and warns he will pay dearly for his threats to destroy North Korea. As 2017 closes, Kim boasts his missile arsenal can hit any city on the US mainland.

On January 3, 2018, Trump raises eyebrows as he responds to Kim`s New Year warning that he has a “nuclear button” on his desk. “I too have a Nuclear Button, but it is a much bigger & more powerful one than his, and my Button works!”, he writes. Pyongyang brands his outburst “the spasm of a lunatic” and the “bark of a rabid dog.”

On February 25, North Korea slams what Trump describes as the “heaviest sanctions ever” as an “act of war.”

Meanwhile, North Korean general Kim Yong Chol arrives in the South for the Winter Olympics closing ceremony — also attended by Trump`s daughter Ivanka — part of North Korea`s Olympic Games charm offensive. On March 8, 2018, in a remarkable announcement at the White House, South Korean national security advisor Chung Eui-yong says Kim has invited US Trump to meet by May, and will “refrain from any further nuclear or missile tests.”

The White House says Trump has accepted the invitation, but does not set a date or locations for the talks, and adds that sanctions against North Korea will stay in place.

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मोबाइल वॉलेट की केवाईसी के लिए आज आखिरी मौका, चूक गए तो फंस जाएगा पैसा

आप यदि  पेटीएम, फ्रीचार्ज या ऐसे किसी दूसरे मोबाइल वॉलेट का उपयोग करते हैं तो उसे अपने ग्राहक को जानें ( केवाईसी) अपडेट कराने की 28 फरवरी आखिरी तारीख है। अगर आपने आज यह काम नहीं कराया तो आपका पैसा फंस जाएगा।

रिजर्व बैंक का समय सीमा बढ़ाने ने इनकार
आरबीआई ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मोबाइल वॉलेट को केवाईसी से जोड़ने की 28 फरवरी की अंतिम तारीख को और आगे नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, आरबीआई ने यह राहत जरूर दी है कि मोबइल वॉलेट में रखा मौजूदा बैलेंस बरकरार रहेगा और ग्राहक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। केन्द्रीय बैंक ने पिछले सोमवार को यह भी कहा था कि ग्राहक अपने पैसे को बैंक खाते में भी ट्रांसफर कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि केवाईसी के लिए पहले 31 दिसंबर, 2017 तक का समय दिया गया था। बाद में इस समयसीमा को बढ़ाकर 28 फरवरी, 2018 किया गया।

ऐसे कराएं मोबाइल वॉलेट की केवाईसी
ऐसे कराएं मोबाइल वॉलेट की केवाईसी

आसान है प्रक्रिया
यदि आप पेटीएम का इस्तेमाल करते हैं तो सबसे पहले आपको अपने पेटीएम वॉलेट में लॉग इन कर केवाईसी या फिर लिंक आधार आइकॉन पर जाना होगा। इसके बाद प्रोसीड पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुलेगा, जिसमें आधार नंबर और उस पर मौजूद अपना नाम डालकर प्रोसीड पर क्लिक करना होगा। इसके बाद आपको केवाईसी विकल्प चुनना है। इसमें आपके पास दो विकल्प रिक्‍वेस्‍ट ए विजिट और विजिट ए केवाईसी कस्‍टमर हैं।

अगर आप रिक्‍वेस्‍ट ए विजिट ऑप्‍शन चुनते हैं तो इसमें पेटीएम आपके घर पर अपना एजेंट भेजेगा। इसके लिए आपको अपना नाम, पता डालना होगा। इसके बाद आपको पेटीएम की तरफ से कॉल आएगी और एक्जिक्यूटिव को घर पर बुलाने के लिए समय और तारीख तय की जाएगी। एक्जिक्यूटिव आपके घर आकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिये चंद मिनट में आपकी केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर देगा।

अगर आप विजिट ए केवाईसी कस्‍टमर विकल्प चुनते हैं तो आपको अपने निकटतक केवाईसी केन्द्र जाना होगा। इसे चुनने पर आपके पास के केवाईसी केन्द्र की लिस्‍ट सामने आएगी। आप उसमें से केन्द्र चुन सकते हैं। केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के लिए आपको अपना आवासीय पता का प्रमाण पत्र भी देना होगा।

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सहवाग ने आइस क्रिकेट मैच में की जबरदस्त बैटिंग, बोले- हथियार छोड़े हैं, चलाना नहीं भूले

स्विट्जरलैंड की बर्फीली पहाड़ियों पर गुरुवार को पूर्व दिग्गज क्रिकेटर्स की टीमों के बीच एक एग्जिबिशन मैच खेला गया। इस मैच में शाहिद आफरीदी की कप्तानी वाली रॉयल्स ने वीरेंद्र सहवाग की पैलेस डायमंड्स को 6 विकेट से हरा दिया। भले ही सहवाग की टीम ये मैच हार गई हो लेकिन मैच में उन्होंने एकबार फिर अपना विस्फोटक अंदाज दिखाया और धुआंधार बैटिंग की। ऐसा रहा मैच…

– इस एक्जिबिशन मैच में वीरेंद्र सहवाग के चौके-छक्के के साथ शोएब अख्तर की तूफानी बॉलिंग भी देखने को मिली।
– सेंट मॉरिट्ज आइस क्रिकेट मैच में पैलेस डायमंड्स के कप्तान सहवाग ने 31 बॉल पर ताबड़तोड़ 62 रन बनाए।
– सहवाग आइस क्रिकेट में फिफ्टी लगाने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए हैं। अपनी इनिंग में उन्होंने 4 चौके और 5 सिक्स भी लगाए।
– वीरू की टीम ने 20 ओवर में 9 विकेट पर 164 रन का स्कोर बनाया था। जवाब में रॉयल्स ने 4 विकेट पर 166 रन बनाकर मैच जीत लिया।


– रॉयल्स की ओर से ओवेस शाह ने 34 बॉल पर 74* रन बनाए। वहीं जैक्स कैलिस ने 36 रन की इनिंग खेली।
– मैच के लिए बर्फ जमी झील पर आर्टिफिशियल पिच बनाई गई थी और ये मैच गुलाबी बॉल से खेला गया। माइनस 20 डिग्री तापमान में हुए इस मैच को देखने 500 दर्शक मौजूद थे।

सहवाग बोले हथियार चलाना नहीं भूला

– अपनी जबरदस्त बैटिंग के बाद सहवाग भी बेहद खुश नजर आए। जिसके बारे में उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा।
– सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘हथियार छोड़े हैं, चलाना नहीं भूले हैं। बर्फ पर खूब मजे आए।’

– बैटिंग के दौरान सहवाग ने आते ही पहली बॉल पर चौका मारा, फिर सिक्स लगाकर फिफ्टी पूरी की। उनका स्ट्राइक रेट 200 रहा।
– उनके इस ट्वीट के बाद फैन्स ने भी उनकी जमकर तारीफ की और जीरो पर आउट होने वाले आफरीदी का मजाक उड़ाया।

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कांग्रेस में राहुल युग की शुरुआत, निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष; जश्न का माहौल

राहुल गांधी आज सोमवार को 132 साल पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। चूंकि किसी और ने नामांकन दाखिल नहीं किया था, इसलिए नाम वापसी के अंतिम दिन यानी सोमवार को उन्हें निर्विरोध का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। वैसे औपचारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनकी ताजपोशी 16 दिसंबर को होगी। 47 साल के राहुल कांग्रेस का शीर्ष पद संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे सदस्य होंगे। वह पिछले 13 साल से मां और वर्तमान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में राजनीति की बारीकियां सीख रहे हैं। चार साल से संगठन में उनकी हैसियत दूसरे नंबर की रही है। इस दौरान पार्टी बिखरी-बिखरी सी दिखी। गिने-चुने प्रदेशों में ही उसकी सरकारें रह गई हैं। ऐसे प्रतिकूल समय में राहुल की ताजपोशी को भले ही नया दौर बताया जा रहा हो, लेकिन उनके सामने चुनौतियों की फेहरिस्त लंबी होगी।

दिल्ली पार्टी कार्यालय के बाहर जश्न का माहौल

राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने बैंड-बाजे के साथ राहुल की ताजपोशी का जश्न मनाया। भारी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पर पहुंचे और राहुल गांधी को निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी।

नेहरू-गांधी छाया से निकलना

राहुल गांधी नेहरू-गांधी विरासत के उत्तराधिकारी हैं, लेकिन युवा मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए सिर्फ यही काफी नहीं रह गया है। युवा भारत की उम्मीदें-आकांक्षाएं बदल चुकी हैं। लिहाजा राहुल गांधी को नेहरू-गांधी परिवार की परछाईं से बाहर निकलकर लोगों तक पहुंचना होगा। प्रधानमंत्री मोदी मतदाताओं से सीधे जुड़ने के लिए जाने जाते हैं। इसी तरह राहुल गांधी को भी जनता से सीधे जुड़ने के लिए अपना रास्ता खोजना होगा।

सिर्फ छह राज्य रह गए हैं

पार्टी में नेता अधिक, कैडर कम हैं। नए अध्यक्ष के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती होगी कि 2014 के लोकसभा चुनाव सहित एक के बाद दूसरे राज्य खोती जा रही पार्टी का जनाधार कैसे मजबूत किया जाए? पार्टी की खोई साख कैसे वापस आए? कभी पूरे देश में एकछत्र राज करने वाली पार्टी के पास सिर्फ छह राज्य बचे हैं। इनमें केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी भी है। ऐसे में पार्टी और इसके कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करना पार्टी अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। चुनावी सफलताएं ही पार्टी में ऊर्जा का संचार करेंगी।

नेहरू गांधी परिवार से अध्यक्ष (बनते समय उम्र)

मोतीलाल नेहरू (58)

जवाहर लाल नेहरू(40)

इंदिरा गांधी (42)

राजीव गांधी (41)

सोनिया गांधी (52)

राहुल गांधी (47)

बड़े राज्यों में जीत से ही साबित हो पाएगा नेतृत्व

अब हर चुनाव की जीत-हार का सेहरा पार्टी अध्यक्ष के सिर बंधेगा। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे सबसे पहले आएंगे। अगले साल मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में चुनाव होंगे जो 2019 के लोकसभा का रुझान तय करेंगे। इन राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर ही 2019 के नतीजों का दारोमदार होगा। कांग्रेस के बारे में यह किसी से छिपा नहीं कि वहां जीत का सेहरा गांधी परिवार के माथे पर ही बंधता है, जबकि हार की जिम्मेदारी सामूहिक होती है।

मोदी की लहर सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के बूते भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में एक के बाद एक राज्य कांग्रेस से छीनती जा रही है। असम जैसे परंपरागत कांग्रेसी राज्य भी भाजपा के पास आ चुके हैं। ऐसे में मोदी लहर से पार पाना राहुल के सामने बड़ी चुनौती होगी। राहुल को इस चुनौती का अहसास है। इसीलिए वह गुजरात के चुनाव में प्रचार के दौरान बार-बार सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोल रहे हैं।

वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच बनाना होगा संतुलन

पार्टी में वरिष्ठ नेताओं के साथ नए और युवा नेताओं के बीच संतुलन बनाना नए अध्यक्ष के सामने बड़ा काम होगा। कई राज्यों की पार्टी इकाइयों में इन दोनों तरह के नेताओं के बीच सत्ता संग्राम सामने आ चुका है। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का मामला सबके सामने है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह और दिल्ली में शीला दीक्षित व अजय माकन इसके उदाहरण हैं। कांग्रेस में सीनियर और युवा नेताओं के बीच खींचतान का इतिहास रहा है। कहना कठिन है कि राहुल के राज में क्या होगा।

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PAK की ‘कंगाली’ का काउंटडाउन शुरू, बचे हैं सिर्फ 12 हफ्ते… बाजवा घबराए!

पाकिस्तान की कंगाली का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. पाकिस्तान के पास तीन महीने के इंपोर्ट के डॉलर ही बचे हैं. 12 से 16 हफ्ते में पाकिस्तान के डिफॉल्टर होने के पूरे चांस हैं. पाकिस्तान के वो जनरल भी अब हाथ खड़े कर रहे हैं, जो जनरल कल तक दूसरों को तबाह करने, मुंहतोड़ जवाब देने और आंखें दिखाने वाली बातें करते थे. ये बात वैसी ही है, जैसे घर में नहीं दाना. लेकिन दूसरों को आंखें दिखाना.

कंगाली की कगार पर पहुंचकर पाकिस्तान की बेचैन है, क्योंकि टेररिस्तान को डर ये है कि आने वाले दिनों में उसका दिवाला निकलने वाला है. खुद पाकिस्तान के जनरलों ने हाथ खड़े कर दिए. पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कराची में कहा कि पाकिस्तान के कर्ज़े आसमान को छू रहे हैं , सिर्फ़ सैन्य ताकत के बल पर कोई देश नहीं चलता.

रूस के पास सैन्य ताकत की कमी नहीं थी, लेकिन कमज़ोर आर्थिक हालत की वजह से वो टूट गया. जो कल तक सबको आंखें दिखा रहे थे, वो आज खुद खौफ में हैं क्योंकि आतंक की फैक्ट्री से खून खराबा तो मिलता है लेकिन डॉलर नहीं मिलते, जिन्हें पाकिस्तान को अपने कर्ज़े चुकाने के लिए ज़रूरत है. नहीं तो डिफॉल्टर होने में देर नहीं लगेगी.

यही खौफ पाकिस्तान के जनरलों को है कि जो देश कटोरा लेकर दुनिया के सामने खड़ा है. वो दूसरों को आंखें दिखाने की बेशर्मी भी कैसे कर सकता है. यही वजह है कि पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक से लेकर आईएमएफ और अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहा है.

लेकिन क्या पाकिस्तान दिवालिया होने के कगार पर आने के बावजूद अपने पालतू आतंकवादियों को खत्म करने की वॉर्निंग को मानेगा. ये बड़ा सवाल अब भी है क्योंकि पाकिस्तानी सेना के जनरल इन आतंकवादियों को नेता बनाकर सेट करने में जुटे हैं और घर में दाना ना होने के बावजूद दूसरों को आंखे दिखाना, जिनकी आदत है, उन्हें लगता है कि चीन उन्हें बचा लेगा.

लेकिन आतंकवादियों की फैक्ट्री चलाने वाला पाकिस्तान ऐसा कभी कर पाएगा. ये सोचना भी दूर की बात है. क्योंकि कंगाल औऱ दिवालिया पाकिस्तान उन आतंकवादियों से आबाद है. जिन आतंकवादियों को वो अपने हथियार मानता है और दूसरे देशों के खिलाफ इस्तेमाल करता है.