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अविराम गौसेवा के लिए जर्मन मूल की मथुरा निवासी अम्मा जी को पद्मश्री। जानें गौसेवा से जुड़ी यह अनोखी दास्तां!

42 वर्षों से मथुरा में गोसेवा कर रही जर्मन मूल की सुदेवी गोवर्धन “अम्मा जी” को पद्मश्री मिलने पर बहुत बहुत बधाई।

पाँच बीघा के क्षेत्र में फैले सुरभि गौशाला का संचालन कर रही सुदेवी ने 1,500 से भी अधिक गायों को पाल रखा है, जिनकी वह लगातार देखभाल करती हैं। इन गायों में से अधिकतर बीमार, नेत्रहीन या अपाहिज हैं। इनमें से 52 गायें नेत्रहीन है जबकि 350 पैरों से अपाहिज है। उनके पैरों की नियमित मरहम-पट्टी की जाती है।

जर्मन महिला फ्रेड्रिन इरिन ब्रूनिंग उर्फ़ ‘सुदेवी दासी गोवर्धन’ को केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। सुदेवी राधाकुंड धाम में विगत 42 वर्षों से गौसेवा कर रहीं हैं। बीमार और असहाय गायों की सेवा करने के कारण उन्हें ‘गायों की मदर टेरेसा’ भी कहा जाता है। उन्हें पद्म सम्मान मिलने का समाचार पाकर स्थानीय निवासी भी ख़ुश हुए और गौशाला पहुँच कर उन्होंने सुदेवी को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्हें शनिवार (मार्च 16, 2019) को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

सुदेवी के अनुसार, जब मंत्रालय द्वारा उन्हें पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई, तब उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। फिर स्थानीय निवासियों ने उन्हें इस से अवगत कराया। ये तब की बात है, जब सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा की थी।

अपने माता-पिता की इकलौती संतान फ्रेड्रिन 42 वर्ष पहले भारत भ्रमण पर आई थी। इस दौरान उन्होंने ब्रज आकर श्रीकृष्ण के भी दर्शन किए। कृष्ण-भक्ति ने उन्हें अपनी तरफ ऐसा खींचा कि उन्होंने भारत में रहने की ठान ली। ब्रज में उन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिसके बीमार होने के बाद उन्होंने उसकी काफ़ी देखभाल की। इसके बाद वह जहाँ भी बीमार गाय देखती, उसकी देखभाल और सेवा में लग जाती। इसके बाद तो जैसे उन्होंने गोसेवा को ही अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन ही गोसेवा को समर्पित कर दिया।

सुदेवी के पिता तीस वर्ष पहले तक दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में कार्यरत थे। इकलौती संतान होने के कारण उन्होंने पिता से मिलने वाली सारी धनराशि को गोसेवा में ही ख़र्च किया। उनकी गौशाला में गायों के लिए एक स्पेशल एम्बुलेंस भी है। अगर किसी गाय की मृत्यु निकट आ जाए और उसके बचने की कोई संभावना न रहे, तब सुदेवी उसे गंगाजल का सेवन कराती है। मरणोपरांत गायों के शरीर का अंतिम संस्कार भी पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है।

सुदेवी बताती हैं कि गायों की सेवा में हर महीने ₹35 लाख तक ख़र्च होते हैं। गायों का इलाज डॉक्टरों द्वारा करवाया जाता है। सुदेवी दानदाताओं और जर्मनी से आने वाले रुपयों की मदद से इस गौशाला का संचालन कर रहीं हैं। सुरभि गौशाला में 70 से 80 कर्मचारी कार्यरत हैं। किराए की भूमि पर गौशाला चला रहीं सुदेवी को उम्मीद है कि उन्हें इस पुरस्कार के मिलने के बाद गौशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने इस बात की भी उम्मीद जताई कि अब गोसेवा के रास्ते में आने वाली अड़चनें दूर होंगी।

सुदेवी ने बताया कि अगर गौशाला के लिए उन्हें भूमि मिल जाती है तो मासिक किराए में ख़र्च हो रहे रुपयों की बचत होगी और उसका उपयोग गौसेवा में किया जाएगा। हाल ही में जब उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी तब उन्होंने मथुरा की सांसद हेमा मालिनी से लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक के दरवाज़े खटखटाए थे। इसके बाद उन्हें वीजा मिल गया था। सुदेवी अविवाहित हैं और अभी भी एक झोपड़ी में ही रहती हैं। स्थानीय निवासियों ने उन्हें भारतीय नागरिकता देने की भी माँग की है। उनके अतुलनीय सेवा कार्य के लिए हम सदा आभारी रहेंगे।

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चेन्नई बनी आइपीएल 2018 की चैंपियन, तीसरी बार जीता खिताब

IPL 2018 के फाईनल मैच में मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में सीएसके ने सनराइजर्स हैदराबाद को 8 विकेट से हराकर आइपीएल 2018 का खिताब अपने नाम कर लिया। धौनी की कप्तानी में चेन्नई ने तीसरी बार आइपीएल खिताब पर कब्जा जमाया।

इससे पहले चेन्नई ने धौनी की कप्तानी में ही वर्ष 2010 और 2011 में लगातार दो बार आइपीएल खिताब पर कब्जा किया था। इसके सात वर्ष बाद एक बार फिर से धौनी ने अपना दम दिखाते हुए टीम को खिताब दिलाया। अब धौनी आइपीएल खिताब जीतने के मामले में रोहित शर्मा की बराबरी पर आ गए हैं जिन्होंने तीन बार मुंबई को खिताब दिलाया था। आइपीएल 2018 में जीत हासिल करने वाली टीम चेन्नई को 20 करोड़ रुपए पुरस्कार के तौर पर दिया गया जबकि रनर-अप रही टीम हैदराबाद को 12 करोड़ 50 लाख रुपए मिले।

फाइनल मैच में सीएसके के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने टॉस जीता और हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन को बल्लेबाजी का न्योता दिया। पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने कप्तान केन और यूसुफ पठान की अच्छी पारियों के दम पर 20 ओवर में 6 विकेट पर 178 रन बनाए। चेन्नई को जीत के लिए 179 रन बनाने थे और जीत के लिए मिले इस लक्ष्य को सीएसके ने शेन वॉटसन की नाबाद तूफानी शतकीय पारी के दम पर 18.3 ओवर में 2 विकेट पर हासिल कर लिया। चेन्नई ने 18.3 ओवर में 2 विकेट पर 181 रन बनाए।

शेन वॉटसन की तूफानी शतकीय पारी

आइपीएल 2018 के फाइनल मैच की दूसरी पारी में चेन्नई के ओपनर बल्लेबाज फॉफ डू प्लेसिस ने 11 गेंदों पर 10 रन बनाए और संदीप शर्मा की गेंद पर उन्हें ही कैच थमा बैठे। सुरेश रैना ने 24 गेंदों पर 32 रन की पारी खेली और वो ब्रेथवेट की गेंद पर विकेट के पीछे श्रीवत्स गोस्वामी के हाथों लपके गए। रैना ने वॉटसन के साथ दूसरे विकेट के लिए 117 रन की साझेदारी कर टीम के जीत की नींव रखी। शेन वॉटसन ने टीम के लिए 57 गेंदों पर 117 रन की नाबाद तूफानी शतकीय पारी खेली और टीम को जीत दिला दी। अंबाती रायडू 19 गेंदों पर 16 रन बनाकर नाबाद रहे।

हैदराबाद की तरफ से संदीप शर्मा और कार्लोस ब्रेथवेट को एक-एक सफलता मिली।

केन और पठान ने खेली तेज पारी

फाइनल मैच की पहली पारी में बल्लेबाजी के लिए उतरी हैदराबाद टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एसआरएच ने अपना पहला विकेट 13 रन के स्कोर पर गवां दिया। ओपनिंग बल्लेबाजी करने आए श्रीवत्स गोस्वामी 5 रन बनाकर रन आउट हो गए। करन शर्मा ने धौनी को थ्रो दिया और उन्होंने कोई गलती ना करते हुए विकेट उखाड़ दिया। शिखर धवन 25 गेंद पर 26 रन बनाकर अहम मौके पर आउट हो गए। रवींद्र जडेजा ने शिखर धवन को क्लीन बोल्ड कर दिया। धवन ने केन के साथ दूसरे विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की। केन विलियमसन ने 36 गेंदों पर 47 रन की बेहतरीन पारी खेली। केन को धौनी ने करन शर्मा की गेंद पर स्टंप आउट किया। केन ने तीसरे विकेट के लिए शाकिब के साथ 37 रन की साझेदारी की। शाकिब अल हसन ने 15 गेंदों पर 23 रन की पारी खेली। उन्हें डीजे ब्रावो ने सुरेश रैना के हाथों कैच आउट करवा दिया। दीपक हुडा 3 रन बनाकर कैच आउट हो गए। कार्लोस ब्रेथवेट ने 11 गेंदों पर 21 रन बनाए और शर्दुल ठाकुर की गेंद पर अंबाती रायडू के हाथों कैच आउट हुए। यूसुफ पठान 25 गेंद पर 45 रन बनाकर नाबाद रहे।

चेन्नई की तरफ से दीपक चाहर को छोड़कर सभी गेंदबाजों ने विकेट लिए। चेन्नई के गेंदबाज लुंगी नजीडी, शर्दुल ठाकुर, करन शर्मा, ड्वेन ब्रावो और रवींद्र जडेजा ने एक-एक विकेट लिए।

टॉस को लेकर हुआ ड्रामा

आइपीएल फाइनल से पहले टॉस को लेकर बड़ा ड्रामा देखने को मिला। सिक्का उछलने के बाद केन विलियसमन ने टेल कहा लेकिन हेड आने के बाद धौनी ने टॉस जीत लिया। इसके बाद जब एंकर के तौर पर वहां मैजूद संजय मांजरेकर ने धौनी से पूछा किया आप क्या करेंगे तो धौनी बार-बार केन की तरफ उंगली करके मजाक करने लगे और कहा कि उन्होंने टेल बोला है। धौनी के इस तरह बोलने से मांजरेकर भी परेशान हो गए लेकिन आखिरकार धौनी ने हंसते हुए इस मजाक का अंत किया और कहा कि वो टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करेंगे।

सातवीं बार चेन्नई ने खेला फाइनल

चेन्नई की टीम ने सातवीं बार आइपीएल फाइनल खेला और तीसरी बार उन्होंने खिताब जीता। सनराइजर्स हैदाराबाद की बात करें तो ये टीम एक बार आइपीएल का खिताब डेविड वार्नर की कप्तानी में जीत चुका है और केन विलियमसन की कप्तानी में दूसरी बार इस खिताब को जीतने की दहलीज पर थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

धौनी के अनुभव के सामने नहीं टिके केन

इस आइपीएल में इन दोनों टीमों के बीच चार बार मैच खेला गया और हर बार चेन्नई को ही जीत मिली। लीग मुकाबले में पहले चेन्नई ने हैदराबाद को दोनों बार हराया। इसके बाद मुंबई में ही पहले क्वालीफायर में चेन्नई ने हैदराबाद को हराकर फाइनल में सीधे जगह बनाई और इसके बाद फाइनल में फिर से चेन्नई के हाथों हैदराबाद को हार झेलनी पड़ी और दूसरी बार खिताब जीतने का सपना टूट गया।

बॉलीवुड स्टार्स के साथ कमेंट्री भी रही काफी दिलचस्प

इस मैच में कमेंट्री के द्वारा दर्शकों का दिल लुभाने के लिए कई बॉलीवुड स्टार्स भी कॉमेंट्री बॉक्स में दिखाई दिए। जहां एक और बॉबी देओल ने काफी समय बाद ऑन स्क्रीन शेयर की वहीं सलमान खान और अनिल कपूर की दिलचस्प बातों से फाइनल का अंत भी अत्यंत रोमांचकहो गया।

इन खिलाड़ियों को मिले ये अवॉर्ड

दिल्ली के बल्लेबाज रिषभ पंत को इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन का खिताब दिया गया। ट्रेंट बोल्ट को परफेक्ट कैच ऑफ दी सीजन चुना गया जबकि सुनील नरेन सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन रहे। रिषभ पंत स्टाइलिश प्लेयर ऑफ द सीजन रहे। सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले एंड्रयू टे (24 विकेट) को पर्पल कैप सौंपा गया जबकि सबसे केन विलियमसन ने सबसे ज्यादा रन बनाए और वो औरेंज कैप विनर रहे।

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CWG 2018: हिना सिद्धू ने शूटिंग में जीता गोल्ड, अब तक भारत के 20 मेडल हुए

21वें कॉमनवेल्थ खेलों के छठे दिन शूटिंग में अच्छी खबर आई है. 25 मीटर पिस्टल इवेंट में हीना सिद्धू ने भारत को गोल्ड दिलाया है. इसके साथ ही भारत के स्वर्ण पदकों की कुल संख्या 11 हो गई है. हीना ने फाइनल में रिकॉर्ड 38 अंक बटोरे. इससे पहले हीना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में सिल्वर जीता था.

मौजूदा कॉमनवेल्थ शूटिंग में भारत के खाते में अब तक कुल तीन गोल्ड मेडल आ चुके हैं. हीना से पहले मनु भाकेर और जीतू राय ने निशानेबाजी में गोल्ड जीता था. शूटिंग में भारत ने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज के साथ कुल 8 मेडल हासिल किए हैं.

भारतीय मुक्केबाज अमित पंघाल ने पुरुषों की 46-49 किलोवर्ग की मुक्केबाजी स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बना ली है. इसके साथ ही अमित ने ब्रॉन्ज मेडल भी पक्का कर लिया है. हालांकि, उनकी कोशिश भारत को गोल्ड मेडल दिलाने की होगी.

पुरुषों के 50 मीटर राइफल प्रोन इवेंट के फाइनल में भारत के गगन नारंग 142.3 के स्कोर के साथ मेडल की रेस से बाहर हो गए. गगन सातवें स्थान पर रहे, जबकि चैन सिंह 204.8 का स्कोर कर चौथे स्थान पर आए. इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक वेल्स के डेविड फेल्प्स को हासिल हुआ. उन्होंने 248.8 अंक बनाए और राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ा. स्कॉटलैंड के नील स्टिरटोन (247.7 अंक) को रजत मिला, जबकि इंग्लैंड के केनेथ पार (226.6 अंक) ने कांस्य पदक जीता.

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भारत ने लिया पहले मैच में मिली हार का बदला, श्रीलंका को 6 विकेट से हराया

ट्राई सीरीज के चौथे मुकाबले में भारत और श्रीलंका एक दूसरे के आमने-सामने थे। बारिश की वजह से इस मैच में टॉस में 1 घंटे 5 मिनट की देरी से हुई और खेल 1 घंटे 20 मिनट की देरी से शरू हुई। बारिश के कारण मैच का ओवर कम करके इसे 19-19 ओवर का कर दिया गया। इस मुकाबले में भारतीय कप्तान रोहित ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने कुशाल मेंडिस के अर्धशतक के दम पर निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट पर 152 रन बनाए। भारत ने जीत के लिए मिले 153 रन के लक्ष्य को 17.3 ओवर में 6 विकेट शेष रहते हासिल कर लिया। अंक तालिका में अब भारत चार अंकों के साथ पहले नंबर पर आ गया है।

मनीष पांडे व दिनेश कार्तिक ने दिलाई जीत

दूसरी पारी में जीत के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। इन दिनों लचर फॉर्म में चल रहे रोहित शर्मा एक बार फिर से फ्लॉप रहे और 11 रन बनाकर अकीला धनंजय की गेंद पर कुशाल मेंडिस द्वारा लपके गए। बेहतरीन फॉर्म में चल रहे धवन को भी अकीला धनंजय ने अपना दूसरा शिकार बनाया। 8 रन के स्कोर पर वो कैच आउट हो गए। तेज बल्लेबाजी कर रहे रैना ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए। उन्हें नुवान प्रदीप ने परेरा के हाथों कैच आउट करवा दिया। लोकेश राहुल मेडिंस की गेंद को खेलने के चक्कर में हिट विकेट आउट हो गए। उन्होंने 17 गेंदों पर 18 रन बनाए। मनीष पांडे ने नाबाद 42 जबकि दिनेश कार्तिक ने नाबाद 39 रन की पारी खेलकर टीम को जीत दिला दी। इन दोनों बल्लेबाजों के बीच पांचवें विकेट के लिए नाबाद 68 रन की साझेदारी हुई।

श्रीलंका की तरफ से अकीला धनंजय को दो जबकि फर्नांन्डो और मेंडिस को एक-एक विकेट मिले।

कुशाल मेंडिस का अर्धशतक

पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका टीम के ओपनर गुणाथिलाका खतरनाक नजर आ रहे थे और उन्होंने 8 गेंदों पर 17 रन बनाए। उनकी पारी का अंत सुरेश रैना ने शानदार कैच पकड़कर किया। रैना ने ये कैच शर्दुल ठाकुर की गेंद पर लिया। भारत को दूसरी सफलता वाशिंगटन सुंदर ने दिलाई। उन्होंने कुशाल परेरा को महज तीन पर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। 22 रन के स्कोर पर उपल थरंगा को विजय शंकर ने क्लीन बोल्ड कर दिया। थिसारा परेरा ने 6 गेंदों पर 15 रन बनाए लेकिन शर्दुल ठाकुर की गेंद पर वो चहल के हाथों कैच आउट हो गए। वाशिंगटन सुंदर ने जीवन मेंडिस को एक रन पर क्लीन बोल्ड कर दिया। कुशाल मेंडिस ने 38 गेंदों पर 55 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में तीन चौके और तीन छक्के लगाए। मेंडिस को चहल ने अपनी गेंद पर रोहित के हाथों कैच आउट करवाया। अकीला धनंजय को उनादकट ने 5 रन पर लोकेश राहुल के हाथों कैच आउट करवाया। शनाका 19 रन बनाकर शर्दुल ठाकुर की गेंद पर विकेट के पीछे कैच आउट हो गए। चमीरा बिना खाता खोले ही शर्दुल की गेंद पर उनदाकट के हाथों कैच हो गए। लकमल पांच रन बनाकर नाबाद रहे।

भारत की तरफ से शर्दुल ठाकुर ने 4, वाशिंगटन सुंदर ने दो जबकि जयदेव उनादकट और विजय शंकर ने एक-एक विकेट लिए।

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INDvsSA : 5 हीरो जिन्होंने दिलाई टीम इंडिया को कभी न भूलने वाली जीत

टीम इंडिया को आखिरकार वह जीत मिल ही गई, जिसके लिए टीम पिछले 26 साल से इंतजार कर रही थी. टेस्ट सीरीज में पहले दो टेस्ट बुरी तरह हारने के बाद टीम इंडिया का टेस्ट सीरीज जीतने का सपना टूट गया. लेकिन जोहानिसगबर्ग में तीसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया को मिली जीत के बाद सब कुछ बदल गया. टीम ने छह मैचों की सीरीज के 5वें मैच में ही सभी हार और इतिहास को भुलाते हुए अफ्रीका को पहली बार उसकी ही धरती पर धूल चटा दी. टीम को इस जीत के लिए 26 साल लंबा इंतजार करना पड़ा.

टीम इंडिया की इस जीत में अगर ध्यान से देखें तो 5 खिलाड़ियों का सबसे अहम योगदान रहा. विराट कोहली, शिखर धवन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और पांचवें मैच में फॉर्म में लौटे रोहित शर्मा. एक मैच में रहाणे का बल्ला भी बोला. हालांकि टीम का मध्यक्रम इस पूरी सीरीज में बुरी तरह नाकाम साबित हुआ. ये टीम के लिए चिंता की बात होगी.

वैसे देखे जाए तो इस पूरी सीरीज में अगर शिखर धवन और विराट कोहली का बल्ला अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं गरजता तो भारत को ये ऐतिहासिक जीत शायद ही मिलती. टीम इंडिया के इन दो बल्लेबाजों ने अफ्रीका में सबसे ज्यादा रन बनाए. यही हाल गेंदबाजी में रहा. टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज इस सीरीज में कुछ खास कमाल नहीं कर सके.

1. विराट कोहली : इस सीरीज के सबसे बड़े हीरो विराट कोहली ही रहे. टेस्ट के बाद वनडे सीरीज में भी वह 5 मैचों में सबसे ज्यादा रन बना चुके हैं. उनके बल्ले ने अब तक 2 शतक और दो अर्धशतकों की मदद से 429 रन बनाए हैं. विराट दक्षिण अफ्रीका में द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 350 से अधिक रन बनाने वाले एबी डिविलियर्स के बाद दूसरे बल्लेबाज बन गए. डिविलियर्स ने 2013 में पाकिस्तान के खिलाफ 367 रन बनाये थे.

2. शिखर धवन : 5 मैचों में शिखर धवन अब तक 305 रन बना चुके हैं. इसमें 2 अर्धशतक और 1 शतक शामिल है. चौथे मैच में उन्होंने अपने 100वें मैच में शतक जड़कर पहले भारतीय होने का गौरव पाया. इससे पहले अपने 100वें मैच में कोई भी भारतीय खिलाड़ी शतक नहीं जड़ पाया था. इस पूरी सीरीज में वह शानदार रहे हैं.

3. युजवेंद्र चहल : युजवेंद्र चहल 5 मैचों की 5 पारियों में 14 विकेट ले चुके हैं. अफ्रीका की तेज पिचों पर किसी स्पिनर का इस तरह से विकेट लेना अचंभित कर रहा है. एक बार वह 5 विकेट भी ले चुके हैं. वह इस सीरीज में विदेशी दौरे पर किसी भी भारतीय द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेटों के रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं. मैच अभी बाकी हैं, हो सकता है वह इसमें कामयाब हो जाएं.

4. कुलदीप यादव : चहल और कुलदीप यादव में अफ्रीका में सबसे ज्यादा विकेट लेने की होड़ मची हुई है. कुलदीप भी 16 विकेट हासिल किए हैं.  पांचवें मैच में कुलदीप ने 4 विकेट झटके. एक ही ओवर में उन्होंने 3 विकेट लेकर अफ्रीका की कमर तोड़ दी. दोनेां की बेखोफ गेंदबाजी मैदान के अंदर ही नहीं मैदान के बाहर भी क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है.

5. रोहित शर्मा : वैसे तो रोहित सीरीज के चार मैचों बुरी तरह असफल रहे, लेकिन पांचवें मैच में टीम इंडिया को जीत उन्हीं के शतक की बदौलत मिली. उन्होंने मैच में सभी नाकामियों को भुलाकर 115 रनों की पारी खेली. 5 मैचों में रोहित ने 155 रन बनाए. सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारत के ही पहले 3 बल्लेबाज रहे.

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अंडर 19 वर्ल्डकप विजेता बना भारत: टीम के जूनियर ”ब्रैडमैन” का जलवा, बने ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’

अंडर 19 वर्ल्डकप के फाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराया. मनजोत कालरा ने बेहतरीन पारी खेलते हुए शतक जड़ा. पृथ्वी शॉ की कप्तान में टीम इंडिया ने टूर्नामेंट के पहले मैच में भी ऑस्ट्रेलिया को ही हराया था. मनजोत को मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया. वहीं टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले शुभमन गिल को ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया. भारत ने ‘मैन ऑफ द मैच’ सलामी बल्लेबाज मंजोत कालरा की शतकीय पारी की बदौलत शनिवार को यहां बे ओवल मैदान पर आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से हराकर चौथी बार खिताब अपने नाम किया.

ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 217 रनों के लक्ष्य को भारत ने मनजोत कालरा के नाबाद 101 रनों की बदौलत 38.5 ओवरों में आठ विकेट रहते ही हासिल कर लिया. कालरा के अलावा भारत के लिए शुभमन गिल ने 31 और विकेटकीपर हार्विक देसाई ने 47 रन बनाए.

‘मैन ऑफ द सीरीज’ चुने जाने के बाद शुभमन ने कहा, ‘मैं अपनी टीम पर गर्व करता हूं. हम भाग्यशाली हैं कि हमें राहुल (द्रविड़) सर कोच के रूप में मिले. उन्होंने मुझे सिर्फ खेल पर ध्यान देने की सलाह दी. यह मेरे लिए रोमांचित कर देने वाला समय है. मुझे उम्मीद है कि आईपीएल में भी अच्छा प्रदर्शन करूंगा.’

भारत ने टूर्नामेंट का पहला मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था, जिसमें शुभमन ने 63 रन की बेहतरीन पारी खेली थी. वहीं इसके बाद जिम्बावे के खिलाफ 59 गेंदों का सामना करते हुए 13 चौकों और 1 छक्के की मदद से 90 रन की नाबाद पारी खेली. उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 86 रन की पारी खेली. शुभमन ने पाकिस्तान के खिलाफ 102 रन की नाबाद पारी खेली.

बता दें कि शुभमन ने इस टूर्नामेंट के 6 मुकाबलों में 372 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 1 शतक और 3 अर्धशतक जड़े. शुभमन टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में दूसरे स्थान पर हैं. उनसे पहले वेस्टइंडीज के खिलाड़ी ए एंथाजे हैं. एंथाजे ने 6 मुकाबलों में 418 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 2 शतक और 2 अर्धशतक जड़े हैं. शुभमन ने 112.38 के एवरेज से रन बनाए. उन्होंने वर्ल्डकप 2018 में 40 चौके और 2 छक्के जड़े हैं.

ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया. ईशान पोरेल ने उसे 32 के कुल स्कोर पर पहला झटका दिया. उन्होंने मैक्स ब्रायंट (14) को अभिषेक शर्मा के हाथों कैच कराया. ऑस्ट्रेलिया को दूसरा झटका भी ईशान ने दिया. उन्होंने दूसरे सलामी बल्लेबाज जैक एडवर्ड्स (28) को पवेलियन भेज दिया. 59 के कुल स्कोर पर कप्तान जेसन संघा (13) को कमलेश नागरकोटी ने पवेलियन भेजा.

यहां ऑस्ट्रेलिया मुश्किल में थी. मेर्लो और उप्पल ने उसे संभाला और चौथे विकेट के लिए 75 रनों की साझेदारी की. उप्पल को अनुकूल रॉय ने अपनी ही गेंद पर कैच आउट कर उनकी पारी का अंत किया. मेर्लो को फिर नाथन मैक्स्वीनी का साथ मिला और दोनों ने टीम को 183 के स्कोर पर पहुंचा दिया. लेकिन शिवा सिंह ने अपनी ही गेंद पर मैक्स्वीनी का कैच पकड़ इस साझेदारी को तोड़ा. यहां से ऑस्ट्रेलिया ने लगातार विकेट खो दिए और जल्दी पवेलियन में लौट गई. मेर्लो 212 के कुल स्कोर पर सातवें विकेट के रूप में पवेलियन लौटे. उन्होंने अपनी पारी में 102 गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए.

भारत ने चौथी बार अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया है. इससे पहले वो, 2000 में मोहम्मद कैफ की कप्तानी में, 2008 में विराट कोहली की कप्तानी में और 2012 में उन्मुक्त चंद की कप्तानी में विश्व विजेता बन चुका है. वहीं भारत ने लगातार दूसरी बार फाइनल में आस्ट्रेलिया को मात दी. 2012 में भी भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मात देते हुए खिताबी जीत हासिल की थी.

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2017 में पीएम मोदी की 6-1 से बंपर जीत, कमलमय हुए ये प्रदेश

21 वीं सदी का 17 वां साल दस्तक दे रहा था और इसके साथ ही इस वर्ष को अनेकों राजनीतिक घटनाओं का गवाह भी बनना था। राजनीतिक तौर पर साल 2017 के सभी महीने किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहे। लेकिन फरवरी-मार्च के साथ नवंबर और दिसंबर का महीना कुछ राजनीतिक दलों के लिए जहां खुशी का लमहा लेकर आया तो कुछ के हिस्से में सिर्फ दुख और दर्द आया। कुछ राजनीतिक दलों और शख्सियतों को आत्मावलोकन की सीख दे गया तो कुछ के लिए ये संदेश कि सफलता को महफूज रखने के लिए आप को लगातार कोशिश करनी होगी। 2017 के जनवरी से दिसंबर के कालखंड में हम पीएम मोदी के उस प्रभामंडल की चर्चा करेंगे जिसका असर देश के सात सूबों में होने वाले चुनाव परिणाम में दिखा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा 14 साल का वनवास खत्म
जनवरी और फरवरी में उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड थी। लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजां में गरमी थी। राजनीतिक दल अवध पर कब्जे की तैयारी कर रहे थे। अवध पर कब्जे की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ के जरिए जाता है और जिसके हाथ से लखनऊ फिसला वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का सिर्फ सपना ही देख सकता है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार अपने काम के दम और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर समाजवादी झंडे को निर्बाध फहराने की तैयारी कर रही थी। इसके साथ ही केसरियां रंग भी यूपी को अपने रंग में सराबोर करने की तैयारी में था। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों से अथक और अकथ कोशिश की गई। चुनाव प्रचार चरम पर था और राजनीतिक दल अपनी तरकश से एक से बढ़कर एक तीर के जरिए एक दूसरे पर निशाना साध रहे थे।


भाजपा जहां 14 साल के वनवास को खत्म करने के लिए अपने आपको मौका देने की मांग कर रही थी। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता यूपी के लड़के करेंगे विकास का नारा बुलंद कर रहे थे। पीएम मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक थे। वो लोगों से अपील कर रहे थे कि ये लड़ाई ईमानदारों और भ्रष्टाचारियों के बीच की है। वो ये भी कहा करते थे कि यूपी की जनता वंशवाद,जातिवाद से तंग आ चुकी है। इसके साथ ही इन नेताओं की अपील का कितना असर पड़ेगा इसे लेकर राजनीतिक टीकाकार अलग अलग ढंग से भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो वो सभी के अनुमानों से जुदा था। यूपी की जनता ने अपना मत दे दिया था, देश का सबसे बड़ा सूबा अब उस राह पर चलने को तैयार था जो केसरिया रंग में रंग चुका था।

उत्तराखंड में प्रचंड विजय
उत्तर प्रदेश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड में चुनाव का आगाज हो चुका था। उत्तराखंड में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार दोबारा सरकार बनाने की तैयारी के साथ चुनाव मैदान में थी। लेकिन भाजपा देवभूमि की जनता को ये समझा रही थी कि किस तरह से कांग्रेस शासन में उत्तराखंड विकास की पटरी से उतर गया था। एक तरफ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनमत को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश करते रहे, वहीं भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी ने कहा कि एक ऐसी पार्टी के हाथ में आप सत्ता कैसे सौंप सकते हैं जिसका दामन दागदार है। देवभूमि की धरती पर दोनों दल अपने अपने अंदाज में एक दूसरे की वादों और दावों की धज्जियां उड़ा रहे थे। लेकिन जन का मत कुछ और ही था। इवीएम से जब परिणाम बाहर आने शुरू हुए तो नतीजे प्रत्याशित लेकिन चौंकाने वाले थे। देवभूमि की जनता का फैसला सार्वजनिक हो चुका था और केसरिया झंडा मैदान से लेकर पहाड़ तक फहर रहा था।

गोवा और मणिपुर बनाई सरकार
यूपी और उत्तराखंड के साथ पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और समुद्र के किनारे स्थित गोवा में भी चुनावी सरगर्मी तेज थी। भाजपा के विरोधी पणजी में जोरशोर से नोटबंदी के मुद्दे को उठा रहे थे। गोवा में विरोधी दल अपने तर्कों से समझाने की कोशिश कर रहे थे कि किस तरह से नोटबंदी ने गोवा की रीढ़ (पर्यटन व्यवसाय) को तोड़ दी है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी कहते रहे कि उनकी लड़ाई गरीबों के लिए है। नोटबंदी के समर्थन में उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। लेकिन गरीबों की पीड़ा को कम करने के लिए इस तरह का कदम उठाना जरुरी था। गोवा और मणिपुर में भाजपा-कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर में भाजपा भारी पड़ी और गोवा के साथ मणिपुर में कमल खिलने में कामयाब रहा।

पंजाब में  कांग्नेस को मिली कामयाबी
यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ ही पंजाब में विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार परवान चढ़ चुका था। पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस और आप मोर्चा खोले थी। कांग्रेस के नेता इस तथ्य को वहां की जनता के सामने रख रहे थे कि कैसे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में पंजाब नशे की गिरफ्त में आ गया। कांग्रेस और आप के नेता जनता को ये बताने में कामयाब रहे कि पंजाब का भला सिर्फ कांग्रेस सोचती है और मौका मिलने पर वो प्रदेश को तरक्की के राह पर ले जायेंगे। पंजाब की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया और सत्ता अमरिंदर सिंह के हाथों सौंप दी।


कमलमय हुआ गुजरात

साल 2017 के पहले तीन महीनों में देश के इन सूबों में चुनावी शोर खत्म हो चुका था। देश की राजनीति किसी और बड़ी घटना की गवाह बनने वाली थी। एक जुलाई 2017 को भारत एक बाजार में बदल चुका था। एक राष्ट्र और एक कर के जरिए जीएसटी को लाया जा चुका था। ठीक उसके बाद पीएम के गृहराज्य गुजरात और देवभूमि हिमाचल में विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी। राजनीति के जानकारों का मानना था कि गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के लिए लिटमस टेस्ट होगा। इसके साथ ही कई जानकारों का कहना था कि गुजरात में पाटीदार, दलित और पिछड़ो के मुद्दे पर मौजूदा भाजपा सरकार बैकफुट पर है। यही नहीं जीएसटी का फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी कहा करते थे कि केंद्र की मोदी सरकार महज कुछ लोगों के फायदे के लिए सोचती है। ये बात अलग है कि इवीएम से निकले हुए परिणाम कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे। गुजरात में छठी बार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन चुनाव नतीजे कुछ संकेत भी दे गए।

देवभूमि हिमाचल में खिला कमल
इसके साथ ही देवभूमि हिमाचल में कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में भ्रष्टाचार का मामला छाया रहा। भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी लोगों तक ये छाप छोड़ने में कामयाब रहे कि कांग्रेस का मतलब ही भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए वीरभद्र की सरकार से छुटकारा पाना ही होगा। कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी लड़ाई में जनता ने अपने नायक पीएम मोदी पर भरोसा किया और राज्य की कमान भाजपा के हाथों में सौंप दी।

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क्रिकेट: अंडर 19 मैच में अनोखे रिकॉर्ड, सिर्फ 2 रन पर आउट हुई टीम, विपक्षी टीम ने एक गेंद पर हासिल किया लक्ष्‍य

खास बातें

  1. नगालैंड की मेनका ने बनाया एक रन
  2. एक रन अतिरिक्‍त के रूप में आया
  3. टीम की अन्‍य बल्‍लेबाजों का खाता भी नहीं खुला

नई दिल्‍ली: बीसीसीआई महिला अंडर 19 क्रिकेट मैच के दौरान एक अनोखा रिकॉर्ड बना है. केरल के खिलाफ अंडर 19 वनडे लीग मैच खेलते हुए नगालैंड की टीम महज 2….जी हां केवल 2 रन बनाकर आउट हो गई. मैच में नगालैंड की टीम महज 17 ओवर ही खेल सकी. मजे की बात यह है कि इस दौरान टीम की 9 बल्‍लेबाज खाता खोले बिना ही आउट हो गईं. टीम की प्रारंभिक बल्‍लेबाज मेनका ने एक रन बनाया जबकि एक अन्‍य रन अतिरिक्‍त (वाइड ) के रूप में आया. मैच में नगालैंड टीम के दोनों रन पारी के शुरुआती पांच ओवर में बने.

एक समय टीम का स्‍कोर बिना विकेट खोए 2 रन था और देखते ही देखते पूरी टीम इसी स्‍कोर पर आउट होकर पेवेलियन लौट आई. जवाब में केरल ने इस लक्ष्‍य को केवल एक गेंद पर हासिल कर लिया. इस तरह केरल ने सबसे कम गेंद में लक्ष्य हासिल करने का नेपाल  का  रिकॉर्ड तोड़ दिया. नेपाल ने वर्ष 2006 में म्यांमार के खिलाफ मैच में लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए केवल दो गेंदें ली थीं.

इस मैच में केरल की तरफ से पांच गेंदबाजों ने 16 ओवर मेडन डाले. कप्तान मिन्नु मनी ने 4 मेडन ओवर डाले और 4 विकेट हासिल किए. दूसरी ओर, सौरभ्या पी ने 2 विकेट निकाले और 6 मेडन ओवर डाले. केरल की टीम ने एक वाइड और एक चौके की मदद से लक्ष्य को हासिल कर लिया. गुंटूर के जेकेसी कॉलेज ग्राउंड में खेले गए इस मैच में नगालैंड टीम ने मैच में 17 ओवर तक बैटिंग की और सिर्फ 2 ही रन बना सकी. टीम की ओर से मेनका ही एक ऐसी बल्लेबाज रहीं जिन्होंने  इस मैच में रन बनाया.एक बल्लेबाज बिना कोई रन बनाए नाबाद रही. मेनका ने अपनी पारी के दौरान 18 गेंदें खेलीं. केरल की टीम को मैच में जीत के लिए सिर्फ 3 रन की दरकार थी. गेंदबाजी के लिए आईं दीपिका कैंतुरा की पहली बॉल वाइड रही, जबकि अगली गेंद पर ओपनर अंशु एस. राजू ने  चौका जमाते हुए टीम को जीत तक पहुंचा दिया.