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वाराणसी फ्लाइओवर हादसे में 18 की मौत, 4 अधिकारी सस्पेंड, योगी ने किया दौरा

वाराणसी में मंगलवार शाम को बड़ा हादसा हुआ । कैंट रेलवे स्टेशन के समीप एईएन कॉलोनी के सामने निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम मंगलवार की शाम साढ़े पांच बजे सड़क पर गिर पड़ीं।

बीम के नीचे एक महानगर सेवा की बस सहित एक दर्जन वाहन दब गए। रात नौ बजे तक 18 लोगों के मरने की खबर है। 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बीम के नीचे दबे वाहनोें को गैस कटर से काट कर सेना और एनडीआरएफ के जवानों ने 16 शव और छह घायलों को बाहर निकाल लिया है।

घायलों का बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर सहित शहर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हादसे की जानकारी मिलने पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शहर पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी देर रात पहुंचे। अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की।

इधर बीच,  हादसे के बाद यहां पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सेतु निगम के चार अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एचसी तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर राजेन्द्र सिंह और केआर सुदन व अवर अभियंता लालचंद पर यह कार्रवाई की गई है। वाईके गुप्ता की अध्यक्षता में तकनीकी टीम का गठन किया गया है। यह 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।

कैंट-लहरतारा मार्ग पर एईएन कॉलोनी के सामने शाम साढ़े पांच बजे के लगभग निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान सड़क की दाईं लेन पर पिलर के ऊपर रखी 50-50 फीट लंबी दो बीम तेज धमाके और धूल के गुबार के साथ सड़क पर गिर पड़ीं।

तेज धमाका सुनकर वसुंधरा और एईएन कॉलोनी के लोग अपने घरों से बाहर निकल कर भागे। राहगीरों में भी भगदड़ मच गई। हादसे के लगभग आधा घंटे बाद पुलिस पहुंची और तकरीबन डेढ़ घंटे बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ।

जिन बीम के नीचे वाहन दबे थे, उसे हटाने के लिए एक-एक कर नौ क्रेन आईं लेकिन उठा नहीं सकीं। सभी नौ क्रेन की मदद से बीम को हल्का सा उठाया गया तो दो ऑटो, दो बोलेरो, एक कार और एक अप्पे को बाहर निकाल कर महानगर बस को खींचा गया।

इस दौरान देरी से राहत और बचाव कार्य शुरू होने के कारण भीड़ में मौजूद लोगों ने पुलिस-प्रशासन के विरोध में जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों से नोकझोंक हुई। हादसे के बाद इंग्लिशिया लाइन और लहरतारा चौराहे के बीच वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

ये दुर्घटना वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के पास जीटी रोड पर कमलापति त्रिपाठी इंटर कॉलेज के सामने घटित हुई है। मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। पूरे शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

अस्पतालों को अलर्ट मोड पर

हादसे में घायलों की अधिक संख्या को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। कबीरचौरा अस्पताल में डॉक्टरों और कंपाउंडरों की इमरजेंसी टीम तैनात किया गया है। इसके अलावा अस्पतालों में इमरजेंसी के मद्देनजर अतिरिक्ति ओटी की व्यवस्था की गई है। हादसे के कारण उधर जाने वाले वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के कैंट एरिया में हुए दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मदद के लिए दो मंत्रियों को रवाना किया है। घटनास्थल पर बचाव कार्य जारी है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व मंत्री नीलकंठ तिवारी को मदद के लिए भेजा है।

वाराणसी में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के गिरने से हुए दर्दनाक हादसे पर पीएम मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने लिखा कि मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द ही ठीक हो जाएं। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से बात की और मदद करने के निर्देश दिए हैं।

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सीएम योगी ने खोया आपा, कुशीनगर में दी ‘नौटंकी’ बंद करने की चेतावनी

कुशीनगर में गुरुवार को रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना आपा खो बैठे। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह एक दुखद घटना है और इस वक्त नारेबाजी बंद कर दें। मैं अभी भी बोल रहा हूं नोट कर लो। यह नौटंकी बंद करो। दुखद घटना है और हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’

कुशीनगर में एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण हादसे में 13 स्‍कूली बच्‍चों की मौत हो गई। हादसे के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माना कि ड्राइवर ने कान में ईयरफोन लगा रखा था जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

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विपक्ष के बर्हिगमन के बीच विधानसभा में UP-COCA विधेयक पारित

विपक्ष के व्यापक विरोध और सदन से बर्हिगमन के बीच विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध निरोधक विधेयक (यूपीकोका)आज एक बार फिर पारित हो गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधेयक पेश करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिये जरुरी बताया, जबकि विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका जमकर दुरुपयोग किया जायेगा। विपक्ष का कहना था कि विधेयक में कई खामियां हैं, इसलिये इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया जाये। इससे पहले विधानसभा से गत 21 दिसंबर को विधेयक पारित होने के बाद विधान परिषद भेजा गया था।

परिषद ने विधेयक को प्रवर समिति के हवाले कर दिया था। प्रवर समिति से बिना संशोधन के विधेयक परिषद वापस कर दिया गया था। परिषद में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिये सरकार ने आज इसे फिर सदन में पेश किया। विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच यूपीकोका विधेयक पारित हो गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे मंजूरी के लिये राज्यपाल रामनाईक के पास भेजा जायेगा। अगर जरूरी हुआ तो राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी संदर्भित कर सकते है। सरकार का दावा है कि यूपीकोका से भूमाफिया, खनन माफिया समेत अन्य संगठित अपराधों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। सफेदपोशों को बेनकाब करने वाले इस कानून में 28 ऐसे प्रावधान है जो गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) का हिस्सा नही थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपीकोका के जरिये फिरौती के लिये अपहरण,अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री, बाहुबल के बूते ठेकों को हथियाना, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और वन संपत्तियों का दोहन,वन्य जीवों का शिकार और बिक्री, फर्जी दवाओं का कारोबार, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा, रंगदारी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा। इसके जरिये संगठित अपराध करने वाले लोगों की मदद करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।

योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ यह कानून प्रभावी होगा। पांच वर्ष में एक से अधिक मामलों में जिसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होंगें, उन्हीं पर यह कानून लागू होगा। यूपीकोका लगाने से पहले पुलिस महानिरीक्षक या उपमहानिरीक्षक से अनुमोदन लेना जरुरी होगा। इसमें अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले भी इन्हीं अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग रोकने के लिये उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण बनाया जायेगा। इसमें प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। इसके लिये प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया जायेगा। ऐसी ही समिति जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाँ, समाज की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये एक साल में किये गये कार्यों का सिलसिलेवार ब्याैरा दिया।

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जीत के बाद बोले अखिलेश- उनका घमंड टूट गया, उम्मीद है अब भाषा भी बदल जाएगी

अखिलेश यादव में सभी सहयोगी दलों  और जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उन सभी लोगों के सहयोग के बिना यह जीत संभव नहीं थी। यह जीत बहुत बड़ी है। यह उन तमाम लोगों की जीत है, जो गरीब, मजदूर, किसान, दलित और अल्पसंख्यक है।

बीजेपी पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि फूलपुर में तो फूल मुरझा गया। उनका घमंड टूट गया है। उम्मीद है कि अब उनकी भाषा बदल जाएगी। जिन अधिकारियों से हमने काम लिया। उन्हीं पर बीजेपी ने आंख बंद करके भरोषा किया।

कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़े एक सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा कि से संबंधों पर अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस से संबंध बने हुए हैं। नौजवान वो भी हैं, हम भी हैं।

ईवीएम पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ईवीएम में खामिया न होतीं तो जीत और बड़ी होती। उन्होंने बताया कि कई गांवों में ईवीएम के चलते घंटों मतदान नहीं हो सका। कई ईवीएम जब चेक कराई गई तो उसमें वोट पहले से पड़े थे। अखिलेश  ने तंज कसते हुए कहा कि ईवीएम से पूरा गुस्सा नहीं निकला, अगर बैलेट बॉक्स होता तो आवाज सुनने को मिलती और गुस्सा भी पूरा निकलता।

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कभी न चलने वाली सरकारी बंदूकें उगल रही हैं गोलियां, अब तक 1350

यूपी में पिछले 11 महीनों की योगी सरकार में करीब 1350 एनकाउंटर किए हैं. यानी हर महीने सौ से भी ज्यादा एनकाउंटर. इस दौरान 3091 वॉन्टेड अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं जबकि 43 अपराधियों को मार गिराया गया. यूपी पुलिस का दावा है कि मरने वालों बदमाशों में 50 फीसदी इनामी अपराधी थे, जिन्हें पुलिस शिद्दत से तलाश रही थी.

यूपी पुलिस के इन आंकड़ों ने अपराधियों में इस कदर खौफ भर दिया कि पुलिस एक्शन के डर से पिछले 10 महीने में 5409 अपराधियों ने बाकायदा अदालत से अपनी ज़मानत ही रद्द कराई है ताकि ना वो बाहर आएं और ना गोली खाएं. एक तरफ यूपी की सरकारी बंदूकें चलती ही नहीं थी, और अब अचानक वहीं बंदूकें दनादन गोलियां उगल रही हैं.

बदमाशों में एनकाउंटर का खौफ

बीते दिनों शामली के झिंझाना इलाके में एनकाउंटर के डर से हत्यारोपी ने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर किया था. हत्यारोपी ने एसपी अजय पाल शर्मा को एक शपथ पत्र दिया है, जिसमें लिखा है कि वह भविष्य में किसी भी अपराध में शामिल नहीं होंगे.

इनामी बदमाश ने थाने में किया सरेंडर

हापुड़ में 15 हजार इनामी एक बदमाश ने थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया. बदमाश की पहचान अंकित के रूप में हुई है. शामली के कैराना में योगी सरकार के एनकाउंटर का असर देखने को मिला, जहां दो सगे भाई ने अपने हाथ में पोस्टर लेकर घूमते नज़र आए. उस पोस्टर पर लिखा था कि वे लोग अब से अपराध नहीं करेंगे.

यूपी में एनकाउंटर का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 11 महीने के कार्यकाल में अब तक प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के बीच 1350 एनकाउंटर हो चुके हैं. 3091 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. वहीं, 43 अपराधियों को पुलिस ने मार गिराया. इस मामले में पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे आगे रहा.

करीब 800 हिस्ट्रीशीटरों ने लिया शपथ

सीतापुर के एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर हरगांव, सदरपुर और इमिलिया सुल्तानपुर समेत जनपद के लगभग सभी थानों में शपथ दिलाई जा रही है. एसपी आनंद कुलकर्णी ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया कि अब तक जिले के करीब 800 नामी अपराधी और हिस्ट्रीशीटर शपथ लेकर एफिडेविट दे चुके हैं कि वो भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं रहेंगे. उन्होंने बताया कि उनका मकसद इन बदमाशों को समाज की मुख्यधारा में लाना है.

एनकाउंटर पर सवाल

यूपी पुलिस द्वारा लगातार किए जा रहे एनकाउंटर पर सवाल भी उठने लगे हैं. यूपी राज्‍य मानवाधिकार आयोग ने यूपी पुलिस से चार मुठभेड़ से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है. बताया जाता है कि इन मुठभेड़ों में मारे गए लोगों के परिजनों का आरोप है कि यूपी पुलिस ने फर्जी तरीके से एनकाउंटर किए हैं जबकि मारे गए लोगों का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है.

1982 में हुआ था पहला एनकाउंटर

एनकाउंटर यानी मुठभेड़ शब्द का इस्तेमाल हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बीसवीं सदी में शुरू हुआ. एनकाउंटर का सीधा-सीधा मतलब होता है. बदमाशों के साथ पुलिस की मुठभेड़. हिंदुस्तान में पहला एनकाउंटर 11 जनवरी 1982 को मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था.

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Mission 2019 के लिए बनेगा सबसे बड़ा हथियार यूपी इंवेस्टर्स समिट

देश के सबसे बड़े सूबे के तौर पर उत्तर प्रदेश की पहचान होती है। एक कहावत भी है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। लेकिन उत्तर प्रदेश को एक और नाम से जाना जाता है जिसे बीमारू कहते हैं। पीएम मोदी 2014 के चुनाव से पहले अपनी जनसभाओं में कहा करते थे कि एक ऐसा सूबा जो प्राकृतिक संसाधनों से लैस है,एक ऐसी धरती जहां के लोग कुछ कर गुजरने की माद्दा रखते हैं लेकिन नीतियों के अभाव में अदूरदर्शी निर्णयों की वजह से भारत मां का ये हिस्सा विकास की रेस में पिछड़ गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का असाधारण प्रदर्शन रहा और इस बात की उम्मीद जगने लगी कि शायद अब कुछ बदलाव की बयार महसूस होगी। यूपी सरकार अपने कार्यकाल के एक साल पूरा करने से पहले दो दिवसीय इंवेस्टर्स समिट के जरिए ये संदेश देने की कोशिश कर रही है यूपी में अब निवेश सुरक्षित है और उस दिशा में सरकार एक कदम बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

इंवेस्टर्स समिट के पहले दिन 4 लाख 28 हजार करोड़ के एक हजार से ज्यादा करार पर दस्तखत हुए। इन करारों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि देश का दूसरा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को बुंदेलखंड में स्थापित किया जाएगा जिससे ढ़ाई लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकेगा। लेकिन एक सवाल ये भी है कि क्या ये यूपी की सूरत और सीरत को बदलने की कवायद है या 2019 के लक्ष्य को साधने की कोशिश है। इस गूढ़ सवाल का जवाब तलाशने से पहले ये जानना जरूरी है कि पीएम मोदी इन्वेस्टर्स समिट में क्या कुछ कहा।

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दस लाख से अधिक छात्रों ने यूपी बोर्ड परीक्षा छोड़ बनाया नया रिकॉर्ड

यूपी बोर्ड परीक्षा में नया रिकॉर्ड बना है। दस लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा छोड़ दी है। यह आंकड़ा परीक्षा शुरू होने के महज चौथे दिन का है। पिछले वर्षों में पूरी परीक्षा के दौरान अधिकतम साढ़े छह लाख छात्रों ने ही इम्तिहान से किनारा किया। बड़ी संख्या में परीक्षा छोडऩे का कारण नकल पर प्रभावी अंकुश लगना है। इसमें सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, परीक्षा केंद्रों में संसाधन जुटाना और शिक्षा व प्रशासन के अफसरों का सामंजस्य नकलचियों पर भारी पड़ा है।

इसे संयोग ही कहेंगे कि बीते वर्ष योगी सरकार 19 मार्च को सत्तारूढ़ हुई तो उसके चंद दिन पहले (16 मार्च से) ही यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हुई। मंत्रिमंडल गठन व विभाग आवंटन होते परीक्षाएं अंतिम दौर में पहुंच गईं। ऐसे में सरकार उसी समय से अगले वर्ष की परीक्षा तैयारियों में जुट गई। 2018 में परीक्षा शुरू होने की तारीख व विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम तय समय से काफी पहले घोषित किया गया, ताकि परीक्षार्थियों को तैयारी करने का पूरा मौका मिले, फिर परीक्षा केंद्रों के संसाधन व उनके निर्धारण पर फोकस किया गया।

पहली बार केंद्र निर्धारण का कार्य जिला व मंडल स्तर से छीनकर बोर्ड मुख्यालय को सौंपा गया, जहां कंप्यूटर के जरिए केंद्र बनाए गए। इसका यह असर रहा कि केंद्रों की संख्या पिछले वर्षों से करीब ढाई हजार घट गई। सरकार ने परीक्षा की निगरानी को हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य किया। जिन केंद्रों पर छात्राएं अपने स्कूल में परीक्षार्थी बनी वहां अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक सहित नकल रोकने के अन्य प्रभावी इंतजाम किए गए। अपर मुख्य सचिव पिछले कुछ महीनों से लगातार हर कार्य की खुद मानीटरिंग कर रहे थे, पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए वीडियो कांफ्रेसिंग करके नकल रोकने के सख्त निर्देश दिए। इसमें जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक व मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को नकल के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

सरकार के सामूहिक प्रयासों का ही परिणाम रहा कि परीक्षा के पहले दिन से ही नकलची छात्र-छात्राओं ने किनारा करना शुरू कर दिया और महज चौथे दिन ही परीक्षा छोडऩे वालों का आंकड़ा दस लाख पार कर गया है। 10 लाख 44 हजार 619 यूपी बोर्ड के इतिहास में परीक्षा छोडऩे वालों की सर्वाधिक संख्या है। इसमें हाईस्कूल के छह लाख 24 हजार 473 व इंटर के चार लाख 20 हजार 146 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। खास बात यह है कि परीक्षा छोडऩे वालों की संख्या उन्हीं जिलों व केंद्रों पर अधिक है, जो पिछले वर्षों में नकल कराने के लिए कुख्यात रहे हैं।

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योगी सरकार ने पेश किया 11 हजार 3 सौ 88.17 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट

योगी सरकार विधानसभा में आज 2017-18 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया। ये योगी सरकार का पहला अनुपूरक बजट है। योगी सरकार ने अपना पहला अनुपूरक बजट 11 हजार 3 सौ 88.17 करोड़ रुपए का पेश किया है।

बजट की खास बातें-

-अंतरष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के लिए 1.3 करोड़,
आगरा एक्सप्रेसवे के लिए सिम्बोलिक 1000 रुपया
, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के करीब 4 करोड़ रुपए।
-दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के लिए 58 करोड़।
-स्वच्छ भारत के तहत ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण के लिए।
-गन्ना भुगतान के लिए 200 करोड़।
-जेलों में बिजली बिल के भुगतान के लिए 7 करोड़।
-एटीएस, एसटीएफ समेत पुलिस महकमे के लिए 164 करोड़।
-मेडिकल कॉलेजों के लिए 425 करोड़।
-नागरिक उड्डयन विभाग को 200 करोड़।
-स्वच्छ भारत मिशन में 522 करोड़।
-कैलाश मानसरोवर भवन के लिए करीब 11 करोड़।
-चित्रकूट में रामघाट समेत पर्यटन स्थलों के लिए 12 करोड़।
-बनारस में विश्वनाथ मंदिर मार्गो के निर्माण के लिए 40 करोड़।
-अल्पसंख्यको के लिए 84 करोड़।
-प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 1125 करोड़।

अनुपूरक बजट में क्या होगा खास

-योगी सरकार वित्त वर्ष 2017-18 का पहला अनुपूरक बजट सोमवार को पेश करेगी। बजट 12 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा विधानसभा में पेश होने वाले इस बजट में कुछ नई योजनाओं का एलान भी हो सकता है।
-पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, खादी व पर्यटन को मिल सकता है। पैसा केंद्र की योजनाओं से बनने वाली सड़कों के लिए गठित यूपी सड़क निर्माण निगम, खादी ग्रामोद्योग के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से प्रस्तावित नई योजना, नैमिषारण्य विकास, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, कृषि, दुग्ध विकास, पंचायतीराज, आईटी, गन्ना आदि विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर बजट का एलान हो सकता है।
-केंद्रीय योजनाओं के लिए केंद्र से मिली रकम का बजटीय प्रावधान कराने, प्रदेश सरकार की चालू योजनाओं को पूरा करने के लिए जरूरी रकम के बंदोबस्त के साथ आकस्मिक निधि से लिए गए 200 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिपूर्ति से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं।

-बीजेपी सरकार विधानमंडल के दोनों सदनों में अनुपूरक बजट पेश करेगी। विकास योजनाएं के लिए धनराशि का इंतजाम होगा इस अनुपूरक बजट में। योगी सरकार का यह पहला अनुपूरक बजट है। इसमें केंद्रीय योजनाओं के लिए भी बजट की व्यवस्था की गई है।

-डेढ़ दर्जन ऐसी योजनाएं हैं, जहां बजट की दरकार, अनुपूरक बजट में इन योजनाओं के लिए भी बजट की इंतजाम किया जा सकता

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राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा नेता का बयान, ‘सुप्रीम कोर्ट में यह प्रक्रिया चलने दें’

भाजपा नेता राम माधवन ने राम मंदिर के मुद्दे पर अपनी राय देते हुए कहा है कि मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट में ये मामला चल रहा है और इसे चलने देना चाहिए। इस पर बात-विचार और बहस बाद में भी किए जा सकते हैं। बता दें कि भाजपा नेता का यह बयान तब आया है जब आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने इस मुद्दे में अपनी मध्यस्थता की भूमिका की पहल की थी।

गौरतलब है कि, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने की कोशिश की थी लेकिन सुन्नी बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बुधवार को उनके इन प्रयासों को ठुकरा दिया। सुन्नी बोर्ड ने साफ शब्दों में इस मुद्दे में श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता को नकारते हुए कहा कि उन्हें कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

चूंकि कुछ सप्ताह पहले ही श्री श्री रविशंकर ने इस मुद्दे को हल करने के लिए सभी पक्षकारों से मिलने की इच्छा जताई थी। इसी बीच बुधवार को श्री श्री रविशंकर ने इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने लखनऊ स्थित आवास पर भी बुलाया था। दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर बात करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में सूफी और मुस्लिम बोर्ड से मिले।

सोमवार को जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में संबोधित करते हुए श्री श्री रविशंकर ने कहा कि किसी भी मुद्दे को हल करने का एकमात्र उपाय बातचीत करना है। इस दौरान इस मुद्दे में शांति वार्ता के अपने प्रयासों के सकारात्मक परिणाम के लिए वे आश्वस्त दिखे। बता दें कि, पिछले महीने श्री श्री रविशंकर से मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के प्रमुख वसीम रिजवी ने भी कहा था कि उनकी मुलाकात काफी सकारात्मक रही और बोर्ड उनके पहल का स्वागत करता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि राम मंदिर निर्माण 2018 के शुरुआत से शुरु की जा सकती है।

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अयोध्या में CM योगी की दिवाली, दो लाख दीयों की रोशनी में हेलिकॉप्टर से आएंगे राम-सीता और लक्ष्मण

भगवान राम, पत्नी सीता के साथ 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के बाद जब अयोध्या आए तो अयोध्यावासियों ने खुशियों से अयोध्यानगरी को दीपों से सजा दिया और दीवाली मनाई. आपने ये प्रसंग या तो पढ़ा या सुना होगा, लेकिन अब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छोटी दीपावली यानि 18 अक्टूबर को एक बार फिर त्रेता युग के उसी वैभव को अलग तरह से दोहराने जा रहे हैं. इस कार्यक्रम के साक्षी अयोध्यावासियों के साथ-साथ विदेशी सैलानी भी होंगे.

18 अक्टूबर यानि छोटी दीपावली के दिन अयोध्या का मुख्य आकर्षण होगी. राम से जुड़े अलग-अलग काण्ड पर आधारित झाकियां जो अपने भव्य स्वरूप में दिखाई देगी. ट्रकों पर बने मंच पर शोभायमान कुल 11 झाकियां होंगी, जिसके सामने लोक कलाकार संबंधित काण्ड से जुड़ी नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर रहे होंगे.

भगवान राम के स्वागत में उमड़ेगी अयोध्या

यह शोभायात्रा अयोध्या स्थित साकेत महाविद्यालय से दोपहर बाद 2 बजे निकलकर अयोध्या की सड़कों से गुजरती हुई लगभग 3 किलोमीटर के सफर के बाद शाम 4 बजे रामकथा पार्क पहुंचेगी. रास्ते में लोग इन शोभायात्राओं पर पुष्प वर्षा कर रहे होंगे और खुशियां मनाते हुए जयकारे लगा रहे होंगे.

इसके पीछे न सिर्फ अयोध्या के साधू संत दिखाई देंगे बल्कि अयोध्यावासी भी झूमते, गाते और इठलाते हुए खुशियाँ मनाते दिखाई देंगे. रामकथा पार्क में यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और राज्यपाल रामनाईक ही नहीं बल्कि प्रदेश और केंद्र के कई मंत्री भी मौजूद रहेंगे, जो राम-सीता लक्ष्मण का स्वागत और पूजन अर्चन करेंगे. यही पर राम दरबार लगेगा और राम का राज्याभिषेक होगा.

रामजन्म से लेकर लवकुश तक को प्रतिबिंबित करने की कोशिश

कार्यक्रम के लिए अयोध्या की सड़कों को ठीक किया जा रहा है तो रामदरबार भी बनाया जा रहा है. बढ़ी हुई घासों को काटा जा रहा है और इस कदर सजाया जा रहा है कि त्रेता युग के वैभव को प्रतिबिंबित किया जा सके. कुल 11 झांकियां हैं. इसमें रामजन्म से लेकर लवकुश तक का, राज्याभिषेक तक कुल 11 झाकियां हैं, जो अलग-अलग परिवेश में सजाई जाएंगी.

इन झांकियों में जीवंत कलाकार अभिनय करेंगे, इस पर दिन रात काम चल रहा है जो बुधवार तक पूरा हो जाएगा. इस आयोजन से जुड़े आचार्य सत्येन्द्र दास ( मुख्य पुजारी रामलला ) कहते हैं कि जिस समय भगवान राम अयोध्या आए थे, तो उनके ऊपर पुष्प वर्षा हुई थी. उसी प्रकार से यहां पुष्प वर्षा होगी.

त्रेता युग के कालक्रम के दृश्यांकन की तैयारी

दास के मुताबिक ऐसा मालूम होगा कि जैसे साक्षात राम लक्ष्मण और सीता लंका विजय करके अयोध्या आ गए हैं. पूरे अयोध्या के लोग उनके स्वागत के लिए चलेंगे. ऐसा माहौल होगा जैसे भगवान त्रेता युग में आए थे और आने के बाद जो स्वरूप और जो स्थिति रही वही दीपावली के एक दिन पहले छोटी दीपावली के दिन दृश्य दिखाई देगा.

रामकथा पार्क के बाद 5.45 बजे योगी सीधे सरयू तट पर जाएंगे, जहां सबसे पहले सरयू का 15 मिनट तक पूजन होगा. इसके बाद 5100 बत्ती की महाआरती होगी. इसके लिए सरयू तट पर स्टेज बनाया जा रहा है, जिस पर योगी आदित्य नाथ मौजूद रहेंगे. इस दौरान 11 पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार करेंगे.

इसके बाद मुख्यमंत्री राम की पैड़ी पर जाएंगे. वहां दीपोत्सव का कार्यक्रम है. 1 लाख 71 हजार दीपों को प्रज्वलित किया जाएगा और आरती में ‘ॐ जय सरयू माता’ का जाप लगातार होता रहेगा. इसके साथ ही 11 वैदिक ब्राह्मण मंत्रोचार करते रहेंगे, जब तक आरती चलती रहेगी.

5100 दीयों से होगी सरयू की आरती

महाआरती के मुख्य पुरोहित शशिकांत दास ( पुरोहित महाआरती ) बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आना है, जिसमें 15 मिनट तक मां सरयू जी का पूजन और अभिषेक होगा. इसके बाद 5100 दीपों से मां सरयू जी की आरती करेंगे.

कुम्हारों को दिया दो लाख दीयों का ऑर्डर

इसके बाद सरयू तट से सटे 1,71, 000 दीपों को जलाकर एक साथ दीप जलाने का विश्व रिकार्ड बनाने की तैयारी है. इसके लिए 2 लाख दीयों का ऑर्डर दिया जा चुका है, जिसके निर्माण के लिए बड़ी संख्या में कुम्हार लगे हैं और घर-घर दीये बनाए जा रहे हैं. कुम्हार इससे उत्साहित तो है ही साथ ही उन्हें इस बात की खुशी भी है कि वह त्रेता युग के इस महाआयोजन में भागीदार बनने जा रहे है.

दीये बनाने का काम करने वाले विनोद प्रजापति ने बताया कि 2 लाख दीयों को ऑर्डर है इसमें 50 ग्राम तेल आना चाहिए. इन दीयों को योगी आदित्यनाथ जलाएंगे. इसमें से 1 लाख दीये पहुंचा दिए हैं और 1 लाख कल तक पहुंचा देंगे.

18 अगस्त को कुछ ऐसा होगा अयोध्या का नजारा

यूँ तो सरयू में दीपदान भी होता है और अयोध्या के मंदिर हो या घर सभी सजाये भी जाते हैं, लेकिन इस बार अयोध्या रोशनी में नहाई नजर आने वाली है. कुछ इस तरह जैसे किसी उत्सव की उन्मुक्तता में डूबी हो.

फैजाबाद हवाई पट्टी से उड़ान भरेंगे भगवान राम

राम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ फैजाबाद हवाई पट्टी से हेलिकॉप्टर में सवार होकर सीधे अयोध्या के रामकथा पार्क पहुंचेंगे. जहां खड़ाऊं लेकर योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल रामनाइक उनकी अगवानी करेंगे. उसके बाद उनका पूजन अर्चन होगा और बाकायदा रामदरबार लगेगा और उनका राज्याभिषेक किया जाएगा.

यह सब उसी तरह दिखाई देगा जैसे त्रेता युग में लंका विजय के बाद भगवान राम के पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचने पर हुआ था. इस सबको देखते हुए सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था भी की गई है. सरयू में जल पुलिस की टुकड़ियां गश्त करती दिखाई देंगी तो सड़कों पर पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान गश्त करेंगे.

सरयू के घाट पर पौने 2 लाख दीये जलाने की तैयारी

इस कार्यक्रम का शुभारम्भ दिन के 2 बजे शोभा यात्रा से होगा जो 4 बजे रामकथा पार्क पहुंचेगी, जहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल स्वागत करेंगे. मंच पर लाभार्थियों के कई कार्यक्रम होंगे, आवास, बिजली कनेक्शन और कुछ बच्चों और महिलाओं को वस्त्र और उपहार भी दिया जाएगा.

इसके बाद 6 बजे के करीब घाट पर सरयू आरती के लिए जाएंगे. मुख्यमंत्री के आदेश पर रोज आरती का कार्यक्रम हो रहा है. इसके ही वृहद रूप में लगभग पौने 2 लाख दिए जलाने का कार्यक्रम है.

योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम का सबसे खास पहलू त्रेता युग के उस दृश्य को अवतरित करना है, जिसमें भगवान राम लंका विजय के बाद भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ अयोध्या पहुंचे थे और भाई भरत उनकी खड़ाऊं लेकर अगवानी को दौड़े थे और फिर उनका राजतिलक किया गया था.

भरत की भूमिका में होंगे CM योगी

इस बार भी पुष्पक विमान की तरह ही हेलिकॉप्टर होगा, जो फैजाबाद हवाई पट्टी से राम-लक्ष्मण और सीता को लेकर सीधे अयोध्या के रामकथा पार्क पहुंचेगा, जहां भरत की जगह योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल रामनाइक उनकी अगवानी करेंगे.

समय कुछ इस तरह रखा गया है कि 18 अक्टूबर को शाम 4 बजे जैसे ही योगी आदित्यनाथ फैजाबाद हवाई पट्टी पर उतरने के बाद सड़क मार्ग से अयोध्या के रामकथा पार्क पहुंचेंगे. वैसे ही साकेत से निकली शोभा यात्रा की रामलीला झाकियां भी पहुंचेंगी.

खड़ाऊं लेकर अगवानी करेंगे योगी आदित्यनाथ

अभी योगी इन शोभा यात्राओं का निरीक्षण ही कर रहे होंगे कि तभी फैजाबाद हवाई पट्टी से राम-लक्ष्मण और सीता को लेकर हेलिकॉप्टर सीधे रामकथा पार्क पहुंचेगा, जहां योगी खड़ाऊं के साथ उनकी अगवानी करेंगे.