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थानेदार के 14 साल के लड़के ने बनाए ये 3 एप, गूगल ने बताया शानदार, कमाई कर दी गरीबों को दान

14 वर्ष का आर्यन राज नौवीं कक्षा का छात्र है। आर्यन मार्च-अप्रैल में स्कूल की छुट्टी के समय तीन एप मोबाइल शॉर्ट कट, कम्प्यूटर शॉर्ट कट और वाट्सएप क्लीनर लाइट तैयार किया। तीनों एप को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करने के लिए भेज दिया। उसके बाद वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया। उधर, गूगल ने उसके तीनों एप की जांच की। रिसर्च किया। पाया गया कि अच्छे और कारगर एप हैं। गूगल ने तीनों एप को अप्रैल में अपने प्ले स्टोर में अपलोड कर दिया है। एक माह में प्ले स्टोर से आर्यन के एप को दस हजार लोगों ने डाउनलोड किया है।

क्या खासियत है एप की

– मोबाइल और कंप्यूटर शॉर्टकट एप : ये दोनों एप इंटरनेट के माध्यम से किसी तरह के मॉलवेयर और वायरस का प्रवेश रोकता है।

– वाट्सएप क्लीनर लाइट एप : यह वाट्सएप के बैकग्राउंड का रंग बदल देता है। साथ ही फोटो और वीडियो के माध्यम से किसी प्रकार के वायरस का प्रवेश रोकता है।

कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है पटना के थानेदार का बेटा

पत्रकार नगर थानाध्यक्ष संजीत सिन्हा का बेटा है आर्यन राज। कक्षा दो से ही वह कंप्यूटर फ्रेंडली हो गया। वह सेंट माइकल दीघा में नौंवी का छात्र है। संजीत सिन्हा कहते हैं कि बेटा इंजीनियर बनना चाहता है। पूर्व में आर्यन ने बिहार पुलिस को लेकर एक एक एप बनाया था, जो सफल नहीं हो सका।

एप बनाने से भी एक बड़ा काम आर्यन ने किया है। उसने पुरस्कार की राशि स्वीकार करने से मना कर दिया। गूगल को बैंक अकाउंट नंबर न देकर यह आग्रह किया है कि इस राशि को उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाए, जो अभाव की वजह से पढ़ाई नहीं पूरी कर पा रहे। पटना के एक थानेदार के बेटे की मेधा और बड़प्पन की खूब चर्चा हो रही।

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जब पस्‍त हुए चिकित्‍सक, तो काम आए योगगुरु

यह सच मध्‍यप्रदेश के एक छोटे जिले मंदसौर का है। योग ने मंदसौर के 50 से अधिक बुजुर्गों को 70 और 80 की उम्र में फिर से युवा बना दिया है। दशपुर कुंज, रामटेकरी और मेघदूत नगर में प्रतिदिन सुबह योग के लिए 200 से अधिक लोग जुटते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो कुछ समय पहले चलने में मोहताज थे। अब युवाओं की तरह दौड़ लगा रहे हैं। शाजापुर में तो योग से पेरालिसिस तक ठीक होने का उदाहरण सामने आया है।

1- 70 के पारिख कर रहे हैं कमाल

मध्‍यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले दिनेशचंद्र पारिख 70 वर्ष के हैं। पारिख का कहना है कि हम योग के लाभ को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकते । वो बताते हैं कि नौ साल पहले हम योग से जुड़े। इसके बाद योग साधना से कुछ लाभ दिखा और मेरी दिलचस्‍पी इसमें गहरी होती गई। धीरे-धीरे योग से शारीरिक और मानसिक लाभ मिला और आस्‍था पैदा होने लगी। उन्‍होंने कहा कि 2008 से मैं नियमित योग कर रहा हूं।

स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त पारिख बताते हैं कि घुटने में तकलीफ से सीढि़यां चढ़ना दूभर हो गया था। इस परेशानी से आजिज आकर मैंने एक साल पहले ही सेवानिवत्ति का मन बना लिया था। चिकित्सकों ने घुटने बदलने की सलाह दी। ऐसे में योग गुरु सुरेंद्र जैन के संपर्क में आकर योग शुरू किया। इससे चलना-फिरना आसान हो गया। छह माह में पैर ठीक हो गया।

2- अब सीढ़ियों पर दौड़ते हैं 70 वर्षीय पामेचा

इसी जिले के निवासी 70 वर्षीय पामेचा 10 वर्ष पूर्व योग से जुड़े। उनका योग में अपार विश्‍वास है। पमोचा कहते हैं कि वह दस वर्षों से निरंतर योगाभ्‍यास कर रहे हैं। उनका यह विश्‍वास अनायास नहीं है। योग से जुड़ने से पहले पोचा चलने-फ‍िरने में मोहताज थे। आज वह योगाभ्‍यास से दौड़ सकते हैं, सीढि़यों पर चढ़ सकते हैं। पामेचा कहते हैं कि 2008 में 70 वर्ष की उम्र में योग से जुड़ा, तब घर की सी़ढ़ियां एक पैर से ही चढ़ पाता था, दूसरा पैर काम नहीं करता था। योग शुरू करते ही पैर ठीक हो गया। मंदसौर के भंवरलाल पामेचा योग को जीवन के लिए हवा और भोजन की तरह ही जरूरी मानते हैं।

3- बीमा एजेंट यशपाल शर्मा पेरालिसिस ठीक हो गया

बीमा एजेंट यशपाल शर्मा को वर्ष 2001 में हार्ट अटैक हुआ। उनके दुखों का यहीं अंत नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद वह पेरालिसिस से भी ग्रसित हो गए। यशपाल का कहना है कि वह तीन वर्षों तक चिकित्‍सकों से इलाज कराते रहे। इलाज में करीब 10 लाख रुपये भी खर्च हो गए। लेकिन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा। हमें कोई आराम नहीं मिला। यशपाल ने कहा कि हारा मन योग की शरण जा पहुंचा। योगाभ्‍यास से धीरे-धीरे आराम मिला। और मैं सालभर में पूरी तरह स्वस्थ हो गया। यशपाल अब योग में डिप्लोमा करने के बाद लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं।

4- रीतेश के जीवन में योग से फैला उजियारा

शहडोल निवासी रीतेश मिश्रा के जीवन में योग ने उजियारा फैलाया। रीतेश का कहना है कि छह साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने बताया कि मैं लगातार 14 साल तक योग कर रोशनी वापस लाने में कामयाब हुआ हूं। मुझे 80 प्रतिशत चीजें नजर आ जाती हैं। मार्कर से लिखे बड़े अक्षर पढ़ लेता हूं। मोबाइल को भी नजदीक से देखकर चला लेते हैं। रीतेश की तारीफ योग गुर बाबा रामदेव भी करते हैं। रीतेश बताते हैं कि बाबा रामदेव से मेरी पहली मुलाकात रीवा में 2008 में हुई थी। इसके बाद योग के प्रति लगाव पैदा हुआ।

रीतेश ने कहा पहले माता-पिता (सीमा मिश्रा व देवानंद मिश्रा) टीवी पर आसन देखकर योग कराते थे। मेरे माता-पिता मुझे लेकर काफी चिंतित थे। खासकर मेरी शिक्षा को लेकर। लेकिन समस्‍याओं के बावजूद रीतेश ने उच्‍च शिक्षा पूरी की। अब वह लोगों को योग सिखा रहे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की योग कक्षा पुलिस लाइन में सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाती है। वेलफेयर फंड से इन्हें कुछ राशि बतौर मेहनताना मिलती है। इनकी योग कक्षा में शामिल रहने वालों में पुलिस अफसर, जज, डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स शामिल हैं।

बता दें कि 21 जून का पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसके अलावा 150 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए करीब 5000 आयोजन हो रहे हैं।

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भाजपा का ‘संर्पक फॉर समर्थन’ अभियान शुरू, 50 लोगों से मिलेंगे शाह

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने पर भाजपा ने ‘संर्पक फॉर समर्थन’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सुहाग और संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से उनके घर जाकर मुलाकात की। शाह ने सुहाग को केंद्र की भाजपा-नीत एनडीए सरकार की उपलब्धियों पर एक बुकलेट, एक पेन ड्राइव और इससे जुड़े अन्य साहित्य भी भेंट किये।

भाजपा के इस अभियान को 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी माना जा रहा है। इसके तहत पार्टी के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और पंचायत सदस्य समेत करीब 4000 कार्यकर्ता-नेता लोगों से खुद मिलेंगे। केंद्रीय आलाकमान ने पार्टी के हर एक कार्यकर्ता को कम से कम 25 लोगों से संपर्क कर सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक भाजपा के नेता देश के एक लाख प्रमुख व्यक्तियों से व्यक्तिगत संपर्क करेंगे, जिसमें कला जगत, संविधान विशेषज्ञ, सेना के रिटायर्ड अधिकारी, फिल्म और धर्म जगत की प्रमुख हस्तियाँ शामिल होगी।

इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के इन चार सालों के दौरान विशेषकर दो क्षेत्रों – ग्रामीण जीवन से असुविधाओं को समाप्त कर उन्हें प्रगति की राह पर आगे बढ़ाने और गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में बहुत बड़ा काम हुआ है। साथ ही आने वाले पांचवें साल में केंद्र की भाजपा-नीत एनडीए सरकार का लक्ष्य लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देकर किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने और देश के लगभग 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक का बीमा देकर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त करने का है।

शाह ने विगत चार वर्षो के बारे मे बताया कि दुनिया में देश के गौरव को आजादी के बाद सबसे ऊँची सतह पर प्रतिष्ठित करने का काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ है।

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कुली का कमाल: स्‍टेशन के फ्री वाई फाई की मदद से पास की UPSC की परीक्षा

सपने पूरे करने के लिए हौंसला चाहिए सुविधा नहीं इस सच को सुनाती है इस कुली कीकहानी जो स्‍टेशन के फ्री वाईफाई की मदद से सिविल सेवा परीक्षा में पास हुआ।

केरल में एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ के. की कहानी कुछ अनोखी है, जिन्होंने रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध मुफ्त वाईफाई सुविधा के सहारे इंटरनेट के जरिये पढ़ाई की और केरल पब्लिक सर्विस कमीशन, केपीएससी की लिखित परीक्षा पास की। सबसे बड़ी बात ये है कि तैयारी के दौरान वह किताबों में नहीं डूबे रहे बल्‍कि अपना काम करते हुए स्मार्ट फोन और ईयरफोन के सहारे पढ़ाई करते रहे। अब अगर श्रीनाथ साक्षात्‍कार में सफल हो जाते हैं तो वह भूमि राजस्व विभाग के तहत विलेज फील्ड असिस्टेंट के पद पर नियुक्‍त्‍त हो जायेंगे।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

श्रीनाथ पिछले पांच वर्ष से कुली के रूप में काम कर रहे हैं और उनका सिविल परीक्षा के इम्‍तिहान में बैठने का ये तीसरा प्रयास था। उनका कहना है कि यह पहला मौका था, जब उन्‍होंने स्टेशन पर उपलब्ध वाईफाई सुविधा का इस्तेमाल किया। उन्‍होंने ये भी बताया कि कुली का काम करने के दौरान वे हमेशा ईयरफोन कान में लगाए रखते थे और इंटरनेट पर अपने संबंधित विषयों पर लेक्चर सुना करते थे। उसे मन ही मन दोहराते भी रहते थे और रात को मौका मिलते ही फिर रिवाइज कर लेते थे। इसी वाईफाई की मदद से उन्‍होंने ऑनलाइन अपना परीक्षा फार्म भरा और देश दुनिया की ताजा जानकारियों से खुद को अपडेट किया साथ ही अपने विषयों की जम कर तैयारी की।

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UPSC 2017 RESULT: उन होनहारों की कहानी जिन्होंने UPSC में लहराया परचम

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एक मुलाकात लिटिल ऐप डेवलपर आदित्य चौबे से

खबर है कि महज़ 9 साल की उम्र से एप डेवलप कर रहे आदित्य आज ऑनलाइन ‘आदि” कंपनी के मालिक भी हैं. ये कारनामा है जबलपुर के जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 8वीं में पढ़ने वाले आदित्य चौबे का जो आजकल जावा लैंग्वेज की ऑनलाइन ट्यूशन दे रहे है जिस लैंग्वेज का नाम 2 साल पहले तक सुना भी नहीं था .
एक मुलाकात लिटिल ऐप डेवलपर आदित्य चौबे से

12 साल की उम्र में गूगल प्ले स्टोर में अपने बनाये हुए एप को लेकर चर्चा में आये आदित्य चौबे ने बताया की उनकी यह शुरुआत तब हुई जब एक दिन वो लैपटॉप के नोटपैड पर कुछ काम कर रहे थे जिसमे error आने पर उन्होंने उसे ओपन किया तो जावा लैंग्वेज से पहली बार उनका सामना हुआ था. जिज्ञासु प्रवृति के आदित्य ने उसके बाद से ही लगातार जावा के बारे में पढ़कर कई एप भी बनाये है जिसमे से कुछ खास एप ये है –
1 – कोडरेड बटन एप
2 – लोकेशन लाइट एप
3 – लिसिन ट्यूब एप
4 – चैट बुक एप

आदित्य के पिता धर्मेन्द्र चौबे ऑर्डिनेंस फैक्टरी खमरिया में जूनियर वर्क्स मैनेजर और मां अमिता निजी स्कूल में साइंस टीचर हैं. आदी की बड़ी बहन 12वीं की छात्रा हैं.आदित्य ने अपने पिता की लिए एक स्पेशल कैलकुलेटर एप भी बनाया है जिसमे अनलिमिटेड नंबर्स तक कैलकुलेशन किया जा सकता है . फ़िलहाल आदित्य के 48 एप अभी गूगल प्ले स्टोर व एप्टॉयड पर लोड होने के लिए वेरीफिकेशन मोड पर है जो जल्दी ही प्ले स्टोर पर देखे जा सकते है .

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‘बहुत ज़्यादा सवाल करते थे स्टीफ़न हॉकिंग’

दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में स्टीफ़न हॉकिंग के साथ पढ़ाई की थी.

इसके बाद साइंस से संबंधित कई ग्लोबल सम्मेलनों में दोनों की मुलाक़ात होती रही. डॉक्टर नारलीकर के अनुसार, कॉलेज के दिनों में वो स्टीफ़न हॉकिंग के साथ टेबल टेनिस के मैच भी खेल चुके हैं.

कॉलेज की उन यादों पर डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने बीबीसी से बात की. पढ़िए, उन्होंने क्या-क्या बताया:

स्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर
Image captionस्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर

मैं और स्टीफ़न हॉकिंग कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे. वो मुझसे साल दो साल जूनियर ही थे. वो बाक़ी आम स्टूडेंट्स की तरह ही थे. उस वक़्त कोई उनकी प्रतिभा के बारे में नहीं जानता था.

लेकिन कुछ सालों के भीतर ही लोगों को ये अंदाज़ा हो गया था कि स्टीफ़न में कुछ ख़ास बात है.

मुझे याद है कि ब्रिटेन की रॉयल ग्रीनविच शोध विद्यालय ने साल 1961 में एक साइंस सम्मेलन आयोजित किया था. वहां स्टीफ़न हॉकिंग से पहली बार मेरी सीधी मुलाक़ात हुई थी.

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटJIM WATSON/GETTY IMAGES

उस वक़्त वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. मैं एक छात्र ही था, लेकिन मुझे वहां एक लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था.

लेक्चर शुरू होने के कुछ देर बाद ही मैंने पाया कि एक स्टूडेंट है जो बहुत ज़्यादा सवाल कर रहा है. वो थे स्टीफ़न हॉकिंग.

उन्होंने मानो मुझपर सवालों की बौछार कर दी थी. वो ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में जानना चाहते थे. वो जानना चाहते थे कि बिग बैंग थियोरी है क्या?

स्टीफ़न हॉकिंगइमेज कॉपीरइटHAWKING.ORG.UK

मैंने उनके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश की. लेकिन ब्रह्मांड से जुड़े उनके सवाल पैने होते चले गए. वो वाक़ई इस विषय पर गंभीर थे.

बहरहाल, सम्मेलन ख़त्म होने के बाद हम दोनों ने टेबल टेनिस खेला. हमारे बीच दो मैच हुए और दोनों ही मैच मैं जीता!

स्टीफ़न पीएचडी करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे. उस वक़्त तक लोगों को समझ आ चुका था कि हॉकिंग के मस्तिष्क की क्षमता कितनी है.

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सच कहूं तो पहली बार मुझे लगा था कि स्टीफ़न हॉकिंग सिर्फ़ ज़्यादा सवाल करते हैं. उन्हें उनके जवाबों से कोई लेनादेना नहीं.

लेकिन उनकी पीएचडी की थीसिस पढ़कर सब हैरान रह गए थे. क्योंकि अपनी थीसिस में ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में उन्होंने कई बेहद दिलचस्प बातें लिखी थीं.

उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफ़ेसर क़रीब 30 साल काम किया. ब्लैक होल पर उनकी रिसर्च को सबसे ज़्यादा पहचान मिली.

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साइंस की दुनिया के हिसाब के कहूं तो ब्लैक होल के नियमों को स्टीफ़न ने ही स्थापित किया.

स्टीफ़न की सबसे अच्छी बात थी कि वो डायलॉग में विश्वास करते थे. बहस करना उनकी आदत में शामिल नहीं था.

कैम्ब्रिज में उनके साथ मैंने विज्ञान के कई सिद्धांतों पर कई बार चर्चा की. लेकिन कभी हमारे बीच गर्म बहस नहीं हुई. हमने हमेशा एक दूसरे से सीखा ही.

अपनी बीमारी की वजह से बीते कई सालों से स्टीफ़न लेक्चर नहीं दे पा रहे थे. लेकिन लोगों की जिज्ञासाओं और उनके सवालों के जवाब वो कई माध्यमों से देते रहे.

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मुझे याद है जब पहली बार स्टीफ़न ने कहा था कि दुनिया किसी ईश्वर के इशारे पर नहीं चलती. भगवान कुछ नहीं है. और संभावना है कि इस विश्व के अलावा भी कोई दुनिया हो.

लोगों को हमेशा ये उनकी कल्पना ही लगी. स्टीफ़न के पास भी इसे साबित करने के लिए कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. लेकिन उन्होंने मरते दम तक इसे साबित करने की कोशिश की और उनकी इस ललक का सम्मान किया जाना चाहिए.

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Stephen Hawking dies aged 76

The British physicist was known for his work with black holes and relativity, and wrote several popular science books including A Brief History of Time.

At the age of 22 Stephen Hawking was given only a few years to live after being diagnosed with a rare form of motor neurone disease. The illness left him wheelchair-bound and largely unable to speak except through a voice

synthesizer.

His family said that he died peacefully in his home near Cambridge University, where he did much of his ground-breaking work on black holes.

“We are deeply saddened that our beloved father passed away today,” a family statement said.

In the statement his children, Lucy, Robert and Tim said: “He was a great scientist and an extraordinary man whose work and legacy will live on for many years.

They praised his “courage and persistence” and said his “brilliance and humour” inspired people across the world.

“He once said, ‘It would not be much of a universe if it wasn’t home to the people you love.’ We will miss him forever.”

Prof Hawking was the first to set out a theory of cosmology as a union of relativity and quantum mechanics.


Factfile: Stephen Hawking

  • Born 8 January 1942 in Oxford, England
  • Earned place at Oxford University to read natural science in 1959, before studying for his PhD at Cambridge
  • By 1963, was diagnosed with motor neurone disease and given two years to live
  • Outlined his theory that black holes emit “Hawking radiation” in 1974
  • Published his book A Brief History of Time in 1988, which has sold more than 10 million copies
  • His life story was the subject of the 2014 film The Theory of Everything, starring Eddie Redmayne
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बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी का कार्डियक अरेस्‍ट से निधन, दुबई में शादी अटेंड करनी गई थीं

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी अब हमारे बीच नहीं रही। शनिवार (24 फरवरी) को हृदय-गति रुक जाने (कार्डियक अरेस्ट) की वजह से अचानक उनका निधन हो गया। अपने आखिरी पलों में 54 वर्षीय श्रीदेवी दुबई में थीं। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक श्रीदेवी दुबई में एक शादी अटेंड करने गई थीं। बॉनी कपूर के छोटे भाई और अभिनेता संजय कपूर ने श्रीदेवी के निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना रात 11 से 11.30 बजे के बीच की है।

संजय कपूर ने श्रीदेवी के निधन के बारे में इंडियनएक्सप्रेस ऑनलाइन को बताया कि वह खुद भी दुबई में ही थे और थोड़ी देर पहले भारत लौटे ही थे कि यह खबर आ गई। संजय दोबार दुबई जा रहे हैं। दरअसल, श्रीदेवी अपने पति बॉनी कपूर और छोटी बेटी खुशी के साथ मोहित मारवाह के शादी समारोह में शिरकत करने दुबई गई थीं। उनके निधन की खबर सुनकर लोग मुंबई में उनके घर के पास जमा हो रहे हैं। उनकी बड़ी बेटी जाह्नवी भारत में ही हैं। वह शूटिंग की वजह से परिवार के साथ दुबई नहीं गई थीं।

वहीं श्रीदेवी के निधन की खबर से बॉलीवुड में दुख का माहौल है। उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। बॉलीवुड के कई स्टार्स इस दुखद घटना पर ट्विट कर दुख जता रहे हैं। एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने ट्वीट कर लिखा है कि, ‘मेरे पास कोई शब्द नहीं है। श्रीदेवी को प्यार करनेवाले हर व्यक्ति के प्रति संवेदना। एक काला दिन। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।’ दूसरी ओर, प्रीति जिंटा ने लिखा, ‘यह सुनकर दुखी और स्तब्ध हूं कि मेरी ऑल टाइम फेवरिट श्रीदेवी नहीं रहीं। भगवान उनकी आत्मा को शांति और उनके परिवार को ताकत दें।’

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पूर्ण चंद्रग्रहण आज: 150 साल बाद ऐसा नाजारा दिखेगा; आज जानें सुपर मून, ब्लू मून और ब्लड मून क्या होता

यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा यानी इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से कुछ देर के लिए पूरी तरह ढक जाएगा। यह पूरे देश में दिखाई देगा। यह स्थिति 35 साल बाद बनी है। इस साल का पहला चंद्रग्रहण आज है। इसके साथ ही एशिया में 35 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब ब्लू मून ब्लड मून और सुपर मून एक साथ दिखेगा।

सुपर मून क्या होता है?
चंद्रमा का अपने सामान्य आकार से ज्यादा बड़ा दिखाई देना सुपर मून कहलाता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होता है। सुपर मून का आकार सामान्य से 10 से 14 फीसदी बड़ा होता है।

ब्लू मून क्या होता है?
एक महीने में जब दो पूर्णिमा पड़ती हैं तो इस स्थिति को ब्लू मून कहते हैं। इस बार 2 जनवरी को भी पूर्णिमा थी। दूसरी 31 जनवरी को है। NASA के ब्लू मून हर ढाई साल में एक बार नजर आता है। इस दौरान चंद्रमा का नीचे का हिस्सा ऊपरी हिस्से से ज्यादा चमकीला दिखाई देता है और नीली रोशनी देता है।

ब्लड मून क्या होता है?

बीएम बिरला साइंस सेंटर के डायरेक्टर बीजी सिद्धार्थ ने न्यूज एजेंसी को बताया जब तीनों (सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा) एक सीध में होंगे तो यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। इस दौरान सूर्य की कुछ किरणें पृथ्वी के एटमॉस्फेयर से होकर चंद्रमा पर पड़ती हैं। इस दौरान वह हल्का भूरे और लाल रंग में चमकता है। कुछ लोग इसे ब्लड मून भी कहते हैं।

शाम 5:20 से रात 8:43 बजे तक नजर आएगा
यह चंद्रग्रहण शाम 5.20 बजे शुरू होगा। यह ठीक ढंग से सूर्यास्त के बाद 6:25 बजे से नजर आएगा और 8.43 बजे तक रहेगा।

भारत के अलावा यह एशिया रूस मंगोलिया जापान आस्ट्रेलिया आदि में चंद्रमा के उदय के साथ ही शुरू हो जाएगा। नॉर्थ अमेरिका कनाडा और पनामा के कुछ हिस्सों में चंद्रमा के अस्त होते वक्त दिखाई देगा।

इस साल भारत में सूर्यग्रहण नहीं दिखेगा
इस साल 2 चंद्रग्रहण और 3 सूर्यग्रहण होंगे। भारत में दोनों चंद्रग्रहण दिखाई देंगे लेकिन सूर्यग्रहण नहीं दिखाई देगा। इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण 27 जुलाई को है।

19 साल बाद नजर आएगा ब्लू-ब्लड मून
ब्लड-ब्लू मून की स्थिति इससे पहले 1982 में बनी थी।
सुपर ब्लू-ब्लड मून के दिन चंद्रमा सामान्य से 10 फीसदी या इससे ज्यादा बड़ा नजर आएगा। यह 30 फीसदी ज्यादा चमकदार भी दिखाई देता है।
इसके बाद 31 जनवरी 2037 को भी सुपर ब्लू-ब्लड मून नजर आएगा।