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देश की सबसे महंगी फिल्म 2.0 #Most #Expensive #Film of #India

देश की सबसे महंगी इस फिल्म को लेकर इनके फैन्स इंतज़ार में थे, जिनके लिए ख़ुशी का मौका है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये डेट मुश्किल बन कर आई है ।

और वो हैं फिल्म केदारनाथ से जुड़े लोग । अभिषेक कपूर के निर्देशन में बन रही सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की ये फिल्म 30 नवंबर को रिलीज़ के लिए तय है, लेकिन शंकर निर्देशत 2.0 को 29 नवंबर को रिलीज़ किये जाने की घोषणा के साथ ही अब केदारनाथ के सामने संकट आ गया है। वैसे पहले से ही केदारनाथ संकट से घिरी रही है । निर्देशक और पूर्व निर्माता कंपनी के बीच हुए विवाद के बाद ये फिल्म लगभग ठंडे बस्ते में चली गई थी लेकिन प्रोड्यूसर रॉनी स्क्रूवाला ने फिल्म को संकट से उबार लिया । सैफ़ अली खान की बेटी सारा की ये डेब्यू फिल्म है और जब ये संकेत मिलने लगे थे कि केदारनाथ बन नहीं पायेगी तो करण जौहर ने उन्हें अपने प्रोडक्शन में बन रही फिल्म सिंबा में रणवीर सिंह के साथ कास्ट कर लिया ।

फिल्म 2.0 की 29 नवंबर को रिलीज़ का मतलब केदारनाथ को या तो अपनी डेट आगे-पीछे करनी पड़ेगी या मुकाबले के लिए तैयार होना होगा l वैसे नवंबर और दिसंबर में बड़ी फिल्मों का टकराव रहेगा । सात नवंबर को आमिर खान और अमिताभ बच्चन स्टारर ठग्स ऑफ हिंदोस्तान आएगी और 22 दिसंबर को शाहरुख़ खान की फिल्म ज़ीरो रिलीज़ होगी । फिल्म 2.0 के मेकर ने इंतज़ार करवा कर जो डेट चुनी है वो बॉक्स ऑफ़िस पर काफ़ी उपयुक्त मानी जा रही है क्योंकि करीब 500 करोड़ तक पहुंच गई फिल्म की लागत से पार पाने के लिए फिल्म को लॉन्ग रन चाहिए होगा । बताया जा रहा है कि फिल्म के बजट में 100 करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च जुट गया है क्योंकि फिल्म के स्पेशल इफ़ेक्ट्स का काम लगातार बढ़ता जा रहा था । रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर रोबोट/ इंधीरन का सीक्वल फिल्म 2.0 का पिछले दो साल से इंतज़ार हो रहा है ।

3 डी कन्वर्जन के साथ इंटरनेशनल स्तर के स्पेशल इफ़ेक्ट्स पर अब तक समय से काम पूरा न होने के कारण हुई है l अमेरिका की जिस कंपनी को फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स का ठेका दिया गया था वो कंपनी ही दिवालिया हो गई l इस फिल्म में रजनीकांत अपने पुराने वाले रोल में हैं जबकि अक्षय कुमार बड़े ही विचित्र गेट अप में विलेन बने दिखेंगे। पिछली बार फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन थीं तो इस बार एमी जैक्सन फीमेल लीड में होंगी। अक्षय कुमार जिस डॉक्टर रिचर्ड का रोल कर रहे हैं उसका गेटअप एक राक्षसी कौवे जैसा है।

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दुर्लभ बीमारी का इलाज करवा रहे अभिनेता इरफान खान ने यह भावपूर्ण पत्र और कुछ खूबसूरत तस्वीरें साझा कीं। जरूर देखें!

जिंदगी कई बार ऐसे मोड़ पर ले आती है जब अनिश्चित ही निश्चित जान पड़ता है. मिजाज से योद्धा इरफ़ान की मानसिक अवस्था और अहसास को हम उनकी लिखी इन पंक्तियों में महसूस कर सकते हैं. हम उसे यहां अविकल रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं…

कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला था कि मैं न्यूरोएन्डोक्राइन कैंसर से ग्रस्त हूं, मैंने पहली बार यह शब्द सुना था. खोजने पर मैंने पाया कि मेरे इस बीमारी पर बहुत ज्यादा शोध नहीं हुए हैं, क्योंकि यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है.

अभी तक अपने सफ़र में मैं तेज़-मंद गति से चलता चला जा रहा था. मेरे साथ मेरी योजनायें, आकांक्षाएं, सपने और मंजिलें थीं. मैं इनमें लीन बढ़ा जा रहा था कि अचानक टीसी ने पीठ पर टैप किया, “आप का स्टेशन आ रहा है, प्लीज उतर जाएं.’

मेरी समझ में नहीं आया, “ना ना मेरा स्टेशन अभी नहीं आया है.’

जवाब मिला, ‘अगले किसी भी स्टाप पर आपको उतरना होगा, आपका गन्तव्य आ गया.

अचानक एहसास होता है कि आप किसी ढक्कन (कॉर्क) की तरह अनजान सागर में, अप्रत्याशित लहरों पर बह रहे हैं… लहरों को क़ाबू कर लेने की ग़लतफ़हमी लिए.

इस हड़बोंग, सहम और डर में घबरा कर मैं अपने बेटे से कहता हूं, “आज की इस हालत में मैं केवल इतना ही चाहता हूं… मैं इस मानसिक स्थिति को हड़बड़ाहट, डर, बदहवासी की हालत में नहीं जीना चाहता. मुझे किसी भी सूरत में मेरे पैर चाहिए, जिन पर खड़ा होकर अपनी हालत को तटस्थ हो कर जी पाऊं. मैं खड़ा होना चाहता हूं.”

ऐसी मेरी मंशा थी, मेरा इरादा था…

कुछ हफ़्तों के बाद मैं एक अस्पताल में भर्ती हो गया. बेइंतहा दर्द हो रहा है. यह तो मालूम था कि दर्द होगा, लेकिन ऐसा दर्द… अब दर्द की तीव्रता समझ में आ रही है. कुछ भी काम नहीं कर रहा है. ना कोई सांत्वना, ना कोई दिलासा. पूरी कायनात उस दर्द के पल में सिमट आई थी. दर्द खुदा से भी बड़ा और विशाल महसूस हुआ.

मैं जिस अस्पताल में भर्ती हूं, उसमें बालकनी भी है. बाहर का नज़ारा दिखता है. कोमा वार्ड ठीक मेरे ऊपर है. सड़क की एक तरफ मेरा अस्पताल है और दूसरी तरफ लॉर्ड्स स्टेडियम है… वहां विवियन रिचर्ड्स का मुस्कुराता पोस्टर है. मेरे बचपन के ख्वाबों का मक्का, उसे देखने पर पहली नज़र में मुझे कोई एहसास ही नहीं हुआ. मानो वह दुनिया कभी मेरी थी ही नहीं.

मैं दर्द की गिरफ्त में हूं.

और फिर एक दिन यह अहसास हुआ… जैसे मैं किसी ऐसी चीज का हिस्सा नहीं हूं, जो निश्चित होने का दावा करे. ना अस्पताल और ना स्टेडियम. मेरे अंदर जो शेष था, वह वास्तव में कायनात की असीम शक्ति और बुद्धि का प्रभाव था. मेरे अस्पताल का वहां होना था. मन ने कहा. केवल अनिश्चितता ही निश्चित है.

इस अहसास ने मुझे समर्पण और भरोसे के लिए तैयार किया. अब चाहे जो भी नतीजा हो, यह चाहे जहां ले जाये, आज से आठ महीनों के बाद, या आज से चार महीनों के बाद या फिर दो साल. चिंता दरकिनार हुई और फिर विलीन होने लगी और फिर मेरे दिमाग से जीने-मरने का हिसाब निकल गया.

पहली बार मुझे शब्द ‘आज़ादी‘ का एहसास हुआ, सही अर्थ में! एक उपलब्धि का अहसास.

इस कायनात की करनी में मेरा विश्वास ही पूर्ण सत्य बन गया. उसके बाद लगा कि वह विश्वास मेरी एक एक कोशिका में पैठ गया. वक़्त ही बताएगा कि वह ठहरता है या नहीं. फ़िलहाल मैं यही महसूस कर रहा हूं.

इस सफ़र में सारी दुनिया के लोग… सभी मेरे सेहतमंद होने की दुआ कर रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं, मैं जिन्हें जानता हूं और जिन्हें नहीं जानता, वे सभी अलग-अलग जगहों और टाइम जोन से मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं. मुझे लगता है कि उनकी प्रार्थनाएं मिल कर एक हो गयी हैं, एक बड़ी शक्ति. तीव्र जीवन धारा बन कर मेरे स्पाइन से मुझमें प्रवेश कर सिर के ऊपर कपाल से अंकुरित हो रही हैं.

अंकुरित होकर यह कभी कली, कभी पत्ती, कभी टहनी और कभी शाखा बन जाती है. मैं खुश होकर इन्हें देखता हूं. लोगों की सामूहिक प्रार्थना से उपजी हर टहनी, हर पत्ती, हर फूल मुझे एक नई दुनिया दिखाती हैं. अहसास होता है कि ज़रूरी नहीं कि लहरों पर ढक्कन (कॉर्क) का नियंत्रण हो.

जैसे आप क़ुदरत के पालने में झूल रहे हों!

इरफान ने इस पत्र के साथ कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं:

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कुली का कमाल: स्‍टेशन के फ्री वाई फाई की मदद से पास की UPSC की परीक्षा

सपने पूरे करने के लिए हौंसला चाहिए सुविधा नहीं इस सच को सुनाती है इस कुली कीकहानी जो स्‍टेशन के फ्री वाईफाई की मदद से सिविल सेवा परीक्षा में पास हुआ।

केरल में एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ के. की कहानी कुछ अनोखी है, जिन्होंने रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध मुफ्त वाईफाई सुविधा के सहारे इंटरनेट के जरिये पढ़ाई की और केरल पब्लिक सर्विस कमीशन, केपीएससी की लिखित परीक्षा पास की। सबसे बड़ी बात ये है कि तैयारी के दौरान वह किताबों में नहीं डूबे रहे बल्‍कि अपना काम करते हुए स्मार्ट फोन और ईयरफोन के सहारे पढ़ाई करते रहे। अब अगर श्रीनाथ साक्षात्‍कार में सफल हो जाते हैं तो वह भूमि राजस्व विभाग के तहत विलेज फील्ड असिस्टेंट के पद पर नियुक्‍त्‍त हो जायेंगे।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

श्रीनाथ पिछले पांच वर्ष से कुली के रूप में काम कर रहे हैं और उनका सिविल परीक्षा के इम्‍तिहान में बैठने का ये तीसरा प्रयास था। उनका कहना है कि यह पहला मौका था, जब उन्‍होंने स्टेशन पर उपलब्ध वाईफाई सुविधा का इस्तेमाल किया। उन्‍होंने ये भी बताया कि कुली का काम करने के दौरान वे हमेशा ईयरफोन कान में लगाए रखते थे और इंटरनेट पर अपने संबंधित विषयों पर लेक्चर सुना करते थे। उसे मन ही मन दोहराते भी रहते थे और रात को मौका मिलते ही फिर रिवाइज कर लेते थे। इसी वाईफाई की मदद से उन्‍होंने ऑनलाइन अपना परीक्षा फार्म भरा और देश दुनिया की ताजा जानकारियों से खुद को अपडेट किया साथ ही अपने विषयों की जम कर तैयारी की।

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फ्रांसः #MeToo कैंपेन शुरू करने वाली महिला पर मानहानि का मुकदमा

दुनिया भर में चलने वाले ‘मी-टू’ कैंपेन की तरह ही फ्रांस में कैंपेन चलाने वाली महिला पत्रकार सैंड्रा मुलर ने बताया कि उन्होंने जिस व्यक्ति पर उन्होंने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, अब उस व्यक्ति ने मुलर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया है। मुलर ने अपने टीवी चैनल के दफ्तर में काम करने वाले एग्जिक्यूटिव एरिक ब्रायॉन पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। मुलर ने अक्टूबर 13 को ट्विटर पर #balancetonporc के साथ बताया था कि किस तरह उनके टीवी एग्जिक्यूटिव ने उन पर टिप्पणी की।

उनकी इस पोस्ट के बाद इस तरह के मामलों की और कहानियां सामने आने लगी। गुरुवार को मुलर ने बताया कि उन पर मुकदमा करने वाले एरिक ब्रायॉन ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के बाद अब अपना रास्ता बदल दिया है। मुलर ने बताया कि ब्रायॉन ने उन पर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। मुलर का कहना है कि उन पर ब्रायॉन ने 50 हजार यूरो का मानहानि का मुकदमा किया है। मुलर ने यह बात अपनी फेसबुक पोस्ट में बताई है।

फ्रांस के एक अखबार में ऑपीनियन आर्टिकल लिखते हुए ब्रायॉन ने मुलर पर अभद्र टिप्पणी करने की बात स्वीकार की थी। वहीं मुलर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि अपने वकील की सहायता से मैं इस लड़ाई के आखिर तक जाऊंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद करती हूं कि इस ट्रायल के जरिए इस बात पर बहस छिड़ेगी कि यौन उत्पीड़न का सामना कैसे करें।’ बता दें कि टाइम मैगजीन ने मुलर को 2017 के पर्सन ऑफ द ईयर की लिस्ट में शामिल करते हुए ‘साइलेंस ब्रेकर’ का नाम दिया था।