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खाली समय का करें उपयोग, YouTube देखकर ऐसे कमाएं पैसे

अगर आपको यूट्यूब वीडियो देखना पसंद है तो आप इस शौक के जरिए पैसा भी कमा सकते हैं। आपका यह शौक औसतन आपको 20 से 30 हजार तक की कमाई करवा देगा। ध्यान रहे ऑनलाइन साइट्स सेकंडों के हिसाब से पेमेंट करती हैं। ऐसे में आप जितने ज्यादा वीडियोज देखेंगे, उतना ही ज्यादा आपको फायदा होगा। इसलिए आप अपने दिन के कुछ खाली घंटे निकालकर ये काम करें। जानिए कौन सी साइट देती हैं वीडियो देखने का पैसा।

पेड2यूट्यूब (paid2youtube): जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस साइट पर आपको सबसे पहले खुद को रजिस्टर्ड करवाना होगा। यहां पर 30 सेकंड का यूट्यूब वीडियो देखने और उस पर कमेंट करने के पैसे मिलते हैं। यहां आप 200 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। आप यह काम एक साथ और कुछ-कुछ देर बाद समय निकालकर भी कर सकते हैं। आपके खाते में एक बार 670 रुपए की रकम जमा होने के सात दिन बाद पेपाल अकाउंट से आपको पेमेंट कर दी जाती है।

स्वैगबक्स (swagbucks): यहां भी आपको सबसे पहले अपना अकाउंट बनाना होगा। यहां पर आप सर्वे के जरिए भी कमाई कर सकते हैं। आपकी ओर से किए गए हर क्लिक और वीडियो देखने पर स्वैगबक्स आपको एक एसबी से लेकर 30 एसबी तक प्वाइंट्स देता है। 500 एसबी प्वाइंट्स पर आपको 250 रुपए का फ्लिपकार्ट और एमेजन का गिफ्ट कार्ड दे दिया जाता है।

यू-क्यूब्ज (you-cubez): यहां पर भी आपको सबसे पहले साइन अप करना होगा। यानी अपना अकाउंट बनाना होगा। इस एजेंसी पर प्रति क्लिक आपको 0.005 सेंट का भुगतान किया जा सकता है। यानी आप इस साइट पर अगर एक दिन में 400 बार क्लिक करते हैं तो आप 134 रुपए प्रति घंटे तक की कमाई कर सकते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह एक एडवरटाइजिंग एजेंसी की साइट है।

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बेहद रोमांचक रहा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव। देखें राहुल के सवालों पर प्रधानमंत्री मोदी के जवाब!

आइए देखते हैं एक विश्लेषण जो दर्शाता है राहुल जी ले हर तीर को जो उन्होंने भाजपा पर छोड़े तथा मोदी जी के जवाब जिन्होंने संसद में हंगामा मचा दिया,

(सौजन्य: Zee News)

हालांकि परिणाम वही हुआ जो सबको मालूम था, भाजपा समर्थकों की संख्या घटने की जगह बढ़ गयी और शिव सेना के समर्थन के साथ ही एन डी ए सरकार को 325 सांसदों का साथ मिला।

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फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को पहुंचाएगा फायदा प्राइवेसी लॉ!

यूरोप में अगले माह एक नया नियम का प्रस्ताव आने वाला है, जिसके तहत प्राइवेट लोगों के हाथ में लोगों के निजी डाटा को जाने से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

इस नए नियम के तहत कंपनी डाटा शेयर करने से पहले उपभोक्ता से इसके लिए इजाजत लेगी। सरकार के इस कदम से जहां इंटरनेट पर बड़ी कंपनियों का वर्चस्व खत्म होगा। वहीं छोटी कंपनियों को भी फायदा होगा। हाल के वर्षों में कुछ छोटी कंपनियों ने निजता के नियमो का सम्मान किया है, जबकि बड़ी कंपनियों की ओर से हमेशा इन नियमों की अनदेखी की गई है।

टोरंटो विश्वविद्याल के मार्केटिंग प्रोफेसर एवी गोल्डफार्ब ने प्रतिस्पर्धा पर गोपनीयता नियमों के प्रभावों का अध्ययन किया। गोल्डफार्ब वर्ष 2013 की एक रिपोर्ट के सह-लेखक भी थे, जिसमें कहा गया था कि गोपनियाता से बाजार की प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर होगा क्योंकि उपभोक्ता से किसी चीज की इजाजत लेना एक छोटी कंपनी की लागत बढ़ा सकता है। ऐसे में ये स्टार्टअप के लिए नुकसानदायक होगा।

फेसुबक के मुताबिक एक राजनीतिक रिसर्च करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करीब 87 मिलियन यूजर्स की गोपनीय जानकारी हासिल करके उसका उपयोग किया। इसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस की ओर से मार्क जुकरबर्ग को निशाना बनाया गया। गूगल की वीडियो सर्विस यूट्यूब को लेकर भी कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं।

मॉडल की जांच कर सकेंगे दूसरे देश

यूरोप और अमेरिका की तरह ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश प्राइवेसी को लेकर फेसबुक औऱ गूगल जैसी कंपनियों के विज्ञापन आधारित मॉडल की जांच कर सकती है। अमेरिका के कानून निर्माताओं ने इस माह जुकरबर्गक की संसद में गवाही के दौरान सिलिकॉन वैली को गोपनियता के मुद्दे पर ज्यादा विनियमित बनाने पर जोर दिया। यूरोप में ऐसा ही एक प्रयोग सफल रहा है, जब वर्ष 2014 में वहां की उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लोगों की इच्छा के मुताबिक उनके कंटेट को ऑनलाइट होने से हटाया जा सकेगा।

नहीं पड़ा व्‍यापार पर असर

इसके अलावा वर्ष 2011 के यूरोपियन कानून बेबसाइटों की ओर से लोगों को कूकीज के बारे में जानकारी देने को कहा गया, जिससे कि वो ब्राउजिंग हिस्ट्री को सुरक्षित रखा जा सके और कोई इसका दुरुपयोग न कर सके। इसके बाद पॉपअप वार्निंग को लेकर काम किया गया। इसी के साथ आज के दौर में डेटा की गोपनियता के बीच फेसबुक और गूगल के उपयोग को कम किया जा रहा है। फेसबुक की ओर से कहा गया कि कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले से उनके व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है, जबकि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने कहा इस तिमाही में उनके कर संग्रह में 26 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी कंपनियां

यूरोप में डेटा रेग्यूलेशन को लेकर लाए जा रहे कानून को ‘द जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन’ का नाम दिया गया है। इस कानून के तहत टेक कंपनियों की ओर से यूजर्स के डेटा कलेक्शन, स्टोर और उनके प्रयोग पर कंट्रोल रखा जा सकेगा। यह नया नियम 25 मई से प्रभाव में आएगा। इसके बाद टेक कंपनियों को बताना होगा कि उन्होंने लोगों का डेटा किस तरह से प्राप्त किया है, कहां प्रयोग किया है, और कहां सुरक्षित किया है। ऐसे में कंपनियां उपभोक्ताओं के समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी।

कंपनियां होंगी मजबूत

कुछ लोगों का मानना है कि प्राइवेसी के नियन बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले होंगे। लेकिन छोटी कंपनियों को ये प्रतियोगिता से बाहर कर देंगे। लेकिन पेरिस की एक स्टार्टअप कंपनी के सीईओ की मानें तो डेटा प्रोटेक्शन के नए नियम से कंपनी मजबूत होगी क्योंकि उनका मूल संपत्ति ग्राहक का विश्वास है। गोपनियता कानून के बाद टारगेटेड विज्ञापनों को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी फेसबूक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां फायदे में रहेगी, क्योंकि विज्ञापन देने वाले ज्यादा ऑडियंस उसकी ओर रुख करेंगे। ऐसे में फेसबुक और गूगल की यूट्यूब जैसी कंपनियों को ज्यादा विज्ञापन मिलेगा, जिनके पास क्रमश: 2.2 मिलियन और 1.5 बिलियन मासिक उपभोक्ता हैं।

यूजर्स देंगे सहमति

यूरोपीय डेटा संरक्षण पर्यवेक्षक जोवोवानी बुट्टारेली के मुताबिक गूगल और फेसबुक की निगरानी आयरिश डेटा अथॉरिटी की ओर से की जाएगी, उनके यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय को अलग तरह से ट्रीट करने की बात कही। गूगल प्राइवेसी इंजीनियर योनातन जुंगर के मुताबिक बड़ी कंपनियां डेटा को उपयोग करने के लिए शर्त जोड़ सकती हैं, जबकि छोटी कंपनियां ऐसी शर्त नहीं जोड़ पाएंगी। जैसा कि पिछले दिनों फेसबुक ने वैश्विक स्तर पर उपयोगकर्ताओं से नया सहमति फार्म भरवाना शुरु किया है, जिसके तहत थर्ड पार्टी को उपभोक्ता की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक से इसकी इजाजत लेनी होगी।

नई चुनौती

गोपनियता के आलोचकों ने फेसबुक के नए सहमति फार्म की चुनौती दी है, उनके मुताबिक वे उपयोगकर्ताओं की सूचनाओं को व्यापक रुप में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। न्यू अमेरिका के ओपन टेक्नोलॉजी इंसटीट्यूट के एक वरिष्ठ सलाहकार बेन स्कॉट के मुताबिक नए कानून जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन (जीडीपीआर) को लेकर मेरी चिताएं हैं। मैं उन लोगों को लेकर चिंतित हूं, जो जीडीपीआर में काफी कुछ निवेश करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोपनियता कानून कितना सफल होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस तरह से लागू किया गया है।

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First Look of Sanju

One man
Many lives
Presenting the first look of Rajkumar Hirani’s keenly-awaited movie… Ranbir Kapoor as #Sanju… #Biopic #SanjayDutt #FoxStarStudios #VidhuVinodChopra #RajkumarHirani

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रोहित शर्मा की ऐतिहासिक उप्लब्धि! जड़ा तीसरा दोहरा शतक