Posted on Leave a comment

बेटी बोझ नहीं, बेटी पूरे परिवार की आन, बान और शान है: पीएम मोदी

बेटियों को बोझ समझकर कोख में ही मार देने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की नसीहत देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बेटियां बोझ नहीं होती बल्कि परिवार की आन बान और शान होती हैं। वे विभिन्न क्षेत्रों में देश को गौरान्वित कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलनी होगी। अगर घर की सास इस काम को अपने हाथ में ले लेगी तो लड़कियों और लड़कों का समान अनुपात पाने के लक्ष्य में देर नहीं लगेगी। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का देश भर में विस्तार की घोषणा की और महिलाओं बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन का शुभारंभ किया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उपरोक्त दोनों योजनाओं का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने राजस्थान के झुनझुनू में किया। झुनझुनू वह जिला है जिसने 161 जिलों में चल रही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में बाल लिंगानूपात सुधारने में सबसे अच्छा प्रदशर्न किया है। झुनझुनू में बाल लिंगानुपात सुधार में वृद्धि की दर 48 फीसद रही। प्रधानमंत्री ने लिंगानुपात सुधारने में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले देश भर के दस जिलों को पुरुस्कृत भी किया। इस मौके पर केन्द्रीय महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और राजस्थान की मुख्यमत्री वसुंधरा राजे भी मौजूद थीं।

प्रधानमंत्री ने लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या में कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि जब पता चलता है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को सफलता मिली है इसके चलते लिंगानुपात सुधरा है तो संतोष होता है। लेकिन कभी-कभी ये सोच कर बहुत पीड़ा होती है कि जिस देश की संस्कृति शिक्षा आदि इतनी अच्छी दिशा की रही हो वहां यह बुराई कैसे घर कर गई। आज हमें अपने ही घर में बेटी बचाने के लिए हाथ पैर जोड़ने पड़ रहे हैं। धन खर्च करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई दशकों की विकृत मानसिकता के कारण हमने बेटियों को बलि देने का रास्ता चुन लिया। संतुलन से ही समाज चलता है। कई दशक तक बेटियां मारते रहे तभी असंतुलन पैदा हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें मालूम है कि उसे सुधारने में कई पीढ़ियां लगेंगी। अब हम तय करें कि जितने बेटे पैदा होंगे उतनी बेटियां पैदा होंगी। जितने बेटे पलेंगे उतनी बेटियां पलेंगी। बेटी बेटी एक समान हैं।
प्रधानमंत्री ने सरकारी अधिकारियों और आम जनता से अनुरोध किया कि लिंगनुपात सुधारने के लिए जन आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि पुरानी सोच थी कि बेटियां बोझ होती हैं, बेटियां बोझ कभी नहीं होतीं। बेटियां परिवार की आन बान शान होती हैं। देश की बेटियों के आगे बढ़ने और गौरान्वित करने के मौकों को याद करते हुए कहा कि हमारे देश की बेटियों ने स्पेस टेक्नोलॉजी में कितना काम किया है। झुनझुनू की बेटी फाइटर जेट उड़ा रही हैं। ओलंपिक में बेटियां मैडल लाती हैं तो गौरव होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग मानते हैं कि बेटे बुढ़ापे का सहारा बनेंगे तो हमने वो स्थिति भी देखी है जब चार-चार बेटे होते है उनकी अच्छी स्थिति होती है और मां-बाप वृद्धाश्रम में रहते हैं।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पोषण मिशन का शुभारंभ करते हुए कहा कि जब भी किसी के मन में पीएम शब्द आये तो नरेन्द्र मोदी नहीं बल्कि पोषण मिशन आना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए हर स्तर पर काम करना होगा। पोषण मिशन योजना 9000 करोड़ की लागत से चलाई जा रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं जैसे मातृवंदना, उज्जवला आदि का भी जिक्र किया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने तीन साल से चल रही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की सफलता और उससे सुधरे लिंगानुपात का जिक्र किया। साथ ही महिलाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और लाए जा रहे कानूनों जैसे मातृत्व अवकाश को बढ़ा कर छह महीने करना और मानव तस्करी विधेयक लाने की तैयारी की भी चचार् की। राजस्थान की मुख्य मंत्री वसुन्धरा राजे ने भाजपा के चुनावी विस्तार पर बधाई देते हुए महिलाओं के हित के लिए राजस्थान में चल रही योजनाओं की गिनती कराई।

Posted on Leave a comment

सऊदी अरब: सभी आला सैन्य अधिकारी बर्ख़ास्त

सऊदी अरब ने देर रात एक शाही फ़रमान जारी कर देश के सभी आला सैन्य अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. इनमें सेना के प्रमुख भी शामिल हैं.

जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है उनमें वायुसेना और थल सेना के आला अधिकारी शामिल हैं.

इसके अलावा कई उप-मंत्रियों की भी नियुक्तियां की गई हैं. इन नए नामों में तमादुर बिंत यूसुफ़ अल-रमाह नाम की महिला उप-मंत्री भी शामिल हैं.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमानइमेज कॉपीरइटEPA
Image captionसऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

सऊदी अरब में किसी महिला का उप-मंत्री बनना आम बात नहीं है.

ये फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब यमन में सऊदी नेतृत्व में गठबंधन सेना की विद्रोहियों के साथ लड़ाई के लगभग तीन साल पूरे होने वाले हैं.

यमन में लड़ाईइमेज कॉपीरइटFAYEZ NURELDINE/AFP/GETTY IMAGES

यमन में सऊदी हस्तक्षेप के कारण हूथी विद्रोही देश के दक्षिण की तरफ सीमित हो गए हैं, लेकिन अभी भी वो राजधानी सना और कई इलाकों में मज़बूती से डटे हुए हैं.

लगभग तीन सालों से लड़ रही सऊदी सेना का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ की शक्ल में पड़ा है. साथ ही हूथी विद्रोहियों ने देश की राजधानी रियाद पर मिसाइल दाग़ने की धमकी दी है.

Posted on Leave a comment

कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले

 

रूढ़िवादी मुस्लिम देश सऊदी अरब तेजी से सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है. इस बदलाव की नई फेहरिस्त में वहां सिनेमाघरों पर लगे 3 दशक पुराने प्रतिबंध को हटाना शामिल है. वहां के संस्कृति और सूचना मंत्रालय का कहना है कि विभाग तत्काल प्रभाव से सिनेमाघरों को लाइसेंस जारी करना शुरू कर देगा और अगले साल मार्च तक पहला सिनेमाघर शुरू हो सकता है.

 

  • कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले
    1/6

    बदलाव के राजकुमारपिछले कुछ समय में सऊदी अरब के 32 वर्षीय राजकुमार मुहम्मद बिन सलमान ने कई साहसिक फैसले लिए हैं जिसकी दुनियाभर में तारीफ हुई, खासकर महिलाओं की स्थिति में सुधार वास्ते. वह अपने उस वादे पर आगे बढ़ रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका देश अब उदारवादी इस्लाम को अपनाएगा. आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही बड़े बदलाव के बारे में जिसका फायदा यह मुल्क उठाएगा.

  • कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले
    2/6

    महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमतिसऊदी अरब ने इस साल सितंबर में एक आदेश जारी कर महिलाओं को पहली बार ड्राइविंग की अनुमति दी थी. यह आदेश जून, 2018 से लागू होगा. सऊदी अरब दुनिया का एकमात्र ऐसा देश था जहां महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध लगा हुआ था. अब इस बैन के हटते ही यहां की महिलाएं भी सड़क पर गाड़ी चला सकेंगी. हालांकि महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति इतनी आसानी से नहीं मिली. महिलाओं को ड्राइविंग का अधिकार दिलाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष चला. कई महिलाओं को बैन के खिलाफ गाड़ी चलान पर सजा भी दी गई. अब 2018 के मध्य से महिलाओं और पुरुषों के लिए एक जैसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाएंगे.

  • कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले
    3/6

    स्टेडियम में मैच देखने की इजाजतसऊदी अरब बदल रहा है, इसकी मिसाल इस बात से मिलती है कि वह लगातार अपनी परंपराओं में सुधार ला रहा है. सऊदी अरब ने महिलाओं को स्टेडियम में खेल मुकाबले देखने की अनुमति दी है. हालांकि इसकी शुरुआत भी अगले साल से ही हो सकेगी. इस देश के तीन बड़े शहरों रियाद, जेद्दा और दम्माम में लोग महिलाओं के साथ स्टेडियम में मैच देखने जा सकेंगे. यहां के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सऊदी समाज के आधुनिकीकरण और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए लगातार सुधार कर रहे हैं, इससे पहले वहां पर सिर्फ पुरुष ही स्टेडियम जा सकते थे.

  • कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले
    4/6

    व्हॉट्सएप और स्काइप से हटी पाबंदी सुधारों की दिशा में सऊदी अरब ने सितंबर, 2017 में एक और ऐतिहासिक फैसला लिया. यह फैसला था व्हॉट्सएप और स्काइप जैसी वॉइस और वीडियो कॉल ऐप से पाबंदी हटाने का. वहां के लोगों के लिए इससे पहले वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) के इस्तेमाल पर बैन था, अब वे इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. 2011 में चर्चित अरब क्रांति के बाद सरकार के खिलाफ कई प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन के बाद सऊदी अरब सरकार ने इंटरनेट पर सेंसर लगा दिया था. जिस कारण करीब चार लाख वेबसाइट लोगों की पहुंच से दूर हो गया था.

  • कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले
    5/6

    खेलों में महिला भागीदारीसऊदी अरब सरकार ने 2013 में पहली बार निजी स्कूलों में लड़कियों के लिए खेल में भाग लेने की अनुमति दे दी. वहीं 2012 में इस देश ने पहली बार किसी महिला खिलाड़ी को किसी ओलंपिक में भाग लेने की अनुमति दी. लंदन ओलंपिक में सराह अतर ने महिलाओं की 800 मीटर रेस में भाग लिया था. सराह ने इस्लामी परंपराओं की तरह सिर तक कपड़े ढंक रेस में भाग लिया था. प्रिंसेज रीमा को नई गठित विभाग महिला खेल प्राधिकरण का मुखिया नियुक्त किया गया.

  • कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले
    6/6

    स्टॉक बाजार में महिला बॉसइसी साल सऊदी अरब के स्टॉक बाजार को भी महिलाओं की मौजूदगी का एहसास हुआ. फरवरी, 2017 में सऊदी स्टॉक एक्सचेंज तडावुल ने पहली महिला चेयरपर्सन सराह अल सुहैमी के रूप में चुना. तडावुल अपने क्षेत्र का सबसे बड़ा और दुनिया में 26वें नंबर पर है यह स्टॉक बाजार.